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सस्ते में बिकी जयस : अपनों से छले गए आदिवासी

इसे आदिवासियों की खूबी भी कहा जा सकता है और खामी भी कि वे हर उस आदमी पर भरोसा कर लेते हैं जो कुछ वक्त उनके इलाके में गुजारकर उनके भले की मीठी मीठी बातें करता है, उन्हें कानून और संविधान में लिखे उनके हक दिलाने के वादे करता है और फिर उनके वोट झटककर विधानसभा या लोकसभा में पहुँचकर एशोआराम की ज़िंदगी गुजारते भूल जाता है कि आदिवासी इलाकों में बिजली पानी सड़क और सेहत जैसी बुनियादी सहूलियतों का टोटा है और बाहरी लोग और व्यापारी उसका कैसे कैसे शोषण करते हैं.

मध्यप्रदेश की राजनीति में सभी दलों और नेताओं को आदिवासियों की सुध चुनाव के वक्त ही आती है जिनकी नजर में ये महज वोट होते हैं. लेकिन इस बार आदिवासी समुदाय में उम्मीद की एक किरण जागी थी जब उन्हीं के समुदाय के एक युवा पेशे से डाक्टर हीरालाल अलावा एम्स जैसे नामी संस्थान की नौकरी छोडकर राजनीति के मैदान में कूद पड़े थे. आदिवासियों के भले और लड़ाई के लिए उन्होने जय आदिवासी युवा शक्ति नाम का संगठन बनाया था जो जयस के नाम से मशहूर हुआ. अलावा के आव्हान पर देखते ही देखते देश भर के कोई दस लाख आदिवासी युवा जयस से जुड़ गए जिनका मकसद और ख़्वाहिश दोनों अपनी बिरादरी के लोगों को बदहाली की दलदल से उबारना था.

इस साल के शुरू से ही जयस की ताबड़तोड़ सभाएं निमाड इलाके में हुईं ख़ासी तादाद में आदिवासी मीटिंगों में गए भी तब उन्हें कतई इस बात का अंदाजा नहीं था कि इस बार धोखा कोई बाहरी आदमी या नेता नहीं बल्कि अपने बाला ही दे रहा है, जयस के संस्थापक हीरालाल अलावा ने आदिवासियों को समझाया कि राजनीति के जरिये हक जल्दी मिल सकते हैं इसलिए जयस इस चुनाव में 80 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी और सरकार चाहे भाजपा की बने या कांग्रेस की बिना उसकी भागीदारी के नहीं बन पाएगी फिर आदिवासी अपनी शर्तों पर सरकार को मजबूर कर सकता है कि सरकार उनके भले के काम करे.

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दिनरात एक कर हीरालाल अलावा ने तूफानी दौरे जब निमाड इलाके के किए तो भाजपा और कांग्रेस दोनों की नींद उड़ गई क्योकि वाकई जयस की हवा चुनाव आते आते आँधी में तब्दील हो गई थी उसका अपना खासा वोट बेंक तैयार हो गया था. राजनीति के जानकार भी यह मानने मजबूर हो गए थे इस चुनाव में जयस एक बड़ी ताकत बनकर सामने आएगी.

कुछ दिन पहले तक किसी से गठबंधन न करने का राग अलाप रहे अलावा ने कांग्रेस से गठबंधन के संकेत देते जयस के लिए 80 सीटें मांगी लेकिन बात नहीं बनी क्योकि इतनी सीटें देने की बात कांग्रेस सोच भी नहीं सकती थी. धीरे धीरे वे नीचे उतरे और 4-6 सीट पर भी राजी होने लगे तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को समझ आ गया कि एक बड़ा संगठन तो इस नौजवान डाक्टर ने बना लिया है लेकिन अब चुनावी वक्त में वह उसे संभाल नहीं पा रहे हैं और इसकी वजह उन पर आदिवासियों की उम्मीदों का बढ़ता बोझ और पैसों की कमी है लिहाजा जयस को अलग ताकत बनने से रोका जाये.

राजनीति के तजुर्बेकार और सधे खिलाड़ी कमलनाथ ने सब्र दिखाते हीरालाल अलावा को यह एहसास करा दिया कि गठबंधन तो नहीं होगा क्योंकि कांग्रेस आदिवासी इलाकों में अभी भी मजबूत है और जयस उसके नहीं भाजपा के ज्यादा वोट काटेगी लिहाजा जयस जितनी चाहे ज़ोर  आजमाइश कर ले. बात सच भी थी कि जयस के उम्मीदवार वोट तो ठीकठाक ले जाते लेकिन जीत नाममात्र की ही सीटों पर पाते और इस पर भी डर यह था कि जीतकर वे मंत्री पद के लालच में सरकार की गोद में जा बैठते.

इस मुकाम पर आकर हीरालाल अलावा के हाथपैर ढीले पड़ गए और सभी को चौंकाते हुये वे खुद कांग्रेस की गोद में जा बैठे वह भी इस मामूली शर्त के साथ कि कांग्रेस उन्हें धार जिले की मनावर सीट से टिकिट देगी जो कि उसने दिया भी.

जीत में रोड़े ज्यादा –  अब निमाड इलाके में तरह तरह की बातें हो रहीं हैं जिनमे से अहम यह है कि हीरालाल अलावा पहले तो आदिवासियों के जज़्बातों से खेले और जब कुछ कर दिखाने का मौका यानि चुनाव सर पर आ गया तो एन वक्त पर पीठ दिखाते सौदेबाजी कर कांग्रेस से क्यों जा मिले और इस बाबत उन्हें और क्या क्या मिला. अब हालत यह है कि उनसे नाराज युवा जयस से कट कर घर बैठने लगा है और कांग्रेसी कार्यकर्ता भी उनका खुले आम विरोध कर रहे हैं. इसके अलावा हीरालाल अलावा की एक बड़ी दिक्कत भाजपा की तगड़ी उम्मीदवार रंजना बघेल हैं जो इस सीट से 2 बार विधायक और मंत्री भी रहीं हैं. रंजना भी युवाओं में लोकप्रिय हैं और उनके साथ पूरी भाजपा मजबूती से खड़ी है.

जाहिर है हीरालाल अलावा की जीत गारंटेड नहीं है उन्हें तो कांग्रेस ने बड़ी चालाकी दिखाते मोहरा बना दिया है वजह वे जीते तो इसे कांग्रेस की जीत और हारे तो जयस और हीरालाल अलावा की हार कहा और माना जाएगा. यह बात उनके नजदीकी समर्थक भी नहीं समझ पा रहे हैं कि कांग्रेस से सौदेबाजी अगर होना या करना ही थी तो वे जयस से ही क्यों नहीं लड़े कांग्रेस का समर्थन लेकर वे ज्यादा मजबूती से रंजना बघेल को टक्कर दे पाते.

इस चुनावी गुणभाग से दूर सवाल उन वादों और सब्जबागों का भी है जो उन्होने आदिवासियों को दिखाये थे कि एकजुट रहें तो हम यह कर सकते हैं , वो कर सकते हैं. अब सवालिया निशान उनकी मंशा पर भी लग रहा है कि जब कांग्रेस भी भाजपा की तरह शोषक उनकी निगाह में  थी तो वे क्यों विधायक बनने के लालच में उसकी गोद में जा बैठे और इससे आदिवासियों को क्या हासिल होगा.

अब बाहरियों के हाथों छला जाता रहा आदिवासी समुदाय अपने ही समुदाय के नौजवान के हाथों धोखा खाकर उन्हें इनाम देगा या सजा यह 11 दिसंबर को पता चलेगा जब अहम हो गई मनावर सीट का नतीजा सामने आएगा.

दिनेश कार्तिक से बेहतर साबित होंगे ऋषभ पंत: अजहरूद्दीन

भारतीय क्रिकेट टीम के धूंआधार बल्लेबाज और विकेटकीपर दिनेश कार्तिक के करियर पर सवालिया निशान लग सकता है. हाल ही में पूर्व कप्तान और क्रिकेटर अजहरूद्दिन ने कहा कि  दिनेश कार्तिक के मुकाबले ऋषभ पंत अच्छे विकेटकीपर साबित हो सकते हैं. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि आगे होने वाले मैचों में सेलेक्शन बोर्ड को ऋषभ को और मौके देने चहिए. अजहर ने कहा कि आपको ऋषभ पर भरोसा करना चहिए. अगर वो इंग्लैंड में टेस्ट मैचों में विकेटकीपिंग कर सकते हैं तो टी 20 मैचों में क्यों नहीं. इंग्लैंड में भी ऋषभ ने कार्तिक से अच्छा प्रदर्शन किया था. उसकी अच्छी बल्लेबाजी से ही टीम को जीत मिली.

विंडीज के साथ हुए पहले मैचे पर बात करते हुए अजहर ने कहा कि इस मैंच में ऋषभ से ही कीपिंग करानी चहिए थी. हालांकि उसे और ज्यादा सीखने की जरूरत है. वहीं कुलदीप यादव के लिए अजहरूद्दीन ने कहा कि यआने वाले समय में वो बेहद प्रभावशाली गेंदबाज साबित होंगे.

आगमी औस्ट्रेलिआई दौरे को ले कर अजहर ने कहा कि भारतीय टीम काफी मजबूत है और इस सीरीज में जीत की दावेदार भी है. टीम को कड़ी मेहनत करने की जरूरत है. हालांकि कंगारूओं के जमीन पर उन्हें हराना आसान नहीं होगा पर विराट की कप्तानी में टीम बहुत अच्छा करेगी.

अपनों संग मनाएं सुरक्षित त्यौहार, इस दिवाली पटाखों को कहें ना

दीवाली का आतिशबाजी से गहरा नाता है, लेकिन बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए अब इस पर रोक लगाना बहुत जरूरी है. पटाखे जला कर जहां धन की बरबादी होती है, वहीं वातावरण भी इससे काफी ज्यादा प्रदूषित होता है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है. हम सब को पटाखे जलाने से पहले एक बार जरूर यह सोचना चाहिए क्या हम अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण के साथ खिलवाड़ नहीं कर रहे हैं.

दीवाली का त्योहार मनाने के लिए हम जितना पैसा पटाखे खरीदने में खर्च करते हैं, अगर वही पैसा हम किसी जरूरतमंद को दें, तो वह भी खुशी से इस त्योहार को मना सकता है.

पटाखों से सब से ज्यादा खतरा बच्चों को रहता है, इसलिए अपने नन्हेमुन्नों को इन से दूर रखना ही बेहतर है. दीवाली पटाखा जला कर प्रदूषण फैलाने का नहीं, बल्कि खुशियां बांटने और घरों को रोशन करने का त्योहार है. सब के साथ मिलजुल कर दीवाली मनाने का अपना अलग ही मजा होता है. अपनों को तोहफे बांट कर पर्व का मजा लिया जा सकता है.

दीवाली की खुशियों में सेहत को न करें नजरअंदाज

दीवाली के अवसर पर कुछ बातों का ध्‍यान रखें, जरा सी लापरवाही आप पर भारी पड़ सकती है.

  • पटाखों की तेज आवाज कानों पर विपरीत असर डाल सकती है, इसलिए पटाखों से दूरी बनाकर रखें.
  • पटाखों का धुआं सांस संबंधी बीमारी और एलर्जी के साथ ही कई परेशानियों का कारण बन सकता है. अस्थमा के मरीजों के लिए यह बहुत नुकसानदेह है. साथ ही इससे आंखों पर भी विपरीत असर पड़ने की आशंका बनी रहती है. पटाखों से दूरी बनाएं रखना आप के लिए ही फायदेमंद है.
  • आप के घर में यदि छोटे बच्चे या गर्भवती महिलाएं हैं, तो आप को तेज आवाज वाले पटाखों से बचना चाहिए. धमाकों की तेज आवाज छोटे बच्‍चों के साथ ही गर्भस्थ शिशु के कान और दिल पर भी असर डाल सकती है.
  • दीवाली पर कई बार अनार, रौकेट और बम आदि लोगों की आंखों में जख्म का कारण बन जाते हैं. यहां तक कि कई लोगों के आंखों की रोशनी भी जा सकती है. इसलिए सावधानी बरतें,
  • अस्थमा, सांस की बीमारी से पी‍ड़ि‍त और दिल के रोगियों को पटाखे जलाने से बचना चाहिए.
  • दीवाली मिठाइयों का त्‍योहार है, लेकिन यदि आप मधुमेह रोगी हैं तो आप के लिए ज्‍यादा मिठाई खाना नुकसानदेह हो सकता है. संभव हो तो आप ड्राई फ्रूट्स का सेवन करें. इस समय मिठाईयों में मिलावट की आशंका रहती है.
  • यदि आपको धुएं से एलर्जी है तो आप धुएं और प्रदूषण से बचने के लिए बाहर कम निकलें. साथ ही आप सांस के साथ प्रदूषण के कण अंदर जाने से रोकने के लिए मुंह पर गीला रूमाल रख सकते हैं।
  • यदि आप अस्थमा के रोगी हैं और घर से बाहर जा रहे हैं तो दवाई और इन्‍हेलर अपने साथ रखें. ताकि किसी भी तरह की परेशानी होने पर इसका इसका इस्‍तेमाल कर सकें.
  • पटाखों को घर के आंगन में न जलाकर खाली प्‍लान या मैदान में जलाना चाहिए. पटाखें जलाने के लिए टिन या खाली बोतल का इस्‍तेमाल भी खतरनाक हो सकता है.
  • पटाखों को जलाते समय आपको अपने आसपास पानी से भरी बाल्टियां तैयार रखनी चाहिए. ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से आप तुरंत निबट सकें।

4 रियर कैमरों वाला दुनिया का पहला स्मार्टफोन, लेकिन कितने काम का?

एक समय दक्षिण कोरिया की कंपनी सैमसंग ने स्मार्टफोन के बाजार में नोकिया जैसे मेगा ब्रांड को इंडियन मार्केट से कुछ ऐसे तड़ीपार किया था कि बेचारा माइक्रोसौफ्ट की गोद में बैठने के बावजूद भी आज-तक कमबैक नहीं कर पाया. हालांकि सेर को सवासेर मिल ही जाता है. इसलिए एंड्रौयड के बाजार में काबिज हो चुके सैमसंग को बीट किया चाइना के शाओमी, वीवो, वन प्लस जैसे मोबाइल ब्रांड्स ने. ये सब बजट फोन के साथ बाजार में आये और देखते ही देखते सैमसंग के हाथों से स्मार्टफोन बाजार खिसकने लगा. नतीजतन सैमसंग को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ा. अब वह भी बजट फोन लांच करता है. और अपनी टक्कर आईफोन के बजाये शाओमी के साथ मानने लगा है.

गैलेक्सी ए9 के 4 कैमरे-6जीबी रैम

बहरहाल कुछ दिनों पहले जब सैमसंग ने इंडियन मार्केट में स्मार्टफोन गैलेक्सी ए9 प्रो लौन्च किया था तो इसकी बिग बैटरी लाइफ की चर्चा थी क्योंकि यह 5000 एमएएच की बैटरी से लैस था. इसकी कीमत 32,490 रुपये है. लेकिन अब इसी सीरीज के नए मौडल सैमसंग गैलेक्सी ए9 (2018) की चर्चा है. कहा जा रहा है कि यह चार रियर कैमरों के साथ आने वाला दुनिया का पहला स्मार्टफोन है. बता दें कि इस मौडल को लेकर मलेशिया में सुगबुगाहट है लेकिन सैमसंग इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक़ इस हैंडसेट की कीमत 39,000 रुपये हो सकती है. इंटरनेशनल मार्केट में यह 599 यूरो यानी करीब 49,800 रुपये का है. 4 कैमरों के साथ इस फोन की दूसरी खासियत इसकी 6 जीबी रैम भी है.

कितने ख़ास हैं फीचर्स

सैमसंग गैलेक्सी ए9 के बाकी फीचर्स की बात करें तो इसके 4 कैमरों में पहला 24 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा है. दूसरा 10 मेगापिक्सल का टेलीफोटो कैमरा, तीसरा 8 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड कैमरा और चौथा 5 मेगापिक्सल का डेप्थ कैमरा है. सेल्फी के शौकीनों के लिए 24 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा बोनस सरीखा है. इसके अलावा क्वालकौम स्नैपड्रैगन 660 प्रोसेसर के साथ 6 जीबी और 8 जीबी रैम के विकल्प इसे गेमर्स की पहली पसंद बनाते हैं. यह एंड्रौयड ओरियो पर रन करेगा, 6.3 इंच का फुल-एचडी यानी 1080×2280 पिक्सलमें इनफिनिटी डिस्प्ले है मूवीज फ्रीक्स के लिए बेहतरीन एक्सपीरियंस देगा. साथ में सुपर एमोलेड पैनल है ही. और फोन फेस अनलौक, बिक्सबी असिस्टेंट और सैमसंग पे जैसे पुराने फीचर्स भी हैं. इनबिल्ट स्टोरेज 128 जीबी है जो 512 जीबी तक एक्स्पेंड हो सकती है. कनेक्टिविटी फीचर में 4जी वीओएलटीई, वाई-फाई 802.11 एसी, ब्लूटूथ 5.0, यूएसबी टाइप-सी, एनएफसी और 3.5 एमएम हेडफोन जैक जैसे रेगुलर फीचर्स हैं.

किनसे होगी टक्कर

अगर इसके फीचर्स और कीमत को अन्य स्मार्टफोन मौडल्स के साथ कम्पेयर करें तो इसका सीधा मुकाबला OnePlus 6T है. बल्कि OnePlus 6T इसे कई मामलों में बीट भी करता है. जैसे OnePlus 6T की स्क्रीन साइज़ 6.41 इंच  है जबकि सैमसंग गैलेक्सी ए9 की6.3 इंच. वहीं रैम के मामले में भी यह OnePlus 6T से उन्नीस है. क्योंकि  सैमसंग के 6 जीबी के मुकाबले वन प्लस अप टू 8 जीबी रैम प्रोवाइड कर रहा है. बैटरी के मामले में दोनों एक ही प्लेटफोर्म पर आते हैं, ओवर आल सैमसंग गैलेक्सी ए9 (2018) के बाकी स्पेसिफिकेशन वनप्लस 6टी जितने दमदार नहीं हैं. इसके अलावा सीधा मुकाबला Nokia 6.1 (2018), Samsung Galaxy A9 Pro, Xiaomi Redmi Note 5 Pro और Nokia 5.1 Plus (Nokia X5) से भी होगा. ये सारे मौडल्स लगभग इसी की मत और स्पेसिफिकेशन में आ रहे है, बस रैम, बैटरी और स्क्रीन साइज में उन्नीस बीस का फर्क है.

Verdict: कितने काम का है गैलेक्सी ए9

आखिर में गैलेक्सी ए9 की ओवरआल रेपुटेशन देखें तो इसका, 24 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा, और आउट औफ बौक्स एंड्रौयड ओरियो प्लस पौइंट हैं लेकिन वजन, 3800 एमएएच की बैटरी, स्क्रीन साइज आदि बहुत इम्प्रेसिव नहीं है. सबसे बड़ी बात भारतीय मोबाइल उपभोक्ता उसी डिवाइस को ज्यादा पसंद करते हैं जो ईजी हार्डवेयर और सौफ्टवेयर के साथ मिले. दो कैमरों तक तो ठीक था लेकिन 4-4 रियर कैमरे फोन को बहुत कौम्प्लीकेटेड बनाते हैं और कन्फयूजिंग भी. इतने सारे कैमरों को पर्सनलाइज्ड करना आसान नहीं है. जैसे आईफोन ने अलग होने के चक्कर में वायरलेस हैण्ड फ्री और डिफरेंट चार्जर पोर्ट के साथ प्रयोग किया तो भारत में यह एंड्रौयड यूजर्स की मेजोरिटी के चलते अनफिट हो गया. कुल मिलाकर सैमसंग को बैटरी और रैम और हार्डवेयर पर ज्यादा काम करना चाहिए था बजाये ढेर सारे कैमरों के.

खिलाड़ियों से पहले सरकार ने खेला खेल

उत्तर प्रदेश की राजधनी लखनऊ के इकाना इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम पर क्रिकेट के खिलाडियों से पहले नेताओं के बीच खेल खेला गया. यह खेल क्रिकेट स्टेडियम की पहचान से जुडा था. असल में इकाना क्रिकेट स्टेडियम पीपीपी मौडल पर अखिलेश सरकार के समय बना था. पहले इंटरनेशनल क्रिकेट मैच के पहले अखिलेश यादव के समर्थक इसके लिये अखिलेश को बधाई देने लगे. सोशल मीडिया पर यह तेजी से वायरल होने लगा. अखिलेश समर्थक की इस उछाल वाली गेंद पर योगी सरकार ने सीधे छक्का लगाते हुए शाम तक इकाना क्रिकेट स्टेडियम का नाम बदल कर ‘भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेई अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम’ रख दिया. सरकार ने यह भी तय कर दिया कि क्रिकेट मैच से पहले मुख्यमंत्री योगी यह स्टेडियम देश को समर्पित करेगे.

एक तरफ अखिलेश समर्थक इस स्टेडियम को अखिलेश यादव के काम से जोड़ कर देख रहे हैं तो दूसरी ओर भाजपा के लोग इसके नये नामकरण से खुश हैं. ऐसे में क्रिकेट के गेंद और बल्ले से पहले ही सरकार ने खेल खेला और दोनों तरफ से चौकों छक्कों की बारिश शुरू हो गई. असल में योगी सरकार ने यह फैसला आनन फानन में लिया. अगर यह फैसला थोड़ा पहले होता तो इसे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के नाम से पहले से प्रचारित किया जाता. अटल बिहारी वाजपेई का लखनऊ से गहरा नाता था. वह लखनऊ के सांसद रहते ही देश के प्रधनमंत्री चुने गये थे. उनके देहावसान के बाद इस बात की जरूरत महसूस की जा रही थी कि उनके नाम पर कोई बड़ा स्मारक बनाया जाये.

लखनऊ के कई चौराहों के नाम अटल जी के नाम पर रखने का प्रस्ताव भी उठा पर बात बनी नहीं इसी बीच इकाना क्रिकेट स्टेडियम में इंटरनेशनल मैच होने का नंबर आया तो सरकार ने स्टेडियम का ही नाम बदलने का काम कर दिया. अब इकाना स्टेडियम को ‘भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेई अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम’ के नाम से जाना जायेगा. यह स्टेडियम पीपीपी मौडल पर सरकार और इकाना स्पोर्ट्स के साथ बना था. नाम बदलने की राजनीति योगी सरकार में तेजी से बढ़ रही है. मुगलसराय और इलाहाबाद के बाद इकाना का नाम बदला गया. अब लखनऊ और फैजाबाद का नाम बदले जाने की मुहिम शुरू हो गई है.

‘मनमर्जियां’ के बाद ‘जीरो’ को लेकर नाराज हुआ सिख समुदाय

अभी कुछ माह पहले आनंद एल राय निर्मित और अनुराग कश्यप निर्देशित फिल्म ‘‘मनमर्जियां’’ के तीन दृष्यों पर सिख समुदाय ने कड़ी आपत्ति जतायी थी और फिल्म के प्रदर्शन के बाद आनंद एल राय को फिल्म से उन तीन दृष्यों को काटना पड़ा था. इस पर अनुराग कश्यप ने अपनी नाराजगी जतायी थी. अनुराग का कहना था कि आनंद एल राय को सिख समुदाय के दबाव में आकर उन दृष्यों को फिल्म से नहीं हटाना चाहिए था. पर आनंद एल राय का का कहना था कि वह हर धर्म व समुदाय का सम्मान करते हैं और किसी के भी सम्मान को वह ठेस नहीं पहुंचा सकते.

इसके बावजूद आनंद एल राय ने एक बार फिर उसी तरह की गलती दोहराते हुए सिख समुदाय को अपने खिलाफ खड़ा कर लिया है. इस बार आनंद एल राय निर्मित व निर्देशित फिल्म ‘जीरो’ सिख समुदाय के निशाने पर है. फिल्म ‘जीरो’में शाहरुख खान ने बबुआ नामक एक बौने का किरदार निभाया है. इस फिल्म में कटरीना कैफ व अनुष्का शर्मा की भी अहम भूमिकाएं हैं.

वास्तव में आनंद एल राय ने अपनी फिल्म ‘जीरो’ का एक पोस्टर जारी किया है. इस पोस्टर में शाहरुख खान ने कृपाण धारण किया हुआ है. इस पोस्टर में शाहरुख नंगे बदन पर नोटों का हार पहने व गले में गातरा/कृपाण पहने दिखायी दे रहे हैं. इसी पर ‘‘दिल्ली गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी’ व अन्य सिखों ने विरोध जताया है. ‘दिल्ली गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी’ का आरोप है कि पोस्टर में शाहरुख खान ने कृपाण का मजाक उड़ाया है. ज्ञातव्य है कि सिखों के पंच ककारों में से एक है कृपाण. सिखों में कृपाण धार्मिक चिन्ह के तौर पर भी जाना जाता है.

‘दिल्ली गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी’ के धर्म प्रचार कमेटी के चेअरमैन परमजीत सिंह राणा द्वारा जारी पत्र में कहा गया है- ‘शाहरुख खान की फिल्म ‘जीरो’ के पोस्टर में सिख समुदाय के धार्मिक चिन्ह कृपाण का मजाक उड़ाया गया है. कृपाण सिखों का धार्मिक चिन्ह है. यह केवल दिखाने के लिए नहीं है. बल्कि इसके साथ मानवीय भावनाएं व संकल्प भी जुडे़ हुए हैं. यह एक प्रण है, जिसके साथ आत्मविश्वास व आत्मसम्मान को कायम रखते हुए गरीब मजलुमों की रक्षा के लिए जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने का संकल्प जुड़ा हुआ है.’

तो वहीं ‘दिल्ली गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी’ के महासचिव और दिल्ली के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोमवार की शाम नौर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करा दी है. इस शिकायत में कहा गया है कि सिर्फ पोस्ट ही नहीं बल्कि प्रोमो में भी कृपाण का मजाक उड़ाया गया है.

एक्टर्स से जानें, कैसे रखते हैं दिवाली में अपने पालतू जानवरों का ख्याल

दिवाली वैसे तो खुशियों और उल्लास का पर्व है ,लेकिन आपकी इस खुशियों में कुछ प्राणी दुखी भी होते है. दिवाली में हर साल पटाखों की आवाज और धुएं से लाखों जानवर भय से पलायन कर कही छुपने का प्रयास करते रहते है. इतना ही नहीं पटाखों से निकले धुएं और आवाज से प्रदूषण का स्तर भी बढ़ जाता है, जिससे कुछ लोगों को सांस लेने में भी तकलीफ भी होने लगती है. इस तरह जहाँ ये त्यौहार आनंद का है, वही जानवरों और कुछ लोगों के लिए परेशानी को भी लाती है. कुछ बातें निम्न है, जिसे इस दिवाली पर ध्यान अवश्य रखें,

  • अगर आपके घर में कोई पालतू जानवर हो, तो उसे छिपने के लिए ऐसी जगह चुने जहाँ पटाखों की आवाज और धुएं की स्मेल न पहुंचे,क्योंकि जानवरों की सूंघने की शक्ति अधिक होती है और वे इसकी महक से पैनिक हो जाते है और डर के मारे कांपने लगते है,खाना-पीना छोड़ देते है.
  • संभव हो तो उनके दोनों कानों में रुई के बौल बनाकर दाल दे ,ताकि उन्हें पटाखों की आवाज कम सुनाई पड़े.
  • खिड़की और दरवाजे को बंद करके रखे.
  • पेट्स को अधिक मात्रा में हाइड्रेट करें,क्योंकि पटाखों की आवाज से उनकी स्ट्रेस लेवल बढ़ जाता है.
  • किसी प्रकार के संगीत की धुन उस कमरे में लगाकर रखे,ताकि पटाखों की आवाज उस तक कम पहुंचे.
  • उसे खाने के लिए उसके मनपसंद भोजन दें, जिससे वे उसे खा सके.

ये सही है कि ऐसा माहौल घरेलू पेट्स के लिए करना संभव हो सकता है पर स्ट्रीट पेट्स के लिए ऐसा करना संभव नहीं. ऐसे में कोशिश ये करनी चाहिए कि अधिक आवाज वाले पटाखे न बजाये, जिससे उन्हें अधिक परेशानी न हो. इसके अलावा छोटे बच्चे भी दिवाली में पटाखों की आवाज से परेशान हो जाते है, कई बार तो वे अपना हाथ तक जला लेते है, ऐसे में कोशिश करें कि वे पटाखों से दूर रहे और बड़ो के साथ मिलकर ही पटाखे जलाये.

दिवाली की ख़ुशी का आनंद उठाने में टीवी और फिल्म के सितारे भी कुछ कम नहीं, लेकिन वे एक सुरक्षित दिवाली मनाना पसंद करते है.आइये जाने वे क्या कहते है,

आमिर खान  

   

दिवाली का त्यौहार मुझे हमेशा से पसंद है,क्योंकि इसमें सबसे मिलने का अच्छा अवसर मिलता है. मुझे याद आता है कि मैं दिवाली पर साल में एक बार ताश के पत्ते खेला करता था,जिसमें हार जीत का कोई मतलब नहीं था, क्योंकि मैं इस खेल को पसंद करता हूँ और ये भी याद है कि मेरे परिवार वाले इससे मेरे उपर बहुत गुस्सा हुए थे और मुझे डांट भी पड़ी थी. मैं हमेशा इसे अपने परिवार के साथ दिवाली मनाना पसंद करता हूँ. इसके अलावा इस दिवाली पर मैं सबसे अपील करता हूँ कि आप सब ज्यादा आवाज वाले पटाखे न बजाये, ताकि किसी को भी परेशानी न हो. मैं बचपन में फूलझड़ी, चकड़ी, अनार आदि जिसमें आवाज न हो, वैसे ही पटाखे जलाता था और आज भी वैसे ही पटाखे पसंद है.

काजोल

 

मुझे हर त्यौहार परिवार के साथ ही मनाना पसंद है, क्योंकि त्यौहार में ही हम एक दूसरे के साथ मिल पाते है, बाकी समय सब काम में ही व्यस्त रहते है. मुझे याद आता है, जब बचपन में इस त्यौहार पर अच्छे-अच्छे व्यंजन खाने को मिलते थे और एक अच्छा माहौल बन जाता था. इसके अलावा इस अवसर पर अधिक आवाज वाले पटाखे कभी भी न जलाएं, ताकि जानवरों को तकलीफ न हो.

टीना दत्ता

मुझे दिवाली पसंद है, पर इसमें पटाखे की आवाज पसंद नहीं. मेरे दो पेट्स है ब्राउन रीट्रीवर जो केवल 5 महीने का है, मैं उसकी माँ की तरह हूँ और उसके साथ मेरा बहुत समय गुजर जाता है. दूसरा ब्लैक रानी जो लेब्राडोर है और तीन साल का है. दिवाली में मैं उन्हें घर में रखती हूँ और हमेशा उन दोनों के साथ रहती हूँ, ताकि वे डरे नहीं.

शरद मल्होत्रा

मेरे पास 5 साल का एक पग डौग है. उसका नाम मैंने मसकली यानि मस्की रखा है. दिवाली पर मैं उसे नौइज़ पोल्यूशन से बचाता हूँ. सरकार द्वारा कम आवाज वाली पटाखे बजाने को मैं स्वागत करता हूँ. दिवाली के बाद मैं उसे खुश करने के लिए स्पा में ले जाऊंगा. वैसे मैं दिवाली अपने परिवार के साथ मनाना पसंद करता हूँ.

अनिरुद्ध दवे

दिवाली का पर्व खुशियों और उमंगो का त्यौहार है और मुझे बहुत पसंद है, लेकिन इस दौरान मुझे अपने डौग मुई का ध्यान रखना पड़ता है इसलिए मुझे पेट फ्रेंडली दिवाली अच्छा लगता  है. दिवाली पर जानवर बहुत अधिक प्रभावित होते है. इसलिए सभी को इसका ध्यान रखना चाहिए. कुछ लोग तो जानवरों के पास जाकर पटाखे चलाते है,जो गलत है. आवाज वाले पटाखे बड़ो के लिए भी बैन होनी चाहिए.

गुलशन देवैय्या क्यो नहीं मनाते दीपावाली

‘हंटर’,‘हेट स्टोरीज’ सहित कई सफल फिल्मों के अभिनेता व इन दिनों वेब सीरीज ‘‘स्मोक’’ में नजर आ रहे अभिनेता गुलशन देवैय्या दिवाली नहीं मनाते हैं. वह कहते हैं- ‘‘पशु प्रेमी होने के चलते मैं दिवाली नहीं मनाता.

मेरे घर में तीन तीन बिल्लियां हैं. उनके लिए दिवाली का समय बहुत खौफ का समय होता है. पटाखों की आवाज से बेचारी बहुत डरती हैं. मुझे उनके लिए बहुत बुरा लगता है. पर बचपन में मैं बहुत पटाखे फोड़ा करता था. अब अंदर से भी फटाके फोड़ने की इच्छा नहीं होती. दोस्तों के साथ पार्टिया कर लेता हूं. मिठाइयां खा लेता हूं. मेरे कुछ दोस्त ताश खेलते हैं, पर मुझे उसका भी शौक नही है. मुझे ताश खेलना आता ही नहीं है.’’

भारतीय कंधों पर चीनी बंदूक और निशाने पर अमेरिका

गंदा है पर धंधा है. और धंधे के लिए बनिए का दिमाग और हिन्दीचीनी भाई की डेयरिंग लेकर चीन आज अमेरिका को धूल चटा रहा है. हालांकि इस पूरे खेल में चीन भारतीय कंधे का इस्तेमाल कर रहा है. कैसे? आइये जानते हैं.

मोबाइल शिपमेंट में अमेरिका को खदेड़ा

दीवाली सीजन है और इंडिया में इलेक्ट्रानिक बाजार, खासकर स्मार्टफोन्स सेगमेंट पर चीन की धमक इस कदर बढ़ती जा रही है कि चौथे क्वार्टर में ही मोबाइल शिपमेंट में अमेरिका को बुरी तरह से पटकनी दे दी गयी है. कहने को यह पटकनी भारत ने दी है लेकिन चूंकि मोबाइल शिपमेंट में टौप पर चीनी ब्रैंड शियोमी बरक़रार है तो समझा जा सकता है कि इंडियन मार्केट का इस्तेमाल चीन ने अमेरिका के खिलाफ कितना स्मार्टली किया है. रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत के स्मार्टफोन मार्केट में सैमसंग को पीछे छोड़कर चीन की कंपनी शियोमी ने फिर नंबर 1 पोजिशन हासिल कर ली है. मामला है की जब फेस्टिव सीजन से पहले भारत का स्मार्टफोन शिपमेंट 24 फीसदी बढ़ा है तो जाहिर है दीवाली तक यह और बूस्ट करेगा. ये आंकड़े मार्केट मौनिटर सर्विस काउंटरप्वाइंट के शोध पर बेस्ड हैं.

आंकड़ों में फिसड्डी इंडियन ब्रैंड्स

कहने को भारत के मोबाइल शिपमेंट ने अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है. लेकिन यह जीत चीन की इसलिए भी है क्योंकि स्मार्टफोन का शिपमेंट में 24% की बढोतरी के पीछे स्मार्टफोन मार्केट में टॉप 5 ब्रांड्स की हिस्सेदारी (77 फीसदी) का अहम् रोल है. आंकड़ों की बात कर्रें तो सैमसंग की बाजार हिस्सेदारी 23 फीसदी रही तो वहीँ शियोमी की 5 फीसदी से बढ़कर 27 फीसदी पहुंच गई. वहीँ वीवो तीसरे नंबर पर रही. इन टौप 3 ब्रेड्स में किसी भी भारतीय ब्रैंड्स का न होना शर्मनाक है.

अमेरिका का ‘रोटन’ एप्पल

बात यही नहीं ख़त्म हुई. अमेरिकी दिग्गज कम्पनी आईफोन के हाल भी बहुत अच्छे नहीं है. अगर पिछले 4 सालों की बात करें तो आईफोन की सेल में जबरदस्त गिरावट आई है और इस गिरावट के पीछे कोई और नहीं बल्कि चीन के सस्ते मगर टिकाऊ गिरावट दर्ज की गई है. हांगकांग आधारित काउंटरप्वाइंट रिसर्च के मुताबिक़ भारत में 1 साल पहले जहां एप्पल की सेल 1 मिलियन थी तो वहीं अब ये आंकड़ा गिरकर सिर्फ 700,8000 से लेकर 800,000 यूनिट्स तक पहुंच गया है. साल 2018 की बात करें तो एप्पल का प्लान इस साल 2 मिलियन यूनिट्स को बेचने का था, जो जाहिर है फ्लॉप हो चुका है.

अमेरिका का यह चहेते एप्पल के सड़ने (रोटन) के पीछे असली वजह चीन की वही बन्दूक है जो भारतीय कन्धों से ताबड़तोड़ फायर कर रही है.

दरअसल एपल डिवाइस की महंगी कीमत, ट्रेड ट्रॉफिक और गिरते रुपये के कारण इसकी बिक्री का यह आंकड़ा दिन ब दिन गिरता जा रहा है, दूसरी और चीन की ज्यादातर मोबाइल कम्पनियां अपने स्मार्टफोन्स एपल के सिमिलर फीचर्स, इंडियन कंज्यूमर्स के लिहाज से सहज डिवाइस और अपेक्षाकृत कम कीमतों में भारतीय उपभोक्ताओं को मुहैया करा रही हैं. इसके अलावा एंड्रौइड बेस तेजी से बढ़ रहा है लेकिन एप्पल को अपने साथ नए कस्टमर्स जोड़ने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. चीन में एप्पल की सेल्स ठंडी पड़ी है ऐसे में कंपनी को भारत में काफी संभावनाएं दिखाई दे रही है, लेकिन कंपनी को उसकी उम्मीद के मुताबिक अभी तक भारत में सफलता नहीं मिली है. गौरतलब है कि एप्पल का भारत में मार्केट शेयर 1% के करीब है.

चीनी शादी में हम हैं अब्दुल्ले

प्रचारित यह किया जा रहा है कि भारत का मोबाइल शिपमेंट मार्केट जबरदस्त ग्रो कर रहा है. लेकिन इसमें भारत को क्या फायदा हो रहा है? दिहाड़ी मजदूरी पर भारीभरकम डिलीवरी बैग्स कंधे पर लटकाए युवा मजदूर सामान यहाँ से वहां भले ही डिलीवर कर, खुद को रोजगारी समझ रहे हैं लेकिन 8-10 हजार रूपये में काम करने वाले इन युवाओं को मशीनों की तरह इस्तेमाल किया. कोई उत्पादकता नहीं है.

दूसरी तरफ अमेरिका भारत में स्मार्टफोन मार्केट डबल डिजिट में ग्रोथ कर रहा है. इसके बावजूद एक भी भारतीय ब्रैंड घरेलू बाजार में अपनी जगह नहीं बना पा रहा है. माइक्रोमैक्स जैसे इक्का दुक्का ब्रैंड जो चल रहे हैं वे सब चीन से तकनीक आयात कर रहे हैं. अपना कुछ भी सृजित नहीं कर पा रहे.

हमें सब पका पकाया खाने की आदत हो गयी है. सब स्मार्टफोन से और्डर कर सकते हैं लेकिन खुद का इंटरनेशनल लेवल का प्रोडक्ट तैयार करना नहीं आता. अकर्मण्यता के चलते आज चीन मेड इन इंडिया के लेबल की आड़ में अपनी जेबें भर रहा है औऱ हम बेगानी शादी में दीवाने अब्दुल्ला की तरह आंख बंद कर नाचने में मशरूफ हैं.

कोरल कैल्शियम में छिपा है सुंदरता और मजबूत हड्डियों का राज

कैल्शियम एक महत्त्वपूर्ण मिनरल है जो कि मानव शरीर में प्रचुरता में पाया जाता है. उस में से भी लगभग 99% कैल्शियम दांतों और हड्डियों में मौजूद रहता है ताकि वे मजबूत बने रह सकें. कैल्शियम का बाकी हिस्सा सेल सिग्नलिंग, ब्लड क्लौटिंग, मसल्स कौंट्रेक्शन और नर्व फंक्शन में अहम भूमिका निभाता है.

अत: प्रतिदिन मैक्रो एवं ट्रेस मिनरल का सेवन महत्त्वपूर्ण है. मगर यह मुख्य रूप से हमारी खानपान की आदतों पर निर्भर करता है. एक अच्छी संतुलित डाइट में शरीर के लिए आवश्यक मिनरल्स उचित मात्रा में मौजूद होते हैं मगर हम अकसर अपनी व्यस्त जीवन शैली की वजह से ऐसी डाइट नहीं ले पाते.

ऐसा पाया गया है कि भारत के लोग प्रतिदिन जरूरत से कम मात्रा में कैल्शियम लेते हैं यानी प्रतिदिन 400 मिलीग्राम से भी कम. इस के अलावा कुल भारतीय आबादी के 70% से ज्यादा लोग प्रतिदिन सेहत के लिए जरूरी पोषक तत्त्वों का 50% से भी कम लेते हैं. ऐसे में रोज सही मात्रा में कैल्शियम और दूसरे मिनरल्स के सप्लीमेंट्स लेना जरूरी है.

कैल्शियम के प्राकृतिक स्रोत

कैल्शियम हरी सागसब्जियों, मांस और डेयरी व पोल्ट्री उत्पादों जैसे दूधअंडों इत्यादि में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. समुद्र में कोरल पाया जाता है जो कि प्राकृतिक कैल्शियम के साथ जिंक आयरन, गोल्ड, सिल्वर सेलिनियम जैसे 70+ ट्रेस मिनरल्स का महत्त्वपूर्ण स्रोत है. हड्डियों में मौजूद ज्यादातर एलिमेंट्स अलग अलग रूप में मूंगे में पाए जाते हैं. ऐसे में कैल्शियम और ट्रेस मिनरल्स की कमी कोरल कैल्शियम सप्लीमेंट्स के जरिए पूरी करने में मदद मिलती है.

शोधों में पाया गया है कि  जिन लोगों ने कैल्शियम ट्रेस मिनरल्स के साथ लिया है उन में बोन लौस की संभावना उन लोगों की तुलना में कम रहती है जो सिर्फ कैल्शियम सप्लीमेंट लेते हैं. इस से पता चलता है कि शरीर के लिए कोरल कैल्शियम कितना जरूरी और महत्त्वपूर्ण है.

सुंदरता में महत्त्व

त्वचा, बालों और नाखूनों की सुंदरता व सेहत बरकरार रखने के लिए मूंगे के महत्त्व का जिक्र आयुर्वेद में भी है. आयुर्वेद में कोरल को प्रवाल कहा गया है. जैसेजैसे उम्र बढ़ती है वैसेवैसे शरीर में कैल्शियम पचाने की क्षमता भी घटती जाती है. ऐसे में कोरल कैल्शियम के द्वारा प्राकृतिक कैल्शियम बेहतर तरीके से आंतों के जरीए शरीर में पहुंचाया जा सकता है.

कैल्शियम और ट्रेस मिनरल्स की उचित मात्रा ले कर आप अपनी हड्डियों को मजबूत बना सकते हैं एवं साथ में अपने दांत, नाखून एवं त्वचा को स्वस्थ बनाए रख सकते हैं. कोरल कैल्शियम जिस में प्राकृतिक रूप से कैल्शियम और ट्रेस मिनरल्स पाए जाते हैं जो कि हमें प्रतिदिन के लिए जरूरी पोषण का संतुलित कौंबिनेशन देते हैं.

-डा. कमल नयन द्विवेदी

प्रोफैसर एवं विभागाध्यक्ष, द्रव्यगुण विभाग, फैकल्टी औफ आयुर्वेद, इंस्टिट्यूट औफ मेडिकल साइंसेज, बीएचयू, वाराणसी.

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