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क्या सैक्स टौनिकों के दावे सचमुच सच होते हैं, उनसे कैसे लाभ मिल सकता है?

सवाल

मैं 35 वर्षीय विवाहिता हूं. पत्र पत्रिकाओं के पन्ने पलटते समय देखती हूं कि उन में प्राय: सैक्स टौनिकों को ले कर कई तरह के विज्ञापन छपते रहते हैं. क्या उन में किए गए दावे सचमुच सच होते हैं? उन से कैसे और क्या क्या लाभ मिल सकता है?

जवाब

अच्छा होता आप अपने सवाल के पीछे छिपे उद्देश्य के बारे में भी हमें खुल कर लिखतीं. क्या आप के पति शिश्नोत्थान से संबंधित किसी प्रकार की समस्या से गुजर रहे हैं या आप दोनों यों ही अपनी सैक्स लाइफ में कुछ ऐक्सपैरिमैंट करने के इच्छुक हैं?

बहरहाल, सचाई यह है कि अधिकांश सैक्स टौनिक मात्र विज्ञापन के जोर पर बिकते हैं, उन में कोई ऐसा औषधीय गुण नहीं होता कि व्यक्ति उन से लाभ पा सके. उन की कामयाबी का जादू मात्र उन से मिली मानसिक प्रेरणा होती है न कि अंदर आया कोई कैमिकल परिवर्तन. यह सोच कि दवा लेने से यौन सामर्थ्य बढ़ जाएगी, दवा की सफलता मात्र इसी से जुड़ी होती है.

दवा की जगह गोलीकैप्सूल में ग्लूकोज की पुडि़या बांध दी जाए और व्यक्ति को उस के प्रति विश्वास हो तो यह भी लाभकारी साबित होगी. सैक्स टौनिक बेचने वाली बहुत सी कंपनियां दवा की बोतल और गोलीकैप्सूल के पैक पर इसीलिए घोड़े और दूसरे चित्र भी लगा देती हैं ताकि ग्राहक का मन जीता जा सके. दरअसल, कमाल बोतल पर चिपके घोड़े के चित्र से ही होता है न कि गोलीकैप्सूल में बंधी दवा से.

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

ऐसे बनाएं चिली फिश

चिली फिश बहुत ही स्वादिष्ट डिश है. यह क्रंची, टेस्टी और ​काफी फीलिंग और स्वाद से भरपूर होती है. आप इसे डिनर पार्टी में भी  सर्व कर सकती हैं.

सामग्री:

फिश के टुकड़े (बोनलेस 250 ग्राम)

बेकिंग पाउडर (1 टी स्पून)

कौर्नफलोर (1/2 कप)

मैदा (1/2 कप)

सोय सौस (2 टी स्पून)

सेलेरी बारीक कटा हुआ (2 टेबल स्पून)

कालीमिर्च (1 टी स्पून)

नमक (स्वादानुसार)

तेल (आवश्यकतानुसार)

गानिर्शिंग के लिए हरी प्याज

सौस के लिए:

1 टेबल स्पून अदरक (1 टेबल स्पून, टुकड़ों में कटा हुआ)

लहसुन  (1 टेबल स्पून, कद्दूकस किया हुआ)

हरी मिर्च (1 टेबल स्पून)

सोया सौस (4 टेबल स्पून)

टोमैटो सौस (5 टेबल स्पून)

चिली सौस (1 टेबल स्पून)

कौर्नफलोर (1 टेबल स्पून)

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बनाने की वि​धि

1.फिश को फिंगर पीस में काट लें.

2.कौर्नफलोर, मैदा, बेकिंग पाउडश्र, सौस सौस, सेलेरी, कालीमिर्च पानी और नमक डालकर एक बैटर तैयार करें.

3.फिश के पीसों को बैटर में डिप करके तेल में गोल्डन ब्राउन होने तक फ्राई करें, इसे सर्विंग प्लेट में निकालें.

सौस तैयार करने के लिए:

1.एक पैन में तेल गर्म करें.

2.इसमें लहसुन, अदरक और हरी मिर्च डालें, इसमें सोया सौस, चिली और टोमैटो सौस डालें.

3.फाइनली इसमें कौर्नफलोर में थोड़ा सा पानी मिलाकर डालें एक बार जब यह उबलने लगे तो इसे आंच से हटा लें.

4.सर्व करते समय, इस सौस को फिश के टुकड़ों पर डालें, हरी प्याज से गार्निश करके सर्व करें.

5.हरी प्याज से गार्निश करके सर्व करें.

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फिल्म हैक्ड के नए सौंग में हिना खान का बोल्ड अवतार

टीवी की दुनिया में  जलवा बिखेरने वाली Hina Khan अब फिल्मी दुनिया में भी कदम रखने जा रही हैं. डैमेज्‍ड 2′ नाम की वेब सीरीज में तहलका मचाने के बाद अब हिना खान फिल्म Hacked से बौलीवुड डेब्यू करने जा रही हैं, इस बात से हिना तो एक्साइटेड है ही उनके फैंस भी बहुत ज्यादा एक्साइटेड है  इस समय हिना फिल्म के प्रमोशन में काफी बिजी हैं. हाल ही में फिल्म हैक्ड का नया song  भी रिलीज कर दिया गया है.

Hina Khan की डेब्यू फिल्म Hacked का दूसरा नया गाना ‘तू जो मिली’ मेकर्स द्वारा रिलीज कर दिया गया है. इस गाने में हिना खान स्विमिंग पूल में रेड बिकिनी पहने नजर आ रही हैं.  हिना का ये अवतार कहर ढा रहा है. वीडियो में हिना बेहद बोल्ड अंदाज में नजर आ रही हैं.

इस गाने को यास्सेर देसाई ने गया है और इसके लिरिक्स शकील अजमी ने लिखे हैं. विक्रम भट्ट के निर्देशन में बनी यह फिल्म 7 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है.

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फिल्म की कहानी एक सनकी हैकर के इर्द गिर्द घूमती नज़र आ रही है. इसका ट्रेलर भी बीते दिनों रिलीज किया गया था. ट्रेलर में रोहन शाह, जो कि फिल्म में 19 साल के एक हैकर का किरदार निभा रहे हैं, वो हिना खान के आशिक हैं. हिना किसी और से प्यार करती हैं. रोहन को खुद से दूर करने के लिए वो उसकी कम उम्र का भी हवाला देती हैं. लेकिन वो किसी भी कीमत पर हिना को छोड़ने को तैयार नहीं है. फिल्म इंटरनेट से घिरी हुई और हमारी जिंदगी को कोई कैसे हैक और कंट्रोल कर सकता है इसकी कहानी दिखाती है.

हाल ही में फिल्म का ट्रेलर भी रिलीज हुआ था, जिसको लोगों ने खूब पसंद किया था. ट्रेलर के बाद फिल्म का एक गाना रिलीज किया गया था, अब एक दूसरा गाना फिल्म ‘हैक्‍ड’ का नया सॉन्ग भी रिलीज कर दिया गया है. इस गाने को अब तक 29 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं.

फिल्‍म हैक्‍ड के इस वीडियो सौन्‍ग के बोल है, ‘अब ना फिर से’. इस गाने को अमजद नदीम ने लिखा है और इसे आवाज दी है यासर देसाई ने. इस गाने की कंपोजीशन अमजद नदीम आमिर ने की है. इसे पृथ्‍वी शॉ ने मिक्‍स किया है.

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हिना खान की इस फिल्‍म के ट्रेलर को यूट्यूब पर अब तक 1 करोड़ से भी अधिक बार देखा गया है. इस फिल्‍म का ट्रेलर पहले ही इंटरनेट पर धूम मचा रहा है. इसमें हिना खान के लुक और उनकी एक्टिंग की उनके फैंस तारीफ कर रहे हैं.

Valentine’s Special : फेमस सिंगर नेहा कक्कड़ वैलेंटाइन डे वाले दिन लेंगी सात फेरे

बौलीवुड की स्टाइलिश, फेमस सिंगर नेहा कक्कड़ इन दिनों अपनी शादी को लेकर  खूब चर्चा बटोर रहीं हैं. नेहा की शादी  सिंगर उदित नारायण के बेटे Aditya Narayan  के साथ 14 Feb को  होने जा रही है. दोनों की शादी की खबर ‘इंडियन आइडल 11’ के सेट से शुरू हुई थीं.

शादी से पहले बैचलर पार्टी

इन दिनों नेहा कक्कड़ शो ‘इंडियन आइडल 11’ की जज हैं और आदित्य नारायण इस शो के होस्ट है.  कुछ समय से मीडिया में  नेहा और आदित्य  की शादी की बातें चल रही हैं.  खबर सामने  ये भी आ रही है कि आई है की वैलेंटाइन डे यानी प्यार के  दिन यानी 14 फरवरी को शादी करने वाले हैं. और दोनों जल्द ही अपनी बैचलर पार्टी भी और्गेनाइज करेंगे.

सेट पर पार्टी

एक रिपोर्ट के मुताबिक ये पार्टी ‘इंडियन आइडल 11’ के सेट पर होगी. इस हफ्ते वीकेंड पर दिखाया जाएगा. बताया जा रहा है कि दोनों की पार्टी शूट हो चुकी है और ऑनएयर भी ये जल्द ही दिखाई जाएगी. वैसे भी आदित्य नारायण कई बार इंडियन आइडल 11 के स्टेज पर नेहा को प्रपोज कर चुके हैं. और अब वह  नेहा से शादी की भी घोषणा कर चुके हैं. सेट पर शादी के कार्ड की तस्वीर भी सामने आ गई थी . जिस दिन ये सब हुआ था उस दिन अल्का याग्निक सेट पर आई थीं और शादी तय होने की खुशी में गाना भी गाया था.

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दोनों के पैरेंट्स ने किया रिश्ता पक्का

आपको बता दे हाल ही में  ‘इंडियन आइडल 11’ के सेट पर आदित्य नारायण और नेहा कक्कड़ के पैरेंट्स पहुंचे थे . यहां उदित नारायण ने नेहा को अपनी बहू बनाने की इच्छा जाहिर की थी . वहीं नेहा के पैरेंट्स भी इस रिश्ते के लिए तैयार हो गए. सेट पर सबसे पहले आदित्य के परिवार की ओर से नेहा को शगुन दिया गया . इस दौरान दोनों की शादी की डेट भी पक्की हो गई . सबने मिलकर तय किया कि 14 फरवरी को शादी होगी . इसके बाद विशाल ददलानी ने 1 फरवरी को मेहंदी की डेट भी फिक्स कर दी . इस पर नेहा ने कहा था, ‘अरे, लगवा लेंगे यार मेहंदी .’

शगुन का दुपट्टा

हाल ही में एक और खबर सामने आई  की कुमार सानू को बौलीवुड में 30 साल पूरे हो गए हैं. इस मौके पर उन्हें इंडियन आइडल 11 में इनवाइट किया गया  इस सिंगिंग रिएलिटी शो अपकमिंग एपिसोड में कुमार सानू नेहा कक्कड़ को स्पेशल गिफ्ट भी देते हुए नजर आएंगे. ये स्पेशल गिफ्ट एक रेड कलर की शगुन की चुनरी होगी. ये चुनरी आदित्य नारायण परिवार की होगी . शादी का शगुन मानकर नेहा ने इसे स्वीकार कर लिया. यह एपिसोड आने वाले वीकेंड पर दिखाया जाएगा . दुपट्टा देने के बाद कुमार सानू ने फिल्म ‘प्यार किया तो डरना क्या’ का गाना ‘ओढ़ ली चुनरिया’ गाया .

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उदित नारायण का बयान

सभी कंटेस्टेंट ने भी कुमार सानू का साथ दिया . नेहा और आदित्य की शादी के बारे में उदित नारायण का बयान भी आया था . उन्होंने कहा था, ‘दोनों बच्चों की पहले ही साथ में जोड़ी बनाई जा चुकी है. टीवी पर भी लगातार खबरें आ रही हैं. मुझे भी नेहा बहुत पसंद है. मुझे भी अच्छा लगेगा अगर घर में कोई फीमेल सिंगर आ जाएगी .’ ‘मुझे ही नहीं नेहा सभी को बहुत पसंद है. उसने इंडस्ट्री में अपने दम पर अपना नाम बनाया है . मैं भी उसके गाने सुनते रहता हूं .’

नेहा ने कुछ दिन पहले इंडियन आइडल का एक प्रोमाे वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया था. इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा था, ‘नेहू की शादी आदी के साथ. मम्मी पापा करवाकर ही मानेंगे आदी और मेरी शादी.’

पशुओं की ऐसे करें देखभाल

हर इनसान के लिए दूध बेहद अहम चीज है. दूध से ही हर घर में दिन की शुरुआत होती है. हरेक  इनसान चाय, कौफी या फिर पीने में दूध का इस्तेमाल करता है. दुधारू पशुओं में सब से अहम पशु भैंस है.

दूध उत्पादन खेती का पूरक कारोबार होने के चलते ग्रामीण इलाकों में काफी तादाद में भैंस पाली जाती हैं. भैंस पालन करने से माली भार काफी हलका हो जाता है.

ज्यादा दूध लेने के लिए भैंस की पंढरपुरी, जाफराबादी, मेहसाणा, मुर्रा नस्ल काफी मशहूर हैं. भैंस से बेहतर दूध लेने के लिए उन्हें पौष्टिक खुराक देना बेहद जरूरी है. खुराक में खासकर उन्हें कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, फैट, विटामिन, मिनरल्स वगैरह सही मात्रा में देना चाहिए.

बढ़ते शहरीकरण से चारागाह और खेती की जमीन घटती जा रही है, जिस के चलते हरे चारे की कमी होने लगी है. लिहाजा, दूध के पारंपरिक कारोबार को बरकरार बनाए रखने के लिए पशुओं को चरने के लिए छोड़ दिया जाता है. इस दौरान पशु कचरे के ढेर पर घूमतेफिरते जूठी खाने की चीजें, सब्जीभाजी के डंठल, धान का बचाखुचा हिस्सा समेत गंदगी और प्लास्टिक की थैली वगैरह खा लेता है. इस तरह से कील, सूई, सिक्के, तार, नटबोल्ट वगैरह पशुओं के पेट में चले जाते हैं.

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इस तरह बारबार पौलीथिन की थैलियां खाते रहने से उन के पेट में प्लास्टिक जमा होता जाता है. प्लास्टिक के न पचने की वजह से उन की चारा खाने और पाचन की कूवत कमजोर हो जाती है. इस तरह कुपोषित पशुओं में बां झपन की तादाद ज्यादा पाई जाती है.

प्लास्टिक के साथ पशु के पेट में गई पौलीथिन वगैरह चीजें फेफड़ों, दिल, डाइफ्रेम में छेद कर देती हैं, जिसे ट्रौमैटिक रैटिकुलोपेरिटोनाइटिस या डायाफ्रामिक हर्निएशन कहते हैं. इस हालत में पशु के पेट का आपरेशन कर के इन चीजों को बाहर निकाल दिया जाए. मवेशी 3 हफ्ते के भीतर पहले की तरह भलाचंगा हो जाता है.

लेकिन कुछ लोग इस तरह के पशुओं को सीधे बाजार की राह दिखाने की सलाह देते हैं या फिर उन्हें स्लौटर हाउस पहुंचा देना आसान सम झते हैं. इस की वजह यही है कि इन लोगों को पशुओं के उपचार के बारे में सही जानकारी नहीं हुआ करती, इसीलिए नासमझी के चलते पशुपालक एक बढि़या दुधारू पशु को बेवजह मौत की भेंट चढ़ा देता है.

पशु कुपोषित न हों, इस के लिए उन्हें पौष्टिक और संतुलित खुराक देना जरूरी है. इस खुराक में हरे और सूखे चारे के साथ ही कौन्सैंट्रेट फीड का भी समावेश होना चाहिए. साथ ही, जिन खनिज तत्त्वों की कमी में पशु को पाईका नामक बीमारी होती है, उन की सही मात्रा के लिए उन्हें नियमित रूप से खनिज मिश्रण देना जरूरी है. ये खनिज मिश्रण बाजार में तो मुहैया हैं ही, किसान डाक्टर की सलाह ले कर उन्हें अपने घर में भी तैयार कर सकते हैं.

पशुओं को दी गई पौष्टिक खुराक का उसे पूरी तरह फायदा हो, इस के लिए उन्हें नियमित रूप से समयसमय पर पेट में कीड़े मारने वाली दवाएं और टीके देने जरूरी हैं. इस संबंध में अगर सही प्लानिंग कर उस का तरीके से पालन किया गया तो फिर आगे मानसिक व माली दिक्कतों से छुटकारा पाना तय है और साथ ही पशु ज्यादा दूध देगा.

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लिहाजा, लोगों को चाहिए कि अपने घर का कचरा, जूठे खाद्य पदार्थ, सब्जीभाजी के डंठल वगैरह को प्लास्टिक की थैली में बांध कर न फेंकें, ताकि पशु उन्हें खा भी जाएं तो प्लास्टिक की थैली उन के पेट में जाने का खतरा न रहे.

अगर ऐसा मुमकिन न हो, तो उसे सादा कागज में लपेट कर फेंकें. लोहे वगैरह की चीजों को कचरे के साथ ढेर पर न फेंकें. अगर ये सारी सावधानी बरतें, तो पशुओं की इस तरह होने वाली असमय मौत को टालने में हम अपना योगदान कर सकते हैं.

आजकल की लड़कियां : भाग 1

‘‘कुछ सुना आप ने, वो अपने मिश्रा जी हैं न… उन की बहू घर छोड़ कर चली गई,’’ औफिस से घर आते ही रमा ने चाय के साथ पति योगेश को यह सनसनीखेज खबर भी परोस दी.

‘‘कौन से मिश्रा जी? वो जो पिछली गली में रहते हैं, जिन के यहां हम भी गए थे शादी में… वो? लेकिन उस शादी के तो अभी 6 महीने भी नहीं हुए. आखिर ऐसा क्या हुआ होगा?’’ योगेश ने चाय के घूंट के साथ खबर को भी गटकने की कोशिश की, लेकिन खबर थी कि गले से नीचे ही नहीं उतर रही थी.

‘‘हांहां वही. बहू कहती है ससुराल में उसे घुटन होती है. ये आजकल की लड़कियां भी न… रिश्तों को तो कुछ समझती ही नहीं हैं. मानो रिश्ते न हुए नए फैशन के कपड़े हो गए. इधर जरा सा अनफिट हुए, उधर अलमारी से बाहर. एक हम थे जो कपड़ों को फटने तक रफू करकर के पहनते रहते थे, वैसे ही रिश्तों को भी लाख गिलेशिकवों के बावजूद निभाते रहते हैं,’’ रमा ने अपने जमाने को याद कर के ठंडी सांस ली.

‘‘लेकिन तुम्हीं ने तो एक बार बताया था कि मिश्राजी अपनी बहू को एकदम बेटी की तरह रखते हैं. न खानेपीने में पाबंदी, न घूमनेफिरने में रोकटोक. यहां तक कि अपनी बिटिया की तरह बहू को भी लेटैस्ट फैशन के कपड़े पहनने की छूट दे रखी है. फिर भला बहू को क्या परेशानी हो गई?’’

‘‘वही तो, मिश्रा जी ने पहले तो जरूरत से ज्यादा लाड़ कर के उसे सिर पर चढ़ा लिया, और देखो, अब वही लाड़ उस के सिर चढ़ कर बोलने लगा. इन बहुओं की लगाम तो कस कर ही रखनी चाहिए जैसी हमारे जमाने में रखी जाती थी. क्या मजाल कि मुंह से चूं भी निकल जाए,’’ रमा ने अपना समय याद किया.

‘‘तो तुम भी कहां खुश थीं मेरी मां से, हर वक्त रोना ही रहता था तुम्हारी जबान पर,’’ योगेश ने उस के खयालों के फूले हुए गुब्बारे को तंज की पिन चुभो कर फुस्स कर दिया.

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‘‘बसबस, रहने दो. तुम्हारी मां थीं ही हिटलर की कौर्बनकौपी. उन्हें तो हमेशा मुझ में कमियां ही नजर आती थीं,’’ कहते हुए रमा ने चाय के बरतन उठाए और बड़बड़ाते हुए रसोई की तरफ चल दी. योगेश ने भी टीवी चलाया और न्यूज देखने में व्यस्त हो गया. मिश्रापुराण पर एकबारगी विराम लग गया.

‘‘अरे रमा, सुना तुम ने, वह अपनी किटी ऐडमिन कांता है न, उस की बेटी अपने पति को छोड़ कर मायके वापस आ गई,’’ दूसरे दिन शाम को पार्क में पड़ोसिन शिल्पी ने उसे रोक कर अपने चटपटे अंदाज में यह ब्रेकिंग न्यूज दी तो रमा के दिमाग में एक बार फिर से मिश्राजी की बहू घूम गई.

‘‘क्या बात कर रही हो? उस ने तो लवमैरिज की थी न, फिर ऐसा क्या हुआ?’’ रमा ने आश्चर्य से पूछा.

‘‘अरे, कुछ मत पूछो. ये आजकल की लड़कियां भी न. न जाने किस दुनिया में जीती हैं. कहती है मुझ से गलती हो गई. शादी के बाद मुझे पता चला कि यह मेरे लिए परफैक्ट मैच नहीं है. यह भी कोई तर्क हुआ भला?’’ शिल्पी ने हाथों के साथसाथ आंखें भी नचाईं.

‘‘अब क्या बताएं, यह तो आजकल घरघर की कहानी हो गई. बहुओं को ज्यादा छूट दो, तो उन के पर निकल आते हैं. कस कर रखो तो उन्हें घुटन होने लगती है. सहनशीलता का तो नाम ही नहीं है इन की डिक्शनरी में. शादी की पहली सालगिरह से पहले ही बेटियां मायके आ जाती हैं और बहुएं ससुराल छोड़ जाती हैं. पता नहीं कहां जाएगी यह 21वीं सदी,’’ कहते हुए रमा ने बात खत्म की और घर लौट आई.

कहने को तो रमा ने बात खत्म कर दी थी लेकिन क्या सचमुच सिर्फ बात को खत्म कर देनेभर से ही मुद्दा भी खत्म हो जाता है? नहीं न, और तब तो बिलकुल भी नहीं जब घर में खुद अपनी ही जवान औलाद हो. रमा रास्तेभर अपने बेटे प्रथम के बारे में सोचती जा रही थी.

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उस की उम्र भी तो विवाह लायक हो गई है. सीधे, सरल स्वभाव का प्रथम अपनी पढ़ाईलिखाई पूरी कर के अब एक एमएनसी में आकर्षक पैकेज पर नौकरी कर रहा है, बेंगलुरू में अपना फ्लैट ले कर अकेला रहता है. घर का इकलौता बेटा है. देखने में भी किसी फिल्मी हीरो सा डार्क, टौल और हैंडसम है. क्या ये सब खूबियां किसी की पसंद बनने के लिए काफी नहीं हैं? लेकिन फिर भी क्या गारंटी है कि मेरी होने वाली बहू प्रथम के साथ निबाह कर लेगी. रमा के विचार थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे..

अगले भाग में पढ़ें-  हकीकत से सामना होना अभी बाकी था.

जाती ठंड से बचाएं दिल

दिल्ली के अस्पतालों में बीती दिसम्बर और नये साल में हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर के मामले लगभग दोगुने हो गये हैं. लोग सांस फूलने, कमजोरी, सीने में दर्द जैसी तकलीफों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं. यह सभी लक्षण दिल की बीमारी से जुड़े हुए हैं. जाती ठंड धमनियों में खून के थक्के जमने, धमनियां सिकुड़ने जैसी तकलीफें दे कर जा रही है.

पूरे देश में मौसम बार-बार करवटें ले रहा है. आमतौर पर मकर संक्रांति के बाद ठंड कम होनी शुरू हो जाती है, लेकिन अबकी बार तो संक्रांति के बाद तेज हवाओं, आंधी, पानी, ओलों ने मौसम का मिजाज ही बिगाड़ दिया है. ठंड जा-जाकर लौट रही है और इसका शिकार हो रहे हैं प्रौढ़ और बुजुर्ग, जिनका दिल मौसम की इस तुनकमिजाजी को सहन नहीं कर पा रहा है. लिहाजा दिल के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.

सर्दी के मौसम में यूं भी दिल के मरीजों को अपना ज्यादा ख्याल रखना जरूरी है क्योंकि ठंड की वजह से नाड़ियां सिकुड़ती हैं और शरीर में खून का बहाव बाधित होता है. ठंड के कारण दिल की धमनियों के सिकुड़ने से खून का प्रवाह रुक सकता है या बहुत धीमा हो सकता है, जिसके चलते हार्ट फेल होने की सम्भावना बन जाती है. ठंड में बरती गई लापरवाही दिल के लिए खतरनाक साबित हो सकती है.

मौसम की शुरुआती और लौटती ठंड दिल के मरीजों के लिए बहुत खतरनाक होती है. इसलिए उन्हें ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है. बूढ़े शरीर में त्वचा के नीचे ज्यादा चर्बी नहीं रहती, लिहाजा सर्दी सीधे भीतर घुस कर नसों पर असर डालती है. इसलिए इस मौसम में खुद को गर्म रखना बहुत जरूरी है ताकि ठंड नसों पर असर न कर सके और उनमें बहने वाला खून बिना किसी रुकावट के अपना चक्र पूरा करे.

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ठंड के कारण दिल की धमनियों के सिकुड़ने से हार्ट में खून और ऑक्सीजन का संचार कम गति से होता है. इससे दिल के मरीजों का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. इस मौसम में ब्लड प्लेट्लेट्स भी ज्यादा सक्रिय और चिपचिपे होते हैं, इसलिए रक्त के थक्के जमने की आशंका भी बढ़ जाती है. यही वजह है कि सर्दियों में दिल के दौरे का जोखिम 50 फीसदी तक बढ़ जाता है. सर्दी के मौसम में सूरज भी बादलों में लुकाछिपी का खेल खेलता है. इससे शरीर में विटमिन डी की कमी भी हो जाती है. ऐसे में इस्केमिक हार्ट डिजीज, कंजेस्टिव हार्ट फेल्योर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बहुत बढ़ जाता है. नसें सिकुड़ने से ब्लॉकेज की स्थिति में हार्ट अटैक होता है. जब दिल का हिस्सा काम करना बंद कर देता है तो हार्ट फेलियर का खतरा रहता है. सर्दियों में हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर दोनों ही मामले बढ़ जाते हैं.

थोड़ी सावधानी बरतें

सर्दी के मौसम में सुबह और शाम के वक्त घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए. बूढ़े और प्रौढ़ावस्था के लोग इस बारे में खास ध्यान रखें. अधिक सर्द सुबह में मॉर्निंग वॉक पर न जाएं. गर्म कपड़े ठीक से पहनें और सिर, कान और पैरों को विशेषरूप से गर्म कपड़े से कवर रखें. सर्दियों में दिल के मरीजों के लिए जरूरी है कि कमरे का तापमान 21 और 22 के बीच बनाकर रखें. इस दौरान शरीर को ऐक्टिव रखना भी जरूरी है क्योंकि इससे खून के संचार में दिक्कत नहीं होती, इसलिए गर्म कमरे में ही हल्के व्यायाम कर लें. सर्दियों में गर्म पानी, गर्म सूप, चाय-कॉफी का सेवन करें ताकि छाती में गर्माहट बनी रहे.

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ध्यान रखें कि कमरे में बहुत ज्यादा रूम हीटर का इस्तेमाल न करें. जब एक बार कमरा गर्म हो जाए तो हीटर बंद कर दें. रात भर हीटर या ब्लोअर चलाकर न सोएं. यह खतरनाक हो सकता है. घी, तेल और फैट वाली चीजें खाने से बचें.

इन बातों को इग्नोर न करें

अगर आपको अचानक पसीना आने लगे, जबड़े, कंधे, गर्दन और बाजू में दर्द के साथ सांस फूलने लगे, पेट से लेकर सीने तक दर्द उठे तो इन लक्षणों को कतई नजरअंदाज न करें. तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें और अपना चेकअप कराएं. यह लक्षण हार्ट अटैक के लक्षण हो सकते हैं.

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सुभाष को ‘सिरफिरा’ बनाने वाली व्यवस्था सुधारिए

आपरेशन मासूम के तहत फर्रूखाबाद के जिस सुभाष बाथम को सिरफिरा कह कर पुलिस मुठभेड में मार गिराया उसको सिरफिरा बनाने में व्यवस्था का पूरा दोष है. सुभाष बाथम कोई पहली आदमी नहीं है जिसे सिरफिरा कहा गया है. कुछ साल पहले की ही घटना है जब बस्ती जिले में एक सपेरा तहसील में अपनी परेशानियों से निजात नहीं पा सका तो उसने तहसील परिसर में ही सांप छोड दिये थे. कई साल पहले ही बात है राजधानी लखनऊ में कटोरी देवी नामक महिला चर्चा में थी. स्कूल शिक्षिका कटोरी देवी को गलत तरह से नौकरी से बाहर कर दिया गया. कटोरी देवी ने उत्तर प्रदेश की विधानसभा के सामने धरना स्थल पर 14 साल धरना दिया. कटोरी देवी के खिलाफ पुलिस ने हर छलबल का प्रयोग किया. इसके बाद भी उसका धरना नहीं टूटा. व्यवस्था ने नहीं सुनी कोर्ट से उसको 14 साल के बाद न्याय मिल सका.

मऊ जिले के रहने वाली लाल बिहारी बचपन के दिनो में ही नौकरी करने मुम्बई चलग गये. उनको कागजों पर मरा दिखाकर जमीन जायदाद दूसरो ने अपने नाम लिखा ली. इसके बाद लाल बिहारी जब गांव आये तो 22 साल तहसील के चक्कर लगाने के बाद भी खुद को जिंदा नहीं साबित कर पाये. अंत में लाल बिहारी ने अपने जैसे और लोगों की लडाई लडने का फैसला कर ‘मृतक संघ’ बना लिया. अब उस पर फिल्म भी बन रही है. व्यवस्था के शिकार ऐसे लोगो को  सिरफिरा बताकर उनकी परेशानी की अनदेखी की जाती है. व्यवस्था में अपनी ना सुनी जाने के कारण आदमी आपा खो देता है. कभी पानी की टंकी पर चढ जाता है तो कभी जहर खाकर खुदकशी कर लेता है. व्यवस्था अपनी करतूत पर हर बार पर्दा डालने में सफल हो जाती है.

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फर्रूखाबाद के मोहम्मदबाद कोतवाली के करथिया गांव का रहने वाले सुभाष बाथम भी ऐसी ही व्यवस्था में फंस कर सिरफिरा हो गया. उसे कोई रास्ता नहीं दिखा तो उसने अपनी बात को कहने के लिये 25 बच्चों को बंधक बनाकर अपनी बात कहने की कोशिश की. 25 बच्चों को बंधक बनाना अपराध था. इसकी सजा उसको अपनी जान गंवा कर मिली. सुभाष बाथम अपने पीछे जो सवाल छोड गया है. इन सवालों को गौर करेगे तो लगेगा कि सुभाष बाथम नहीं व्यवस्था सिरफिरी है. सरकार ने सिरफिरे सुभाष बाथम को मारने वाले पुलिस बल को 10 लाख का इनाम घोषित किया है. पर सुभाष बाथम को सिरफिरा बनाने वाली व्यवस्था पर वह मौन है ?

पुलिस से प्रताड़ित था सुभाष बाथम

सुभाष बाथम अपने मौसा की हत्या मे जेल भेजा गया था. 12 साल जेल में रहने के बाद कोर्ट से जमानत पर छूटकर बाहर आया. सुभाष को लगता था कि गांव वालों ने पुलिस के साथ मिलकर उसको जेल भिजवाया था. पुलिस ने चोरी और हरिजन एक्ट के मुकदमे भी उसके खिलाफ लिख रखे थे. डीएम के नाम लिखे अपने पत्र में सुभाष बाथम ने लिखा कि गरीबी में रहने के बाद भी उसको सरकारी कालोनी, शौचालय नहीं दिया गया. डीएम औफिस और तहसील के चक्कर लगाने के बाद भी उसको कालोनी और शौचालय नहीं दिया गया. मोहम्मदाबाद पुलिस पर आरोप लगाते हुये सुभाष ने कहा कि एसओजी से सिपाही उसको बहुत परेशान करते थे. उसने कहा कि एसओजी के सिपाही उसको चोरी के आरोप में बंद किया और करंट लाकर प्रताड़ित करते थे.

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जेल में रहने वाले और पुलिस के द्वारा प्रताडित होने पर किसी भी आदमी की मानसिक हालत बिगड सकती है. ऐसे में वह ऐसे कदम उठा सकता है. बच्चों को बंधक बनाना सुभाष की गलती थी. जिसकी सजा उसको मिल चुकी है. जरूरत इस बात की भी है कि सुभाष को सिरफिरा बनाने वाली व्यवस्था की भी जबावदेही तय की जाय. उत्तर प्रदेश के थाने और तहसीलों में ऐसे मामले भरे पडे है. जहां लोग व्यवस्था से परेशान होकर पागल होने के कगार पर है. लोगों को सिरफिरा बनने से रोकना है तो उनको सिरफिरा बनाने वाली व्यवस्था को सुधारना होगा उसकी जबावदेही तय करनी होगी. थाने और तहसील में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार का जंजाल फैला हुआ है. इसमें रोज लोग पिस रहे है. पुलिस की प्रताड़ना हर मामले में देखी जा सकती है. मनचाहे मुकदमे लिखना और मनचाहे तरीके से रिपोर्ट लिखना आमबात हो गई है. इनमें फंसा सिरफिरा हो जा रहा है.

विरोघ मेरा धर्म !

मैं तो प्रतिकार करूंगा. मैं लड़ता रहूंगा. मैं खंदक की लड़ाई लड़ूगा. मैं हार नहीं मानूंगा. जी हां! कुछ लोग ऐसे होते हैं, उन्हीं में एक आपका यह दास दासानुदास  रोहरानंद भी शुमार किया जा सकता है. देश में कैसी भी हवाएं बहें, मुझे मंजूर नहीं, मैं सदैव खिलाफत करूंगा. क्योंकि मेरा जन्म ही विरोध के लिए, प्रतिकार के लिए हुआ है.

चाहे देश में कोई भी प्रधानमंत्री हो, चाहे देश में किसी की भी सरकार हो, मैं तो विरोध करूंगा. पड़ोसी  कहेगा- सुबह जल्दी उठना स्वास्थ के लिए हितकर है, हर एक को, सुबह कम से कम पांच बजे उठे. मै इस सलाह का विरोध करूंगा. मैं कहूंगा- नहीं ! सुबह जल्दी उठ जाने से ठंड लगती है, इसलिए हम तो  आराम से उठेंगे. पड़ोसन  कहेगी- स्वच्छता अभियान चलेगा, हर शख्स स्वच्छता में योगदान करें. मैं कहूंगा- नहीं ! यह तो गलत बात है पड़ोसन!  पहले तुम  , अपने बंगले की साफ-सफाई पर ध्यान क्यों नहीं देती. झाड़ू पकड़कर दिखावा करती हो, यह नहीं चलेगा, मैं प्रतिकार करता हूं.

दरअसल, मेरा स्वभाव ही कुछ ऐसा है. मैं हर शै में विरोध ढूंढता हूं. अब सबसे बड़ा मसला देशभक्ति का लीजिए.

सरकार का, संविधान का घोषित संदेश है, हर देशवासी को, देश के प्रति भक्ति भाव से पगा होना चाहिए. आस पड़ोसियों से मोहब्बत  होनी चाहिए, मैं कहता हूं भई! देश भक्ति है क्या ! हमे तो आजादी  चाहिए!!फिर हम तो अपने खास संबधियो से भी, मन ही मन नफ़रत  रखना चाहते हैं हम उनसे बेपनाह ईर्ष्या और द्वेष का भाव रखते हैं.

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अब आप रोहरानंद की मनो भावना को समझ गए होंगे. धीरे-धीरे मेरे सभी मित्र, आस पड़ोसी भी मेरे मनोविज्ञान को समझ चुके हैं और मुझे अब गंभीरता से नहीं लेते. क्योंकि वे जानते हैं, वे जो भी कहेंगे, मैं 99 प्रतिशत उसका विरोध करूंगा और अपना पक्ष आंखें बंद करके उनके समक्ष परोस दूंगा. अब चाहे वह माने, अथवा नहीं. यह मेरी बला से.

हो सकता है, आप सोचें, यह कैसा आदमी है. मगर हे मित्र ! यह एक ऊंचा बहुत ऊंचा मनोविज्ञान है जो बेहद दुर्घर्ष श्रम से ही साधा जा सकता है. इसके लिए सतत जागृत रहना पड़ता है. हर कोई आम -ओ – खास रोहरानंद  नहीं बन सकता. ऐसा बनने के लिए आपमे  हम सा माद्दा होना चाहिए. विरोध करना, विरोध में बोलना और हर बात में बिना विचार के विरोध करके दिखाना बेहद कठिन है, जिसे असाधारण आदमी ही साध सकता है .

रोहरानंद  जैसे प्रखर विरोध रखने वाले, बहुत कम होते हैं. मगर इसके लाभ भी तो असंख्य है.अपने घुर विरोध के कारण मै हमेशा लोगों की दृष्टि में रहता हूं, लोग जानते हैं यह आदमी लीक से हटकर चलने वाला है तो उनकी दृष्टि में मेरे प्रति कुछ विशिष्ट सम्मान, कुछ विशिष्ट दुराव रहता है. वे मुझे साध कर चलने की कोशिश करते हैं उन्हें प्रतीत होता है अगरचे मैंने उनकी बात में हां में हां मिला दी, तो उनकी पौ बारह है.

मगर ऐसा हो नहीं सकता. मेरी तो फितरत ही विरोध की है जिसे जमीनी भाषा में टांग खींचना कहते हैं.अब कोई मुख्यमंत्री, चाहे लाख अच्छा करें, जनता चाहे लाख गुणगान करें हम तो अपना धर्म निभाएंगे. हम तो उनका विरोध ही करेंगे.क्योंकि यही मेरा धर्म है विरोध करना मेरी पहचान है अस्मिता है.

क्या कोई अपना धर्म छोड़ सकता है ? लोग जान देने को तैयार हो जाते हैं, मगर अपना धर्म नहीं छोड़ते, फिर भला मैं अपनी लीक, रास्ता क्यों छोडूंगा.देश दुनिया में मेरे जैसे बहुत ज्यादा नहीं होते मगर होते हैं हर जगह होते हैं गांव गली से लेकर दुनिया के विशाल नाट्य  मंच पर अपना प्रदर्शन इमानदारी से करते रहते हैं.

वस्तुतः जैसे समर्थक अपरिहार्य हैं, वैसे ही विरोध करने वाले भी निरापद  हैं.भले ही इन दिनों उनका सम्मान कमतर हो चला है, मगर इतिहास में उन्हें भुलाया बिसारा नहीं जा सकेगा.

कवि रहीम खान खान ने कहा है न- “निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाए, बिन पानी बिन साबुना, निर्मल करे सुहाय” तो विरोध की प्रतिष्ठा तो आदि से रही है अब चाहे आप माने या नहीं, यह दीगर बात है.

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जैसे एक होता है मच्छर, उसका काम भिन भिन करना होता है अब आप चाहें तो मच्छर की भिन-भिन से सबक लेकर अपने को बचा ले या फिर अनदेखी करके कटवा ले. यह आपकी मर्जी है. मच्छर का काम काटना है, वह मौका ढूंढता है. वैसे ही, मैं विरोध का मौका ढूंढता हूं मैं ईमानदारी से आपके, सरकार की एक-एक कदम पर तीव्र दृष्टि रखता हूं और फिर मौका मिलते ही विरोध शुरू अपना काम शुरू कर देता हूं. परसाई जी ने ‘निंदा रस’ निबंध लिखा है. निदां रस का कर्ता और रसिक मेरी भाव भूमि से जुड़ा चीज है. मैं तो अंतिम समय तक अपने विरोध की, खंदक की लड़ाई में लगा हुआ हूं.  निरपेक्ष भाव से अगर कहीं दिख जाऊं, आपके आसपास, तो  सहजता से  नहीं लेना यही गुजारिश है.

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