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ऐसे पाएं स्ट्रेच मार्क्स से छुटकारा

स्ट्रेच मार्क्स का सबसे बड़ा कारण है स्किन का ओवर स्ट्रेच हो जाना. ये अक्सर प्रेग्नेंसी, बौडी बिल्डिंग, एक्स्ट्रा वेट गेन और कभी – कभार उम्र बढ़ने के साथ भी आ जाते हैं. हालांकि इनसे निजात पाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है. अगर आप भी स्ट्रेच मार्क्स से परेशान हैं और बाजार में मिलने वाली क्रीम को लगालगा कर थक चुकी हैं तो यहां जानें स्ट्रेच मार्क्स के कारण और उससे छुटकारा पाने के कुछ घरेलु उपाए.

कारण

जब कोई महिला गर्भवती होती है या कोई इंसान अचानक मोटा होता है तो हमारी त्‍वचा में भी खिंचाव आने लगता है. ऐसे में त्‍वचा की बाहरी सतह तो खिंच जाती है, लेकिन आंतरिक त्‍वचा इस खिंचाव को लंबे समय तक सह नहीं पाती और इसके अंदर का टिशू टूटता चला जाता है, जिससे त्‍वचा में स्‍ट्रेच मार्क बनते जाता है.

क्या है उपाय

तेल से मालिश करें

एवोकैडो के तेल की कुछ बूंद के साथ जोजोबा, जैतून और बादाम के तेल के साथ छह बूंदें कैमोमाइल तेल की और आठ बूंदें लैवेंडर तेल की मिला ले और इसे लगाये या फिर 4 बड़े चम्मच वर्जिन आयल के साथ चार बड़े चम्मच एलोवेरा और दो चम्मच चीनी को मिलाले और इस मिश्रण को अच्छी तरह मिला लें और इसे रोज नहाने या सोने से पहले लगाये. यह आपकी स्किन के ब्लड सर्क्यलेशन को अच्छा करता है और त्वचा में नमी लाता है

नारियल तेल

कोका बटर को मिश्रित करके इसमें नारियल के तेल को मिलाकार अवन में तब तक रखें जब तक यह पिघल न जाए. इसे अच्छी तरह से घुमाएं और फिर ठंडा होने दें. इसके बाद इस ठंडे मिश्रण को छाती, भुजाओं, हिप्स, टमी और प्रभावित अन्य अंगों पर लगाकर इससे मसाज करें.

फैटी एसिड्स

फैटी एसिड्स को भी अपनी डाइट में जरूर रखें, क्योंकि ये स्ट्रेच मार्क्स को आने से रोकते हैं. वैसे, अगर आप रोजाना के खाने में फैटी एसिड्स, सनफ्लावर और पम्पकिन सीड्स लें, तो स्ट्रेच मार्क्स को काफी हद तक कम कर सकती हैं.

गेनिस्‍टीन

गेनिस्‍टीन ज्यादातर टोफू, सोया दूध, सोया सेम और अन्य सोया उत्पादों में पाया जाता है. जो शरीर में कोलेजन के उत्पादन को बढ़ता है. यह त्वचा के एन्जाइम को ठीक करके वापस पहले जैसा कर देता है.

हरी पत्तेदार सब्जी खाएं

हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, सरसों, भिंडी, अजवाइन, सलाद, हरी बीन्स, जैतून कीवी, कच्ची शलजम, अस्पेरगस और ऐवकाडो आदि को आपने आहार में शामिल करे क्यों की यहाँ त्वचा को हाइड्रेट करता है साथ ही झुर्रियां और खिंचाव के निशान को भी काम करती हैं.

विटामिन से भरपूर आहार ले

स्ट्रेच मार्क्स को हटाने के और भी कई तरीके हैं. इनमें हेल्दी डाइट भी शामिल हैं. दरअसल, स्किन के सौफ्ट रहने से स्ट्रेच मार्क्स आसानी से डेवलप नहीं हो पाते. साथ ही, कैफीन लेना अवाइड करें, क्योंकि इससे स्ट्रेच मार्क्स बढ़ते हैं. स्ट्रेच मार्क्स होने का एक बड़ा कारण सही डाइट न लेना भी है. इसके लिए अपनी डाइट में जिंक, प्रोटीन, विटामिन ए, सी और ई शामिल करें.

पानी

त्वचा में होने वाली विकृति से निपटने के सबसे आसान तरीकों में एक है पानी. पानी हमारी त्वचा को हाइड्रेटेड और स्वस्थ रखता हैं. यह हमारी त्वचा को नमी देता है और लचीला बनाता हैं. यह त्वचा को ड्राई नहीं होने देता है. अत: गर्भावस्था के दौरान कम से कम आठ से दस गिलास पानी पीना चाहिए.

ब्राउन स्पाट से छुटकारा पाने के आसान उपाय

ब्राउन स्पाट का चेहरे पर उभरना किसी भी महिला की खूबसूरती को प्रभावित कर सकता है. अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो आइए हम आपको बताते हैं कुछ घरेलू उपाय और स्किन केयर टिप्स, जिससे आप चेहरे के ब्राउन स्पाट और काले धब्बे से प्राकृतिक रूप से छुटकारा पा सकती हैं.

नींबू का रस

चेहरे पर होने वाले ब्राउन स्पाट के लिए आप नींबू के रस का इस्तेमाल कर सकती हैं. दरअसल नींबू का रस ब्राउन एज स्पाट, झाई और फ्रेकल से निजात दिलाने का बेहद असरकारी उपाय है. आप रूई से इसे ब्राउन स्पाट पर लगाएं और 15 मिनट बाद चेहरा धो लें. इससे डार्क स्पाट धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा. साथ ही ब्लैक स्किन का रंग भी प्राकृतिक रूप से हल्का होने लगेगा.

टमाटर का रस

नींबू के रस और टमाटर के रस का मिश्रण हर दिन लगाने से भी चेहरे के दाग-धब्बे, डार्क स्किन, फ्रेकल और डार्क पिग्मेंटेशन से छुटकारा मिलता है. चेहरे के ब्राउन स्पाट को हटाने में यह काफी प्रभावी तरीके से काम करता है.

प्‍याज का रस

एक चम्मच प्याज के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर दाग-धब्बों पर 15 मिनट तक लगाएं. ब्राउन एज स्पाट से जल्दी निजात दिलाने में यह एक बेहतरीन घरेलू उपाय है.

दूध और क्रीम

चेहरे के ब्राउन स्पाट से छुटकारा पाने के लिए आप फटे हुए दूध, क्रीम और शहद का एक मास्क तैयार कर सकती हैं. इसे चेहरे, गर्दन, हाथ और पैर में लगाएं. यह डार्क स्पाट और ब्राउन एज स्पाट से प्राकृतिक रूप से निजात दिलाने का एक प्रभावी जरिया है.

संतरे का रस

अजवायन के रस के साथ बराबर मात्रा में नींबू के रस, करंट (लाल व काले रंग की बैरी) के रस और संतरे के रस को मिला लें. अब इस मिश्रण को चेहरे और गले पर मौजूद ब्राउन स्पाट पर लगाएं और 30 मिनट बाद चेहरा धो लें. ब्राउन स्पाट, एज स्पाट और फ्रेकल से छुटाकारा पाने का यह एक अच्छा घरेलू नुस्खा है.

पीला सरसों

डार्क स्पाट से छुटकारा पाने का एक और प्रभावी तरीका यह है कि चेहरे पर पीले सरसों का लेप लगाएं. इसके लिए पीले सरसों को पीस लें और उसे दूध में मिलाकर फेसियल मास्क बनाएं. अब इसे चेहरे के ब्राउन स्पाट पर लगाएं और इसे 20 मिनट तक रहने दें.

चंदन की लकड़ी

चेहरे, गले और हाथों के ब्राउन स्पाट से छुटकारा पाने के लिए घरेलू स्क्रब भी काफी फायदेमंद होता है. फेसियल स्क्रब बनाने के लिए लाल और सफेद सैंडलवुड (चंदन की लकड़ी) का एक कप पाउडर, आधा कप ओट्मील और थोड़े से दूध व गुलाब जल को आपस में मिला लें. सप्ताह में तीन बार उस जगह पर स्क्रब करें, जहां पर स्पाट है. धीरे-धीरे चेहरे, गले और हाथ का डार्क व ब्राउन स्पाट हल्का पड़ने लगेगा.

चेहरे के डार्क स्पाट, लीवर स्पाट, सन स्पाट और अन्य दूसरे दाग-धब्बे को हटाने में चंदन की लकड़ी का पाउडर और पानी का मिश्रण भी काफी असरकारी होता है.

आलू

कच्चे आलू का रस भी चेहरे के डार्क स्पाट को प्राकृतिक तौर पर खत्म करता है. आलू के रस को प्रभावित जगह पर लगाएं और 15-20 के लिए छोड़ दें.

एलोवेरा

अपने चेहरे के दाग-धब्बों को हटाने के लिए आप एलोवेरा की भी मदद ले सकती हैं. ताजे एलोवेरा के रस को दिन में दो बार डार्क स्पाट पर लगाएं. यह सिलसिला तब तक जारी रखें जब तक आपको परिणाम दिखाई न देने लगे. ब्राउन स्पाट को हटाने में यह घरेलू नुस्खा काफी कारगर है.

एक चौथाई कप दही में एक-एक चम्मच नींबू का रस, एलोवेरा का रस और सिरका मिलाकर मिश्रण तैयार करें. इसे चेहरे के ब्राउन स्पाट पर लगाएं और 30 मिनट बाद चेहरे को धो लें. इससे चेहरे के ब्राउन स्पाट और त्वचा के सन स्पाट धीरे-धीरे हल्के पड़ने लगेंगे.

विटामिन ई तेल

डार्क स्पाट से निजात पाने के लिए आप कुछ विटामिन ई तेल को भी चेहरे पर लगा सकते हैं. डार्क स्पाट के रंग को हल्का करने के लिए विटामिन ई तेल से मसाज करें. यह नेचुरल ट्रीटमेंट चेहरे के कील-मुहांसे, एज स्पाट, लीवर स्पाट और ब्राउन स्पाट को हटाने में काफी उपयोगी है.

स्किन को सूरज की रोशनी से बचाएं

ब्राउन स्पाट का मुख्य कारण सूरज की अल्ट्रावाइलेट किरणों हैं. इसलिए बेहतर होगा कि अपने स्किन को सूरज की रोशनी से बचाएं. जब धूप काफी तेज हो तो बाहर निकलने से पहले संसक्रीन लोशन जरूर लगाएं.

मंदिर प्रवेश नहीं, धर्म की बेड़ियां तोड़ने का साहस करो कनकदुर्गा

केरल के विवादित सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने वाली कनकदुर्गा अब घर, परिवार और समाज की प्रताड़ना का शिकार हो रही है. कनकदुर्गा के लिए सभी ने अपनेअपने दरवाजे बंद कर लिए हैं. उसे पति ने घर से निकाल दिया है. भाई ने कहा है कि उन्होंने भी बहन से रिश्तानाता तोड़ लिया है. इस से पहले कनकदुर्गा मंदिर प्रवेश के बाद जब घर पहुंची थीं तो सास ने उसे मारापीटा. उसे अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा.

मंदिर प्रवेश के ‘पाप’ में 39 वर्षीय दो बच्चों की मां कनकदुर्गा अब ससुराल, पीहर और समाज से बहिष्कृत हो कर दरबदर हो गई है. वह पुलिस की सुरक्षा में सरकारी शेल्टर होम में रह रही है. सुप्रीम कोर्ट ने कनकदुर्गा को फुल टाइम सुरक्षा देने का पुलिस को आदेश दिया है.

सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की पाबंदी थी पर सुप्रीम कोर्ट ने 20 सितंबर को सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश के पक्ष में फैसला सुनाया था.

अदालत से महिलाओं को प्रवेश की इजाजत मिलने के बाद तमाम हिंदू संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया था. इन विरोधों के बावजूद 2 जनवरी को कनकदुर्गा ने बिंदु नामक महिला के साथ सबरीमाला मंदिर में प्रवेश किया था. दोनों महिलाओं के प्रवेश के बाद केरल में भारी हिंसा और विरोध प्रदर्शन हुए.

इन विरोधों के चलते सुरक्षा की दृष्टि से कनकदुर्गा दो सप्ताह तक छुपी रहीं. 15 जनवरी को घर पहुंचीं तो अपने ससुराल वालों से बहस हुई. ससुराल वालों ने उस के मंदिर प्रवेश का विरोध किया और सास ने उसे पीट दिया. जख्मी हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. अस्पताल से छुट्टी के बाद वह घर पहुंचीं तो सास और पति दोनों बच्चों को ले कर घर पर ताला लगा कर चले गए.

घर के दरवाजे बंद देख कर वह पीहर की दहलीज पर पहुंचीं तो भाई भरत ने घर में घुसने से इनकार कर दिया. भार्ई ने कहा कि उस का अब बहन से कोई रिश्ता नहीं है.

परिवार वालों ने कहा है कनकदुर्गा ने समूचे समाज में बेइज्जती करा दी. मंदिर परंपरा को तोड़ दिया. उसे मंदिर प्रवेश के पाप का प्रायश्चित करना होगा. हिंदू समुदाय और अयप्पा के भक्तों से माफी मांगनी होगी.

धर्म, मंदिर के चक्कर में घर उजाड़ चुकी कनकदुर्गा का के साथ इस तरह का व्यवहार कोई ताज्जुब की बात नहीं है. स्त्री कभी स्वतंत्र नहीं रही. उसे स्वतंत्र फैसले करने का कोई अधिकार नहीं रहा. वह सदियों से धर्म की गुलाम बना कर रखी गई. इस बात की धर्म की किताबें गवाह हैं. सीता को न केवल अग्निपरीक्षा देनी पड़ी, गर्भावस्था में पति राम द्वारा घर से निकाल दिया गया था. औरों के कहने पर तरहतरह के तानें दे कर घरपरिवार से जुदा कर दिया गया. आखिर उसे धरती के अंदर समा जाना पड़ा.

नारी को ले कर भारतीय संस्कृति की महानता के खूब गीत गाए गए हैं. नारी पूजन की संस्कृति का गुणगान भरा पड़ा है. धार्मिक प्रवचनों में, पन्नों में नारी सम्मान पर बड़ीबड़ी बातें कही गई हैं. भारतीय संस्कृति में ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमंते तत्र देवता’ जैसे कई जुमले हैं पर असल व्यवहार में नारी आज भी नरक का द्वार, पाप की गठरी और पैर की जूती ही समझी जाती हैं.

कनकदुर्गा के साथ यह बर्ताव नारी को उस की हद में रहने की चेतावनी है. यह बताता है कि स्त्री आज भी स्वतंत्र नहीं है. उसे पति, परिवार, समाज जो कहे, उसी के अनुसार  करना है. वह अपनी मर्जी की मालकिन कभी नहीं हो सकती.

कनकदुर्गा जिस धर्म, जिस मंदिर प्रवेश के लिए जिद कर रही थी, वही उस की दशा के जिम्मेदार है. वह क्यों धर्म के उस दलदल की ओर जा रही हैं जिस में पड़ी रह कर सैंकड़ों सालों से स्त्री कराहती आई है. सदियों पुरानी जिस धार्मिक, सामाजिक व्यवस्था ने उस जैसी औरतों को गुलाम, बंदी, दासी बना रखा है वह मंदिर प्रवेश उसी सड़ीगली व्यवस्था का ही एक द्वार है.

कनकदुर्गा समाज की नजर में तुम नरक का द्वार हो. उस के लिए नारी की मुक्ति का द्वार केवल पुरुष की सेवा करना है. धर्म जो कहे उसी के अनुरूप उसे चलना है. उस रास्ते से डिगी कि समाज, परिवार निगल लेगा. धर्म ने तुम्हारे लिए जो लक्ष्मण रेखा खींच रखी हैं, उसी की जद में रहो. अपनी औकात से बाहर निकलोगी तो कनकदुर्गा बना दी जाओगी.

कनकदुर्गा, तुम्हारा कल्याण मंदिर प्रवेश से नहीं, धर्म के दलदल से बाहर निकलने से होगा. धर्म तो स्त्री की तरक्की में बेड़िया हैं. धर्म की बेड़ियों को ओढ़ने का नहीं, तोड़ने का साहस करो, कनकदुर्गा. यही स्त्री का असली मुक्ति द्वार है.

नोट : कितनी महिलाएं कनकदुर्गा के साथ हैं? कमेंट बौक्स में कमेंट कर हमें बताएं.

सुबह सवा चार बजे होगा ‘ठाकरे’ का पहला शो

बौलीवुड में लगातार हो रही फिल्मों की असफलता से हर फिल्मकार हैरान परेशान घूम रहा है. अब हर फिल्मकार अपनी फिल्मों को  सफल बनाने के लिए नए नए टोटके आजमाने के साथ ही ज्योतिषियों से मुहूर्त पूछ कर अपनी फिल्म को सिनेमाघरों में प्रदर्शित कर रहे हैं. वैसे सूत्र दावा कर रहे हैं कि अब तक इसका फायदा किसी को नही मिला. कुछ समय पहले दिवाली के समय ‘‘यशराज फिल्मस’’ ने अपनी फिल्म ‘‘ठग्स आफ हिंदोस्तान’’ का दिवाली की रात सवा एक बजे पहला शो किया था, इसके बावजूद इस फिल्म को बाक्स आफिस पर सफलता नहीं मिली थी.

अब शिवसेना प्रमुख रहे बाला साहेब ठाकरे की बायोपिक फिल्म ‘‘ठाकरे’’ भी रात में प्रदर्शित होगी. संजय राउत निर्मित फिल्म ‘‘ठाकरे’’ शुक्रवार 25 जनवरी को प्रदर्शित होने वाली है. मगर इसका पहला शो रात में शुक्रवार, 25 जनवरी की रात/सुबह सवा चार बजे मुंबई के वड़ाला स्थित कार्निवल आईमैक्स सिनेमाघर में होगा.

सूत्रों का दावा है कि ऐसा ठाकरे परिवार के ज्योतिषी की सलाह पर हो रहा है. मगर कार्निवल आईमैक्स सिनेमा से जुड़े लोग कुछ और ही बयां कर रहे हैं. कार्निवल सिनेमा के अनुसार-‘‘ पूरे महाराष्ट्र में फिल्म ‘ठाकरे’ को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्सुकता है. लोग जल्द से जल्द इस फिल्म को देखना चाहते है. इसी के चलते हमें शुक्रवार, 25 जनवरी की सुबह सवा चार बजे पहला शो रखना पड़ा है. दूसरा शो सुबह सात बजे, तीसरा शो दोपहर साढ़े बारह बजे, चौथा शो शाम छह बजकर पांच मिनट और पांचवा शो रात ग्यारह बजकर 45 मिनट पर  होगा.’’

अब देखना है कि महाराष्ट्र के कितने सिनेमाघर इसी तरह सुबह जल्दी शो रखते हैं और इन्हें कितने दर्शक मिलते हैं.

तो क्या शिवराज सिंह का मजाक उड़ाने गए थे सिंधिया

मध्यप्रदेश की राजनीति का यह वह दौर है जिसमें दोनों प्रमुख दलों के दिग्गज नेता गैरों से कम अपनों से ज्यादा आशंकित हैं और इसकी वजह आकड़ों का वह गणित है जिसका गुणा भाग जरा सा भी गड़बड़ हुआ तो राज्य का पूरा राजनैतिक इतिहास ही बदल जाएगा. 230 विधान सीटों में से 114 कांग्रेस की हैं 109 भाजपा की हैं और 7 अन्य व निर्दलीयों के कब्जे में हैं.  इन सभी ने कांग्रेस को समर्थन दिया हुआ है जिसके चलते कांग्रेस सरकार बना पाई और कमलनाथ मुख्यमंत्री बने. बसपा के 2 और सपा का एक विधायक कांग्रेस के लिए इतना अहम है कि उनका शादी के फूफाओं जैसा ख्याल कांग्रेस रखती है.

इस समीकरण का ज्योतिरादित्य सिंधिया और शिवराज सिंह चौहान की प्रायोजित या इत्तफाकन मुलाकात से गहरा संबंध है जिसने राज्य के राजनैतिक और प्रशासनिक गलियारों में खासा हड़कंप मचा रखा है. हर कोई किसी अनहोनी को लेकर रोमांचित है. हुआ सिर्फ इतना था कि ज्योतिरादित्य सिंधिया खुद शिवराज सिंह से उनके घर जाकर मिले थे और एकांत में कोई आधा घंटे गुफ्तगू की थी.

जाहिर है इन दोनों के बीच बातचीत मौसम के मिजाज या भोपाल के बढ़ते ट्रैफिक को लेकर नहीं हुई होगी तो फिर वो बातचीत क्या थी यह सस्पेंस लोगों को सोने नहीं दे रहा है. इन दोनों के ही नजदीकी समर्थकों तक को मुलाकात की हवा या भनक नहीं थी इसलिए भी यह सस्पेंस पुराने जमाने के जासूसी उपन्यासों जैसा गहराता जा रहा है.

इसलिए अहम है मुलाकात

इसमें कोई शक नहीं कि इस चर्चित मुलाक़ात के अपने अलग माने हैं क्योंकि शिवराज और सिंधिया का बैर जगजाहिर है. विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने प्रचार में नारा दिया था हमारा नेता शिवराज, माफ करो महाराज. महाराज यानि ज्योतिरादित्य सिंधिया जो कभी किसान पुत्र शिवराज को फूटी आंख नहीं सुहाए क्योंकि ग्वालियर चंबल इलाके में सिंधिया की इमेज वाकई महाराजों जैसी है और आभिजात्य लोग उन्हें श्रीमंत कहते हैं.

गौरतलब यह भी है कि कभी सिंधिया खानदान के खिलाफ शिवराज सिंह ने पूरे दिल से जहर सार्वजनिक रूप से उगलते उनके पूर्वजों को गद्दार और अंग्रेजों का साथी कहा था. तब बात थोड़ी नहीं बल्कि बहुत गड़बड़ाई थी क्योंकि ज्योतिरादित्य की दो बुआएं यशोधरा और वसुंधरा राजे भी भाजपा में हैं.  जनसंघ-भाजपा की संस्थापक सदस्य रहीं विजयाराजे सिंधिया की इन बेटियों और ज्योतिरादित्य की बुआओं ने तिलमिलाते गिनाया था कि राजमाता के नाम से मशहूर उनकी मां ने भाजपा को खड़ा करने के लिए अपने जेवरात तक बेच दिये थे और यह भी किया था और वह भी किया था और आज उसी भाजपा का मुख्यमंत्री उनकी मां और पूर्वजों पर इस तरह के नाकाबिले बर्दाश्त आरोप लगा रहा है.

तब मामला आरएसएस के हस्तक्षेप से सुलझा था और तय यह हुआ था कि शिवराज सिंह फिर कभी इस तरह की बात नहीं करेंगे और सिंधिया बहनें इस बात को तूल नहीं देंगी. इन दोनों बहनों ने तो इस समझौते का पालन किया लेकिन ज्योतिरादित्य नहीं भूले और जवाब में उन्होंने 2 अहम उपचुनावों में पूरा जोर लगाकर अपने इलाके में भाजपा को जीतने नहीं दिया खासतौर से अशोकनगर में जहां शिवराज सिंह ने एडी चोटी का जोर लगा दिया था. एक तरह से सिंधिया यह साबित करने में कामयाब रहे थे कि शिवराज सिंह की हैसियत उनके आगे कुछ नहीं है और इस बात को उन्होंने चुनाव के जरिये साबित करना ज्यादा बेहतर समझा.

बात आई गई हो जाती लेकिन विधानसभा चुनावों में जैसे ही ज्योतिरादित्य का नाम भी मुख्यमंत्री पद के लिए कमलनाथ की बराबरी से उछला जिसने शिवराज सिंह के जख्मों पर नमक छिड़कने का ही काम किया. प्रचार के वक्त इस दुश्मनी का रंग और गाढ़ा हुआ जब शिवराज सिंह ने सिंधिया को निशाने पर लेते माफ करो महाराज वाला नारा दिया. इसके बाद भी सिंधिया शिवराज पर भारी पड़े और अपने 20 समर्थकों को जिता ले गए जिनमें से अब 8 मंत्री हैं.

कमलनाथ मुख्यमंत्री बन गए तो शिवराज सिंह ने मीलों लंबी सांस चैन की ली लेकिन उनकी दुश्वारियां कम नहीं हुई. भाजपा की ब्राह्मण लौबी ने उन्हें न तो नेता प्रतिपक्ष बनने दिया और न ही उनके मन की बात आलाकमान ने सुनी, इसके बाद भी अपनी भूतपूर्व लोकप्रियता के दम पर वे कांग्रेस सरकार के विरोध में कोई ढील नहीं बरत रहे तो इसे उनका जुझारूपन ही कहा जाएगा. प्रदेश की राजनीति आरोप प्रत्यारोपों के ढर्रे पर आ गई तो लोगों को भी समझ आ गया कि अब 5 साल यह तमाशा चलता रहेगा और शिवराज–सिंधिया का बैर अपनी जगह कायम रहते लोकसभा चुनाव में फिर दिखेगा .

ऐसे में जैसे ही यह मुलाकात हुई तो चौराहों पर चौपालों लगाने वालों ने ये कयास लगाए जो एक स्वाभाविक बात थी–

1 – ज्योतिरादित्य सिंधिया मुख्यमंत्री न बनाए जाने से दुखी हैं और भाजपा खेमे में जाकर मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं. वे अगर अपने 20 समर्थक लेकर भाजपा में गए तो उन्हें मुख्यमंत्री बनाने में भाजपा को कोई एतराज नहीं होगा, उल्टे खुशी ही होगी क्योंकि फिर लोकसभा चुनाव में उसे खास मशक्कत नहीं करना पड़ेगी.

2 – सिंधिया खुद मुख्यमंत्री बनकर अपनी इमेज नहीं बिगाड़ना चाहेंगे इसलिए अपने खेमे के कुछ विधायक भाजपा भेजकर शिवराज सिंह को मुख्यमंत्री बनवा देंगे.

3 – नहीं, ऐसा नहीं है क्योंकि वे राहुल गांधी के खासमखास हैं और शिवराज सिंह से इसलिए मिले थे कि वे अपने खेमे के कुछ विधायक कांग्रेस को दे दें जिससे सरकार गिरने का हर कभी का डर खत्म हो.

4 – वे शिवराज सिंह को कांग्रेस में लाने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि उनकी भाजपा में कोई पूछ परख नहीं रही है.

इन बचकानी और अपरिपक्व बातों का अपना अलग महत्व है वजह लोगों को इस नए दोस्ताने के माने समझ नहीं आ रहे हैं. पूछे जाने पर दोनों ही इसे शिष्टाचार वाली मुलाकात बता रहे हैं और ज्योतिरादित्य कह रहे हैं कि वे पुरानी कड़वाहट भूल चुके हैं.

लेकिन नई मिठास क्या है यह वे नहीं बता रहे तो मुमकिन है वे पुरानी बातें याद करते शिवराज सिंह का उतरा चेहरा देखने गए हों कि वह कैसा लगता है. या मुमकिन यह भी है कि वे कांग्रेस के अपने प्रतिद्वंदी दिग्विजय सिंह को चौंकाने गए हों जिनकी शिवराज सिंह से गहरी छनती है.

लेकिन अब उड़ रही अफवाहों से ये दोनों ही परेशान हैं तरह तरह की ऊपर बताई बातें लोग चाय के ठेलों और पान की गुमठियों पर कर रहे हैं और दोनों ही अपनी अपनी पार्टियों के निशाने पर आ गए हैं खासतौर से शिवराज सिंह जिनके विदिशा लोकसभा सीट से लड़ने की बात की जा रही है जो उनकी परंपरागत और घरेलू सीट है. विदिशा में सिंधिया घराने का भी खासा प्रभाव है लेकिन उसका कोई सदस्य यहां से चुनाव नहीं लड़ता क्योंकि यह सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है.

अब यह उम्मीद क्यों न की जाये कि एक तरह से सिंधिया शिवराज को चुनौती दे आए हैं कि आइये विदिशा सीट पर, फिर देखते हैं किसमे कितना है दम.

जानिए बिना दर्द टैटू हटाने के आसान उपाय

आज कल टैटू गुदवाने का चलन इतना चल पड़ा है कि हर दूसरा इंसान आपको टैटू गुदवाए दिख जाएगा. लेकिन कई बार हम एक्‍साइटमेंट में आ कर तमाम दर्द झेल कर टैटू तो बनवा लेते हैं पर बाद में वह हमें अच्छा नहीं लगता. फिर हम जल्द से जल्द उस टैटू से छुटकारा पाने की सोचते हैं. तो अगर अब आप अपने टैटू को देख देख कर बोर हो चुके हैं और उसे अपने शरीर से हटवाना चाहते हैं तो, हम आपकी मदद करेगें. नीचे कुछ ऐसे तरीके दिये हुए हैं, जिससे आप टैटू को बिना दर्द और परेशानी के अपनी त्‍वचा से निकाल सकते हैं. आइये जानते हैं ऐसे ही कुछ तरीकों के बारे में-

टैटू रिमूवल क्रीम : अगर लोगों को लगता है कि लेजर विधि महंगी होगी तो वे टैटू रिमूवल क्रीम का प्रयोग कर सकते हैं. इसे लगातार लगाना होगा जिससे धीरे धीरे टैटू साफ हो जाए. क्रीम खरीदते वक्‍त अच्‍छी क्‍वालिटी का क्रीम ही लें नहीं तो सस्‍ती क्रीम आपकी त्‍वचा पर बुरा प्रभाव डाल सकती है.

तीव्र स्पंदित लाइट थेरेपी : अगर आपको लेजर दृारा टैटू नहीं हटवाना है तो आप इस विधि का प्रयोग कर सकते हैं. इसमें लेजर लाइट की जगह पर उच्‍च तीव्र प्रकाश का प्रयोग किया जाता है. त्‍वचा पर जैल लगा कर बाद में उस पर तीव्र लाइट मारी जाती है और टैटू साफ किया जाता है. लेकिन इस विधि में पैसे बहुत खर्च होते हैं.

क्‍यू स्‍विच्‍ड़ लेजर : यह एक लेजर विधि है जो कि टैटू को हटाने के काम आती है. त्‍वचा पर लाइट की किरण डाल कर टैटू की इंक को खत्‍म किया जाता है. इसमें बिल्‍कुल भी दर्द नहीं होता और साथ ही त्‍वचा पर ना कोई निशान पड़ता है और न ही जलन होती है.

ऐसे करें चेहरे की ब्लीचिंग

क्या आप भी बेदाग और चमकता हुआ चेहरा पाना चाहती हैं ? अगर हां तो ब्लीचिंग आपके लिए एक अच्छा उपाय साबित हो सकता है. यह आपके कम आकर्षित चेहरे से काले धब्बों और झुर्रियों को हटाने में मदद करता है. आज कल बाजार में इतनी तरह कि ब्‍लीचिंग क्रीम और पाउडर उपलब्‍ध हैं पर इन सब के बीच एक सही ब्लीचिंग क्रीम को चुनना ही हमारे लिए एक उलझन बन जाती है.

ब्लीच के 2 प्रकार होते हैं, पाउड़र ब्लीच और क्रीम ब्लीच. अगर ब्‍लीच का इस्तेमाल काले धब्बे और झाइयों को हटाने के लिए किया जाना है, तो ब्लीच को केवल उन काले धब्बों और झाइयों पर ही लगाएं. इसके लिए पाउड़र ब्लीच का उपयोग करें. अगर त्वचा को और चमकदार बनाना हो तो क्रीम ब्लीच का इस्तेमाल करें, ताकि आप इसे अपने पूरे चेहरे पर अच्छी तरह से लगा सकें. ब्लीचिंग को लंबे समय के लिए ना करें. घर की बनी ब्लीच, रासायनिक प्रदार्थों से बनी ब्लीचों से कई गुणा बेहतर हैं.

नींबू और शहद से बनी ब्लीच

सामग्री: 1 चम्मच शहद, 11/2 चम्मच क्रीम, 1 चम्मच नींबू का रस.

विधि: ऊपर दी गई सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं. सुखने के बाद चेहरे को गुनगुने पानी से धोलें.

हल्‍दी और गुलाब जल

सामग्री: एक चुटकी हल्दी, नींबू के रस की कुछ बूंदें, गुलाब के रस की कुछ बूंदें.

विधि: ऊपर दी गई सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं. सुखने के बाद चेहरे को गुनगुने पानी से धोलें.

दूध और नींबू

सामग्री: 2 चम्मच दूध, 1 चम्मच नींबू का रस.

विधि: सारी सामग्री को मिलाकर, एक पेस्ट के रुप में तैयार करलें, इस पेस्ट को धीरे से अपने चेहरे पर मलें. सुखने के बाद चेहरे को गुनगुने पानी से धोलें.

चंदन और टमाटर

सामग्री: 2 चम्मच चंदन का पाउडर, 2 चम्मच नींबू का रस, 2 चम्मच खीरे का रस, 1 चम्मच टमाटर का रस.

विधि: ऊपर दी गई सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं. सुखने के बाद चेहरे को गुनगुने पानी से धोलें.

मैंगो सालसा रेसिपी

सामग्री

–  अलफान्सो आम (१/२ कप कटे हुए)

– कटे हुए टमाटर (३/४ कप)

– नमक (स्वादानुसार)

– हरी प्याज़ का सफेद भाग (२ टेबल-स्पून कटा हुआ)

–  अजमोद (१ टेबल-स्पून कटा हुआ)

– शिमला मिर्च(१ टेबल-स्पून कटी हुई)

– सूखी लाल मिर्च के फ्लैक्स् (१/२ टी-स्पून)

– सूखा औरेगानो (१/२ टी-स्पून)

परोसने के लिए

नाचो चिप्स्

बनाने की विधि

– आम और टमाटर को एक बाउल में मिलाकर, चम्मच के पिछले भाग से हल्का मसल लें.

–  हुई सभी सामग्री डालकर अच्छी तरह मिला लें .

– और कम से कम 2 घंटे के लिए फ्रिज में रख दें.

–  नाचो चिप्स् के साथ ठंडा परोसें.

चने और दही की सब्जी

सामग्री

– १ कप भिगोए हुए काले चने

– १/२ टी-स्पून ज़ीरा

– १/४ टी-स्पून सरसों

– २ तेजपत्ते

– २ सूखी कश्मीरी लाल मिर्च

– चुटकी भर हींग

– १ टी-स्पून अदरक

–  हरी मिर्च की पेस्ट

– १ टी-स्पून लाल मिर्च का पाउडर

– १/४ टी-स्पून हल्दी पाउडर

– १ कप दही

– ३ टेबल-स्पून बेसन

– ४ टेबल-स्पून कटा हुआ धनिया

– २ टेबल-स्पून तेल

– नमक  (स्वादानुसार)

बनाने की विधि

– एक प्रेशर कुकर में तेल गरम कीजिए और उसमें ज़ीरा, सरसों, तेजपत्ता, लाल मिर्च और हींग डालिए.

– जब जीरा चटकने लगे, तब उसमें काला चना, अदरक-हरी मिर्च की पेस्ट, लाल मिर्च का पाउडर, हल्दी   पाउडर और नमक के साथ २ कप पानी डालिए.

– चना दाल के पक जाने तक या प्रेशर कूकर की ३ सीटी बजने तक कुकर में पका लीजिए.

– ढ़क्कन खोलने से पहले सारी भाप निकल जाने दीजिए.

– दही और बेसन के मिश्रण को अच्छी तरह से मिलाकर पकाये हुए चने में डालकर ४ से ५ मिनट के लिए      उबाल लीजिए.

– मिश्रण को लगातार हिलाते हुए पकाइए नहीं तो बेसन और दही अलग हो सकते हैं.

– धनिए से सजाकर गरमा गरम परोसिए.

सुझाव

चना की जगह आप चावली का भी उपयोग कर सकते हैं.

जब आंखों के आस पास की त्वचा सूज सी जाए…

कई बार सुबह उठने पर आंखों के आस पास की त्‍वचा सूज सी जाती है और देखने में बहुत ही खराब लगती है. जब आंखें थकी हुई होती है या फिर हम ज्यादा तनाव में रहते हैं तो ऐसा होता है. ऐसे में आप बहुत सारे घरेलू उपाय अपना कर इस समस्या में राहत पा सकती हैं.

ठंडा टी बैग

अगर आप जल्‍दी में हैं और आपके पास स्‍लाइस काटने का टाइम नहीं है तो, टी बैग को पानी में भिगो कर तुरंत फ्रिज में रख दें. 2 मिनट के बाद निकाल कर उसे 20 से 25 मिनट तक आंखों पर रखें और लेट जाएं. उसके बाद जब उठें तब अपने चेहरे को ठंडे पानी से धो लें.

बर्फ वाला चम्‍मच

एक गिलास में कुछ बर्फ के टुकड़े डालें और उसमें 4 चम्‍मच डाल कर रखें. 2 चम्‍मच निकाल कर अपनी दोनों आंखों पर रखें उसके बाद जब दोनों चम्‍मच गरम हो जाएं तब गिलास में रखें अन्‍य दो चम्‍मच का प्रयोग करें. जब तक आंखों की सूजन खतम न हो जाए तब तक चम्‍मच बदल बदल कर प्रयोग करती रहें

आलू

आलू के गोल स्‍लाइस काट लीजिये और इन्‍हें अपनी आंखों पर रख लीजिये, ध्‍यान से आंखों की सूजन को आलू की स्‍लाइस से कवर कर लें. इसे 15 से 20 मिनट तक रखने के बाद खुद ही देख सकती हैं कि कैसे आंखों की सूजन गायब हो गई.

दूध

ठंडे दूध में कौटन के टुकड़ों को डुबो कर अपनी पलकों पर करीबन 20 से 30 मिनट तक के लिये रखे रहें. इससे आंखों की सूजन अपने आप ही काफी हद तक कम हो जाएगी.

खीरा

ठंडे खीरे के पतले स्‍लाइस करें और उसे अपनी दोनों आंखों पर 25 मिनट तक के लिये रखें.

अंडे का सफेद भाग

एक ब्रश की सहायता से अंडे का सफेद भाग ले कर आंखों के आस पास लगाएं. ऐसा करने से आंखों के आस पास की त्‍वचा टाइट हो जाएगी और सूजन कम नजर आएगी. इसको 20 मिनट तक लगा रहने दें और बाद में ठंडे पानी से चेहरा धो लें.

तेल

ठंडा पानी लें और उसमें कुछ बूंदे विटामिन ‘ई’ के तेल की डालें और फिर उसमें कौटन के टुकड़े डाल कर भिगोएं और इसे अपनी बंद आंखों पर 20 मिनट के लिये रखें.

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