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पलड़ा भारी था पर मैच हारा भारत

भारतीय मीडिया भी कमाल का है. अभी क्रिकेट की हमारी टीम औस्ट्रेलिया पहुंची भी नहीं थी कि हम से कमजोर लग रही कंगारुओं की टीम को ऐसी हवा दे दी कि पहले ही ट्वेंटी20 मैच में भारत को मुंह की खानी पड़ी.

बारिश और होम ग्राउंड का फायदा उठाते हुए औस्ट्रेलिया ने ब्रिस्बेन में हुए पहले मुकाबले में भारत को 4 रन से हरा दिया. भारत ने टौस जीत कर पहले फील्डिंग करने का फैसला लिया था और जैसी औस्ट्रेलिया की शुरुआत हुई थी उस से लग रहा था कि अब इस मैच को जीतना उतना मुश्किल नहीं रहेगा लेकिन जीजे मैक्सवेल और एमपी स्टोनिसिस की अच्छी बल्लेबाजी ने 17 ओवरों में 158 रन का अच्छा स्कोर खड़ा करवा दिया.

मैक्सवेल ने 24 गेंदों पर 46 रन बनाए तो स्टोइनिस ने 19 गेंदों पर 33 नाबाद रन जड़े. इस के बाद हुई बारिश ने खेल खराब कर दिया और भारत को डकवर्थ लुईस के नियम के मुताबिक 17 ओवरों में 174 रन का टारगेट मिला.

भारत की शुरुआत खराब रही. रोहित शर्मा 7 रन ही बना सके. शिखर धवन ने 42 गेंदों पर ताबड़तोड़ 76 रन बनाए पर विराट कोहली समेत केएल राहुल ने उन का साथ नहीं दिया. बाद में ऋषभ पंत और दिनेश कार्तिक ने मैच को रोचक जरूर बनाया, पर जीत दिलाने में नाकाम रहे.

भारत को मैच के आखिरी ओवर में 13 रन की दरकार थी लेकिन गेंदबाज एमपी स्टोइनिस ने अपने शानदार गेंदबाजी से मैच का पासा पलट दिया. उन्होंने 3 ओवरों में 27 रन दे कर 2 विकेट झटके. ये दोनों विकेट उन्होंने आखिरी ओवर में लिए थे.

हालांकि यह इस दौरे का पहला ही मैच था और अभी लंबा सफर बाकी है लेकिन औस्ट्रेलिया को मिली इस जीत से उस के हौसले बुलंद हो गए हैं क्योंकि यह उस की उतनी मजबूत टीम नहीं है और भारत का इस तरह हारना उस के लिए चिंता की बात हो सकती है.

डब्बाबंद तैमूर : बाजार क्या न करा दे

बाजार क्या न करा दे. अपनी हर फोटो से 1500 रुपए कमाने वाले सैफ अली खान और करीना कपूर खान के साहबजादे तैमूर को ही एक टौय कंपनी ने माल कमाने का जरिया बना लिया है. किसी ने सोशल मीडिया पर एक खिलौने की तस्वीर शेयर की है जो केरल की किसी बड़ी दुकान की बताई जा रही है. वहां मुसकराते तैमूर को डब्बाबंद कर बेचा जा रहा है.

मामला कुछ यों है कि अब तैमूर को खिलौने की शक्ल दे दी गई है जिसे आप अपने बच्चे के लिए खरीद कर उस के चेहरे पर मुसकान ला सकते हैं. इस खिलौने को देख कर एक बार तो बार्बी गर्ल भी शरमा जाए. सफेद कुरते, गहरी नीली पजामी पहने तैमूर के तेवर ही निराले हैं. कुरते पर गहरे नीले रंग की गोल गले की वास्केट फब रही है और छोटेछोटे सफेद जूतों के तो कहने ही क्या.

इस खिलौने को औनलाइन 900 से 1400 रुपए में अपना बनाया जा सकता है. इस मसले पर तैमूर की मम्मी करीना ने कहा, “तैमूर अपनी पॉपुलैरिटी से दूर नहीं भाग सकता और न ही उस के पेरेंट्स. जब मैं ने इस खिलौने को देखा तो समझ नहीं आया कि क्या कहूं… इस प्यार को देख कर हमें यह नहीं लगता कि हम तैमूर की तसवीर खींचने और ऐसा खिलौना बनाने वाले लोगों को रोकें. लेकिन उन्हें यह समझना चाहिए कि तैमूर अभी सिर्फ 2 साल का है और एक बच्चे को नार्मल लाइफ चाहिए.”

पापा सैफ भी तैमूर का सौफ्ट टौय बनने से खुश हैं. उन्होंने तो यह खिलौना बनाने वालों से डिमांड कर दी कि एक पीस उन्हें भी भेज दिया जाए. भारत में मशहूर हस्तियों के टौय बनाने का चलन उतना ज्यादा नहीं है जितना पश्चिमी देशों, अमेरिका या चीन या फिर जापान में है. वहां की काल्पनिक बार्बी डौल तो घरघर में अपनी जगह बना चुकी है. लेकिन तैमूर का यह जीताजागता सा खिलौना वाकई खिलौनों के भारतीय बाजार का नायाब हीरा लग रहा है. भारत में मशहूर हस्तियों के बच्चों के खिलौने बनाने की शुरुआत तैमूर ने कर दी है. अब देखते हैं कि अगला नंबर किस का आता है.

मराठा समुदाय को आरक्षण की चुनौतियां

महाराष्ट्र सरकार ने मराठा आरक्षण पर मुहर लगा दी है. राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट को मंजूरी दे दी लेकिन कई तरह के विरोध और दावों के साथ मराठा आरक्षण के लिए सरकार के सामने अब चुनौतियां खड़ी रहेंगी.

पिछड़ा वर्ग आयोग ने मराठों को 16 प्रतिशत आरक्षण देने की सिफारिश की है. आयोग ने सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राज्य में 30 प्रतिशत आबादी मराठा है. ऐसे में उन्हें सरकारी नौकरी में आरक्षण देने की जरूरत है.

मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए सरकार एसईबीसी (सामाजिक, शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग) नाम से स्वतंत्र श्रेणी बनाएगी पर राज्य में पहले से ओबीसी श्रेणी में शामिल कुनबी समाज ने यह कह कर विरोध शुरू कर दिया कि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में मराठों की जो 30 फीसदी आबादी बताई है, वह आंकड़ा गलत है. मराठों और राज्य सरकार ने कुनबी आबादी की गिनती भी मराठा समुदाय के साथ की है यानी मराठा जनसंख्या में कुनबी समुदाय भी शामिल है.

कुनबी नेताओं का दावा है कि अगर कुनबी आंकड़ों को हटाते हैं तो राज्य में मराठों की संख्या 12 प्रतिशत ही है.

कुनबी समुदाय ने नई एसईबीसी श्रेणी में शामिल होने से इनकार कर दिया. कुनबी नेताओं का कहना है कि पहले से ओबीसी श्रेणी में शामिल हमारा नई श्रेणी में कानूनी रूप से मान्य नहीं होगा.

राज्य में अभी कुल आरक्षण 52 प्रतिशत है. इस में 13 प्रतिशत अनुसूचित जाति, 7 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति, 19 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग, 2 प्रतिशत विशेष पिछड़ा वर्ग, 3 प्रतिशत विमुक्ति जाति, 2.5 घुमंतु जनजाति बी श्रेणी, 3.5 प्रतिशत घुमंतु जनजाति सी (धनगर) और 2 प्रतिशत घुमंतु जनजाति डी बंजारा के लिए प्रावधान है.

दरअसल 2014-2015 में तब की कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने सरकारी नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय को 16 प्रतिशत आरक्षण दिया था. इस के बाद इस मुद्दे को ले कर अदालत में कई याचिकाएं डाली गईं. नवंबर 2014 में एक अंतरिम आदेश में अदालत ने सरकार के इस फैसले पर रोक लगा दी गई थी.

महाराष्ट्र में पिछले समय से आरक्षण के लिए मराठों का आंदोलन तेज हो गया था. पहले मौन आंदोलन चला फिर हिंसक हो गया था.

महाराष्ट्र में मराठा जातियां खेतीहर हैं. ये जातियां राज्य में संपन्न मानी जाती हैं लेकिन इन में से कुछ लोग ही राजनीतिक, आर्थिक तौर पर मजबूत है. इस समुदाय के ज्यादातर लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं. खेती, जमीन होते हुए भी मराठा लोग कर्ज की वजह से तंगी के हालात में रहने पर मजबूर हैं. राज्य में आत्महत्या करने वाले किसानों में ज्यादातर मराठा जातियों के हैं.

इस समुदाय को लग रहा है कि सरकारी पदों पर इन लोगों की जातियों के सदस्य नहीं हैं. हरियाणा में जाट, गुजरात में पाटीदार, राजस्थान में गुर्जर जातियों की स्थिति भी मराठाओं की तरह है. ये जातियां सरकारी नौकरियों में अपनी भागीदारी हासिल करना चाहती हैं.

अब सरकार के सामने बड़ी चुनौती यह है कि मराठा आरक्षण को  किसी भी कानूनी चुनौती के लागू किया जाए. अगर राज्य मराठों को 16 प्रतिशत आरक्षण देता है तो भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50 फीसदी आरक्षण की सीमा पार हो जाएगी.

पैरों को सुंदर बनाएं और इंफेक्शन से बचाएं

हमारे पैर जल्‍द ही फंगल और बैक्‍टीरियल इंफेक्‍शन के संपर्क में आ जाते हैं, इसलिए जरुरी है कि हम उनकी अच्‍छे से देखभाल करें. हर वक्‍त पैरों की अंगुलियां पानी में रहने से वे सड़ जाती हैं. चलिए देखते हैं कि पैरों को इंफेक्‍शन से बचानेे के साथ उसकी खूबसूरती कैसे बढ़ाई जाए.

– पैरों की मृत त्‍वचा को साफ करना भी बहुत जरुरी है, इसके लिए आप फुट स्‍क्रबर या फिर प्‍यूमिक स्‍टोन का इस्‍तमाल कर सकती हैं. इसके अलावा चाहें तो हफ्ते में एक बार पेडिक्‍योर भी करवा सकती हैं. डेड स्‍किन से ही पैरों में क्रैक्‍स पड़ते हैं, इसलिए जितनी जल्‍दी हो उससे छुटकारा पाएं.

– हमेशा सूती मोजे ही पहने और वक्‍त-वक्‍त पर उसे बदलते भी रहें. यह एक सिंपल विधि है जिससे आप फुट इंफेक्‍शन से बचे रह सकते हैं.

– एक बाल्‍टी में गरम पानी लें और उसमें 5 एमएल पिपरमिंट का तेल और कुछ नीम की पत्‍तियां डाल कर उसमें अपने पैरों को 10 मिनट तक डुबोएं. इससे न तो पैरों में बदबू आएगी और न ही ज्‍यादा पसीना.

– नाखून में फंगस लगने का भी खतरा रहता है. इसलिए जब भी जूता पहने तो पहले अपने पैरों में टैल्‍कम पाउडर और कपूर पाउडर को मिला कर उस पर लगा लें. कपूर एक असरदार एंटीसेप्‍टिक माना जाता है, जो इंफेक्शन को दूर करता है.

– पैरों में किसी भी प्रकार की कोई तेल ग्रंथी नहीं होती इसलिए उनको नम करने के लिए मौस्‍चराइजर का प्रयोग करें. जितनी बार अपने पैरों को पानी से धोएं उतनी बार क्रीम या लोशन लगाएं. चाहें तो पैरों को औलिव औयल या बादाम के तेल से नमी पहुंचा सकती हैं.

– जब कभी भी आपके जूते या चप्‍पल गीले हों, तो उन्‍हें कभी भी बेड के नीचे या बंद अल्‍मारियों में नहीं रखना चाहिये. इसे जूतों में बैक्‍टीरिया पैदा होने का डर रहता है. हमेशा गीले जूते-चप्‍पलों को सूरज की धूप में ही रखें जिससे संक्रमण का नाश हो.

सरकार आरबीआई से क्यों पैसा मांग रही है?

सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बीच लंबे समय से जारी खींचतान अक्टूबर के आखिर में अपने चरम पर जा पहुंची. 26 अक्टूबर को मुम्बई में एडी श्रॉफ स्मृति व्याख्यान देते हुए आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आर्चाय ने कहा, “जो सरकार केन्द्रीय बैंक की स्वतंत्रता का सम्मान नहीं करतीं, वे देर-सवेर वित्तीय बाजारों का आक्रोश झेलने, आर्थिक आग को हवा देने तथा उस दिन का मातम मनाने को अभिशप्त होती हैं, जिस दिन उन्होंने इस संस्थान की स्वायत्तता कमजोर की थी.” खबरों के मुताबिक इसके पांच दिन बाद सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक कानून 1935 की धारा 7 के तहत दिशानिर्देश जारी करने के बारे में परामर्श आरंभ किया. यह धारा सरकार को वित्तीय मामलों में आरबीआई को परामर्श जारी करने का अधिकार देती है. अब से पहले इस धारा का इस्तेमाल कभी नहीं किया गया.

सरकार और आरबीआई के बीच चल रहे इस विवाद के केन्द्र में सरकार का वह अभूतपूर्व प्रस्ताव है जिसमें सरकार ने केन्द्रीय बैंक को उसके 9.59 लाख करोड़ रुपए के अतिरिक्त भंडार का एक तिहाई 3.59 लाख करोड़ रुपए सरकार को सौंपने को कहा है. इन भंडारों को अभूतपूर्व किस्म की आर्थिक कठनाइयों के वक्त अर्थतंत्र की मदद के लिए रखा जाता है. मोहन गुरुस्वामी सहित कई जानेमाने अर्थशास्त्रियों ने सरकार की इस मांग की आलोचना की है. 1998 में तत्कालीन बीजेपी सरकार ने गुरुस्वामी को आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया था परंतु उन्होंने एक वर्ष के भीतर ही पद से इस्तीफा दे दिया. हाल में वह एक स्वतंत्र थिंक टैंक सेंटर फॉर पॉलिसी अल्टरनेटिव के संस्थापक और निदेशक हैं.

दी कारवां की रिपोर्टिंग फेलो आतिरा कोणिकर के साथ एक बातचीत में गुरुस्वामी ने बताया कि सरकार नोटबंदी और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की विफलता को छिपाने के लिए आरबीआई के भंडार में हाथ साफ करना चाहती है. वो कहते हैं, “बैंकों की खस्ता हालत कें मद्देनजर आरबीआई को अंतिम गारंटर की अपनी भूमिका बरकरार रखनी होगी. यदि आप उसकी पूंजी को कम करते हैं तो इससे पूरे वित्तीय व्यवस्था के लिए खतरा पैदा हो जाएगा. ऐसा करना परिवार का व्यवसाय बेच कर दिवाली मनाने जैसी बात होगी.”

आतिरा कोणिकरः आखिरी बार कब सरकार ने रिजर्व बैंक के भंडार से धन लिया था?

मोहन गुरुस्वामीः मुझे याद है कि 1962 में चीन के साथ हुई जंग के वक्त सरकार ने आरबीआई से भंडार सौंपने को कहा था. आवश्यकता होने पर भंडार उपलब्ध कराने का प्रस्ताव आरबीआई ने सरकार को दिया था. मुझे नहीं लगता कि उस वक्त रिजर्व बैंक से धन लिया गया था क्योंकि वह युद्ध जल्दी खत्म हो गया था और आरबीआई को ऐसा नहीं करना पड़ा. 1991 में भी जब हालात बहुत बुरे थे, सरकार ने विदेशों में सोने की बिक्री की लेकिन आरबीआई से भंडार की मांग नहीं की.

आरबीआई प्रत्येक वर्ष अतिरिक्त भंडार का हस्तांतरण करता है. पिछले साल आरबीआई ने 50 हजार करोड़ रुपए सरकार को दिए थे. लेकिन ये 3.6 लाख करोड़ रुपए की मांग घर में रखे सोने को बेचने के समान है. बैंकों की खस्ता हालत के मद्देनजर आरबीआई के कमजोर पड़ने का अर्थ है कि हम लोग देश को खतरे में डाल रहे हैं.

एक बार में 3.6 लाख करोड़ रुपए की निकासी मुद्रास्फीति को बढ़ा देगी. मुद्रा आपूर्ति में मुद्रा का निर्माण व्यवसाय के जरिए होना चाहिए न कि इधर या उधर से लेकर. ये तो वही बात हुई कि कोई घर का व्यवसाय बेच कर दिवाली मनाए. इसी वजह से आरबीआई इसे ना देने की जिद कर रहा है. देश की वित्तीय अखंडता को बचाए रखने का जिम्मा आरबीआई का है. यह संस्था नेताओं की इच्छापूर्ति के लिए नहीं है.

आतिराः आरबीआई की स्थापना 1935 में ब्रिटिश शासन में हुई थी. दूसरे विश्व युद्ध के समय में भी धन की आवश्यकता थी. क्या इस बात का कहीं कोई साक्ष्य है जो साबित करता हो कि ब्रिटिश सरकार ने आरबीआई के भंडार से पैसे लिए थे?

गुरुस्वामीः नहीं, किसी ने भी आरबीआई के भंडार को नहीं छुआ. उन लोगों ने सरकार का धन लिया लेकिन किसी ने भी आरबीआई को कमजोर नहीं किया. यह वैसी ही बात है कि कोई बच्चे की शिक्षा के लिए जमा पूंजी को पार्टी करने के लिए उड़ा दे. आरबीआई के गवर्नर और सभी लोगों को सरकार के आगे सिर झुकाने से पहले अपने अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए.

आतिराः आपको क्या लगता है, क्यों वर्तमान सरकार आरबीआई के भंडार को हाथ लगाना चाहती है?

गुरुस्वामीः जीएसटी संकलन कम होने की घबराहट में सरकार ऐसा कर रही है. उम्मीद के मुताबिक आर्थिक विकास नहीं हुआ. इसके अलावा नोटबंदी के कारण मंदी जैसे हालात बन गए. नोटबंदी के वक्त वे लोग कह रहे थे कि हम लोगों को 3 लाख करोड़ रुपए मिलेगा जो बैंकों में जमा नहीं होगा. लेकिन पूरा 19 लाख करोड़ रुपए वापस बैंकों में आ गया.

सरकार जैसे भी बन पड़े 3 लाख करोड़ रुपए लेना चाहती है क्योंकि वह कुछ नहीं कर पाई- वह सब्सीडी कम नहीं करवा सकी, अपना कर्ज कम नहीं करा सकी या ब्याज कम नहीं करा पाई, वह करों में वृद्धि नहीं कर सकी. यदि आरबीआई अपने भंडार को कम करती है तो वह रकम उसे कभी वापस नहीं मिलेगी. आरबीआई को नोटबंदी में तीन लाख करोड़ रुपए का घाटा हुआ है. अब वह लोग आरबीआई का 3.6 करोड़ रुपए भी लेना चाहते हैं. यह बहुत भयावह स्थिति है.

छह महीनों में चुनाव आने वाले हैं. गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों ने अंधाधुंध कर्ज दिया है. वे बैंकों में पैसे भरना चाहते हैं ताकि एनपीए खातें क्लियर कर सकें. ये धन गायब हो जाएगा और इससे न एक सड़क का निर्माण होगा और न एक स्कूल का. बैंकों को रि-कैपिटलाईज करने के लिए जो धन दिया जाएगा वह रुइया, अंबानी और अडानी जैसे व्यवसायियों के कर्जों की माफी के लिए काम में लाया जाएगा. आप उनको अपना कर्ज चुकाने के लिए नहीं कह सकते. क्या मोदी अनिल अंबानी से कर्ज चुकता करने को कह सकते हैं? वह अंबानी के एहसान तले दबे हुए हैं.

आतिराः पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविन्द सुब्रमण्यन का अर्थिक सर्वे-2016 कहता है कि आरबीआई के पास पहले से ही जरूरत से अधिक भंडार हैऔर बैंकों को रि-कैपिटलाईज करने के लिए 4 लाख करोड़ रुपए का इस्तेमाल किया जा सकता है.

गुरुस्वामीः आप ऐसा तब करते है जब अर्थतंत्र में उछाल आ रहा हो. जब ऐसा तनाव के दौरान होता है तो इससे एक अलग तरह का वातावरण बनता है. आरबीआई को अपनी माली स्थिति पर भी ध्यान देना होता है. चूंकि आरबीआई परम या अंतिम गारंटर है इसलिए वह कल यह नहीं कह सकता कि उसके पास भंडार नहीं है.

आतिराः आरबीआई द्वारा गठित मालेगाम तकनीकी समिति ने 2013 की रिपोर्ट में कहा था कि आरबीआई के पास आवश्यकता से अधिक भंडार और बफर है.

गुरुस्वामीः जब चीजें अच्छी चल रही होती हैं, अर्थव्यवस्था 10 प्रतिशत की दर से बढ़ रही होती है तब आपको अधिरचना के विकास के लिए धन की आवश्यकता होती है तो आरबीआई से मांग की जा सकती है, और तो और अपना विदेशी मुद्रा भंडार भी 40-50 अरब डॉलर कम किया जा सकता है. ऐसी परिस्थिति में जब विदेशी व्यापार और चालू खाता घाटा सकारात्मक दिखाई दे रहा हो, तब आप भंडार को कम कर सकते हो. अभी चालू खाता घाटा बढ़ रहा है. व्यापार घाटा भी बहुत है.

आतिराः सरकार इस मांग को कैसे सही ठहरा सकती है?

गुरुस्वामीः सरकार इसे सही नहीं ठहरा सकती. यह एक खराब सरकार है जो अच्छा दिखने की कोशिश कर रही है. यदि आप 3.6 करोड़ रुपए बाजार में लाएंगे तो उससे सकल घरेलू उत्पाद बढ़ जाएगा.

लेकिन आरबीआई भंडार से उठा लेने का मतलब है कि आप अर्थव्यवस्था को ठीक से नहीं चला रहे. यदि आप एक ही दिन में 3.6 करोड़ रुपए अर्थव्यवस्था में डालते हो मुद्रास्फीति बढ़ जाएगी. चीजों की कीमत आसमान छूने लगेगी. क्योंकि आप ने कर्ज चुकता कर दिया है तो बैंक उधार देने की स्थिति में होंगे, बैंक होते ही हैं उधार देने के लिए. सरकार संपत्ति निर्माण के लिए आरबीआई का धन नहीं ले रही. वह तो एनपीए का कर्ज माफ करना चाहती है. जिन लोगों ने बैंकों से उधार लिया है वह लोग इसे नहीं चुका रहे हैं. और इस कारण बैंक अच्छी हालत में नहीं दिख रहे हैं. बैंकों को चाहिए कि कर्ज न चुकाने वालों पर सख्ती दिखाएं. सरकार उन लोगों को बचाना चाहती है.

सरकार के सलाहकार कौन लोग है? स्वदेशी जागरण मंच, गुरुमूर्ति? (स्वदेशी जागरण मंच आरएसएस की आर्थिक शाखा है और गुरुमूर्ति इसके पूर्व सहसंयोजक हैं जिन्हें इस साल अगस्त में आरबीआई के केन्द्रीय बोर्ड में नियुक्त किया गया है.) ऐसे लोग सलाहकार हैं जिन्हें फाइनेंस विषय के बारे में कुछ नहीं पता.

आतिराः क्या आप ऐसे किसी देश का नाम बता सकते हैं जहां की सरकार ने अपने केन्द्रीय बैंक का भंडार लिया हो?

गुरुस्वामीः ऐसा करना कभी सही नहीं होता. ऐसा मात्र भयावह स्थिति में किया जाता है. पिछले साल अर्जेन्टीना ने ऐसा किया था क्योंकि वहां आर्थिक त्रासदी हो गई थी, हाल में ही ग्वाटेमाला ने ऐसा किया था और कुछ अफ्रीकी देशों ने भी- ये ऐसे देश है जो दिवालिया होने के कगार पर हैं. ब्रिटेन ने कभी ऐसा नहीं किया, अमरीका ने भी कभी संघीय भंडार को नहीं छुआ, चीन ने ऐसा नहीं किया और रूस ने भी ऐसा नहीं किया.

मेरे विचार में बैंकों का नवीनीकरण करना बेहतर उपाय होगा- उनका विलय कर दीजिए, उन्हें मजबूत बनाइए. मेहनत करिए. यदि आपका पैर टूट जाता है तो उसका ऑपरेशन करिए या उस पर पलस्तर चाढ़ाइए. लेकिन यह न कर आप मरीज को मोरफीन खिला रहे हैं ताकि दर्द का एहसास न हो.

आतिराः आरबीआई की एक आर्थिक पूंजी रूपरेखा है जो उन शर्तों को तय करती हैं जिसके तहत उसके भंडार को सरकार को हस्तांतरित किया जा सकता है.

गुरुस्वामीः भंडार लिया जा सकता है. सरकार धारा 7 के तहत निर्देश दे सकती है. लेकिन आरबीआई का कर्तव्य है कि वह सरकार को आर्थिक सावधानी से अवगत कराए. अगर सरकार आर्थिक सावधानी के मामले में अपने सलाहकारों की बात नहीं सुनती है तो आरबीआई के गवर्नर और डिप्टी गवर्नर को इस्तीफा दे देना चाहिए और आरबीआई को गुरुमूर्ति को चलाने देना चाहिए. सरकार जो चाहे कर सकती है. लेकिन सिर्फ इसलिए कि वह जो चाहे कर सकती है उसे कुछ भी नहीं करना चाहिए. उसे हर वक्त संयम बनाए रखना चाहिए.

देश की जो आर्थिक स्थिति है और बैंकों की कमजोर हालत के कारण, आरबीआई के लिए यह जरूरी है कि वह उद्धार कार्य के लिए अपने हाथों में धन बचा कर रखे. कुल एनपीए लगभग 11 लाख करोड़ रुपए का है. यदि आप 3.6 करोड़ रुपए लेते हैं तो आपको और धन की आवश्यकता पड़ेगी.

आतिराः क्या कागजों में ऐसे नियम हैं जो पारदर्शिता सुनिश्चित करते हों और सरकार को भंडार हस्तांतरण की प्रक्रिया बताते हों?

गुरुस्वामीः यह आरबीआई को तय करना है. आरबीआई को अंतिम गारंटर के रूप में काम करना होता है. जाहिर सी बात है कि 100 रुपए के नोट पर आरबीआई के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं. 100 रुपए का नोट एक इकरारनामा है, 10 रुपए का नोट भी एक इकरारनामा है. तो आरबीआई एक ऐसी संस्था है जिसकी विश्वसनीयता अलंघनीय है. आप ने नोटबंदी कर उसकी विश्वसनीयता को पहले से ही कमजोर कर दिया है.

आतिराः क्या आपको लगता है कि सरकार का फैसला न मानने पर आरबीआई के खिलाफ कार्रवाही की जा सकती है?

गुरुस्वामीः मुझे लगता है कि मोदी और जेटली सोचते हैं कि हम लोग सर्वेसर्वा हैं और हम जो चाहे कर सकते हैं.

आरबीआई को अपनी विश्वसनीयता हर वक्त बनाए रखनी होती है. यदि आप आरबीआई के गवर्नर, उसके डिप्टी गवर्नर को बर्खास्त करते हैं तो बाजार में अराजकता का माहौल बन जाएगा. इसके बाद आपको कोई कर्ज नहीं देगा और आप पर विश्वास नहीं करेगा. यह आरबीआई की विश्वसनीयता है जो आर्थिक रूप में देश को विश्व बाजार में पहचान देती है.

बंगाली डिश ‘बेगूनी’

सामग्री :

– दो बैंगन
– एक कटोरी बेसन
– एक हरी मिर्च (बारीक कटी हुई)
– एक छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
– चुटकीभर कलौंजी
– एक छोटा चम्मच सूजी
– नमक स्वादानुसार
– पानी घोल बनाने के लिए
– तेल तलने के लिए

विधि : .

– सबसे पहले बैंगन को बीच से लंबाई में दो भागों काट लें.

– अब इन्हें पतले-पतले चौकोर आकार में काट लें.

– दूसरी ओर एक कटोरी में बेसन, हरी मिर्च, नमक , लाल मिर्च पाउडर और कलौंजी डालकर मिक्स कर लें.

– अब धीरे-धीरे पानी डालते हुए इसका घोल तैयार करें. ध्यान रखें कि घोल न ज्यादा गाढ़ा हो और न ही ज्यादा पतला बने.

– मीडियम आंच में एक पैन में तेल गरम करने के लिए रखें.

– जब तेल गरम होने लगे तब घोल में सूजी डालकर मिक्स कर लें. सूजी मिलाने से पकौड़ों में करारापन आता है.

– तेल के गरम होते ही बैंगन को बेसन में डिप कर तेल में डालें.

– सुनहरा होने तक इसे दोनों साइड से अच्छे से तल लें.

– तैयार है बंगाली डिश बेगूनी.

स्किन पोर्स का ख्याल है जरूरी, अपनाएं ये 5 टिप्स

अगर त्‍वचा पर पोर्स न हों तो हमारी त्‍वचा सांस नहीं ले पाएगी. दरअसल हमारे चेहरे की त्‍वचा के रोम छिद्र ही बता सकते हैं कि हमारी त्‍वचा कितनी स्‍वस्‍थ्‍य है. इसके साथ ही बुढापे की निशानी भी हमारे स्किन पोर्स से ही पता चलती है. यह बताया जाता है कि अगर आपके चेहरे पर बड़े रोम छिद्र हैं तो आप बूढी होने लग गई हैं. इसलिए अगर आप को खिली और स्‍वस्‍थ्‍य त्‍वचा चाहिये तो अभी से ही उसका ख्‍याल रखना शुरु कर दें.

  1. ब्‍लैकहेड हटाना : गंदगी से चेहरे पर ब्‍लैकहेड हो जाता है, जो अगर न हटाया गया तो पूरे चेहरे पर धब्‍बा छोड़ जाता है. इसको हटाने के लिए चेहरे को स्‍टीम करना चाहिये और उंगलियों से उसे दबा कर निकालना चाहिये. इसके आलावा आप घरेलू नुस्‍खे जैसे, बेकिंग पाउडर या फ्रूट पील का प्रयोग कर सकती हैं.
  2. बंद पोर्स को खोलें : धूल और तेल एक साथ मिल कर आपकी स्‍किन में ब्‍लैकहेड जैसी समस्‍या पैदा करते हैं. इसलिए इस समस्‍या को दूर करने के लिए आपको हर दो घंटे में अपना चेहरा पानी से धोना चाहिये. इससे तेल और गंदगी साफ होगी और साथ में स्‍किन पोर्स भी खुलेंगे.
  3. स्‍क्रब करे : आपको हफ्ते में 2-3 बार अपने चेहरे को स्‍क्रब करना चाहिये. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की आपके चेहरे पर ब्‍लैकहेड हैं या नहीं. इस विधि को अपनी रूटीन में शामिल कर लें जिससे चेहरे पर गंदगी न जमे और ब्‍लैकहेड न बने.
  4. टोनर न भूलें : स्‍क्रबिंग के बाद चेहरे पर टोनर लगाना नहीं भूलना चाहिये क्‍योंकि स्‍क्रबिंग से स्‍किन के पोर्स खुल जाते हैं और बड़े हो जाते हैं. इसलिए इस खुले हुए पोर्स को छोटा करने के लिए टोनिंग करें.
  5. स्‍किन को सांस लेने दें :जब आप कंपैक्‍ट आदि से अपने बढ़े पोर्स को बंद करने के लिए इस सब कौस्‍मैटिक का प्रयोग करती हैं, तो एक बात आप भूल जाती हैं. आपकी स्‍किन अच्‍छे से सांस ले सके उसके लिए जरुरी है कि कम से कम मेकअप किया जाए. पाउडर लगाने से स्‍किन ब्‍लौक हो जाती है.

बढ़ाएं नाखूनों की खूबसूरती

साफ और चमकीले नाखून किसे अच्‍छे नहीं लगते. यह आपकी सुंदरता पर चारचांद लगाते हैं. ऐसा बहुत कम ही होता पाता है कि हम किसी पार्टी के लिए अपने नाखून पर रंग-बिरंगी नेल पालिश लगाकर जाएं. इसलिए जरुरी है कि आप अपने नाखूनों को ही इतना खूबसूरत बना लीजिये कि उन पर नेल पालिश लगाने की जरुरत ही न पड़े. जी हां, आपके नाखून भी खूबसूरत, मजबूत और चमकीले लग सकते हैं अगर आप इस दिए गये टिप्‍स को फौलो करें:

– नाखूनों को मजबूत बनाने के लिए उन पर नींबू के छिलके से मसाज करिये. नींबू को रोज रगड़ने से नाखूनों का पीलापन भी दूर हो जाता है.

– नींबू के रस में कुछ बूंदे औलिव औयल यानी की जैतून का तेल मिलाएं. इस तेल से अपने नाखून पर रोज रात में मालिश करें, आपके नाखून चमक उठेंगे.

– अगर मजबूत और चमकदार नाखून चाहिये तो उन पर फाइलिंग करना मत भूलिये. हमेशा एक सौफ्ट फाइलर ही खरीदें, यह आपके नाखूनों को किसी भी मन चाहा आकार में डिजाइन प्रदान करेगा और इसके इस्‍तमाल से नाखून रफ भी नहीं होंगे.

– रोज-रोज नेल पालिश लगाना बंद कर दीजिये. इससे नेल क्‍यूटिकल्‍स और कोशिकाएं सूख जाती हैं. इसके अलावा नेल पालिश के ब्रांड भी बदलना बंद कर दीजिये.

–  हफ्ते में तीन दिन अपने नाखूनों को गरम पानी में भिगोइये और फिर अच्‍छे क्‍यूटिक्‍ल रिमूवर से नाखून साफ करिये.

– हर दिन सोने से पहले अपने नाखूनों पर क्‍यूटिक्‍ल औयल लगाइये. यह एक असरदार ब्‍यूटी टिप है जिससे आप के नाखून चमक उठेंगे.

आम लोगों के लिए खतरा हैं ये

सिर्फ सांसदों और विधायकों के बेटों के पास बीएमडब्ल्यू जैसी महंगी गाडि़यां होना और चमचमाती लड़कियां साथ में होना यह साबित कर रहा है कि आज के चुने नेता अब राजाओं, जागीरदारों की तरह के हो गए हैं.

दिल्ली के हयात रिजैंसी होटल में हुए झगड़े में बहुजन समाज पार्टी के पूर्व सांसद राजेश पांडेय के बेटे आशीष पांडेय ने रिवाल्वर निकाल कर पूर्व एमएलए के बेटे गौरव सिन्हा को मारपीट

की धमकी दे डाली और उन दोनों के साथ आईं चमचमाती लड़कियों ने जो वीडियो सोशल मीडिया पर डाला इस से साफ है कि ये नेताओं के बेटे खुद को कानून मानते हैं.

हर जगह इस तरह के कांड होते रहते हैं, जहां चुने हुए नेताओं के बच्चे अपने पिता या मां के कमाए पैसों को उड़ाते नजर आते ही हैं, आम लोगों के लिए खतरा भी बन जाते हैं. देश की गरीब जनता इन लोगों को यह सोच कर चुनती है कि वे उन के हितों की लड़ाई लड़ेंगे और उन्हें परेशानियों से निकालेंगे पर सत्ता का नशा इन पर इस तरह चढ़ जाता है कि जहां होते हैं वहां दंगा करने लगते हैं.

नेताओं और उन के बेटों का हवाई अड्डों, रेस्तराओं, टोल टैक्स बूथों पर हंगामा अब अकसर देखने को मिलता है. वे अपनी धौंस जमाने से बाज नहीं आते जबकि कहने को सिर्फ जनप्रतिनिधि है, जनता के मालिक नहीं.

राजनीति में पुलिस का साथ मिलता है और जब थानेदार व पुलिसमैन एमएलए, एमपी को सलाम करने लगते हैं तो बच्चों के दिमाग आसमान पर चढ़ जाते हैं. चुने नेता को तो खैर ऊंचनीच का लिहाज होता है पर अकसर बच्चे इस शासन और सचाई को समझ नहीं पाते कि राजनीतिक सत्ता का इस्तेमाल कैसे करें.

हमारे देश की हालत यह है कि हम इस तरह के शक्ति पूजक बन गए हैं कि जिस के हाथ में जरा सी ताकत हो उसे भगवान मान लेते हैं और उसे ही पूजने लगते हैं. हर मंत्री, विधायक, सांसद के घर के आसपास बीसियों लोग मंडराते रहते हैं कि नेताजी से नजर मिल जाए और उन पर कृपा हो जाए.

एक पांच सितारा होटल में हंगामा खड़ा करने और खुलेआम रिवाल्वर निकाल कर दिखाने की हिम्मत करना आसान नहीं जबकि इलाका दूसरे राज्य का हो जहां की बागडोर किसी और पार्टी के हाथ में हो. लेकिन नशा इतना जोर से चढ़ता है कि आगापीछा सब भुला देता है और जैसे मनु शर्मा ने सिर्फ शराब न देने के कारण एक लड़की जेसिका लाल को भरे पब में सिर पर गोली मार दी थी वैसे कोई भी कांड कहीं भी हो सकता है.

गनीमत यही है कि पुलिस को छोड़ कर शासन के दूसरे रसूखदार ताकतवर ओहदेदारों के बच्चों में यह रोग अभी बुरी तरह नहीं फैला है. अभी यह केवल चुने नेताओं तक सीमित है पर यह महामारी की तरह कब और कहां फैल जाए कहा नहीं जा सकता.

प्रेमिका भाभी बनी तो : जब सोनी बन गई बबलू की भाभी

सियाराम के तीसरे नंबर के बेटे अनिल कुमार उर्फ बंटू की पत्नी सोनी उर्फ सुनीता ने शादी के डेढ़ साल बाद बेटे को जन्म दिया था. अनिल ने जब फोन कर के यह खुशखबरी गांव में रह रहे अपने पिता को दी तो पूरे परिवार में खुशी छा गई.

घर में जश्न मनाने की तैयारियां शुरू हो गईं. कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अनिल भी पत्नी सोनी और नवजात शिशु के साथ गांव आ गया. किसी ने सोचा भी नहीं था कि परिवार की खुशियों को अचानक ऐसा ग्रहण लगेगा कि 2-2 लाशें बिछ जाएंगी.

उत्तर प्रदेश के जिला फिरोजाबाद के थाना नगला खंगर क्षेत्र में एक गांव है गलपुरा. इस गांव में रहने वाले सियाराम के 5 बेटे हैं, इन में 3 बेटों राजेश, संजय व अनिल कुमार उर्फ बंटी की शादी हो चुकी थी, जबकि 19 साल का श्यामगोपाल उर्फ बबलू व सब से छोटा लवकुश अभी अविवाहित थे. बड़े बेटे राजेश की सीमा से, संजय की विनीता से और अनिल उर्फ बंटी की शादी सोनी से हुई थी.

22 साल की सोनी की शादी डेढ़ साल पहले ही अनिल के साथ हुई थी. संजय की पत्नी विनीता और अनिल की पत्नी सोनी सगी बहनें थीं. दोनों का मायका जिला इटावा के थाना जसवंतनगर क्षेत्र के गांव बनामई में था.

13 अगस्त, 2018 को सोमवार था. परिवार के लोग सुबह ही खेत पर धान की रोपाई करने चले गए थे. बहू विनीता कुछ देर पहले ही घर वालों के लिए खाना ले कर खेत पर गई थी. घर में केवल लवकुश और उस की भाभी सोनी ही थे.

अचानक घर के अंदर से गोली चलने की आवाज आई. कोई कुछ समझ पाता इस से पहले ही घर के अंदर से लवकुश का बड़ा भाई श्यामगोपाल उर्फ बबलू तेजी से बाहर निकला, उस के हाथ में तमंचा था. घर से 10-12 कदम की दूरी पर गली में पहुंचते ही उस ने अपने सिर में गोली मार ली. गोली लगते ही वह रास्ते में गिर गया. उस के सिर से खून बह रहा था.

गोलियां चलने की आवाज सुन कर गांव में सनसनी फैल गई. सियाराम के घर के बाहर गांव वालों की भीड़ लग गई. घर के अंदर बबलू की भाभी सोनी और घर के बाहर देवर बबलू की लहूलुहान लाशें पड़ी थीं.

बबलू की लाश के पास ही .315 बोर का तमंचा भी पड़ा था. बबलू ने अपनी भाभी सोनी को गोली मार कर हत्या करने के बाद खुद को गोली मार ली थी.

सियाराम के दूसरे नंबर के बेटे संजय की शादी विनीता के साथ हुई थी. शादी के समय संजय की साली सोनी और भाई बबलू जवानी की दहलीज पर कदम रख रहे थे. कभीकभी बबलू अपनी भाभी को विदा कराने उस के मायके बनामई जाता था. वहीं पर सोनी और बबलू की नजरें एकदूसरे से टकरा गईं. बबलू को सोनी अच्छी लगी. सुंदर, चंचल और अल्हड़ सोनी को भी गठे बदन का बबलू मन भा गया. कुछ ही मुलाकातों में दोनों एकदूसरे को दिल दे बैठे थे.

दोनों के बीच काफीकाफी देर तक प्यार भरी बातें होने लगीं. बातों के बीच चुहलबाजी भी खूब होती. दोनों ही एकदूसरे को पसंद करने लगे थे. एक दिन अकेले में मौका पा कर बबलू ने सोनी का हाथ अपने हाथों में ले कर कहा, ‘‘इस जन्म में ही नहीं, हम 7 जन्मों तक साथ रहेंगे.’’

दोनों ने एकदूसरे का साथ निभाने की कसमें खाईं. प्यार के इजहार के बाद दोनों भविष्य के इंद्रधनुषी सपने संजोने लगे. अब दोनों को केवल सही वक्त का इंतजार था.

सोनी और बबलू अपने प्यार की पीठ पर सवार हो कर भविष्य के सपने देख रहे थे. लेकिन इसी बीच सोनी की बड़ी बहन विनीता को अपने देवर और बहन के बीच पनपे प्रेम की खबर लग गई.

विनीता ने यह बात घरपरिवार के लोगों को बता दी. कच्ची उम्र के दोनों प्रेमी कोई ऐसा भी कदम उठा सकते थे, जिस से परिवार की बदनामी हो. इसलिए उन लोगों ने सोनी की शादी बबलू के बड़े भाई अनिल से तय कर दी. बबलू चाह कर भी इसलिए कुछ नहीं कर सका, क्योंकि शादी दोनों परिवारों की मरजी से तय हुई थी.

दरअसल सोनी के घर वालों को मालूम था कि बबलू सोनी से उम्र में छोटा तो है ही, गुस्सैल स्वभाव का भी है. वह शराब भी पीता था. जबकि अनिल की हेयर कटिंग की दुकान थी, जिस से वह ठीकठाक पैसा कमा लेता था.

दूसरी ओर सोनी और बबलू के दिलों में बराबर की आग लगी थी. बबलू इस इंतजार में था कि भाई अनिल की शादी हो जाने के बाद वह अपनी प्रेमिका सोनी से शादी करेगा. लेकिन अचानक ऐसी स्थिति बन जाएगी, इस बारे में उस ने सोचा तक नहीं था.

सोनी ने तो कल्पना भी नहीं की थी कि उसे अपने प्रेमी बबलू के घर उस के भाई की पत्नी बन कर जाना पड़ेगा. उस के दिल के अरमान आंसुओं में बह गए थे. मजबूरी में उस ने दिल पर पत्थर रख लिया. अंतत: अनिल और सोनी की शादी हो गई.

सोनी बबलू की भाभी बन कर उसी के घर में आ गई थी. प्रेमिका की शादी बड़े भाई से हो जाने की वजह से बबलू पूरी तरह टूट गया. वह चोरीछिपे सोनी से अपने प्यार का इजहार करता, लेकिन उस की ओर से अब कोई जवाब नहीं मिलता था.

घर में सोनी के जेठजेठानी, बहन, ससुर, सास जावित्री के अलावा छोटा देवर लवकुश भी था. एक तो संयुक्त परिवार, दूसरे बदनामी का डर, इसलिए सोनी ने शादी के बाद बबलू के प्यार को हवा नहीं दी. इस से बबलू परेशान रहने लगा. वह बिन पानी की मछली की तरह तड़प रहा था. गुस्सेबाज तो वह था ही, ऐसी स्थिति में उस का गुस्सा और भी बढ़ गया. घर हो या बाहर वह किसी से भी उलझ पड़ता था. अब गांव में बबलू का मन नहीं लगता था.

घर वालों के कहने पर बबलू गुड़गांव की एक कंपनी में काम करने चला गया. बबलू घर से दूर जरूर चला आया, लेकिन सोनी की यादों को दिल से दूर नहीं कर सका. उस के साथ बिताए पल उसे याद आते रहते थे. सोतेजागते उस की आंखों के सामने सोनी की तसवीर घूमती रहती थी. वह चाहता था कि सोनी को भूल जाए, लेकिन चाह कर भी वह उसे भुला नहीं पा रहा था.

इसी बीच अनिल अपनी पत्नी सोनी को ले कर सिरसागंज चला गया और वहां किराए का मकान ले कर रहने लगा. सिरसागंज में अनिल की हेयर कटिंग की दुकान भदान रेलवे फाटक के पास थी. सब कुछ ठीकठाक चल रहा था. शादी के डेढ़ साल बाद सोनी ने बेटे को जन्म दिया. इस की जानकारी उस ने गांव में रह रहे अपने परिवार को दी, तो सभी खुश हुए. उन्होंने जश्न मनाने की तैयारी शुरू कर दी.

घटना से 20 दिन पूर्व अनिल अपनी पत्नी व 25 दिन के बच्चे के साथ गांव आ गया. उधर घर में सोनी के आ जाने की जानकारी मिलने पर बबलू भी गुड़गांव से गांव आ गया. घर पहुंचते ही उस की नजर भाभी बनी सोनी से मिली तो दिल में समाई पुरानी यादें फिर से ताजा हो गईं.

बच्चे को गोद में ले कर उस ने खूब प्यार किया. एक दिन अकेले में मौका मिलने पर जब उस ने सोनी के सामने अपने प्यार का वास्ता दिया तो सोनी ने उस का कड़ा विरोध करते हुए पुरानी बातें भूल जाने को कहा. बबलू को सोनी से ऐसी उम्मीद नहीं थी. प्रेमिका रह चुकी सोनी की इस बेरुखी से बबलू अंदर तक टूट गया.

बबलू को गुड़गांव से आए अभी कुछ दिन ही हुए थे. 13 अगस्त की सुबह 7 बजे सोनी ने लंच बना कर अपने पति अनिल को दिया. लंच ले कर अनिल अपनी कटिंग की दुकान पर चला गया. परिवार के सदस्य खेत पर धान की रोपाई करने गए हुए थे. सियाराम की पत्नी जावित्री 8 दिन पहले अपनी बेटी की ससुराल गांव दौकेली चली गई थी.

जावित्री की बेटी गर्भवती थी, इस लिए उस ने मदद के लिए मां को अपने पास बुला लिया था. उस दिन बबलू सुबह ही घर से निकल कर गांव में घूमने चला गया था. सोनी और उस की बहन विनीता ने मिल कर खाना बनाया. विनीता सभी के लिए खाना ले कर खेतों पर चली गई. छोटा देवर लवकुश कमरे में बैठा खाना खा रहा था.

उस समय 10 बजे थे. सुनीता उर्फ सोनी हैंडपंप से पानी भर रही थी. वह एक बार पानी भर कर अंदर रख आई थी. दूसरी बार जब वह पानी लेने जा रही थी तभी बबलू घर आ गया. घर में आते ही उस ने आंगन में खड़ी सोनी के सामने गुस्से में बीती बातों को दोहराया. इस पर सोनी ने झुंझलाते हुए कहा कि तुम्हें घर और समाज में इज्जत से रहना है तो बीती बातों को भूलना होगा.

सोनी के इतना कहते ही बबलू ने अपनी कमर में खोंसा हुआ तमंचा निकाला और उस की कनपटी पर लगा कर गोली चला दी. गोली लगते ही सोनी कटे पेड़ की तरह आंगन में गिर पड़ी. बबलू ने जैसे ही दोबारा तमंचे में कारतूस डालने का प्रयास किया, कमरे में खाना खा रहा छोटा भाई लवकुश चीखता हुआ उस की तरफ दौड़ा और उसे रोकने की कोशिश की.

इस पर बबलू तमंचा लोड कर के घर के बाहर भागा और घर से 10-12 कदम चलते ही उस ने तमंचे से अपने सिर में गोली मार ली. गोली लगते ही वह गिर कर ढेर हो गया.

गांव वालों ने इस घटना की सूचना पुलिस और बबलू के घर वालों को दी. जब यह खबर खेत पर पहुंची, तब सभी लोग खाना खा रहे थे, घर पर खूनी खेल खेला जाएगा इस का उन्हें अंदाजा नहीं था. सभी खाना छोड़ कर घर की ओर दौड़े. उधर कुछ गांव वालों ने अनिल की दुकान पर जा कर उस की पत्नी की हत्या की जानकारी दी. अनिल दुकान बंद कर के आ गया.

सूचना मिलते ही नगला खंगर के थानाप्रभारी दीपक चंद्र दीक्षित, क्षेत्राधिकारी सिरसागंज अजय कुमार चौहान घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने इस वारदात की सूचना अपने उच्चाधिकारियों को भी दे दी. एसएसपी फिरोजाबाद सचिंद्र पटेल, एसपी (ग्रामीण) महेंद्र सिंह गांव गलपुरा पहुंच गए. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथसाथ गांव वालों व घर वालों से घटना की विस्तार से जानकारी ली.

पुलिस ने आंगन में पड़ी सोनी की लाश के पास से खाली कारतूस तथा बबलू की लाश के पास से तमंचा व उस में फंसा खोखा जब्त कर लिया. मृतका का पति अनिल जब गांव पहुंचा तो घर पर पुलिस व गांव वालों की भीड़ मौजूद थी. जावित्री को भी सूचना दे कर बुला लिया गया था.

जावित्री ने जैसे ही बहू सोनी की लाश देखी तो वह उस से लिपट कर रोने लगी. गांव वालों के अनुसार बबलू सोनी को गोली मारने के बाद उस की लाश पर ही खुद को गोली मारना चाहता था, लेकिन भाई लवकुश के शोर मचाने पर उस ने घर के बाहर जा कर आत्महत्या कर ली.

घटना के संबंध में अनिल ने अपने भाई बबलू के खिलाफ अपनी पत्नी सोनी की हत्या की रिपोर्ट भादंवि की धारा 302 के अंतर्गत थाना नगला खंगर में दर्ज कराई. पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया.

बबलू के सिर इश्क का जुनून इस कदर हावी था कि वह अपना पराया कुछ भी नहीं सोच पा रहा था. इसी के चलते उस ने यह घातक कदम उठाया. उस ने भाई की बसीबसाई गृहस्थी तो उजाड़ी ही, उस के दुधमुंहे बच्चे से उस की मां भी छीन ली.

सोनी को बेटा पैदा होने पर सियाराम के परिवार में खुशियां मनाई जानी थीं, लेकिन परिवार की खुशियों में 2-2 मौतों से ग्रहण लग गया.

— कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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