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वेज कोरमा रेसिपी

सामग्री

– मौसमी सब्जियां (जरूरतानुसार)

– पनीर( 50 ग्राम टुकड़ों में कटी हुई)

– टमाटर की प्यूरी (100 ग्राम)

–  दही  (100 ग्राम)

– 5 काजू

– 8-10 ग्राम किशमिश

– धनिया पाउडर (1 छोटा चम्मच)

–  जीरा पाउडर (1/2 छोटा चम्मच)

– गरममसाला (1 छोटा चम्मच)

– 2 तेजपत्ता

– लाल मिर्च पाउडर (1 छोटा चम्मच)

–  इलायची पाउडर (1 छोटा चम्मच)

– तेल (जरूरतानुसार)

– थोड़े से अनानास के टुकड़े

– 10 ग्राम मलाई या क्रीम

– 1 छोटा चम्मच चीनी

– 1 हरी मिर्च कटी

– नमक (स्वादानुसार)

बनाने की विधि

– सब्जियों को उबाल लें.

– अब टुकड़ों में कटे पनीर को फ्राई कर लें.

– काजू, अदरक और लहसुन को थोड़े पानी के साथ ग्राइंड कर लें.

– टमाटर की प्यूरी और सभी सूखे मसालों को मिला कर पेस्ट तैयार कर लें.

– एक बरतन में तेल गरम कर तेजपत्ता व टमाटर वाले मिश्रण को डाल कर तब तक भूनें जब तक वह तेल न छोड़ दे.

– अब इस में हरी मिर्च और काजू वाले मिश्रण को डाल कर फ्राई करें.

– फिर दही डाल कर फ्राई करें.

– अब सब्जियां, चीनी और किशमिश डालने के बाद थोड़ा सा पानी डालें.

– पनीर डालने के बाद ग्रेवी गाढ़ी होने तक उबालें.

– अब इलायची पाउडर और मलाई डाल कर अच्छे से मिलाएं और आंच से उतार लें.

– अनानास के टुकड़ों से सजा कर सर्व करें.

नेल आर्ट टिप्स : यूं सजाएं अपने नाखूनों को

सजे हुए और खूबसूरत नाखून आपकी पर्सनालिटी में निखार लाने के साथ ही साथ आपकी सुंदरता में भी चार चांद लगा देती है. अगर आपको अपने नाखून पर हमेशा नेल पौलिश लगाए रखना अच्‍छा लगता है, तो आपको ये नेल आर्ट जरुर ट्राई करना चाहिये.

नेल आर्ट टिप्स

नेल आर्ट से पहले अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं. नाखूनों को भी साफ करें और पांच मिनट रुकें, जबतक नाखून पूरी तरह से सूख न जाए. अब न्‍यूड पिंक नेल पौलिश लें और उसे लगाने से पहले शेक कर लें, जिससे आपको उसका सही रंग मिल सके.

इस नेल पौलिश की एक कोट अपने नाखूनों पर ऊपर से नीचे की ओर लगाएं. अगर शेड बहुत ही लाइट है तो एक कोट और लगा सकती हैं. अब नेल पौलिश को अच्‍छी तरह से सूखने दें.

अब एक डार्क ब्‍लू रंग की नेल पौलिश लें. इस नेल आर्ट में नीले रंग को नाखून की टिप पर लगाया जाता है, यानी की सबसे आखिर और नीचे की ओर.

ब्‍लू नेल पौलिश को उसी शेप में लगाइये, जिस शेप में आपके नाखून कटे हुए हों. अगर नाखून चौकोर आकार में कटे हैं, तो ब्‍लू कलर को उसी तरह लगाइये. ध्‍यान रहे की पिंक वाली नेल पौलिश पर ब्‍लू नेल पौलिश न चढ़े. जब नेल पौलिश लगा लें तो उसे पांच मिनट तक अच्‍छे से सूखने के लिये छोड़ दें. अब लास्‍ट में एक गोल्‍डन नेल आर्ट डिजाइन ले कर अपने हाथ की रिंग फिंगर के नाखून में बड़ी ही सफाई से चिपका दें. लीजिये अब आपके नाखूनों पर नेल आर्ट बन गई.

आप इस तरह से कई अलग अलग कलर के नेल पौलिश का इस्तेमाल कर सकती हैं. आप काले रंग के नेल पौलिश को अपने नाखून पर लगाकर उसके ऊपर सिल्वर कलर की नेलपौलिश का एक कोट लगा सकती हैं. आप चाहें तो उसके ऊपर बाजार में मिलने वाले रेडीमेड डिजाइन भी चिपकाकर अपने नाखून को सुन्दर बना सकती हैं.

इसके अलावा अपने रिंग फिंगर में एक छोटा सा छेद करके आप घूंघरू पहन सकती हैं. आप अपने नाखून पर बाजार में मिलने वाले स्टीकर चिपकाकर भी अपने नाखून को सुन्दर बना सकती हैं.

आप किसी भी दो कलर के नेल पौलिश को नाखून के आधे आधे हिस्से पर लगाकर सजा सकती हैं. आप चाहें तो उससे फूल पत्ती आदि डिजाइन बनाकर भी अपने नाखून को सजा सकती हैं और खूबसूरत बना सकती हैं.

पहली बार कर्ज लेने से पहले

हर कोई जीवन में कभी न कभी वित्तीय मुश्किल से गुजरता है और हर बार वह अपने स्रोतों के बल पर इस मुश्किल को पार नहीं कर पाता. ऐसे ही समय में आप को बैंक व दूसरे वित्तीय संस्थानों के पास जा कर कर्ज और क्रैडिट कार्ड के लिए आवेदन करना पड़ता है.

कर्ज मांगने या उस के लिए आवेदन करने और कर्ज मिलने के कुछ नियम होते हैं और फिर उस कर्ज को वापस करना भी होता है. कर्जअदायगी कैसे होगी, इस की शर्तें होती हैं. यहां हम एक क्रैडिट मार्गदर्शिका पेश कर रहे हैं ताकि आप आसानी से क्रैडिट के बारे में जान सकें.

अकाउंट्स औफ क्रैडिट

आप का क्रैडिट अकाउंट आप के बैंक खाते से अलग है. यह अकाउंट तब सक्रिय होता है जब आप लाइन औफ क्रैडिट प्राप्त करते हैं जो क्रैडिट कार्ड या कर्ज हो सकता है. इन खातों में  आप की क्रैडिट हिस्ट्री होती है और सिबिल व इक्विफैक्स जैसे क्रैडिट ब्यूरो इन का लेखाजोखा रखते हैं.

फायदे

क्रैडिट का मतलब कर्जअदायगी और दबाव नहीं है, इस में फायदे भी हैं. होम लोन और शिक्षा ऋण लेने से दिए गए ब्याज पर कर में छूट मिलती है जिसे आयकर रिटर्न दाखिल करते हुए क्लेम किया जा सकता है.

कई अनदेखे लाभ भी होते हैं, जैसे क्रैडिट स्कोर में सुधार. जब आप क्रैडिट कार्ड देनदारी का लगातार भुगतान करते हैं तो आप का क्रैडिट स्कोर बेहतर होता है.

क्रैडिट स्कोर

ऋण देने की प्रक्रिया के केंद्र में आप का क्रैडिट स्कोर होता है, जो आप की क्रैडिट हिस्ट्री को अंकों में दर्शाता है. बैंक और अन्य कर्जदाता जो आंकड़े देते हैं, उन के आधार पर भारत में 4 क्रैडिट ब्यूरो आप की क्रैडिट हिस्ट्री का लेखाजोखा रखते हैं. आप का क्रैडिट स्कोर 300 से 900 के बीच होता है और 700 से ऊपर का स्कोर अच्छा माना जाता है. भारत के 4 क्रैडिट ब्यूरो में से किसी से भी आप अपना क्रैडिट स्कोर जान सकते हैं. ये हैं- सिबिल, इक्विफैक्स, ऐक्सपेरियन और हाईमार्क.

अगर आप क्रैडिट की दुनिया में नए हैं तो शायद अभी आप का कोई क्रैडिट स्कोर नहीं होगा और इसलिए इसे बनाने के लिए आप को काम करना होगा.

देरी से भुगतान

कर्ज पाने की उम्मीद का आधार है कर्ज चुका सकने की क्षमता. मासिक भुगतान में हुई देरी सीधेतौर पर कर्ज पाने हेतु विश्वसनीयता पर दुष्प्रभाव डालेगी. इस स्थिति में कोई भी खुद को नहीं आने देना चाहेगा. हमेशा समय पर भुगतान करें और पूरा भुगतान करें.

ईएमआई

ये 3 अक्षर ऐसे हैं जिन्हें कोई नहीं भूल सकता. इन का मतलब है इक्विटेड मंथली इंस्टौलमैंट यानी वे मासिक रकम जो आप अपने कर्जदाता को चुकाते हैं. ईएमआई में मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं.

फीस

कर्ज पाने की प्रक्रिया में कुछ शुल्क भी होते हैं जिन में शामिल हैं –

प्रोसैसिंग फीस :  यह वह फीस है जो बैंक आप से आप का लोन प्रोसैस करने के लिए लेता है. यह कर्ज देने के वक्त लिया जा सकता है.

फोरक्लोजर फीस : यह वह फीस है जो बैंक तब आप से लेता है जब आप वक्त से पहले कर्ज चुका देते हैं.

गारंटर

यदि किसी आवेदक की क्रैडिट हिस्ट्री नहीं होती तो कर्जदाता उस से गारंटर या सहउधारकर्ता लाने को कहता है. ऐसे में एक ऐसा गारंटर ले कर आएं जिस का लगातार भुगतान करने का रिकौर्ड हो और जिसे कर्जदाता ऋण लेने योग्य मानते हों. याद रखें कि अगर आप अपना कर्ज नहीं चुकाते हैं तो इस का असर आप के गारंटर पर पड़ेगा.

ब्याजदर

ब्याजदर वह रकम है जिस का उपयोग आप बैंक से लिए कर्ज को चुकाने में करेंगे और यह 2 तरह का होता है :

फिक्स्ड रेट : यह वह दर है जो कर्ज की पूरी अवधि में एकसमान रहती है, बदलती नहीं.

फ्लोटिंग रेट : बाजार के अनुसार यह ब्याजदर हर माह बदलेगी. उदाहरण के लिए आरबीआई रेपो रेट को घटा देता है तो ब्याजदर कम हो जाएगी और अगर मुद्रास्फीति के चलते आरबीआई रेपो रेट को बढ़ा देता है तो ब्याजदर भी बढ़ जाएगी.

अपने ग्राहक को जानिए

आरबीआई के दिशानिर्देशों के मुताबिक, कर्जदाता ग्राहकों के बारे में जानकारी एकत्रित करते हैं जिसे केवाईसी यानी नो योर कस्टमर कहते हैं. इस में पहचान का सुबूत और पते का सुबूत शामिल होते हैं. इस नीति के तहत मांगे जाने वाले दस्तावेजों में कुछ बदलाव संभव है, जो कि कर्जदाता की आंतरिक नीतियों और कर्ज के प्रकार के मुताबिक अलग हो सकते हैं.

ऋण के लिए पात्रता

आप ऋण लेने के लिए पात्रता रखते हैं या नहीं, यह कई कारकों पर निर्भर है. कर्जदाता आप के कर्ज की रकम और ब्याजदर को तय करेगा. कर्ज लेने की पात्रता कई कारकों पर आधारित है, जैसे उम्र, आय और जैसा कि पहले बताया गया आप का क्रैडिट स्कोर.

इस क्षेत्र में एक नए व्यक्ति होने की वजह से संभव है कि आप को बाजार में उपलब्ध सब से अच्छे लोन और क्रैडिट कार्ड न मिलें, क्योंकि आप के पीछे आप की क्रैडिट हिस्ट्री नहीं है.

नो हिस्ट्री

जिस व्यक्ति ने कभी कर्ज न लिया हो उस की क्रैडिट रिपोर्ट में स्टेटस होगा, नो हिस्ट्री. ऐसे में कर्जदाताओं के पास कोई दर्ज की हुई क्रैडिट गतिविधि नहीं होती. इस से उन्हें कर्ज देने संबंधी फैसला करने में कठिनाई होती है. इसलिए, आप को अपना क्रैडिट स्कोर बेहतर बनाना होगा और अपनी क्रैडिट हिस्ट्री का निर्माण करना होगा.

जुर्माना

यह वह रकम है जो आप को तब देनी होती है जब आप कोई भुगतान नहीं करते हैं. कर्ज के लिए दस्तखत करने से पहले जुर्माने के बारे में जान लें. भुगतान से चूकने का मतलब है कि आप को जितना चुकाना था, अब आप को उस से अधिक चुकाना होगा और इस से आप की कर्ज संबंधी विश्वसनीयता पर बुरा असर पड़ेगा.

कर्ज अदायगी की अवधि

कर्ज देते वक्त तय हो जाता है कि आप अपनी आखिरी ईएमआई कब चुकाएंगे. इसलिए आप वह अवधि चुनें जिस में आप आराम से कर्ज चुका सकें और उसी हिसाब से अपने रिपेमैंट शैड्यूल की योजना बनाएं. इस से आप की कर्जअदायगी में अनुशासन आएगा.

आखिर में

ऋण लेने के साथ ही जिम्मेदारी आती है और उपरोक्त जानकारी केवल शब्दावली नहीं है, बल्कि एक चैकलिस्ट है जिसे आप कर्ज लेने की प्रक्रिया में ध्यान में रखें. हम समझते हैं कि यह आप का पहला बड़ा वित्तीय फैसला होगा. आप चाहे पढ़ाई के लिए ऋण ले रहे हों या अपना पहला अपार्टमैंट खरीद रहे हों या अपनी मासिक जरूरतों के लिए क्रैडिट कार्ड बनवा रहे हों, कर्ज लेने का फैसला आत्मविश्वास के साथ लें और फिर लगातार वक्त पर कर्ज की अदायगी करते रहें.

बालों को करें हाई लाइट

आजकल बालों को हाई लाइट करने का फैशन जोरो पर है. आप भी इस फैशन को अपनाने का सोचती होंगी पर ज्यादा खर्च और बाल खराब होने के डर के चलते आप ऐसा नहीं कर पा रही हैं.  अगर वाकई ऐसा है तो ये खबर खास आपके लिए ही है. क्योंकि आज हम आपको कलर करने के तरीके बताने जा रहे हैं. लेकिन बालों में कलर करने से पहले ध्यान रखिए कि कलर आपकी उम्र, व्यवसाय और जीवनशैली से भी मेल खाए. और हां, आपके बालों में कलर तभी फबेगा जब आप उसे अपनी स्किन को ध्यान में रख कर लगाएंगी.

तो चलिए आपको बताते हैं कि आप कैसे कलर करें :

शेड्स को मिलाकर लगाएं

यदि आप बालों में कलर के साथ चमक भी चाहती हैं तो दो शेड्स को मिलाकर लगाएं यानी बेस कलर के साथ हाई लाइट या लो लाइट का मेल बालों में लगाए. बालों की सबसे ऊपर वाली परत के नीचे गहरा लो लाइट कलर कर के आप बालों को घना बना सकती हैं. ये हाई लाइटर और लो लाइटर वाले कलर वास्तव में चेहरे पर रंगत ला देते हैं और बालों को खूबसूरत दिखाने के साथ ट्रेंडी भी दिखाते हैं.

हाई लाइट करे

हाई लाइट कलर को स्ट्रिक्स भी कहा जाता है. मध्यम भूरे से गहरे भूरे बालों में हाई लाइटर करने के लिए बेस कलर से एक या दो टोन हल्का शेड चुनें. घर पर कलर करने के लिए अपने पसंद के कलर लें. फिर चेहरे के इर्द-गिर्द बालों की पहली परत के आधे इंच को 5 से 8 भागों में बाटें, इनपर हाई लाईट वाले कलर लगाकर फाइल में लपेट कर पिन लगा लें. बाकी बालों पर बेस कलर लगाएं.

इस तरह लगाएं कलर

जो बी कलर आपको करना है उसे लेकर एक सिरे से बालों पर लगाना शुरू करें, लेकिन याद रखें कि बालों की जड़ों से कलर न लगाकर एक या दो इंच नीचे से कलर लगाए ताकि इसका असर आपकी जड़ो पर न हो. अगर आपके कुछ बाल सफेद हैं तो आप अपने बालों की जड़ो की ओर से रंग लगाना शुरू करें और बीच की लंबाई तक जाएं. रंग लगाने के कुछ देर बाद कंघी करें ताकि बाकी के बालों पर प्राकृतिक शेड आए. 20 मिनट बाद पानी से सिर को धोए और रंग लगाने के 24 घंटे बाद ही शैंपू का इस्तेमाल करें.

कलर से शाइन लाएं

कलर से आपके बाल चमकदार लगे, इसके लिए अपने बालों पर प्री कलर हेयर थेरेपी करवाएं. बाल रंगने से 2 दिन पहले हेयर स्पा ट्रीटमेंट लें. इस से बाल नरम रहेंगे और क्षतिग्रस्त नहीं होंगे.

कलर्स वाले बालों की देखभाल

आप रंगीन बालों के लिए तैयार किये विशेष तरह का शैंपू को चुनें साथ ही कलर बालों के लिए विशेष तरह का बना कंडीशनर ही इस्तेमाल करें. इसमें सिलिकोन कंपाउंड ज्यादा होते हैं, जो बालों को सुरक्षित रखते हैं. सप्ताह में एक बार डीप कंडीशनिंग ट्रीटमेंट भी लें और विटामिन बी-5 वाला हेयर मास्क लगाएं.

मासूम से दुश्मनी

स्कूल से घर लौटने के बाद आकाश ने अपना बैग मेज पर रखा और फौरन बाहर की तरफ दौड़ लगा दी. मां रानी ने उसे कई आवाजें दीं, लेकिन वह यह कहते हुए घर से निकल गया कि खेलने जा रहा है. आकाश अकसर स्कूल से लौटने के तुरंत बाद खेलने चला जाता था. थोड़ी देर खेल कर वह घर लौट आता था. इसलिए रानी उस की ओर से ध्यान हटा कर घर के काम में लग गई. यह 21 सितंबर, 2018 की शाम 4 बजे की बात है.

आकाश आधे एक घंटे में खेल कर घर लौट आता था. लेकिन उस दिन जब वह साढ़े 6 बजे तक नहीं लौटा तो रानी को उसे बुलाने के लिए घर से निकलना पड़ा. घर से कुछ ही दूरी पर पार्क था. पार्क में जो बच्चे खेल रहे थे, उन में आकाश नहीं था. रानी ने बच्चों से आकाश के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि आकाश कुछ देर पहले बच्चों के साथ क्रिकेट खेल रहा था.

आकाश जिन बच्चों के साथ क्रिकेट खेल रहा था, वह भी रानी के पासपड़ोस में रहते थे. रानी उन बच्चों के घर गई तो उन्होंने बताया कि कुछ देर पहले वे खेलबंद कर के घर लौट आए थे. आकाश वहीं रह गया था.

रानी ने अपनी बेटी राधा को साथ लिया और पार्क में खेलने वाले बच्चों और पार्क के आसपास रहने वाले लोगों से आकाश के बारे पता करने लगी. लेकिन आकाश का कोई पता नहीं लगा. मायूस हो कर घर लौटी रानी ने आकाश के लापता होने की बात अपने पति सुनील विश्नोई को बताई.

सुनील उस समय बाजार में था. बेटे के लापता होने की खबर मिली तो वह आननफानन में घर आ गया. फिर वह भी बेटे को ढूंढने के लिए घर से निकल पड़ा. रानी और उस की बेटी राधा कस्बे की गलियों में आकाश को खोजने लगीं. लेकिन आकाश का कोई पता नहीं लगा, पतिपत्नी दोनों परेशान थे. अचानक रानी ने सोचा कि कहीं आकाश खेल कर शिवम के घर तो नहीं चला गया.

शिवम विश्नोई, रानी के जेठ विनोद विश्नोई का बेटा था. उस का घर रानी के घर से 2 घर छोड़ कर था. घबराई हुई रानी शिवम के घर पहुंची और आकाश के बारे में पूछा. शिवम ने बताया, ‘‘चाची, आकाश आया जरूर था, लेकिन थोड़ी देर बतिया कर चला गया था.’’

तब तक 9 बज चुके थे और रात गहराने लगी थी. आकाश का जब कुछ पता नहीं चला तो उस के पिता सुनील विश्नोई ने पुलिस कंट्रोल रूम के 100 नंबर पर फोन कर के बता दिया कि राजपुर कस्बे की गली नंबर 9 से 12 साल का एक लड़का गायब हो गया है. राजपुर कस्बा कानपुर देहात जिले के थाना राजपुर क्षेत्र में आता है. पुलिस कंट्रोल रूम ने लड़के के गायब होने की सूचना थाना राजपुर को दे दी.

सूचना मिलते ही एसआई देशराज सिंह हेडकांस्टेबल सुरेशचंद्र को साथ ले कर राजपुर कस्बे स्थित सुनील के घर पहुंच गए. सुनील विश्नोई और उस की पत्नी रानी घर पर थे. शिवम भी उन के साथ था. उन्होंने आकाश के गायब होने की जानकारी उन्हें दी. एसआई देशराज सिंह सुनील विश्नोई का बयान दर्ज कर के थाने लौट आए.

थानाप्रभारी नवीन कुमार सिंह उस समय थाने पर मौजूद थे. एसआई देशराज सिंह ने 12 वर्षीय आकाश के गुम होने की जानकारी उन्हें दे दी. उन्होंने अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करवा दी और इस मामले की जांच देशराज सिंह को ही सौंप दी.

एसआई देशराज सिंह आकाश की खोजबीन में जुट गए. सूचना पा कर रानी के मातापिता भी आ गए. उन्होंने रानी से कहा कि वह एक बार ठीक से देख लें कि वह घर में ही तो नहीं सो गया है. रानी ने घर के सारे कमरे छान मारे लेकिन आकाश नहीं मिला. आकाश कहीं शिवम के घर न सो गया हो, यह सोच कर रानी शिवम के घर गई तो वह दरवाजे पर ही मिल गया.

रानी ने जब उस से आकाश को घर में देखने की बात कही तो वह बोला, ‘‘चाची, वैसे तो आकाश यहां से चला गया था, फिर भी तुम कहती हो तो मैं एक बार और देख लेता हूं.’’

शिवम घर में चला गया, जबकि रानी दरवाजे पर ही खड़ी रही. कुछ देर बाद शिवम ने बाहर आ कर बताया कि आकाश यहां नहीं है.

फिरौती के लिए नहीं हुआ अपहरण

इधर इंसपेक्टर नवीन कुमार सिंह ने आकाश अपहरण पर गहन विचारविमर्श किया. उन के विचार से आकाश का अपहरण फिरौती के लिए नहीं किया गया था. क्योंकि सुनील विश्नोई की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि उस के बेटे का अपहरण 2-4 लाख की फिरौती के लिए किया जाता. दूसरे फिरौती की बात इसलिए भी गले नहीं उतर रही थी, क्योंकि अभी तक अपहर्त्ता का कोई फोन नहीं आया था.

नवीन कुमार सिंह का अनुमान था कि आकाश का अपहरण किसी और कारण से किया गया है. यह कारण क्या हो सकता है, इस का पता लगाना जरूरी था. फिर भी इंसपेक्टर नवीन कुमार सिंह ने पुखरायां, घाटमपुर, भीमसेन रेलवे स्टेशन के अलावा कानपुर देहात के सभी प्रमुख बस अड्डों पर छानबीन के लिए आकाश के फोटो के साथ अलगअलग पुलिस टीमें रवाना कर दीं.

एसआई देशराज सिंह थाना क्षेत्र के नदी, नालों और सड़क किनारे की झाडि़यों पार्कों आदि में इस आशंका से आकाश को खोज कर रहे थे कि कहीं किसी ने उस की हत्या न कर दी हो.

कस्बा राजपुर में सड़क किनारे एक शिव मंदिर था. मंदिर के पास वाले मैदान में बच्चे खेलते थे. पुलिस आकाश की खोज में वहां भी गई, लेकिन उस का पता नहीं चला. पुलिस ने नमाज के समय मसजिद से आकाश के हुलिए सहित उस के गुम होने की सूचना प्रसारित कराई, पर कोई सफलता नहीं मिली.

उधर आकाश के लापता होने से विश्नोई परिवार की आंखों की नींद उड़ी हुई थी. घर के सभी लोगों को इस बात की चिंता सता रही थी कि उन की आंखों का चिराग पता नहीं कहां और किस हाल में होगा. वे लोग पूरी रात बैठे रहे. उन के दिमाग में तरहतरह के खयाल आ रहे थे.

अंधेरा छंटते ही वे लोग फिर 2-2, 3-3, के ग्रुप में आकाश की खोज में निकल पड़े. उधर पुलिस ने आकाश के गुम होने की सूचना उस के हुलिए के साथ कानपुर देहात जनपद के सभी थानों को दे दी थी.

ज्योंज्यों समय बीतता जा रहा था त्योंत्योंसुनील और उस की पत्नी रानी की चिंता बढ़ती जा रही थी. दोनों की समझ में नहीं आ रहा था कि आकाश चला कहां गया? रानी बेटे के गम में सब से ज्यादा दुखी थी. उस का रोरो कर बुरा हाल था. उस ने खानापीना भी छोड़ दिया था.

धीरेधीरे 3 दिन बीत गए, लेकिन अब तक आकाश का पता न तो घर वाले लगा पाए थे और न ही पुलिस को सफलता मिली थी. पुलिस आकाश की खोज में जीजान से जुटी थी. उस ने क्षेत्र के हर रेलवे स्टेशन व बस अड्डे पर आकाश की फोटो सहित सूचना चस्पा कर दी थी.

पुलिस आपराधिक प्रवृत्ति के युवकों को पकड़ कर थाने लाई और उन से सख्ती से पूछताछ की. लेकिन आकाश के बारे में कोई जानकारी हासिल नहीं हुई. आखिर पुलिस को मजबूरन उन युवकों को रिहा करना पड़ा. पुलिस का मुखबिर तंत्र भी आकाश का पता लगाने में नाकाम रहा.

3 दिन बाद आई मौत की खबर

25 सितंबर, 2018 की सुबह 10 बजे थानाप्रभारी नवीन कुमार सिंह क्षेत्र के एक कुख्यात अपराधी की फाइल का निरीक्षण कर रहे थे, तभी उन के मोबाइल पर एक काल आई. उन्होंने काल रिसीव की तो दूसरी तरफ से पूछा गया, ‘‘आप इंसपेक्टर साहब बोल रहे हैं?’’

‘‘जी हां, मैं इंसपेक्टर राजपुर नवीन कुमार सिंह बोल रहा हूं, कहिए क्या बात है?’’

‘‘सर, यहां बंबे में एक लाश उतरा रही है. आप जल्दी आइए.’’

‘‘लाश स्त्री की है या पुरुष की?’’

‘‘सर, लाश न स्त्री की है न पुरुष की. देखने से लगता है लाश किसी 10-12 साल के बच्चे की है.’’

‘‘बच्चे की लाश?’’ सुनते ही थानाप्रभारी नवीन कुमार सिंह का माथा ठनका. नवीन सिंह ने एसआई देशराज सिंह, हेडकांस्टेबल सुरेशचंद्र तथा आकाश के पिता सुनील विश्नोई को साथ लिया और राजपुर स्थित बंबे पर पहुंच गए. वहां काफी भीड़ जुटी थी, लोग तरहतरह की चर्चाएं कर रहे थे.

इंसपेक्टर नवीन कुमार सिंह भीड़ को हटा कर बंबे के किनारे पहुंचे. उन्होंने बंबे में तैरती लाश को बाहर निकलवाया. सुनील विश्नोई ने जब लाश देखी तो वह फफक कर रोते हुए बोला, ‘‘साहब, लाश मेरे बेटे आकाश की है.’’ रोते हुए ही उस ने बेटे की हत्या की खबर अपने घर वालों को दी. सुनते ही उस के घर में कोहराम मच गया.

आकाश की लाश की शिनाख्त होने के बाद नवीन कुमार सिंह ने अपहृत आकाश की हत्या करने और लाश मिलने की सूचना पुलिस अधिकारियों को दे दी. सूचना मिलते ही पुलिस कप्तान राधेश्याम विश्वकर्मा और सीओ (अकबरपुर) अर्पित कपूर घटनास्थल पर आ गए. पुलिस अधिकारियों ने लाश का मुआयना किया.

ऐसा लग रहा था जैसे आकाश की हत्या गला दबा कर की गई हो. या फिर उसे पानी में डुबो कर मारा गया हो. उस के शरीर पर चोटों के निशान नहीं थे.

एसआई देशराज सिंह ने शव को माती स्थित पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया. इस के साथ ही आज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज अपहरण के मामले में हत्या की धारा भी जोड़ दी गई. पोस्टमार्टम के बाद आकाश की लाश उस के घर वालों को सौंप दी गई. उसी शाम उस का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

पुलिस इस मामले को काफी संवेदनशील मान कर चल रही थी. हालांकि आकाश एक छोटे व्यवसाई का बेटा था, फिर भी पुलिस को डर था कि कहीं व्यापारी इस के विरोध में न उतर आएं.

इसी के मद्देनजर पुलिस अधिकारी सुनील के सीधे संपर्क में थे और उसे आश्वासन दे रहे थे कि जल्दी ही हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

एसपी राधेश्याम विश्वकर्मा ने आकाश के अपहरण और हत्या के मामले की तह तक पहुंचने के लिए सीओ (अकबरपुर) अर्पित कपूर की निगरानी में एक पुलिस टीम बनाई.

इस टीम में राजपुर थानाप्रभारी नवीन कुमार सिंह, हेडकांस्टेबल सुरेशचंद्र, कांस्टेबल राकेश कुमार, स्वाट टीम प्रभारी रोहित तिवारी, सर्विलांस सेल के राजीव कुमार, प्रहलाद सिंह, मोहित तिवारी, अनूप कुमार तथा प्रशांत को शामिल किया गया.

आकाश के गायब होने के बाद, उस के घर वालों के पास फिरौती के लिए कोई फोन नहीं आया था. न ही पत्र के माध्यम से कोई सूचना आई थी. इस से स्पष्ट था कि उस का अपहरण फिरौती के लिए नहीं किया गया था. इस से पुलिस टीम को लग रहा था कि आकाश की हत्या दुश्मनी या किसी अन्य वजह से की गई होगी.

2 लोगों पर जताया शक

आकाश के पिता सुनील विश्नोई का पान, तंबाकू से संबंधित सामान सप्लाई करने का व्यवसाय था. पुलिस ने सोचा कि हो न हो उस की किसी दुश्मनी का खामियाजा उस के बेटे को भुगतना पड़ा हो. इसलिए इंसपेक्टर नवीन कुमार सिंह ने सुनील विश्नोई से पूछा कि उस की किसी से कोई रंजिश वगैरह तो नहीं है.

‘‘सर, हम लोग छोटे व्यवसाई हैं. रंजिश की बात तो दूर अगर कोई हम से नाराज हो कर चार बातें कह भी जाए तो हम सुन कर चुप रह जाते हैं.’’ सुनील विश्नोई ने दिमाग पर जोर डाल कर बताया कि 3 साल पहले कस्बे के 2 युवकों से उस का माल जबरदस्ती छीनने को ले कर विवाद हुआ था. उन्होंने उसे सबक सिखाने की धमकी भी दी थी.

सुनील विश्नोई के बयान के आधार पर पुलिस बिना देरी किए उन युवकों के घर पहुंच गई. दोनों युवकों को थाने लाया गया पुलिस टीम ने दोनों से अपने तरीके से पूछताछ की. पूछताछ में दोनों बेकसूर लगे तो उन्हें छोड़ दिया गया.

मतलब जांच जहां से शुरू हुई, वहीं आ कर रुक गई. पुलिस अधीक्षक राधेश्याम व सीओ अर्पित कपूर पुलिस टीम के सीधे संपर्क में थे. उन के दिशा निर्देश के बाद टीम ने आकाश के पिता सुनील विश्नोई और मां रानी से पुन: बात की.

दरअसल, पुलिस टीम को जांच आगे बढ़ाने के लिए कहीं से कोई क्लू नहीं मिल रहा था. इसलिए टीम को शक हुआ कि कहीं हत्यारा विश्नोई परिवार का कोई करीबी तो नहीं है. क्योंकि ऐसे लोग अपना काम आसानी से कर जाते हैं और उन पर किसी को शक भी नहीं होता है.

पुलिस टीम ने सुनील, उस की पत्नी रानी व अन्य लोगों से आकाश के गुम होने के बाद परिवार वालों की गतिविधियों के बारे में पूछताछ की. हालांकि इस बात पर सुनील व कुछ अन्य घर वालों ने ऐतराज भी किया. उन का सगासबंधी या पारिवारिक सदस्य ऐसा क्यों करेगा? लेकिन जब पुलिस टीम ने उन्हें समझाया तो वे पिछली बातें याद करने के लिए दिमाग पर जोर डालने लगे.

कुछ देर बाद सुनील विश्नोई ने बताया कि जब वे लोग आकाश को तलाश कर रहे थे तो घर वाले 2-2, 3-3 के ग्रुप में थे. लेकिन शिवम सब से अलग अकेला घूम रहा था. इतना ही नहीं वह कुछ घबराया हुआ भी दिख रहा था. पति की बात खत्म होते ही रानी ने बताया कि घटना वाली रात जब वह आकाश को देखने शिवम के घर गई थीं तो उस ने उसे दरवाजे पर ही रोक दिया था और खुद घर में देखने चला गया था.

सुनील विश्नोई के मकान के तीसरे नंबर का मकान शिवम का था. पुलिस शिवम के घर पहुंची. उस से पूछताछ की गई तो उस ने कहा, ‘‘आकाश मेरा चचेरा भाई था. मैं उसे बहुत प्यार करता था. भला मैं उस के साथ ऐसा कैसे कर सकता हूं? उसे ढूंढने के लिए मैं ने रात दिन एक कर दिया और आप उसे मारने की बात कह रहे हैं.’’

शिवम ने बिना घबराए जिस तरह अपनी बात कही, उस से पुलिस को लगा कि शायद शिवम सच बोल रहा है. अत: पुलिस ने उसे हिदायत दे कर छोड़ दिया. शिवम पुलिस की पकड़ से बच तो गया, लेकिन अब उसे डर सताने लगा. इसी डर से वह घर में किसी को बिना कुछ बताए फरार हो गया.

थानाप्रभारी नवीन सिंह को जब मुखबिर के जरिए पता चला कि शिवम फरार हो गया है तो उन का माथा ठनका. उन्होंने इस बाबत जब शिवम के पिता विनोद विश्नोई से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि शिवम बहुत परेशान था. वह खाना भी ठीक से नहीं खा पा रहा था. कोई बात पूछने पर उलझ जाता था. फिर अकस्मात कहीं चला गया. वह कहां गया और किस हालत में है उन्हें नहीं पता.

यकीन नहीं था भाई ही ऐसा करेगा

शिवम पर शक गहराया तो पुलिस टीम उस के पीछे पड़ गई. सर्विलांस सेल प्रभारी राजीव कुमार ने उस के मोबाइल फोन के नंबर को सर्विलांस पर लगा दिया. स्वाट टीम प्रभारी रोहित तिवारी भी शिवम की टोह में जुट गए. पुलिस टीम ने अपने खास मुखिबर भी शिवम की सुरागरसी में लगा दिए.

उस की लोकेशन कभी रनियां में मिलती तो कभी पुखरायां में. बारबार लोकेशन बदलने से वह पुलिस की पकड़ में नहीं आ रहा था.

10 नवंबर, 2018 की दोपहर थानाप्रभारी नवीन कुमार सिंह, एसपी द्वारा गठित टीम के साथ विचारविमर्श कर रहे थे, तभी उन्हें एक मुखबिर द्वारा सूचना मिली कि शिवम, राजपुर औरैया रोड स्थित एक ढाबे पर मौजूद है.

मुखबिर की सूचना महत्त्वपूर्ण थी, इसलिए उन्होंने बिना देर किए पुलिस टीम के साथ मुखबिर की निशानदेही पर ढाबे पर छापा मारा. पुलिस को आया देख कर शिवम भागा, लेकिन पुलिस टीम ने उसे दबोच लिया. शिवम को थाना राजपुर लाया गया.

थाने पर जब शिवम ने आकाश की हत्या के संबंध में पूछा गया तो वह रिश्तों की दुहाई दे कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करने लगा. लेकिन जब पुलिस ने सख्ती की तो वह टूट गया.

उस ने हत्या का राज खोलते हुए बताया कि आकाश ने उस की बहन को बदनाम किया था. बदनामी न करने के लिए उस ने आकाश को बहुत समझाया. वह नहीं माना तो उस ने उसे अपहृत कर के बंबे में डुबोडुबो कर मार डाला. हालांकि वह आकाश को बहुत चाहता था और उस की हत्या नहीं करना चाहता था.

गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीम ने घटना को रिक्रिएट किया. रिक्रिएशन के दौरान शिवम ने जिस तरह आकाश का अपहरण किया तथा जिस तरह उसे बंबे में डुबो कर मारा, सब कर के दिखाया. इस से यह बात स्पष्ट रूप से साबित हो गई कि शिवम ही आकाश का हत्यारा था. थानाप्रभारी नवीन कुमार सिंह ने आकाश की हत्या का राज खोलने तथा हत्यारे को पकड़ने की जानकारी एसपी राधेश्याम को दे दी.

चूंकि अभियुक्त शिवम ने आकाश की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था. इसलिए थानाप्रभारी नवीन कुमार सिंह ने शिवम को अपहरण व हत्या की धारा 363, 302 आईपीसी के तहत विधिवत गिरफ्तार कर लिया. पुलिस की जांच और अभियुक्त शिवम के बयानों से पूरी साजिश का पता चल गया.

कानपुर देहात जनपद का कस्बा राजपुर कानपुर मुख्यालय माती से लगभग 30 किलोमीटर दूर है. सुनील विश्नोई राजपुर कस्बे में अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी रानी के अलावा 2 बेटे आकाश, अंशु और एक बेटी राधा थी. सुनील सीधासादा व्यवसाई था. व्यवसाय से ही वह अपने परिवार का पालनपोषण करता था.

सुनील विश्नोई पानतंबाकू से संबंधित चीजों का व्यवसाय करता था. यह सामान वह अकबरपुर, पुखरायां, भोगनीपुर व रनियां आदि कस्बों में पान की दुकानों व जनरल स्टोर्स पर सप्लाई करता था. इस के अलावा वह आसपास के बाजारों में भी अपना सामान बेचता था. इस काम में उसे अच्छी कमाई हो जाती थी.

सुनील विश्नोई का 12 वर्षीय पुत्र आकाश पढ़ने में जितना तेज था, उस से कहीं ज्यादा शरारती भी था. पढ़ाई के साथसाथ वह अपने पिता के व्यवसाय में हाथ बंटाता था. आकाश की मां रानी व बहन राधा भी काम में हाथ बंटाती थीं.

पतिपत्नी नहीं समझ पाए शिवम की नीयत

सुनील के घर से 2 मकान आगे उस का बड़ा भाई विनोद रहता था. विनोद किसान था. खेती की उपज से वह अपने परिवार का पालनपोषण करता था. विनोद के बेटे का नाम शिवम था. वह खेती के कामों में अपने पिता का हाथ बंटाता था. विनोद गुस्सैल स्वभाव का था. इसलिए मोहल्ले के लोग उसे पसंद नहीं करते थे.

सुनील और विनोद दोनों भाइयों में खूब पटती थी. दोनों का एकदूसरे के घरों में आनाजाना व उठनाबैठना था. सुनील का बेटा आकाश व विनोद का बेटा शिवम चचेरे भाई थे. उन में भी खूब पटती थी. दोनों एक दूसरे के घरों में बेरोकटोक आतेजाते थे.

शिवम की बहन का नाम उषा था. वह मोहल्ले के एक युवक से प्यार करती थी. दोनों चोरीछुपे मिलते थे. एक रोज आकाश ने दोनों को हंसते बतियाते और अश्लील हरकत करते देख लिया.

आकाश ने प्रेमप्रसंग वाली बात पहले मां रानी को बताई फिर मोहल्ले के अन्य लोगों को भी बता दी. इस से यह बात पूरे क्षेत्र में फैल गई. शिवम को जानकारी हुई तो उस ने आकाश को फटकारा और आइंदा जुबान बंद रखने को कहा. लेकिन आकाश नहीं माना.

बहन के प्रेमप्रसंग को ले कर शिवम की बदनामी हो रही थी. उस का गली से निकलना दूभर हो गया था. उस ने आकाश को सबक सिखाने की ठान ली और उचित समय का इंतजार करने लगा.

आतंकी वारदात

संपादकीय मोदी सरकार को एक और झटका लगा जब ऐन चुनावों से पहले कश्मीर में आतंकवादियों ने जम्मू से श्रीनगर जा रहे सीआरपीएफ की बसों के काफिले पर आत्मघाती हमला कर के 40 जवानों को शहीद कर दिया. एक मारुति ईको वैन में 70 किलोग्राम विस्फोटक पदार्थ भरा गया और यह 78 वाहनों के बीच आ गई और फिर उस को उड़ा दिया गया जिस से 2 बसों में सवार सैनिकों में से 40 की तुरंत मुत्यु हो गई.

पुलवामा के आदिल अहमद डार ने हमले को अंजाम दिया. बाद में सोशल मीडिया पर उस का मैसेज वायरल हुआ जो घटना से कुछ दिनों पहले रिकौर्ड किया गया था. पाकिस्तान से संचालित किए जा रहे जैश ए मोहम्मद ने भी दावा किया कि उस ने हमला करवाया.

दिल दहलाने वाले इस हत्याकांड ने फिर जगजाहिर कर दिया है कि भारतीय जनता पार्टी और महबूबा मुफ्ती की साझी सरकार का आतंकवादियों पर कोई असर नहीं पड़ा है और वे अपना अलगाववाद किसी भी सूरत में छोड़ने को तैयार नहीं.

इस तरह की आतंकवादी घटना का हो जाना देश की गुप्तचर संस्थाओं के निकम्मेपन की पोल खोलता है क्योंकि यह कांड बिना पूर्व योजना के नहीं किया जा सकता है. इस के लिए लंबी प्लानिंग चाहिए होती है और इतने सारे वाहन किस समय कहां होंगे, यह पता होना जरूरी है. हमारी गुप्तचर संस्थाएं यदि यह सूंघ नहीं पाईं तो बेहद अफसोस की बात है.

कश्मीर में ही नहीं, देश के कई हिस्सों में आतंकवादियों के हौसले ऐसी करतूतों के सफल हो जाने से बुलंद हो जाते हैं. पंजाब में छिटपुट सुरसुराहाट शुरू हो गई है. छत्तीसगढ़ में माओवादी चुप नहीं हैं. उत्तरपूर्व में प्रस्तावित नागरिक कानून के कारण बेहद नाराजगी है. कश्मीर में हमारी सुरक्षाव्यवस्था में साफ दिखता क्रैक इन सब के हौसले मजबूत करता है.

कहने को तो केंद्र में हमारे पास एक मजबूत सरकार है पर जब सारे फैसलों के लिए केवल एक ही शख्स अधिकृत हो तो परेशानियां हो सकती हैं. भाजपा अगर महबूबा मुफ्ती के मारफत जम्मूकश्मीर पर ले दे कर फैसले करने के मूड में होती तो शायद शांति का कुछ माहौल बनता पर दोनों कट्टरवादियों ने अपनेअपने स्टैंड पर अड़े रह कर अलगाववादी आतंकवादियों को भरपूर मसाला दे दिया. आम कश्मीरी को यह भरोसा नहीं हो पा रहा है कि उस का विकास तो भारत के साथ ही होना है.

धर्म के नाम पर उसे अलग करने की छूट मिली हुई है क्योंकि दिल्ली में बैठी केंद्र सरकार खुद ही हर समय धर्म का आलाप करती रहती है. जब नागरिकता कानून में धर्म को आधार बनाया जा सकता है तो कश्मीरियों को कैसे समझाएंगे कि अल्पसंख्यक हो कर भी वे भारत में कहीं ज्यादा सुखी रहेंगे. कुछ बिगड़ैल सिरफिरे तो अति कराएंगे ही, जैसे मैदानी इलाकों में गौरक्षकों से कराई जाती है.

वार पर वार (आखिरी भाग)

पिछले अंकों में आप ने पढ़ा था : सरकारी नौकरी कर रही नमिता का बौस भूषण राज उसे पाना चाहता था. नमिता ने यह बात अपनी एक साथी प्रीति को बताई तो वह नमिता से बोली कि तुम्हें भी रुपएपैसे के साथसाथ जवानी का मजा उठाना चाहिए. यह सुन कर नमिता हैरान रह गई, लेकिन फिर नमिता ने सोचा कि क्यों न वह अपना ट्रांसफर कहीं और करा ले, पर इस बारे में भी भूषण राज को पता चल गया और मामला बिगड़ गया. अब पढि़ए आगे…

प्रीति आगे बोली, ‘‘अगर तुम्हारी नौकरी बनी रहेगी तो सारी सुखसुविधाएं तुम्हारे कदमों में बिछी रहेंगी. तुम्हारी सारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा. अच्छे घर में शादी हो जाएगी. और क्या चाहिए तुम्हें?’’

नमिता की समझ में नहीं आया कि वह अपनी नौकरी कैसे बचा सकती थी? लेकिन पूछा नहीं… प्रीति खुद ही बताने लगी, ‘‘तुम नौकरी छोड़ दोगी तो दूसरी नौकरी जल्दी कहां मिलेगी? वह भी सरकारी नौकरी… प्राइवेट नौकरी भले ही मिल जाए.

‘‘पर, हर जगह एक ही से हालात हैं नमिता. इनसानरूपी मगरमच्छ हर जगह मुंह खोले जवान लड़कियों को निगलने के लिए तैयार रहते हैं. समझौता कर लो. किसी को पता भी नहीं चलेगा. सुख तुम्हारी झोली में भर जाएंगे और नौकरी भी बची रहेगी.’’

नमिता का शक सच में बदल गया. कई बार उसे लगता था कि प्रीति उसे किसी न किसी जाल में फंसाएगी… वह बौस भूषण राज की दलाल थी.

उस ने प्रीति को गौर से देखा, तो वह हलके से मुसकराई. प्रीति बोली, ‘‘तुम अपने मन में कोई शक मत पालो. उस से तुम्हारी समस्या का समाधान नहीं होगा.

तुम मुझे भले ही बुरा समझो, पर इस में तुम्हारी ही भलाई है. सोचो, खूबसूरती और जवानी का क्या इस्तेमाल…?’’

नमिता अच्छी तरह समझ गई थी कि इस दुनिया में मर्द ही नहीं, बल्कि औरतें भी एकदूसरे की दुश्मन होती हैं. औरतें कब नागिन बन कर किसी को डस लें, पता ही नहीं चलता. उस ने एक कठोर फैसला किया.

प्रीति अभी तक नमिता के दिमाग की सफाई करने में जुटी हुई थी, ‘‘औरत और मर्द के संबंध में किसी का कुछ नहीं बिगड़ता, पर सुख दोनों को मिलता है… तुम ठीक से समझ रही हो न? जा कर एक बार बौस से माफी मांग लो. वे जैसा कहें, कर दो.’’

अब नमिता को किसी और प्रवचन की जरूरत नहीं थी. वह झटके से उठी और धीरेधीरे कदमों से बौस भूषण राज के चैंबर में चली गई. आज न तो उस के मन में डर था, न वह कांप रही थी. उस की आंखें भी झुकी हुई नहीं थीं. वह भूषण राज की आंखों में आंखें डाल कर देख रही थी.

पहले तो भूषण राज चौंका, फिर कुरसी से उठ कर बोला, ‘‘आओआओ, निम्मी. कैसी हो?’’ उस के मुंह से लार टपकने लगी थी.

‘‘मैं ठीक हूं सर…’’ नमिता ने सपाट लहजे में कहा, ‘‘मैं आप से माफी मांगने आई हूं, उस सब के लिए, जो अभी

तक हुआ है और उस सब के लिए, जो अभी तक नहीं हुआ, पर कभी भी हो सकता है.’’

नमिता का अंदाज ऐसा था, जैसे वह कह रही हो, ‘भूषण साहब, मैं आप को देखने आई हूं कि कितने खूंख्वार भेडि़ए हैं आप. किसी तरह आप औरत के शरीर को खाते हैं, नोंच कर या पूरा… चलिए दिखाइए अपनी ताकत.’

भेडि़ए की खुशी का ठिकाना न रहा. शिकार अपनेआप उस के जाल में फंस गया था. वह अपनी जगह से उठा और इस तरह अंगड़ाई ली, जैसे वह अच्छी तरह जानता था कि अब शिकार उस के पंजे से बच कर कहीं नहीं जा सकता. उसे अपनी चालों पर पूरा भरोसा था. वह धीरेधीरे मुसकराते हुए आगे बढ़ रहा था.

भेड़ को डर नहीं लग रहा था. वह सीधे तन कर खड़ी थी. भेडि़या नजदीक आ गया था, वह फिर भी नहीं डरी.

भेडि़या थोड़ा सहमा… इस भेड़ को आज क्या हो गया. वह उस के भयानक मुंह के तीखे दांतों और नुकीले पंजों से भी नहीं डर रही थी.

भेडि़या भेड़ को जिंदा निगलने की जल्दबाजी में था. भेड़ अगर तन कर खड़ी रही, उस से डर कर भागी नहीं, तो फिर शिकार करने का फायदा क्या?

भेडि़ए ने अपने नुकीले पंजे भेड़ के कंधे पर रखे और दर्दनाक हालत तक उस के नरम गोश्त में चुभाया, पर भेडि़ए को भेड़ के कंधे पत्थर के लगे. उस ने अपना चेहरा भेड़ के खूबसूरत लपलपाते चेहरे की तरफ बढ़ाया तो उसे लगा जैसे वह एक आग का गोला निगल रहा हो.

नमिता ने बालों को मादक झटका दे कर और छातियों को हलका उभार देते हुए कहा, ‘‘शाम को 7 बजे घर पर आइएगा. घर पर और कोई नहीं है. बस, मैं, आप और पूरी रात.’’

भूषण राज भौचक्का रह गया, पर उस का विवेक तो मर चुका था. वह समझ नहीं सकता था कि ऐसी लड़की जो इतने दिन से उस के हर प्रस्ताव को ठुकरा रही थी, अचानक कैसे बदल गई.

भूषण राज ने दिन कैसे बिताया, यह बताना आसान नहीं, पर नमिता आधे दिन की छुट्टी ले कर यह कह कर चली गई थी कि घर को ठीक करना है.

शाम 6 बजे से ही भूषण राज को बेचैनी होने लगी थी. फिर भी उस ने 7 बजाए. औफिस में नहाया, कपड़ों की 1-2 जोड़ी वह हमेशा अपनी दराज में रखता था. पत्नी को कहा कि देर रात तक मीटिंग चलेगी, वह सो जाए.

शबाब मिल रहा था तो शराब भी होनी चाहिए. 2 बोतलें खरीदीं. शायद नमिता भी पी ले तो रात पूरी मस्त हो जाए.

भूषण राज नमिता के बताए पते पर पहुंचा तो थोड़ा मन खट्टा हुआ. बेहद मिडिल क्लास इलाका था. छोटे मैले मकानों में एक संकरे जीने पर चढ़ कर पुराने से दरवाजे को खटखटाया.

दरवाजा नमिता ने ही खोला था. वह पूरी तरह सजीधजी थी. बढि़या मेकअप. पोशाक जो उस के बदन को ढक कम रही थी, दिखा ज्यादा रही थी. घर में खुशबू फैली थी. रोशनी केवल मोमबत्तियों की थी या 2 टेबल लैंपों की.

नमिता ने उसे बांहों में जकड़ लिया. इसी का तो इंतजार वह महीनों से कर रहा था.

‘‘आज तो बड़े स्मार्ट लग रहे हो सर,’’ कहते हुए वह उसे सोफे पर ले गई. सामने मेज पर खाने का सामान और कई गिलास थे. शायद नमिता जान गई थी, भूषण राज क्या चीज है. उस ने उस के हाथ से बोतलें लीं और कहा कि लाइए, इन्हें मैं फ्रिज में रख दूं.

‘यह कबूतरी तो खुद ही शिकारी के तीर तेज कर रही है…’ भूषण राज ने सोचा. उसे अपने पर गर्व हुआ. है ही वह ताकतवर. कौन चिडि़या है जो उस के जाल से निकल सकती है.

नमिता ने सोफे पर बैठा कर कहा, ‘‘सर, आप कपड़े तो उतारिए, मैं अभी आई.’’

भूषण राज तो सब सावधानियां छोड़ कर कपड़े उतारने लगा और सोफे पर आराम से पसर गया. फिर तसल्ली से खाना ठूंसा? नमिता शायद नहा रही थी.

‘आज तो मजा आ जाएगा… ऐसा सुख तो उसे कभी न मिला था.’

तभी दरवाजे पर खटखट हुई. भूषण राज ने सोचा, ‘कौन हो सकता है इस समय? नमिता ने तो कहा था कि वह अकेली है?’

बिना कपड़ों के किसी के घर में आ जाने पर क्या हो सकता है, वह जान सकता था. पर इस से पहले कि वह कुछ कहता, नमिता दूसरे कमरे से तकरीबन भागती हुई आई और दरवाजा खोल डाला.

बाहर पूरा स्टाफ खड़ा था. कुछ लोग कैमरे भी लिए थे.

‘हैप्पी बर्थडे नमिता’ की आवाज गूंजी और 10-15 लोग कमरे में घुस गए.

भूषण राज फटीफटी आंखों से देख रहा था. उस ने अपने कपड़े उठाने चाहे थे कि नमिता ने झपट कर छीन लिए.

उस के बाद बहुतकुछ हुआ. बहुत सारे फोटो ले लिए गए. भूषण राज की पत्नी को बुला लिया गया. नमिता को ट्रांसफर करने का आदेश पास हो गया. छोटे से घर में हंगामा हो गया. नमिता के घर वाले भी उसी समय पहुंच गए थे.

अब नमिता शान से काम कर रही थी उसी दफ्तर में. भूषण राज ने इस्तीफा दे दिया था और वह शहर बदल कर जा चुका था.

नमिता की हिम्मत और आंखों की अनोखी चमक ने भूषण राज के सारे हौसलों को मात कर दिया. उस को अपने जाल में फंसाने के लिए भूषण राज ने न जाने कितने जतन किए थे, पर अब वह उस के फंदे में आ कर फंस गया था.

विटामिन डी की कमी से बुजुर्गों में हो रही ये परेशानी

विटामिन डी अच्छी सेहत के लिए बेहद जरूरी है. इसका प्रमुख स्रोत धूप होती है. जिस तरह की हमारी जीवनशैली हो गई है उसमें बहुत से लोगों को विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहा. ऐसे में उन्हें कई तरह की बीमारियां होने लगी हैं. खास कर के बुजुर्ग इससे बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं.

हाल ही में हुए एक शोध में ये बात स्पष्ट हुई कि विटामिन डी की कमी से बुजुर्गों में अवसाद की शिकायत अधिक हो रही है. सूर्य की किरणों से दूर रहने से उनमें वसाद का खतरा 75 फीसदी बढ़ गया है. आयरलैंड में हुए इस शोध में ये बात सामने आई कि विटामिन की इस कमी से हड्डियां बुरी तरह से प्रभावित हो रही हैं. इसके अलावा अवसाद के लिए भी ये एक प्रमुख कारण है.

आपको बता दें कि बुजुर्गों पर हुए इस शोध में 50 वर्ष से अधिक करीब 4000 लोगों को शामिल किया गया. शोध में बुजुर्गों की जीवनशैली को करीब से जांचा गया. इसमें उनके शारिरीक और मानसिक सेहत का रिकार्ड रखा गया.

चिकन धनसाक

सामग्री:

– 250 ग्राम चिकन

– 15 ग्राम तुअर दाल

– 10 ग्राम मूंग दाल

– 10 ग्राम मसूर दाल

– 1 बड़ा प्याज बारीक कटा

– 1 बड़ा टमाटर बारीक कटा

– थोड़ी सी अदरक कटी

– थोड़ी सी लहसुन कलियां कटी हुई

– 10 ग्राम मेथीपत्ती

– थोड़ी सी पुदीनापत्ती

– थोड़ी सी धनियापत्ती

– 1 बड़ा चम्मच कद्दू कटा

– 1 बड़ा चम्मच बैंगन कटा

– 1 बड़ा चम्मच आलू कटा

– 1 बड़ा चम्मच लौकी कटी

– थोड़ी सी हल्दी पाउडर

– नमक स्वादानुसार

बनाने की विधि

– सभी दालों को आधे घंटे के लिए पानी में भिगो कर रखें.

– चिकन को थोड़े से नमक और गरममसाले के साथ मिला लें.

– एक कुकर में दाल, नमक, पुदीनापत्ती, मेथीपत्ती, धनियापत्ती और सब्जियों को डाल कर 1 सीटी   लगाएं.

– अब एक पैन में घी गरम कर उस में प्याज, लहसुन, अदरक को सुनहरा होने तक फ्राई करें.

– अब टमाटर डाल कर फ्राई करें.

– फिर इस में सौंफ पाउडर, गरममसाला, हलदी और लालमिर्च डाल कर फ्राई करें.

– थोड़ी देर बाद चिकन भी डाल दें और पकने तक फ्राई करें.

– अब दाल के मिश्रण में पका हुआ चिकन और इमली डाल कर उबालें.

– चावल के साथ गरमागरम सर्व करें.

रंग-बिरंगी साड़ियों से लहलहा उठा खेत

तेज धूप किसान की हर दिन मुसीबत बन रही थी. उस की फसल झुलस रही थी. वह बाजार जाता तो ज्यादा भाव सुन कर ही लौट आता. संगीसाथी भी कुछ अच्छी सलाह नहीं दे पाए. पर कुछ बुजुर्ग किसानों ने अपने तजुरबे साझा किए. उस के दिमाग ने भी काम करना बंद सा कर दिया. झुलसती फसल देख वह कुछ कर नहीं पा रहा था. आखिर उस किसान ने फसल को बरबाद होने से बचाने की तरकीब सोची जो कामयाब भी रही.

यह मामला कर्नाटक के हुबली कसबे का है. वहां के एक किसान वेंकटेश बी. को अपनी अनार की फसल को धूप से बचाने का यही कारगर उपाय सूझा और अपने खेत में अपनाया. तरीका था खेत को धूप से बचाने के लिए रंगीन साड़ियों से ढकना. रंगबिरंगी साड़ियों को देख आसपास के लोग भी वहां आ कर सैल्फी लेने लगे. यही सैल्फी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो गई और समूचे इलाके में हैरानी का विषय बन गई.
यहां तक कि कर्नाटक में मुंदरगी और गडग इलाके के बीच सफर करने वालों के लिए अनार का यह खेत सैल्फी पौइंट बन गया. लोग यहां रुक कर सैल्फी क्लिक कर रहे हैं और दूसरे लोगों को ह्वाट्सएप व फेसबुक के जरीए शेयर कर रहे हैं.

दरअसल, किसान वेंकटेश बी. ने तेज धूप से अपनी फसल को बचाने के लिए उसे रंगबिरंगी साड़ियों से ढक दिया. इस से उन का रंगबिरंगा खेत लोगों के बीच खासा लोकप्रिय हो गया है. किसान वेंकटेश बी. ने अपने 10 एकड़ खेत में अनार की खेती की है. इस जमीन को उन्होंने 10 साल के लिए लीज पर लिया हुआ है.

2 बोरवैल की मदद से उन्होंने ड्रिप सिंचाई कर के 10 एकड़ में यह फसल उगाई है. अब जब तापमान ज्यादा हो गया है तो अपनी फसल को बचाने के लिए उन्होंने हर पौधे को साड़ी से और हर फल को अखबार से ढक दिया है. साड़ी व अखबार के अंदर पौधे अच्छी तरह फलफूल रहे हैं.

वेंकटेश बी. ने बताया ”मैं ने अनार के 4,500 पौधे उगाए हैं. बाजार में फसल को ढकने वाला क्लौथ नैट काफी महंगा था और एक क्लौथ नैट से महज 30-40 पौधों को ही ढका जा सकता था जबकि मेरी 10 एकड़ की फसल को ढकने के लिए क्लौथ नैट खरीदने में मुझे तकरीबन सवा लाख रुपए से ज्यादा ही खर्च करने पड़ते.

”क्लौथ नैट केवल एक फसल के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है और मैं उन्हें दोबारा इस्तेमाल नहीं कर सकता था. दूसरे किसानों से बात कर के मैं ने अपने पौधों को साड़ी से ढकने का फैसला किया. इस के बाद उन्होंने पुरानी साड़ियां खरीदीं. एक साड़ी के लिए महज 16 रुपए खर्च किए और कुल 4,500 साडिय़ां खरीदीं.

”मैं ने हर पौधे को ठीक तरीके से कवर करने के लिए हर साड़ी की सिलाई की वहीं फलों को बचाने के लिए उन्हें अखबार से ढका.”

इस तरह किसान वेंकटेश बी. का सपना साकार हो गया. आज वे काफी खुश हैं. उन्होंने कड़ी मेहनत करने के बाद 10-12 लाख की लागत लगा कर 10 एकड़ में यह फसल उगाई है, जिस से उन्हें 55,000 से 60,000 प्रति टन कमाई की उम्मीद है.

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