लेखक- रामकिशोर दयाराम

पंवार जलकुंभी की वजह से सतपुड़ा जलाशय 60 प्रतिशत घट चुका है. यदि इसे जल्दी ही जड़मूल से नष्ट न किया तो यह पूरे जलाशय को अपनी आगोश में जकड़ लेगी. मध्य प्रदेश की जीवनरेखा कही जाने वाली नर्मदा को कहीं आने वाले समय में चाइनीज झालर यानी जलकुंभी निगल न ले, इस बात पर चिंता करना और चतुराई दिखाना होगा. चाइनीज झालर ने वर्ष 1960 के दशक से नगरीय क्षेत्र की जीवनदायिनी तवा नदी पर बने सतपुड़ा जलाशय को बुरी तरह से अपनी आगोश में जकड़ लिया है.

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