देश भर में गुरु पूर्णिमा का पर्व धूमधाम से मना, चेलों ने खूब खिलाया और छुटभैयों से लेकर ब्रांडेड गुरुओं तक ने छक कर खाया. एक दिन में ही साल भर के राशन पानी का इंतजाम हो गया. खूब नकदी मिली. वस्त्राभूषण भी मिले और पूजा पाठ हुई सो अलग. कई अति श्रद्धालु शिष्यों ने तो बिना बैक्टीरिया वायरस की परवाह किए गुरु के चरण धोकर पानी पिया जिसे चरणामृत कहा जाता है.

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