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विदेश यात्रा पर जा रहे हैं तो डाउनलोड करें यह 5 ऐप्स, नहीं होगी कोई दिक्कत

अगर आप विदेश यात्रा के सुहाने सफर पर जा रहे हैं ये जाने का प्लान कर रहे हैं तो ये 5 ऐप्स आपके लिए बेहद खास साबित हो सकते हैं. इनकी सहायता से आप टिकट के दाम, खाने से लेकर मौसम तक की तमाम जानकारी ले सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि ये कौन से खास ऐप हैं

ट्रैवल ऐप

अगर आप विभिन्न जगहों पर घूमने के शौकीन हैं तो ये ऐप आपके लिए काफी काम का है. इस ऐप में मौसम, टिकट, खाना आदि सभी जानकारियां उपलब्ध हैं.

स्काई स्कैनर

यदि आप उचित दाम पर किसी देश की यात्रा करना चाहते हैं और टिकट के लिए आपके पास कम पैसे हैं तो ये ऐप आपके लिए बड़े काम का है. इससे आप विभिन्न साइट्स पर टिकट के दामों की तुलना आसानी से कर सकते हैं. इसकी स्पीड भी काफी अच्छी है.

एक्यू वैदर

अलग-अलग देशों की यात्रा करने वाले लोगों के लिए ये ऐप भी बहुत कमाल का है. किसी भी जगह को घूमने से पहले आप इल ऐप पर उस जगह के मौसम के बारे में जान सकते हैं. ताकि आप उचित तैयारी के साथ वहां जा सकें.

औल करंसी कनवर्टर

विदेश यात्रा के दौरान आपको पैसों का हिसाब रखने के लिए औल करंसी कनवर्टर ऐप मददगार साबित होगा. यह एक प्रकार का करंसी कनवर्टर ऐप है. इससे आप जान सकते हैं कि आप किस देश की मुद्र में कितने पैसों की अदायगी कर रहे हैं.

हैपी काओ

फ्री और पेड दो वर्जन में उपलब्ध यह ऐप शाकाहारी लोगों के लिए बड़े काम का है. अकसर विदेश यात्रा के दौरान शाकाहारी लोगों को खाने से संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ता है. लेकिन इस ऐप की सहायता से आप दुनिया के किसी भी देश में आसानी से शाकाहारी रेस्टोरेंट, वहां के खाने का मेन्य और खाने की कीमत आदि जानकारियां ले सकते हैं.

देश का पहला हाइब्रिड स्कूटर 23 अगस्त को होगा लौन्च, ये होंगे फीचर्स

टीवीएस (TVS) मोटर लगातार टू-व्हीलर सेगमेंट में बेहतर प्रोडक्ट पेश कर रही है, NTorq की कामयाबी के बाद अब टीवीएस भारत का पहला इलेक्ट्रिक हाइब्रिड स्कूटर 23 अगस्त को लौन्च करने जा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी के इस नए स्कूटर का नाम TVS iQube Hybrid होगा. इस हाइब्रिड स्कूटर को पहली बार 2014 औटो एक्स्पो में पेश किया गया था. इसमें आईसीई यानी इंटरनल कंबशन इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर का मिश्रण देखने को मिल सकता है. बता दें कि 2010 में कंपनी ने इसे शोकेस किया था और अब लम्बे इंतजार के बाद इसे बाजार में उतारने का फैसला कर लिया गया है.

ऐसी खबरें भी हैं कि टीवीएस ने आईक्यूब हाइब्रिड स्कूटर का नाम भी नए ट्रेडमार्क लोगो के साथ रजिस्टर करा लिया है. टीवीएस मोटर कंपनी इस साल कई नए प्रौडक्ट भारत में लौन्च करने वाली है. इनमें नई अपडेटेड RTR 160 4V, Ntorq125 स्कूटर और Apache RR310 बाइक शामिल है.

इलेक्ट्रिक हाइब्रिड स्कूटर के फीचर्स

इंजन: TVS iQube में 110cc के पेट्रोल इंजन के साथ एक इलेक्ट्रिक मोटर लगी है. मोटर में 150Wh और 500Wh के दो विकल्प मिलेंगे. ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से इनका चुनाव कर सकते हैं.

डिजाइन: औटो एक्सपो में कंपनी ने जैसा मौडल शो केस किया था ठीक वैसा लौन्च नहीं होगा क्योकिं वो एक कांसेप्ट मौडल था इसलिए अब जो मौडल लौन्च होगा जो काफी स्टाइलिश माना जा रहा है. कयास लगाए जा रहे हैं कि कुछ अपडेट इसके डिजाइन में देखने को मिल सकते हैं. इसका लुक्स ग्राहकों को पसंद आएगा, खास तौर पर यूथ को यह टारगेट करेगा.

माइलेज

एक लीटर पेट्रोल में यह स्कूटर 70 किलोमीटर प्रति लीटर से अधिक माइलेज दे सकता है.

कीमत

कीमत की बात करें तो TVS इसकी कीमत अपने बाकी स्कूटर्स के मुकाबले कुछ कम रख सकती है. माना जा रहा है कि इसके पीछे भारत सरकार द्वारा दी जारी फेम सब्सिडी का बड़ा रोल हो सकता है.

न्यू इंडिया ऐश्योरैंस प्रीमियर मैडिक्लेम पॉलिसी के फायदे

जब बीमारियों का खौफ आप को पूरी तरह से तोड़ देता है और रिश्तेदार भी साथ देने से कतराने लगते हैं तो बीमा सुरक्षा ही आप के काम आती है. आप निश्चिंत हो कर अपना इलाज कराते हैं और अपनी जमा धनराशि को हाथ लगाए बगैर ही स्वस्थ हो कर घर लौटते हैं.

वैसे सामान्य रूप से माना जाता है कि काफी रईस लोगों यानी हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल्स (एचएनआईएस) को स्वास्थ्य बीमा लेने की जरूरत ही नहीं होती. वे अपना इलाज खुद कराने में सक्षम होते है. और उन की जरूरतों को ज्यादातर पॉलिसीज कवर ही नहीं करतीं.

मगर हाल ही में न्यू इंडिया ऐश्योरैंस ने 1 करोड़ का प्रीमियर मेडिक्लेम कवर लौंच किया है. जिस के तहत 6 सदस्यों को बीमा कवरेज मिल जाएगा.

यह पॉलिसी गंभीर बीमारियों और अस्पताल के खर्चों के साथ होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक और यूनानी इलाज के खर्चों को भी कवर करती है. 1 करोड़ के बीमा के अलावा यह पॉलिसी ऐसी बहुत सी अतिरिक्त सुविधाएं भी देती है जो किसी दूसरी मेडीक्लेम पॉलिसी में उपलब्ध नहीं है. मसलन कंजीर्स सर्विसेज, डाइट काउंसलिंग और सेकंड ओपिनियन वगैरह शामिल हैं.

इस प्रीमियर मेडीक्लेम पॉलिसी में मोतियाबिंद, मानसिक रोगों और मनोदैहिक विकारों व मोटापे से जुड़ी समस्याओं के इलाज के खर्चों को भी शामिल किया गया है.

पॉलिसी की खास विशेषताएं

कस्टमर 2 विकल्पों में से कोई भी एक विकल्प चुन सकता है:

1. प्लान ए- 15 लाख और 25 लाख.

2. प्लान बी- 50 लाख और 1 करोड़.

प्लान ए के तहत 2 लाख तक की गंभीर बीमारियों को कवर किया गया है. जबकि प्लान बी के तहत यह कवरेज 5 लाख की है.

प्लान ए के तहत आप को हर रोज 3 हजार हौस्पीटल कैश चुकाने के लिए मिलते हैं जबकि प्लान बी के तहत यह राशि 4 हजार है.

बीमा की राशि का 20 प्रतिशत हिस्सा आयुर्वेदिक होम्योपैथिक और यूनानी इलाज के लिए दिया जाएगा.

प्रत्येक 2 कंटीनुअस क्लेम फ्री ईयर्स के बाद ओपीडी ट्रीटमैंट कवर किया जाएगा. प्लान ए के तहत यह राशि क्व5 हजार और प्लान बी के तहत 10 हजार होगी. मैटरनिटी कवर, प्लान ए के तहत 50 हजार और प्लान बी के तहत 1 लाख रहेगा.

न्यूबौर्न बेबीज को भी उन के जन्म से ले कर पॉलिसी के ऐक्सपायर होने की डेट तक चोटचपेट या बीमारियों के दौरान सुरक्षा कवर मिलेगा.

इस बीमा पॉलिसी के अंतर्गत प्लान ए के तहत एचआईवी/एड्स के लिए 2 लाख और प्लान बी के तहत 5 लाख तक का सुरक्षा कवच प्राप्त होगा.

बौलीवुड सितारों के लिए ये है आजादी का मतलब

मनोज बाजपेयी किस पर लगाम चाहते हैं?

मशहूर अभिनेता मनोज बाजपेयी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर सोशल मीडिया में जो कुछ हो रहा है, उसे सही नहीं मानते. वह कहते हैं-‘‘इन दिनों हर विषय पर बात होती है. आप सोशल मीडिया पर चले जाइए. आपको देश से जुडे़ तमाम मुद्दों पर बकवास देखने को मिलेगी. आज की तारीख में बातें इतनी हो रही हैं कि आप कल्पना नहीं कर सकते. जिसको जिसकी बात पसंद नहीं आती है, वह उसे गरिया भी रहा है. धमकी भी दे रहा है. पता नहीं क्या क्या कर रहा है? हां! जिस पर सबसे ज्यादा बात होनी चाहिए, वह है‘-बोलने की आजादी’.

अफसोस की बात है कि सोशल मीडिया की वजह से हमारे बोलने की आजादी पर सवाल उठ रहे हैं? आज कोई भी बेरोजगार आदमी अपने घर पर बैठकर यदि थोड़ा भी काम करने की कोशिश कर रहा हैं, तो दूसरी तरफ एक आलसी आदमी जो कुछ काम नहीं करना चाहता, वह हाथ में मोबाइल लेकर ट्वीटर पर उसी को गरिया देता है, उसे धमका देता है. मजेदार बात यह है कि यह गरियाने वाला, दूसरों को गाली देनेवाला, दूसरों को धमकाने वाला इंसान बच भी जाता है. सबसे पहले आजादी के अवसर पर इस पर लगाम लगाने की जरूरत है.’’

कुबरा के अनुसार कब सही आजादी मिलेगी?

‘रेडी’, ‘सुल्तान’, ‘जोड़ी ब्रेकर’ सहित कई फिल्मों में छोटे छोटे किरदार निभाने के बाद नेटफ्ल्क्सि पर प्रसारित वेब सीरीज ‘‘सेक्रेड गेम्स’’ में ‘फ्रंट न्यूडिटी’ का दृश्य अंजाम देकर चर्चा बटोर रही अभिनेत्री कुबरा सेठ के अनुसार हम असली आजादी से काफी दूर हैं.

वह कहती हैं-‘‘हम आगे बढ़ रहे हैं. हम सीख रहे हैं. हम गिर कर संभल रहे हैं. पर हम आजाद नहीं है. हम अपने दिमाग की बाधाओं में ही उलझे हुए हैं. जब हम एक दूसरे की इज्जत करेंगे, मान सम्मान करेंगे, तो ही हमारा देश आगे बढे़गा. जब लोग अपनी जेंबे भरना बंद करेंगें, तब देश आगे बढ़ेगा. जब हम सब एक दूसरे से प्यार करेंगे, एक दूसरे से मर्यादित भाषा में बात करेंगे, तो देश उन्नति करेगा. जब हम उटपटांग बकवास करना बंद करेंगे, जब हम लोगों के दिलों के साथ खेलना बंद करेंगें, तब हम सही मायने में आजादी पाएंगे. यह बहाना गलत है कि हमारे देश की आबादी बहुत है. चीन की आबादी हमारे देश से ज्यादा है, फिर भी वह चीन हमसे ज्यादा प्रगतिशील है.’’

राजनीति में भ्रष्टाचार खत्म होने पर ही आजादी है : सोनाक्षी सिन्हा

आजादी की 71वीं वर्षगांठ की चर्चा करते हुए सोनाक्षी सिन्हा कहती हैं-‘‘हमने अब तक बहुत कुछ पाया है, काफी कुछ किया है. पर अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है. आज की तारीख में लोग इतने समझदार हो गए हैं कि हर किसी के पास अपने देश को बेहतर बनाने को लेकर कोई न कोई नयी आइडिया कोई न कोई सुझाव है. मेरी राय में यदि हर किसी को मौका दिया जाए तो बहुत कुछ हो सकता है.

सबसे पहली जरूरत है राजनीति में सफाई हो. सबसे ज्यादा गंदगी वहीं हैं. दूसरा भ्रष्टाचार खत्म होना चाहिए. स्वच्छता अभियान तेजी से बढ़ना चाहिए. हमारे प्रधानमंत्री ने स्वच्छता अभियान शुरू तो किया है, पर उस पर अमल नहीं हो रहा है. अब तक बहुत कुछ बदलाव आना चाहिए था, पर हम जिस तरह से इंटरनेट पर गंदगी की तस्वीरें देखते हैं, उससे हमारा सर शर्म से झुक जाता है. यह बहुत दुःखद है कि आज भी हर जगह प्लास्टिक व अन्य गंदगी मौजूद है. ’’

आज ही के दिन सचिन ने लगाया पहला टेस्ट शतक, ब्रैडमैन ने खेली आखिरी पारी

आज 14 अगस्त है और आज का दिन भारतीय क्रिकेट के इतिहास में काफी महत्व रखता है. आज ही के दिन 1990 में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर ने 17 साल की उम्र में अपना टेस्ट शतक लगाया था. उन्होंने मैनचेस्टर में इंग्लैंड के खिलाफ 119 रनों की पारी खेली थी. इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए ग्राहम गूच, माइकल आर्थटन और रौबिन स्मिथ की सेंचुरी की बदौलत 519 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था.

भारत की शुरुआत अच्छी नहीं रही. रवि शास्त्री और नवजोत सिंह सिद्धू की सलामी जोड़ी सस्ते में आउट हो गई. इसके बाद मोहम्मद अजहरुद्दीन के 179 और संजय मांजरेकर के 93 ने भारत को मजबूती प्रदान की. सचिन ने भी पहली पारी में 68 रन बनाए. भारत का स्कोर 432 तक पहुंचा.

इंग्लैंड ने अपनी दूसरी पारी 320/4 पर घोषित कर दी. एलन लैंब ने 109 रन बनाए. भारत के सामने दूसरी पारी में 408 रनों का लक्ष्य था. भारतीय टीम ने दूसरी पारी में भी नियमित अंतराल पर विकेट खोए. 183 के स्कोर पर उसके छह बल्लेबाज पविलियन लौट चुके थे लेकिन सचिन (119) ने मनोज प्रभाकर (67) के साथ मिलकर मैच ड्रा करवाने में अहम भूमिका निभाई.

यह सचिन के शतकों के शतक की शुरुआत थी. टेस्ट क्रिकेट में सचिन ने 51 और वनडे इंटरनैशनल में 49 शतक लगाए. टेस्ट में सचिन का बेस्ट स्कोर 248 नौट आउट है. यह उन्होंने 2004 में बांग्लादेश के खिलाफ ढाका में बनाया था. वहीं ODI में दोहरा शतक लगाने वाले वह पहले पुरुष क्रिकेटर भी थे. 2010 में ग्वालियर में साउथ अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने 200 रनों की नाबाद पारी खेली थी.

14 अगस्त यानी आज ही के दिन 1948 को सर डान ब्रैडमैन टेस्ट क्रिकेट में अपनी आखिरी पारी में ओवल के मैदान पर शून्य पर बोल्ड हो गए थे. इसके साथ ही टेस्ट क्रिकेट में उनका बल्लेबाजी औसत 99.94 रहा.

ब्रैडमैन जब बल्लेबाजी करने उतरे तो उनका बल्लेबाजी औसत 101.39 था. उन्होंने पहली गेंद को आराम से खेला. लेग स्पिनर एरिक हौलिस की अगली गेंद पर वह चूक गए और एक गेंद जो शायद गुगली थी, पर वह बोल्ड हो गए. अपनी आखिरी पारी में वह खाता भी नहीं खोल पाए. बता दें कि ब्रैडमैन को 100 के बल्लेबाजी औसत और 7000 टेस्ट रन के लिए सिर्फ चार रनों की जरूरत थी लेकिन आज के दिन वह पूरा न हो सका.

फुटबौल के बारे में क्या ये 10 बातें जानते हैं आप

फुटबॉल या सॉकर दुनिया के बेहद लोकप्रिय खेलों में से एक है. जिस तरह क्रिकेट के लिए लोग दीवाने हैं उसी तरह दुनिया भर में सॉकर के दीवाने हैं. आलम ये है कई दफा सॉकर के मैच के दौरान दर्शकों के बीच के झगड़े के कारण कई लोगों की जानें भी गई हैं.

आइए जानते हैं फुटबॉल से ही जुड़ी कुछ रोचक बातें-

1. चीन की देन है फुटबॉल

सबसे पहले चीन के बाशिंदों ने फुटबॉल खेलना शुरु किया. चीन में ‘कुजू’ नामक खेल फुटबॉल से काफी मिलता-जुलता है. इसे तीसरे ईसा पूर्व से दूसरे ईसा पूर्व के बीच खेला जाता था.

2. दुनिया में सबसे लोकप्रिय

भारत में क्रिकेट की दीवानगी और इससे दूसरे खेलों की धुंधली होती छवि किसी से नहीं छिपी है. पर हैरान करने वाली बात ये है कि दुनिया में फुटबॉल ही सबसे ज्यादा खेला और देखा जाता है. फुटबॉल वर्ल्ड कप को 1 बीलियन से भी ज्यादा लोग टीवी पर देखते हैं.

3. सबसे बड़ा फुटबॉल टूर्नामेंट

1999 में दुनिया का सबसे बड़ा फुटबॉल टूर्नामेंट आयोजित किया गया. दुनिया के सबसे बड़ा फूटबॉल टूर्नामेंट बैंकॉक लीग सेवन-अ-साइड कंपीटिशन में 5,098 टीमों ने हिस्सा लिया था. इस टूर्नामेंट में 35,000 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था. आयोजकों की दाद देनी पड़ेगी.

4. किसी खिलाड़ी द्वारा एक मैच में सबसे ज्यादा गोल

फुटबॉल का कोई भी मैच बहुत ही दिलचस्प होता है. कई बार तो पूरे मैच में कोई भी खिलाड़ी गोल नहीं कर पाता और कई बार एक ही मैच में गोल की बरसात हो जाती है. एक ही मैच में सबसे ज्यादा गोल करने का रिकॉर्ड फ्रांस के स्टीफन स्टेनिस के नाम दर्ज है. स्टीफन ने यह कारनामा दिसंबर 1942 में कर दिखाया था. उस वक्त वे रेसिंग क्लब दे लेन्स के तरफ से खेल रहे थे.

5. सबसे तेज गोल

उरुग्वे के रिकार्डो औलीवेरा ने दिसंबर 1998 में सबसे तेज गोल किया था. वीडिया कैमरा की मदद से दर्ज किए गए इस रिकॉर्ड के अनुसार, औलीवर ने सिर्फ 2.8 सेकेंड में गोल दाग दिया था.

6. पहला फुटबॉल क्लब

फुटबॉल क्लब्स की पूरी दुनिया में धाक है. पर क्या आप विश्व के पहले फुटबॉल क्लब के बारे में जानते हैं? इंग्लिश शैफ्फील्ड फुटबॉल क्लब दुनिया का पहला फुटबॉल क्लब है. इसे 1857 में कर्नल नथानियल क्रेसविक और मेजर विलियम प्रिस्ट ने शुरु किया था.

7. सबसे ज्यादा गोल

एक फुटबॉल मैच में कितने गोल किए जा सकते हैं. आप कहेंगे 20,30,50 या फिर ज्यादा से ज्यादा 60. पर फुटबॉल में सबसे ज्यादा 149 गोल बनाने का रिकॉर्ड है. मैडागास्कर की फुटबॉल टीम स्टेड ओलंपिक दे लेमिरने ने यह कारनामा कर दिखाया था. कहा जाता है कि इस टीम ने पिछले मैच में रेफ्री के गलत निर्णय से तैश में आकर यह काम किया था, और अपने ही गोल में 149 गोल दागे थे.

8. दुनिया के पहले अश्वेत खिलाड़ी

दुनिया आज भी रंगभेद और नस्लभेद से ग्रसित है और पहले भी थी. पर पहले श्याम वर्ण वालों की स्थिति अधिक दयनीय थी. उन्हें कई तरह के अधिकारों से वंचित रखा गया था. इन्हीं में से एक था खेलों का अधिकार. गोरों ने खेलों पर भी आधिपत्य जमा रखा था.

आर्थर वॉर्थन विश्व के पहले अश्वेत फुटबॉल खिलाड़ी हैं.

9. भड़क उठे थे दंगे

फुटबॉल पर लोग इतना जान छिड़कते हैं कि मरने मारने को भी तैयार हो जाते हैं. इतिहास में ऐसे कई अप्रिय घटनाएं दर्ज हैं. पर सबसे ज्यादा दर्दनाक घटना 1964 में घटी थी. 1964 में एक फुटबॉल मैच के दौरान एक रेफ्री के निर्णय के कारण परु में दंगे भड़क उठे थे. इन दंगों में 300 से भी ज्यादा लोगों की जान गई थी.

10. पाकिस्तान में बनते हैं फुटबॉल

फुटबॉल गाय की चमड़ी से बनती है. कुछ लोग मानते हैं की ये सुअर की चमड़ी से बनाया जाता है. पर फुटबॉल में इस्तेमाल होने वाले गेंद को गाय की चमड़ी की पहली परत से बनाया जाता है. गौरतलब है कि दुनिया के 80 प्रतिशत फुटबॉल पाकिस्तान में बनाए जाते हैं.

आविष्कार, जो करें विकास का सपना साकार

भारत के शोध और विकास की स्थिति संभवत: विश्व में सब से खराब है. हम थके हुए और अकल्पनाशील नौकरशाहों की नियुक्ति करते हैं. उन के द्वारा समस्याओं के निराकरण हेतु प्रयोग में लाई जा रही तकनीक भी पूरी तरह पिछड़ी हुई है. स्थानीय समस्याओं के निराकरण हेतु ग्रामीणों द्वारा किए गए आविष्कारों को हम प्रोत्साहित नहीं करते. भारत का पेटैंट औफिस भी इतना सुस्त और पेचीदा है कि कोई उस की तरफ रुख नहीं करता. इंडियन काउंसिल औफ ऐग्रीकल्चरल रिसर्च (आईसीएआर) काम करने के कुछ नए रास्ते बताने वाले पेपर निकालती तो है पर वे इन्हीं औफिसों में कहीं दबे रह जाते हैं. इसलिए नई सरकार को एक आर ऐंड डी सैल की आवश्यकता है.

नैशनल इनोवेशन फाउंडेशन चला रहे आईआईएम, अहमदाबाद के प्रोफैसर अनिल गुप्ता बराबर इस कोशिश में रहते हैं कि कुछ नई खोज हो और खोजकर्ता को रिवार्ड व पेटैंट से नवाजा जा सके.

मैं ने पिछले चुनावों के दौरान प्रोफैसर अनिल गुप्ता से बात की थी. मैं बड़ी ही उत्सुकता से कुछ ऐसे नए रास्तों की खोज में हूं, जिन से मेरे चुनाव क्षेत्र में आने वाले ग्रामीण अपने गांव में रह कर ही पैसे कमा सकें. नई फैक्टरियों की खोज का वक्त मेरे लिए जा चुका है. उत्तर प्रदेश एक ऐसा राज्य है, जहां न तो राजनीतिक इच्छाशक्ति है, न बिजली और न ही कोई बेहतरीन इन्फ्रास्ट्रक्चर की सुविधा. इसीलिए नएनए निवेशक आकर्षित नहीं हो पा रहे हैं.

अत: मैं इस क्षेत्र में कृषि के स्तर पर नई खोजों का प्रयोग करना चाहती हूं. मैं ने प्रोफैसर अनिल गुप्ता से आग्रह किया कि वे कुछ ऐसी मशीनों का निर्माण करें, जो हर गांव में इस्तेमाल की जा सकें और गाय के गोबर का भी प्रयोग हो सके.

1 माह के अंदर ही उन्होंने इस तरह की 3 मशीनों का आविष्कार किया. पहली मशीन वह है, जो गाय के गोबर को बहुत बड़े और मजबूत लट्ठों में बदलती है. इन लट्ठों को श्मशान घाट में लकड़ी की जगह इस्तेमाल किया जा सकेगा. यह बेहद जरूरी भी है क्योंकि दिन पर दिन जंगलों में पेड़ों की संख्या घटती जा रही है.

एक शव को जलाने के लिए कम से कम 600 किलोग्राम लकड़ी का उपयोग किया जाता है (अधिकतर आम की लकड़ी) और अब स्थिति यह हो गई है कि हम इतनी तादाद में पेड़ों की कटाई नहीं कर सकते. लकड़ी के तस्कर रात में आम के बगीचों में जा कर वहां लगे पेड़ों को काट कर लकड़ी के व्यापारियों को बेच देते हैं ताकि शवों को जलाया जा सके. यह बहुत ही घिनौना जुर्म है

अब मैं यह मशीन अपने इलाके में ले कर आ रही हूं, ताकि यह जांच सकूं कि महिलाएं इस का उपयोग पैसे कमाने में कर सकती हैं या नहीं. इस से लकड़ी भी बचेगी, पैसा भी बनेगा और इस से भी बेहतर यह कि दूध देना बंद कर चुकी गाय और भैंसों की बिक्री को भी रोका जा सकेगा.

दूसरी मशीन एक ऐसी मशीन है, जो गाय के गोबर को गमलों में बदल देती है. वन विभाग अंकुरित पौध को रखने के लिए प्लास्टिक का प्रयोग करता है. इस से सभी राज्यों की फौरेस्ट नर्सरीज में बेकार प्लास्टिक के ढेर लग रहे हैं. इस मशीन से तैयार गमले बहुत सस्ते व अनोखे होते हैं, क्योंकि वे अपनेआप में ही खाद का काम करते हैं. यदि हम वन विभाग को ये गमले खरीदने के लिए प्रेरित करें तो हमें स्वस्थ पौधे मिल सकेंगे.

तीसरी मशीन एक ऐसी मशीन है, जो गाय के गोबर और भूसे के मिश्रण से ईंटों का निर्माण करती है. गेहूं निकालने के बाद बचने वाला भूसा किसान साधारणतया जला देते हैं. इस से काफी मात्रा में गरमी और प्रदूषण उत्पन्न होता है. यदि इस मशीन को इस्तेमाल करने वाले लोग बेहतर ढंग से ईंटें बना पाएं तो इन ईंटों से गांव में घर भी बनाए जा सकेंगे. कल्पना कीजिए, इस तरह गांव का हर गरीब व्यक्ति अपना खुद का मकान बना सकेगा और तब उसे इस बात के लिए अपने प्रधान की दया पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा कि वह किसी सरकारी योजना के तहत उसे घर दिलवाएगा.

मेरे दिमाग में एक विचार और आया है, जिसे मैं आगे प्रयोग में लाना चाहूंगी. वह है, गोबर से बना और्गेनिक मच्छर प्रतिरोधक. एक छोटे ग्रुप ने तो इस का ढांचा तैयार भी कर लिया है. मुझे बस इस में थोड़ा सुधार लाना है. प्रो. अनिल गुप्ता इस प्रोजैक्ट पर काम कर रहे हैं.

प्रो. गुप्ता के बारे में सब से लाजवाब बात यह है कि सारी नईनई चीजें उन्हें बहुत उत्तेजित करती हैं और इस काम में वे काफी ऐक्टिव भी रहते हैं. आज उन के पास 600 से भी ज्यादा पेटैंट्स हैं. बहुत से ऐसे खोजकर्ता हैं, जो बहुत गरीब थे पर जिन के पास अनोखे आइडियाज थे. उन को प्रो. गुप्ता के सहयोग से काफी लाभ पहुंचा है.

मेरी इच्छा है कि नए प्रधानमंत्री युवा टैक्नोक्रैट्स की एक सैल बनाएं, जो नईनई खोजों को अंजाम दें. मैं इस क्षेत्र में प्रो. अनिल गुप्ता के साथ काम करना चाहती हूं. मैं जो करना चाहती हूं, उस की सूची हालांकि बहुत लंबी है पर उन में से कुछ योजनाएं निम्न हैं:

जानवरों की सुरक्षा

जानवरों के लिए नए तरह के साजोसामान, जो उन्हें तकलीफ न दें, मैं ईजाद करना चाहती हूं. आज जोते जाने वाले बैलों में से 33% गले के कैंसर से मर जाते हैं और इस की वजह है उन के गले पर पड़े जुए का बोझ और दबाव.

मांस का उत्पादन स्टैम सैल से

कोई भी व्यक्ति मांस खाना बंद नहीं करने वाला. मैं एक ऐसे भविष्य का सपना देखती हूं, जब मांस का उत्पादन स्टैम सैल से हो सकेगा. यह मांस प्राप्ति का एक नैतिक और ईकोफ्रैंडली तरीका होगा. ‘टै्रंड्स इन बायोटैक्नोलौजी’ नामक जर्नल में वैज्ञानिकों ने विचार रखा है कि हर शहर और गांव में एक दिन उन की छोटी ही सही अपनी एक कल्चर्ड मीट फैक्टरी हो सकती है. इस से मीथेन गैस का रिसाव भी नहीं होगा, इसलिए आप दुनिया में प्रदूषण फैलाए बिना मांस खा सकेंगे.

प्लास्टिक का सही इस्तेमाल

एक ऐसा आविष्कार जो प्लास्टिक को पुन: तेल में बदल सके. यह व्यापार करोड़ों का साबित हो सकता है. क्योंकि इस से पैदा हुआ तेल स्थानीय स्तर पर यातायात में इस्तेमाल हो सकेगा. साथ ही नदियां, जो प्लास्टिक की थैलियों के जमा होने से गंदी हो रही हैं, उन्हें साफ किया जा सकेगा. मुझे बताया गया है कि नागपुर में इस विषय पर काम शुरू हो चुका है. करोड़ों गायों की मौत प्लास्टिक खाने की वजह से होती है.

जनसंख्या पर लगाम

एक सुरक्षित, दर्दरहित उपाय जिस से इंसानों, कुत्तों, बंदरों आदि की प्रजनन क्षमता को रोका जा सके. संभवत: यह कोई एक बार खाने वाली गोली हो सकती है.

बिजली में आत्मनिर्भरता

पवन चक्कियां अनेक गांवों में लगी हुई हैं. पश्चिम बंगाल में एक किसान ने केवल 5,000 में एक पवनचक्की का आविष्कार किया है, जिस से वह सिंचाई के लिए पानी निकालने का काम करता है. यह एक ऐसा गांव है, जहां विंड पावर की कमी है. वह हवा के सामान्य मूवमैंट का इस्तेमाल करता है. भले ही इस से पानी की सिंचाई काफी धीरेधीरे होती है, पर बहुत से किसानों को सिंचाई में इस से फायदा हुआ है. हमें इस किसान के आविष्कार का उपयोग कर आगे बढ़ना होगा. विद्युतीय ग्रिड से छुटकारा पा कर कुछ नई चीजें खोजनी होंगी ताकि सभी गांव बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बन सकें.

प्रदूषणरहित वातावरण

ऐसी कारें, जो हाइड्रोजन गैस से चलें. सब कहते हैं कि ऐसी गाडि़यों का आविष्कार हो चुका है तो फिर वे हैं कहां? कल्पना कीजिए प्रदूषणरहित गाडि़यों की. कैसा बेहतरीन संसार होगा वह जहां हम फिर से सांस ले सकेंगे. मुझे विश्वास है कि हर किसी के मन में ऐसी चीजों की सूची जरूर होती है, जिन के आविष्कार की वे इच्छा रखते हैं. और आप में से बहुत से लोगों ने कुछ ऐसे छोटेमोटे आविष्कार देखे भी होंगे और चाहते होंगे कि सरकार द्वारा इस का प्रचारप्रसार किया जाए.

देसी लुक में छाए अनुष्का-वरुण, 1 करोड़ बार देखा गया ‘सुई धागा’ का ट्रेलर

बौलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा और वरुण धवन की आने वाली फिल्म ‘सुई धागा’ का ट्रेलर यूट्यूब पर हिट हो चुका है. 1 दिन पहले रिलीज किए गए इसके वीडियो को अब तक 1 करोड़ 2 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है. फिल्म के टाइटल के अनुसार फिल्म की कहानी उन लोगों पर है, जिनकी रोजी-रोटी सिलाई-बुनाई के काम करने से चलती हैं.

3 मिनट के ट्रेलर में फिल्म की कहानी को बखूबी बयां किया गया है. ट्रेलर में वरुण धवन मस्त-मौजी बने हैं, जबकि अनुष्का शर्मा ने एक घरेलु महिला का किरदार निभाया है. ये कहानी है ममता और मौजी की है, जो जिंदगी की ठोकर लगने के बाद खुद ही अपने सपनों को बुनते हैं. कड़ी मेहनत से नामुमकिन से लगने वाले सपनों को पूरा करते हैं.

यशराज बैनल तले बन रही फिल्म के निर्माता मनीष शर्मा हैं. ‘सुई धागा’ की पटकथा भी मनीष शर्मा ने ही लिखी है. ‘दम लगा के हइशा’ के निर्देशक शरत कटारिया ने इसे निर्देशित किया है. शरत ने इससे पहले ‘दम लगाके हइसा’ जैसी सुपर‍हि‍ट फिल्म बनाई थी. पति-पत्नी की कहानी पर इस फिल्म में आयुष्मान खुराना और भूमि पेडणेकर ने मुख्य भूमिका निभाई थी. फिल्म ‘सुई धागा’ अनु मलिक के संगीत की धुनों से सजी है. फिल्म के ज्यादातर हिस्से की शूटिंग मध्य प्रदेश में हुई है. यह फिल्म 28 सितम्बर को रिलीज होगी.

अफसाना एक दीपा का : भाग 3

यह ऐतराज जायज था या नाजायज, यह तय कर पाना तो मुश्किल है. लेकिन यह एक भयानक हादसे यानी कत्ल की वारदात के रूप में बीती 18 मई को सामने आया तो पूरा उज्जैन दहल सा गया.

दीपा के पड़ोस में रहने वाले जितेंद्र पवार जब 18 मई, 2018 की सुबह करीब 8 बजे छत पर पहुंचे तो यह देख घबरा गए कि बगल में रहने वाली दीपा के घर से धुआं निकल रहा है. किसी अनहोनी की आशंका से घबराए जितेंद्र ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को फोन कर इस की सूचना दी.

चंद मिनटों बाद ही पुलिस और दमकलकर्मी वल्लभनगर पहुंच गए. दमकलकर्मियों ने जैसेतैसे आग पर काबू पाया. इस के बाद पुलिस अंदर दाखिल हुई.

पुलिस वाले यह देख दहल गए कि रसोई में एक जवान महिला की अर्धनग्न लाश औंधी पड़ी थी. लाश के ऊपर मोटे गद्दों के साथ अधजली दरी भी पड़ी थी. लाश दीपा की ही थी. उस के दोनों हाथों की नसें कटी हुई थीं और गरदन पर धारदार हथियार के निशान भी थे. दीवारों और दरवाजों पर भी खून के निशान थे. साफ दिख रहा था कि मामला बेरहमी से की गई हत्या का है.

बेरहमी से की गई हत्या

माधवनगर थाने के इंचार्ज गगन बादल ने तुरंत इस जघन्य हत्या की खबर एसपी सचिन अतुलकर और एफएसएल अधिकारी डा. प्रीति गायकवाड़ को दी. मामला गंभीर था, इसलिए ये दोनों भी घटनास्थल पर पहुंच गए.

घटनास्थल के मुआयने में दिखा कि पूरा घर अस्तव्यस्त था और बैडरूम का दरवाजा टूटा पड़ा था. सब से अजीब और चौंका देने वाली बात यह थी कि दीपा की लाश के पैरों के बीच एलपीजी सिलेंडर की नली घुसी हुई थी. हत्या की ऐसी वारदात पुलिस वालों ने पहली बार देखी थी. लाश 90 फीसदी जली हुई थी.

तुरंत लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. 3 डाक्टरों एल.के. तिवारी, अजय दिवाकर और रेखा की टीम ने उस का पोस्टमार्टम कर अपनी रिपोर्ट में कहा कि दीपा को जिंदा जलाया गया है. ऐसा क्यों किया गया, यह हत्यारा ही बता सकता था.

अड़ोसपड़ोस में पूछताछ करने पर पता चला कि मृतका दीपा वर्मा दिलीप की पत्नी थी. सचिन अतुलकर ने जांच के लिए माधवनगर थाने के टीआई गगन बादल के नेतृत्व में टीम गठित कर जांच के आदेश दे दिए. टीम में एसआई बी.एस. मंडलोई, संजय राजपूत, हैडकांस्टेबल सुरेंद्र सिंह के अलावा साइबर सेल की तेजतर्रार इंसपेक्टर दीपिका शिंदे को शामिल किया गया.

पूछताछ में दिलीप का नाम सामने आया. मकान मालिक ने भी अपने बयान में बताया कि जनवरी में उन्होंने मकान दिलीप को किराए पर दिया था. दीपिका शिंदे ने सब से पहले दिलीप की गरदन पकड़ी तो उस ने अपने और दीपा के संबंधों का सच उगलते हुए खुद के हत्यारे होने या हत्या में लिप्त होने से साफ इनकार कर दिया. दीपा के दोनों भाई बहन की लाश पर आंसू बहाने आए. उन्होंने भी दिलीप पर आरोप लगाया कि वह आए दिन दीपा के साथ मारपीट करता था.

दिलीप ने पुलिस को बताया कि उस की गैरमौजूदगी में कई युवक दीपा से मिलने आते रहते थे. उस के इन प्रेमियों में एक नाम धर्मेंद्र का भी था. जांच करतेकरते शाम हो चली थी. पुलिस टीम आधी रात के करीब धर्मेंद्र के घर पहुंची तो वह घबरा उठा. इंसपेक्टर दीपिका शिंदे ने जब धर्मेंद्र पर नजर डाली तो उस के हाथ पर घाव दिखे. वह तुरंत समझ गईं कि दीपा का हत्यारा उन के सामने खड़ा है.

दीपिका शिंदे ने सीधा सवाल यह दागा, ‘तूने दीपा की हत्या क्यों की?’ तो बजाय इधरउधर की बातें करने या खुद का बचाव करने के उस ने अपना जुर्म कबूल कर लिया.

अपने बयान में हत्या की वजह का खुलासा करते हुए धर्मेंद्र ने बताया कि उसे दिलीप से कोई ऐतराज नहीं था, लेकिन उसे दूसरे लड़कों से उस की दोस्ती और शारीरिक संबंध मंजूर नहीं थे.

आखिर प्रेमी से ही मौत मिली दीपा को

हादसे के हफ्ते भर पहले ही धर्मेंद्र की पत्नी ने एक बच्चे को जन्म दिया था, इसलिए उस के साथ वह सो नहीं सकता था. जिस्म की तलब लगी तो उस ने दीपा को फोन किया. पहले तो दीपा ने मना कर दिया लेकिन उस के बारबार कहने पर वह राजी हो गई.

तय यह हुआ कि रात को एंजौय करने के पहले दोनों पार्टी करेंगे. इस बाबत शाम को धर्मेंद्र और दीपा बाजार गए और रात के जश्न के लिए शराब और चिकन खरीदा. बाजार में घूमने के दौरान ही दीपा के पास किसी का फोन आया था, जिसे उस ने कुछ हिचकते हुए रिसीव किया था.

फोन करतेकरते उस ने कहा था कि आज नहीं क्योंकि उस का पति आया हुआ है. दीपा पर शक तो धर्मेंद्र को पहले से ही था, इसलिए उस ने उस से छिप कर दिलीप को फोन किया तो पता चला कि वह तो गांव में है. इस झूठ पर वह तिलमिला उठा. शक पैदा करने वाली दूसरी बात दीपा का जरूरत से ज्यादा शराब और चिकन खरीदना भी था.

शक में मूड खराब होने पर धर्मेंद्र घर चला गया. इसी शक के मारे उस के तनबदन में आग लग रही थी. दीपा उसे अब बेवफा और बदचलन लगने लगी थी. कुछ सोचते हुए वह दीपा की सच्चाई जानने के लिए आधी रात को उस के घर पहुंच गया.

गया तो वह दीपा के साथ मौजमस्ती करने के इरादे से था लेकिन जब उसे यह पता चला कि उस के पैसे से लाई शराब और गोश्त से दीपा 2 दूसरे लड़कों रवि और मनोहर उर्फ कुक्कू के साथ पार्टी कर चुकी है तो उस का खून खौल उठा.

इस बात पर दोनों में खूब झगड़ा हुआ और फिर धर्मेंद्र ने दीपा की हत्या कर दी. जब इन दोनों का झगड़ा शुरू हुआ था तब कुक्कू बाहर ही छिपा था, लेकिन हत्या के पहले भाग गया था. जिसे पुलिस ने सरकारी गवाह बना लिया. चंद घंटों में ही कातिल को पकड़ लेने पर एसपी सचिन अतुलकर ने पुलिस टीम की पीठ थपथपाई.

दीपा अब इस दुनिया में नहीं है और धर्मेंद्र जेल में है. दिलीप पहले की तरह जिंदगी जी रहा है पर दीपा की मौत कई सवाल छोड़ गई है कि आखिरकार उस की गलती क्या थी? शराबी और निकम्मे पति ने उसे छोड़ दिया था तो दूसरी गलती मांबाप ने कम उम्र में उस की शादी कर के पहले ही कर दी थी.

तनहाई की मारी दीपा एक से दूसरे मर्द की बाहों में झूलती हुई मारी गई तो इस की जिम्मेदार भी वही थी. अगर वह धर्मेंद्र और दूसरे लड़कों के पीछे नहीं भागती तो शायद बच जाती. लेकिन यह चिंता भी उसे सता रही होगी कि दिलीप और धर्मेंद्र कब तक उस का खर्चा उठाएंगे. इसलिए उस ने नए लड़कों से संबंध बनाए, जिन का अंजाम इस तरह सामने आया.

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