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गूगल में आज से लागू होगा वि3 कोड

गूगल कैप्चा कोड का इस्तेमाल करता है. क्योंकि इससे यह पता लगाया जा सके कि यूजर्स रोबोट हैं या इंसान. लेकिन आज से कैप्चा कोड को बंद कर दिया जाएगा. इस कोड को लागू करने के बाद से गूगल का काफी समय खराब हो रहा था. इस कोड के जरिए कंपनी यह पता लगाती थी कि कहीं यूजर्स रोबोट तो नहीं.

गूगल में पहले कैप्चा कोड आड़े-तिरछे अक्षरों के जिफ फार्मेट में होते थे या फिर एमपी 3 वाइस रिकौर्डिंग के. सौफ्टवेयर प्रोग्राम वाले इन कैप्चा कोड को रोबोट टाइप नहीं कर सकते थे और समझ भी नहीं पाते. इसके जरिए ही गूगल को इंसान और रोबोट में फर्क पता चल जाता था.

लेकिन अब कंपनी का मानना है कि रोबोट कैप्चा कोड को पढ़ ही नहीं सकते. इसलिए अब अंकों के आधार पर रिकैप्चा वी3 कोड लागू किया जा रहा है. इसमें यूजर्स को लंबे समय तक कोड टाइप करने की परेशानी नहीं होगी.

नया वी3 कोड तीन स्टेप पर काम करेगा

पहला- शुरुआत में यह तय किया जा सकता है, यूजर को कब आगे बढ़ने दिया जा सकता है या कब उसके और वेरिफिकेशन की जरूरत है. यानि कि दो फैक्टर्स का औथेंटिकेशन और फोन वेरिफिकेशन.

दूसरा- आप खुद के सिग्नल से स्कोर को जोड़ सकते हैं यहां रिकैप्चा नहीं पहुंच सकता.

तीसरा- आप रिकैप्चा स्कोर को मशीन लर्निंग मौडल को ट्रेंड करने में एक सिग्नल के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे  छेड़खानी को रोका जा सके.

इस प्रक्रिया से वेबसाइट पर आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी और बार-बार ब्राउजर को वेरिफाई नहीं करना पड़ेगा. इस नए कोड को सैनफ्रांसिस्को की कंपनी ने बनाया है.

रणजी में पहली बार इस गेंदबाज ने चार गेंदो पर लिए चार एलबीडब्लू

जम्मू कश्मीर के तेज गेंदबाज मोहम्मद मुदस्सिर ने रणजी ट्रौफी में अपने स्पेल में राजस्थान के चार बल्लेबाजों को लगातार चार गेंदो पर आउट किए. खास बात ये है कि ये सभी चारो विकेट एलबीडब्लू थे. रणजी ट्राफी के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ. रणजी ट्रौफी एलीट के ग्रुप सी मैच में मुदस्सिर ने ये कारनामा किया. आपको बता दें कि रणजी मुकाबले में 30 साल बाद ऐसा रिकार्ड बना है. इससे पहले 1988 में दिल्ली के हंकर सैनी ने हिमाचल प्रदेश के खिलाफ ऐसा कारनामा किया था. हालांकि उसमें भी चारो विकेट एलबीडब्लू नहीं थे.

अपनी इस धमाकेदार परफार्मेंस में मुदस्सीर ने पहले चेतन बिस्ट को आउट किया. अगली गेंद पर उन्होंने तजिंदर सिंह ढिल्लन को पवेलियन का रास्ता दिखाया. उसके बाद अपनी हैट्रिक पर उन्होंने राहुल चहर को चलता किया. अंत में उनके शिकार बने तनविर मुशरत. तनविर को आउट कर के उन्होंने ये नायाब रिकार्ड अपने नाम किया है.

टौस जीत कर जम्मू कश्मिर ने पहले गेंदबाजी का निर्णय लिया था. कप्तान परवेज रसूल की अगुवाई में जम्मू ने राजस्थान को 379 रनों पर आल आउट कर दिया. इस दौरान चेतन बिष्ट ने सर्वाधिक 159 रनों की पारी खेली. वहीं मुदस्सिर ने अपने स्पेल में 90 रन दे कर सर्वाधिक 5 विकेट लिए. दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक जम्मू-कश्मीर ने सात विकेट पर 186 रन बना लिए थे.

भारती लेकर आ रही हैं अपना नया चैट शो

कौमेडियन भारती सिंह आपने जबरदस्त परफार्मेंस से लोगों का दिल जीत लेती हैं. अब खबरें हैं कि भारती ने अपना नया चैट शो शुरू किया है. इसके साथ ही वे अपना टौक शो करने वाले कपिल शर्मा, करण जौहर, नेहा धूपिया जैसी अन्य शख्स‍ियतों की कतार में खड़ी हो गई हैं.

बता दें कि भारती के इस शो का नाम है ‘भारती का शो-आना ही पड़ेगा’. इस शो का नाम अपने आप में यूनि‍क है. पहली बार भारती इस तरह के शो में दिखेंगी. भारती ने अपने आने वाले चैट शो के बारे कहा, यह शो तीन नवंबर यानी आज से प्रसारित होगा. मुझे पूरा विश्वास है कि दर्शकों को यह शो पसंद आएगा. कई गेम्स और मजे के साथ वाला यह शो बहुत ही निजी है.

उन्होंने आगे कहा कि वह कपिल शर्मा को टीवी पर वापस देखना चाहती हैं. हर कोई कपिल की वापसी का इंतजार कर रहा है. आपको रुलाने वाले कई होते हैं, लेकिन आपको हंसाने वाले सिर्फ कुछ लोग होते हैं. इसलिए कुछ लोगों को वापसी करनी चाहिए.

बता दें कि भारती सिंह अपने पति हर्ष लिंबाचिया के साथ बिग बौस-12 के घर में एंट्री करने वाली थीं. लेकिन बीमारी के चलते जा नहीं जा सकी.

भारती सिंह टीवी वर्ल्ड का सबसे पौपुलर चेहरा हैं. अपने शानदार कौमिक स्टाइल की वजह से उन्होंने लोगों का कम समय में ही दिल जीत लिया. वे कई रियलिटी शो का हिस्सा बन कर चुकी हैं. भारती सिंह इंडियाज गौट टैलेंट, कौमेडी सर्कस, कौमेडी नाइट्स बचाओ जैसे टीवी शो का हिस्सा रह चुकी हैं. वे अब अपना चैट शो लौन्च कर रही हैं. इसमें वे होस्ट के रूप में होंगी.

लालू यादव के बेटे ने किया 6 माह पुरानी शादी तोड़ने का फैसला, आखिर क्यों?

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें जेल जाने के बाद भी खत्म नहीं हो पा रही. इस बार मुश्किल चारा घोटाले से संबंधित कानूनी काररवाई से नहीं बल्कि अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को ले कर है जिन्होंने 6 महीने पूर्व हुई शादी को खत्म करने के लिए अदालत का रूख कर तलाक के लिए अर्जी दाखिल कर दी है.

तलाक की अर्जी दाखिल करने के बाद मीडिया में खबर आते ही लोगों में उत्सुकता बढ़ गई कि आखिर क्या वजह रही होगी कि इतने कम समय में ही तलाक का फैसला लेना पड़ा. सियासी परिवारों में आमतौर पर घर की लड़ाईझगडे को बाहर नहीं आने दिया जाता. वजह इस से जनता में गलत मैसेज जाता है, दूसरा देश की राजनीति इतनी गंदी हो चुकी है कि सियासी फायदे के लिए विपक्षी पार्टी निजी जीवन पर भी कटाक्ष करने से नहीं चूकतीं.

Tej Pratap Yadav files divorce case against Aishwarya Rai

मंत्री भी रह चुके हैं

यों तेज प्रताप खुद पिछली सरकार में मंत्री रह चुके हैं. पिता लालू प्रसाद यादव और माता राबड़ी देवी बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और हाल ही में उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल ने कई सीटों पर जीत दर्ज की है.

ऐसा नहीं है कि तलाक कोई अजूबा चीज है जिसे इस से पहले किसी ने नहीं लिया मगर चूंकि यह बिहार के बड़े सियासी घराने को लेकर था, लिहाजा मीडिया में मसालेदार खबर बन गई. वह भी तब जब लगभग 2 महीने पहले सियासी गलियारों से यह चर्चा आम थी कि तेज प्रताप यादव की पत्नी ऐश्वर्या आगामी विधानसभा या लोकसभा चुनाव लड़ सकती हैं.

बड़े राजनीतिक परिवार से हैं ऐश्वर्या

इस की वजह भी है क्योंकि ऐश्वर्या खुद मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद यादव की नतिनी और पूर्व मंत्री चंद्रिका राय की पुत्री हैं. 6 माह पुरानी यह शादी बड़ी धूमधाम से की गई थी और इस शादी में शिरकत करने बडे नाम और ओहदेदार वाले आए थे.

छपरा से चुनाव लड़ने की थी संभावना

ऐसी चर्चा थी कि आगामी लोकसभा में ऐश्वर्या को छपरा लोकसभा सीट से राष्ट्रीय जनता दल के टिकट से लड़ाया जाएगा. पार्टी के स्थापना दिवस पर बिहार के मुख्य सड़कों पर लगे बड़े बड़े होर्डिंग्स में ऐश्वर्या की फोटो इस बात की पुष्टि भी कर रहे थे. मगर कानूनी रूप से ऐसा साल 2020 तक मुमकिन नहीं था. वजह अगले लोकसभा चुनाव तक ऐश्वर्या की उम्र 25 साल नहीं होगी. 10वीं की सर्टिफिकेट के मुताबिक ऐश्वर्या की जन्मतिथि 10 फरवरी 1995 है.

हालांकि चुनाव आयोग वोटर लिस्ट में दर्ज जन्मतिथि को भी वैध मानता है और यह खबर चल रही थी कि इस तोड़ के आधार पर ऐश्वर्या को छपरा संसदीय सीट से लड़ाया जा सकता है.

मनाने की कोशिश जारी

हालांकि बड़े भाई और भाभी की लड़ाई की खबर मिलते ही तेजस्वी यादव जो तेज प्रताप के छोटे भाई हैं और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं तुरंत घर पहुंचे और मामले को शांत कराने की कोशिश की. मगर तेज प्रताप इस से पहले कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल कर चुके थे.

खबरों के अनुसार उधर, लालू प्रसाद यादव खुद नहीं चाहते कि दोनों में तलाक हो क्योंकि इस से परिवार का नाम खराब होगा और विपक्ष सियासी फायदे लेने से चूकेंगे नहीं.

बहरहाल, इन की निजी जिंदगी पर भी लोग चटखारे लेले कर कहानी गढ़ते रहेंगे और मीडिया में मसालेदार खबर बनती रहेगी. पर सवाल आखिर यह जरूर है कि ऐसी क्या वजह रही होगी जो 6 महीने पुरानी शादी टूटने के कगार पर आ गई?

एटीएम ट्रांजेक्शन के चार्जेस से हैं परेशान, इन तरीकों से करें बचत

शहर हो या गांव, नौकरी करने वाले लोग हों या किसान, लोगों को नकद निकासी के लिए बैंकों में लाइन लगाने से कहीं ज्यादा आसान रास्ता है एटीएम. पिछले कुछ समय से बैंकों ने एटीएम से निकाले जाने वाले कैश ट्रांजेक्शन पर लगने वाले चार्ज में बढ़ोतरी की है. इस लिए कई बार ट्रांजेक्शन करना लोगों के लिए महंगा साबित हो सकता है. पर अगर आप थोड़ी समझदारी दिखाएंगे तो आप छोटी छोटी कटौतियों को बचा सकेंगे. इस खबर में हम बताएंगे आपको छोटी छोटी तरकीबें जिनसे आप इन कटौतियों पर रोक थाम कर सकें.

  • जिस बैंक में खाता हो उसी बैंक के एटीएम से निकालें पैसे

कोशिश करें की आप उसी बैंक के एटीएम से पैसे निकालें जिस बैंक में आपका खाता हो. इससे आपको ज्यादा ट्रांनजेक्शन करने की सुविधा मिलेगी. अगर आप दूसरे बैंक से पैसा निकालते हैं तो आपको ज्यादा चार्ज देना हो सकता है, और ट्रांजेक्शन भी आपकोे कम मिलेंगे. आप अपने मोबाइल फोन के लोकेटर से आस पास में अपने बैंक का एटीएम ढूंढ सकते हैं.

एक बार में निकाल लें कैश

कोशिश करें की एक ही समय में आप अपनी जरूरत के मुलाबिक ज्यादा कैश निकाल लें. खास मौको पर, जैसे त्योहारों में एटीएम में भी कैश की किल्लत होती है. इस लिए जरूरी है कि आप एक ही बार में अपनी जरूरतों के हिसाब से कैश निकाल लें और हर बार की भागा दौड़ी से बचें.

  • बैलेंस या ट्रांजेक्शन की जानकारी के लिए एटीएम का प्रयोग ना करें

गैर वित्तीय ट्रांजेक्शन, जैसे मिनी स्टेटमेंट, बैलेंस की पूछताछ के लिए एटीएम का प्रयोग ना करें. इससे महीने में मिलने वाले फ्री ट्रांजेक्शन से ही कटौती होती है. इन जानकारियों के लिए आप इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करें. ये सारी जानकारियां आपको इंटरनेट बैंकिंग से मिल जाएगी.

  • पेमेंट ऐप्स या कार्ड का करें इस्तेमाल

जेब में कुछ कैश रखें और कोशिश करें की ज्यादा ज्यादा डिजिटल ट्रांजेक्शन हो सके. इसके लिए आप पेमेंट ऐप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं. आजकल ज्यादातर दुकानों पर डिजिटल पेमेंट लिए जा रहे हैं. केवल बड़ी दुकाने ही नहीं, छोटी दुकाने यहां तक कि ठेलों पर सामान बेचने वाले दुकानदार भी पेमेंट ऐप से लेनदेन करने लगे हैं. इससे आपके कैश की बचत होगी और आपका काम भी होता रहेगा.

बउआ ने मचाया ‘जीरो’ में धमाल, देखिए ट्रेलर

रोमांस किंग शाहरुख खान की फिल्म ‘जीरो’ का ट्रेलर लौंच हो चुका है. लौचिंग के इवेंट को खास बनाने के लिए शाहरुख ने भी बहु‍त तैयारी की है. आपको इस फिल्म की कहानी संक्षिप्त में बता दें, यह कहानी मेरठ पर फिल्माया गया है,  जिस वजह से पूरे थिएटर को मेरठ की तरह रीक्रिएट किया गया है.

थिएटर में मेरठ की पहचान वहां के घंटाघर, मेले और कई फेमस गलियों को डिजाइन किया गया है. साथ ही मेरठ के लोकल पकवान भी इस ट्रेलर लौचिंग के दौरान परोसे जाएंगे. तो पेश है खास आपके लिए ‘जीरो’ का शानदार ट्रेलर.

इस फिल्म  में शाहरुख ने अपने करियर का सबसे कठिन रोल किया है. वे बउआ सिंह नाम के एक बौने आदमी के किरदार निभा रहे हैं. बउआ अपने जीवन में अधूरा है और वह अपने इस अधूरेपन से दूसरे को पूरा करने की कोशिश करता है. वह मेरठ के मध्यमवर्गीय परिवार से आता है जिसके पास एसी घर, कार या अन्य सुख-सुविधाएं नहीं हैं. वह अपने को ‘जीरो’ से शुरू करता है.  अपनी कमजोरी को ताकत बनाता है और एक छोटे से शहर से न्यूयौर्क पहुंच जाता है. बउआ को देखकर आपको हंसी भी आएंगी, इमोशंस भी आएंगे. फिल्म का निर्देशन आनंद एल. राय ने किया हैं. निर्देशक आनंद ने 3.13 मिनट के ट्रेलर में सबकुछ दिखाया है.

‘जीरो’ साल की सबसे महंगी फिल्मों में से एक है. इस फिल्म का बजट करीब 180 करोड़ रुपए से भी ज्यादा बताया जा रहा है. फिल्म में शाहरुख के बौने किरदार को दिखाने के लिए उच्च स्तर की तकनीक का सहारा लिया गया है. आनंद एल. राय के साथ शाहरुख की यह पहली फिल्म है.

वोडाफोन और एयरटेल के मोबाइल ग्राहकों की बढ़ेंगी मुश्किलें

मोबाइल फोन की सेवाओं की दरों को सस्ता करने की होड़ के चलते कई छोटी टेलिकौम कम्पनियां बाज़ार से बाहर हो गईं. दरों को सस्ता करने की प्रतिस्पर्धा के दौरान देश के मोबाइल उपभोक्ताओं को खूब फायदा हुआ. टेलिकौम सेक्टर में अब 3 बड़ी प्राइवेट कम्पनियां – वोडाफोन आईडिया, भारती एयरटेल और रिलायंस जिओ हैं. ये कम्पनियां अब इस स्थिति में हैं कि वे दरों को फिर से, दूसरे तरीके से बढ़ा सकती हैं.

ऐसे में मोबाइल फोन सर्विसेज पर कम खर्च करने वाले ग्राहकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. जान लें कि वोडाफोन आईडिया और भारती एयरटेल ने मिनिमम रिचार्ज प्रीपेड पैक शुरू करने का फैसला किया है.  यह इन कंपनियों की ओर से हर ग्राहक से ज्यादा पैसा खर्च करवाने यानी अपनी औसत आय बढ़ाने और फायदे वाले मौजूदा ग्राहकों पर ज्यादा ध्यान देने की कोशिश का संकेत है. कंपनियों के फैसले से यह संकेत भी मिलता है कि वे इनकम न कराने वाले यानी मोबाइल सर्विसेज पर पैसा न खर्चने वाले या रिचार्ज न कराने वाले या कभीकभी रिचार्ज कराने वाले ग्राहकों को बाहर कर सकती हैं.

मार्केट लीडर वोडाफोन आईडिया और देश की दूसरी सब से बड़ी टेलिकौम कंपनी भारती एयरटेल ने 100 रुपए से कम के बहुत से प्रीपेड पैक पर 28 दिनों की वैलिडिटी शुरू की है. इन में 35, 65 और 95 रुपए के पैक शामिल हैं. इस से इन प्लान्स पर रिचार्ज न कराने वाले ग्राहकों की आउटगोइंग कौल्स 30 दिनों में और इन्कमिंग कौल्स 45 दिनों में बंद हो जाएंगी.

कंपनियों के इस कदम से यह पता चल रहा है कि दोनों बड़ी टेलिकौम कम्पनियां पिछले 2 वर्षों में कम प्राइसिंग यानी दरों को सस्ता करने की होड़ से नुकसान उठाने के बाद अब अपनी इनकम बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं. टेलिकौम मार्केट में रिलायंस जिओ इन्फोकौम के प्रवेश के बाद शुरू हुई प्राइस वार से इन पुरानी कंपनियों के लाभ पर बड़ा असर पड़ा है. जिओ की कम कीमतों के चलते इन कंपनियों को अपनी सेवाएं सस्ती करनी पड़ी थीं. ऐसा करना उस वक्त में इन की मजबूरी थी वर्ना इन के ग्राहक इन्हें छोड़ रिलायंस जिओ के पाले में चले जाते.

टेलिकौम से जुड़े एक एक्सपर्ट ने बताया कि एयरटेल और वोडाफोन आईडिया ने देशभर में मिनिमम रिचार्ज प्लान्स पेश किए हैं. इस के जरिए वे हर ग्राहक से औसत इनकम बढ़ना चाहती हैं. ऐसा लगता है कि ये कम्पनियां उन ग्राहकों को बाहर करने में हिचकेंगी नहीं जिन से उन्हें कोई फायदा नहीं मिल रहा. ये कम्पनियाँ आर्थिक स्तर पर मझोले और उच्च ग्राहकों पर ध्यान दे रही हैं जो छोटे या कम खर्च करने वाले ग्राहकों की तरह मामूली सा फायदा देख कर कंपनी नहीं बदलते.

गौरतलब है की रिलायंस जिओ की तरफ से बेहद सस्ते टैरिफ प्लान्स पेश करने के कारण पुरानी टेलिकौम कंपनियों को अपने ग्राहक बरकरार रखने के लिए रेट्स में कमी करनी पड़ी थी. इस से ग्राहकों को तो फायदा हुआ था लेकिन उन कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था. इस वजह से कुछ कम्पनियां मार्किट से बाहर हो गयीं और बाजार में मौजूद 3 बड़ी कंपनियों के पास अब कीमतें बढ़ाने की ताकत लौट आई है.

फिर हुआ फेसबुक डेटा लीक, 81,000 यूजर्स के मैसेज में लगी सेंध

पिछले कई महीनों से फेसबुक के डाटा लीक हो रहे हैं और हर बार फेसबुक अपनी इस गलती के लिए माफी मांग लेता है और उसमें सुधार करने का आश्वासन देता है. लेकिन इसके बावजूद फेसबुक यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर फेसबुक की तरफ से किसी भी तरह की गंभीरता नजर नहीं आ रही है. अब एक हिन्दी समाचार पत्र की रिपोर्ट के मुताबिक एक बार फिर से करीब 81,000 यूजर्स के निजी मैसेज में सेंध लगी है और हैकर्स ने इन अकाउंट्स का इस्तेमाल विज्ञापन के लिए किया है. रिपोर्ट की मानें तो आपके मैसेज को बाजार तक पहुंचाया गया है और साथ ही उसमें कई सारे बदलाव भी किए गए हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक हैकर्स के 120 मिलियन फेसबुक यूजर्स का निजी डाटा है और वह 0.10 डालर यानि करीब 7.29 रुपये प्रति अकाउंट बेचने की सोच रहा है. वहीं फेसबुक का दावा है कि किसी प्रकार का डाटा लीक नहीं हुआ है और यह रिपोर्ट निराधार है, हालांकि फेसबुक ने यह जरूर माना है कि फेसबुक यूजर्स का निजी डाटा वायरस वाले एक्सटेंशन के जरिए हैकर्स तक पहुंचा है.

फेसबुक ने एक्सटेंशन का नाम बताए बिना कहा है कि ऐसे एक्सटेंशन के जरिए हैकर्स यूजर्स की गतिविधियों पर नजर रखते हैं. ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि फेसबुक हैक हुआ है. फेसबुक के इस डाटा लीक का खुलासा सितंबर में ही हुआ था जब FBSaler नाम से एक विज्ञापन जारी हुआ.

रिपोर्ट में कहा गया है कि हैक हुए अकाउंट्स में अधिकतर अकाउंट यूक्रेन और रूस के हैं. इसके अलावा हैक होने वाले अकाउंट्स में अमेरिका, ब्रिटेन और ब्राजील के लोगों के भी अकाउंट शामिल हैं. डाटा लीक के बाद औनलाइन एक विज्ञापन भी दिया गया है जिसमें कहा गया है कि एक यूजर्स के पूरे मैसेज का एक्सेस सिर्फ 0.10 डालर यानि करीब 7.29 रुपये में दिया जाएगा. इनमें से सैंपल के लिए 81,000 लोगों के मैसेज को सार्वजनिक भी कर दिया गया है. हालांकि इस विज्ञापन को अब हटा लिया गया है.

विधानसभा चुनाव पर क्या असर डालेगा मंदिर मुद्दा

ज्यादा नहीं अब से कोई तीन महीने पहले मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जब विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट शुरू हुई थी तब अपने अंदरूनी और बाहरी सर्वेक्षणों के नतीजे देख भाजपा और आरएसएस दोनों सकते में आ गए थे क्योंकि तीनों राज्यों से सत्ता पलट के आंकड़े आ रहे थे. कमोबेश यही बात अधिकतर न्यूज चैनल्स और एजेंसियों के सर्वे भी कह रहे थे कि तीनों राज्यों का वोटर बदलाव चाहता है. भगवा खेमे का सरदर्द उस वक्त और बढ़ा जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंदिरों में जाकर पूजा पाठ करना शुरू किया और वे भी धोती कुर्ता पहन, माथे पर त्रिपुंड लगाकर मंदिरों से बाहर आते दिखने लगे.

राहुल गांधी ने इतना पूजा पाठ और दूसरे धार्मिक ढकोसले किए कि भगवा खेमा उनकी हिंदूवादी इमेज देख चकरा उठा कि अब इसका जबाब कैसे दें. अक्सर राहुल गांधी को मुसलमान, ईसाई या पारसी प्रचारित करते रहने वाले हिंदूवादियों की बोलती तब और बंद होने लगी जब राहुल ने पहले खुद को हिन्दू और फिर जनेऊधारी ब्राह्मण कहना शुरू कर दिया. इस धार्मिक हमले से बौखलाए भाजपा के दूरदर्शनीय प्रवक्ता संबित पात्रा भोपाल में उनसे उनका गोत्र पूछते नजर आए लेकिन लोगों ने राजनीति का गोत्र के स्तर तक गिरना स्वीकार नहीं किया और मान लिया कि राहुल गांधी हिन्दू हैं. उन्हें भी मंदिरों में जाकर पूजा पाठ और अभिषेक करने का उतना ही हक है जितना कि नरेंद्र मोदी या दूसरे किसी नेता को है.इसके पहले खुद को हिन्दू साबित करने या जताने राहुल गांधी कैलाश मानसरोवर तक की यात्रा कर आए थे.

राहुल गांधी का यह रूप जनमानस पर छाने लगा और किसी भी टोटके से तीनों राज्यों में भाजपा की स्थिति में सुधार होता नहीं दिखा तो एकाएक ही फिर से बिना किसी सम्मन या पूर्व सूचना के राम मंदिर निर्माण का जिन्न बोतल से बाहर आ गया और अब हालत यह है फिर से रामभक्त मंदिर के लिए जान देने की बात करने लगे हैं. एक नए आंदोलन की स्क्रिप्ट लिखी जा रही है. लग ऐसा रहा है कि अगर आजकल में मंदिर नहीं बना तो प्रलय आ जाएगी. राम भक्त मंदिर के लिए अध्यादेश और कानून की भी बात कर रहे हैं. देश भर के संत जानबूझकर बेचेनी दिखाते खुद पर और सरकार पर लानतें भेज रहे हैं कि बिना अयोध्या में राम मंदिर के जीवन व्यर्थ है.

मंदिर का विधानसभा चुनाव कनेक्शन

अभी तक तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव में मंदिर निर्माण सीधे सीधे कोई मुद्दा नहीं है और भगवा खेमा इसे अभी चुनावी मुद्दा बनाएगा भी नहीं क्योंकि लोग खुद उसकी उम्मीद के मुताबिक पूछ रहे हैं कि अभी तक सो रहे थे क्या, साढ़े चार साल सत्ता में रहते क्यों मंदिर के बाबत होश नहीं आया, नरेन्द्र मोदी की सरकार अब तक क्या कर रही थी जबकि सब कुछ उसके हाथ में था और नोटबंदी की जगह अगर मंदिर के लिए कानून ले आए होते तो बात कुछ और होती. अब चुनाव सर आ गए और कुर्सी पर बने रहने के लिए गिनाने कुछ नहीं है तो तम्बू में पड़े राम जी याद आने लगे.

भगवा खेमा जानता है ये सवाल हर कोई पूछेगा लेकिन इन के जबाब नहीं देना है बल्कि मंदिर निर्माण मुहिम को सुलगते देना है, हां कानूनी मजबूरी की बात जरूर दोहराते रहना है जिससे आज सवाल कर रहे हिन्दू खुद कहने लगें कि बात तो ठीक है कि मंदिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही बने तो हिन्दू यानि सनातन धर्म की साख भी बनी रहेगी और बगैर किसी कलंक या हिंसा के मंदिर भी बन जाएगा. एक बार मंदिर का नशा हिंदुओं के सर चढ़ भर जाये फिर तो इन्हें यह ज्ञान भी मिल जाएगा कि आखिर मंदिर बनाएगा कौन, जाहिर है हम यानि भगवा खेमा.

बात बड़ी दिलचस्प है कि खुद आम हिन्दू समझ रहा है कि हमेशा की तरह मंदिर के ठेकेदारों की मंशा सचमुच में मंदिर बनाने की नहीं है. यह शुद्ध चुनावी चाल है जिससे हालफिलहाल तीन राज्यों में लोगों का ध्यान सरकार विरोधी मुद्दों से हट जाये और वे चुनाव तक इस बहस में उलझे रहें कि मंदिर किस विधि से बनना ठीक रहेगा. उन लोगों की विधि से जो यह कह रहे हैं कि हिंदुओं की सब्र जबाब दे चुकी है या उन लोगों की पद्धत्ति से जो दरियादिली दिखाते यह दलील दे रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट को एक मौका और दिया जाये फिर भले ही फैसला मंदिर के पक्ष में न आए वह चिंता की बात नहीं होगी, क्योंकि तब हम हिन्दू एकजुट होकर रामलला का भव्य मंदिर कैसे बनाएंगे इसका एहसास और अंदाजा सभी को है.

किसी ने गलत नहीं कहा कि नब्बे फीसदी भारतीय बेवकूफ हैं उन्हें आसानी से धर्म के नाम पर बहलाया फुसलाया जा सकता है. हो यही रहा है कि महज तीन चार दिन में ही तीन राज्यों में किसानों की खुदकुशियों और बेरोजगारों की बात कम हो चली हैं. सवर्ण अब एट्रोसिटी एक्ट को नहीं रो रहा और न ही आरक्षण पर हफ्ते भर पहले की तरह विलाप कर रहा है. उसे समझ आ रहा कई कि जमानत की जरूरत तो तब पड़ती है जब कोई रिपोर्ट लिखाने की जुर्रत करे. वह खुद को जज समझते कह रहा है कि अच्छा तो यह होगा कि हिंसा के जरिये मंदिर बनाने की नौबत न आए और अगर आ भी जाये तो फिर पीछे न हटा जाये. हिंदुओं के देश में ही उनके आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम राम का मंदिर बनाने अदालत का मुंह सालों साल ताकना पड़े यह तो सच में जिल्लत और जलालत की बात है. यही वर्ग बड़ी शिद्दत से यह भी कह रहा है कि अब अगर भाजपा मंदिर के नाम पर वोट मांगेगी तो उसे ठेंगा दिखा देंगे.

यही समाज की वह आत्मघाती मानसिकता और प्रतिक्रिया है जिसके लिए बड़े पैमाने पर मंदिर निर्माण की बात विरोधाभासी ढंग से भगवा खेमा कह रहा है. कोई यह नहीं कह रहा कि देश में लाखों राम मंदिर हैं फिर अयोध्या को लेकर ही जिद क्यों.

अब इसके आगे किसी के कुछ बोलने सुनने की जरूरत नहीं रह जाती क्योंकि मंदिर एक्सप्रेस अब आस्था नाम के जंक्शन पर खड़ी है जहां से हर लाइन अयोध्या जाती है. इसी ट्रेक पर आकर आस्था आसानी से हिंसा में तब्दील हो जाती है.

लोग हर कभी पंडों, संतों, महंतों, शंकराचार्यों सहित आरएसएस व विहिप और नेताओं के बिछाए संयुक्त जाल में फंसकर धर्म की अफीम खाकर बहकने लगते हैं जिससे उनका शरीर सुस्त और हाथ पैर ढीले पड़ जाते हैं. उनका दिमाग यानि बुद्धि काम करना बंद कर देती है तो हैरत किस बात की, धर्म के इन ठेकेदारों ने ऐसे ही कितने भीषण युद्ध कराये हैं, भाई के हाथों भाई को मरवाया है, औरतों की इज्जत से सरेआम खिलवाड़ किया और करवाया है, शूद्रों पर जानवरों की तरह जुल्म ढाये हैं, उनसे गुलामों की तरह काम कराया है यह बात कभी किसी सबूत की मोहताज नहीं रही. फिर तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव तो कुछ भी नहीं.

ऐसे विषयों पर सरिता शुरू से ही पाठकों को इनकी और धर्म की वास्तविकता बताते आगाह करती रहकर अपना लेखकीय उत्तरदायित्व निभाती रही है और सुधी बुद्धिजीवी और तार्किक पाठकों के विशाल समूह की प्रिय पत्रिका आज भी बनी हुई है. सात दशकों से कुछ कर गुजरने वाले और सही गलत का फैसला कर अपना मार्ग चुनने वाले युवा सरिता को अपने हाथों में बेवजह नहीं थामे रहे हैं.

बहरहाल रही बात तीन राज्यों में मंदिर मुद्दे की तो लोग धीरे धीरे ही सही अफीम चखने के झांसे में आ रहे हैं और ऐसे आ रहे हैं कि खुद भी नहीं समझ पा रहे. तीन राज्यों मे भाजपा जीते या हारे यह भगवा खेमे की चिंता का विषय नहीं है उसे चिंता नरेंद्र मोदी और 2019 की है. तब तक हैरानी नहीं होनी चाहिए अगर कानून और संविधान की दुहाई देना भी बंद हो जाये. कम ही लोग दूर की सोच पा रहे हैं कि अगर हिंसा बड़े पैमाने पर मंदिर के नाम पर हुई तो एक विकल्प या रास्ता आपातकाल का भी सरकार के पास बचता है बशर्ते लोग 1992 की तरह मंदिर निर्माण के बाबत तैयार या इकट्ठा नहीं हुये तो. कोशिश यह जताने की भी है कि अगर नरेंद्र मोदी कानून नहीं लाये तो उन्हें चलता कर कोई दूसरा चेहरा पेश कर दिया जाएगा और इस बाबत योगी आदित्यनाथ सबसे मुफीद हैं.

दरअसल में साजिश अब राम मंदिर के नाम पर हिंदुओं को उकसाने की नहीं बल्कि धार्मिक ग्लानि से भर देने की है कि अगर मंदिर के लिए आगे नहीं आए तो तुम से बड़ा कायर कोई नहीं होगा और आने वाली पीढ़ियां तुम्हारी उदासीनता और खामोशी का फल भुगतेंगी और फिर से गुलाम हो जाएंगी जिसके लक्षण नई नस्ल में दिख भी रहे हैं जो पूजा पाठ यज्ञ हवन बगैरह से कतराने लगी है.

वीडियो : धोनी की बेटी जीवा की क्यूट गणित ने जीता फैंस का दिल

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की बेटी जीवा का एक क्यूट वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है. अभी तक जीवा के फैंस जीवा के क्यूट और मस्ती भरे वीडियोज देखते थे. लेकिन अब जीवा अपनी पढ़ाई पर कैसे मेहनत कर रही हैं इसमें भी फैंस दिलचस्पी ले रहे हैं. जीवा स्कूल में जो सीख रही हैं वह घर में प्रैक्टिस कर रही हैं. यही वजह है कि जब सोशल मीडिया पर जीवा का मैथ्स की प्रैक्टिस करता हुआ वीडियो आया तो उसे भी वायरल होने में देर नहीं लगी. इस वीडियो को देखकर आप को भी जीवा पर प्यार आ जाएगा.

धोनी की पत्नी साक्षी ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर बेटी जीवा का एक बूमरंग वीडियो अपलोड किया है, जिसमें जीवा एक ब्लैक बोर्ड पर चौक से गिनती लिखती हुई दिख रही हैं. इस वीडियो में आप देख सकेंगे कि जीवा 1 से लेकर 30 तक की गिनती बिल्कुल सही-सही लिख रही हैं, लेकिन सबसे प्यारी बात यह है कि जीवा अपनी गलती को पहचानकर उसे तुरंत सही कर ले रही हैं. जैसे जीवा पहले 18 को 81 लिखती हैं, फिर गलती का एहसास होने पर उसे तुरंत मिटा कर सही-सही 18 लिखती हैं.

 

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गौरतलब है कि एमएस धोनी की बेटी जीवा अभी से ही सोशल मीडिया प्लेटफौर्म्स पर एक सेलिब्रिटी स्टेटस रखती हैं. जीवा के इंस्टाग्राम पर खुद के 5 लाख से ज्यादा फोलोअर्स हैं. उनके हर वीडियो को खूब पसंद किया जाता है और फैंस कमेंट करके जीवा के प्रति अपना प्यार जाहिर करते हैं.

पापा के साथ अब ज्यादा वक्त मिलेगा जीवा को

अब जीवा को अपने पापा का साथ मिलने ही वाला है क्योंकि पापा एमएस धोनी भारत और वेस्टइंडीज के बीच रविवार से शुरू हो रही टी20 सीरीज में नहीं खेल रहे हैं. धोनी को वेस्टइंडीज और नवंबर में औस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज के लिए टीम इंडिया में शामिल नहीं किया गया है. इसका मतलब है कि धोनी अब टीम इंडिया से अगले साल जनवरी में ही जुड़ सकेंगे वह भी तब यदि उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए चुना जाता है तो. अभी इस वनडे सीरीज के लिए टीम इंडिया की घोषणा नहीं हुई है.

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