ऋतु ही बौराने की है. आम से ज्यादा खास बौरा रहे हैं. फिर वे तो अमेरिका से खासतौर से बौराने आए हैं. अहोभाग्य इस आर्यावर्त के , लग ऐसा रहा है मानो सुदामा के घर कृष्ण पधारे हैं. सुदामा ने चावल की पोटली नहीं खोली बल्कि जुमेटो पर बिरियानी आर्डर कर दी है. उनके आने की आहट के साथ ही गरीबखाना सजने लगा था.सुदामा बीबी के गहने लाला के पास गिरवी रख देगा लेकिन देश की नाक नहीं कटने देगा. वे कृष्ण के ही नहीं बल्कि पूरे देश के दोस्त हैं पर कैसे हैं यह बौराये हुये लोगों को नहीं मालूम.जार्ज पंचम के वक्त में भी किसी को नहीं मालूम था बस ड्यूटी थी कि जैकारा करना है सो करते रहे थे आज भी नमस्ते नमस्ते कर रहे हैं.

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