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मैं जिस लड़के से प्यार करती थी, उससे शादी नहीं हो पाई, वह अब भी मेरे पीछे पड़ा रहता है क्या करूं ?

सवाल
मैं जिस लड़के से प्यार करती थी, उस से मेरी शादी नहीं हो पाई. हम दोनों की अलग अलग शादी हो गईं. लेकिन वह अब भी मेरे पीछे पड़ा रहता है और न मिलने पर जान देने की धमकी देता है. क्या करूं?

जवाब
अगर उसे आप से बहुत प्यार था, तो हर हालत में उसे आप से ही शादी करनी चाहिए थी. अब चूंकि ऐसा नहीं हुआ, तो आप उसे भूल कर पूरी तरह पति का ही खयाल रखें. वह जान कतई नहीं देगा. अलबत्ता, उस के चक्कर में आप अपने पति का यकीन खो सकती हैं.

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काफी पहले मौका पा कर मैंने एक लड़की के साथ संबंध बनाया था, अब मैं क्या करूं?

सवाल
मुझे एक लड़की से प्यार हो गया है. उस की नानी का घर मेरे पड़ोस में है. काफी पहले मौका पा कर मैं ने उस के साथ हमबिस्तरी की थी. मुझे यह नहीं पता कि वह भी मुझ से प्यार करती है या नहीं. मैं क्या करूं?

जवाब
आप ने उस के साथ हमबिस्तरी करने की हिम्मत तो कर ली, पर यह पूछने में शर्म आ रही है कि वह आप से प्यार करती है या नहीं. अब जब भी मौका मिले, तो उस से पूछ लें. अगर वह प्यार का इकरार करे तो ठीक है, वरना उस का पीछा करना छोड़ दें.

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इश्क के दरिया में डूबी नसरीन : प्यार करने की भूल

मुंबई के निकट जिला ठाणे के उपनगर मुंब्रा में एक सिनेमाघर है आलीशान. इस सिनेमाघर से थोड़ी दूरी पर एक बिल्डिंग है नूरानी. 45 वर्षीय उमर मोहम्मद शेख इसी इमारत की चौथी मंजिल के एक फ्लैट में अपने परिवार के साथ रहते थे. फ्लैट किराए का था. उमर शेख का मुंब्रा में अच्छा कारोबार था, साथ ही मानसम्मान भी. लोग उन्हें आदर से उमर भाईजान कह कर बुलाते थे.

उमर शेख के परिवार में उन की पत्नी जुबेरा शेख, 3 बेटियां और एक बेटे को मिला कर 6 सदस्य थे, जो अब 5 रह गए थे. उन का बेटा भरी जवानी में एक जानलेवा बीमारी का शिकार हो कर दुनिया को अलविदा कह गया था.

वक्त ने ऐसा कहर ढाया कि एक सड़क दुर्घटना में उमर मोहम्मद की कमर में भी चोटें आईं और वह बिस्तर पर पहुंच गए. अस्पताल के भारीभरकम खर्चे की वजह से वह अपनी कमर का औपरेशन भी न करवा पाए थे. लाचार हो कर उन्हें घर में बैठना पड़ा. घर बैठ जाने से उन के घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई. कारोबार बंद होने से उन की आमदनी भी बंद हो चुकी थी.

घर में जब भूखों मरने की नौबत आई तो उन की बेटी नसरीन ने घर की जिम्मेदारियां उठाने का फैसला किया. सामाजिक रस्मोरिवाज के चलते नसरीन ने अपना बुरका उतार फेंका.

20 वर्षीय सुंदर स्वस्थ और महत्त्वाकांक्षी नसरीन उमर मोहम्मद की दूसरे नंबर की बेटी थी. नसरीन ने मुंब्रा के एक कालेज से 12वीं पास की थी. घरपरिवार की माली हालत देख नसरीन नौकरी की तलाश में लग गई. जल्दी ही उस की यह तलाश पूरी हो गई. उसे मुंबई के अंधेरी वेस्ट के ‘चाय पर चर्चा’ नाम के एक कौफी हाउस में नौकरी मिल गई.

अपनी मेहनत और विनम्र स्वभाव से नसरीन ने एक साल के अंदर कौफी हाउस के मैनेजमेंट का दिल जीत लिया. इस से प्रभावित हो कर कौफी हाउस के मैनेजमेंट ने उस का वेतन बढ़ा दिया. साथ ही उसे प्रमोशन दे कर उसे कोलाबा फोर्ट स्थित अपनी पौश इलाके की ब्रांच में नियुक्त कर दिया.

नसरीन को ‘चाय पर चर्चा’ कौफी हाउस की मैनेजर बन कर आए हुए अभी 6 महीने भी नहीं हुए थे कि नसरीन की विनम्रता और मेहनत से कौफी हाउस की आय काफी बढ़ गई थी. उस कौफी हाउस से कोई भी कस्टमर नाराज हो कर नहीं जाता था.

कौफी हाउस की क्वालिटी में सुधार तो आया ही, लोग उस की प्रशंसा भी करने लगे. ‘चाय पर चर्चा’ कौफी हाउस की नौकरी से घर की स्थिति सुधर गई तो नसरीन ने अपने पिता की कमर का औपरेशन करवाया. अब नसरीन का इरादा अपनी बड़ी बहन का निकाह करवाने का था, लेकिन वह ऐसा कर पाती, इस से पहले ही ऐसा कुछ हो गया कि उमर मोहम्मद का परिवार अधर में लटक कर रह गया.

31 जुलाई, 2018 की रात नसरीन के परिवार वालों पर बहुत भारी पड़ी. उस दिन सुबह के साढ़े 7 बजे नसरीन ने जल्दीजल्दी लंच का डिब्बा तैयार कर के बैग उठाया और मां से यह कह कर घर से बाहर निकल गई कि 8 बजे की लोकल ट्रेन छूट जाएगी. उस ने चाय तक नहीं पी थी.

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नसरीन हुई लापता

दिन में उस ने 2-3 बार घर पर फोन भी किया, सब ठीक था. लेकिन घर वालों के दिलों की धड़कनें तब बढ़ने लगीं, जब रात 10 बजे तक न तो नसरीन घर लौटी और न उस ने फोन किया. नसरीन कभी घर आने में लेट होती थी तो फोन कर के इस की जानकारी अपने घर वालों को दे देती थी. घर वालों ने उस के मोबाइल पर फोन लगाया तो वह भी बंद मिला.

जब 11 बजे तक नसरीन की कोई जानकारी नहीं मिली तो उमर शेख को नसरीन की चिंता होने लगी. उन्होंने कैफे में फोन कर के पूछा तो पता चला कि नसरीन अपने समय पर निकल गई थी.

उमर मोहम्मद ने अपने सगेसंबंधियों के साथसाथ जानपहचान वालों को भी फोन कर के नसरीन के बारे में पूछा, लेकिन कहीं से कोई जानकारी नहीं मिली.

जैसेजैसे रात गहराती जा रही थी, उमर शेख के परिवार की चिंता बढ़ती जा रही थी. उन्होंने नसरीन के प्रेमी सलमान खान को भी फोन किया, लेकिन उस का फोन भी बंद था.

बारबार कोशिश करने के बाद आखिर सलमान खान का फोन मिल गया. उस ने बताया कि नसरीन उसे 7 बजे चर्चगेट के ओवल पार्क में मिली थी. वहां दोनों कुछ देर तक बैठे रहे और 8 बजे ओवल पार्क से बाहर आए थे.

वहां से नसरीन यह कहते हुए निकल गई थी कि वह वीटी रेलवे स्टेशन के पास वाले स्टालों से घर के लिए कुछ शौपिंग कर के घर जाएगी. इस के बाद का उसे कुछ पता नहीं है, क्योंकि वह घर लौट आया था. साथ ही उस ने यह भी पूछा कि परेशान क्यों हैं?

‘‘बेटा, नसरीन अभी तक घर नहीं पहुंची है.’’ उमर शेख ने भरे गले से बताया.

‘‘घबराओ नहीं चाचा, मैं आ रहा हूं.’’ कह कर सलमान ने फोन काट दिया.

रात के करीब 3 बजे सलमान जब नसरीन के घर पहुंचा तो घर में सभी दुखी बैठे थे. नसरीन की मां जुबेरा की हालत सब से ज्यादा खराब थी.

‘‘इतना लेट क्यों आए बेटा?’’ उमर शेख के पूछने पर सलमान ने अपनी बाइक खराब होने की बात बताई.

सलमान खान आधे घंटे तक उन के घर बैठा रहा. वह घर वालों को सांत्वना दे रहा था. इस के बाद वह उमर शेख और उन के साले को साथ ले कर नसरीन की तलाश में निकल पड़ा.

शुरू हुई नसरीन की तलाश

नसरीन की तलाश में निकले सलमान और उमर शेख पहले मुंब्रा पुलिस थाने गए. वहां उन्होंने ड्यूटी अफसर को नसरीन के बारे में सारी बातें बता कर शिकायत दर्ज करवाई. नसरीन की गुमशुदगी दर्ज करने के बाद ड्यूटी अफसर ने उन्हें वीटी रेलवे पुलिस और आजाद मैदान पुलिस थाने जाने का सुझाव दिया. वजह यह कि नसरीन जिस एरिया में काम करती थी, वह आजाद मैदान पुलिस थानाक्षेत्र में आता था.

मुंब्रा पुलिस के सुझाव पर सलमान खान ने नसरीन के पिता उमर शेख और उन के साले के साथ मुंब्रा से सुबह 4 बजे वीटी स्टेशन जाने वाली लोकल ट्रेन पकड़ी. रेलवे पुलिस थाने में पता करने के बाद वे लोग आजाद मैदान पुलिस थाने के लिए निकले. लेकिन वहां न जा कर तीनों आजाद मैदान पुलिस थाने के बजाय पास ही दैनिक नवभारत टाइम्स के सामने स्थित आजाद मैदान चौकी पहुंच गए.

चौकी में तैनात सिपाहियों ने उन्हें कोलाबा पुलिस थाने जाने को कहा. कोलाबा पुलिस थाने के पुलिस अफसरों ने उन्हें वापस आजाद मैदान भेज दिया. इस भागदौड़ में उमर शेख काफी थक गए थे. लेकिन बेटी का मामला था, इसलिए वह दौड़ते रहे.

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‘‘बेटा सलमान, यहां से ओवल पार्क कितनी दूर है? हम चाहते हैं कि वह जगह भी देख लें, जहां तुम दोनों मिले थे.’’

उमर शेख के सवाल से सलमान के चेहरे का रंग उड़ गया. फिर भी उस ने खुद को संभाल कर कहा, ‘‘बस यहीं पास में ही है. वहां जाने के लिए हम टैक्सी कर लेते हैं.’’

‘‘नहीं, उस की कोई जरूरत नहीं है. जब पास में है तो पैदल ही चलते हैं.’’ कह कर उमर शेख ओवल पार्क की तरफ चल दिए.

बेटी की लाश मिलेगी, उमर शेख ने सोचा न था

तब तक सुबह के साढ़े 7 बज चुके थे. इस के पहले कि ये लोग ओवल पार्क पहुंचते, आजाद मैदान पुलिस थाने की पैट्रोलिंग टीम वहां पहुंची हुई थी. पुलिस एक युवती की लाश को घेरे खड़ी थी. वहां काफी लोग एकत्र थे. तभी एक व्यक्ति ने भीड़ से बाहर आ कर बताया कि एक युवती की लाश पड़ी है. उस की बात सुन कर उमर शेख के होश उड़ गए.

भीड़ को चीरते हुए जब वह शव के पास पहुंचे तो उन के मुंह से दर्दभरी चीख निकल गई. वह छाती पीटपीट कर रोने लगे. उन्हें रोतेबिलखते देख पुलिस टीम ने पहले उन्हें संभाला फिर पूछताछ की. उन्होंने बता दिया कि मृतका उन की बेटी नसरीन है. उस की पहचान उन्होंने कफन से बाहर निकली जूती से ही कर ली थी.

नसरीन की लाश वहां पड़ी होने की जानकारी सुबह ओवल पार्क में घूमने निकले लोगों ने पुलिस कंट्रोल रूम को दी थी. पुलिस कंट्रोल रूम ने यह जानकारी मुंबई के सभी पुलिस थानों के साथसाथ उच्चाधिकारियों को भी दे दी थी.

घटनास्थल ओवल पार्क था और यह जगह थाना आजाद मैदान के क्षेत्र में आती थी. थाना आजाद मैदान के ड्यूटी अफसर इंसपेक्टर प्रदीप झालाटे ने लाश मिलने की जानकारी थानाप्रभारी वसंत वाखारे के साथसाथ पुलिस पैट्रोलिंग टीम को भी दे दी थी.

जानकारी मिलते ही पैट्रोलिंग टीम घटनास्थल पर पहुंच गई. बाद में थाना आजाद मैदान के सीनियर इंसपेक्टर वसंत वाखारे अपने सहायक इंसपेक्टर बलवंत पाटील, सहायक इंसपेक्टर रविंद्र मोहिते और सबइंसपेक्टर प्रदीप झालाटे के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

उन्होंने नसरीन की लाश का निरीक्षण कर के उसे वीटी स्थित जीटी अस्पताल भेज दिया. अस्पताल के डाक्टरों ने लाश देखने के बाद नसरीन को मृत घोषित कर दिया.

थानाप्रभारी वसंत वाखारे ने नसरीन की लाश को पोस्टमार्टम के लिए जे.जे. अस्पताल भेज दिया और मृतका के पिता उमर शेख, उन के साले और सलमान खान को थाने ले आए. पिता की ओर से शिकायत दर्ज करने के बाद थानाप्रभारी ने जांच शुरू कर दी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, मृतका नसरीन के शरीर पर चाकू के 17 घाव थे. मतलब उसे बड़ी बेरहमी से मारा गया था. उस की मौत ज्यादा खून बहने से हुई थी.

पुलिस की प्रारंभिक जांच में नसरीन की हत्या के पीछे प्यार और धोखे की कहानी लग रही थी. हकीकत तक पहुंचने के लिए पहले नसरीन के व्यक्तिगत जीवन की हकीकत पता करनी जरूरी थी.

पुलिस की तफ्तीशी टीम ने सब से पहले नसरीन की कुंडली खंगालनी शुरू की. पुलिस टीम ने नसरीन की फ्रैंड्स और ‘चाय पर चर्चा’ कौफी हाउस के कर्मचारियों से गहराई से पूछताछ की. नसरीन के घर और ‘चाय पर चर्चा’ कौफी हाउस से शुरू की गई तफ्तीश ने पुलिस को जल्द ही सफलता दिला दी. पुलिस के राडार पर नसरीन का प्रेमी सलमान खान आ गया. सलमान खान वैसे भी पुलिस की नजर में संदिग्ध था.

जल्दी ही यह बात साफ हो गई कि नसरीन का हत्यारा सलमान खान ही है. सच्चाई जान कर नसरीन के घर वाले हैरत में रह गए. जिसे अपना समझा था, वही बेटी का हत्यारा निकला. वे लोग तो उस के साथ नसरीन का निकाह करने के लिए तैयार थे. पुलिस जांच और सलमान खान के बयान से नसरीन हत्याकांड की जो कहानी सामने आई, वह कुछ इस तरह थी-

गांव से मुंबई पहुंचे सलमान को मिली प्रेमिका

28 वर्षीय सलमान खान उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के एक गांव का रहने वाला था. उस के पिता का नाम मुश्ताक खान था, जो गांव के साधारण किसान थे. सलमान खान का निकाह हो चुका था. उस की पत्नी 2 बच्चों की मां बन चुकी थी. घर की आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से वह नौकरी की तलाश में मुंबई आ गया था.

मुंबई के भायखला क्षेत्र में उस के कई परिचित रहते थे. उन की मदद से उसे कोलाबा कोर्ट स्थित सन्नी फ्रूट ट्रांसपोर्ट में फ्रूट डिलीवरी की नौकरी मिल गई. फ्रूट ट्रांसपोर्ट का औफिस और ‘चाय पर चर्चा’ कौफी हाउस आसपास थे. नौकरी मिलने के बाद सलमान ने भायखला इलाके में किराए का एक कमरा ले लिया और अपनी बीवी और बच्चों को मुंबई ले आया.

औफिस में सलमान को कई काम करने होते थे. कभीकभी उसे अपने यहां के अफसरों के लिए कौफी का और्डर देने के लिए ‘चाय पर चर्चा’ कौफी हाउस जाना पड़ता था.

जब तक नसरीन फोर्ट स्थित कौफी हाउस में नहीं आई थी, तब तक सलमान का जीवन सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन नसरीन के वहां आने के बाद सलमान के दिल की धड़कनें बढ़ गईं. मनचले सलमान का दिल नसरीन पर आ गया. वह पहली ही नजर में नसरीन का दीवाना हो गया. अब औफिस की सारी चाय और कौफी का और्डर देने वही जाने लगा. जब वह ‘चाय पर चर्चा’ कौफी हाउस में जाता, तो उस की निगाहें नसरीन पर ही टिकी रहती थीं. पहले तो नसरीन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया. लेकिन धीरेधीरे नसरीन को उस की निगाहों की भाषा समझ में आने लगी. नतीजतन जल्दी ही दोनों में दोस्ती हो गई. दोनों एकदूसरे के बारे में सब कुछ जानसमझ कर घुलमिल गए.

सलमान खान का अपना छोटा सा परिवार था, जबकि नसरीन कुंवारी थी और उस के ऊपर अपने परिवार की पूरी जिम्मेदारी थी. सलमान शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप है, यह जानते हुए भी नसरीन ने अपने संबंधों पर कोई विरोध या आपत्ति नहीं की. इस की जगह उस ने सलमान से निकाह करने के लिए भी हां कर दी थी.

उस की बस यह शर्त थी कि पहले वह अपने पिता उमर शेख की कमर का औपरेशन कराएगी. अब समस्या यह थी कि नसरीन के परिवार वाले क्या एक शादीशुदा से उस का निकाह करने को तैयार होंगे. लेकिन यह समस्या भी हल हो गई.

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नसरीन ने अपने जानपहचान वालों से आर्थिक मदद ले कर अपने पिता को औपरेशन के लिए एक प्राइवेट अस्पताल में दाखिल करवा दिया. इस औपरेशन में सलमान ने नसरीन का दोस्त बन कर उमर शेख की काफी मदद की. इस से प्रभावित हो कर नसरीन के परिवार ने उस के और नसरीन के रिश्ते को मंजूरी दे दी थी.

नसरीन और सलमान दोनों ही राजी थे, ऐसे में किसी को क्या आपत्ति होती. परिवार की तरफ से सिगनल मिलने के बाद नसरीन और सलमान दोनों ड्यूटी के बाद खुल कर मिलने लगे. दोनों साथसाथ घूमते और मौजमस्ती करते.

लेकिन उस मासूम कली को निचोड़ लेने के बाद सलमान का असली चेहरा सामने आ गया. धीरेधीरे उसे नसरीन बोझ लगने लगी. यह जानते हुए भी कि नसरीन के कंधों पर उस की बहन के निकाह की जिम्मेदारी है, वह नसरीन पर निकाह का दबाव बनाने लगा. दरअसल, उस की सोच यह थी कि नसरीन उस की पत्नी बन गई तो उस का वेतन भी उस के घर आने लगेगा. समस्या यह थी कि नसरीन निकाह के लिए तैयार नहीं थी.

इसी को ले कर सलमान खान नसरीन पर संदेह करने लगा. इस बात पर दोनों में लड़ाईझगड़ा भी होता. वह चाहता था कि या तो नसरीन उसे छोड़ दे, फिर शादी करे. लेकिन यह नसरीन के लिए संभव नहीं था, वह सलमान को बहुत प्यार करती थी. दूसरी ओर जब सलमान को यकीन हो गया कि नसरीन उस की जिंदगी से जाने वाली नहीं है, तो उस ने नसरीन को अपनी जिंदगी से बाहर निकालने का एक क्रूर फैसला ले लिया.

प्रेमी बना हत्यारा

घटना के दिन सलमान ने नसरीन को चर्चगेट के ओवल पार्क में बुलाया. नसरीन अपनी ड्यूटी खत्म कर के जब ओवल पार्क पहुंची तो सलमान उस के लेट पहुंचने को ले कर खरीखोटी सुनाने लगा. इस पर नसरीन का चेहरा भी लाल हो गया.

उस ने कहा, ‘‘सलमान, आखिर तुम्हें मुझ से प्रौब्लम क्या है? आजकल तुम मुझ से सीधे मुंह बात नहीं करते. मुझे छोटीछोटी बातों पर टौर्चर करते हो.’’

‘‘टौर्चर मैं करता हूं या तुम…आज तुम अपने किस यार से मिल कर आ रही हो?’’ सलमान ने कुटिलता से मुसकराते हुए कहा.

‘‘सलमान, खुदा से डरो. मैं तुम्हारी होने वाली पत्नी हूं. तुम मर्यादा में रहो तो अच्छा है.’’ कह कर नसरीन घर जाने के लिए उठ खड़ी हुई.

लेकिन सलमान खान ने उस का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया, जिस से वह गिर गई. सलमान ने पूरे मैदान का जायजा ले कर अपनी जेब से चाकू निकाला और नसरीन पर हमला कर दिया.

चाकू के 17 वार करने के बाद सलमान वहां से भाग खड़ा हुआ. वह नसरीन का मोबाइल फोन भी अपने साथ ले गया. नसरीन को मौत की नींद सुलाने के 3 घंटे बाद उस ने नसरीन के घर वालों से संपर्क किया. बाद में वह नसरीन के घर गया और उन के साथ नसरीन को ढूंढने में उन की मदद करने लगा.

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पुलिस ने सलमान से विस्तृत पूछताछ के बाद उस के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत केस दर्ज कर के उसे गिरफ्तार कर लिया. बाद में उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे मुंबई की आर्थर रोड जेल भेज दिया गया.

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सौजन्य: मनोहर कहानी

हैप्पी पीरियड्स के लिए हाइजीन से जुड़ी इन बातों पर करें गौर

मासिकधर्म यानी पीरियड्स के दौरान हाइजीन का ध्यान रखना हर महिला के के लिए बेहद जरूरी है. वूमन हैल्थ और्गेनाइजेशन द्वारा कराए गए सर्वे में भारत में सभी तरह की प्रजनन संबंधी बीमारियों के पीछे मेन कारण पीरियड्स के दौरान साफसफाई का ध्यान न रखना पाया गया.

देश के देहातों में मासिकधर्म को ले कर कई तरह के भ्रम फैले हैं. ग्रामीण इलाकों में तो आज भी मासिकधर्म पर बात करना मना सा है, जिस से मासिकधर्म के दौरान साफसफाई की कमी रह जाती है, जो कई बीमारियों का कारण बनती है.

आज भी गिनीचुनी महिलाओं की ही पहुंच उन साधनों तक है, जिन से संपूर्ण हाइजीन तय होती है. ज्यादातर महिलाएं मासिकधर्म और हाइजीनिक हैल्थ प्रैक्टिस के वैज्ञानिक पहलुओं से अनजान हैं. मासिकधर्म के बारे में जानकारी की कमी के कारण न सिर्फ सेहत पर असर पड़ता है, बल्कि यह महिलाओं की मासिक सेहत के लिए भी खतरा हो सकता है. वे तनाव, विश्वास में कमी जैसी परेशानियों से घिर सकती हैं.

मासिकधर्म के दौरान बेसिक हाइजीन को ले कर हर लड़की, महिला को इन बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए:

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सैनिटेशन का तरीका: आज बाजार में कई तरह के साधन मुहैया हैं जैसे सैनिटरी नैपकिन, टैंपून्स और मैंस्ट्रुअल कप जिन से मासिकधर्म के दौरान साफसफाई तय होती है. कुछ महिलाएं अपने पीरियड्स के दौरान अलगअलग दिनों पर अलगअलग प्रकार के सैनिटरी नैपकिन इस्तेमाल करती हैं या फिर अलग प्रकार के उपायों को अपनाती हैं जैसे टैंपून और सैनिटरी नैपकिन. लेकिन कुछ किसी एक प्रकार और ब्रैंड को अपनाती हैं. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि वह आप की जरूरतों के हिसाब से सही है या नहीं.

रोज नहाएं: कुछ समाजों में यह मान्यता है कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं को नहाना नहीं चाहिए. इस सोच के पीछे का कारण यह है कि पुराने जमाने में महिलाओं को खुले में या फिर किसी नदी अथवा झील के किनारे खुले में नहाना पड़ता था. नहाने से बदन की सफाई होती है. नहाने से मासिकधर्म के दौरान ऐंठन, दर्द, पीठ दर्द, मूड में सुधार होने के साथसाथ पेट फूलना जैसी परेशानी से भी राहत मिलती है. इस के लिए कुनकुने पानी से नहाएं.

साबुन इस्तेमाल न करें: मासिकधर्म के दौरान साबुन का प्रयोग न करें. योनि की साबुन से सफाई करने पर अच्छे बैक्टीरिया के नष्ट होने का खतरा रहता है, जो इन्फैक्शन का कारण बन सकता है. लिहाजा, इस दौरान योनि की सफाई के लिए कुनकुना पानी ही काफी है. हां, बाहरी भाग की सफाई के लिए साबुन का इस्तेमाल कर सकती हैं. इस दौरान वैजाइनल केयर लिक्विड वाश का इस्तेमाल करना चाहिए और इस का इस्तेमाल सिर्फ मासिकधर्म के दौरान ही नहीं, बल्कि बाकी दिनों में भी करना चाहिए.

हाथ अवश्य धोएं: सैनिटरी पैड या टैंपून या फिर मैंस्ट्रुअल कप बदलने के बाद हाथ जरूर धोएं. हाइजीन की इस आदत का हमेशा पालन करें. इस के अलावा इस्तेमाल किए गए पैड या टैंपून को डस्टबिन में ही डालें, फ्लश न करें.

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अलग अंडरवियर का इस्तेमाल करें: मासिकधर्म के दौरान अलग अंडरवियर्स का इस्तेमाल करें. इन्हें सिर्फ पीरियड्स के दौरान ही इस्तेमाल करें और अलग से कुनकुने पानी और साबुन से धोएं. एक ऐक्स्ट्रा पैंटी साथ जरूर रखें ताकि रिसाव होने पर उस का इस्तेमाल किया जा सके. यदि पैंटी पर दाग लग जाए तो नीबू या ब्लीचिंग पाउडर से हटा लें.

– अमोल प्रकाश माने, संस्थापक, डिया कौर्प

इन 7 टिप्स को फौलो कर हर दिन दिखें खूबसूरत

ऋतु की फिजिक तो परफैक्ट थी, लेकिन स्किन उतनी चार्मिंग नहीं थी. वह सोचती मैं मार्केट में आने वाला हर महंगा प्रोडक्ट अपनी स्किन पर अप्लाई करती हूं, फिर भी मेरी स्किन यंग व ग्लोइंग क्यों नहीं दिखती. फिर जब उस ने इस बारे में अपनी फ्रैंड शिखा से बात की तो उस ने बताया कि अक्सर हम स्किन की खूबसूरती को सिर्फ महंगी क्रीम्स के इस्तेमाल से जोड़ते हैं, जबकि स्किन खूबसूरत बनती है रोज उस की देखभाल करने से.

अगर आप भी अपनी स्किन को आकर्षक बनाना चाहती हैं तो इन टिप्स पर गौर फरमाएं:

स्किन टाइप व क्लींजिंग…

विज्ञापन देख कर स्किन केयर प्रोडक्ट्स खरीदने का क्रेज महिलाओं में बहुत ज्यादा होता है, जबकि इन्हें खरीदने से पहले हमें अपनी स्किन टाइप पर गौर जरूर करना चाहिए, क्योंकि बिना स्किन टाइप जाने प्रोडक्ट के इस्तेमाल करने से सही रिजल्ट नहीं मिल पाता. इसलिए स्किन टाइप जानना जरूरी है.

अगर आप की स्किन रफ है तो इस का मतलब आप की स्किन ड्राई है और ऐसी स्किन पर खुशबू वाले क्लींजर का भूल कर भी इस्तेमाल न करें. सौफ्ट क्लींजर ही प्रयोग करें. वहीं औयली स्किन में बड़ेबड़े रोमछिद्रों के साथसाथ त्वचा पर औयल भी नजर आता है. इस के लिए औयलफ्री फेस वाश प्रयोग करें.

सैंसिटिव स्किन की प्रौब्लम यह होती है कि कुछ भी ट्राई करने पर जलन व रैडनैस नजर आने लगती है. इस के लिए माइल्ड क्लींजर यूज करने करें व त्वचा को टौवेल से न रगड़ें वरना स्किन रैड हो सकती है. नौर्मल स्किन क्लीयर होती है, जिस पर आमतौर पर हर तरह का ब्रैंडेड प्रोडक्ट ट्राई किया जा सकता है. यानी क्लींजिंग के प्रयोग से पसीना, औयल व गंदगी को दूर किया जा सकता है.

  1. टोनिंग

कभीकभी क्लींजिंग के बाद भी स्किन में थोड़ीबहुत गंदगी रह जाती है, जिसे टोनर की मदद से दूर किया जा सकता है. इस के लिए कौटन बौल को टोनर में डुबो कर फेस पर लगाएं. यह ऐक्स्ट्रा क्लींजिंग इफैक्ट आप की स्किन में मौइश्चर बनाए रखने का काम करता है. इसलिए क्लींजिंग के बाद टोनिंग करना न भूलें.

2. ऐक्सफौलिऐशन से करें डैड सैल्स रिमूव

रोजाना लाखों स्किन सैल्स बनते हैं, लेकिन कभीकभी ये सैल्स त्वचा की परत पर बन जाते हैं जिन्हें हटाने की जरूरत पड़ती है. ऐक्सफौलिएट प्रक्रिया से डैड स्किन सैल्स को रिमूव किया जा सकता है. इस से ऐक्ने, ब्लैकहैड्स की परेशानी से भी छुटकारा मिलता है. इस के बैस्ट रिजल्ट के लिए इस प्रक्रिया को टोनिंग के बाद और मौइश्चराइजिंग से पहले करना चाहिए.

3. पौष्टिक भोजन व पर्याप्त नींद

आप अपनी डाइट में फ्रूट्स, दालें व सब्जियां ज्यादा से ज्यादा शामिल करें. चिकन, अंडे, मछली आदि का भी सेवन करें. पूरी नींद ले कर डल स्किन, डार्क सर्कल्स जैसी परेशानियों से छुटकारा पाएं. इस तरह डेली अपनी स्किन की केयर कर खुद को और खूबसूरत बना पाएंगी.

4. मौइश्चराइजिंग

हर स्किन को स्वस्थ रहने के लिए नमी की जरूरत होती है. बदलते मौसम के साथ त्वचा की जरूरतें भी बदलती रहती हैं. ऐसे में त्वचा को हर मौसम में अलगअलग तरह के मौइश्चराइजर से मौइश्चराइज करने की जरूरत होती है, क्योंकि रूखी त्वचा खुजली जैसी समस्याएं पैदा करती है. बस ध्यान देने वाली बात यह है कि अगर आप की स्किन औयली है, तो आप सिर्फ औयल फ्री मौइश्चराइजर ही अप्लाई करें. इस से रोमछिद्र ब्लौक न होने से ऐक्ने वगैरह की परेशानी भी नहीं पैदा होगी.

5. सनस्क्रीन से एक्स्ट्रा केयर

सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणें हमारी स्किन को डैमेज करने लगती है. ऐसे में सनस्क्रीन से स्किन को प्रोटैक्शन दें. इस के लिए 25-30 एसपीएफ वाला सनस्क्रीन अप्लाई करें. यह न सोचें कि इसे सिर्फ गरमी के मौसम में ही प्रयोग करना चाहिए, बल्कि इसे सर्दी के मौसम में भी यूज करें क्योंकि त्वचा की देखभाल हर मौसम में जरूरी है.

6. फीट केयर

यदि आप की एडि़यां फटी हैं या पैर के नाखून साफ नहीं हैं तो कितना भी खूबसूरत फुटवियर हो, आप के ऊपर फबेगा नहीं. महीने में कम से कम 2 बार मैनीक्योर व पैडीक्योर जरूर कराएं. अगर पार्लर जाने का समय नहीं है?तो फीट केयर किट घर पर ला कर खुद भी यह काम कर सकती हैं. इस के अलावा जब भी समय मिले तो नीबू से पैर के पंजों व नाखूनों को साफ करें और रात को सोने से पहले फीट केयर क्रीम का इस्तेमाल जरूर करें.

7, हेयर रिमूव कर पाएं निखरी त्वचा

पार्टी में जाना हो, दोस्तों के साथ आउटिंग का प्लान हो या फिर किसी शादी में जाने की तैयारी सब से ज्यादा समय आप परफैक्ट ड्रैस चुनने में बिताती हैं. मगर कई बार अनचाहे बालों की वजह से आप को अपनी मनपसंद ड्रैस के साथ समझौता करना पड़ता है.

तैयारी के इन आखिरी पलों में आप के पास इतना समय भी नहीं होता कि आप किसी पार्लर में जा कर अनचाहे बालों से छुटकारा पा सकें. इस के अलावा यह भी जरूरी नहीं कि जब आप पार्लर पहुंचें तो वह खाली हो और आप का काम फटाफट हो जाए.

इस टैंशन से बचने के लिए सब से आसान तरीका है घर पर वैक्सिंग करना. आजकल बाजार में ऐसी हेयर रिमूवल क्रीम उपलब्ध हैं जिन का इस्तेमाल कर आप प्रोफैशनल रिजल्ट पा सकती हैं, वह भी बेहद कम समय में. हेयर रिमूवल क्रीम न सिर्फ अनचाहे बालों से छुटकारा दिलाती है, बल्कि त्वचा की नमी को भी बरकरार रखती है.

पुराने फर्नीचर से करें घर की सजावट

अगर फर्नीचर न हो तो आपका घर खाली-खाली लगता है. और वैसे भी इन दिनों वुडन इंटीरियर को काफी पसंद किया जा रहा है. तो आज हम आपको इस लेख के जरिए बता रहे हैं, आप अपने घर के पुराने फर्नीचर को कैसे नया बना कर घर को सजा सकती हैं.

  • वालपेपर के अलावा आपके पास फर्नीचर को न्यू लुक देने का अच्छा औप्शन हैं चौक पेंट. पहले पुराने फर्नीचर को बेस कोट करें, फिर उस पर फ्लोरल हैंड पैटिंग बना लें. इस बात का ध्यान रखें कि आल आवर पेंट करने के बाद उसे अच्छे से सुखा लें, बाद में ही इस पर फ्लोरल आर्ट पैंटिंग करें.
  • अगर आपके घर में पुराना फर्नीचर पड़ा है जिसे आप वेस्ट समझती हैं तो इसे दोबारा से रेनोवेट करें. मार्कीट से आपको कई तरह के फ्लोरल वालपेपर मिल जाएंगे. बस इसे फेवीकोल या ग्लू की मदद से चिपका लें.

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पानी में नमक डाल के नहाने के ये हैं 5 फायदे, जानिए आप भी

सर्दियों में कई तरह की बीमारी के होने का खतरा बना रहता है. जैसे, त्वचा में रूखापन, खुजली, दाद-खाज, त्वचा में सफेदी आदि. इसके अलावा शरीर में नमी की कमी के कारण बाल झड़ने, डैंड्रफ जैसी दिक्कतें भी होती हैं. इन समस्याओं में पानी में नमक डाल कर नहाना काफी फायदेमंद होता है.

सर्दी में गर्म पानी से नहाना लोगों की मजबूरी होती है. ऐसे में बेहतर होता है कि आप उस गुनगुने पानी में नमक डाल कर नहाएं, इससे कई तरह की बीमारियां दूर होती हैं.

इस खबर में हम आपको बताएंगे कि गुनगुने पानी में नमक मिला कर नहाने से कौन से फायदे हो सकते हैं.

  1. आपको बता दें कि अवसाद या चिंता की स्थिति में भी मांसपेशियों में तनाव आ जाता है. नमक मिला गुनगुना पानी मानसिक तनाव को भी कम करता है.

2. अक्सर  नम कपड़ों के कारण शरीर में खुजली व दाद की समस्या होती है. नमक में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं. नमक मिला गुनगुना पानी त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया और जीवाणुओं को खत्म कर रोगों से बचाव करता है.

3. रोजाना गुनगुने पानी में थोड़ा सा नमक डालकर नहाने से त्वचा की सफाई अच्छे से होती है. इससे बालों और त्वचा में चमक भी आती है.

4. गुनगुने पानी में नमक मिलाकर नहाने से त्वचा में मौजूद डेड स्किन सेल्स निकल जाते हैं. इससे त्वचा में निखार आता है.

5. गुनगुने पानी में नमक मिला कर नहाने से मांसपेशियों को काफी राहत मिलती है. कई जानकारों का मानना है कि आर्थराइटिस के मरीजों को गुनगुने पानी में नमक मिला कर नहाने से आराम मिलता है.

जसपाल भट्टी की बायोपिक में काम करना चाहता हूं-दिलजीत दोसांझ

पंजाबी गाने और पंजाबी फिल्मों से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाले एक्टर और सिंगर दिलजीत दोसांझ से कोई अपरिचित नहीं. पंजाबी फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी अच्छा काम किया है. उनकी हिंदी फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ काफी सफल फिल्म रही. उनके पंजाबी संगीत के दीवाने केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में है. शर्मीले और अन्तर्मुखी स्वभाव के दिलजीत बहुत ही साधारण परिवार के है और यहां तक पहुंचने में उन्होंने काफी मेहनत की है. उनकी फिल्म ‘अर्जुन पटियाला’ रिलीज पर है, जो उनकी पहली कौमेडी हिंदी फिल्म है. पेश है उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश…

सवाल- इस फिल्म को करने की खास वजह क्या रही?

ये एक नयी और अलग कहानी है, जिसे मैंने कभी किया नहीं है. मैंने इस फिल्म के निर्देशक रोहित जुगराज के साथ दो पंजाबी फिल्में की है. इसलिए उनके साथ काम करना भी आसान था.

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सवाल- आपने अधिकतर सीरियस फिल्में की है, इसमें आपने कौमेडी की है, अपनी जर्नी से आप कितने खुश है?

इस साल मैंने एक पंजाबी फिल्म ‘छड़ा’ और अब ये फिल्म और बाद में ‘गुड न्यूज’ भी एक कौमेडी फिल्म की है. उम्मीद है दर्शक मुझे इस रूप में भी पसंद करेंगे, क्योंकि पंजाबी फिल्म ‘छड़ा’ को दर्शकों ने बहुत पसंद किया है. अर्जुन पटियाला में मैंने अपने ऊपर ही अधिकतर कौमेडी की है और ये अच्छा है, क्योंकि दूसरों के बारें में कौमेडी करने से कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है. मुझे खुशी है कि मैं धीरे-धीरे अच्छा काम कर रहा हूं.

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सवाल- रियल लाइफ में आप क्या पसंद करते है, कौमेडी या सीरियस रहना?

अपने लोग होने से कौमेडी और बाकियों के साथ सीरियस.

सवाल- हिंदी फिल्मों में काम करते हुए आप अपने में कितना बदलाव महसूस करते है?

मैं शुरू से ही कम बोलता था और अब भी कम बोलता हूं, क्योंकि मेरा ये स्वभाव है और मैं इसे बदलकर नकली नहीं बनना चाहता. अवसर आने पर अवश्य बात करता हूं. मैं हमेशा कम्फर्ट जोन में रहना पसंद करता हूं.

सवाल- आप कौमेडी में किसे देखना पसंद करते है?

मैंने जसपाल भट्टी की कौमेडी को बहुत देखी है, पर दुःख की बात यह है कि मैं उनसे कभी मिल नहीं पाया. उन्होंने भी अपने उपर ही हमेशा कौमेडी की है. वे एक कमाल के कौमेडियन थे.

सवाल- आपने गायिकी और अभिनय दोनों किये है, किसे अधिक एन्जौय करते है?

जब गाना गाता हूं तो अभिनय को भूल जाता हूं और जब अभिनय करता हूं तो गाने को भूल जाता हूं कि मैंने कोई गाना भी गाया है. जब जो काम करता हूं, उसी में रम जाता हूं.

सवाल- पंजाबी गानों के एल्बम काफी पौपुलर होते है, जबकि बाकी एल्बम नहीं चल पाते, इसकी वजह क्या मानते है?

पंजाबी गाने पूरे विश्व में अधिक चलते है, इसकी वजह इनका लिटरेचर और सुर हो सकता है, क्योंकि पंजाबी गानों को सुनने से खुशी मिलती है और लोग ऐसे गाने पसंद करते है. मुझे कमर्शियल गाने अधिक पसंद है, क्योंकि उससे पैसे मिलते है और मैं स्टेज शो कर सकता हूं.

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सवाल- ऐसा माना जाता है कि सरदारों के लिए हिंदी फिल्मों में काम कम है,जबकि आपने कई फिल्में की है, क्या वाकई ये सच है?

ये सही नहीं है, क्योंकि मुझे कई औफर मिले. मुझे खुद लगा कि मैं इसमें फिट नहीं बैठ सकता. आज कई फिल्में सरदारों के लिए भी लिखी जा रही है. उम्मीद है आगे भी कई और फिल्में लिखी जाएंगी. पंजाबी फिल्म में भी पहले ये बात थी. मेरे पहले बहुत कम लोगो ने पगड़ी पहनकर पंजाबी फिल्मों में काम किया है.

सवाल- पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री की कोई खास बात, जिसे आप बौलीवुड में नहीं पाते?

पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में जब जो फिल्म बनाने की इच्छा होती है, उसे बना लेते है, क्योंकि वहां सारे ही दोस्त है. हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा नहीं हो पाता. पंजाबी फिल्मों में काम करने की वजह से ही मुझे हिंदी फिल्म मिली.

सवाल- फ्रेंडशिप डे आगे आने वाला है, दोस्त आपकी जिंदगी में क्या माईने रखते है, कोई खास फ्रेंड जिसने आपको हमेशा सहयोग दिया हो?

तेजेंद्र सिंह मेरा अच्छा दोस्त है. 8 वीं कक्षा से हम साथ-साथ पढ़े है. जरुरत के समय वह मुझे हमेशा पैसे दिया करता था. आज भी वह मेरे साथ है. दोस्त वही होता है, जो मुश्किल घड़ी में आपका साथ दें.

सवाल- क्या कोई बायोपिक में काम करने की इच्छा है?

जसपाल भट्टी की अगर बायोपिक बने, तो उसमें काम करने की इच्छा रखता हूं.

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राहुल गांधी का त्याग

राहुल गांधी का कांग्रेस का अध्यक्ष पद छोड़ना एक तरह से भाजपा के उस दुष्प्रचार की जीत है जिसमें वह कई सालों से लगी थी. भारतीय जनता पार्टी को राहुल गांधी से बहुत ज्यादा खौफ था. 2019 के पूरे चुनाव अभियान में नरेंद्र मोदी का निशाना राहुल गांधी ही रहे. हालांकि 2019 के लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी भारी बहुमत से जीते पर उस का कारण नई जमती वर्णव्यवस्था की कंटीली झाड़ है जिस को नरेंद्र मोदी ने खूब भुनाया.

भाजपा को गांधी परिवार वाली कांग्रेस से डर स्वाभाविक है क्योंकि भाजपा और कांग्रेस दोनों ऊंची जातियों की पार्टियां हैं और उन के वोटबैंक के मैनेजर एकजैसे ही लोग हैं. जो परिवार कल तक कांग्रेसी की सफेद टोपी लगाए घूम रहे थे आज कांग्रेस को कोसते हुए भगवा अंगोछा पहने रोब झाड़ रहे हैं. राहुल गांधी को मजबूर किया गया कि वे मंदिरों में जाएं, तिलक लगाएं, जनेऊ दिखाएं, अपने को श्रेष्ठ ब्राह्मण सिद्ध करें. यह उन की खुद की पार्टी के नेताओं ने किया और वे पार्र्टी नेता उसी तरह के तिलकधारी, पूजापाठी, संतों महंतों के चेले हैं जैसे भाजपा नेता हैं.

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राहुल गांधी कांग्रेस के इन नेताओं को फूटी आंख नहीं सुहाते जबकि उन्हें जो भी नेतागीरी या सत्तासुख मिल रहा है वह सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मेहनतों का परिणाम है.

कांग्रेस के पूजापाठी नेताओं को भाजपाई लगातार भड़काते रहते हैं. राहुल के खिलाफ बनाए माहौल में इन कांग्रेसियों का बड़ा हाथ है. जहां सोनिया ने दलितों, पिछड़ों, किसानों, औरतों के मुद्दे लिए, वहीं ये नेता सिर्फ अपने बेटों को कांग्रेस की राजनीति में फिट करने में लगे रहे.

राहुल गांधी के बिना कांग्रेस का अस्तित्व रहेगा या नहीं, कहा नहीं जा सकता. आज दुनियाभर में राजनीतिक पार्टियों का अपना एजेंडा नहीं  रह गया है. हर देश में जनता और मीडिया अपने नेताओं व उन की पार्टियों से खफा है. अंधेर नगरी चौपट राजाओं की भरमार हो गई है. चीन के शी जिनपिंग के अलावा किसी देश का कोई नेता दूरगामी सोच वाला नहीं है. अमेरिका का डोनाल्ड ट्रंप खब्ती है तो रूसी व्लादिमीर पुतिन सिर्फ सख्त पुलिसमैन. सब देशों की पुरानी पार्टियां टूट रही हैं पर नई नहीं बन रहीं.

जहां तक कांग्रेस का सिर्फ एक परिवार की पार्टी का सवाल है तो भाजपा कौन सी 20 नेताओं की पार्टी है. प्रवचनों में माहिर नरेंद्र मोदी के अलावा वहां है कौन? कांग्रेस रहे या न रहे, यह सवाल नहीं है, सवाल यह है कि राहुल गांधी के बिना कांग्रेस का और कांग्रेस के बिना देश का राजनीतिक भविष्य क्या होगा? कहीं रामायण और महाभारत की कहानियों में जैसा राजवंशों का अंत में हाल हुआ वैसा भारत में न हो जाए?

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कर्मफल

लेखक- अंसारी एम. जाकिर

गांव की एक कच्ची सड़क पर धूल उड़ाती सूरज की गाड़ी ईंटभट्ठे पर पहुंची. मुनीम उसे दफ्तर में ले आया. कुछ समय तक सूरज ने फाइलें देखीं, फिर मुनीम उसे भट्ठे का मुआयना कराने लगा, ताकि वह भट्ठे के काम को समझ सके और सभी मजदूर भी अपने छोटे ठाकुर से परिचित हो जाएं.

चलतेचलते सूरज और मुनीम एक ओर गए, जहां कई औरतें मिट्टी गूंधने में मसरूफ थीं. सूरज की नजर खूबसूरत चेहरे, गदराए जिस्म, नशीली आंखों और संतरे की फांकों जैसे होंठों वाली एक लड़की पर जा टिकी.

‘‘मुनीमजी, हम पहली बार मिट्टी में गुलाब खिला हुआ देख रहे हैं,’’ सूरज ने उस लड़की के बदन का बारीकी से मुआयना करते हुए कहा.

‘‘हुजूर, यहां हर रोज आप को ऐसे ही गुलाब खिले मिलेंगे…’’ मुनीम ने भी चुटकी ली.

‘‘मुनीमजी, उस लड़की को कितनी तनख्वाह मिलती है?’’ सूरज ने पूछा.

‘‘हुजूर, वह तनख्वाह पर नहीं,

60 रुपए की दिहाड़ी पर काम करती है,’’ मुनीम ने बताया.

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‘‘बस, 60 रुपए हर रोज… आप इतनी कम दिहाड़ी दे कर उस के हुस्न की तौहीन कर रहे हैं,’’ सूरज ने शिकायती अंदाज में कहा.

‘‘सभी मजदूरों की दिहाड़ी दीवाली पर बढ़ाई जाती है. पिछली दीवाली पर उस की दिहाड़ी 50 रुपए से 60 रुपए हो गई थी. अगली दीवाली पर 70 रुपए कर देंगे,’’ मुनीम ने कहा.

‘‘वह लड़की कितने दिनों से यहां काम कर रही है?’’ सूरज ने पूछा.

‘‘हुजूर, तकरीबन 3 साल से,’’ मुनीम ने जवाब दिया.

‘‘3 साल में हर मजदूर को तरक्की मिल जाती है, पर अब तक उस लड़की की तरक्की क्यों नहीं हुई?’’ सूरज ने नाराजगी जताई.

‘‘हुजूर, दीवाली पर उस का प्रमोशन कर देंगे,’’ मुनीम तुरंत बोला.

अगले पड़ाव पर काम में मसरूफ दूसरी लड़कियों पर नजर डालते हुए सूरज बोला, ‘‘मुनीमजी, ईंटों का यह बगीचा खूबसूरत फूलों से भरा पड़ा है.’’

‘‘हुजूर, यह बगीचा आप का ही है. मैं तो सिर्फ माली हूं. इस बगीचे का जो फूल आप के मन को भाया करे, तो गुलाम को हुक्म कर दें. उसे आप की सेवा के लिए हाजिर कर दिया जाएगा,’’ मुनीम बेहिचक बोला.

पहले तो सूरज ने तीखी नजरों से मुनीम को देखा, फिर एक आजाद कहकहा मार कर बोला, ‘‘आप का बड़ा पारखी दिमाग है. इतनी सी देर में आप हमारी इच्छाओं से वाकिफ हो गए.’’

सूरज के मुंह से अपनी तारीफ

सुन कर मुनीम के चेहरे पर मुसकान उभर आई.

सूरज बोला, ‘‘मुनीमजी, हम सब से पहले उस लड़की का प्रमोशन करना चाहते हैं, जिस की मदमस्त जवानी ने हमारे अंदर हलचल सी मचा दी है.’’

अगले दिन मुनीम ने उस लड़की को सूरज की हवेली में पहुंचा दिया.

‘‘तुम्हारा नाम क्या है?’’ सूरज ने मुसकराते हुए पूछा.

‘‘सुमन…’’ उस लड़की ने शरमाते हुए अपना नाम बताया.

‘‘सुमन का मतलब जानती हो?’’ सूरज ने उस की तरफ बारीकी से नजर डालते हुए पूछा.

‘‘फूल…’’ सुमन बोली.

‘‘तुम भी फूल जैसी कोमल, खूबसूरत और महक वाली हो. तुम्हारे रूप के मुताबिक ही तुम्हारा काम होना चाहिए, इसीलिए तुम्हारे काम में बदलाव कर के तुम्हें तरक्की दे दी है. अब तुम भट्ठे पर काम करने के बजाय यहां का काम देखोगी,’’ सूरज ने उस को बताया.

सुमन अपने काम में मसरूफ हो गई और कुछ ही देर में सूरज के लिए कौफी बना लाई. कौफी का प्याला मेज पर रखने के लिए वह झुकी, तो उस के उभार बाहर झांकने लगे.

सुमन जैसे ही सीधी हुई, सूरज ने आ कर उसे अपनी बांहों के घेरे में ले लिया.

‘‘छोटे ठाकुर, यह क्या कर रहे हैं आप? मैं गांव की लड़की हूं और यह सब नहीं करती,’’ सुमन सूरज की पकड़ से निकलने की कोशिश करने लगी.

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सूरज ने बांहों का घेरा कस लिया और बोला, ‘‘शहर में यह सब आम बात है. तुम्हारी जवानी उफनती नदी की तरह है. मैं तुम्हारी जवानी के समंदर में डूब जाना चाहता हूं.’’

अगले ही पल सूरज की उंगलियां सुमन की छाती पर रेंगने लगीं.

‘‘ऐसा मत करो. गुदगुदी होती है,’’ सुमन ने एक अनोखी सी आह भरी. जब सूरज की छुअन से सुमन को मजा आने लगा, तो उस ने खुद को सूरज के हवाले कर दिया.

सूरज सुमन को बिस्तर पर ले गया. अगले ही पल एकएक कर के सुमन की देह से सारे कपड़े अलग होते चले गए. 2 जवान देहों के टकराने से उठा तूफान तब थमा, जब दोनों जिस्म थक कर निढाल पड़ गए.

मुनीम की मदद से सूरज की इन हरकतों को बढ़ावा मिलता रहा.

एक दिन मुनीम के पैरों के नीचे की जमीन ही खिसक गई, जब सूरज की नजर उस की जवान बेटी पर रुकी. वह किसी काम के सिलसिले में मुनीम के पास आई थी.

‘‘मुनीमजी, इस भट्ठे पर हम पहली बार इस लड़की को देख रहे हैं. अब तक उसे कहां छिपा कर रखा था?’’ सूरज ने बेहिचक पूछा.

‘‘छोटे ठाकुर, यह मेरी बेटी पुष्पा है,’’ मुनीम के चेहरे का रंग उतर गया.

‘‘मुनीमजी, पुष्पा हो या सुमन, एक ही बात है. दोनों का मतलब एक ही

होता है… फूल. और तुम यह बात अच्छी तरह जानते हो कि हम खूबसूरत फूलों के बहुत शौकीन हैं. जो फूल हमें अच्छा लगता है, उसे सूंघते जरूर हैं,’’ सूरज

ने कहा.

मुनीम का दिल धक से रह गया. उस ने एक बार फिर से याद कराया, ‘‘छोटे ठाकुर, पुष्पा मेरी बेटी है.’’

‘‘सुमन भी किसी की बेटी थी,’’ सूरज ने ताना कसा.

मुनीम को वहां से खिसकने में देर न लगी. लेकिन उस के कानों में सूरज के बोलने की आवाज आती रही, ‘‘मुनीमजी, मेरी बातों की टैंशन मत लेना. आज मुझे शराब कुछ ज्यादा चढ़ गई है, इसलिए जबान काबू में नहीं है.’’

मुनीम तेज कदमों से अपनी बेटी के साथ दफ्तर से बाहर निकल आया.

एक दिन अनहोनी घटना घट गई. उस दिन मुनीम ईंटभट्ठे से घर लौटा, तो चौंक पड़ा. मुनीम ने सूरज को घर से बाहर निकलते देखा.

मुनीम के चेहरे पर चिंता के भाव उभर आए. उस के कदम घर में घुसने के लिए तेजी से बढ़े.

पुष्पा दीवार से टेक लगाए बैठी सुबक रही थी. यह नागवार नजारा देख कर मुनीम गश खा कर कटे पेड़ की तरह धड़ाम से फर्श पर गिर पड़ा.

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