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नए साल की पार्टी के लिये खास लिप कलर

नए साल के जश्न में शरीक होने के लिए आप भी नए साल का बेसब्री से इंतजार कर रही होंगी. आपने ड्रेस से लेकर हेयरस्टाइल तक का सारा प्लान कर लिया होगा. लेकिन मेकअप का क्या? किस सोच में पड़ गईं. ज्यादा सोचिए मत क्योंकि आज हम आपके लिए कई लिप कलर के शेड्स की जानकारी लेकर आए हैं. ठंड का समय चल रहा है ऐसे में यहां दिए गए रेट्रो लुक वाले कलर जैसे, रेड, प्‍लम और वाइन आपके चेहरे पर चार चांद लगा देंगे. तो आइये जानते हैं इसके बारे में.

ब्लड रेड

blood rad lip color

रात की पार्टी में यह रंग खूब खिलेगा और यदि आप गोरी चिट्टी हैं तो आप इसे आराम से लगा सकती हैं. यह लिप कलर आपको ग्लैमरस लुक देती है.

ग्‍लौसी रेड

red

यह कलर आपको काफी सेक्‍सी बना सकता है. आप इसे किसी रात की पार्टी में ही लगाएं तो ज्‍यादा बेहतर रहेगा.

चैरी रेड

red-lip

यह एक अलग तरह का लाल रंग है जो कि देखने में क्‍लासी और सुंदर लगता है.

वाइन रेड

यह बोल्‍ड कलर बहुत ज्‍यादा गहरे रंग का है. अगर आप पार्टी में डार्क कलर की ड्रेस पहनने वाली हैं तो यह लिप कलर आपके लिए बेस्ट है.

न्‍यूड पिंक

nude-pink

कौलेज स्‍टूडेंट्स पर ये कलर बहुत अच्‍छा लगेगा क्‍योंकि यह जवां लुक देती है. अगर नए साल का जश्न आपके कौलेज में हो रहा है तो यह कलर आपके लिए बिल्कुल परफेक्ट है.

न्‍यूड ग्‍लौस

nude gloss

न्‍यूड कलर हमेशा फैशन में रहेंगे. यह कलर प्राकृतिक लगते हैं और यह होंठों को जूसी लुक देते हैं. आप इसे दिन या रात किसी भी समय लगा सकती हैं.

लाइट पिंक

light-pink

यह कलर हर लड़की की पहली पसंद है. आप इसे लगा कर काफी सिंपल और खूबसूरत दिख सकती हैं. किसी भी लाइट कलर की ड्रेस के साथ इस कलर को लगाइए. यह आपको परियों सा लुक देता है.

प्‍लम

plum

यह नया और बोल्‍ड लिप कलर है. यह डार्क है और ग्लौसी भी. आप इसे किसी भी फंक्शन में लगा सकती हैं. इस कलर की लिपस्टिक और नेलपौलिश दोनों ही खूब चल रहे हैं.

बबल गम पिंक

यह बहुत ही लाइट कलर है और यह हर तरह की ड्रेस के साथ चल सकता है. आप इसे रोजाना औफिस या कौलेज जाने के लिए भी लगा सकती हैं.

नारियल हेयर पैक : बचाएं अपने गिरते बालों को

नारियल का दूध आपके बालों के लिए काफी फायदेमंद है. इसमें कई सारे पोषक तत्‍व, फैट और मिनरल पाए जाते हैं. यदि आपके बाल लगातार झड़ रहे हैं तो उसको रोकने के लिये आप नारियल के दूध का प्रयोग कर सकती हैं. आज हम आपको नारियल हेयर पैक के बारे में बताने जा रहे हैं तो जरा ध्यान से पढ़िए हमारी ये खबर.

नारियल दूध, दही और नींबू रस :

नारियल का ताजा दूध तैयार कीजिये, फिर इसमें दही और नींबू की कुछ बूंदे मिलाइये. नींबू के रस से बाल झड़ने बंद होगे तथा इंफेक्‍शन बढ़ाने वाले बैक्‍टीरिया का भी नाश होगा. इस हेयर पैक को हफ्ते में दो बार जरुर लगाएं.

नारियल दूध और शहद :

हल्‍की आंच पर नारियल के टुकडे़ को पानी के साथ 10 मिनट के लिये उबालिये. इसे छान कर ठंडा कर लीजिये, फिर पानी में शहद की कुछ बूंद मिलाइये. इस मिश्रण को अपने सिर पर लगाइये और 35 मिनट के लिये छोड़ दीजिये. इसको लगाने से बाल नहीं झड़ेंगे और उन्‍हें पोषण भी मिलेगा.

नारियल दूध :

सूखे नारियल को घिस लें, फिर उसे अच्‍छी तरह से पानी और दूध में छानिये और बोतल में भर लीजिये. जब भी बाल धोने जाएं तब इस नारियल के दूध का प्रयोग करें. इसे सिर पर 30-45 मिनट के लिये लगा रहने दें और बाद में शैंपू कर लें. इसके बाद बाल धोने के बाद भी इसे जरा सा ले कर बालों पर लगा लें, यह एक कंडीशनर की तरह से काम करेगा और आपके बालों को हेयर फौल की समस्या से बचाने के साथ ही उसे मुलायम बनाएगा.

नारियल दूध और मेथी :

मेथी पाउडर को ताजी गरी के दूध में मिलाइये. इस हेयर पैक को 5 मिनट तक के लिये बालों में लगाइये और 20 मिनट के बाद सिर शैंपू से धो लीजिये. इससे बाल घने और कोमल हो जाएंगे.

नारियल दूध और आंवला तेल : गरम आमला तेल के साथ नारियल का दूध मिलाइये और इसे अपनी बालों की जड़ों में लगाइये. इसे 25 मिनट के लिये छोड़ दीजिये और बाद में ठंडे पानी से धो लीजिये. इससे बालों का झड़ना बिल्‍कुल बंद हो जाएगा.

क्या ढूंढते हैं पुरुष महिला साथी में

हर पुरूष अपनी होनी वाले जीवनसाथी के अंदर कुछ ऐसे गुण ढूंढता है जो भविष्य में उनके रिश्ते के लिए अच्छे हों. जीवनसाथी अच्छा और समझदार मिले तो जिंदगी बहुत आसानी से गुजारी जा सकती है. अगर उन्हें अपनी जीवनसाथी में कुछ ऐसे गुण मिल जाएं जिनकी उन्हें तलाश हो, तो वह उन्हें हर तरह से खुश रखने की कोशिश करते हैं.

समझदारी

पुरूष अपने जीवनसाथी को लेकर हमेशा सोचते हैं कि वह बहुत समझदार हो. हर छोटी-बड़ी बात को ध्यानपूर्वक सुनने और समझने की क्षमता हो ताकि भविष्य में किसी बात को लेकर परेशानी न हो. अगर वह बातों को समझेगी तो रिश्ते में संतुलन बना रहेगा. अगर आगे भविष्य में कोई समस्या आएगी तो दोनों साथ मिलकर उसका हल निकालने की कोशिश करेंगे.

परिवार के हित के बारे में सोचने वाली

हर पुरूष चाहता है कि उसकी जीवनसाथी उसके परिवार के बारे में हमेशा सोचे. परिवार से जुड़े हर इंसान का उतना ही सम्मान करे जितना वह अपने परिवार के लोगों का करती है. कभी किसी को कोई ऐसी बात ना बोले जिससे किसी का दिल दुखे या किसी को बुरा महसूस हो क्योंकि परिवार जीवन का सबसे अहम हिस्सा होता है.

मिलनसार हो

पुरूषों को ऐसी साथी चाहिए होती है जो किसी से भी आसानी से बात कर ले. अपने दोस्तों के साथ-साथ उनके दोस्तों से भी बातें करे. वह दूसरों की भावनाओं की कद्र करे. अपने व्यवहार से सबका दिल जीत ले.

लक्ष्य पर ध्यान हो

ऐसी महिलाएं जो अपने लक्ष्य को लेकर फोकस होती हैं वह खुद की जिम्मेदारी लेने के काबिल होती हैं. उन्हें भविष्य में किसी के ऊपर आश्रित नहीं होना पड़ता. भविष्य में अपने साथी को भी हर तरह से समर्थन देती हैं. चाहे वह घर से जुड़ी कोई बात हो या अन्य.

आवारा पशुओं के आतंक और सरकार के आगे किसान पस्त

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 25 किलोमीटर दूर मोहनलालगंज विधानसभा क्षेत्र के विधायक अम्बरीश सिंह पुष्कर ने छुट्टा जानवरों से खेती किसानी को होने वाले नुकसान से बचाने के लिये कई बार प्रशासन को पत्रा लिखा.

विधानसभा सदन के दौरान इस मुददे को योगी सरकार के सामने भी उठाया. हर बार यह कहा गया कि पशुओं के लिये हर गांव में मैदान चिन्हित कर लिये गये हैं. एक साल से अधिक समय हो गया योगी सरकार ने छुट्टा जानवरों को लेकर कोई समाधन नहीं निकाला. किसान परेशान हैं. कई बार किसानों ने स्कूलों में ऐसे जानवरों को बंद किया.

mohanlal ganj bjp yogi adityanath narendra modi

मोहनलालगंज के विधायक अम्बरीश सिंह पुष्कर कहते हैं,’ब्लाक और तहसील का प्रशासन कई बार कहने के बाद भी कुछ नहीं कर रहा ऐसे में अब यह फैसला किया गया कि किसान ऐसे जानवरों को लेकर आयें और ब्लाक परिसर में ही छोड़ दें. 27 दिसम्बर की सुबह जब किसान ऐसे जानवरों को छोड़ने के लिये ब्लाक आने लगे तो प्रशासन ने ब्लाक परिसर को बैरीकेडिंग करके बंद किया. किसानों पर लाठी चार्ज करके उनको भगा दिया.’

विधायक अम्बरीश सिंह पुष्कर कहते हैं ‘एक तरफ तो सरकार छुट्टा जानवरों को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही. दूसरी ओर जब किसान अपनी बात कह रहा है, तो उस पर पुलिस लाठी चला रही है. ऐसी तानशाह सरकार पहली बार देखी है. मोहनलालगंज के तमाम गांवों में पशुचर की जमीन को दूसरों के कब्जे से मुक्त कराने के बाद भी वहां कोई गौशाला नहीं बनवाई गई. सरकार विधानसभा में कुछ कहती है और उसका जमीनी प्रभाव कुछ और होता है. किसान ही नहीं सड़क पर चलने वाले लोग तक इन जानवरों से परेशान हैं. पहले कुछ संख्या में नीलगाय ही ऐसी थीं. जिनसे किसान परेशान था अब उनके कई गुना बड़ी संख्या में इन छुट्टा जानवरों का आंतक बढ़ गया है. धन और गेहूं की फसल खराब हो चुकी है. किसान कई तरफ की परेशानियों से निकल कर फसल की पैदावार करता है और यह जानवर उसको नष्ट कर देते है. ऐसे में अब हमारे क्षेत्र के किसानों ने फैसला किया है कि यह छुट्टा जानवर ब्लाक और तहसील के परिसर में ही छोड़ दिये जाएंगे. जब तक सरकार इन जानवरों के लिये कोई ठोस योजना नहीं बनाती तब तक छुट्टा जानवर सरकारी संस्थानों के परिसर में रहेंगे. अगर पुलिस ने ज्यादा ज्यादती की तो आगे से पुलिस थाना और कोतवाली परिसर में भी इन जानवरों को छोड़ दिया जायेगा. किसान अब अपनी फसल को और बरबाद नहीं होने देगा.’

मोहनलालगंज क्षेत्र में कई बार गांव में आपसी झगड़े, तनाव और दुर्घटनायें भी इन जानवरों के कारण हो चुकी हैं. जिसमें कई लोग घायल हुये तो कई की जान भी जा चुकी है. खेती किसानी की बरबादी, खड़ी फसल को होने वाला नुकसान, किसानों के लिये आत्मघाती बन चुका है. ऐसे में किसान भी अपने विधायक के साथ है. मोहनलालगंज के विधायक की तर्ज पर अब दूसरे विधायक भी ऐसी ही राह पर चलेंगे.

विकास या विनाश

भारतीय जनता पार्टी और उस के नागपुर में बैठे सर्वेसर्वा शायद यह कभी स्वीकार न कर पाएंगे कि यह देश केवल पंडों और उन के अंधभक्तों का नहीं है. यह देश हमेशा की तरह मेहनतकश लोगों का है. जिन्होंने हर तरह के सामाजिक व आर्थिक भेदभाव सहते हुए लगभग जानवरों सी जिंदगी जी है और आज उन्हें यदि कुछ मिल रहा है तो पूजापाठ के बल पर नहीं, बल्कि उस टैक्नोलौजी के बलबूते जो सारी दुनिया को नया सुख और नई सुरक्षा दे रही है.

2014 में यदि नरेंद्र मोदी जीते और बाद में एकएक कर के चुनाव जीतते गए तो इसके पीछे उन के वे वादे थे जो इस देश की 95 फीसदी जनता के दर्द को छूते थे. यह जनता दो वक्त की रोटी, कपड़ा, मकान के साथ इज्जत चाहती है. और 2014 में नरेंद्र मोदी ने ‘सब का साथ सब का विकास’ व ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ जैसे नारों से यह वादा किया था. कांग्रेस के पास 2014 में सिवा भ्रष्टाचार के आरोपों से खुद को बचाने के अलावा कहने को कुछ न था.

अफसोस यह है कि जीतने के बाद नरेंद्र मोदी की पार्टी एकदम पलटी मार गई और उस ने ‘विकास’ की स्पैलिंग बदल कर ‘विनाश’ कर दी. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भजपा की सरकार ने नोटबंदी कर के करैंसी का विनाश कर दिया, उस ने जीएसटी लागू कर के व्यापार का विनाश कर दिया, उस के गुर्गों ने गौरक्षक बन कर कानून व्यवस्था का विनाश कर दिया, उसने लोगों की बातें सुनना बंद कर के लोकतंत्र में जरूरी संवाद का विनाश कर दिया, उस ने मीडिया पर दबाव डाल कर स्वतंत्र व निर्भीक पत्रकारिता का विनाश कर दिया. और सब से बड़ी बात, पिछले दरवाजे से आरक्षण विरोधी बातों को हवा दे कर उस विश्वास का विनाश कर दिया जो देश के शूद्रों व अछूतों (ओबीसी व एससीएसटी) में पनप रहा था कि वे बराबर के हो जाएंगे.

यह इस देश में बारबार होता रहा है, पौराणिक ग्रंथ इतिहास तो नहीं हैं पर जो भी कहानियां उन में हैं वे सफल, सुखी राज देने वाले असुर राजाओं को आम देवताओं द्वारा मारने की हैं. जब असुर राजाओं को मारा जाएगा तो निश्चित है कि उन की प्रजाओं को गुलाम बनाया जाएगा. आज भजभज मंडली ने जो कर्मकांडों, धार्मिक कार्यक्रमों की झड़ी लगाई, हरेक के पीछे एक असुर राजा के संहार की कथा है जिस का देश के जनमानस पर असर न पड़े, यह नहीं हो सकता. यह मूलभाव 2014 के बाद भाजपा के राज में हर जगह दिखने लगा जहां मूर्ति निर्माण, मूर्तिपूजा, गंगा आरती, मंदिर दर्शन, यज्ञ, हवन, योग, आयुर्वेद, संस्कृत, भारत माता, वंदेमातरम आदि, किसान, मजदूर, व्यापार, आम गृहिणी से ज्यादा महत्त्व के हो गए.

2014 के बाद भाजपा ने जिस तरह से समाज के तानेबाने को छिन्नभिन्न किया है वह नया नहीं है. पर अफसोसजनक है. अब पूरी जनता को इस का खमियाजा तो भुगतना ही होगा.

 

सिंबा : रीमेक के लिए भी दिमाग चाहिए..

किसी भी सफल फिल्म का रीमेक बनाते समय फिल्मकार उसे तहस नहस कर देते हैं. इससे पहले मराठी फिल्म ‘सैराट’ की जब हिंदी रीमेक ‘धड़क’ आयी, तो बात नहीं जमी थी. अब रोहित शेट्टी 2015 में प्रदर्षित तेलुगू की सुपर हिट फिल्म ‘‘टेम्पर’’ का हिंदी रीमेक एक्शन व हास्य प्रधान फिल्म ‘‘सिंबा’’ लेकर आए हैं, पर इस बार वह भी मात खा गए.

फिल्म ‘‘टेंम्पर’’ में जिस तरह का अभिनय जूनियर एनटीआर ने किया है, उसके सामने रणवीर सिंह फीके पड़ जाते हैं. जिन लोगों ने तेलुगू फिल्म ‘टेम्पर’ या हिंदी में डब इस फिल्म को देखा है, उन्हे ‘सिंबा’ पसंद नहीं आएगी. अन्यथा यह मनोरंजक मसाला फिल्म है, जिसमें एक्शन, हास्य, रोमांस, इमोशंस के साथ ऐसा हीरो है, जो कि वक्त पड़ने पर बीस पच्चीस लोगों को धूल चटा देता है.

संग्राम भालेराव उर्फ सिंबा (रणवीर सिंह) एक अनाथ बालक से शिवगढ़ के एसीपी बने हैं, जो कि भ्रष्ट पुलिस आफिसर है. यह वही शहर है, जहां डीसीपी बाजीराव सिंघम (अजय देवगन) की परवरिश हुई थी. बाजीराव इमानदार पुलिस अफसर रहा है, जबकि सिंबा को भ्रष्ट तरीके से जिंदगी का आनंद उठाते दिखाया गया है. वास्तव में बचपन में ही सिनेमाघर के सामने ब्लैक में टिकट बेचते हुए सिंबा समझ जाता है कि पैसा कमाने के लिए पावर चाहिए, इसीलिए वह पुलिस अफसर बनना चाहता है. पुलिस अफसर बनने के बाद सिंबा बेईमानी पूरी इमानदारी से करता है. पुलिस अफसर की ड्यूटी निभाते हुए उसका ध्यान सिर्फ जायज व नाजायज ढंग से पैसा कमाने पर ही होता है. कुल मिलाकर संग्राम उर्फ सिंबा को भ्रष्ट पुलिस अफसर की जीवनशैली जीने में ज्यादा आनंद आता है. उसे प्रदेश के गृहमंत्री का वरदहस्त हासिल है.

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संग्राम भालेराव, गृहमंत्री को अपना पिता और उनकी बेटी को बहन मानता है. गृहमंत्री उसका तबादला गोवा में मीरा मार पुलिस स्टेशन में इस हिदायत के साथ करते हैं कि वह वहां पर दुर्वा रानाडे (सोनू सूद) को क्रास नही करेगा. मीरा मार पुलिस स्टेशन पहुंचने पर सिंबा का सामना हेड कांस्टेबल मोहिले (आशुतोष राणा) से होती है, जोकि बहुत इमानदार है, उसने सिंबा के बारे में सब कुछ सुन रखा है, इसलिए वह उन्हे सलाम नहीं करता है. गुस्से में सिंबा उसे अपनी गाड़ी का ड्राइवर बना लेता है. पर सब इंस्पेक्टर संतोष तावड़े (सिद्धार्थ जाधव) से सिंबा की जमती है और दोनों मिलकर हर नाजायज काम को अंजाम देते हैं. पुलिस स्टेशन के सामने ही कैटरिंग चलाने वाली शगुन (सारा अली खान) पर सिंबा लट्टू हो जाता है.

तो वहीं वह शगुन की सहेली आकृति को अपनी बहन बना लेता है. एक दिन शगुन भी सिंबा से प्यार करने की बात कबूल कर लेती है.दु र्वा रानाडे के ड्रग्स के अवैध व्यापार से अनभिज्ञ सिंबा, दुर्वा के हर अपराध में उसका साथ देता है, जिसके बदले में उसे एक बड़ी रकम मिलती रहती है. दुर्वा के ड्रग्स का व्यापार उसके दो भाई संभालते हैं. यह छोटे स्कूल जाने वाले बच्चे के बैग में ड्रग्स के पैकेट भरकर एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाते रहते हैं. जब इसकी भनक आकृति को लगती है, तो वह उनके अड्डे पर पहुंच जाती है, जिसके साथ बलात्कार करने के बाद दुर्वा के भाई उसकी हत्या कर देते हैं. आकृति के साथ जो कुछ होता है, वह जानकर सिंबा में परिवर्तन आता है और वह सही राह पर चलना शुरू कर देता है.अं ततः दुर्वा के दोनो भाईयों का पुलिस स्टेशन के ही अंदर इनकाउंटर होता है. मामला अदालत में पहुंचता है. डीसीपी बाजीराव सिंघम भी आते हैं और अंत में सिंबा बरी और दुर्वा को सजा हो जाती है.

तेलगू फिल्म ‘टेम्पर’ की यह आधिकारिक रीमेक है, मगर रोहित शेट्टी ने थोड़ा सा बदलाव करते हुए इसे मसालेदार बनाने की कोशिश की है. फिल्म में गाने काफी डाले गए हैं. इंटरवल से पहले फिल्म की कहानी ह्यूमर व हास्य के साथ एक भ्रष्ट पुलिस अफसर की कहानी है. इंटरवल से पहले हास्य का तगड़ा डोज है. मगर इंटरवल के बाद कहानी का केंद्र लड़की के साथ बलात्कार व बलात्कारियों को सजा देने की तरफ मुड़ जाता है. इंटरवल के बाद फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के हाथ से फिसल सी जाती है. क्योंकि उन्होंने देश के लोगों के मिजाज को भुनाने का ही प्रयास किया है.

जिसके चलते फिल्म काफी बोरिंग हो जाती है. फिल्म में अदालत के दृष्य प्रभाव नहीं डालते. निर्भया केस के साथ फिल्म को जोड़कर उपदेशात्मक बना दिया है, जो कि बहुत बोर करता है. यह एक बलात्कार पर आधारित मैलोड्रैमेटिक फिल्म बनकर रह गयी है.

बौलीवुड की सबसे बड़ी कमजोरी है कि कोई भी फिल्मकार फिल्म में मनोरंजन के साथ उपदेश नहीं परोस पाते हैं. इस कमजोरी के शिकार रोहित शेट्टी भी नजर आए. समस्या का निराकरण तलाशने की बजाय हवाई समाधान देना इनका हक बन गया है. पुलिस स्टेशन में एनकाउंटर/मुठभेड़ का दृष्य अवास्तविक लगता है. अंत में अजय देवगन को लाकर एक्शन दृष्यों की मदद से निर्देशक ने फिल्म को संभालने का असफल प्रयास किया है.

पटकथा के स्तर पर तमाम कमियां हैं. कई दृष्यों में अजीब सा विरोधाभास है. एक तरफ बलात्कार की शिकार आकृति का पिता दुःखी व सदमे में है, तो उसी क्षण वह एक कप चाय की मांग करता है. अदालती दृष्य तो बेवकूफी से भरे हैं. जिस तरह की भाषणबाजी अदालती दृष्य मे है, वह गले नहीं उतरती. जज के चैंबर में अपराधी, पुलिस व वकीलों के साथ ही राज्य के गृहमंत्री की मौजूदगी तो लेखक के दिमागी सोच की पराकास्ठा है.

जहां तक अभिनय का सवाल है तो इंटरवल से पहले हास्य के दृश्यों में रणवीर सिंह ने पूरा जोश दिखाया है, मगर वह खुद को दोहराते हुए ही नजर आए हैं. कई दृश्यों में उनका अभिनय देखकर फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ की याद आ जाती हैं. कई दृष्यों में रणवीर सिंह ने जूनियर एनटीआर की नकल की है, तो कई जगह वह ओवरएक्टिंग करते हुए नजर आते हैं. शगुन के किरदार में सारा अली खान सिर्फ सुंदर लगी हैं, अन्यथा उनके हिस्से में करने के लिए कुछ है ही नहीं. दुर्वा रानाडे के किरदार में सोनू सूद जरुर प्रभावित करते हैं. एक अति ईमानदार हेड पुलिस कौंस्टेबल की भ्रष्ट अधिकारी के साथ काम करने की बेबसी को पेश करने में आशुतोष राणा काफी हद तक कामयाब रहे हैं. संतोष तावड़े के किरदार में सिद्धार्थ जाधव भी अपना असर छोड़ जाते हैं.

फिल्म में गीतों की भरमार है, मगर वह गीत संगीत असरदार नहीं है. फिल्म देखकर अहसास होता है कि अब धर्मा प्रोडकशन मौलिक बेहतरीन गीत संगीत रचने में असमर्थ हो गया है.

दो घंटे 40 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘सिंबा’’ का निर्माण करण जौहर, हीरू जौहर, अपूर्वा मेहता व रोहित शेट्टी ने किया है. फिल्म के निर्देशक रोहित शेट्टी हैं. तेलुगू फिल्म ‘‘टेम्पर’’ की हिंदी रीमेक वाली इस फिल्म के पटकथा लेखक युनूस सेजावल व साजिद सामजी, संवाद लेखक फरहाद सामजी, संगीतकार तनिष्क बागची, कैमरामैन जोमोन टी जौन तथा इसे अभिनय से संवारने वाले कलाकार हैं – रणवीर सिंह, सारा अली खान, सोनू सूद, अजय देवगन, वृजेष हीरजी, आषुतोष राणा, सिद्धार्थ जाधव, अरूण नलावड़े, सुलभा आर्या, अष्विनी कलसेकर, विजय पाटकर, सौरभ गोखले, अषोक समर्थ, वैदेही परषुरामी, सुचित्रा बांदेकर के अलावा मेहमान कलाकार के तौर पर तुषार कपूर, कुणाल खेमू, श्रेयस तलपड़े, अरशद वारसी व करण जौहर.

गोल्फर ज्योति रंधावा की काली करतूत

ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के पांढरकवाड़ा जंगल में खौफ का दूसरा नाम बन चुकी एक बाघिन टी-1 की खोज के लिए मशहूर गोल्फर और डाग ट्रेनर ज्योति रंधावा को दिल्ली से बुलाया गया था.

तब पांढरकवाड़ा के चीफ कन्जर्वेटर औफ फौरेस्ट ए.के. मिश्रा ने बताया था कि उस बाघिन की तलाश के लिए एक खास टीम बनाई गई है जिसे गोल्फर और डाग ट्रेनर ज्योति रंधावा लीड करेंगे.

वैसे, ज्योति रंधावा एक और वजह से भी जाने जाते हैं. वे खूबसूरत हीरोइन चित्रांगदा सिंह के पति भी रह चुके हैं और अब जिन सुर्ख़ियों से चर्चा में हैं उन से उन की इमेज को बड़ा धक्का लगा है. दरअसल, उन्हें शिकार के मामले में एक साथी महेश विराजदार के साथ उत्तर प्रदेश के मोतीपुर रेंज के कतर्नियाघाट इलाके से गिरफ्तार किया गया है. उन दोनों के पास से शिकार में इस्तेमाल किए जाने वाले हथियार, जंगली जानवर की खाल और जंगली मुर्गा भी बरामद हुआ है.

दरअसल, कतर्निया जंगल के मोतीपुर वन क्षेत्र की खपरा वन चौकी के नजदीक जंगल के पास महकमे की एक टीम ने बुधवार, 26 दिसंबर को एक गाड़ी (एचआर 26 डीएन 4299) को जंगल से गुजरते देखा. शक के आधार पर जब जंगल कर्मियों की टीम ने उस गाड़ी की तलाशी ली तो उस में 2 शिकारियों को असलहा व जंगली जानवरों की खाल के साथ दबोचा गया.

पूछताछ में उन दोनों संदिग्धों की पहचान गोल्फर ज्योति सिंह रंधावा और आर्मी में कैप्टन रह चुके महेश विराजदार के रूप में हुई.

गाड़ी की जांच करने पर उस में से सूअर की खाल, एक मरा हुआ जंगली मुर्गा, .22 राइफल ब्लेसर जर्मनी, 3 खाली कारतूस, 80 जिंदा कारतूस, एक मैगजीन, बैनाकूलर एचडी दूरबीन, रेंज फाइंडर, 2 मोबाइल सर्चलाइट टोर्च व 36,200 रूपए बरामद किए गए.

किसी इंटरनैशनल लैवल के खिलाड़ी का इस तरह की गैरकानूनी हरकतों में शामिल होना खेल जगत को भी शर्मिंदा करता है. ऐसा नहीं है कि ज्योति रंधावा किसी गरीब परिवार से हैं और किसी मजबूरी के तहत इस तरह के कामों को अंजाम दे रहे हैं, बल्कि यह एक हाईप्रोफाइल मामला है जिस की तह में जा कर ही पता चलेगा कि इस खेल का असली खिलाड़ी कौन है.

11 टिप्स विंटर में पाएं सौफ्ट स्किन

स्किन की देखभाल तो वैसे हर मौसम में और हमेशा ही करनी चाहिए, लेकिन सर्दियों में स्किन से संबंधित ज्यादा समस्याएं हो जाती हैं जिसके चलते सर्दियों में स्किन को एक्स्ट्रा पोषण और केयर की जरूरत होती है. कुछ ब्यूटी टिप्स के जरिए सर्दियों में आप अपनी स्किन को हेल्दी और खूबसूरत रख सकती हैं.

आइये जानते है क्या है वो ब्यूटी टिप्स…

• सर्दियों में चेहरा काला दिखाई देता है क्‍योकि मौसम में काफी रूखापन होता है. इसलिये आपको सही फाउंडेशन भी चुनना चाहिये जिससे चेहरा पैच लेस दिखे.

• नहाने के लिए बहुत अधिक गर्म पानी का इस्तेमाल न करें. इसे त्वचा की नमी और प्राकृतिक तेल सूख जाते हैं और त्वचा रूखी हो जाती है. ठंड के दिनों में हल्के गर्म पानी से ही नहाएं और नहाने के बाद शरीर पर लोशन लगाएं.

• कई लोगों को लगता है कि सर्दियों में सनस्क्रीन की जरूरत नहीं पड़ती पर ऐसा नहीं है. इस मौसम में भी यूवी किरणें त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं इसलिए घर से निकलते वक्त इनका इस्तेमाल जरूर करें.

• सर्दियों में शुष्क मौसम के कारण सबसे अधिक नुकसान त्वचा की नमीं को पहुंचता है. इसे बरकरार रखने के लिए घर पर ही पैक बना सकते हैं. इसके लिए दो चम्मच मिल्क पाउडर, एक चम्मच शहद, दो अंडे का पीला भाग मिलाएं और चेहरे पर लगाकर कुछ मिनटों तक लगा रहने दें. हल्के गुनगुने पानी से चेहरा साफ करें. नमी बरकरार रखने के लिए दिन में कई बार पानी पिएं.

• स्किन को कोमल और हेल्दी रखना है तो नारियल तेल का इस्तेमाल करें. नारियल का तेल सिर्फ बालों के लिए ही उपयोगी नहीं है बल्कि इससे रोजाना नहाने से एक घंटे पहले शरीर और चेहरे की मालिश करें और फिर नहाएं. स्किन कभी रूखी नहीं होगी.

• ग्लिसरीन, नींबू और 3-4 बूंद गुलाबजल मिलाकर एक मिश्रण बना लें और इसे एक शीशी में भरकर रख लें. रोजाना इस मिश्रण को रात को सोने से पहले चेहरे और शरीर पर लगाएं और सुबह उठकर हल्के गुनगुने पानी से नहा लें. इससे आपकी स्किन चमकदार और मुलायम नजर आएगी.

• कई लोगों की स्किन पहले से ही रूखी होती है और सर्दियों में ऐसी स्किन का और बुरा हाल हो जाता है. रूखी स्किन के लिए दूध सबसे बेहतर टौनिक है. चाहे तो इसे आप किसी फेसपैक में मिलाकर लगा सकते हैं या फिर ऐसे ही दूध को चेहरे पर लगाएं और हल्के हाथ से मसाज करें. करीब एक घंटे बाद गुनगुने पानी से धो दें. रोजाना ऐसा करेंगे तो कुछ ही वक्त में फायदा देखने को मिलेगा.

• 2 चम्मच शहद में एक चम्मच बटर और थोड़ा सा नींबू और शहद मिलाकर एक पैक बनाएं और उसे चेहरे के अलावा हाथों और गर्दन पर लगाएं. करीब आधे घंटे के लिए ऐसे ही रहने दें और फिर गुनगुने पानी से धो दें. सर्दियों में रोजाना ऐसा करें. इससे ना सिर्फ त्वचा कोमल और हेल्दी बनेगी बल्कि रंगत भी गोरी होगी.

• सर्दियों में ठंड के कारण होंठो का रंग फीका पड़ जाता है और होंठ फटने लगते है, जिससे हमारे होंठो की मुस्कान खो जाती है. इन परेशानियों से बचने के लिए गुलाब को पखुड़ियों का लिप बाम बनाए.

• गुलाब की पंखुड़ियों को रात भर दूध मले फूलने दे और सुबह इन पंखुड़ियों को मसलकर होंठो पर लगाए. इससे होंठो में गुलाबी रंगत बनी रहेगी. या फिर शहद, मलाई और केसर को मिलकर होंठो पर लगाए और कुछ देर छोड़ दे. यह एक अच्छा लिप बम है. जिसके नियमित इस्तेमाल से होंठो का फटना और कालापन दूर हो जाएगा| होंठो को मुलायम रखने के लिए आप नियमित रूप से बादाम का तेल भी लगाए तो अच्छा रहेगा.

• चाहे कोई भी मौसम हो त्वचा का ख्याल रखना है तो इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि संतुलित खाना खाया जाए. रोजाना पर्याप्त पानी पीएं. मौसमी फल और सब्जियां खाएं. सर्दियां हैं तो खूब गाजर, पालक, मेथी, सरसों, नींबू जैसी चीजें खाने में शामिल करें. जूस पीएं.

बढ़ता प्रदूषण दिल्लीवासियों के लिए बना खतरा

कई दिन से खतरनाक स्तर पर पहुंचे प्रदूषण से दिल्ली व एनसीआर के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. मौसम विभाग का मानना है कि दिल्ली व इस के आसपास हवा की गति काफी कम है. ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर गंभीर स्थिति में ही रहेगा. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी सीपीसीबी के प्रदूषण मौनिटरिंग स्टेशनों में पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर 448 दर्ज किया गया.  सीपीसीबी ने खतरनाक प्रदूषण के चलते लोगों को घरों में रहने की सलाह दी है. कुल मिला कर दिल्ली दिनोदिन गैस चैंबर में तब्दील हो रही है.

इस बीच, दिल्ली में प्रदूषण से बिगड़ते हालात पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि उन की सरकार इस पर इस समस्या से नजात पाने के लिए अहम कदम कदम उठा रही है. वह राजधानी में पौधरोपण करने के साथ ही 3 हजार इलैक्ट्रिक बसें खरीदने की भी योजना बना रही है, जिस से बढ़ते प्रदूषण पर काफी हद कर रोक लग पाएगी. लेकिन सरकार चाहे वह राज्य की हो या केंद्र की बस, खोखली घोषणाएं कर के भूल जाती हैं. उन पर कठोरता से अमल नहीं करतीं, यदि सरकारें इन पर सख्ती बरतती तो आज ऐसे हालात पैदा नहीं होते. अभी कुछ साल पहले दिल्ली सरकार ने प्रदूषण को यातायात को सुचारू करने के लिए औड इवन स्कीम शुरू की थी, लेकिन कुछ दिन चलाने के बाद उसे फिर रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया. यदि वह इसे सुचारू रूप से जारी रखती तो काफी कुछ प्रदूषण में कमी आ सकती थी,  मेट्रो ने भी बढ़ते प्रदूषण को रोकने में काफी योगदान दिया है.

पश्चिमी विक्षोभ ने बिगाड़ा खेल

मौसम वैज्ञानिकों का मानना अभी उत्तर-पश्चिमी राजस्थान, पंजाब, पश्चिमी हरियाणा व दिल्ली में पश्चिमी विक्षोभ का असर है. इस से दिल्ली व एनसीआर में हवा की रफ्तार में कमी आई है. अभी 5 से 7 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवा चल रही है. आमतौर पर दिसंबर में बारिश होती थी, लेकिन इस बार बारिश न होने के कारण प्रदूषण में बढो़तरी हुई है. आने वाले दिनों में अब प्रदूषण का स्तर कम हो सकता है, क्योंकि हवा 15 से 20 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलेगी.

दिल्लीएनीसीआईर में निर्माण कार्यों पर लगी रोक

बढ़ते प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली व एनसीआर में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पर्यावरण प्रदूषण रोकथाम नियंत्रण प्राधिकरण यानी ईपीसीए ने औद्योगिक क्षेत्रों को बंद करने का आदेश जारी किया है. वजीरपुर, मुंडका, नरेला, बवाना, साहिबाबाद, फरीदाबाद के औद्योगिक क्षेत्रों में चल रहे सभी उद्योगों को बंद करने का आदेश जारी किया गया है. वहीं सभी निर्माण कार्यों पर भी रोक लगा दी गई है.

प्रदूषण के खिलाफ निगम की कार्यवाही

संबंधित एजेंसियों को अवैध उद्योगों पर सख्त कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए गए हैं. यातायात पुलिस को जाम से मुक्त कर ट्रैफिक  संचालित करने के लिए विशेष टीमें तैनात करने के भी निर्देश दिए गए हैं. साथ ही पुलिस विभाग को भी निर्देश दिया गया है कि  भारी भरकम ट्रक ईस्टर्न और वैस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रैस-वे से ही गुजरें.

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दिल्लीएनसीआर में प्रदूषण फैलाने वाली तमाम गतिविधियों पर रोक लगाई जाएगी.  इस में  सभी प्रकार के निर्माण कार्यों पर रोक रहेगी और नियमों के उल्लंघन करने वालों पर  भारीभरकम जुर्माना लगाने के साथ कानूनी कार्यवाही  भी की जाएगी.  साथ ही निर्देश दिया गया है कि दिल्ली व उस के सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ पुलिस सघन अभियान चलाए,  दिल्ली व एनसीआर की कोयला और बॉयोमास से चलने वाली तमाम औद्योगिक इकाइयों को बंद रखा जाए. बीते दिनों से दिल्ली का प्रदूषण स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. पीएम 2.5 का स्तर 300 माइक्रो ग्राम क्यूबीक मीटर (एमजीसीएम) से ज्यादा और पीएम 10 का स्तर 500 एमजीसीएम से ज्यादा पहुंच गया है. सभी निकायों और संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी खुले में कचरा जलाता हुआ

सीपीसीबी की सलाह

सीपीसीबी ने दिल्ली व एनसीआर के निवासियों को सलाह दी है कि वे प्रदूषण के दौरान कम से कम यात्रा करें. अगर इस दौरान यात्रा जरूरी हो तो निजी वाहनों से विशेष कर डीजल वाहन के इस्तेमाल से बचें. जितना संभव हो, सार्वजनिक वाहन का ही प्रयोग करें, जिस से प्रदूषण रोकने में मदद मिलेगी.

मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में प्रदूषण के स्तर में काफी इजाफा हो सकता है.  दिल्ली को इस बढ़ते प्रदूषण से बचाने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी सीपीसीबी ने कड़े कदम उठाने का फैसला लिया है.

सीपीसीबी ने लोगों को सलाह दी है कि अस्थमा के मरीजों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है. अगले 3 से 5 दिन तक प्रदूषण से राहत नहीं मिलेगी. मौसम इस समय काफी ठंडा है. इस की वजह से हालात ज्यादा बिगड़े हुए हैं.

क्यों बढ़ा प्रदूषण का स्तर

प्रदूषण विशेषज्ञों ने बताया कि दिल्ली में एक ही जगह पर प्रदूषित कण जमा होने लगे हैं जिस की वजह से प्रदूषण मौनिटरिंग स्टेशनों में पीएम 2.5और पीएम 10 का स्तर ज्यादा बढ़ रहा है. इस का मुख्य कारण है कि सुबह से ले कर शाम तक हवा सामान्य गति से चल रही है. साथ ही दिल्ली और आसपास के इलाकों में इन दिनों न्यूनतम तापमान भी कम दर्ज किया गया है. इस का अर्थ है कि तापमान कम होने से हवा में जो नमी है उस के साथ प्रदूषित  कण घुल रहे हैं जिस  वजह से प्रदूषण बढ़ रहा है.

 

जानिए कैसे होती है स्मार्टफोन से हमारी ‘नींद हराम’

तकनीक ने हमारे जीवन को काफी बेहतरी दी है. जीवन के कई सवालों के जवाब तकनीक से मिलते हैं. इसी कड़ी में स्मार्टफोन, कंप्यूटर जैसी चीजों ने इंसानी जीवन क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं. जिस हिसाब से लोगों ने इन तकनीक को  हाथो हाथ लिया,  आलम है कि अब ये हमारे जीवन को नकारात्मक ढंग से प्रभावित कर रहे हैं.

हाल ही में हुए एक शोध में ये बात सामने आई कि कंप्यूटर और स्मार्टफोन से निकलने वाली किरणें हमारी सेहत पर बुरा असर डालती हैं. इनसे निकलने वाली आर्टिफीशियल लाइट हमारी नींद पर बुरा असर करती हैं.  जिसके कारण लोगों में अनिद्रा, माइग्रेन जैसी परेशानियां होने लगी हैं. वैज्ञानिकों के इस शोध से इन समस्याओं का इलाज भी संभव है.

शरीर को कैसे प्रभावित करती है आर्टिफीशियल लाइट

शोधकर्ताओं ने इस शोध में पाया कि आंखों की कुछ कोशिकाएं हमारे आसपास की रोशनी को प्रोसेस कर हमारे बौडी क्लौक को फिर से फिर से तय करती हैं. आंखों की ये कोशिकाएं जब देर रात को इन किरणों के संपर्क में आती हैं, हमारा आंतरिक समय चक्र प्रभावित हो जाता है. जिसके कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां पैदा होने लगती हैं.

इस अनुसंधान की मदद से माइग्रेन, अनिद्रा और बौडी क्लौक संबंधी शिकायतों का इलाज किया जा सकता है.

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