बिहार के खूबसूरत शहर वैशाली के सदर थाने के हाजीपुर-पटना सर्किट हाउस के ठीक सामने राष्ट्रीय राजमार्ग-18 पर भारी मजमा जुटा हुआ था. सड़क के किनारे एक युवक की लाश पड़ी थी. युवक की हत्या गोली मार की गई थी. लाश के पास ही एक मोटरसाइकिल खड़ी थी, जिस में चाबी लगी हुई थी और हेलमेट हैंडल पर टंगा था.

अनुमान था कि मोटरसाइकिल मृतक की ही होगी. भीड़ में किसी आदमी ने इस की सूचना सदर थाने के थानेदार अभय कुमार को दे दी. सूचना मिलने के बाद थानेदार अभय कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए और जांच में जुट गए.

जांच शुरू करने के पहले उन्होंने एसपी मानवजीत सिंह ढिल्लों और एसडीपीओ महेंद्र कुमार बसंत्री को सूचना दे दी थी. सूचना मिलने के कुछ देर बाद दोनों पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए थे. यह बात 25 दिसंबर, 2019 की है.

लाश की जांचपड़ताल करने पर पता चला कि हत्यारों ने युवक को सिर और गरदन में 2 गोलियां मारी थीं. मौके का निरीक्षण करने पर यह भी पता चला कि युवक की हत्या कहीं और कर के उस की लाश यहां ला कर फेंक दी गई. अगर उस की हत्या मौके पर की गई होती तो वहां बड़ी मात्रा में खून फैला होता. लेकिन मौके पर मामूली खून था.

पुलिस ने लाश की जामातलाशी ली तो उस के पास से कोई ऐसा सामान बरामद नहीं हुआ, जिस से लाश की शिनाख्त हो सके. वहां खड़ी मोटरसाइकिल की डिक्की खोल कर कागज देखे तो उस की पहचान दीनानाथ राय, निवासी सोंधो रत्ती, थाना गोरौल, जिला वैशाली के रूप में की हुई. इस आधार पर एसओ अभय कुमार ने गोरौल थाने फोन कर के मृतक दीनानाथ राय की शिनाख्त कराने के लिए मदद मांगी.

गोरौल के थानाप्रभारी विनय कुमार ने दीनानाथ की हत्या की सूचना उस के घर वलों तक पहुंचवा दी. मृतक दीनानाथ राय कोई मामूली हैसियत वाला नहीं था, वह गोरौल प्रखंड के प्रमुख मुन्ना राय का बहनोई और रामजी ट्रांसपोर्ट कंपनी का करोड़ों का मालिक था. थानाप्रभारी ने उस की हैसियत के बारे में सदर थाने के एसओ अभय कुमार को भी बता दिया.

सूचना मिलने के बाद मुन्ना राय अपने समर्थकों के साथ हाजीपुर रवाना हो गए. वह सीधे थाना सदर पहुंचे. उधर पुलिस लाश को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा चुकी थी. एसओ अभय कुमार ने मोबाइल से खींचे गए दीनानाथ राय की लाश के फोटो उन्हें दिखाए. फोटो देख कर मुन्ना राय ने उस की शिनाख्त अपने बहनोई दीनानाथ के रूप में कर दी.

लाश की शिनाख्त के बाद पुलिस ने मुन्ना राय की तहरीर पर अज्ञात हत्यारों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर के जांच शुरू कर दी. मुकदमा दर्ज कराने के बाद मुन्ना राय एसपी मानवजीत सिंह ढिल्लों से उन के सरकारी आवास पर जा कर मिले.

उन्होंने मामले का जल्द खुलासा कर बहनोई के हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का आग्रह किया. साथ ही उन्होंने एसपी ढिल्लों को चेतावनी दी कि अगर हत्यारे जल्द से जल्द पकड़े नहीं गए तो वह जनांदोलन छेड़ने के लिए मजबूर हो जाएंगे. इस पर एसपी ने उन्हें भरोसा दिया कि इस की नौबत नहीं आएगी. पुलिस जल्द ही हत्या का खुलासा कर देगी.

इस के बाद समर्थकों के साथ मुन्ना राय वैशाली लौट आए और सीधे बहन किरन की ससुराल सोंधों रत्ती पहुंचे. किरन ने बताया कि दीनानाथ बीती शाम 6 बजे घर से निकलते समय मुझ से पटना औफिस जाने की बात कह कर अपनी बाइक से निकले थे. पटना जाने के बजाए हाजीपुर कैसे पहुंच गए, मुझे इस बारे में कुछ भी पता नहीं है.

घर लौटने के बाद मुन्ना राय चैन से नहीं बैठे. वह अपने स्तर से बहनोई की हत्या की गुत्थी सुलझाने में लगे हुए थे. वह यह नहीं समझ पा रहे थे कि बहनोई की हत्या आखिर किस ने और किस वजह से की होगी. क्योंकि वह नेक दिल इंसान थे. उन की न तो किसी से अदावत थी और न किसी से संपत्ति का कोई झगड़ा था और न ही उन का किसी महिला से चक्कर था. दूरदूर तक सोचने पर मुन्ना राय को हत्या का कोई कारण नजर नहीं आ रहा था.

इधर पुलिस दीनानाथ राय हाईप्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री की गुत्थी सुलझाने में जुटी हुई थी. एसपी मानवजीत सिंह ढिल्लों ने एसडीपीओ महेंद्र कुमार बसंत्री के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित कर दी.

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26 दिसंबर, 2018 को एसडीपीओ बसंत्री ने एसओ अभय कुमार को अपने कार्यालय बुलाया. इस केस के सिलसिले में उन्होंने बसंत्री के साथ एक बैठक की. एसडीपीओ महेंद्र कुमार बसंत्री को एक बात काफी समय से खटक रही थी. वह यह थी कि दीनानाथ की हत्या अगर किसी पेशेवर हत्यारे ने की होती तो वह राह चलते या बीच चौराहे पर कहीं भी गोली मार सकता था. उसे इस तरह किसी सुनसान जगह का चुनाव करने की जरूरत नहीं पड़ती.

हत्या का यह तरीका पेशेवर कातिल का नहीं बल्कि किसी और का था. उन्हें यह मामला आशनाई से जुड़ा दिखा रहा था.

पुलिस टीम ने अपनी जांच की दिशा इसी ओर मोड़ दी. पुलिस ने सब से पहले दीनानाथ के मोबाइल की घटना से 15 दिनों पहले की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स की जांचपड़ताल करने पर पता चला कि एक फोन नंबर से कई दिनों से दीनानाथ के फोन पर काल आ रही थी. उस नंबर पर दोनों के बीच काफी देर तक बातचीत होती थी. दीनानाथ भी उस नंबर पर काफी देर तक बातचीत करता था.

उस नंबर को पुलिस ने टारगेट पर ले लिया और उस की काल डिटेल्स निकलवाई. वह नंबर किसी शोबिंदा देवी के नाम से था जो बड़ेवा, थाना गोरौल, जिला वैशाली की रहने वाली थी. इस से पुलिस को लगने लगा कि दीनानाथ की हत्या आशनाई के चलते ही की गई होगी. शोबिंदा के पकड़े जाने के बाद ही इस हत्या के रहस्य से परदा उठ सकता था.

बात 30 दिसंबर की सुबह की है. शोबिंदा को गिरफ्तार करने के लिए हाजीपुर पुलिस वैशाली पहुंच गई. गोरौल पुलिस की मदद से हाजीपुर पुलिस ने शोबिंदा के मकान को चारों ओर से घेर लिया. इस के बाद उस मकान में पहुंची तो वहां उस समय शोबिंदा के अलावा कोई और नहीं था.

पुलिस ने शोबिंदा को गिरफ्तार कर लिया और पूछताछ के लिए उसे गोरौल थाने ले आई. सख्ती से की गई पूछताछ से शोबिंदा ने पुलिस के सामने घुटने टेक दिए.

पूछताछ के दौरान उस ने पुलिस को सब सचसच बता दिया. उस ने बताया कि दीनानाथ की हत्या उस का भाई संजीव और पति रामसूरत ने की थी.

शोबिंदा के बयान के आधार पर पुलिस ने अगले दिन रामसूरत के घर दबिश दी. वह घर पर सोता हुआ मिला. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. इत्तफाक से संजीव भी वहीं मिल गया. उसे भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया. दरअसल बात यह थी कि एक दिन पहले शोबिंदा को गिरफ्तार करने की जानकारी रामसूरत ने अपने साले संजीव को दी थी. बहनोई रामसूरत से मिलने संजीव बड़ेवा आया हुआ था. दोनों वहां से कहीं भागने की फिराक में थे.

तीनों आरोपियों के गिरफ्तार होने के बाद एसडीपीओ महेंद्र कुमार बसंत्री ने पुलिस सभागार में प्रैसवार्ता आयोजित की. पत्रकारों के सामने दीनानाथ राय के तीनों हत्यारों को पेश किया और पूरी घटना विस्तार से बताई. तीनों आरोपियों ने ट्रांसपोर्टर दीनानाथ राय की हत्या किए जाने का अपराध स्वीकार कर लिया. दीनानाथ की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार निकली—

35 वर्षीय दीनानाथ राय मूलरूप से बिहार के जिला वैशाली के गोरौल के सोंधों रत्ती का रहने वाला था. वह अपने मांबाप की एकलौती संतान था. ग्रैजुएशन के बाद वह अपने पिता रामजी राय के ट्रांसपोर्ट के व्यवसाय को देखने लगा. कुछ ही दिनों बाद पिता ने पूरा व्यवसाय बेटे को सौंप दिया. बेटे के व्यवसाय संभाल लेने के बाद रामजी राय का अधिकांश समय घर पर ही बीतता था. हफ्ते-10 दिन में जब उन का मन होता, औफिस चले जाते.

ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय रामजी राय ने पटना के जीरो माईल से शुरू किया था. बाद में काम काफी बढ़ गया. उन के घर में हर महीने लाखों रुपए आने लगे. जब दीनानाथ ने पूरी तरह व्यवसाय संभाल लिया तो रामजी राय ने उस का विवाह किरन से कर दिया.

दीनानाथ की गृहस्थी बड़े मजे से चल रही थी. दीनानाथ अकसर मोटरसाइकिल से वैशाली से पटना जाताआता था और देर रात घर लौट आता था. कभीकभी वह पटना में ही रुक जाता था. जब भी वह पटना में रुकता था तो फोन कर के घर बता देता था.

दीनानाथ जब भी घर वालों को पटना में रुकने की बात कहता था, उस दिन वह पटना में होता ही नहीं था. दरअसल, दीनानाथ ने अपने चेहरे के पीछे एक और चेहरा छिपा रखा था. इस बात की जानकारी तो किसी को नहीं थी, यहां तक कि उस की पत्नी किरन भी पति के इस दोहरे चरित्र से अनभिज्ञ थी.

दीनानाथ का दूसरा चेहरा एक प्रेमी का था, जो सालों से एक कुंवारी लड़की से प्यार करता था. कुंवारी से वह लड़की सुहागन बनी, तब भी वह उसे दिलोजान से चाहता रहा. ऐसा नहीं था यह प्यार एकतरफा रहा हो, वह लड़की भी उसे बहुत चाहती थी.

जिस लड़की पर दीनानाथ अपनी जान छिड़कता था. दरअसल, वह लड़की शोबिंदा ही थी. शोबिंदा मूलरूप से सोंधों रत्ती की रहने वाली थी. वह दीनानाथ की पड़ोसन थी. शोबिंदा और दीनानाथ एक ही जाति के थे और हमउम्र भी. उन का एकदूसरे के घर आनाजाना भी था.

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दीनानाथ को जब भी फुरसत मिलती, वह शोबिंदा से मिलने उस के घर चला जाता था. ऐसा नहीं था कि घर में शोबिंदा के अलावा कोई और नहीं रहता था. घर में उस के मांबाप के अलावा भाई संजीव और छोटी बहन शालिनी भी थी. लेकिन दीनानाथ की शोबिंदा से खूब निभती थी.

बचपन को पीछे छोड़ कब दोनों ने जवानी की दहलीज पर पांव रखे, न तो शोबिंदा जान पाई और न ही दीनानाथ. जवानी की दहलीज पर पहुंच कर दोनों के बीच कब चाहत ने अपने पांव पसार लिए, यह दोनों ही नहीं जान सके. उन्हें तो तब होश आया जब उन का एकदूसरे को देखे बिना रह पाना मुश्किल होने लगा. तब उन्हें समझ आया कि वे एकदूसरे से प्रेम करने लगे हैं. समय देख कर दोनों ने एकदूसरे से अपने प्रेम का इजहार कर दिया.

एक दिन की बात है. दोपहर का समय था. शोबिंदा घर में अकेली थी. घर के बाकी सदस्य किसी न किसी काम से घर से बाहर थे. दीनानाथ शोबिंदा से मिलने उस के घर पहुंचा. शोबिंदा को रसोई की साफसफाई से थोड़ी देर पहले ही फुरसत मिली थी.

वह आराम करने के लिए जैसे ही अपने कमरे में पहुंची, तभी उसे महसूस हुआ कि उसे किसी ने अपनी बांहों में भर लिया है. अचानक हुई इस हरकत से शोबिंदा की हलकी चीख निकल गई. लेकिन जब उस ने पलट कर देखा तब कहीं उस के जान में जान आई.

वह दीनानाथ ही था. उसे अपने बांहों में भरा हुआ था. शोबिंदा ने दीनानाथ का विरोध नहीं किया बल्कि वह उस से प्यार भरी बातें करने लगी. इस के बाद दोनों सामाजिक मर्यादाओं को ताख पर रख एकदूसरे में समाते चले गए.

जवानी के जोश में आ कर वे दोनों वह गलती कर बैठे थे, जिसे करने की समाज अनुमति कभी नहीं देता. एक बार जिस्मानी रिश्ते कायम करने के बाद उन्हें जब भी अवसर मिलता, अपनी हसरत पूरी कर लेते.

शोबिंदा और दीनानाथ ने अपने प्यार को लाख पिंजरे में कैद कर के रखा था, आखिरकार उन के प्यार का संजीव के सामने परदाफाश हो ही गया. संजीव शोबिंदा का भाई था. दोनों के रिश्तों के बारे में उसे पता चल चुका था. जब से उसे यह पता चला था, वह दीनानाथ से नफरत करने लगा था.

इस के बाद संजीव को दीनानाथ से इस बात की चिढ़ हो गई कि उस ने जिस थाली में खाया, उसी में छेद किया. सामाजिक रिश्ते में शोबिंदा और दीनानाथ भाईबहन थे. दोनों ने इस पवित्र रिश्ते को कलंकित किया था. इसीलिए संजीव ने दीनानाथ को अपने घर आने से साफ मना कर दिया था.

लेकिन उस की बातों को दरकिनार कर शोबिंदा से मिलने उस के घर पहुंच ही जाता था. संजीव जब उसे घर आया देखता तो उस के तनबदन में आग सी लग जाती थी. गुस्से से वह हाथ मलता रह जाता था.

संजीव दीनानाथ से कमजोर था. इसी वजह से दीनानाथ से छुटकारा पाने का उस के पास एक ही विकल्प बचा था कि जल्द से जल्द बहन शोबिंदा की शादी कर दे. उसे लगा कि जब वह अपनी ससुराल चली जाएगी तो दीनानाथ वहां नहीं पहुंच सकेगा.

इस के बाद संजीव ने घर वालों से रायमशविरा कर बहन के लिए लड़का देखना शुरू कर दिया. थोड़ी मेहनत के बाद उसे बड़ेवा का रहने वाला रामसूरत सही लगा. बात पक्की हो गई तो सामाजिक रीतिरिवाज से शोबिंदा की शादी रामसूरत से कर दी गई.

रामसूरत एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करता था. उस का अपना भरापूरा परिवार था. उस के परिवार में भाईबहन और मांबाप थे. शोबिंदा जैसी खूबसूरत बीवी पा कर वह बेहद खुश था. लेकिन शोबिंदा खुश नहीं थी.

दीनानाथ को दिल दे चुकी शोबिंदा उसी से ब्याह करना चाहती थी. दीनानाथ के बिना वह जीने की कल्पना तक नहीं कर सकती थी. ऐसे में शोबिंदा अपने प्यार के दिल की धड़कनों से दूर चली गई तो खुश रहने का सवाल ही नहीं था. इधर दीनानाथ भी शोबिंदा का प्यार पाने के लिए विरह की अग्नि में जल रहा था.

दीनानाथ की हालत जल बिन मछली की तरह हो गई थी. वह दिनरात शोबिंदा के बारे में सोचता रहता था. इसी वजह से उस का बिजनैस में मन नहीं लगता था. घर वाले यह सोचसोच कर परेशान थे कि हमेशा मुसकराने वाले दीनानाथ को क्या हो गया है, जो मरीज बनता जा रहा है.

घर वाले उसे डाक्टर के पास ले गए. डाक्टर ने कई जांचें कराईं. सभी जांच सामान्य निकलीं. उस के अंदर कोई बीमारी होती तब तो पता चलती. लिहाजा डाक्टर भी परेशान हो गया कि किस बीमारी की दवा दे.

घर वालों ने सोचा कि बेटा जवान हो चुका है, हो सकता है उसे अकेलापन अखर रहा हो और इस वजह से उस का मन न लग रहा हो. फिर क्या था, उन्होंने दीनानाथ की गृहस्थी किरन के साथ बसा दी. दीनानाथ धीरेधीरे किरन की ओर आकर्षित होता गया. वह फिर से पहले जैसा हो गया.

ऐसा उस ने घर वालों को भ्रमित करने के लिए किया था. असल बात तो यह थी कि वह शोबिंदा के बिना जी ही नहीं पा रहा था. शेबिंदा को देखने के लिए उस की आंखें पथरा गई थीं. आखिर एक दिन दीनानाथ ने सोच लिया, चाहे कुछ भी हो जाए वह शोबिंदा से जरूर मिलेगा.

आखिरकार एक दिन हिम्मत जुटा कर वह शोबिंदा की ससुराल बड़ेवा पहुंच गया. शोबिंदा को देख कर दीनानाथ का चेहरा खिल उठा. उसे ऐसा लगा जैसे मृतप्राय जीवन को संजीवनी मिल गई हो. जबकि शोबिंदा उसे देख कर अवाक रह गई. शोबिंदा ने ससुराल में घर वालों से दीनानाथ का परिचय दूर के रिश्ते के भाई के रूप में कराया था.

दीनानाथ ने वह रात शोबिंदा की ससुराल में बिताई और अगले दिन सुबह होते ही अपने औफिस पटना चला गया था. पता नहीं क्यों शोबिंदा के पति रामसूरत के मन में दीनानाथ को ले कर एक अजीब सा शक होने लगा. पत्नी की बातें उस के गले नहीं उतर रही थीं.

दीनानाथ उस का रिश्तेदार होता तो शादी में जरूर दिखाई देता. लेकिन शादी के बरसों बाद यह रिश्तेदार कहां से पैदा हो गया. रामसूरत ने इस बारे में साले संजीव से बात की और जानकारी ली तो उस ने बताया कि इस नाम का उस का कोई रिश्तेदार नहीं है. साले का जवाब सुन कर रामसूरत का माथा ठनक गया कि उस का शक सही निकला. मामला कुछ गड़बड़ है. यह बात रामसूरत ने पत्नी को न बता कर अपने तक ही सीमित रखी.

एक बार दीनानाथ का रास्ता खुला तो वह शोबिंदा से मिलने अकसर उस की ससुराल जाने लगा. वह ऐसे समय पर वहां पहुंचता था, जिस समय पति घर पर नहीं होता था.

घटना से करीब 6 महीने पहले की बात है. दीनानाथ शोबिंदा से मिलने उस की ससुराल गया था. उस समय रामसूरत अपनी नौकरी पर था. शोबिंदा के सासससुर भी किसी जरूरी काम से कहीं बाहर गए हुए थे. घर में वह अकेली थी.

दीनानाथ को देख कर शोबिंदा का दिल बागबाग हो उठा. उसे देखते ही दीनानाथ के बदन जलने लगा. दोनों खुद को रोक नहीं पाए और तन की तपिश ठंडी करने के लिए दो जिस्म एक जान हो गए. दुर्भाग्य की बात यह रही कि जिस समय दोनों का मिलन चल रहा था, उसी समय रामसूरत घर लौट आया. घर का दरवाजा खुला हुआ था. वह जब अपने कमरे में पहुंचा तो पत्नी को पराए मर्द के साथ आपत्तिजनक हालत में देख कर उस का खून खौल उठा.

कमरे में अचानक पति को आया देख शोबिंदा के होश उड़ गए. वह जल्दी से बिस्तर से उठ कर तन ढकने लगी. दीनानाथ मुंह छिपा कर वहां से भाग निकला. गुस्से से लाल रामसूरत पत्नी पर कहर बन कर टूट पड़ा. उस ने उसे लातघूंसों से खूब मारा. चूंकि शोबिंदा ने गलती की थी, इसलिए वह पति के पैरों में गिर कर माफी मांगने लगी और वचन दिया कि आज के बाद दीनानाथ से कोई रिश्ता नहीं रखेगी. न ही उसे यहां आने देगी. वह दोनों हाथ जोड़ कर पति के सामने गिड़गिड़ाने लगी.

रामसूरत ने समझदारी से काम लिया. पत्नी को उस ने माफ तो कर दिया था लेकिन उसे उस पर तनिक भी विश्वास नहीं था कि वह दोबारा ऐसा नहीं करेगी.

रातसूरत ने साले संजीव को शोबिंदा की करतूतों के बारे में बता दिया था. संजीव ने बहन की घिनौनी बातों को सुना तो उस के भी तनबदन में आग लग गई. संजीव बड़ेवा जा पहुंचा. जीजा से बात की और उन्हें भरोसा दिया कि अब पानी सिर से बहुत ऊपर गुजर चुका है, दीनानाथ को इस की सजा मिलनी ही चाहिए.

इस के बाद रामसूरत और संजीव दीनानाथ को मजा चखाने के लिए एक हो गए. संजीव ने बहन को डराधमका कर उसे अपने पक्ष में कर लिया. संजीव ने शोबिंदा को साफतौर पर समझा दिया कि अगर उस ने उन का साथ नहीं दिया, तो दीनानाथ के साथसाथ उसे भी जान से मार देंगे. शोबिंदा बुरी तरह डर गई और पति व भाई का साथ देने के लिए तैयार हो गई.

24 दिसंबर, 2018 की सुबह संजीव बहन की ससुराल बड़ेवा आ पहुंचा. रामसूरत भी घर पर ही था. आपस में दोनों ने सलाहमशविरा किया कि दीनानाथ का आज काम तमाम हो जाना चाहिए.

योजना के मुताबिक, संजीव ने शोबिंदा से कहा कि वह दीनानाथ को फोन कर के यहां बुलाए. ध्यान रहे किसी तरह की कोई चालाकी नहीं करनी है. अगर चालाकी करने की कोशिश की या फिर दीनानाथ को कुछ बताने की कोशिश की तो इस का अंजाम बहुत बुरा हो सकता है.

भाई और पति के धमकाने पर शोबिंदा ने प्रेमी दीनानाथ को फोन कर के रात में घर पर मिलने के लिए बुलाया. उस ने यह बता दिया था कि आज रात पति घर पर नहीं रहेगा.

जब से दीनानाथ के पास शोबिंदा का फोन आया था, वह उस से मिलने के लिए बेचैन हो रहा था. वह सोच रहा था कि कैसे घर से निकलूं. उस ने पत्नी से बहाना किया कि उसे पटना औफिस पहुंचना है. कुछ जरूरी काम आ गया है.

वह मोटरसाइकिल ले कर घर से निकल गया. उस समय शाम के 6 बज रहे थे. करीब घंटा भर बाद वह शोबिंदा की ससुराल पहुंच गया. दीनानाथ के वहां आने से पहले ही संजीव और रामसूरत घात लगा कर कमरे में छिप गए थे.

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शोबिंदा थोड़ी देर उसे अपनी बातों में उलझाए रही. तब तक संजीव और रामसूरत कमरे से निकल कर बाहर आ गए. उन्हें देख कर दीनानाथ घबरा गया और उलटे पांव बाहर भागा. जब तक वह भागता, संजीव ने उसे धर दबोचा. तब तक रामसूरत शोबिंदा को कमरे में बंद कर के साले के पास वापस लौट आया था.

दीनानाथ समझ गया था कि शोबिंदा ने धोखा दिया है. वह जान की भीख मांगता हुआ संजीव से बोला कि उसे यहां से जाने दे, शोबिंदा से कोई रिश्ता नहीं रखेगा. उस समय संजीव पर खून सवार था. उस ने उस की एक नहीं सुनी और कमर में पहले से खोंस रखी पिस्टल निकाल ली. दीनानाथ का मुंह दबा कर उस ने सिर और गरदन पर सटा कर 2 गोलियां मार दीं.

गोली लगते ही दीनानाथ की मौत हो गई. उस के बाद दोनों लाश को उसी की मोटरसाइकिल पर बीच में रख कर हाजीपुर-पटना राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित हाजीपुर सर्किट ले आए. मोटरसाइकिल संजीव चला रहा था और पीछे रामसूरत बैठा दीनानाथ की लाश को संभाले हुए था. सड़क के किनारे लाश डाल कर उन्होंने मोटरसाइकिल वहीं खड़ी कर दी. उन्होंने उस की चाबी भी लगी छोड़ दी. फिर दूसरी सवारी पकड़ कर वैशाली आ गए और चैन से सो गए.

संजीव और रामसूरत ने दीनानाथ की हत्या को बड़ी चालाकी से अंजाम दिया था. लेकिन मोटरसाइकिल की वजह से वे अपने ही रचे चक्रव्यूह में फंस गए.

शोबिंदा, संजीव और रामसूरत से विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने संजीव की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त पिस्टल रामसूरत के घर से बरामद कर ली. हत्या के साथसाथ पुलिस ने संजीव और रामसूरत पर आर्म्स एक्ट की धारा भी लगाई. पुलिस ने तीनों आरोपियों शोबिंदा, संजीव और रामसूरत को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.

कथा लिखने तक पुलिस ने इन के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया था.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

सौजन्य कहानी: मनोहर कहानी

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