Download App

सनक का नतीजा : किरण ने कैसे लिया अपमान का बदला

शाम के करीब 6 बजे का वक्त था. मध्य प्रदेश के देवास जिला मुख्यालय में चामुंडा कांपलेक्स के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित गोल्डन कौफी हाउस में रोज की तरह काफी रौनक थी. उस समय उज्जैन की तरफ से एक कार और इंदौर की तरफ से एक और कार आ कर गोल्डन कौफी हाउस के सामने रुकी. एक कार से करीब 45 साल की एक निहायत ही खूबसूरत महिला उतरी. वहीं दूसरी कार से 25-26 साल के 2 युवक नीचे उतरे.

उन युवकों ने उस महिला का अभिवादन किया तो उस महिला ने दोनों के अभिवादन का सिर हिला कर जवाब दिया, उन्हें साथ ले कर वह उस कौफी हाउस में दाखिल हो गई. यह बात 20 फरवरी, 2018 की है. दोनों गाडि़यों के ड्राइवर कौफी हाउस के बाहर ही रहे. दोनों ही ड्राइवर तब तक आपस में बातचीत करने लगे.

करीब सवा घंटे बाद वह तीनों कौफी हाउस से बाहर आने के बाद अपनीअपनी कार में आ कर बैठ गए. वह महिला इंदौर की तरफ रवाना हो गई. इस के कुछ देर बाद दोनों युवकों ने अपने ड्राइवर को उस महिला की कार का पीछा करने को कह दिया.

देवास से इंदौर रोड पर लगभग 6 किलोमीटर आगे क्षिप्रा नदी का पुल है. यह पुल देवास और इंदौर जिले की सीमा बनाता है. चूंकि शाम के समय सड़क पर ट्रैफिक अधिक था इसलिए क्षिप्रा तक पहुंचने में दोनों गाडि़यों को 15 से 18 मिनट का समय लगा.

उन युवकों की कार महिला की कार से सुरक्षित दूरी बना कर पीछा कर रही थी, ताकि कार में बैठी महिला को उस की कार का पीछा किए जाने का शक न हो सके. क्षिप्रा निकलने के बाद उन युवकों ने अपने ड्राइवर से कहा कि वह ओवरटेक कर के उस महिला की कार के आगे गाड़ी लगा दे. इस के बाद उस ड्राइवर ने कार की गति तेज कर दी.

इसी बीच उस महिला ने अपनी कार एक शराब की दुकान के सामने रुकवा दी. वह महिला कार से उतर कर शराब की दुकान से ठंडी बियर लेने लगी. तब तक उन युवकों की कार भी वहां आ कर रुक गई. उन में से एक युवक हाथ में रिवौल्वर ले कर कार से उतर कर शराब की दुकान पर खड़ी उस महिला के पास पहुंचा.

महिला बियर पसंद करने में खोई हुई थी. इसलिए उस ने इस बात पर जरा भी ध्यान नहीं दिया कि कुछ देर पहले वह जिस युवक से कौफी हाउस में मिल कर आ रही है वह उस के पीछेपीछे यहां तक आ पहुंचा है.
दूसरी तरफ युवक ने उस के पास जा कर रिवौल्वर उस की गरदन पर रख कर ट्रिगर दबा दिया और तेजी से अपनी कार में बैठ गया. फिर वह दोनों युवक देवास की तरफ निकल गए.

भरे बाजार में महिला की हत्या होने के बाद बाजार में खलबली मच गई. सूचना मिलने पर थाना औद्योगिक क्षेत्र के थानाप्रभारी एस.पी.एस. राघव तत्काल एसआई श्रीराम वर्मा आदि के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. घायल अवस्था में पड़ी उस महिला को तुरंत पहले देवास के अपेक्स अस्पताल ले जाया गया. हालत गंभीर होने की वजह से उसे इंदौर के एम.वाई. अस्पताल भेज दिया गया. जहां इलाज के दौरान उस की मौत हो गई.

पुलिस ने मृत महिला के कार चालक से पूछताछ की तो पता चला कि मरने वाली औरत नहीं बल्कि किन्नर किरण थी. जिस की खूबसूरती के चर्चे इंदौर के अलावा दिल्ली और श्रीनगर में भी थे. कार चालक ने यह भी बताया कि किरण को गोली मारने वाला युवक लाल रंग की कार में बैठ कर देवास की तरफ भागा है.

इस पर थानाप्रभारी एस.पी.एस. राघव ने यह खबर बिना देर किए पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी. इस का नतीजा यह निकला कि कुछ ही देर के बाद उज्जैन तिराहे से गुजर रही लाल रंग की कार एमपी09बीसी 0821 को यातायात पुलिस के एसआई रमेश मालवीय एवं रूपेश पाठक ने रोक ली. उस समय उस गाड़ी में ड्राइवर के अलावा और कोई नहीं था. उस ड्राइवर का नाम मोहम्मद रईस था जो सारंगपुर का रहने वाला था. दोनों एसआई उसे थाने ले आए. पूछताछ करने पर मोहम्मद रईस ने बताया कि यह गाड़ी कनाड़ निवासी एक व्यापारी की है. वह तो गाड़ी का ड्राइवर है. इस गाड़ी को आज उज्जैन के बेगम बाग निवासी भूरा और ऐजाज खान किराए पर ले कर देवास आए थे.

उस ने यह भी बताया कि किन्नर की हत्या करने के बाद दोनों उस की गाड़ी में सवार हो कर कुछ दूर तक आए थे. बाद में पुलिस के डर से गाड़ी से उतर कर वे पैदल ही कहीं चले गए. यह जानकारी मिलने के बाद देवास के एसपी अंशुमान सिंह ने एएसपी अनिल पाटीदार के नेतृत्व में गठित थानाप्रभारी एस.पी.एस. राघव की टीम को फरार हो चुके दोनों आरोपियों को ढूंढने में लगा दिया. टीम पूरी मेहनत से आरोपियों को खोजने में जुट गई. जिस का नतीजा यह हुआ कि अगले ही दिन मुख्य आरोपी भूरा को पुलिस ने उज्जैन से गिरफ्तार कर लिया.

पूछताछ में हर अपराधी की तरह भूरा ने भी पहले तो किरण को जानने तक से इनकार कर दिया. लेकिन जब पुलिस ने उस से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की तो उस ने किन्नर किरण की हत्या का अपराध स्वीकार कर लिया. इस के बाद पुलिस ने भूरा की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त रिवौल्वर और उस के खून सने कपड़े भी बरामद कर लिए. जिस के बाद पूरी कहानी इस प्रकार सामने आई.

आज से कोई 45 साल पहले मध्य प्रदेश के शहर इंदौर में जन्मे चांद से खूबसूरत बच्चे का नाम रखा गया अनीस मोहम्मद अंसारी. लेकिल अंसारी परिवार की खुशियां उस समय मिट्टी में मिल गईं जब उस बच्चे के बड़ा होने पर यह बात सामने आई कि अनीस सामान्य लड़का नहीं बल्कि एक किन्नर है. 5-7 साल की उम्र से ही उस के चेहरेमोहरे में जनाना भाव आने लगे थे. जिस तरह की नजाकत उस में आने लगी थी, उस जैसी नजाकत और खूबसूरती कई लड़कियों में भी देखने को नहीं मिलती.

किशोरावस्था में पहुंच कर अनीस अपनी सच्चाई समझ चुका था. इसलिए 15-16 साल की उम्र में ही वह इंदौर से दिल्ली चला गया और वहां एक किन्नर जमात में शामिल हो गया. जहां उस का नाम रखा गया किरण. देखते ही देखते किरण दिल्ली की सब से खूबसूरत किन्नर बन गई.

जिस के चलते उस ने अपने गुरु के साथ रहते हुए करोड़ों की प्रौपर्टी भी जमा कर ली. इतना ही नहीं गुरु के बाद किरण को ही अपने गुरु की पदवी मिल गई. इस के बाद तो उस के इलाके के किन्नर जो भी कमाई कर के लाते, किरण के हाथ में रख देते थे, जिस से उसे और ज्यादा कमाई होने लगी. किरण की खूबसूरती लगातार बढ़ती जा रही थी. रंगरूप और शारीरिक बनावट से हर कोई उसे औरत समझने का धोखा खा जाता था. इसलिए दिल्ली में तो उस के दीवाने थे ही, दिल्ली के बाहर भी उस के चाहने वालों की संख्या बढ़ गई. परिवार के इंदौर में रहने के कारण उस का इंदौर में भी आनाजाना लगा रहता था, सो इंदौर में भी उस के दीवानों की संख्या कम नहीं थी. किरण की जिंदगी में महत्त्वपूर्ण बदलाव कुछ साल पहले उस समय आया जब वह श्रीनगर, कश्मीर घूमने गई.

इस दौरान वह डल झील में चलने वाले सब से महंगे बोट हाउस में ठहरी. शिकारा का मालिक जहांगीर उस की खूबसूरती पर मर मिटा था. सो उस ने किरण की खूब मेहमाननवाजी की थी. जहांगीर के कई शिकारा डल झील में चला करते थे, जिस के चलते श्रीनगर में उस की खासी संपत्ति थी. अपितु जहांगीर उम्र में किरण से छोटा था, लेकिन किरण का जादू उस के ऊपर कुछ यूं चला कि वह उस के सामने अपने प्यार का इजहार करने से खुद को रोक नहीं सका.

किरण जानती थी कि जहांगीर उसे औरत समझने की गलती कर यह बात कह रहा है. ऐसे में किरण को पीछे हट जाना था, लेकिन प्यार की तलाश हर किसी को होती है. इसलिए किरण ने उस का प्यार स्वीकार ही नहीं किया बल्कि उस से शादी कर ली.

ऐसे में किरण के किन्नर होने की सच्चाई जहांगीर के सामने खुलनी तय थी. सुहागरात के मौके पर इस सच को वह स्वीकार नहीं कर सका. इस का नतीजा यह निकला कि जहांगीर ने किरण को जल्द ही छोड़ दिया. यह बात किरण को बहुत बुरी लगी. वह अपनी खूबसूरती की ऐसी बेइज्जती सहन नहीं कर पाई. लिहाजा उस ने जहांगीर को खत्म करने का फैसला कर लिया.

घटना से 2 महीने पहले एक शादी समारोह में किरण और भूरा की उज्जैन में पहली मुलाकात हुई थी. इस मुलाकात में भूरा यह जान गया था कि किरण एक किन्नर है, इस के बावजूद भी वह उस की खूबसूरती पर मर मिटा था.

किरण को भी एक मोहरे की तलाश थी. जिस से वह जहांगीर की हत्या करा सके. उसे इस बात की भी जानकारी थी कि नाबालिग उम्र में भूरा हत्या के एक आरोप में जेल जा चुका था. इसलिए मौका देख कर उस ने भी भूरा को निराश नहीं किया.

किरण ने जब देखा कि भूरा पूरी तरह से उस के कब्जे में आ चुका है तो एक दिन उस ने भूरा से जहांगीर की हत्या करने को कहा. इस के लिए उस ने भूरा को 25 लाख रुपए का लालच देने के साथ ढाई लाख रुपए एडवांस में भी दे दिए. भूरा, किरण का दीवाना हो चुका था, सो उस ने जहांगीर की हत्या करने की बात स्वीकार तो कर ली लेकिन कुछ दिनों बाद उसे लगने लगा कि कश्मीर में जा कर वहां के किसी आदमी की हत्या कर के भाग कर वापस आना आसान काम नहीं है. लिहाजा वह काम करने में आनाकानी करने लगा.

इस पर किरण ने खुद भूरा को धमकी दे डाली. किरण ने उस से कहा कि अगर जहांगीर को मरवाने में 25 लाख खर्च कर सकती है तो तुम जैसों के लिए तो कोई 25 हजार ले कर ही निपटा देगा. यह धमकी दे कर उस ने भूरा पर जहांगीर की हत्या करने के लिए दबाव बनाया.

भूरा जानता था कि किरण के पास पैसों की कमी नहीं है, वह पैसों के बल पर उस की हत्या भी करा देगी. इसलिए उस ने अपने दोस्त ऐजाज के साथ मिल कर किरण की हत्या करने की योजना बना डाली.
जिस के बाद उस ने 20 फरवरी, 2018 को किरण को देवास बुला कर जहांगीर की फोटो दिखाने को कहा. उस ने किरण से कहा था कि वह जहांगीर का काम करने श्रीनगर जा रहा है. इसलिए पहचान के लिए जहांगीर की फोटो की जरूरत पड़ेगी.

किरण ने जहांगीर का फोटो देने के लिए भूरा को देवास बुलाया था. यहां चामुंडा कांपलेक्स स्थित कौफी हाउस में भूरा और किरण की मुलाकात हुई. वहीं पर उस ने भूरा को जहांगीर का फोटो दे दिया था. फोटो देने के बाद लौटते समय वह ठंडी बियर लेने के लिए शराब की दुकान पर रुकी तभी भूरा ने उस की हत्या कर दी.

ड्राइवर मोहम्मद रईस और भूरा से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उस के दोस्त ऐजाज खान को भी गिरफ्तार कर लिया. फिर तीनों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. कथा लिखे जाने तक तीनों आरोपियों की जमानत नहीं हो सकी थी.

आधुनिक सोच का कांटा : सोनी को धोना पड़ा अपनी जान से हाथ

उत्तर प्रदेश के जिला वाराणसी का एक गांव है बर्थरा कलां. 11 मार्च, 2018 को इसी गांव के प्रधान सत्येंद्र विक्रम सिंह अपनी मोटर साइकिल से शहर जा रहे थे. वह अभी गांव के बाहर पुलिया के पास पहुंचे ही थे कि उन की निगाह पुलिया के पास पानी पर चली गई, जिस में एक लाश तैर रही थी.

उन्होंने मोटरसाइकिल वहीं रोक दी और लाश को देखने लगे. लाश किसी महिला की लग रही थी. चूंकि वह गांव के प्रधान थे, इसलिए उन्होंने उसी समय यह सूचना थाना चौबेपुर के थानाप्रभारी ओमनारायण सिंह को दे दी.

सूचना मिलते ही थानाप्रभारी अपनी टीम के साथ गांव बर्थरा कलां की पुलिया के पास पहुंच गए. तब तक वहां पर काफी लोग जमा हो गए थे. ग्राम प्रधान सत्येंद्र विक्रम सिंह वहीं पर मौजूद थे. ग्राम प्रधान से बातचीत करने के बाद थानाप्रभारी ने पानी पर तैर रही लाश बाहर निकलवाई. मृतका सलवारसूट पहने थी. वहां मौजूद कोई भी व्यक्ति मृत युवती की लाश को नहीं पहचान सका. ओमनारायण सिंह ने काररवाई कर के लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी.

इस के बाद थानाप्रभारी ने ग्राम प्रधान की सूचना पर अज्ञात लोगों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया. मामला जटिल दिख रहा था क्योंकि अभी तक लाश की शिनाख्त तक नहीं हुई थी. मामले को उलझा देख एसएसपी आर.के. भारद्वाज ने एसपी (ग्रामीण) अमित कुमार के निर्देशन व सीओ (पिंडरा) के नेतृत्व में एक टीम गठित की.

पुलिस टीम मामले की जांच में लग गई. अखबार में एक अज्ञात युवती की लाश मिलने की खबर छपने के बाद थाना चोलापुर के गांव भोपापुर का रहने वाला राजेंद्र कुमार थाना चौबेपुर पहुंचा. उस ने थानाप्रभारी से कहा कि अखबार में लाश का जो फोटो छपा है वह कुछ जानापहचाना सा लग रहा है.

थानाप्रभारी राजेंद्र कुमार को मोर्चरी ले गए. मोर्चरी में रखी युवती की लाश देखते ही वह उस ने बताया कि यह लाश उस की साली सोनी है, जो भंदाहा गांव की रहने वाली है. उस के पिता का नाम दीनानाथ है.

युवती की शिनाख्त हो जाने के बाद उस की लाश का पोस्टमार्टम हुआ. पोस्टमार्टम में सोनी के शरीर पर चोट के कई निशान पाए गए. इस के अलावा रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उस की मौत पानी में डूबने की वजह से हुई थी. मृतका की शिनाख्त हो जाने पर पुलिस की सिरदर्दी काफी हद तक कम हो गई थी.

साथ ही इस केस के खुलासे के लिए आगे बढ़ने का रास्ता भी दिखने लगा था, सो पुलिस टीम ने अपना जाल बिछाने के साथ मुखबिरों को भी लगा दिया. पुलिस को उन से पता चला कि सोनी के पिता और दोनों चाचा घर से फरार हैं.

पुलिस को शक हुआ कि सोनी की हत्या के बाद से उस के घर वाले आखिर क्यों फरार हैं? लिहाजा पुलिस उन्हें खोजने में जुट गई. इसी बीच थानाप्रभारी को उन के एक खास मुखबिर ने 23 अप्रैल, 2018 को सूचना दी कि सोनी की हत्या के लिए जिस क्वालिस गाड़ी का उपयोग किया गया था, उस का ड्राइवर मनोज कुमार पास के ही मुनारी पैट्रोल पंप पर मौजूद है.

थानाप्रभारी के लिए यह सूचना काफी अहम थी सो वह बिना समय गंवाए टीम के साथ मुखबिर द्वारा बताए गए पैट्रोल पंप पर पहुंच गए. मनोज वहीं मौजूद था. उसे हिरासत में ले कर पुलिस थाने लौट आई.

मनोज वाराणसी के ही थाना चोलापुर के गांव भवानीवारी का रहने वाला था. उस से सख्ती से पूछताछ की गई तो वह उन के पैरों पर गिर कर गिड़गिड़ाने लगा, ‘‘साहब, मुझे मत मारिए, मैं सब कुछ सचसच बता रहा हूं. इस में मेरी कोई गलती नहीं है और न ही मैं कुछ जानता था. उन लोगों ने मुझे धोखे में रख कर मेरी गाड़ी ली थी.’’

उस ने बता दिया कि सोनी की हत्या उस के घर वालों ने ही की है. यह जानकारी मिलते ही पुलिस टीम सोनी के घर पहुंची. लेकिन वहां केवल महिलाएं ही मिलीं, सो पुलिस टीम लौट आई. थानाप्रभारी ने अपने खास मुखबिरों को गांव में लगा दिया था.

दूसरे ही दिन पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना पर सोनी के पिता दीनानाथ, चाचा कन्हैया व रोशन को मुनारी के पास से तब गिरफ्तार कर लिया, जब ये लोग कहीं भागने की फिराक में थे. उन लोगों को थाने ला कर सख्ती से पूछताछ की गई तो तीनों ने सोनी की हत्या के पीछे की जो कहानी बताई, वह न केवल हैरान कर देने वाली थी बल्कि एक बेटी की आधुनिक सोच को कुचलने वाली भी थी.

वाराणसी जनपद के थाना चौबेपुर के अंतर्गत आने वाला एक गांव है भंदाहा, यहीं पर दीनानाथ अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी और 3 बेटियों के अलावा एक बेटा था. उस ने बड़ी बेटी का विवाह वाराणसी के एक गांव में कर दिया था, जो अपने घरपरिवार वाली थी.

दीनानाथ को शेष 2 बेटियों मोनी और सोनी के विवाह की चिंता भी सताने लगी थी. दोनों बहनों की उम्र में हालांकि डेढ़दो साल का फासला था लेकिन देखने से दोनों ही हमउम्र दिखाई देती थीं.

सोनी आधुनिक खयालों की थी. वह मोनी के साथ इस तरह बात करती थी जैसे वह उस की छोटी बहन न हो कर सहेली हो. उस की बेबाक बातों और आधुनिक सोच का असर मोनी पर भी पड़ रहा था. दीनानाथ पुराने खयालों का था, इसलिए वह सोनी को व्यवहार बदलने के लिए समझाता रहता था.

जमाने को देखते हुए वह यह भी चाहता था कि दोनों के लिए लड़के मिल जाएं तो वह दोनों की शादी एक साथ कर के चिंता से मुक्त हो जाए.

दोनों के एक ही साथ हाथ पीले करने की गरज से दीनानाथ ने नातेरिश्तेदारों से चर्चा चलाई तो एक रिश्ता पसंद आ गया. इस रिश्ते के लिए उस ने हामी भर दी और मौका देख लड़के को भी देख आया था. लड़के वाले घटना से एक दिन पूर्व 10 मार्च को दीनानाथ के घर मोनी को देखने के लिए लड़के वाले आ रहे थे.

दीनानाथ ने मेहमानों की खातिरदारी के सारे इंतजाम कर लिए थे. उस ने मुंहफट सोनी को भी समझा दिया था कि वह मेहमानों के सामने कोई ऐसीवैसी बात न कहे जो उन्हें बुरी लगे.

सोनी जिंदगी को अपने ढंग से जीना चाहती थी, इसलिए उस की इच्छा थी कि वह और उस की बहन मोनी अपनी पसंद के लड़के से शादी करें. यह बात सोनी ने अपने घर वालों को बता भी दी थी. दीनानाथ को चिंता थी कि कहीं सोनी की आधुनिक सोच मोनी की शादी में रोड़ा न बन जाए.

उस दिन जब लड़के वाले आए भी लेकिन सोनी की किसी बात से नाराज हो कर चले गए. दीनानाथ को लगा कि सोनी की वजह से लड़के वालोंने मोनी से शादी के लिए इनकार कर दिया.

इस से उस के परिवार के लोग काफी नाराज हो गए थे. उन्होंने सोनी को जम कर खरीखोटी सुनाते हुए उसे खूब मारापीटा. इसी दरम्यान दीनानाथ ने आक्रोश में आ कर घर के एक कोने में पड़े डंडे से सोनी के सिर पर तेज प्रहार किया.

डंडा लगते ही सोनी निढाल हो कर जमीन पर गिर गई. उस ने सोचा कि यह मर गई है. तब दीनानाथ ने पास में ही खड़े अपने भाइयों कन्हैया और रेशम से आंखों ही आंखों में कुछ इशारा किया. इस के बाद वे उसे एक आटो में कहीं ले गए और थोड़ी देर बाद घर लौट आए.

फिर शाम के समय दीनानाथ मनोज कुमार वर्मा के पास पहुंचा और उस से झूठ कहा कि उस की बेटी बीमार है, उसे इलाज के लिए ले जाना है. यह कह कर उस ने उस की क्वालिस कार संख्या यूपी32 एएक्स5555 किराए पर ले ली. उसे एक हजार रुपए तेल भरवाने के लिए भी दे दिए.

गाड़ी आने पर दीनानाथ और उस के भाइयों ने मिल कर सोनी को उस में डाल दिया और उसे ले कर गांव से बाहर निकल आए. रास्ते में दीनानाथ ने बर्थरा कलां नाले की पुलिया के पास पहुंच कर आसपास नजरें दौड़ा कर देखा और सुनसान जगह देख कर टौयलेट का बहाना कर के मनोज से कार रुकवा दी. फिर सभी नीचे उतर गए.

दीनानाथ और उस के भाइयों को नीचे उतरा देख मनोज भी गाड़ी से उतर कर कुछ दूरी पर पेशाब करने के लिए चला गया. उस के गाड़ी से दूर जाते ही दीनानाथ और उस के भाइयों ने मौका देख सोनी को गाड़ी से निकाल कर पुलिया के पानी में फेंक दिया. सोनी मरी नहीं थी बल्कि बेहोश थी, जिस से बचाव के लिए न तो वह चीख सकी और न ही हाथपैर चला सकी, जिस से पानी में डूब कर उस की मौत हो गई.

इन लोगों द्वारा सोनी को पानी में फेंकने से तेज छपाक की आवाज आई तो मनोज का ध्यान उधर गया. उसे लगा कि या तो नाले के पानी में कोई कूदा है या कोई वजनी सामान फेंका गया है. अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए उस ने जब दीनानाथ से सवाल किया, तो उस के भाइयों ने मनोज को जान से मारने की धमकी देते हुए उसे चुप रहने की चेतावनी दी.

इस तरह डराधमका कर उन्होंने उस का मुंह बंद कर दिया. उन्होंने उसे चेताया कि अगर यह राज खुला तो अंजाम बुरा होगा. डर के मारे उस ने चुप्पी साध ली.

सोनी की हत्या के बाद परिजन दोपहर से ही भूमिका बनाने में जुट गए थे. उन्होंने गांव में यह प्रचारित कर दिया था कि सोनी ने कोई जहरीला पदार्थ खा लिया है. इस के लिए उसे पहले आटो से अस्पताल ले जाने का नाटक किया गया. वह अस्पताल जाने के बजाए आटो से कुछ दूर घूमटहल कर घर लौट आए थे.

सोनी उस समय भी बेहोश थी लेकिन लोगों को उन्होंने यह बताया कि वह मर गई है. चूंकि सोनी अविवाहित थी इसलिए उस के शव को नदी में प्रवाहित करना था, इसलिए घर वाले शाम ढलने के बाद सोनी को क्वालिस कार से ले कर निकले और नाले में फेंक आए. उन्होंने गांव वालों से कह दिया कि बेटी की लाश नदी में प्रवाहित कर आए. लेकिन तीसरे दिन अखबार में फोटो छपी तो गांव वाले भी दंग रह गए पर दीनानाथ और उस के भाइयों की दबंगई के कारण कोई मुंह खोलने को तैयार नहीं था.

मजे की बात यह है कि सोनी के बहनोई राजेंद्र ने चौबेपुर थाने आ कर उस के शव की शिनाख्त कर दी थी, लेकिन घर वालों ने थाने में न तो सूचना देने या रिपोर्ट दर्ज कराने की जहमत उठाई थी और न ही उस के शव की शिनाख्त करने की कोशिश की थी, जिस से मामला पूरी तरह से संदिग्ध हो गया था और घर वाले पुलिस की निगाहों में आ गए थे.

घटना का खुलासा हो जाने के बाद पुलिस ने मनोज कुमार, दीनानाथ और उस के दोनों भाइयों को हिरासत में ले कर क्वालिस कार को भी बरामद कर लिया. इस के बाद चारों अभियुक्तों मनोज, कन्हैया, रोशन और दीनानाथ को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. कहानी लिखे जाने तक किसी की भी जमानत नहीं हो पाई थी.

ना करें सार्वजनिक शौचालयों का प्रयोग, हो सकती हैं ये बीमारियां

देश की ज्यादातर आबादी आज भी खुले में शौच करती है. जहां भी सार्वजनिक शौचालय मौजूद भी हैं उनकी हालत भी खराब है. इन शौचालयों में शौचालय सीट गंदगी से भरी हुई होती हैं और फ्लश में पानी नहीं आता. पर सवाल ये है कि क्‍या सार्वजनिक शौचालय प्रयोग करने के लिये ठीक होते हैं? तो जवाब है नहीं, सार्वजनिक शौचालय प्रयोग करने के लिए बिल्‍कुल भी अच्‍छे नहीं होते, क्‍योंकि ये पूरी तरह से संक्रमण से भरे हुए होते हैं. इनका प्रयोग करने से आपको तमाम तरह की जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं. जरूरी है कि सार्वजनिक शौचालयों के प्रयोग के बाद आप अपने हाथ अच्छे से धो लें. इस खबर में हम आपको बताएंगे कि सार्वजनिक शौचालयों का प्रयोग करने से आपको कौन सी बीमारियां हो सकती हैं.

  • सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (एसटीडी)

सार्वजनिक शौचालयों के इस्तेमाल से कई यौन बीनारियों के होने का खतरा होता है. गंदे शौचालय को यदि कोई एस टी डी का रोगी प्रयोग कर ले तो यह रोग फैलने के चांस बढ जाते हैं. यदि आपको इस रोग से बचना है तो शौचालय प्रयोग करने के बाद अपने हाथों को धोना बिल्‍कुल ना भूलें. इसके अलावा शौचालय की चीजों को केवल शौचालय पेपर से ही छूएं.

  • डायरिया

सार्वजनिक शौचालय में पाए जाने वाले बैक्‍टीरिया की वजह से पेट में दर्द और खूनी डायरिया हो सकता है.

  •  संक्रमण

यदि पबलिक शौचालय को कोई संक्रमित व्‍यक्‍ति प्रयोग करे, तो आंत का संक्रमण होने की संभावना हो सकती है. असके अलावा इसके प्रयोग से आपको गले और त्‍वचा का संक्रमण भी लग सकता है.

  • यूटीआई

गंदे शौचालय को प्रयोग करने से मूत्र संक्रमण बड़ी तेजी से फैलता है. ये समस्या महिलाओं में ज्‍यादा पाई जाती है. इस लिए शौचालय की सीट पर बैठने से पहले एक बार फ्लश जरुर चलाएं.

देर रात जागते हैं तो कम खाएं

अगर आपको रात में देरी से सोने की आदत है तो ये खबर आपके लिए जरूरी है. अक्सर लोग रात में देरी से सोते हैं और इस दौरान वो काफी कुछ खाते हैं. एक नए शोध में ये बात सामने आई है कि रात के समय ज्यादा खाने से आपकी एकाग्रता और सर्तकता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

पेंसेलवेलिया विश्वविसाद्यालय के एक लेखक डेविड डिंगेज के अनुसार, रात में ज्यादा देर तक जागने वाले लोग लगभग 500 कैलोरी की खपत करते हैं. इस शोध में ये बात भी सामने आई कि देर रात जगने के बावजूद से खाने से बचने वाले लोग कई समस्याओं से दूर रह सकते हैं, जिसमें तनाव प्रमुख है.

इस शोध को 44 लोगों पर किया गया. इनकी एज ग्रुप 21 से 50 साल रखा गया था. इस दौरान उन्हें तीन रातों में केवल चार घंटे ही सोने दिया गया. चौथी रात को 20 प्रतिभागियों को खाना और पानी देना जारी रखा गया जबकि बाकी लोगों को रात 10 बजे के बाद केवल पानी पीने की अनुमति दी गई. साथ ही इन सभी सुबह चार बजे सोने की अनुमति दी गई.

शोध के अनुसार देर रात उपवास रखने वाले प्रतिभागी ज्यादा स्वस्थ्य और तरोताजा नजर आए. वहीं, देर रात खाते रहने वाले सुस्त रहे और उनकी एकाग्रता पर भी नाकारात्मक असर पड़ा.

तो सभी लोगों के लिए ये बेहद जरूरी हो जाता है कि रात में जागते वक्त वो खाए नहीं. ऐसा करने से उनकी सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

नाखून चबाने की है बीमारी तो हो जाइए सावधान, ये है खतरा

अक्सर लोगों में नाखून चबाने की आदत होती है. ज्यादातर समय वो ऐसा करते दिख जाते हैं. पर क्या आपने कभी सोचा है कि इस गंदी आदत से उनकी हत पर क्या नुकसान पहुंचता है? ये गंदी आदत कैसे उनके लिए खतरनाक हो सकती है. डाक्टरों और जानकारों के अनुसार नाखून चबाने से व्यक्ति को तरह तरह की समस्याएं हो सकती हैं. इस खबर में हम आपको यही बताने वाले हैं कि नाखून चबाने की आदत आपके लिए कैसे खतरनाक हो सकती है.

खराब होते हैं नाखून

उंगली के नीचे की एक परत होती है जिसे हम मैट्रिक्स कहते हैं. हमेशा नाखून चबाने से ये परत पूरी तरह से बर्बाद हो जाती है. आगे चलकर इनसे इनग्रोन नेल्स जैसी समस्याएं हो जाती है.

health impact of nails biting

खराब हो सकती हैं उंगलियां

हमेशा नाखून चबाने से आपकी उंगलियां खराब हो सकती हैं. आपके मुंह से निकलने वाले लार में मौजूद रसायन आपकी उमगलियों को काफी नुकसान पहुंचाते हैं. इससे आपकी उंगली की त्वचा में खुरचन के निशान आते हैं और ये देखने में काफी घिनौनी होती हैं.

हो सकता है जिन्जवाइटिस

नाखून काटने की वजह से दांतों की जड़ों में मौजूद सौकेट्स खराब हो जाते हैं, जिस वजह से आपके दांत टेढ़े हो जाते हैं. अमेरिका में हुए एक अध्ययनके अनुसार बार बार नाखून काटने की आदत की वजह से आपको जिन्जवाइटिस (gingivitis) जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

health impact of nails biting

फैलता है इंफेक्शन

नाखून चबाने वक्त नाखून में मौजूद बैक्टीरिया आपके मुंह में चली जाती हैं. इससे आपके पेट में इंफेक्शन फैलने का खतरा होता है. इससे पैरोनशिया नामक इन्फेक्शन हो जाता है जिसमें सूजन, दर्द, रेडनेस और पस से भरे हुई गांठे पड़ जाती हैं.

क्या आप भी अंडों के छिलकों को बेकार समझती हैं?

अंडा इस्तेमाल करने के बाद इसके छिल्के को बेकार समझकर आप फेंक देती हैं. लेकिन क्या आपको पता हैं? अंडा का छिलका आपके लिए बहुत उपयोगी है. आइए बताते हैं अंडा का छिलका का प्रयोग आप कैसे कर सकती हैं.

अंडों के छिलकों को कैल्शियम के लिए भी इस्तेमाल में लाया जाता है, जी हां, अंडों के छिलकों को गर्म पानी से धोकर धूप में सूखने के लिए आप छोड़ दें, फिर इनका पाउडर बनाएं और किसी ऐसे डब्बे में रखें जिसमें हवा न जा सके. इसके बाद आप कैल्शियम पाउडर के तौर पर इस्तेमाल कर सकती हैं.

कई लोग छिपकलियों को भगाने के लिए अंडे के  छिलकों का प्रयोग करते हैं. अंडों के छिलके से आप घोंघे जैसे कीड़े को भी भगा सकती हैं. अपने घर और गार्डन में छिल्कों रखेंगे तो इस तरह के कीड़े दूर ही रहेंगे.

बिल्लियां आपके यहां आकर अगर गंदगी करती हैं, और आप उन्हें घर से दूर रखना चाहते हैं, तो इसके लिए अंडे के छिलके आपकी मदद करेंगे. जहां बिल्लियां आती हैं वहां कुछ अंडे के  छिलके तोड़कर डाल दें. इसका असर आपको जल्दी ही दिखेगा. अंडे के  छिलके के पाउडर को अगर अंडे में मिलाकर चेहरे पर लगाएंगे तो आपका चेहरा तरो-ताजा रहेगा. यह त्वचा में रूखेपन को भी तेजी से कम करता है.अगर किसी की त्वचा में जलन या खुजली है उसके लिए भी अंडे का  छिलके इस्तेमाल किया जाता है.

कपड़ों की चमक बरकरार रखने के लिए आप अंडे के छिलकों का प्रयोग कर सकती हैं. छोटी बाल्टी में दो चम्मच अंडों के छिल्कों का पाउडर डालकर रातभर के लिए रख दें, और फिर अगले दिन धोएंगे तो आपके कपड़े चमक जाएंगे.

सब्जियों और फलों के आसपास अक्सर कीड़े आ जाते हैं. आप अंडे के  छिलकों को तोड़कर सब्जियों के आसपास रख देंगे तो कीड़े फलों और सब्जियों से दूर ही रहेंगे.मोमबत्ती के तौर पर आप अंडे के  छिलके का प्रयोग कर सकती हैं. इसके लिए आपको अंडे को ऊपर की तरफ से तोड़ना होगा. तोड़ने के बाद उसमें मोम भर दें और एक बाती लगाएं. इस तरह घर पर आपकी मोमबत्ती तैयार हो जाएगी.

फ्रिज में कभी न रखें खाने की ये सामग्री

आपके खाने की कुछ ऐसी चीजें हैं, जो आप भूलकर भी इन्हें फ्रिज में न रखें. इससे आपका नुकसान हो सकता है. तो चलिए बताते हैं, आपको फ्रीज में क्या नहीं रखना चाहिए.

  • आलू को फ्रिज में न रखें. इससे स्टार्च शुगर में बदलने लगता है. आलू के स्वाद पर भी असर पड़ता है.
  • संतरा, नींबू, मौसमी जैसे फल भी फ्रिज में नहीं रखने चाहिए. अगर आप इसे फ्रिज में रखते हैं तो इसके छिलके काले पड़ जाते हैं और इसका रस सूखने लगता है.
  • बिना कटा हुआ तरबूज और खरबूज फ्रिज में नहीं रखना चाहिए. इसमें काफी मात्रा में एंटीऔक्सीडेंट होता है जो फ्रिज में रखने से खराब होने लगता है.
  • कौफी को फ्रिज में नहीं रखना चाहिए. फ्रिज में रखने से ये उसमें रखी दूसरी चीजों का महक सोख लेती है और जल्दी खराब हो जाती है.
  • अचार में विनेगर होता है, इसको फ्रिज में रखने से ये अपने साथ- साथ दूसरी चीजों को भी खराब कर देता है.
  • शहद को कभी फ्रिज में नहीं रखना चाहिए. शहद तो पहले से ही प्रिजर्व रहता है. इसे आप सामान्य तौर पर  जार में बंद करके रख देंगे तो वो भी वो सालो-साल चलेगा. फ्रिज में रखने से वो क्रिस्टल बन जाता है और उसे जार से निकालना मुश्किल हो जाता है.
  • कुछ तेल जैसे नारियल और औलिव औयल को फ्रिज में नहीं रखना चाहिए. फ्रिज में रखने पर वो गाढ़ा हो जाता है और फ्रिज में से निकालने पर सामान्य तापमान पर आने के लिए इसे काफी समय लगता है.
  • केले को फ्रिज में रखने से ये काला पड़ने लगता है. इससे ईथाइलीन नाम की गैस निकलती है जिससे ये अपने आसपास रखे फलों को भी खराब कर देता है.
  • टमाटर फ्रिज में रखने से ये जल्दी गल जाता है और इसका टेस्ट खराब होने लगता है.
  • प्याज को भी फ्रिज में नहीं रखना चाहिए क्योंकि फ्रिज की नमी के कारण ये गल कर खराब होने लगता है.
  • लहसुन को फ्रिज में रखने से ये जल्दी अंकुरित होने लगता है और ढीला पड़कर खराब हो जाता है.

डबल इनकम, नो सैक्स

पति पत्नी का रिश्ता हर रिश्ते से खास होता है. वैसे तो हर रिश्ते में संवेदनाएं, इच्छाएं और अपेक्षाएं निहित हैं, पर इस रिश्ते का खास पहलू है सैक्स. इस के बिना यह रिश्ता दरकने लगता है. लेकिन आज के प्रतिस्पर्धा के युग में आगे बढ़ने की चाहत में युवा दंपतियों को अपने अंतरंग संबंधों की सुध नहीं रहती है. इसीलिए तो पहले ‘डबल इनकम नो किड्स’ का चलन शुरू हुआ और अब ‘डबल इनकम नो सैक्स’ का ट्रैंड बढ़ता जा रहा है. मल्टीनैशनल कंपनी में कार्यरत शैलेश और शुचि सुबह 8 बजे घर से औफिस निकल जाते हैं, पर घर वापसी का समय तय नहीं है. घर लौटने में रात के 9 भी बज जाते हैं. शुचि कहती है कि काम के कारण इतना थक जाते हैं कि जब आपस में बातचीत करने का भी मन नहीं करता तो सैक्स करना तो दूर की बात है. विवाह को 2 वर्ष हो गए हैं. पहला काम तो अपनी जौब को सुरक्षित रखना है और इस के लिए अच्छा आउटपुट देना जरूरी है वरना पता नहीं कब नौकरी से निकाल दिया जाए. इसलिए हमेशा वर्कस्ट्रैस बना रहता है.

इसी तरह मेघा की बात करें तो उस के विवाह को मात्र 1 साल हुआ है. वह एक फाइनैंस कंपनी में काम करती है और पति एक अन्य प्राइवेट कंपनी में. मेघा का औफिस घर से दूर है. वहां पहुंचने में उसे 1 घंटा लग जाता है. वह कहती है कि 2 घंटे आनेजाने के और 8 घंटे की ड्यूटी यानी 10 घंटे घर से बाहर रहना, फिर घर आ कर तुरंत किचन में घुसना, क्योंकि वृद्ध ससुर साथ में हैं. उन के लिए खाना तैयार करना होता है. पति रात 11 बजे तक घर में घुसते हैं. हम इतना थक जाते हैं कि कई सप्ताह तक एकदूसरे से शारीरिक रूप से नहीं मिल पाते. कभी एक तैयार है तो दूसरा थका हुआ. अब तो मानो सैक्स में रुचि ही नहीं है.

सवाल यह है कि वर्किंग कपल्स के बढ़ते चलन का सीधा असर उन की सैक्स लाइफ पर पड़ रहा है. पोर्न साइटों और फेसबुक पर सैक्स तलाशा जाता है, पर बगल में लेटे साथी को देख ठंडे पड़ जाते हैं. नोएडा के वरिष्ठ मनोचिकित्सक और सैक्सोलौजिस्ट डा. सुनील अवाना कहते हैं कि सैक्स तो पतिपत्नी के आपसी संबंधों की रीढ़ है. यह तो उन के रिश्ते को मजबूत बनाता है. मगर आजकल मेरे क्लीनिक में कई ऐसे दंपती आ रहे हैं जिन की सैक्स में रुचि समाप्त होती जा रही है. इस के कई कारण हैं. पर मुख्य रूप से देखा जाए तो काम के प्रति बढ़ता रुझान और उस से उत्पन्न स्ट्रैस इस का प्रमुख कारण है. आइए जानें कि सैक्स के प्रति घटती रुचि के क्याक्या कारण हैं:

ईगो: शादीशुदा जिंदगी में सैक्स गायब होने का मुख्य कारण है दोनों का ईगो. पहले पति जो भी कहता था पत्नी सिर झुका कर चुपचाप सुन लेती थी, पर अब वह भी कामकाजी हो गई है, इसलिए आरोपप्रत्यारोपों की झड़ी में उस का ईगो भी सामने आ जाता है. जब पतिपत्नी के रिश्तों में अहं की दीवार बढ़ती जाती है, तो हारजीत, आशानिराशा के बीच मन और शरीर की जरूरतें शिथिल पड़ने लगती हैं और फिर धीरेधीरे सैक्स गायब होने लगता है.

महत्त्वाकांक्षी होना: आज का युवावर्ग बहुत ज्यादा महत्त्वाकांक्षी हो गया है. शादी तो करते हैं पर कुछ महीनों बाद यह सोच कर कि अभी तो जवान हैं खूब पैसा कमा लें, खुद को काम में इतना डुबो लेते हैं कि बाकी सब कुछ भूल जाते हैं. पैसा कमाना गलत बात नहीं है, पर अपने स्वास्थ्य और शारीरिक जरूरतों को नजरअंदाज करना गलत है. आज के युवा दंपती चाहते हैं कि उन के पास सभी सुखसुविधाएं हों. महंगी गाड़ी, बड़ा सा फ्लैट आदि. यही महत्त्वाकांक्षा उन्हें काम में पूरी तरह डुबो देती है, जिस का नतीजा सैक्स में घटती रुचि के रूप में सामने आ रहा है.

तनाव: कई युवा दंपती जो ज्यादातर मल्टीनैशनल कंपनियों में कार्यरत हैं उन्हें अपनी जौब को सुरक्षित रखने के लिए काम का तनाव बना रहता है. जब सफलता नहीं मिलती तो परेशान हो जाते हैं. डा. अवाना कहते हैं कि स्ट्रैस का असर शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से युवा दंपती को शिथिल कर देता है. पति या पत्नी दोनों में से यदि एक भी तनाव में हो तो उस का सीधा असर सैक्स लाइफ पर पड़ता है. दोनों के बीच शारीरिक दूरी बढ़ जाती है, परिणामस्वरूप कामोत्तेजना कम होने लगती है.

स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं: पहले जो बीमारियां बढ़ती उम्र में होती थीं. वे अब भरी जवानी में होने लगी हैं जैसे उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, वैस्क्यूलर रोग, डिप्रैशन, मोटापा, थायराइड, हारमोन में असंतुलन आदि. उच्च रक्तचाप हो जाए तो पुरुषों में कई बार इरैक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या आ जाती है. ये सब बीमारियां सैक्स लाइफ को प्रभावित करती हैं.

खानपान: सैक्स लाइफ गलत खानपान की आदत से बहुत प्रभावित होती है. जंकफूड, असमय या जब भी भूख लगी कुछ खा लेना, थके होने पर खाना खा कर तुरंत सो जाने आदि से सैक्स लाइफ पर असर पड़ता है. अपच की समस्या भी सैक्स में रुचि घटा देती है.

डा. अवाना के अनुसार युवा दंपतियों को अपनी सैक्स लाइफ को रीचार्ज करने के लिए निम्न बातों को अपनाना चाहिए:

एक दूसरे को वक्त दें: दोनों लोग साथ बैठ कर शांत मन से सोचें कि कैसे एकदूसरे के लिए समय निकाला जा सकता है. हर समस्या का समाधान होता है. युवा दंपती प्रयास करें तो वे अपने व्यस्त जीवन में से सैक्स का पूर्ण आनंद लेने के लिए समझदारी से थोड़ा समय निकाल ही सकते हैं. जिस तरह जिंदा रहने के लिए खाना जरूरी है इसी तरह मैरिज लाइफ को सफल बनाने के लिए सैक्स भी जरूरी है.

विश्वास करना सीखें: विश्वास के बिना कोई रिश्ता नहीं टिक सकता. किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले पार्टनर को एक मौका दें. उस से खुल कर बात करें.

रिस्पैक्ट करें: पतिपत्नी को हमेशा एकदूसरे की रिस्पैक्ट करनी चाहिए. जिस व्यक्ति का आप सम्मान ही नहीं करोगे उस से प्यार कैसे करोगे.

ईगो से बचें: अहंकार और स्वाभिमान में बहुत फर्क होता है. इस फर्क को समझ कर अपने रिश्ते को बचाएं. अहं की तुष्टि के लिए रिश्ते को खत्म करने की कोशिश न करें. आरोप लगाने से कभी किसी रिश्ते में मजबूती नहीं आती है. वह मात्र आप के ईगो को संतुष्ट कर सकता है. कोई एक झुक जाए या माफी मांग ले तो इस में बुराई नहीं है.

कम्यूनिकेट करें: आपस में संवाद बनाए रखें. चाहत की गरमी बरकरार रखना दोनों के हाथ में है. औफिस में 5 मिनट का समय निकाल कर एकदूसरे को कौल कर के प्यार भरी बातें करें. सैक्स की शुरुआत मस्तिष्क से होती है, इसलिए इस के बारे में सोचें, बातें करें. वीकैंड पर औफिस को भूल जाएं, मूवी देखें, रोमांटिक मूड में रहें. रात को रिलैक्स हो कर एकदूसरे को पूरा समय दें.

फिटनैस पर ध्यान दें: व्यायाम की मदद से मूड को फ्रैश बनाए रखने की कोशिश करें. भावनात्मक संतुलन के लिए भी फिजिकल फिटनैस जरूरी है. सिर्फ कैरियर ही नहीं निजी जीवन में भी फिटनैस का अहम रोल है. विशेषज्ञों का मानना है कि सुबह हलकीफुलकी ऐक्सरसाइज जरूर करें. यदि सुबह यह संभव न हो तो शाम को समय निकालें. ऐसा करने पर डिप्रैशन व स्ट्रैस से दूर रहा जा सकता है.

हर वीकैंड हनीमून: यदि दोनों का बिजी शैड्यूल रहता हो तो वीकैंड पर ऐसा कुछ करें कि हफ्ते भर का स्ट्रैस दूर हो जाए. एक रिसर्च से साबित हुआ है कि लंबे हनीमून के बजाय छोटेछोटे कई हनीमून आप की रिलेशनशिप के लिए बेहतर हैं. आसपास कहीं घूमने निकल जाएं. फिल्म और कैंडल लाइट डिनर का प्रोग्राम बना लें या फिर छुट्टी ले कर कहीं बाहर चले जाएं. यदि फिर भी कुछ ठीक न हो तो मैरिज काउंसलर की मदद लें. वे मैरिटल थेरैपी के द्वारा दोनों को आमनेसामने बैठा कर, समस्याओं को सुन कर समाधान दे कर पैचअप कराते हैं. आज के बदलते लाइफस्टाइल का सब से खराब सच यह है कि युवा दंपती शादीशुदा होने के बावजूद सैक्स के लिए समय नहीं निकाल पाते. ‘लाइफ इन द फास्ट लेन’ नामक रिपोर्ट के अनुसार 550 लोगों पर हुए एक सर्वे के अनुसार आज के बदले लाइफस्टाइल ने लोगों की प्राथमिकताएं बदल दी हैं. 62% ऐसे लोग हैं जिन की सैक्स में रुचि कम हो गई है और 85% लोग पाचनक्रिया की तकलीफों से गुजर रहे हैं. 10 में से 6 लोग वीकैंड पर कुछ भी करना पसंद नहीं करते.

मेक इन इंडिया : 100 करोड़ की लागत से बनी देश की पहली हाईस्पीड ट्रेन

तकनीक के युग में भारत भी आगे बढ़ रहा है स्पीड भले ही धीमी हो. देश में बुलेट ट्रेन चलाने के लिए जापान की मदद ली जा रही है लेकिन बुलेट ट्रेन जैसी टी-18  रेलगाड़ी बनाने में भारत ने सफलता हासिल कर ली है. यह सेमी हाई स्पीड ट्रेन है जो पूरी तरह देश में ही बनाई गई है. इस के साथ ही भारतीय रेल एक नए चरण में प्रवेश कर गई है.

टी-18 यानी ट्रेन-18 देश की पहली ऐसी ट्रेन है जिस में अलग से इंजन नहीं लगा है. इस के कई कोच ऐसे हैं जो सेल्फ़पौवर्ड हैं. शताब्दी ट्रेन को रिप्लेस करने वाली इस ट्रेन-18 का ट्रायल जारी है. यूरोपियन ट्रेनों को टक्कर देने वाली इस ट्रेन में ऐसी खासियतें हैं कि ट्रेन शताब्दी का सफर पूरी तरह बदल कर रख देगी. मौजूदा शताब्दी ट्रेनों की तुलना में यह ट्रेन सफ़र के लिए 15 फीसदी तक कम समय लेगी.

ऐरोडायनामिक स्टाइल में बनी इस ट्रेन का अगला हिस्सा कुछ कुछ बुलेट ट्रेन जैसा लगता है. इस में कोई भारी भरकम इंजन नहीं है बल्कि ड्राइवर कैब है. ड्राइवर कैब से जुड़े डब्बे को मिला कर इस में कुल 16 कोच हैं. इस के डब्बों में औटोमैटिक स्लाइडिंग डोर लगे हैं जो ट्रेन की स्पीड जीरो होने पर खुदबखुद खुल जाएंगे मेट्रो ट्रेन की तरह. सेमी हाई स्पीड यह ट्रेन 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी. यह ट्रेन वाईफाई से लैस होगी.

देश के एक दक्षिणी राज्य तमिलनाडु की राजधानी चन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में 100 करोड़ रुपए की लागत से तैयार भारत में विकसित यह पहली इंजनरहित ट्रेन है. मेट्रो की तरह इस ट्रेन के दोनों तरफ ड्राईवर केबिन हैं. इस से ट्रेन को दिशा बदलने के झंझट से मुक्ति मिलेगी. यह तकनीक ट्रेन को मोड़ने और वापस लौटाने में लगने वाले समय की भी बचत करेगी.

यह भारतीय रेलवे की पहली विश्वस्तरीय ट्रेन है. इसे बनाने में जो लागत आई है वह ट्रेन आयात करने में आने वाली कीमत से आधी है. 2019-20 तक ऐसी 5 ट्रेनों का निर्माण कर लिया जाएगा. एक ट्रेन में 16 कोच होंगे, जिन में 12 कोच एसी सामान्य चेयरकार होंगे और 2 कोच एग्जीक्यूटिव क्लास के होंगे.

सामान्य चेयरकार में 78 सीटें होंगी, जबकि एग्जीक्यूटिव क्लास में 52 सीटें होंगी. देश में पहली बार इस तरह की ट्रेन का निर्माण किया गया है. इस के बनाने में तकरीबन 18 महीने का समय लगा.

ट्रेन को इस तरह तैयार किया गया है कि यात्रीगण ड्राईवर के केबिन के अन्दर देख सकते हैं. ट्रेन में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. इस ट्रेन सेट में कई फीचर जोड़े गए हैं, जिन में वाईफाई, एलईडी लाइट, पैसेंजर इन्फौर्मेशन सिस्टम आदि भी शामिल हैं.

इस ट्रेन के निर्माण को भारतीय रेल की अब तक की सब से बड़ी कामयाबी कहा जा रहा है.  इस तरह की ट्रेन अब तक दूसरे देशों से मंगवानी पड़ रही थी.  इस ट्रेन को टी-18 नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि इसे 2018 में तैयार किया गया है.

ये हैं खूबियां

–      अधिकतम स्पीड 160 किलोमीटर प्रति घंटे.

–      आटोमेटिक डोर और स्लाइडिंग फुटस्टेप.

–      मेट्रो की तरह दरवाजे अपनेआप खुलेंगे और बंद होंगे. इस के साथ ही प्लेटफार्म पर आने के बाद फुटस्टेप भी बाहर आ जाएगा ताकि प्लेटफार्म और ट्रेन के बीच गैप न रहे.

–      सभी कोच इंटरकनेक्टेड हैं.

–      झटके को कम करने के लिए सेमी परमानेंट कप्लर डिजाईन किए गए हैं.

–      यह ट्रेन मेक इन इंडिया के तहत चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्टरी में बनाई गई है.

–      ट्रेन में औनबोर्ड वाईफाई, इंफोटेनमेंट, जीपीएस पैसेंजर इनफार्मेशन, एलईडी लाइटिंग, टच बेस्ड रीडिंग लाइट, व्हीलचेयर, सेंसर टेप की सुविधा होगी.

पूरी तरह चेयर क्लास वाली इस ट्रेन में मनोरंजन के लिए इंफोटेनमेंट डिवाईस भी लगी होंगी.  ड्राइवर चेयर समेत इस में 1,128 सिटिंग कैपेसिटी होगी. साथ ही, इसके टौयलेट हवाई जहाज़ की तरह बायो वैक्यूम होंगे. कुल मिलाकर इस ट्रेन को विकसित देशों में चलने वाली ट्रेन के स्तर का बनाया गया है.

गौरतलब है कि सरकार ने सब से पहले 2014 के रेल बजट में देश के 9 रूटों पर सेमी हाई स्पीड ट्रेनें चलाने का एलान किया था. इन में दिल्ली-आगरा, दिल्ली-चंडीगढ़, दिल्ली-कानपुर, नागपुर-लासपुर, मैसूर-बेंगलुरु-चेन्नई, मुंबई-गोवा, मुंबई-अहमदाबाद, चेन्नई-हैदराबाद तथा नागपुर-सिकंदराबाद रूट शामिल थे.

नए ट्रैक पर दौड़ेंगी हिमा दास

18 साल की हिमा दास ने साल 2016 में एथलेटिक्स की शुरुआत की थी. आज उन की मेहनत रंग ला रही है. यही वजह है कि उन्हें ‘यूनिसेफ इंडिया’ का ‘यूथ एंबेसडर’ बनाया गया है. ‘यूनिसेफ इंडिया’ ने 14 नवंबर को ट्वीट कर यह जानकारी दी थी.

हमारे देश के खेल जगत में अब बहुत से अजूबे हो रहे हैं. यह वर्ष पहलवान बजरंग पूनिया के लिए शानदार रहा है. उन्होंने कुश्ती के हर बड़े इवेंट में मैडल जीते हैं. भाला फेंक के बाहुबली हैंडसम हंक नीरज चोपड़ा के तो कहने ही क्या. स्वीट स्माइल वाली मनु भाकर को कौन भूल सकता है. कम उम्र में ही इतनी सटीक निशानेबाज हैं वह.

लेकिन सब से ज्यादा हैरान किया हिमा दास ने. भारत की 18 साल की इस हैरतअंगेज एथलीट ने जुलाई, 2018 में फिनलैंड के टैम्पेयर शहर में हुई आईएएएफ अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीता था. वे वर्ल्ड लेवल पर ट्रैक इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी थीं. इस से पहले भारत के किसी मह‍िला या पुरुष खिलाड़ी ने जूनियर या सीनियर किसी भी लेवल पर वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मैडल नहीं जीता था.

इस के बाद इसी साल जकार्ता, इंडोनेशिया में हुए एशियन गेम्स में भी हिमा दास ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन कर 400 मीटर दौड़ में सिल्वर मैडल पर कब्जा जमाया था. फाइनल रेस में उन्होंने 50.79 सेकेंड का समय ले कर शानदार दौड़ लगाई थी, पर वे गोल्ड मैडल जीतने से चूक गई थीं.

यूनिसेफ संस्था को पूरी दुनिया में बच्चों की पढ़ाईलिखाई, सेहत और सुरक्षा से जुड़े काम करने के लिए जाना जाता है. लिहाजा, यूथ एंबेसडर के तौर पर हिमा दास को भी बच्चों से जुड़े कामों पर ध्यान देना होगा और उन्हें जागरूक करना होगा.

इस सम्मान से खुश हिमा दास ने ट्वीट कर के लिखा था, ‘यूनिसेफ इंडिया की यूथ एंबेसडर बन कर मैं खुश और आभारी हूं. मैं ज्यादा से ज्यादा बच्चों को उन के सपने पूरा करने के लिए बढ़ावा देना चाहूंगी.’

जब किसी खिलाडी को इस तरह के किसी समाजसेवी काम से जोड़ा जाता है तो उस का खेल के साथसाथ निजी जिंदगी में भी आत्मविश्वास बढ़ता है और हिमा दास जैसी किसी जुझारू खिलाडी के लिए तो यह और ज्यादा गौरव की बात है जिन्होंने सिर्फ अपने खेल के जुनून और मेहनत के दम पर यह मुकाम पाया है, क्योंकि कभी मिल्खा सिंह और पीटी उषा के बाद तो हम लोगों में से किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि असम के एक छोटे से गांव की एक दुबलेपतले कद की लड़की अमेरिका और दूसरे विकसित देशों की एथलीटों को टक्कर देगी.

सामाजिक सरोकारों पर चिंतित होने वाली हिमा दास ने साल 2013 में असम में हो रही आपराधिक घटनाओं और दूसरी सामाजिक समस्याओं को ध्यान में रख कर एक एक्टिविस्ट ग्रुप ‘मोन जई’ बनाया था. जिस का हिंदी में मतलब है मेरी चाहत. उम्मीद है कि अब यूनिसेफ जैसी इंटरनेशनल संस्था के साथ जुड़ कर यह ‘फर्राटा क्वीन’ अपनी चाहत को पूरा कर पाएगी.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें