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जहरीली औरत : प्यार के खेल में उजड़ा अंशिका का सुहाग

मेवाराम यादव 8 जून, 2018 को अपनी बेटी ममता की ससुराल थाना सिरसागंज के गांव इंदरगढ़ गए थे. वहां के किसी वैद्य से उन्हें अपनी दवा लेनी थी. दवा ले कर उन्हें अगले दिन ही दोपहर तक घर लौटना था. लेकिन इस से पहले ही 9 जून की सुबह करीब 5 बजे उन के मोबाइल पर उन के बेटे सुनील की बहू अंशिका का फोन आया.

उस समय वह बहुत घबराई हुई थी. उस ने कहा, ‘‘पापा आप जल्दी से घर आ जाओ, सूर्यांश के पापा सुबह 3 बजे घर से दिशा मैदान के लिए गए थे, लेकिन 2 घंटे हो गए अब तक नहीं लौटे हैं. वह अपना मोबाइल भी घर पर छोड़ गए थे.’’

बहू की बात सुन कर मेवाराम घबरा गए. उन्होंने बहू से कहा कि वह चिंता न करे, वे अभी गांव आ रहे हैं.

बात बेटे के लापता होने की थी, इसलिए उन्होंने बेटी के ससुर यानी अपने समधी दिगंबर सिंह को यह बात बताई और अपनी बाइक उठा कर वापस अपने गांव नगला जलुआ के लिए चल दिए. इंद्रगढ़ से उन के गांव की दूरी बाइक से मात्र 30 मिनट की थी. रास्ते भर उन के दिमाग में यही बात घूम रही थी कि आखिर उन का बेटा सुनील चला कहां गया.

घर पहुंच कर उन्होंने अपनी बहू अंशिका से पूरी जानकारी ली. अंशिका ने बताया कि वह सुबह 3 बजे के करीब दिशा मैदान गए थे. उस समय वह केवल अंडरवियर और बनियान पहने हुए थे. जब वह काफी देर बाद भी वापस नहीं आए तब मुझे चिंता हुई और मैं ने घर से बाहर जा कर उन्हें खेतों की ओर तलाशा, लेकिन वह कहीं भी दिखाई नहीं दिए.

सुनील मेवाराम का 28 साल का बेटा था. उन्होंने करीब 5 साल पहले उस की शादी अंशिका से की थी. वह भी सुनील को खोजने के लिए जंगल की तरफ चल दिए. उन के साथ गांव के कुछ लोग भी थे. उन्होंने बेटे को संभावित जगहों पर ढूंढा लेकिन पता नहीं लगा.

जब वह वापस घर की तरफ आ रहे थे तभी रास्ते में मिले कुछ लोगों ने उन्हें बताया कि रेलवे लाइन के किनारे झाडि़यों में एक बोरी पड़ी है. देखने से लग रहा है कि उस में कोई लाश है. खून भी रिस रहा है.

इतना सुनते ही मेवाराम गांव वालों के साथ रेलवे लाइन की तरफ चल दिए. लाइन गांव से लगभग 200 मीटर दूर दक्षिण दिशा में थी.

सभी लोग वहां पहुंचे तो लाइन के पास की झाडि़यों में एक बोरा पड़ा था, बोरे से जो खून रिस रहा था उस पर मक्खियां भिनभिना रही थीं. लोगों ने जब गौर से देखा तो खून की बूंदें थीं. ऐसा लग रहा था कि बोरी को कुछ समय पहले ही ला कर फेंका गया है.

वैसे तो वह बोरी पुलिस की मौजूदगी में ही खोली जानी चाहिए थी. लेकिन बोरी देख कर मेवाराम की धड़कनें बढ़ गई थीं. बोरी के अंदर क्या है, यह देखने की उन की उत्सुकता बढ़ गई थी. इसलिए उन्होंने गांव वालों के सामने जब बोरी खुलवाई तो उस में उन के बेटे सुनील की ही लाश निकली.

बेटे की लाश देखते ही मेवाराम गश खा कर जमीन पर बैठ गए और रोने लगे. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि उन के बेटे की हत्या किस ने और क्यों की. इस के बाद तो यह खबर जल्द ही आसपास के गांवों में भी फैल गई. जिस से वहां तमाम लोग इकट्ठा हो गए. सभी आपस में तरहतरह के कयास लगा रहे थे.

गांव के ही किसी व्यक्ति ने पुलिस को घटना की सूचना दे दी. सूचना मिलने के कुछ देर बाद ही थानाप्रभारी विजय कुमार गौतम पुलिस टीम के साथ वहां पहुंच गए.

पुलिस ने जब लाश का निरीक्षण किया तो उस के सिर और शरीर पर तेज धारदार हथियार के घाव थे. इस के अलावा उस की नाक भी कटी हुई थी. सारे घावों से जो खून निकला था, उसे देख कर लग रहा था कि उस की हत्या कुछ घंटों पहले ही की गई थी.

रास्ते में जो खून के निशान थे उन का पीछा किया गया तो वह भी गांव के पास तक मिले. उस के बाद उन का पता नहीं चला. इन सब बातों से पुलिस को इतना तो विश्वास हो गया कि सुनील की हत्या गांव में ही करने के बाद उस की लाश यहां डाली गई थी.

थानाप्रभारी ने मृतक के पिता मेवाराम से बात की तो उन्होंने किसी व्यक्ति पर कोई शक नहीं जताया. तब थानाप्रभारी ने जरूरी काररवाई कर लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

मेवाराम उत्तर प्रदेश के जिला फिरोजाबाद के गांव नगला जलुआ में रहते थे. वह गांव में ही टेलरिंग का काम करते थे. उन के 3 बेटे और 2 बेटियां थीं. उन के पास खेती की 3 बीघा जमीन थी जो बंटाई पर दे रखी थी. टेलरिंग की कमाई से ही वह अपने 4 बच्चों का विवाह कर चुके थे. केवल छोटा बेटा सनी ही शादी के लिए बचा था.

मेवाराम की पत्नी मुन्नी देवी की 3 साल पहले मौत हो चुकी थी. सब से बड़ा सुनील पिछले 4 साल से दक्षिणी दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित एक फैक्ट्री में सिलाई का काम करता था. यह फैक्ट्री रेडीमेड कपड़े एक्सपोर्ट करती थी. सुनील के दोनों छोटे भाई संजय व सनी भी उसी के साथ रह कर ड्राइवरी करते थे. फतेहपुर बेरी में ही सुनील की बहन पिंकी की सुसराल थी. वहीं पास में ही उन्होंने किराए पर मकान ले लिया था.

मेवाराम ने सुनील की शादी 5 साल पहले फिरोजाबाद के गांव ढोलपुरा निवासी वीरेंद्र यादव की बेटी अंशिका उर्फ अनुष्का के साथ की थी. सुनील का डेढ़ साल का बेटा सूर्यांश था. जबकि संजय का अभी कोई बच्चा नहीं था. सुनील और संजय कुछ दिनों के लिए बारीबारी से अपनी पत्नी को गांव से दिल्ली लाते थे.

अंशिका जब दिल्ली से अपनी ससुराल नगला जलुआ लौटती थी तो वहां से जल्द ही अपने मायके ढोलपुरा चली जाती थी. मई 2018 के शुरू में सुनील अंशिका के साथ दिल्ली से अपने गांव आया, कुछ दिन गांव में रहने के बाद वह पत्नी व बेटे सूर्यांश को ढोलपुरा छोड़ कर वापस दिल्ली चला गया.

उस के बाद 28 मई को दिल्ली से सुनील पत्नी को लेने आया. वह अपनी ससुराल से पत्नी व बेटे को अपने गांव नगला जलुआ ले आया. उस ने अंशिका से कह दिया था कि 10 जून को दिल्ली चलेंगे. लेकिन दिल्ली लौटने से पहले ही सुनील की हत्या हो गई.

थानाप्रभारी विजय कुमार गौतम मेवाराम से बात करने के लिए उन के घर पहुंच गए. पूछताछ में मेवाराम ने बताया कि सुनील सुबह 3 बजे दिशा मैदान के लिए कभी नहीं गया, और न ही वह केवल अंडरवीयर में जाता था. उन्होंने बताया कि उन्हें शक है कि सुनील की पत्नी अंशिका उस से कुछ छिपा रही है. इस के बाद थानाप्रभारी ने सुनील के कमरे का निरीक्षण किया तो उन्हें सड़क की ओर के दरवाजे पर खून लगा दिखाई दिया.

खून देख कर थानाप्रभारी समझ गए कि सुनील की हत्या इसी घर में करने के बाद उस के शव को रेलवे लाइन के पास फेंका गया था. पुलिस ने अंशिका से सुनील की हत्या के बारे में पूछताछ की तो अंशिका ने रट्टू तोते की तरह ससुर को सुनाई कहानी दोहरा दी. थानाप्रभारी ने उस से पूछा कि सुनील नंगे पैर गया था या चप्पलें पहन कर. इस पर वह कोई जवाब नहीं दे सकी.

पुलिस ने घर में छानबीन की तो अंदर के कमरे के फर्श पर खून के निशान दिखाई दिए, जिसे साफ किया गया था. इस के साथ ही उस कमरे के दवाजे पर भी खून के छींटे साफ दिखाई दे रहे थे. जो सुनील की हत्या उसी कमरे में होने की गवाही दे रहे थे. पुलिस को घर में ही अंशिका की साड़ी व पेटीकोट सूखता मिला, जिसे धोने के बाद भी उस पर खून के धब्बे दिख रहे थे.

पुलिस ने फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट टीम को भी मौके पर बुला लिया. जिस ने जमीन तथा दरवाजे से खून के नमूने एकत्र किए. अधिकारियों को घटना की जानकारी देने पर एसपी (ग्रामीण) महेंद्र सिंह क्षेत्राधिकारी अभिषेक कुमार राहुल तथा महिला कांस्टेबल बीना यादव को साथ ले कर गांव पहुंच गए. सबूतों के आधार पर पुलिस ने अंशिका को हिरासत में ले लिया. इस के बाद पुलिस घटनास्थल की काररवाई निपटा कर अंशिका और उस के ससुर मेवाराम को थाने ले आई.

थाने ले जा कर महिला पुलिस ने जब अंशिका से उस के पति सुनील की हत्या के बारे में सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गई और फूटफूट कर रोने लगी. उस ने अपने पति की हत्या की जो कहानी पुलिस को सुनाई वह इस प्रकार थी—

अंशिका ने पुलिस को बताया कि उस ने अपने दिल्ली के प्रेमी राजा और उस के साथी रोहित के साथ मिल कर पति की हत्या की थी. उस ने आगे बताया कि करीब ढाई साल पहले वह दिल्ली के फतेहपुर बेरी में अपने पति व देवरों के साथ रहती थी.

वहीं सामने के कमरे में उत्तर प्रदेश के बरेली शहर निवासी राजा रहता था. राजा हलवाई का काम करता था. उसी समय राजा की दोस्ती सुनील व उस के देवरों से हो गई थी.

राजा का उन के घर भी आनाजाना था. उसी दौरान उस के व राजा के प्रेम संबंध हो गए. इस की किसी को कोई भनक तक नहीं लगी. अंशिका शादी के बाद से ही अपने पति सुनील को पसंद नहीं करती थी. उस ने दिल्ली से अपने प्रेमी राजा को 8 जून की रात को ही गांव बुला लिया था.

राजा अपने दोस्त रोहित के साथ गांव पहुंचा था. उस ने मकान के सड़क की ओर वाले दरवाजे से दोनों को अंदर बुला कर कमरे में छिपा दिया था. उस समय सुनील मकान के मुख्य दरवाजे पर बैठ कर गांव के लोगों से बात कर रहा था.

रात 12 बजे सुनील खाना खा कर जब बीच वाले कमरे में पलंग पर गहरी नींद में सो गया, तभी उस ने करीब 2 बजे प्रेमी व उस के दोस्त के साथ मिल कर सुनील को सोते समय दबोच लिया और उस का मुंह बंद कर के अंदर वाली कोठरी में ले गए, जहां कैंची व डंडों से उस की हत्या कर दी गई.

इस बीच अंशिका सुनील के हाथ पकडे़ रही. सुनील की हत्या के बाद उस की लाश को एक बोरे में भर कर राजा व उस का दोस्त रेलवे ट्रैक के पास झाडि़यों में फेंक कर दिल्ली वापस चले गए. अंशिका ने बताया कि इस के बाद उस ने बरामदे में पडे़ खून को पानी से धो दिया.

उस के कपड़ों पर भी खून लग गया था, इसलिए उस ने कपड़े धो कर डाल दिए. अंशिका से पूछताछ के बाद पुलिस ने उस के और उस के दिल्ली निवासी प्रेमी राजा तथा उस के साथी रोहित के खिलाफ हत्या व साक्ष्य छिपाने का मुकदमा दर्ज कर लिया. पुलिस ने मुकदमा दर्ज होते ही अपनी काररवाई शुरू कर दी.

दिल्ली में रह रहे सुनील के भाई संजय और सनी व बहन को जब सुनील की हत्या की जानकारी मिली तो वह भी दिल्ली से अपने गांव आ गए. संजय और सनी को जब पता चला कि अंशिका सुनील के कत्ल में राजा और रोहित के शामिल होने की बात कह रही है तो वे चौंके, क्योंकि 8 जून, 2018 की रात 11 बजे राजा उन के साथ था.

9 जून की सुबह 6 बजे भी उन्होंने राजा को दिल्ली में देखा था. मेवाराम ने यह बात थाने जा कर थानाप्रभारी विजय कुमार गौतम को बता दी. इस पर पुलिस ने एक बार फिर अंशिका से सख्ती से पूछताछ की. इस के बाद उस ने पुलिस को वास्तविक कहानी बताई, जो इस प्रकार थी—

अंशिका की एक बुआ गांव कटौरा बुजुर्ग में रहती थी. शादी से पहले अंशिका का अपनी बुआ के यहां आनाजाना लगा रहता था. बुआ के मकान के पास ही शमी उर्फ शिम्मी नाम का युवक रहता था. इसी दौरान शमी और अंशिका के बीच प्यार का चक्कर चल पड़ा. दोनों एकदूसरे को बेहद पसंद करने लगे. बाद में दोनों ने शादी की इच्छा जताई. लेकिन अंशिका की नानी को यह रिश्ता पसंद नहीं आया, क्योंकि शमी कुछ कमाता नहीं था. इस के अलावा उस के पास खेती की जमीन भी नहीं थी.

करीब 5 साल पहले अंशिका की शादी सुनील से हो जरूर गई थी, लेकिन वह सुनील को पसंद नहीं करती थी. शादी के बाद भी उस के और शमी के संबंध जारी रहे, वह चाह कर भी उसे भुला नहीं सकी. सुनील शादी के बाद जब भी अंशिका को दिल्ली ले जाता तो कुछ दिन रहने के बाद वह गांव जाने की जिद करने लगती थी, गांव आने के बाद वह वहां से अपने मायके चली जाती थी.

मायके से वह अपनी बुआ के गांव जा कर प्रेमी शमी से मिलती थी. सुनील को अंशिका की गतिविधियों पर शक होने लगा था. दोनों में इसी बात को ले कर झगड़ा भी होता था. शमी और अंशिका ने अपने प्यार के बीच कांटा बने सुनील को रास्ते से हटाने की योजना बनाई. शमी ने अंशिका को एक मोबाइल दे रखा था, जिसे वह अपने संदूक में कपड़ों के बीच छिपा कर रखती थी. मौका मिलते ही वह शमी से बात कर लेती थी.

8 जून की शाम को जब अंशिका के ससुर इंदरगढ़ में रहने वाली अपनी बेटी के यहां चले गए तो घर पर अंशिका और सुनील ही रह गए थे. अच्छा मौका देख कर शमी द्वारा दिए गए मोबाइल, जिसे वह सायलेंट मोड पर रखती थी, से शमी को फोन कर के गांव बुला लिया. शमी अपने दोस्त के साथ आया था. अंशिका की मोबाइल पर उस से रात साढ़े 8 बजे, 9 बजे व रात 12 बजे बातचीत हुई.

शमी ने गांव पहुंच कर अंशिका को अपने आने की जानकारी दे दी. रात 12 बजे के बाद अंशिका सुनील से कह कर शौच के बहाने घर से निकली. उस ने खेत में छिपे अपने प्रेमी शमी से कहा कि वह सड़क की तरफ वाले दरवाजे की कुंडी नहीं लगाएगी. जब फोन करूं तभी चुपके से उसी दरवाजे से आ जाना.

रात को सुनील खाना खा कर गहरी नींद सो गया. अंशिका ने प्रेमी व उस के साथी को घर में बुला कर अंदर के कमरे में छिपा दिया. रात 12 बजे शमी व उस के साथी ने सोते समय सुनील को दबोच लिया और उस का मुंह बंद कर के अंदर के कमरे में ले गए, जहां कैंची व डंडों से उस की हत्या कर दी. हत्यारों ने कैंची से सुनील की नाक भी काट दी.

सुनील की हत्या होने की भनक गांव वालों को नहीं लगी. हत्या के बाद शव को बोरे में बंद कर रेलवे ट्रैक पर डालने की योजना थी ताकि सुबह 4 बजे फर्रुखाबाद की ओर से आने वाली कालिंदी एक्सप्रेस से शव के परखच्चे उड़ जाएं और मामला दुर्घटना जैसा लगे, लेकिन बोरा वहां लगे तारों में उलझने की वजह से रेलवे लाइन तक नहीं पहुंच सका. वे लोग बोरे को झाडि़यों में फेंक कर भाग गए.

इस के बाद मेवाराम ने थाने में नई तहरीर दे कर सुनील की हत्या के लिए अंशिका उस के प्रेमी शमी तथा उस के अज्ञात साथी को दोषी बताया. दूसरे दिन पुलिस ने अंशिका को पति की हत्या, साक्ष्य मिटाने के आरोप में जेल भेज दिया. पुलिस ने हत्या के बाद उस के प्रेमी शमी की गिरफ्तारी के लिए उस के गांव व अन्य ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन उस का कोई सुराग नहीं मिला.

अंतत: 18 जून, 2018 को शमी ने न्यायालय में सरेंडर कर दिया. न्यायालय द्वारा उसे जेल भेज दिया गया. दूसरे दिन थानाप्रभारी ने जिला जेल पहुंच कर शमी से सुनील की हत्या के बारे में पूछताछ की. शमी पुलिस को गुमराह करता रहा, इस के बाद 24 जून को पुलिस ने शमी को न्यायालय से 4 घंटे के रिमांड पर ले लिया. शमी की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल कैंची गांव के बाहर झाडि़यों से बरामद कर ली.

पुलिस के अनुसार हत्या के पीछे शमी और अंशिका के अवैध संबंध थे. कथा लिखे जाने तक शमी के साथी की पुलिस तलाश कर रही थी.

बेटे की हत्या से व्यथित पिता मेवाराम ने कहा कि अगर बहू को मेरा बेटा पसंद नहीं था तो उसे छोड़ देती, उस की हत्या करने की क्या जरूरत थी. अंशिका के जेल जाने के बाद उस का अबोध बेटा दिल्ली में अपने चाचाओं के साथ रह रहा था.

कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

11वें विष्णु अवतार का उद्घोष : अवतार गढ़ने का ढोंग कब तक

अब विष्णु के एक और अवतार का नया उद्घोष हुआ है. महाराष्ट्र भाजपा के प्रवक्ता अवधूत वाघ ने जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विष्णु का 11वां अवतार बताया तो विपक्ष की ओर से मजाक उड़ना ही था. एकदूसरे को पौैराणिक नायक और खलनायक बताया जाने लगा. महिषासुर, बाणासुर जैसे तमाम असुरों के नामों से नवाजा जाने लगा.

दरअसल भाजपा प्रवक्ता अवधूत वाघ ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विष्णु का 11वां अवतार बताया था. उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी विष्णु का 11वां अवतार हैं. देश का सौभाग्य है कि हमें मोदी के रूप में भगवान जैसा नेता मिला है.

इस बयान के बाद महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंधे ने कहा कि यह देवताओं का अपमान है. कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने विष्णु अवतार की जगह महिषासुर बता दिया.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने तो भाजपा प्रवक्ता अवधूत वाघ की इंजीनियरिंग डिग्री की असलियत पर ही सवाल उठा दिया और डिग्री की जांच की मांग कर डाली.

वाघ वीरमाता जीजाबाई टैक्नोलौजी इंस्टीट्यूट [वीजेटीआई] से इंजीनियरिंग स्नातक हैं. यह  एशिया में सब से पुराना इंजीनियरिंग संस्थान बताया जाता है जो 1887 में स्थापित हुआ था. यह पहले विक्टोरिया जुबली टैक्नोलौजिकल इंस्टीट्यूट कहलाता था.

अवतारों की मानसिकता से देश उबर नहीं पाया है. देश में अवतारों को अवतरित कराने का ढोंग सदियों से चल रहा है. इस तरह के काम भाजपा और संघ की सत्ता में अधिक होते देखे गए हैं. केंद्र में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार में पौराणिक पात्रों को ले कर जितना प्रचारप्रसार हुआ है उतना शायद किसी अन्य काम का नहीं हुआ होगा.

वह चाहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मुंबई के रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में कर्ण और गणेश के बारे में दिया गया बयान होे, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव दास का सीता को ले कर टेस्टट्यूब बेबी तकनीक का हो या राजस्थान भाजपा सरकार के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी का गाय द्वारा आक्सीजन छोड़ने को ले कर दिया गया ज्ञान हो.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि महाभारत में पूरे देश ने पढा है कि कर्ण को अपनी मां के गर्भ से कैसे पैदा नहीं किया गया था. उस समय आनुवांशिक विज्ञान मौजूद था. मोदी ने गणेश के हाथी का सिर लगे होने को उस समय प्लास्टिक सर्जरी की अवधारणा करार दिया था.

पौैराणिक सोच अब भी दिमागों पर हावी है. अनपढ, कम पढेलिखों की बात तो क्या, उच्च शिक्षित लोग भी अवतारों की अवधारणा के शिकार नजर आते हैं.

पहले से ही इस देश में व्यक्तिपूजकों की कोई कमी नहीं है. अमिताभ बच्चन, सचिन तेंदुलकर, रजनीकांत जैसे लोगों के मंदिर बने हैं. कुछ लोग इन्हें भगवान के रूप में पूजते हैं. सदियों ने इन जाने कितने देवीदेवता गढे गए. उन को ले कर कल्प कथाएं रची गईं.

आश्चर्य नहीं कि आगे चल कर कथा रच दी जाएगी कि भारतभूमि पर पाप, अत्यार बहुत बढ गया था. चारों ओर अधर्म फैल गया था. साधुसंतों, बाह्मणों को परेशान किए जाने लगा था. उन के जप, तप में विघ्न पैदा किया जाने लगा था. शूद्र और दलित ईश्वरीय वर्णव्यवस्था पर चलने से हटने लगे थे इसलिए गौ, ब्राह्मण और साधुसंतों के उद्घार के लिए नरेंद्र मोदी ने अवतार लिया था.

अवतार गढ़ने वाले देश के लोग व्यक्तिपूजा के अंध समर्थक रहे हैं. उन्हें चमत्कारों पर हमेशा से भरोसा रहा है. साधारण आदमी पर चमत्कारी होने की आस्था रखने वाले अगर किसी को अलौकिक अवतार करार देते हैं तो यह जड़बुद्धि की पराकाष्ठा ही है.

हौकिंग ने कहा था, सुपरह्यूमंस से इंसानियत को खतरा

दुनिया के जाने माने भौतिक विज्ञानी स्टीफन हौकिंग ने निकट भविष्य में ‘सुपरह्यूमंस’ के कारण इंसानियत को बड़े खतरे के प्रति आगाह किया था. स्टीफन हौकिंग का एक लेख उनके निधन के बाद सामने आया है जिसमें जेनेटिक इंजीनियरिंग से निकट भविष्य के सबसे बड़े संकट का अंदेशा जताया गया है.

‘ए ब्रीफ हिस्ट्री औफ टाइम’ के ब्रिटिश लेखक स्टीफन हौकिंग ने अपने अंतिम लेख संग्रह में सुपरह्यूमंस के खतरे का जिक्र किया है. हौकिंग का मानना है कि ईश्वर की कृति के साथ मानवीय छेड़खानी भले ही कुछ समय के लिए भौतिक जगत में चीजों को सुधार दे या काम के लायक बना ले लेकिन भविष्य में इसका इंसानियत के तौर पर बड़ा बुरा प्रभाव पड़ेगा. इनको हौकिंग के निधन के करीब एक सप्ताह बार पुस्तक में शामिल किया गया.

‘द बिग क्वेश्चन’ में उठाए सवाल

स्टीफन ने ‘द बिग क्वेश्चन’ शीर्षक से इन लेखों में गंभीर सवाल उठाया है. इन लेखों का एक संकलन मंगलवार को प्रकाशित होगा. इसमें स्टीफन ने कहा कि जेनेटिक इंजीनियरिंग के जरिए भविष्य में ऐसे मानव अंग या पूरे मानव शरीव विकसित किए जाएंगे जिनमें डीएनए, बुद्धि, स्वभाव और व्यवहार हर चीज को इंसान नियंत्रित करेगा.

मुश्किलों का सामना कठिन होगा

स्टीफन ने लिखा कि एक वक्त आएगा जब सुपरह्यूमंस की तादाद इतनी बढ़ जाएगी की समाज में राजनीतिक संकट खड़ा हो जाएगा. ऐसे में सुधार किए गए यह अधूरे मानव इन मुश्किलों का सामना करने में सक्षम नहीं होंगे. हालात ऐसे भी हो सकते हैं कि सब संकट के बीच यह सुपरह्यूमंस नष्ट हो जाएंगे, इनका वजूद नहीं बचेगा.

ये कहानी लगती फिल्मी है, मगर है सच

ये कहानी लगती फिल्मी है, मगर है सच. वैजयंती का सपना था कि वह अपने भाइयों की तरह वर्दी पहने, मगर आर्थिक मजबूरियों के कारण 12वीं से आगे की पढ़ाई नहीं कर सकीं. शादी हुई. समय बीतता गया. सोचा, बेटे को वर्दी में देखकर अपना सपना जी लेंगी, मगर यह भी नहीं हो सका. भगवान ने चार बेटियां दीं, लेकिन वैजयंती ने बेटियों को बेटों की तरह पाला. पढ़ाया-लिखाया और अपने साथ दौड़ाया भी. परीक्षा दिलवाने कंधे पर टाइपराइटर ढोकर जाती रहीं. नतीजा सामने है.

वैजयंती की बड़ी बेटी रवि रंजना पटना में महिला थाना प्रभारी है, दूसरी बेटी रवि किरण गुजरात सीआईएसएफ में इंस्पेक्टर तो तीसरी रवि रोशनी आरपीएफ में सब-इंस्पेक्टर है.

वैजयंती जब अपनी तीनों बेटियों को वर्दी में देखती हैं, तो उसमें खुद को महसूस करती हैं. चौथी बेटी रवि रेणुका अभी पढ़ाई कर रही है. उसका सपना भी पुलिस अफसर बनने का है.

55 वर्षीय वैजयंती कहती हैं कि न मैंने कभी बेटियों को बेटों से कम समझा और न बेटियों न यह महसूस होने दिया. चारों बेटियों की 10वीं तक की पढ़ाई कोइलवर में ही हुई. वहां सुबह-शाम जब फुर्सत मिलती, बेटियों को अपने साथ हाई स्कूल के ग्राउंड में दौड़ाने के लिए ले जाती. शुरुआती दिनों में बहनों को दौड़ लगाते देख आसपास के लोग ताना भी मारते थे, लेकिन हमने कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया. आज वही लोग मेरी बेटियों का उदाहरण देकर अपने बच्चों को मैदान में दौड़ाने लाते हैं.

2009 में सबसे पहले बड़ी बेटी रवि रंजना को सब इंस्पेक्टर की भर्ती में सफलता मिली. इसके बाद दो अन्य बेटियां भी वर्दी पाने में कामयाब हो गईं.

बोलते थे पापा, रोते हुए मत आना घर

महिला थाना प्रभारी रवि रंजना कहती हैं कि मेरे पिता रवि शंकर होम्योपैथ के डॉक्टर हैं. उन्होंने भी हमें हर तरह से सपोर्ट किया. रवि रंजना जब पहली बार घर से अकेले कोईलवर से बिहटा कॉलेज जाने के लिए निकलीं तो पिता ने दो टूक कहा कि आत्मनिर्भर बनना सीखो और घर पर कभी रोते हुए मत आना.

रवि रंजना कहती हैं कि पिताजी की आमदनी ज्यादा नहीं थी. चारों बहनों की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए मां वैजयंती घर में ही सिलाई-कढ़ाई करती थी.

बहनें एक दूसरे को बांधती हैं राखी

बात 2007 की है. रांची में टाइपिस्ट के पद के लिए वैकेंसी निकली थी. रवि रंजना को रांची परीक्षा देने जाना था. रवि रंजना के साथ पटना से रांची तक मां वैजयंती कंधे पर टाइपराइटर मशीन टांगकर ले गईं. रवि रंजना कहती हैं कि राखी के दिन हम चारों बहनें आपस में ही एक दूसरे को राखी बांधती हैं.

बैंकों का फेस्टिव औफर धमाका : जीत सकते हैं हजारों इनाम

फेस्टिव सीजन में बैंकों ने डेबिट और क्रेडिट कार्ड से शापिंग करने पर कई तरह के औफर निकाले हुए हैं. ग्राहक अपने कार्ड से शापिंग करेंगे तो फिर रिवार्ड प्वाइंट्स और कैशबैक के अलावा कई सारे इनाम जीतने का मौका भी मिलेगा. बैंकों के ग्राहक मोबाइल फोन से लेकर मुफ्त विदेश यात्रा का इनाम जीत सकते हैं. इसके लिए शर्त केवल यह है कि आपको डेबिट या फिर क्रेडिट कार्ड से ज्यादा से ज्यादा खरीदारी करनी है.

इन बैंकों ने निकाला है औफर

भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक ने खास औफर निकाला हुआ है. एसबीआई के औफर में ग्राहकों को डेबिट व क्रेडिट कार्ड से शापिंग करने पर मोबाइल फोन जीतने का मौका मिल रहा है. हालांकि इस औफर का लाभ केवल 25 चुनिंदा लोगों को मिलेगा. इस औफर में 30 हजार रुपये की कीमत वाला एमआई मिक्स 2 स्मार्टफोन दिया जाएगा. इसके साथ ही ऐसे ग्राहकों को मेकमाईट्रिप की तरफ से 50 हजार रुपये का गिफ्ट वाउचर भी मिलेगा.

आईसीआईसीआई बैंक का हवाई यात्रा औफर

प्राइवेट सेक्टर का दूसरा सबसे बड़ा बैंक आईसीआईसीआई अपने बैंक ग्राहकों को मास्टरकार्ड डेबिट व क्रेडिट कार्ड से शापिंग करने पर मेलबर्न जाने का मौका दे रहा है. बैंक शीर्ष 10 लोगों को यह मौका देगा. इन लोगों को 3 दिन और 2 रात की ट्रिप मिलेगी. यहां आप औस्ट्रेलियन ओपन 2019 का मजा ले सकेंगे. इसके अलावा 2 हजार रुपये तक का कैशबैक औफर भी पेश किया गया है.

एचडीएफसी का नो कौस्ट ईएमआई औफर

एचडीएफसी बैंक अपने उन ग्राहकों को भी नो कौस्ट ईएमआई का औफर दे रहा है, जो औनलाइन के बजाए स्टोर पर जाकर के शापिंग करते हैं. बैंक ने इसके लिए कई बड़े रिटेल स्टोर चेन से टाईअप किया है, जहां पर लोग अपने पैन कार्ड के आधार पर जान सकते हैं कि कितना लोन उनको मिलेगा. फिर ग्राहक उतनी कीमत तक का सामान बिना किसी अतिरिक्त ब्याज के घर ले जा सकेंगे. यहां पर ग्राहकों तीन माह से लेकर के 12 महीने तक बिना ब्याज आसान किश्तों पर सामान खरीदने का मौका मिल रहा है.

क्या मी टू से उभरेगी राजनीतिक पार्टी ?

मी टू कैम्पैन का अब नया वर्ज़न मी टू इंडिया चर्चा में है. देश गवाह है समाजसेवी अन्ना हजारे द्वारा आम आदमी की भलाई के लिए चलाए गए भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन में शामिल कुछ अतिसक्रिय कार्यकर्ताओं  ने आम आदमी पार्टी के नाम से राजनीतिक दल बनाया और आज वह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में सत्ता में है.

ऐसे में पुरुषों के अत्याचारों से पीड़ित महिलाओं के देशव्यापी बलिक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे मी टू कैम्पेन से भी राजनीतिक पार्टी उभरेगी, इस पर कयास लगाए जाने शुरू हो गए हैं. ऐसी राजनीतिक पार्टी, जो महिलाओं द्वारा बनाई जाए लेकिन वह आधी दुनिया यानी महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पुरुषों के हित के लिए भी काम करे.

दुनिया के तक़रीबन हर देश के समाज में हर स्तर पर महिलाओं को यौन शिक्षा के अभाव में यौनशोषण का सामना करना पड़ रहा है. वे पुरुषों की अहंकारी, गन्दी सोच की शिकार रही हैं. मौजूदा 21वीं सदी के दूसरे दशक में अब महिलाओं ने पुरुषों की क्रूर हरकतों का पर्दाफाश करने की ठान ली है. वे अब डर नहीं रही हैं बल्कि डरा रही हैं. अतीत की अपनी करतूतों से पुरुष डर रहे हैं. दागी पुरुष आज महिलाओं से भयभीत हैं कि कहीं वे भी मी टू का शिकार न हो जायें.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, जो मी टू के शिकार हैं, अपने को साफ़ स्वच्छ बताते व पुरुषों की तरफदारी करते हुए कहते हैं कि अमेरिका में जवानों के लिए ये मुश्किल समय है, वे महिलाओं द्वारा झूठे मामलों में अभियुक्त बनाए जा रहे हैं.  ट्रम्प के तमाम विचारों की तरह उनका यह विचार भी झूठ से लबरेज़ है.

ट्रम्प वह कर रहे हैं जो आमतौर पर पुरुष नहीं करते हैं, वे महिलाओं को एक सामूहिक जीवधारी करार देते हैं. बिलकुल इसी तरह प्रभावशाली महिलाएं भी दुनियाभर में कर रही हैं लेकिन उनका कदम यह बताना  है कि यह सामूहिक जीवधारी पुरुषों को अहंकारी मानता है.

मी टू के परिप्रेक्ष्य में अपने साथ हुई अश्लील हरकतों, दुराचारों को दुनिया के सामने लाने वाली कई देशों की महिलाएं क्या एक सामूहिक राजनीतिक ताक़त के तौर पर संगठित होंगी? सीधे सीधे कहें तो क्या महिलाओं की राजनीतिक पार्टी बनेगी? दरअसल, बीते समय में अमेरिका, यूरोप में ऐसी पार्टियां रही हैं लेकिन वे टिक न सकीं या अपने वोटरों को प्रभावित न कर सकीं. लेकिन अब वह समय गया है जब महिलाओं द्वारा महिलाओं के लिए एक राजनीतिक संगठन तेज और मज़बूत फोकस रख सकता है, जो प्रशासनिक कर्तव्यों को अंजाम देते हुए पुरुषों को सही रास्ते पर चलना भी सिखा देंगी. ऐसी पार्टी यक़ीनन पुरुषों द्वारा पुरुषों के लिए बनाई गयी दुनिया के खिलाफ होगी.

भारत में इतनी राजनीतिक पार्टियां हैं जिनके नाम शायद ही कोई भारतीय बता सके. वर्ष 2014 में हुए 543 लोकसभाई सीटों के आम चुनावों में 484 पार्टियां चुनावी मैदान में थीं. उनमें मुख्यधारा की पार्टियों के अलावा हिन्दुओं, मुस्लिमों, सिखों, किसानों, कम्युनिस्टों, मार्क्सवादियों और यहां तक की नास्तिकों व प्रेमियों के हित की बात करने वाली भी थीं.  लेकिन अभी तक, महिलाओं के लिए एक बड़ी पार्टी नहीं है.

दुनिया के दूसरे हिस्सों में महिलाओं की पार्टियां फेल हुईं. उनके फेल होने की अलगअलग वजह रहीं.  लेकिन अब, महिला और मीडिया बदल चुके हैं. माहौल सही हो रहा है. यही समय है की दुनियाभर से महिलाएं आगे बढें और राजनीति में सक्रिय हों ताकि पुरुषों की पुरुषवादी सोच को बदला जा सके.

इन बातों का रखें ध्यान और समय से पहले चुकाएं होम लोन

आप नौकरी करते हैं ताकि आपके परिवार को किसी तरह की समस्या ना हो, आपके बच्चों की पढ़ाई अच्छे स्कूलों में हो सके, उन्हें सारी मूलभूत सुविधाएं मिल सकें. इसके साथ ही सभी की ये भी हसरत होती है कि उनका अपना घर हो. लोग अपनी जिंदगी भर की कमाई घर बनवाने में लगा देते हैं. आखिर सभी को अपने घर की खुशी चहिए होती है.

आज के समय में कई फाइनेंस कंपनिया और बैंक अलग अलग तरह की स्कीमों और औफर्स के साथ लोन की सुविधाएं दे रहे हैं. आप लोन लेते हैं पर पैसा चुकाने की कोई अच्छी योजना ना होने के कारण आपको काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. तय समय में रकम वापस ना करने से ब्याज इतना बढ़ जाता है कि ब्याज वापस करना ही लोगों के लिए चुनौती बन जाता है.

कुछ बातें हैं जिनको आप ध्यान में रखें तो आपका होम लोन तय समय से भी कम वक्त में पूरा हो जाएगा और आप पर अतिरिक्त भार भी नहीं पड़ेगा.

  • पार्ट पेमेंट का महत्व

लोन चुकता करने की प्रक्रिया में ईएमआई से ज्यादा रकम जमा करने के लिए कहीं से बड़ी रकम आने का इंतजार नहीं करें. आप थोड़ा थोड़ा कर के ज्यादा रकम जमा कर सकते हैं. आपके पास आय के और भी स्रोत हो तो उससे भी रकम बचाने की कोशिश करें. इसके साथ ही आप गैर जरूरी खर्चों से भी बचें. जो भी आपकी कमाई है उससे ज्यादा से ज्यादा बचत की कोशिश करें.

  • बचत की रकम का इस्तेमाल

आपको अपनी बचत को बेहद सी प्लैंड तरीके से खर्च करना होगा. ऐसा नहीं कि आप अपने बचत का बड़ा हिस्सा घर खरीदने में ही लगा दें. एक स्मार्ट सोच रखिए और कोशिश करें कि आप अपके बचत का ज्यादा हिस्सा लोन को चुकाने में जाए.

  • ईएमआई बढ़ाकर वक्त घटाएं

अगर आपके पास फंड नहीं है और न ही तमाम खर्चों के बाद पैसा बचता है तो भी समय से पहले आप कर्ज चुका सकते हैं. आपको बता दें कि 9 प्रतिशत की ब्याज दर से 20 वर्ष के लिए 50 लाख रुपये के लोन पर अगर हर वर्ष 15 प्रतिशत ज्यादा ईएमआई चुकाई जाए तो भी 97वें महीने पूरा लोन चुकता हो जाएगा. अगर 10 से 15 प्रतिशत तक ईएमआई बढ़ाने मुश्किल हो रहा हो तो इतना तो जरूर सुनिश्चित कर लें कि लोन पर ब्याज दर बढ़ने पर ईएमआई का वक्त नहीं बढ़ जाए. ब्याज दर ऊपर जाए तो अवधि नहीं बढ़ने दें, बल्कि ईएमआई की रकम बढ़ा दें. अगर ब्याज दर घटे तो ईएमआई की रकम घटाने की जगह अवधि ही कम करें. इससे आपका लोन कम वक्त में चुकता हो सकता है.

  • दूसरे विकल्पों पर भी रखें ध्यान

लोम के प्रीपेमेंट से मानसिक सुकून मिलता है. पर आपको लोन चुकता करने में परेशानी आ रही हो तो आप दूसरे विकल्पों पर भी ध्यान दे सकते हैं. आपको प्रौपर्टी में किए गए निवेश का भी विस्तृत आकलन करना चाहिए. अगर आपके हाथ में पैसे नहीं बच रहे हों तो इसे बेचना भी बुरा नहीं है.

व्हाट्सऐप मैसेज को डिलीट करने के लिए कंपनी ने रखी ये शर्त

आप को याद होगा कि व्हाट्सऐप ने कुछ महीने पहले ही भेजे गए मैसेज को डिलीट करने का फीचर ‘delete for everyone’ जारी किया था. इस फीचर का एक ओर जहां कुछ लोगों ने उचित इस्तेमाल किया, वहीं कुछ लोगों ने इसका गलत इस्तेमाल करना भी शुरू कर दिया है. वहीं अब फेसबुक के स्वामित्व वाली कंपनी व्हाट्सऐप ने डिलीट फार एवरीवन फीचर में बड़ा बदलाव किया है. कंपनी ने भेजे गए मैसेज को सभी के लिए डिलीट करने के लिए नई शर्त रख दी है. आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार में.

व्हाट्सऐप के फीचर को ट्रैक करने वाले WABetaInfo के ट्वीट के मुताबिक भेजे गए मैसेज को डिलीट करने का रिक्वेस्ट यदि 13 घंटे 8 मिनट और 16 सेकेंड तक नहीं मिलता है तो मैसेज डिलीट नहीं होगा. उदाहरण के लिए यदि आपने किसी को गलती से कोई मैसेज भेज दिया है और उसे आपने डिलीट भी कर दिया लेकिन जिसको आपने मैसेज भेजा है और उसका मोबाइल बंद है तो आपका मैसेज डिलीट नहीं होगा. शर्त यह है कि यदि 13 घंटे 8 मिनट और 16 सेकेंड के बीच में मोबाइल औन हो जाता है तो मैसेज डिलीट हो जाएगा लेकिन इस अवधि के बाद नहीं होगा. बता दें कि अभी भी मैसेज को डिलीट करने का समय 1 घंटे 8 मिनट और 16 सेकेंड का है. कंपनी ने यह फैसला उन कुछ लोगों के लिए लिया है जो सालभर बाद भी तकनीकी तौर पर मैसेज को डिलीट करते हैं.

#MeToo : अब कंगना रानौत पर लगे शोषण करने के आरोप

बौलीवुड से लेकर देश के हर कोने में आजकल #metoo कैंपेन एक हौट टौपिक बना हुआ है. आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है पर चौंकाने वाली बात यह भी है कि कल तक जो महिला सशक्तिकरण पर बड़ी बड़ी बातें करते थे, उन पर भी महिलाएं यौन शोषण का आरोप लगा रही हैं.

कैंपेन का दूसरा मोड़

एक आरोप ने इस कैंपेन को दूसरा मोड़ ही दे दिया है. हैरान कर देने वाले इस मूवमैंट के तहत बौलीवुड में फ्लौप साबित हुए ऐक्टर अध्ययन सुमन ने हौट हीरोइन और #metoo कैंपेन का हिस्सा रहीं कंगना रानौत पर आरोप लगाया है कि वह अध्ययन का शोषण करती थीं.

#MeToo:

कौन हैं अध्ययन सुमन

मालूम हो कि ऐक्टर अध्ययन सुमन अभिनेता और नेता शेखर सुमन के बेटे हैं जिन्होंने हाल ही में ट्विटर पर एक पोस्ट के जरीए #metoo से जुड़ा अपना दुखड़ा रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई है.

अध्ययन ने ट्वीट कर लिखा, “बहुत सारे लोग मुझसे मेरी #metoo स्टोरी शेयर करने को कह रहे हैं. माफी चाहूंगा, जब 2 साल पहले यह किया तो मुझे अपमानित होना पड़ा. मेरे मातापिता पर उन दिनों भद्दे कमेंट्स तक किए गए.”

पीटती थीं कंगना

दरअसल साल 2016 में अध्ययन ने कहा था कि कंगना रानौत मुझे पीटती थीं. रितिक रोशन की बर्थडे पार्टी में किसी बात पर कंगना ने न सिर्फ मुझे थप्पड़ मारे, मुझे गंदीगंदी गालियां भी दीं.

रितिक से झगड़े पर मचा था हंगामा

हौट हीरोइन और बेबाक बयानी को लेकर कंगना हमेशा सुर्खियों में बनी रहती हैं. कंगना ने #metoo अभियान की सराहना की थी और विकास बहल पर ढेर सारे आरोप भी लगाए थे. कंगना का रितिक रोशन से दोस्ती और झगड़े को लेकर भी खूब हंगामा बरपा था.

अध्ययन ने अपने एक ट्वीट में लिखा, “अपने दर्द और बुरे अनुभव को शेयर करने का सबको अधिकार है. जिन लोगों ने मेरा समर्थन किया उनका दिल से धन्यवाद.”

क्या बोलीं कंगना

हिंदी फिल्म ‘राज-2’ में कंगना के साथ काम कर चुके अध्ययन के इस आरोप पर मीडिया से बात करती हुई कंगना पहले तो खूब हंसी फिर कहा, “उम्मीद करती हूं कि अध्ययन को उचित न्याय मिलेगा.”

हालांकि, #metoo अभियान अब बौलीवुड से निकल कर कौरपोरेट, मीडिया हाउस, पत्रकारों, नेताओं तक जा पहुंचा है और नए नए खुलासों से सनसनी फैला रहा है. आरोपों के जवाब में कुछ ने छवि खराब होने पर मानहानि का मुकदमा चलाने की भी धमकी दी है. मालूम हो कि इससे पहले कई मशहूर शख्सियतों पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली कई महिलाओं ने बाद में अपना बयान बदल दिया था.

मैच से पहले 20 बार बाथरूम जाने वाला मेसी फुटबौल का भगवान नहीं : माराडोना

अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर डिएगो माराडोना ने हमवतन स्टार खिलाड़ी लियोनल मेसी पर निशाना साधा है. उन्होंने मेसी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि उनमें नेतृत्व क्षमता नहीं है. वह मैच से पहले 20 बार बाथरूम जाते हैं. ऐसे खिलाड़ी को फुटबॉल का भगवान कतई नहीं मानना चाहिए.

नेतृत्व क्षमता नहीं

माराडोना ने रविवार को एक साक्षात्कार में कहा, मेसी लीडर नहीं है. उनके जैसे किसी खिलाड़ी को लीडर बनाने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए जो मैच से पहले 20 बार बाथरूम जाता हो. वह कोच या खिलाड़ियों से बात करने से पहले प्लेस्टेशन पर होते हैं, लेकिन मैदान पर आप उन्हें लीडर बनाना चाहते हैं. कई अहम मैचों में मेसी घबराए हुए रहते हैं. इसी को लेकर माराडोना ने यह टिप्पणी की.

हालांकि पूर्व फुटबॉलर ने माना कि क्रिस्टियानो रोनाल्डो के साथ मेसी दुनिया के महान फुटबॉलरों में शामिल हैं, पर नेतृत्व क्षमता में रोनाल्डो बेहतर हैं. 1986 में अर्जेंटीना ने माराडोना की कप्तानी में फीफा वर्ल्ड कप खिताब जीता था. लेकिन मेसी अपने देश को अपनी कमान में कोई बड़ी सफलता नहीं दिला सके हैं. इस साल रूस में फीफा वर्ल्ड कप में मेसी खास प्रदर्शन नहीं कर पाए और अर्जेंटीना को ग्रुप स्तर से बाहर होना पड़ा था.

बार्सिलोना के लिए अलग, देश के लिए अलग

माराडोना ने कहा, मुझे नहीं लगता कि मेसी को भगवान बनाना चाहिए. मेसी बार्सिलोना के लिए दिल से खेलते हैं, लेकिन जब वह अर्जेंटीना की जरसी पहनते हैं तो अलग ही खिलाड़ी बन जाते हैं.

माराडोना इन दिनों मैक्सिको में सेकंड डिविजन क्लब सिनालोआ को कोचिंग दे रहे हैं. पूर्व कप्तान ने कहा कि वह यदि अर्जेंटीना के कोच होते तो हमेशा कहते कि केवल मेसी पर ही भरोसा मत करो. यदि मेसी को उनकी रवानगी में खेलते देखना चाहते हैं तो उनसे टीम का नेतृत्व वापस ले लीजिए. वर्ल्ड कप के पहले नॉकआउट राउंड में फ्रांस के हाथों हारने के बाद से मेसी अर्जेंटीना के लिए तीन दोस्ताना मैचों में नहीं खेले.

पेले की पसंद रोनाल्डो नहीं मेसी

दिलचस्प है कि बीते सप्ताह ही ब्राजील के महान फुटबॉलर पेले ने पुर्तगाल के रोनाल्डो की तुलना में मेसी को अपना पसंदीदा खिलाड़ी माना था. इस साल रूस में हुए फीफा विश्व कप टूर्नामेंट में मेसी अहम मैचों से पहले ही दबाव में दिखे थे जबकि पुर्तगाल के कप्तान रोनाल्डो ने शुरुआती मैच में ही हैट्रिक ठोकी थी.

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