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आतंकी वारदात

संपादकीय मोदी सरकार को एक और झटका लगा जब ऐन चुनावों से पहले कश्मीर में आतंकवादियों ने जम्मू से श्रीनगर जा रहे सीआरपीएफ की बसों के काफिले पर आत्मघाती हमला कर के 40 जवानों को शहीद कर दिया. एक मारुति ईको वैन में 70 किलोग्राम विस्फोटक पदार्थ भरा गया और यह 78 वाहनों के बीच आ गई और फिर उस को उड़ा दिया गया जिस से 2 बसों में सवार सैनिकों में से 40 की तुरंत मुत्यु हो गई.

पुलवामा के आदिल अहमद डार ने हमले को अंजाम दिया. बाद में सोशल मीडिया पर उस का मैसेज वायरल हुआ जो घटना से कुछ दिनों पहले रिकौर्ड किया गया था. पाकिस्तान से संचालित किए जा रहे जैश ए मोहम्मद ने भी दावा किया कि उस ने हमला करवाया.

दिल दहलाने वाले इस हत्याकांड ने फिर जगजाहिर कर दिया है कि भारतीय जनता पार्टी और महबूबा मुफ्ती की साझी सरकार का आतंकवादियों पर कोई असर नहीं पड़ा है और वे अपना अलगाववाद किसी भी सूरत में छोड़ने को तैयार नहीं.

इस तरह की आतंकवादी घटना का हो जाना देश की गुप्तचर संस्थाओं के निकम्मेपन की पोल खोलता है क्योंकि यह कांड बिना पूर्व योजना के नहीं किया जा सकता है. इस के लिए लंबी प्लानिंग चाहिए होती है और इतने सारे वाहन किस समय कहां होंगे, यह पता होना जरूरी है. हमारी गुप्तचर संस्थाएं यदि यह सूंघ नहीं पाईं तो बेहद अफसोस की बात है.

कश्मीर में ही नहीं, देश के कई हिस्सों में आतंकवादियों के हौसले ऐसी करतूतों के सफल हो जाने से बुलंद हो जाते हैं. पंजाब में छिटपुट सुरसुराहाट शुरू हो गई है. छत्तीसगढ़ में माओवादी चुप नहीं हैं. उत्तरपूर्व में प्रस्तावित नागरिक कानून के कारण बेहद नाराजगी है. कश्मीर में हमारी सुरक्षाव्यवस्था में साफ दिखता क्रैक इन सब के हौसले मजबूत करता है.

कहने को तो केंद्र में हमारे पास एक मजबूत सरकार है पर जब सारे फैसलों के लिए केवल एक ही शख्स अधिकृत हो तो परेशानियां हो सकती हैं. भाजपा अगर महबूबा मुफ्ती के मारफत जम्मूकश्मीर पर ले दे कर फैसले करने के मूड में होती तो शायद शांति का कुछ माहौल बनता पर दोनों कट्टरवादियों ने अपनेअपने स्टैंड पर अड़े रह कर अलगाववादी आतंकवादियों को भरपूर मसाला दे दिया. आम कश्मीरी को यह भरोसा नहीं हो पा रहा है कि उस का विकास तो भारत के साथ ही होना है.

धर्म के नाम पर उसे अलग करने की छूट मिली हुई है क्योंकि दिल्ली में बैठी केंद्र सरकार खुद ही हर समय धर्म का आलाप करती रहती है. जब नागरिकता कानून में धर्म को आधार बनाया जा सकता है तो कश्मीरियों को कैसे समझाएंगे कि अल्पसंख्यक हो कर भी वे भारत में कहीं ज्यादा सुखी रहेंगे. कुछ बिगड़ैल सिरफिरे तो अति कराएंगे ही, जैसे मैदानी इलाकों में गौरक्षकों से कराई जाती है.

वार पर वार (आखिरी भाग)

पिछले अंकों में आप ने पढ़ा था : सरकारी नौकरी कर रही नमिता का बौस भूषण राज उसे पाना चाहता था. नमिता ने यह बात अपनी एक साथी प्रीति को बताई तो वह नमिता से बोली कि तुम्हें भी रुपएपैसे के साथसाथ जवानी का मजा उठाना चाहिए. यह सुन कर नमिता हैरान रह गई, लेकिन फिर नमिता ने सोचा कि क्यों न वह अपना ट्रांसफर कहीं और करा ले, पर इस बारे में भी भूषण राज को पता चल गया और मामला बिगड़ गया. अब पढि़ए आगे…

प्रीति आगे बोली, ‘‘अगर तुम्हारी नौकरी बनी रहेगी तो सारी सुखसुविधाएं तुम्हारे कदमों में बिछी रहेंगी. तुम्हारी सारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा. अच्छे घर में शादी हो जाएगी. और क्या चाहिए तुम्हें?’’

नमिता की समझ में नहीं आया कि वह अपनी नौकरी कैसे बचा सकती थी? लेकिन पूछा नहीं… प्रीति खुद ही बताने लगी, ‘‘तुम नौकरी छोड़ दोगी तो दूसरी नौकरी जल्दी कहां मिलेगी? वह भी सरकारी नौकरी… प्राइवेट नौकरी भले ही मिल जाए.

‘‘पर, हर जगह एक ही से हालात हैं नमिता. इनसानरूपी मगरमच्छ हर जगह मुंह खोले जवान लड़कियों को निगलने के लिए तैयार रहते हैं. समझौता कर लो. किसी को पता भी नहीं चलेगा. सुख तुम्हारी झोली में भर जाएंगे और नौकरी भी बची रहेगी.’’

नमिता का शक सच में बदल गया. कई बार उसे लगता था कि प्रीति उसे किसी न किसी जाल में फंसाएगी… वह बौस भूषण राज की दलाल थी.

उस ने प्रीति को गौर से देखा, तो वह हलके से मुसकराई. प्रीति बोली, ‘‘तुम अपने मन में कोई शक मत पालो. उस से तुम्हारी समस्या का समाधान नहीं होगा.

तुम मुझे भले ही बुरा समझो, पर इस में तुम्हारी ही भलाई है. सोचो, खूबसूरती और जवानी का क्या इस्तेमाल…?’’

नमिता अच्छी तरह समझ गई थी कि इस दुनिया में मर्द ही नहीं, बल्कि औरतें भी एकदूसरे की दुश्मन होती हैं. औरतें कब नागिन बन कर किसी को डस लें, पता ही नहीं चलता. उस ने एक कठोर फैसला किया.

प्रीति अभी तक नमिता के दिमाग की सफाई करने में जुटी हुई थी, ‘‘औरत और मर्द के संबंध में किसी का कुछ नहीं बिगड़ता, पर सुख दोनों को मिलता है… तुम ठीक से समझ रही हो न? जा कर एक बार बौस से माफी मांग लो. वे जैसा कहें, कर दो.’’

अब नमिता को किसी और प्रवचन की जरूरत नहीं थी. वह झटके से उठी और धीरेधीरे कदमों से बौस भूषण राज के चैंबर में चली गई. आज न तो उस के मन में डर था, न वह कांप रही थी. उस की आंखें भी झुकी हुई नहीं थीं. वह भूषण राज की आंखों में आंखें डाल कर देख रही थी.

पहले तो भूषण राज चौंका, फिर कुरसी से उठ कर बोला, ‘‘आओआओ, निम्मी. कैसी हो?’’ उस के मुंह से लार टपकने लगी थी.

‘‘मैं ठीक हूं सर…’’ नमिता ने सपाट लहजे में कहा, ‘‘मैं आप से माफी मांगने आई हूं, उस सब के लिए, जो अभी

तक हुआ है और उस सब के लिए, जो अभी तक नहीं हुआ, पर कभी भी हो सकता है.’’

नमिता का अंदाज ऐसा था, जैसे वह कह रही हो, ‘भूषण साहब, मैं आप को देखने आई हूं कि कितने खूंख्वार भेडि़ए हैं आप. किसी तरह आप औरत के शरीर को खाते हैं, नोंच कर या पूरा… चलिए दिखाइए अपनी ताकत.’

भेडि़ए की खुशी का ठिकाना न रहा. शिकार अपनेआप उस के जाल में फंस गया था. वह अपनी जगह से उठा और इस तरह अंगड़ाई ली, जैसे वह अच्छी तरह जानता था कि अब शिकार उस के पंजे से बच कर कहीं नहीं जा सकता. उसे अपनी चालों पर पूरा भरोसा था. वह धीरेधीरे मुसकराते हुए आगे बढ़ रहा था.

भेड़ को डर नहीं लग रहा था. वह सीधे तन कर खड़ी थी. भेडि़या नजदीक आ गया था, वह फिर भी नहीं डरी.

भेडि़या थोड़ा सहमा… इस भेड़ को आज क्या हो गया. वह उस के भयानक मुंह के तीखे दांतों और नुकीले पंजों से भी नहीं डर रही थी.

भेडि़या भेड़ को जिंदा निगलने की जल्दबाजी में था. भेड़ अगर तन कर खड़ी रही, उस से डर कर भागी नहीं, तो फिर शिकार करने का फायदा क्या?

भेडि़ए ने अपने नुकीले पंजे भेड़ के कंधे पर रखे और दर्दनाक हालत तक उस के नरम गोश्त में चुभाया, पर भेडि़ए को भेड़ के कंधे पत्थर के लगे. उस ने अपना चेहरा भेड़ के खूबसूरत लपलपाते चेहरे की तरफ बढ़ाया तो उसे लगा जैसे वह एक आग का गोला निगल रहा हो.

नमिता ने बालों को मादक झटका दे कर और छातियों को हलका उभार देते हुए कहा, ‘‘शाम को 7 बजे घर पर आइएगा. घर पर और कोई नहीं है. बस, मैं, आप और पूरी रात.’’

भूषण राज भौचक्का रह गया, पर उस का विवेक तो मर चुका था. वह समझ नहीं सकता था कि ऐसी लड़की जो इतने दिन से उस के हर प्रस्ताव को ठुकरा रही थी, अचानक कैसे बदल गई.

भूषण राज ने दिन कैसे बिताया, यह बताना आसान नहीं, पर नमिता आधे दिन की छुट्टी ले कर यह कह कर चली गई थी कि घर को ठीक करना है.

शाम 6 बजे से ही भूषण राज को बेचैनी होने लगी थी. फिर भी उस ने 7 बजाए. औफिस में नहाया, कपड़ों की 1-2 जोड़ी वह हमेशा अपनी दराज में रखता था. पत्नी को कहा कि देर रात तक मीटिंग चलेगी, वह सो जाए.

शबाब मिल रहा था तो शराब भी होनी चाहिए. 2 बोतलें खरीदीं. शायद नमिता भी पी ले तो रात पूरी मस्त हो जाए.

भूषण राज नमिता के बताए पते पर पहुंचा तो थोड़ा मन खट्टा हुआ. बेहद मिडिल क्लास इलाका था. छोटे मैले मकानों में एक संकरे जीने पर चढ़ कर पुराने से दरवाजे को खटखटाया.

दरवाजा नमिता ने ही खोला था. वह पूरी तरह सजीधजी थी. बढि़या मेकअप. पोशाक जो उस के बदन को ढक कम रही थी, दिखा ज्यादा रही थी. घर में खुशबू फैली थी. रोशनी केवल मोमबत्तियों की थी या 2 टेबल लैंपों की.

नमिता ने उसे बांहों में जकड़ लिया. इसी का तो इंतजार वह महीनों से कर रहा था.

‘‘आज तो बड़े स्मार्ट लग रहे हो सर,’’ कहते हुए वह उसे सोफे पर ले गई. सामने मेज पर खाने का सामान और कई गिलास थे. शायद नमिता जान गई थी, भूषण राज क्या चीज है. उस ने उस के हाथ से बोतलें लीं और कहा कि लाइए, इन्हें मैं फ्रिज में रख दूं.

‘यह कबूतरी तो खुद ही शिकारी के तीर तेज कर रही है…’ भूषण राज ने सोचा. उसे अपने पर गर्व हुआ. है ही वह ताकतवर. कौन चिडि़या है जो उस के जाल से निकल सकती है.

नमिता ने सोफे पर बैठा कर कहा, ‘‘सर, आप कपड़े तो उतारिए, मैं अभी आई.’’

भूषण राज तो सब सावधानियां छोड़ कर कपड़े उतारने लगा और सोफे पर आराम से पसर गया. फिर तसल्ली से खाना ठूंसा? नमिता शायद नहा रही थी.

‘आज तो मजा आ जाएगा… ऐसा सुख तो उसे कभी न मिला था.’

तभी दरवाजे पर खटखट हुई. भूषण राज ने सोचा, ‘कौन हो सकता है इस समय? नमिता ने तो कहा था कि वह अकेली है?’

बिना कपड़ों के किसी के घर में आ जाने पर क्या हो सकता है, वह जान सकता था. पर इस से पहले कि वह कुछ कहता, नमिता दूसरे कमरे से तकरीबन भागती हुई आई और दरवाजा खोल डाला.

बाहर पूरा स्टाफ खड़ा था. कुछ लोग कैमरे भी लिए थे.

‘हैप्पी बर्थडे नमिता’ की आवाज गूंजी और 10-15 लोग कमरे में घुस गए.

भूषण राज फटीफटी आंखों से देख रहा था. उस ने अपने कपड़े उठाने चाहे थे कि नमिता ने झपट कर छीन लिए.

उस के बाद बहुतकुछ हुआ. बहुत सारे फोटो ले लिए गए. भूषण राज की पत्नी को बुला लिया गया. नमिता को ट्रांसफर करने का आदेश पास हो गया. छोटे से घर में हंगामा हो गया. नमिता के घर वाले भी उसी समय पहुंच गए थे.

अब नमिता शान से काम कर रही थी उसी दफ्तर में. भूषण राज ने इस्तीफा दे दिया था और वह शहर बदल कर जा चुका था.

नमिता की हिम्मत और आंखों की अनोखी चमक ने भूषण राज के सारे हौसलों को मात कर दिया. उस को अपने जाल में फंसाने के लिए भूषण राज ने न जाने कितने जतन किए थे, पर अब वह उस के फंदे में आ कर फंस गया था.

विटामिन डी की कमी से बुजुर्गों में हो रही ये परेशानी

विटामिन डी अच्छी सेहत के लिए बेहद जरूरी है. इसका प्रमुख स्रोत धूप होती है. जिस तरह की हमारी जीवनशैली हो गई है उसमें बहुत से लोगों को विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहा. ऐसे में उन्हें कई तरह की बीमारियां होने लगी हैं. खास कर के बुजुर्ग इससे बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं.

हाल ही में हुए एक शोध में ये बात स्पष्ट हुई कि विटामिन डी की कमी से बुजुर्गों में अवसाद की शिकायत अधिक हो रही है. सूर्य की किरणों से दूर रहने से उनमें वसाद का खतरा 75 फीसदी बढ़ गया है. आयरलैंड में हुए इस शोध में ये बात सामने आई कि विटामिन की इस कमी से हड्डियां बुरी तरह से प्रभावित हो रही हैं. इसके अलावा अवसाद के लिए भी ये एक प्रमुख कारण है.

आपको बता दें कि बुजुर्गों पर हुए इस शोध में 50 वर्ष से अधिक करीब 4000 लोगों को शामिल किया गया. शोध में बुजुर्गों की जीवनशैली को करीब से जांचा गया. इसमें उनके शारिरीक और मानसिक सेहत का रिकार्ड रखा गया.

चिकन धनसाक

सामग्री:

– 250 ग्राम चिकन

– 15 ग्राम तुअर दाल

– 10 ग्राम मूंग दाल

– 10 ग्राम मसूर दाल

– 1 बड़ा प्याज बारीक कटा

– 1 बड़ा टमाटर बारीक कटा

– थोड़ी सी अदरक कटी

– थोड़ी सी लहसुन कलियां कटी हुई

– 10 ग्राम मेथीपत्ती

– थोड़ी सी पुदीनापत्ती

– थोड़ी सी धनियापत्ती

– 1 बड़ा चम्मच कद्दू कटा

– 1 बड़ा चम्मच बैंगन कटा

– 1 बड़ा चम्मच आलू कटा

– 1 बड़ा चम्मच लौकी कटी

– थोड़ी सी हल्दी पाउडर

– नमक स्वादानुसार

बनाने की विधि

– सभी दालों को आधे घंटे के लिए पानी में भिगो कर रखें.

– चिकन को थोड़े से नमक और गरममसाले के साथ मिला लें.

– एक कुकर में दाल, नमक, पुदीनापत्ती, मेथीपत्ती, धनियापत्ती और सब्जियों को डाल कर 1 सीटी   लगाएं.

– अब एक पैन में घी गरम कर उस में प्याज, लहसुन, अदरक को सुनहरा होने तक फ्राई करें.

– अब टमाटर डाल कर फ्राई करें.

– फिर इस में सौंफ पाउडर, गरममसाला, हलदी और लालमिर्च डाल कर फ्राई करें.

– थोड़ी देर बाद चिकन भी डाल दें और पकने तक फ्राई करें.

– अब दाल के मिश्रण में पका हुआ चिकन और इमली डाल कर उबालें.

– चावल के साथ गरमागरम सर्व करें.

रंग-बिरंगी साड़ियों से लहलहा उठा खेत

तेज धूप किसान की हर दिन मुसीबत बन रही थी. उस की फसल झुलस रही थी. वह बाजार जाता तो ज्यादा भाव सुन कर ही लौट आता. संगीसाथी भी कुछ अच्छी सलाह नहीं दे पाए. पर कुछ बुजुर्ग किसानों ने अपने तजुरबे साझा किए. उस के दिमाग ने भी काम करना बंद सा कर दिया. झुलसती फसल देख वह कुछ कर नहीं पा रहा था. आखिर उस किसान ने फसल को बरबाद होने से बचाने की तरकीब सोची जो कामयाब भी रही.

यह मामला कर्नाटक के हुबली कसबे का है. वहां के एक किसान वेंकटेश बी. को अपनी अनार की फसल को धूप से बचाने का यही कारगर उपाय सूझा और अपने खेत में अपनाया. तरीका था खेत को धूप से बचाने के लिए रंगीन साड़ियों से ढकना. रंगबिरंगी साड़ियों को देख आसपास के लोग भी वहां आ कर सैल्फी लेने लगे. यही सैल्फी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो गई और समूचे इलाके में हैरानी का विषय बन गई.
यहां तक कि कर्नाटक में मुंदरगी और गडग इलाके के बीच सफर करने वालों के लिए अनार का यह खेत सैल्फी पौइंट बन गया. लोग यहां रुक कर सैल्फी क्लिक कर रहे हैं और दूसरे लोगों को ह्वाट्सएप व फेसबुक के जरीए शेयर कर रहे हैं.

दरअसल, किसान वेंकटेश बी. ने तेज धूप से अपनी फसल को बचाने के लिए उसे रंगबिरंगी साड़ियों से ढक दिया. इस से उन का रंगबिरंगा खेत लोगों के बीच खासा लोकप्रिय हो गया है. किसान वेंकटेश बी. ने अपने 10 एकड़ खेत में अनार की खेती की है. इस जमीन को उन्होंने 10 साल के लिए लीज पर लिया हुआ है.

2 बोरवैल की मदद से उन्होंने ड्रिप सिंचाई कर के 10 एकड़ में यह फसल उगाई है. अब जब तापमान ज्यादा हो गया है तो अपनी फसल को बचाने के लिए उन्होंने हर पौधे को साड़ी से और हर फल को अखबार से ढक दिया है. साड़ी व अखबार के अंदर पौधे अच्छी तरह फलफूल रहे हैं.

वेंकटेश बी. ने बताया ”मैं ने अनार के 4,500 पौधे उगाए हैं. बाजार में फसल को ढकने वाला क्लौथ नैट काफी महंगा था और एक क्लौथ नैट से महज 30-40 पौधों को ही ढका जा सकता था जबकि मेरी 10 एकड़ की फसल को ढकने के लिए क्लौथ नैट खरीदने में मुझे तकरीबन सवा लाख रुपए से ज्यादा ही खर्च करने पड़ते.

”क्लौथ नैट केवल एक फसल के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है और मैं उन्हें दोबारा इस्तेमाल नहीं कर सकता था. दूसरे किसानों से बात कर के मैं ने अपने पौधों को साड़ी से ढकने का फैसला किया. इस के बाद उन्होंने पुरानी साड़ियां खरीदीं. एक साड़ी के लिए महज 16 रुपए खर्च किए और कुल 4,500 साडिय़ां खरीदीं.

”मैं ने हर पौधे को ठीक तरीके से कवर करने के लिए हर साड़ी की सिलाई की वहीं फलों को बचाने के लिए उन्हें अखबार से ढका.”

इस तरह किसान वेंकटेश बी. का सपना साकार हो गया. आज वे काफी खुश हैं. उन्होंने कड़ी मेहनत करने के बाद 10-12 लाख की लागत लगा कर 10 एकड़ में यह फसल उगाई है, जिस से उन्हें 55,000 से 60,000 प्रति टन कमाई की उम्मीद है.

मटन करी के करारे जायके

सामग्री:

– 500 ग्राम मटन

– 2 प्याज कटे

–  टमाटर का पेस्ट  (1 बड़ा चम्मच)

– 2 लौंग

–  2 तेजपत्ता

– 100 ग्राम दही

– 1 बड़ा चम्मच सरसों का तेल

–  10 ग्राम सौंफ पाउडर

– एक टुकड़ा अदरक

– 4 लहसुन कलियां

– 1 छोटा चम्मच जीरा पाउडर

– 2 छोटे चम्मच धनिया पाउडर

– 20 ग्राम टमाटर की प्यूरी

– 5 ग्राम लाल मिर्च पाउडर

–  नमक स्वादानुसार

– 1/2 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर

– 1 छोटा चम्मच गरममसाला

– 2-3 केसर के धागे

– गार्निश के लिए धनियापत्ती

बनाने की विधि

– मटन को अच्छी तरह से धो कर दही, नमक और चुटकी भर हल्दी के साथ 2 घंटे के लिए मैरिनेट करें.

– पैन में अब प्याज को सुनहरा होने तक फ्राई कर लें. जब यह ठंडा हो जाए तो अदरक और लहसुन के       साथ  इस का पेस्ट बना लें.

– एक मोटी पेंदी के बरतन में तेल गरम कर लौंग और तेजपत्ता डाल कर मटन फ्राई करें और इसे निकाल   कर अलग रख लें.

– उसी तेल में प्याज, जीरा पाउडर, सौंफ, धनिया पाउडर, गरममसाला, लाल मिर्च पाउडर, नमक, हलदी,      टमाटर का पेस्ट डाल कर फ्राई करें.

– अब मटन डालें और फ्राई करें, टमाटर की प्यूरी भी मिला दें.

– इस के बाद गरममसाला डालें और फ्राई करें और अब पानी और केसर डाल कर धीमी आंच पर पकाएं.   धनियापत्ती से गार्निश कर परोसें.

पंजाबी छोले मसाला

सामग्री

– 250 ग्राम सफेद छोले

– 20 ग्राम चना दाल

– 10 ग्राम जीरा

– 10 ग्राम अदरक बारीक कटा

–  1 छोटा चम्मच अदरक लहसुन का पेस्ट

– 2 हरी मिर्चें

– 50 ग्राम प्याज कटा

– 50 ग्राम बारीक कटा टमाटर

– 10 ग्राम टमाटर की प्यूरी

– 2 तेजपत्ता

– 2-3 बड़ी इलायची

– 2 छोटे चम्मच धनिया पाउडर

–  1 चम्मच भुना जीरा पाउडर

– 2-3 लौंग

– 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर

– 1 छोटा चम्मच गरममसाला

– थोड़ी सी धनियापत्ती सजाने के लिए

– 2 बड़े चम्मच तेल

– नमक स्वादानुसार.

बनाने की विधि

– छोले और चना दाल को रात भर भिगो कर रखें.

– कुकर में छोले, नमक, बड़ी इलायची, लौंग, अदरक और पानी डालकर 1 सीटी लगाएं.

– फिर 10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं.

– कड़ाही में तेल गरम कर तेजपत्ता, जीरा भूनें फिर अदरकलहसुन पेस्ट डाल कर फ्राई करें.

– प्याज, हरी मिर्च और टमाटर सभी सूखे मसालों के साथ मिला कर तेल छोड़ने तक भूनें.

– अब टमाटर की प्यूरी डालें और फ्राई करें.

– जब यह मिश्रण भुन जाए तो उबले हुए छोले डाल कर थोड़ी देर चलाएं.

– अब इस में पानी डाल कर पकने तक पकाएं.

– धनियापत्ती से गार्निश कर गरमगरम परोसें.

अरेंज्ड मैरिज शादी से पहले ज्यादा न खुलें

मंगेतर मनपसंद हो तो उस के साथ रिश्ते में पूरी तरह डूबना एक लड़की के लिए जाहिर सी बात है. लेकिन किसी वजह से शादी होने से पहले ही टूट जाए तो यह भावनात्मक जुड़ाव लड़की के लिए मानसिक अवसाद की स्थिति बना सकता है.

शादी की धूमधाम वाले घर में आज इतना सन्नाटा पसरा था कि तापसी से मिलने आई उस की सहेली विधि घर में घुसते ही ठिठक गई.

क्या हुआ, रिश्तेदार चले गए? सामान इधरउधर बिखरे पड़े जैसे मातम मना रहे हों. हफ्तेभर में जिस की शादी होने वाली है, वह अंधेरे कमरे में बंद हो कर सो रही थी. वही जो देररात तक जाग कर अपनी शादी की खरीदारी की तसवीरें विधि को साझा किया करती थी. होने वाले पति के साथ अपनी तरहतरह की तसवीरें फेसबुक और व्हाट्सऐप स्टेटस पर डाला करती थी. एक तरह से मंगेतर के आर्कषण में अति उत्साहित व भावविभोर.

विधि को तापसी की मां से पता चला कि तापसी की शादी लड़के वालों ने तोड़ दी थी. ‘आखिर ऐसा क्या हो गया?’ उस ने तापसी को सहारा देते हुए कुरेदा तो वह फूटफूट कर रो पड़ी. मंगेतर से उस का लगाव इतना हो गया था कि शादी के टूट जाने का दर्द प्रेम में खाए धोखे और ब्रेकअप से कम न था उस के लिए. दूसरे, घरपरिवार में उस के मंगेतर का घर के सदस्य की हैसियत से स्थान बन चुका था. शादी टूट जाने से रिश्तेदारों और पहचान वालों में बेइज्जती हो रही थी. ऊपर से सोशल मीडिया में कई तसवीरें तो ऐसी भी साझा हो चुकी थीं जो भारतीय समाज की मानसिकता के हिसाब से शादी के बाद खिंचवाई जाती हैं.

दरअसल, तापसी की शादी तय हो जाने के बाद दोनों के परिवारों ने उन्हें जानपहचान बढ़ाने का मौका दिया और कुछ समय साथ बिताने की इजाजत भी दी. कुछ दिन गुजरे और सब बेफिक्री के साथ चलता रहा तो तापसी उस से कुछ ज्यादा ही खुलने लगी. वह दिनरात उसी की फिक्र लगाए रहती, उसी की बात सोचती और इस तरह वह उस से कुछ ज्यादा ही भावनात्मक रूप से जुड़ गई.

इधर, लड़के के परिवार में एक हादसा हो गया और ऐक्सिडैंट में लड़के के पिता की मौत हो गई. सो, हमारा दकियानूसी, अंधविश्वासी भारतीय समाज लड़की के विरुद्ध हो गए. लड़की को अपशकुनी मान कर उस से रिश्ता तोड़ने की बात पर घर के लोग एकमत होने लगे.

लड़का परिवार का बड़ा भक्त था और पित्रशोक में दिशाहीन. उस ने शादी के मामले में परिवार के साथ जाने का फैसला लिया. लोगों ने उसे यही समझाया कि ऐसे मौके पर उसे अपनी मां का साथ देना चाहिए जैसे कि लड़की से ब्याह कर लेना पिता के हत्यारे से ब्याह रचाना था.

उन के दो टूक कह देने से बात खत्म तो हो गई लेकिन क्या वाकई खत्म हुआ सबकुछ? अब तो शुरू हुई मानसिक यातना, तनाव, दबाव, घुटन, बेइज्जती. क्या करेंगे लड़की वाले? लड़की अवसाद में जा रही है तो कोर्ट जाएंगे? लड़के को जेल भिजवाएंगे? कुछ भी नहीं?

इतना ही है कि गिर कर संभलना है, आगे बढ़ना है. और आगे बढ़ना तभी होगा जब लड़की किसी भी रिश्ते में पूरी तरह डूबने से पहले होने वाले साथी को समझते हुए शादी तक का सफर तय करे. लड़कों के लिए भी यही परिस्थिति बन सकती है जब तय शादी लड़की वालों की तरफ से तोड़ी जाए किसी फालतू कारण से. ऐसे में शादी से पहले भावनात्मक जुड़ाव शादी टूटने के बाद दूसरी तमाम परेशानियों के साथ मानसिक अवसाद की स्थिति भी बना देता है.

अकसर लड़के लड़कियां शादी तय होते ही अतिउत्तेजना और अतिभावुकता में आ कर जिंदगी के प्रैक्टिकल पक्ष को नजरअंदाज कर देते हैं.

आइए जानें वे प्रैक्टिकल पक्ष जो शादी तक पहुंचने से पहले युवा को साथी के साथ सामंजस्य बैठाते हुए और भावनाओं को शिक्षित करते हुए रिश्ते को मजबूती देते हैं :

व्यावसायिकता और प्रेम : भारत में अरेंज्ड मैरिज के लिए यही सच है. यह 2 परिवारों, उन के रिश्तेदारों, समाजों

के लेनदेन, ऊंचनीच जैसे प्रैक्टिकल व्यावसायिक आधार पर अंकुरित किया गया गुलाब है. इसलिए प्रेम से पहले इस रिश्ते में व्यावसायिकता की सही समझ भी जरूरी है.

शादी की जिम्मेदारी युवाओं की भी: जिन की शादी तय हुई है वे भविष्य के मीठे सपने ही नहीं बुनें या होने वाले साथी के साथ समय से पहले बहुत ज्यादा न खुलें, बल्कि बड़ों के नजरिए से भी रिश्ते को देखें. दुनियादारी की समझ बढ़ाएं. अरेंज्ड है शादी, इसलिए ससुराल पक्ष के दूसरे लोगों को पहचानने की, उन के स्वभाव को समझने की भी कोशिश करें. इस से शादी के प्रैक्टिकल पक्ष पर ध्यान रहेगा और होने वाले साथी पर निर्भरता घटेगी.

विश्वास करें मगर धीरेधीरे : रिश्ते की आधारशिला विश्वास तो है, लेकिन शादी तय होते ही पार्टनर पर अंधविश्वास कभी न करें. उसे पहचानने में समय लगाएं. ज्यादा और समय से पहले विश्वास युवा को भावनात्मक रूप से कमजोर कर देगा. यदि कभी शादी में झुकनेझुकाने की नौबत पैदा हो गई, परिवारों में अहं का टकराव हो गया तो बेवजह भावनात्मक रूप से कमजोर साथी को घुटने टेकने पड़ेंगे, जो कि नएनए परिचय में दुखदायी होगा.

अरेंज्ड मैरिज और लेनदेन : अभी भी भारतीय पारंपरिक विवाहों में लेनदेन सिर्फ सामानों का नहीं, बल्कि परंपराओं और रीतिरिवाजों को जाननेसमझने का भी रहता है. रिश्तेदारों में कई ऐसे लोग होते हैं जो छोटीछोटी मीनमेख के आधार पर शादी तुड़वाने पर तुले रहते हैं, इसलिए विवाह को पहले जाननासमझना, उस के बाद मानसिक रूप से जुड़ने की सोचना ज्यादा संगत है.

लड़का दीवाना तो है लेकिन पहले परिवार : अरेंज्ड मैरिज में अकसर भारतीय लड़के लड़की को पाने की बेताबी में तो रहते हैं, लेकिन परिवार और खासकर पारंपरिक मांओं के प्रति वफादारी को वे होने वाली दुलहन को ज्यादा महत्त्व न दे कर निभाना चाहते हैं. ऐसे भावी दूल्हों से बंधी लड़कियां होशियार रहें क्योंकि शादी के पहले तक लड़के किसी भी पल आप का साथ छोड़ दें तो आप ठगा सा महसूस करेंगी. इन लड़कों के साथ संबंध परिवार की छत्रछाया में ही ज्यादा टिकाऊ होता है.

शादी से पहले कुछ बातों को ना कहें : जरूरत से ज्यादा डेटिंग, रैस्तरां में अकेले जाना, अंतरंग तसवीरें लेना, इन्हें सोशल मीडिया में साझा करना आदि को ना कहना और शादी तक सब्र के साथ इस रिश्ते में आगे बढ़ना सीखना होगा.

कितना जानते हैं एकदूसरे को : यह रिश्ता न तो सिर्फ दोस्ती का है, न सिर्फ प्रेम का. इस नए रिश्ते में दोस्ती और प्रेम के साथ शारीरिक आकर्षण, बौद्धिक तालमेल, सामाजिक हैसियत, पारिवारिक परिस्थिति, संपत्ति जैसे कई सारे महत्त्वपूर्ण फैक्टर और भी हैं, जो इस संबंध को परिभाषित करने में अपनीअपनी भूमिका निभाते हैं. दूसरी ओर प्रेम निभाने के लिए व्यक्तित्व में जिम्मेदारी, करुणा और कमिटमैंट रहनी ही चाहिए. लेकिन युवा इन बातों को समझने से पहले ही शरीर व मन की मृगमरीचिका में खो कर प्रैक्टिकल पहलू को किनारे कर देते हैं.

प्रेम संबंधों का भी कई बार खात्मा हो जाता है जबकि अरेंज्ड मैरिज तो दिमाग के रास्ते दिल में प्रवेश है. स्वाभाविक ही है कि कई बार बात न बने. ऐसे में युवाओं की समझदारी और परिपक्वता उन्हें कई प्रकार की तकलीफों से बचा सकती है.

अंधभक्ति से काम नहीं चलेगा

कश्मीर में 40 अर्धसैनिकों की दुखद मृत्यु के बदले आतंकवादियों और उन्हें शह देने वाले पाकिस्तान के खिलाफ जिस तरह की भाषा का उपयोग एक वर्ग कर रहा है, वह स्पष्ट करता है कि जिस महान संस्कृति, सभ्यता, ज्ञान, धैर्य, सदाचार, सत्यवचन का बखान हम हर पल करते हैं, वह कम से कम इस वर्ग में तो नहीं है, जो असल में संस्कृति का स्वयंभू ठेकेदार बना हुआ है.

न केवल पाकिस्तानी सरकार, बल्कि प्रधानमंत्री, पाकिस्तान में खुलेआम घूमते आतंकवादियों के नेताओं को मांबहन की गालियां ट्विटर, व्हाट्सऐप और फेसबुक पर दी जा रही हैं, हर उस भारतीय को भी दी जा रही हैं जो भावनाओं की जगह सोचीसमझी नीति अपनाने की वकालत कर रहा है. यह कट्टर वर्ग न केवल आतंकवादियों के खिलाफ आग उगल रहा है, आतंकवादियों के लपेटे में हर कश्मीरी को भी ले रहा है और लड़कियों तक को नहीं छोड़ रहा.

केवल यह सुझाव देने पर कि पाकिस्तान या आतंकवादियों से समझौतों से भी शांति लाई जा सकती है, यह कट्टर वर्ग उग्र हो उठता है. यह वर्ग भूल रहा है कि इसकी इस कट्टरता के बावजूद इस के पुरखे मुट्ठीभर यूनानियों, हूणों, पार्शियों, मुसलमानों, अफगानों, मुगलों, फ्रैंच, ब्रिटिश, डच से हारते रहे हैं. भारत का इतिहास इन हारों से भरा हुआ है, क्योंकि हम बोलने और गाली देने में तो दक्ष हैं पर कुछ करने में निकम्मे.

आज मोबाइल की सुविधा के कारण कुछ शब्दों में गाली देना इतना आसान हो गया है जितना अपने घर के सामने खड़े हो कर गुजरते राहगीर को देना. ताकत तो वह होती है जब संख्या में कम होते हुए भी हमला करने वालों को हराया जा सके.

मांबहनों की भद्दी गालियां असल में चरित्र की सही पहचान करा रही हैं, हमारा बल नहीं दिखा रहीं. मोबाइल के पीछे छिप कर वार करना पेड़ या शिखंडी के पीछे से तीर मारने की तरह है. पर जो समाज उसे सही और दैविक मानता हो, उस से और क्या अपेक्षा की जा सकती है?

जहां जरूरत है कि पूरा देश आतंकवादियों के हौसले पस्त करे, वे जहां पनप रहे हैं, जहां प्रशिक्षण ले रहे हैं, वहां उन्हें रोकें, उन्हें देश में घुसने न दें. अगर होम ग्रोथ यानी अपने ही देश की पैदावार हों तो या तो उन्हें पकड़ लें या समझा कर राह पर ला सकें.

आतंकवाद बहुत गंभीर समस्या है और हमें उसे रोकने में बहुत चतुराई की जरूरत होगी. अंधभक्ति और गालियों से काम नहीं चलेगा चाहे वह किसी धर्म के प्रति हो या व्यक्ति विशेष के प्रति.

ब्लैकहेड हटाने के लिये अपनाए ये उपाय

चेहरे पर अगर ब्‍लैकहेड्स हो गए हों तो चेहरा देखने में काफी गंदा और काला दिखाई देने लगता है. इसलिये जरुरी है कि आप जैसे ही घर पर पहुंचे, उसी समय चेहरे को अच्‍छे फेस वाश से साफ कर लें. यदि ब्‍लैकहेड को फेस मास्‍क और स्‍क्रबर की सहायता से निकाला जाए तो यह काफी हद तक साफ हो जाते हैं. ब्‍लैकहेड को कभी भी दबा कर नहीं निकालना चाहिये नहीं तो उस पर नाखून के गहरे निशान पड़ जाते हैं. इसके अलावा आपको अपने आहार को भी बदलने की आवश्‍यकता है. आइये जानते हैं कुछ घरेलू उपचार जिसकी मदद से आप ब्‍लैकहेड को हटा सकती हैं.

स्‍क्रबिंग

2 चम्‍मच बेकिंग सोडा, 1/2 चम्‍मच नमक और 1 चम्‍मच पानी मिला कर पेस्‍ट बनाएं. इस स्‍क्रब से चेहरे को रगडे़ और फिर हल्‍के गरम पानी से चेहरे को धो लें.

नींबू का छिलका

नींबू का छिलका ले कर उसे अपने चेहरे पर हल्‍के हल्‍के रगडिये. इससे चेहरे का तेल धीरे धीरे कम होना शुरु हो जाएगा और ब्‍लैक हेड से जल्‍द राहत मिलेगी.

ओटमील मास्‍क

1 कम ओटमील में 1 छोटा चम्‍मच बेकिंग सोडा और 3 छोटे चम्‍मच एलो वेरा जूस को मिक्‍स करें. इस पेस्‍ट को चेहरे पर लगाएं और सूखने के बाद इसे हल्‍के गरम पानी से धो लें.

टमाटर

1 टमाटर को चौकोर भाग में काट लें. इस पीस को अपने चेहरे पर रगडे़ और हल्‍के गरम पानी से चेहरे को धो लें. आप इसको रोजाना कर सकती हैं.

बादाम का मास्‍क

ओटमील, घिसा बादाम और पानी मिक्‍स कर के पेस्‍ट बनाएं. इसे चेहरे पर लगाएं और जब यह सूख जाए तब इसे गीला कर के हाथों से इस मास्‍क को गोलाई में रगड़ कर साफ करें. इसके लिये हल्‍के गरम पानी का प्रयोग करें.

एस्‍ट्रीजेंट

एक साफ कौटन बौल पर कुछ बूंद एस्‍ट्रीजेंट की डालें. और इससे चेहरे को साफ करें. रात को सोते वक्‍त एक बार अपना चेहरा एस्‍ट्रेजेंट से जरुर साफ कर लें.

शहद

शहद को सीधे चेहरे पर लगाएं. इससे जमी हुई गंदगी निकलेगी . जब शहद सूख जाए तब इसे हल्‍के गरम पानी से धो लें.

उपर दिए गए उपाय अपनाने से पहले आपको कुछ बात ध्यान रखना चाहिए. चेहरे पर फेस मास्‍क या स्‍क्रब लगाने से पहले चेहरे को गरम पानी से 10 मिनट के लिये स्‍टीम करना चाहिये. फिर स्‍क्रब करें.

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