छत्तीसगढ़ का बाल जीवन ज्योति बालगृह समाज व परिवार से उपेक्षित बच्चों का जीवन संवारने का प्रशंसनीय काम कर रहा है.

मानसिक रूप से विकलांग मीना ऐसी बच्ची है जो अपने घर में आने वाले हर परिचित, अपरिचित व्यक्ति से लिपटचिपट जाती है. वह उस शख्स से तब तक लिपटी रहती है जब तक वह आगंतुक वहां रहता है. दरअसल, इस तरह से मीना अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए हर आने वाले से कहती है कि मुझे प्यार कीजिए, मुझे प्यार से सहलाइए.

मीना जैसे न जाने कितने बच्चे समाज व परिवार की उपेक्षा के शिकार होते हैं. यही वजह है कि ये प्यार के लिए बेहद तरसते हैं. वे प्यार की चाह में हर किसी को हसरतभरी निगाह से ताकते हैं, उन से लिपटते हैं, उन्हें छूते हैं. इस एहसास से कि शायद उन्हें भी बदले में भरपूर स्नेह और अपनापन मिले.

छत्तीसगढ़ के रायपुर की एक जगह बाल जीवन ज्योति बालगृह ऐसे बच्चों की शरणस्थली है. मीना यहीं रहती है. मीना जैसे करीब 23 बच्चों की मानसिक विकलांगता को यहां कम करने का प्रयास किया जा रहा है.

ऐसे बच्चों को पिछले 9 वर्षों से प्रशिक्षित कर रही सीता साहू कहती हैं कि ये बच्चे कठोर भाषा नहीं, सिर्फ और सिर्फ प्यार की भाषा समझते हैं. प्रेम से ही इन्हें काबू कर कुछ सिखाया व पढ़ाया जा सकता है.

कठिनाइयां कम नहीं

बाल जीवन ज्योति संस्था की सुप्रिटैंडैंट संगीता जग्गी कहती हैं, ‘‘ऐसे बच्चों, खासतौर से लड़कियों, की परवरिश में कई तरह की कठिनाइयां आती हैं. लड़कियों को पीरियड के समय कुछ समझ नहीं आता. उन के कपड़े खराब हो जाते हैं. इन की सारी चीजों को केयरटेकर को समझना पड़ता है और उन्हें संभालना पड़ता है. लड़कियों की सुरक्षा पर हमें खास ध्यान रखना पड़ता है.’’

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