गूगल कैप्चा कोड का इस्तेमाल करता है. क्योंकि इससे यह पता लगाया जा सके कि यूजर्स रोबोट हैं या इंसान. लेकिन आज से कैप्चा कोड को बंद कर दिया जाएगा. इस कोड को लागू करने के बाद से गूगल का काफी समय खराब हो रहा था. इस कोड के जरिए कंपनी यह पता लगाती थी कि कहीं यूजर्स रोबोट तो नहीं.

गूगल में पहले कैप्चा कोड आड़े-तिरछे अक्षरों के जिफ फार्मेट में होते थे या फिर एमपी 3 वाइस रिकौर्डिंग के. सौफ्टवेयर प्रोग्राम वाले इन कैप्चा कोड को रोबोट टाइप नहीं कर सकते थे और समझ भी नहीं पाते. इसके जरिए ही गूगल को इंसान और रोबोट में फर्क पता चल जाता था.

लेकिन अब कंपनी का मानना है कि रोबोट कैप्चा कोड को पढ़ ही नहीं सकते. इसलिए अब अंकों के आधार पर रिकैप्चा वी3 कोड लागू किया जा रहा है. इसमें यूजर्स को लंबे समय तक कोड टाइप करने की परेशानी नहीं होगी.

नया वी3 कोड तीन स्टेप पर काम करेगा

पहला- शुरुआत में यह तय किया जा सकता है, यूजर को कब आगे बढ़ने दिया जा सकता है या कब उसके और वेरिफिकेशन की जरूरत है. यानि कि दो फैक्टर्स का औथेंटिकेशन और फोन वेरिफिकेशन.

दूसरा- आप खुद के सिग्नल से स्कोर को जोड़ सकते हैं यहां रिकैप्चा नहीं पहुंच सकता.

तीसरा- आप रिकैप्चा स्कोर को मशीन लर्निंग मौडल को ट्रेंड करने में एक सिग्नल के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे  छेड़खानी को रोका जा सके.

इस प्रक्रिया से वेबसाइट पर आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी और बार-बार ब्राउजर को वेरिफाई नहीं करना पड़ेगा. इस नए कोड को सैनफ्रांसिस्को की कंपनी ने बनाया है.

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