मध्य प्रदेश सरकार के 24 जून के इस फैसले को देशभर में बेहद अहम माना जा रहा है जिस में उस ने न केवल प्रौपर्टी को 20 फीसदी सस्ता कर दिया है बल्कि यह भी कहा है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में राज्य में कहीं भी प्रौपर्टी के दाम नहीं बढ़ेंगे. इस के पहले 19 जून को ही कैबिनेट ने अपनी मीटिंग में यह मंशा जता दी थी, जिस पर मुहर भोपाल में हुई केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की मीटिंग में लगी.

ऐसा माना जा रहा है कि इस फैसले से आम लोगों को राहत मिलेगी और रियल एस्टेट के कारोबार में आई मंदी दूर होगी. भोपाल में ही तकरीबन 10 हजार मकान बिकने के लिए तैयार हैं, लेकिन खरीदार न मिलने से बिल्डर्स के चेहरे उतरे हुए थे. अब अंदाजा लगाया जा रहा है कि रजिस्ट्री कराने के खर्च घटने से न केवल ये मकान बिक जाएंगे बल्कि सरकार को भी बतौर राजस्व खासी आमदनी होगी.

भोपाल क्रेडाई के अध्यक्ष नितिन अग्रवाल का कहना है कि सरकार के इस फैसले से आम लोगों को फायदा होगा, रोजगार बढ़ेगा और प्रौपर्टी के दाम कम होने से नए प्रोजैक्ट आएंगे.

इस फैसले को रुपए के उदाहरण से समझें तो भोपाल के सब से महंगे बावडि़याकलां इलाके की कालोनियों में जमीन के सरकारी सूचीबद्ध सर्किल रेट 21,000 रुपए से घट कर 16,800 रुपए प्रतिवर्ग मीटर हो जाएंगे. वहीं, घटती कीमत पर मकानों की रजिस्ट्री कराने पर 5 से 8 प्रतिशत का जो कर लगता है, वह भी कम लगेगा.

फायदा सब को है, खरीदने वाले को भी, बेचने वाले को भी और उस सरकार को भी जो जबरन कालाधन बचाने के नाम पर जमीनजायदाद की कीमतें तय करती है. फायदा बैंकों को भी है क्योंकि वाकई रियल एस्टेट में बूम आया तो होम लोन लेने वालों की तादाद बढ़ेगी जिस से उन का भी कारोबार बढ़ेगा.

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