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हव्वा की बेटियां

क्यों आज घरों में छिप कर बैठने को
मजबूर की जा रही हैं हौवा की बेटियां?
क्यों उन पर लगे हैं पहरे पड़ोसी देश में
क्यों कसी जा रही हैं जंजीरों में बेटियां?
फतवे जारी करते हैं वीर पुरुष पड़ोस के
क्यों बंदिशों को फिर ढोती हैं बेटियां?
मिटा रहे धरती को जन्नतों की चाह में
क्यों बंदी बनती हैं इस चाह में बेटियां?
बन रहे हो तुम फरिश्ते धर्म और ईमान के
फिर पंख अपने क्यों कतरवा रही हैं बेटियां?
चाहत है तुम्हारी राज करने की जहान पर
पर बनेंगी बांदियां क्यों ये निरक्षर बेटियां?
तुम तो मरोगे और मारोगे इनसान को
क्यों सब से पहले कहर झेलती हैं बेटियां?
हसरतें पूरी करोगे तुम जन्नत की हूर की
पर यहां हवस बुझाने को हैं ये बेटियां?
क्यों जुर्म करते हो तुम दिनरात और
जुर्म सहने को पैदा होती हैं ये ?बेटियां?
हों अत्याचार यहां या वहां
किसी भी देश में
क्यों सहती हैं सब से पहले
हौवा की बेटियां?

– घुघूती बासूती

रक्षा उत्पादों पर विदेशी निर्भरता : भ्रष्टाचार का रास्ता

भारत ने इजरायल के साथ एक और रक्षा सौदा किया है. इस सौदे में भारत बराक 8 एयर एंड मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदेगा. यह सौदा 777 मिलियन डौलर यानी लगभग 5,700 करोड़ रुपए का है.

पिछले दिनों रूस के साथ हुए पांच अरब डौलर के एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीद सौदे के बाद भारत का यह दूसरा बड़ा सौदा है. इजरायल से मिलने वाला यह सिस्टम सतह से आकाश में मार कर के दुश्मन की हमलावर मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर देगा. यह सिस्टम नौसेना के सात हमलावर जहाजों की सुरक्षा के लिए लिया जा रहा है. इजरायल की नौसेना इस का इस्तेमाल कर रही है.

इस सिस्टम का उपयोग वायुसेना और थलसेना भी कर सकती है. डिफेंस सिस्टम बनाने वाली कंपनी  इजरायल एयरोस्पेस  इंडस्ट्रीज ने कहा है कि भारत के साथ मिल कर तैयार किए गए बराक 8 सिस्टम सौदे से दोनों देशों के रक्षा संबंध और मजबूत हुए हैं. दोनों देशों का रक्षा व्यापार अब बढकर 6 अरब डौलर यानी करीब 44 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का हो गया है.

कहने को यह सिस्टम भारत के सहयोग से बन रहा है जिस में डीआरडीओ व अन्य कंपनियां शामिल हैं. भारत हमेशा से सैन्य उत्पादों ओर तकनीक के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहा है. कहने को रक्षा मंत्रालय ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादों को तरजीह देने की कोशिश कर रहा है.

सेना की ओर से एक रिपोर्ट में कहा गया है कि उस ने ‘मेक इन इंडिया’ के तहत अब तक 25 परियोजनाओं की पहचान की है पर इस के लिए बजट नहीं है. जिस कारण इन परियोजनाओं पर आगे नहीं बढा जा सकता. हो सकता है कि इन्हें बंद करना पड़े.

सेना ने यह भी कहा था कि सरकार ने रणनीतिक साझीदारी में रक्षा उपकरण देश में बनाने की एक नई पहल की है. इस में विदेशी कंपनियों को कहा गया था कि वह भारतीय साझीदारी में देश में अपना कारखाना लगाएं. इन में बनने वाले उपकरणों की खरीद सरकार करेगी.

सेना का कहना है कि यह कहना मुश्किल है कि भविष्य में देश में रक्षा उपकरण बन सकेंगे या नहीं. असल में सरकार की इसी योजना के तहत रफाल सौदे में अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस कंपनी को साझीदार बनाया गया था. अब यह मामला सरकार के गले की फांस बना हुआ है.

असल में सरकार और सेना को अपने देश में रक्षा उपकरण बनाने में दिलचस्पी नहीं है क्योंकि विदेशों से आयात किए जाने वाले अरबों के सैन्य उपकरणों में करोड़ों की दलाली का खेल होता है.

अमेरिका, फ्रांस, रूस, इजरायल जैसे देश हथियारों के सब से बड़े व्यापारी हैं. भारत इन देशों से हथियारों का सब से बड़ा खरीदार है. यह दलाली राजनीतिक पार्टियों से ले कर सरकार, सेना और बिचौलियों के बीच बंटती है. इस में सब  के वारेन्यारे होते हैं इसलिए किसी भी पार्टी की सरकार यह खजाना लुटाना नहीं चाहती.

इसलिए सेना की रक्षा सामग्री खरीदने के मामले में विदेशों पर निर्भरता बढती जा रही है. पिछले चार सालों में इस में करीब पांच गुना बढ़ोतरी हुई है.

ये भी पढ़ें… :  EXCLUSIVE : मेक इन अंबानी, भारतीय रक्षा हितों पर रिलायंस समूह का साया

रोगी कल्याण मामला : केजरीवाल के 27 विधायकों को राहत

दिल्ली के केजरीवाल सरकार के विधायकों पर 2 मामलों में आज रोगी कल्याण मामले पर राहत मिल गई है. लाभ का पद के एक अन्य मामले पर चुनाव आयोग में सुनवाई चल रही है और 20 विधायकों की सदस्यता पर संशय अभी भी बरकरार है. इस मामले की गंभीरता इसी से जाहिर है कि आम आदमी पार्टी के विधायकों की रातों की नींद उङी हुई है और वे कोर्ट तक जाने से कन्नी काट रहे हैं.

आयोग द्वारा खारिज

वैसे रोगी कल्याण समिति मामले पर चुनाव आयोग ने पार्टी के सभी 27 विधायकों के खिलाफ लगे लाभ के पद के आरोपों को खारिज कर दिया है. यह आरोप दिल्ली के कई अस्पतालों से जुड़ी रोगी कल्याण समितियों के प्रमुख के रूप में नियुक्तियों के बाद लगा था.

इस तरह की याचिकाएं राष्ट्रपति के पास भेजी जाती हैं जो उन्हें चुनाव आयोग के पास भेजते हैं. इस के बाद आयोग अपनी राय देता है जिस के आधार पर राष्ट्रपति आदेश देते हैं.

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी किए गए एक आदेश के मुताबिक समितियां परामर्श देने का काम करती हैं. इस में स्वास्थ्य सुविधाओं, रणनीतियां बनाने आदि में मदद मिलती हैं.

लाभ का पद के एक अन्य मामले पर लटकी है तलवार

लाभ के एक अन्य पद पर 20 विधायकों पर लाभ लेने का आरोप है जिस पर आयोग द्वारा जल्द फैसला सुनाए जाने की संभावना है. अगर फैसला विरोध में गया तो 20 विधायकों की सदस्यता समाप्त हो जाएगी और खाली हुए जगहों पर फिर से चुनाव कराना पड़ सकता है.

टकराव से नुकसान किसे

वैसे केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है. केजरीवाल सरकार केंद्र पर काम न करने देने का आरोप लगाती रही है.

हाल ही में दिल्ली सरकार और एलजी में ठन गई थी और केजरीवाल अपने मंत्रियों के साथ एलजी के दफ्तर के अंदर धरने पर जा बैठे थे. हालांकि कोर्ट ने इस पर कङी नाराजगी जाहिर की थी.

उधर विपक्षी पार्टी भाजपा दिल्ली सरकार के कामकाज को लगातार निशाने पर ले कर उसे कोसती रही है. विपक्ष का मानना है कि इस से पहले भी दिल्ली में सरकार रही है पर केजरीवाल सरकार को काम कराने का हुनर ही नहीं है और राजनीतिक सूझबूझ की कमी है.

मुख्य सचिव मामले पर जमानत

मुख्य सचिव के साथ कथित मारपीट को ले कर भी केजरीवाल सरकार की किरकिरी हो चुकी है. इस मामले में फिलहाल कोर्ट ने केजरीवाल सहित सभी आरोपियों को जमानत दे दी है और मामले की सुनवाई 7 दिसंबर को तय किया है.

दिल्ली की राजनीति किस करवट बैठेगी यह तो वक्त ही बताएगा पर केंद्र और राज्य सरकार की इस लड़ाई से नुकसान निश्चित रूप से जनता का होगा. केजरीवाल सरकार को अगर दोबारा दिल्ली की सत्ता पर काबिज होना है तो उन्हें चाहिए कि इन टकरावों से दूर रहते हुए जनता से किए वादों को पूरा करने पर ध्यान दें.

मेरे माथे और होंठों के आसपास कालापन हो गया है. यह कालापन कैसे ठीक होगा.

सवाल
मेरे माथे और होंठों के आसपास कालापन हो गया है. यह कालापन कैसे ठीक होगा?

जवाब
होंठों का कालापन दूर करने के लिए सब से पहले तो उन्हें मौइश्चराइज करना जरूरी है. इस के लिए आप अधिक मात्रा में पानी पीएं और सोने से पहले अपनी

नाभि में विटामिन ई युक्त तेल की 3-3 बूंदें डालें. होंठों के कालेपन को दूर करने के लिए गुलाब की पत्तियों का पेस्ट अचूक उपाय है. इस के नियमित इस्तेमाल से होंठों का रंग हलका गुलाबी और चमकदार होता है. आप चाहें तो गुलाब की पत्तियों के पेस्ट में थोड़ी सी मात्रा ग्लिसरीन की भी मिला सकती हैं.

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लिप्स की टैनिंग को कहें बाय-बाय

चेहरा हमारे व्यक्तित्त्व का आईना होता है. यही कारण है कि हर महिला अपने चेहरे को खूबसूरत बनाने के लिए बहुत से जतन करती है. लेकिन यह भी सच है कि चेहरा तभी खूबसूरत दिखाई देता है जब त्वचा बेदाग व होंठ गुलाबी हों. फटे और टैन होंठ चेहरे की सुंदरता को फीका कर देते हैं.

इस में सब से ज्यादा चिंता की बात यह है कि महिलाएं अपने शरीर के अन्य पार्ट्स की टैनिंग को ले कर तो बहुत जागरूक होती हैं, लेकिन लिप्स की टैनिंग को ले कर बिलकुल भी अवेयर नहीं होती हैं. जानिए, होंठों की देखभाल करने के कुछ महत्वपूर्ण टिप्स :

1. कई बार होंठों पर घटिया किस्म का कौस्मैटिक यूज करने से भी होंठ टैन हो जाते हैं या फिर जरूरत से ज्यादा कौस्मैटिक के प्रयोग से भी होंठों का रंग गहरा पड़ सकता है.

2. धूम्रपान की वजह भी होंठ काले हो जाते हैं.

3. ज्यादा देर तक स्विमिंग करने से भी होंठों में कालापन आ सकता है.

4. ज्यादा कैफीन का सेवन होंठों के कालेपन का कारण बनता है.

टैनिंग दूर करने के टिप्स

लिप फेशियल : डर्मावर्ल्ड स्किन क्लिनिक के डर्मैटोलौजिस्ट ऐंड हेयर क्लीनिक्स डा. रोहित बत्रा का कहना है कि लोग आमतौर पर चेहरे पर ही फेशियल करते हैं. वो इस बात से अनजान होते हैं कि लिप फेशियल द्वारा लिप्स की टैनिंग से पूरी तरह मुक्ति पा सकते हैं. यही नहीं यह लिप्स को और भी ज्यादा आकर्षक बना देता है. मगर इसे किसी ऐक्सपर्ट से ही कराएं.

लिप ट्रीटमैंट व लिप मास्क : इन दिनों मार्केट में लिप की टैनिंग दूर करने के लिए लिप लाइटनिंग जैसे ट्रीटमैंट्स भी उपलब्ध हैं जो बहुत लोकप्रिय भी हो रहे हैं. इस के अलावा इन दिनों लिप मास्क भी लिप्स की सुंदरता बढ़ाने के लिए बहुत पौपुलर हो रहे हैं.

अन्य नुस्खे

अनार : अनार के रस के प्रयोग से भी टैनिंग दूर होती है. इसे हलदी के साथ मिला कर होंठों पर लगाएं. 15 मिनट बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें.

गुलाब की पंखुडि़यां : होंठों की टैनिंग को दूर करने के लिए गुलाब की पंखुडि़यां बहुत ही फायदेमंद होती हैं. इन्हें पीस कर थोड़ी सी ग्लिसरीन मिला कर घोल को रोज रात को होंठों पर लगा कर सो जाएं, सुबह धो लें.

नीबू : सुबह और शाम नीबू के रस को होठों पर रगड़ें. 10 मिनट बाद ठंडे पानी से चेहरा धो लें. यह टैनिंग दूर करने का बहुत ही कारगर उपाय है.

केसर और दूध : केसर के इस्तेमाल से भी होंठों का कालापन दूर होता है. कच्चे दूध में केसर मिला कर उसे रात को होंठों पर लगा कर सो जाएं, सुबह ठंडे पानी से चेहरा धो लें.

चुकंदर : चुकंदर को काट कर टुकड़ों को होंठों पर घिसें या फिर इस का रस निकाल कर नीबू के रस में मिला कर भी लगा सकती हैं. नियमित लगाने से होंठ गुलाबी व चमकदार बनते हैं.

चीनी का स्क्रब : होंठों की टैनिंग हटाने के लिए चीनी में नारियल तेल की कुछ बूंदें डाल कर ब्रश की सहायता से बिलकुल हलके हाथों से लिप्स को स्क्रब करें. होठों का कालापन दूर हो जाएगा.

 

यूट्यूब पर वीडियो ट्रेंड कराने के ये हैं 5 बेहतरीन तरीके

आजकल भारत में औनलाइन वीडियो सबसे ज्यादा देखा जा रहा है. लोगों को औनलाइन वीडियो देखने की लत सी लग गई है. आपने देखा होगा यूट्यूब पर हर रोज कई सारे वीडियो ट्रेंडिग कैटेगरी में दिखते हैं. ट्रेंडिंग का मतलब है कि उस वीडियो को खूब देखा जा रहा है. ऐसे में एक यूट्यूबर के लिए यह बहुत ही मायने रखता है कि उसका वीडियो ट्रेंडिंग वीडियो में शामिल हो जाए. तो चलिए आज हम आपको यूट्यूब पर वीडियो ट्रेंड कराने का तरीका बताते हैं.

वीडियो का डिस्क्रिप्शन

कई यूट्यूब चैनल वाले डिस्क्रिप्शन लिखते हैं. ऐसे में वीडियो के वायरल होने का कोई मतलब ही नहीं है. डिस्क्रिप्शन पूरा लिखें और हिन्दी-अंग्रेजी दोनों में लिखें. इसके अलावा इसमें भी ट्रेंडिंग कीवर्ड का ध्यान रखें. कोशिश करें कि डिस्क्रिप्शन मिनिमम 300 शब्दों में हो. इसके अलावा चैनल को सब्सक्राइब कराने के लिए डिस्क्रिप्शन में अपने दूसरे पौपुलर वीडियो का लिंक और चैनल का लिंक भी डालें.

Tags और Keywords जरूर डालें

कोई भी वीडियो तभी वायरल होगी जब उसे ज्यादा-से-ज्यादा लोग देखेंगे और लोग तभी देखेंगे जब ट्रेडिंग कीवर्ड और टैग वीडियो में डाला जाएगा. इसलिए जब भी यूट्यूब पर वीडियो अपलोड करें तो ट्रेंडिग कीवर्ड और टैग्स जरूर डालें. कीवर्ड की शुरुआत इस तरह करें. जैसे- जियो फोन कैसे बुक करें, इसके बाद जियो फोन और जियो कीवर्ड यूज करें. कीवर्ड का यूज वीडियो के टाइटल में कर सकते हैं. ट्रेंडिग कीवर्ड के लिए ट्विटर ट्रेंडिंग देखें.

वीडियो का थंबनेल

वीडियो वायरल होने के लिए उसका थंबनेल (वीडियो शुरू होने से पहले दिखने वाली फोटो) शानदार होना जरूरी है, क्योंकि थंबनेल को देखकर ही आप और हम किसी वीडियो पर क्लिक करते हैं. थंबनेल हमेशा ऐसा बनाएं जिसे देखकर यूजर क्लिक करने पर मजबूर हो जाए.

सोशल मीडिया शेयरिंग

कोई भी चीज सोशल मीडिया से ही वायरल होती है, इसलिए कुछ बड़े सोशल मीडिया ग्रुप्स को ज्वाइन करें और यूट्यूब पर वीडियो अपलोड करने के साथ ही सोशल मीडिया पर शेयर करें. साथ ही शेयर करते समय ट्रेंडिंग हैशटैग जरूर यूज करें.

लाइक और शेयर के लिए अंत में कहें

कई यूट्यूबर ऐसे होते हैं जो वीडियो की शुरुआत में ही लाइक, कमेंट, सब्सक्राइब और शेयर के लिए बोल देते हैं. ऐसे में लोग वीडियो भी नहीं देखते हैं, सब्सक्राइब तो बात ही दूर है. इसलिए सब्सक्राइबर को हमेशा के लिए अपना बनाने के लिए वीडियो के अंत में लाइक, शेयर के लिए कहें.

इस फोन में आप एक समय में कर सकेंगे पांच भाषाओं का प्रयोग

स्मार्टफोन कंपनी पैनासोनिक ने एलुगा जेड1 और एलुगा जेड1 प्रो को भारत में लौन्च कर दिया है. बता दें, ये दोनों फोन माइक्रोसौफ्ट स्विफ्ट-कीबोर्ड के साथ आते हैं. कंपनी ने इस फोन की सबसे खास बात बताई है कि फोन में दिए गए कीबोर्ड की मदद से यूजर्स एक समय में पांच भारतीय भाषाओं का प्रयोग कर  सकेंगे. इन दोनों फोन्स में केवल रैम और इंटरनल स्टोरेज का ही अंतर है.

दोनों ही फोन ड्यूल-सिम सपोर्ट के साथ आते हैं, इसके साथ ही ये एंड्रौइड 8.1 औरियो पर काम करता है. जहां एलुगा जेड1 में 3 जीबी रैम और 32 जीबी की स्टोरेज दी गई है. वहीं एलुगा जेड1 प्रो में 4 जीबी रैम और 64 जीबी स्टोरेज दी गई है. इनमें 6.19 इंच एचडी+ डिस्प्ले दिया गया है जिसका पिक्सल रेजोल्यूशन 720×1500 है. दोनो फोन की स्टोरेज को माइक्रोएसडी कार्ड की मदद से स्टोरेज  को 128 जीबी तक बढ़ाया जा सकता है. फोन्स को पावर देने के लिए 4000 एमएएच की बैट्री दी गई है.

इन फोन्स में फोटोग्राफी के लिए दो रियर कैमरे मौजूद हैं. इनका प्राइमरी सेंसर 13 मेगापिक्सल और सेकेंडरी कैमरा 2 मेगापिक्सल का है. वहीं, 8 मेगापिक्सल का फ्रंट सेंसर दिया गया है. इसकी कैमरा ऐप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टाइम लैप्स, स्लो मोशन, ब्यूटी मोड, बैक लाइट, लाइव फोटो, ग्रुप सेल्फी और डिजिटल अवतार को सपोर्ट करती हैं.

भारत में फोन की कीमत:

एलुगा Z1 की कीमत 14,490 रुपये है, वहीं, एलुगा Z1 Pro की कीमत 17,490 रुपये है. इन दोनों स्मार्टफोन्स की सेल 31 अक्टूबर से शुरू होगी. ये दोनों ही स्मार्टफोन्स औफलाइन रिटेल स्टोर्स से भी खरीदा जा सकता है. कीमत के आधार पर इस फोन की टक्कर Honor 8X से होगी. Honor 8X के 4 जीबी रैम वेरिएंट की कीमत 14,999 रुपये है.

कोहली का कमाल, पर रहेगा मलाल

किसी महान बल्लेबाज की एक निशानी यह होती है कि वह इतनी आसानी से खेल पर हावी हो जाता है कि विपक्षी टीम चाह कर भी कुछ नहीं कर पाती. विराट कोहली ऐसे ही बल्लेबाज का नाम है.

वैसे तो क्रिकेट बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग का ‘गोल्डन ट्रायंगल’ कहा जाता है पर मशहूरी की सारी मलाई ज्यादातर बल्लेबाज ही चखते आए हैं और हाल ही में यह मलाई विराट के हिस्से में आई है.

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने अपने नाम एक और यादगार रिकौर्ड दर्ज कर लिया है. उन्होंने वनडे इंटरनैशनल मैचों में सब से कम पारियों में 10 हजार रन पूरे करने वाले बल्लेबाज का तमगा हासिल कर लिया है. इस के साथ ही उन्होंने क्रिकेट इतिहास के महानतम बल्लेबाजों में से एक सचिन तेंदुलकर के 17 साल पुराने वर्ल्ड रिकौर्ड को तोड़ दिया है.

बुधवार, 24 अक्टूबर, 2108 को वेस्टइंडीज के साथ खेले गए दूसरे वनडे मैच से पहले विराट कोहली के नाम 212 मैचों की 204 पारियों में 9919 रन थे. उन्हें इस रिकौर्ड तक पहुंचने के लिए 81 रनों की जरूरत थी जिसे उन्होंने अपने ही स्टाइल में हासिल किया. हां, उन्हें इस बात का मलाल जरूर रहेगा कि वेस्टइंडीज की नौसिखिया टीम के बल्लेबाजों ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए इस मैच को आखिरी गेंद पर टाई करा दिया जिस से 10000 रन और 37वीं सेंचुरी बनाने का उन का जश्न थोड़ा फीका पड़ गया.

विराट कोहली ने वेस्टइंडीज के खिलाफ विशाखापत्तनम में हुए मैच के दौरान पारी के 37वें ओवर में एश्ले नर्स की गेंद पर यह मुकाम हासिल किया.

विराट कोहली ने सिर्फ 205 पारियों में 10 हजार रन पूरे कर लिए जबकि सचिन तेंदुलकर ने 31 मार्च, 2001 को 259 पारियों में 10 हजार रन पूरे किए थे यानी विराट ने सचिन से 54 पारियां कम खेली हैं.

विराट कोहली के इस कारनामे पर सचिन ने ट्वीट कर उन्हें बधाई दी और आगे भी इसी तरह खेलने की शुभकामनाएं दी हैं. सब से कम पारियों में 10 हजार रन पूरे करने में तीसरे पायदान पर भारत के ही कप्तान रह चुके सौरभ गांगुली हैं, जिन्होंने 263 पारियों में 10000 रनों का आंकड़ा छुआ था.

यहां यह बता दें कि 18 अगस्त, 2008 को श्रीलंका के खिलाफ अपने वनडे कैरियर की शुरुआत करने वाले कोहली विराट कोहली ने जनवरी, 2017 में लिमिटिड ओवरों के मैचों में कप्तानी संभाली थी.

यह रहेगा मलाल

विराट कोहली को इंटरनेशनल क्रिकेट मैच खेलते हुए तकरीबन 10 साल हो गए हैं. इतने सालों में इस खेल में बहुत ज्यादा बदलाव आया है. लिमिटेड ओवरों के मैचों का क्रेज बढ़ा है. 50 ओवरों के वनडे मैचों को भी अब बोरिंग माना जाता है.

क्रिकेट में लोगों की दिलचस्पी बनाए रखने के लिए टी 20 मैचों को खूब बढ़ावा दिया जाता है. इंडियन प्रीमियर लीग जैसा प्राइवेट टूर्नामेंट छा गया है. इस से सब से ज्यादा नुकसान गेंदबाजों को झेलना पड़ा है. खासकर तेज गेंदबाजों का तो मानो अकाल पड़ गया है.

सचिन तेंदुलकर के समय में दुनिया की हर टीम में खतरनाक गेंदबाजों की तिकड़ी या जोड़ा हुआ करता था जो अच्छे से अच्छे बल्लेबाज की भी अग्निपरीक्षा ले लेते थे. आज किसी से पूछा जाए तो दिमाग पर जोर दे कर भी नहीं बता पाएगा कि फलां टीम का फलां तेज गेंदबाज दुनिया के अच्छे से अच्छे बल्लेबाजों को नाको चने चबवा देता है. सचिन तेंदुलकर के समय के वसीम अकरम, वकार यूनुस, शोएब अख्तर, चामिंडा वास्, मुथैया मुरलीधरन, ग्लेन मैक्ग्रा, ब्रेट ली, एलन डोनाल्ड, शौन पोलाक जैसे गेंदबाज अब ढूंढे नहीं मिलते हैं.

अब कोई शेन वार्न यह नहीं कहता कि सचिन तेंदुलकर उन के सपने में आ कर उन्हें अपनी बल्लेबाजी से डराते हैं. गलती से अगर कोई गेंदबाज आ भी जाता है तो फिटनेस के चलते वह ज्यादा समय तक टिक नहीं पाता है.

विराट कोहली की बल्लेबाजी के हुनर पर कोई शक नहीं है पर उन्होंने कभी ऐसे गेंदबाजों का सामना नहीं किया है जिन्होंने क्रिकेट जगत में अपनी रफ़्तार से खौफ पैदा किया था या अपनी फिरकी पर सब को नचाया था. अगर ऐसा हो पाता तो खुद विराट अपने आप पर फख्र महसूस करते.

बहरहाल, विराट कोहली ने वनडे मैचों में सब से तेज 10000 रन बना कर एक मील का पत्थर छुआ है जो अपने आप में मिसाल है.

फर्जी बैंक ऐप से हो रहा ग्राहकों का डेटा चोरी

हम सभी अपने फोन में अपने बैंक के ऐप को डाउनलोड करते हैं और बैंक से संबंधित जानकारी लेते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि गूगल प्लेस्टोर पर स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, सिटी समेत कई शीर्ष बैंकों के ऐसे ऐप मौजूद हैं जो कि फर्जी हैं और उनसे इन बैंकों के हजारों ग्राहकों से जुड़े डाटा चोरी हो रहे हैं. इनफार्मेशन टेक्नोलौजी की सुरक्षा से जुड़ी कंपनी सोफोज लैब्स ने एक रिपोर्ट में यह दावा किया है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि इन फेक एंड्राइड ऐप का लोगो भी असली बैंक के लोगो की तरह है जिससे ग्राहकों के लिए असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो रहा है. बतौर रिपोर्ट, ऐप में मौजूद मालवेयर संभवत हजारों उपभोक्ताओं के खाते से और क्रेडिट कार्ड से जुड़ी सूचनाएं चोरी कर चुके हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, सिटी बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक औफ बड़ौदा और यस बैंक के फर्जी ऐप प्लेस्टोर पर मौजूद हैं.

हालांकि इस पर बैंकों का कहना है कि उन्हें ऐसे फर्जी ऐप के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है. जबकि, कुछ बैंकों ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और उन्होंने कंप्यूटर सिक्योरिटी से जुड़ी घटनाओं पर नजर रखने वाली नेशनल नोडल एजेंसी CERT-in को इस बारे में बता दिया है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि नकली ऐप्स ने सात बैंकों को निशाना बनाया है जिनमें स्टेट बैंक औफ इंडिया (SBI), ICICI बैंक, Axis बैंक, सिटी बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक औफ बड़ौदा और यस बैंक हैं. यस बैंक ने कहा है कि उसने इस मामले की जानकारी बैंक के साइबर फ्रौड डिपार्टमेंट को दे दिया है. हालांकि इस पर एसबीआई की ओर से अब तक कोई जानकारी नहीं मिली है. साथ ही ICICI और Axis बैंक की ओर से भी कोई जवाब नहीं दिया गया है.

इसका खुलासा करने वाली सोफोज लैब्स के शोधकर्ता पंकज कोहली का कहना है कि एंड्राइड के लिए नकली ऐप कोई नई बात नहीं है. उन्होंने कहा कि आगे भी अन्य तरह के ऐप में ऐसे मालवेयर सेंध लगा सकते हैं.

दीवाली पर पटाखों के शोर में दब सकते हैं ग्रीन नियम

प्रकाशोत्सव यानी रौशनी के त्योहार दीवाली के मनाये जाने के एक पखवाड़ा पहले सुनाया गया सुप्रीम कोर्ट का फैसला देश में कितना लागू होगा, यह दीवाली के दूसरे दिन मालूम हो सकेगा.  लेकिन, पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट के फैसले पर अमल होना फिलहाल नामुमकिन है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनज़र, अब पूरे देश में कम धुएं और कम आवाज़ वाले पटाखे यानी ग्रीन पटाखे ही बनाए और छुडाए जा सकेंगे. पटाखे अब ध्वनि और वायु प्रदूषण के मानकों के तहत बनाए जाएंगे. कोर्ट ने यह भी कहा है कि पटाखे औनलाइन साइट्स पर नहीं बेचे जा सकेंगे.

ध्वनि प्रदूषण नियमों के मुताबिक, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक पटाखे चलाने पर रोक है, लेकिन शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि दीवाली के मौके पर इस अवधि को शाम 8 बजे से 10 बजे तक सीमित कर दिया जाए.

दीवाली से मात्र एक पखवाड़े पहले आए कोर्ट के फैसले पर पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इतने कम समय में शर्तों पर अमल होना नामुमकिन सा है. उन्हें लगता है कि इस दीवाली पर प्रदूषण बढ़ सकता है.  हालांकि, कोर्ट के निर्देशों पर पालन हो जाए तो प्रदूषण का स्तर नहीं बढेगा.

यह अच्छी बात है कि अब सिर्फ ईको-फ्रेंडली पटाखों की बात होने लगी है.  लेकिन, जब ज़्यादातर पटाखे मैनुफैक्चरिंग कंपनियों के दरवाजों के बाहर आ चुके हैं और बाजारों में पहुंच भी रहे हैं तो थोक विक्रेता और फुटकर विक्रेता उन्हें बेचेंगे ही और लोग उन्हें खरीदेंगे भी. फिर वे स्वाभाविक रूप से उन पटाखों का इस्तेमाल भी करेंगे.

दरअसल, भारतीय बाज़ार में अभी ग्रीन पटाखों की पहचान नहीं बन पाई है. ग्राहक और ट्रेडर दोनों में जागरूकता नहीं है. सो, सरकार को चाहिए कि वह सब से पहले नौन-पोलूटिंग पटाखों के लिए एक ट्रेडमार्क बनाए और उसे प्रचारित करे.

यह भी सच है कि बड़े देश भारत में ग्रीन पटाखों के पूरी तरह चलन में आने में 1 से 3 साल का समय लग सकता है.  फिलहाल, पटाखों के लिए 4 मीटर की दूरी पर अलगअलग जोन के लिए 90 से 125 डेसिबल तक ध्वनि की ही इजाज़त है. पटाखे बनाने में कुछ धातुओं और केमिकलों के इस्तेमाल पर रोक है. लेकिन मैनुफैक्चरर्स और सरकार में कंटेंट को लेकर एक राय नहीं बन पाई है और इंडस्ट्री में 10 फीसदी इकाईयां ही सुझाए गए इन्ग्रीदिएंट्स का इस्तेमाल कर रही हैं.

गौरतलब है की कोर्ट ने वर्ष 2005 में ही पटाखों के शोर को नियंत्रित करने की पहल की थी, लेकिन अभी तक इस पर अमल नहीं हो पाया है.  कोर्ट ने, हालांकि, अब कई बंदिशों के साथ इजाज़त दी है, लेकिन सवाल कायम है. ग्रीन पटाखों की अभी तक कोई निश्चित परिभाषा तय नहीं हो पाई है. देश में बिकने और विदेशों को एक्सपोर्ट यानी निर्यात करने वाले पटाखों के मानक अलगअलग हैं. 80 फीसदी पटाखा इंडस्ट्री असंगठित क्षेत्र में है. ऐसे में बहुत बड़े स्तर पर काम करने  की ज़रुरत है, तब कहीं जा कर पूरे देश में दीवाली पर ग्रीन पटाखे छुडाए जा सकेंगे, वरना तो पटाखों के शोर में ग्रीन नियम दबे ही रहेंगे.

मां के साथ नहीं रहती आलिया, जानें क्या है वजह

बौलीवुड एक्ट्रेस सोनी राजदान आज गुरुवार (25 अक्टूबर) को अपना 62वां जन्मदिन मना रही हैं. सोनी राजदान बौलीवुड के फेमस डायरेक्टर महेश भट्ट की पत्नी हैं, इनकी बेटी आलिया भट्ट फिल्मी दुनिया का मशहूर नाम हैं.

बर्मिंघम में जन्मीं सोनी के पिता नरेंद्र नाथ राजदान कश्मीरी पंडित और मां गर्ट्रूड होल्ज़र जर्मन थीं. एक्टिंग का हुनर सोनी को पढ़ाई के बाद भारत में खींच लाया, जहां उन्होंने छोटे और बड़े पर्दे पर अहम भूमिका अदा की. सोनी राजदान को टीवी सीरियल ‘साहिल’ और ‘गाथा’ में भी अहम भूमिका निभाने का मौका मिला. इसके बाद पिछले साल आए ‘लव का है इंतजार’ सीरियल में उन्होंने राजमाता का किरदार निभाया था.

‘राजी’ फिल्म में सोनी अपनी बेटी आलिया भट्ट के साथ भी नजर आ चुकी हैं. यूके में इंग्लिश थिएटर करने के बाद सोनी राजदान छोटे पर्दे की ओर आ गई. यहां इनको उस समय दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले फेमस सीरियल ‘बुनियाद’ में सुलोचना का किरदार मिला, इस किरदार के कारण ही ये घर-घर में मशहूर हुईं.

#MeToo कैंपेन पर खुलासा करते हुए एक्ट्रेस सोनी राजदान ने  बताया था, कि ”एक फिल्म के शूट पर उनके साथ रेप की कोशिश की गई थी. हालांकि, वो शख्स कामयाब नहीं हो पाया था.”

इन फिल्मों में सोनी ने किया काम

सोनी राजदान ने ’36 चौरिंघी लेन’ फिल्म से फिल्मी दुनिया में डेब्यू किया था. इसके बाद यें  ‘त्रिकाल’, ‘खामोश’, ‘सड़क’, ‘साथी” आहिस्ता-आहिस्ता’, ‘मंडी’, ‘सारांश’, ‘गुमराह’, ‘मानसून वेडिंग’, ‘पेज-3’, ‘पटियाला हाउस’, ‘शूटआउट एट वडाला’, और ‘राजी’ जैसी फेमस फिल्मों में अपनी अदाकारी दिखा चुकी हैं.

मां के साथ नहीं रहती आलिया

आलिया पहले अपने मां-पापा के साथ जुहू में नहीं रहती है. इसी साल आलिया भट्ट अपने नए फ्लैट में शिफ्ट हो चुकी हैं. बता दें, उनके पिता महेश भट्ट करीब 3.5 करोड़ रुपए का यह फ्लैट आलिया को  गिफ्ट किया है. रिपोर्ट के अनुसार, एक ही शहर में अलिया के अलग रहने के बारे में, मां सोनी का कहना है कि बेटी को प्राइवेसी और काफी जगह की जरूरत थी, इसीलिए उसने यह फैसला लिया है. सोनी राजदान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह अपनी बेटी आलिया को पूरा सपोर्ट करती हैं. फिल्मी दुनिया में नाम कमा रही आलिया को उन्होंने घर से लेकर बाहर तक हर तरह की छूट दे रखी है, क्योंकि उनका मानना है कि वो अपना फैसला सोच-समझकर लेती हैं.

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