सत्येंद्र और सारिका एकदूसरे को दिलोजान से चाहते थे, सत्येंद्र के पिता सारिका को अपनी बहू बनाने के लिए तैयार हो गए थे. लेकिन सारिका के पिता राकेश लोध नहीं माने.

उस दिन मई 2019 की 17 तारीख थी. आसमान पर काले बादल छाए थे और सुबह से ही बूंदाबांदी हो रही थी. उन्नाव के अतरी गांव का रहने वाला अरविंद खराब मौसम की परवाह किए बगैर अपने खेत पर खरबूजे तोड़ने पहुंच गया. दरअसल अरविंद ताजे खरबूजे खेत से तोड़ता फिर झल्ली में रख कर साइकिल से गांवगांव में फेरी लगाने निकल जाता था.

उस दिन जब वह खरबूजे तोड़ रहा था तभी उस की निगाह खेत से कुछ दूरी पर झाड़ी के पास पड़ी. वहां कुछ कुत्ते घूम रहे थे. वे अपने पंजों से जमीन को कुरेद रहे थे. अरविंद के मन में जिज्ञासा जागी तो उस ने खरबूजे तोड़ने बंद कर दिए और कुत्तों के झुंड के पास पहुंच गया. वहां अरविंद ने जो देखा, उस से उस के होश उड़ गए.

जमीन के अंदर कोई लाश दफन थी. लाश का एक हाथ व एक पैर कुत्तों ने जमीन खोद कर बाहर निकाल लिया था और उसे नोंच रहे थे. यह देखते ही अरविंद उसी समय बदहवास सा गांव की ओर भागा और गांव पहुंच कर यह जानकारी लोगों को दे दी.

जिस ने भी अरविंद की बात सुनी, वही उस के खरबूजे के खेत की ओर भागा. देखते ही देखते खेत पर लोगों की भीड़ जुट गई. उसी समय किसी ने जमीन में शव दफन होने की जानकारी हाजीपुर पुलिस चौकी में दे दी तो चौकी इंचार्ज हामिद 2-3 सिपाहियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने पुलिस अधिकारियों को सूचना दी, फिर पुलिसकर्मियों की मदद से शव को जमीन से बाहर निकलवाया.

गीली मिट्टी होने की वजह से शव पूरी तरह मिट्टी में सना था, जिस से उस की पहचान नहीं हो पा रही थी. वैसे लाश किसी महिला की लग रही थी.

पुलिस ने पानी मंगवा कर शव पर लगी मिट्टी साफ कराई. तब पता चला कि वह लाश 18-19 साल की किसी युवती की थी. उस के सिर पर चोट का निशान था. वह हलके गुलाबी रंग का सूट पहने थी. उस के गले में मां दुर्गा का लौकेट था. मृतका के दाहिने हाथ व पैर को कुत्तों ने नोंच डाला था. शव 3-4 दिन पुराना लग रहा था.

चौकीइंचार्ज हामिद अभी शव का निरीक्षण कर ही रहे थे कि उसी समय एसपी माधव प्रसाद वर्मा, एएसपी विनोद कुमार पांडेय, सीओ (सिटी) उमेशचंद्र त्यागी तथा गंगाघाट थानाप्रभारी हरिप्रसाद अहिरवार भी वहां आ गए. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया.

घटनास्थल पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटी थी, लेकिन कोई भी लाश की शिनाख्त नहीं कर सका था. मौके पर अरविंद भी मौजूद था, जिस ने सब से पहले लाश देखी थी. पुलिस अधिकारियों ने उस से भी पूछताछ की. अरविंद ने पुलिस को सारी बात बता दी.

शव की शिनाख्त न होने पर एसपी माधव प्रसाद वर्मा ने थानाप्रभारी हरिप्रसाद अहिरवार को निर्देश दिए कि वह आसपास के थानों से जानकारी जुटाएं कि उन के यहां किसी युवती की गुमशुदगी तो दर्ज नहीं है. थानाप्रभारी ने उसी समय वायरलैस से यह सूचना सभी थानों को जारी कर दी और इस पर तत्काल रिपोर्ट देने को कहा.

वायरलैस पर मैसेज प्रसारित होने के कुछ ही देर बाद थाना माखी से सूचना मिली कि 14 मई को उन के यहां 17-18 साल की एक युवती की गुमशुदगी दर्ज है. पंडितखेड़ा गांव के रहने वाले राकेश लोध की बेटी सारिका लापता थी.

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यह सूचना प्राप्त होते ही एसपी माधव प्रसाद वर्मा ने माखी थानाप्रभारी श्याम कुमार पाल को आदेश दिया कि वह राकेश लोध को साथ ले कर तत्काल अतरी गांव में घटनास्थल पर आ जाएं ताकि बरामद लाश की शिनाख्त हो सके.

चूंकि कप्तान साहब का आदेश था, अत: थानाप्रभारी श्याम कुमार पाल तत्काल पहले पंडितखेड़ा गांव पहुंचे. संयोग से उस समय राकेश लोध घर पर ही मिल गया. थानाप्रभारी ने उसे बताया कि अतरी गांव के बाहर खेत में दफन एक युवती की लाश मिली है.

तुम्हारी बेटी सारिका भी लापता है, जिस की तुम ने थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई है. मेरे साथ चल कर उस लाश को देख लो. इसी के साथ उन्होंने राकेश लोध को जीप में बिठाया और अतरी गांव की ओर रवाना हो गए.

पंडितखेड़ा गांव से अतरी गांव मात्र 3 किलोमीटर दूर था. अंतर केवल यह था कि पंडितखेड़ा गांव थाना माखी के अंतर्गत आता था और अतरी गांव थाना गंगाघाट के अंतर्गत. ज्यादा दूरी न होने के कारण थानाप्रभारी श्याम कुमार पाल को वहां पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगा.

वहां पहुंच कर राकेश लोध ने जब लाश देखी तो दहाड़ें मार कर रोने लगा. उस ने उस लाश की पहचान अपनी बेटी सारिका के रूप कर दी.

लाश की शिनाख्त हुई तो पुलिस अधिकारियों ने राहत की सांस ली. इस के बाद थानाप्रभारी हरिप्रसाद ने मौके की काररवाई कर के शव उन्नाव के पोस्टमार्टम हाउस भिजवा दिया. थानाप्रभारी हरिप्रसाद अहिरवार राकेश लोध को पूछताछ के लिए थाना गंगाघाट ले आए. उन्होंने राकेश लोध से पूछा, ‘‘क्या तुम बता सकते हो कि तुम्हारी बेटी की हत्या किस ने की होगी?’’

‘‘हां साहब, मुझे पता है.’’ राकेश गमछे से आंसू पोंछते हुए बोला.

‘‘बताओ, कौन है वो?’’ थानाप्रभारी ने कहा.

‘‘साहब, मेरी बेटी की हत्या घोंघी रौतापुर के सुंदरलाल ने की है. उसी ने हत्या के बाद लाश को जमीन में दफन कर दिया.’’

‘‘सुंदरलाल से तुम्हारी कोई रंजिश थी जो उस ने हत्या कर दी?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘साहब, कोई गहरी रंजिश तो नहीं थी पर कुछ महीने पहले सुंदरलाल के बेटे सत्येंद्र ने मेरी बेटी सारिका से छेड़छाड़ की थी. तब हम ने उसे पीट दिया था. उसी समय सुंदरलाल ने हमें देख लेने की धमकी दी थी.’’

शाम 5 बजे थानाप्रभारी हरिप्रसाद अहिरवार ने सुंदरलाल को थाने बुला लिया. उन्होंने जब उस से सारिका की हत्या के बारे में पूछताछ की तो वह घबरा गया और बोला, ‘‘हुजूर, राकेश मुझे षडयंत्र कर फंसा रहा है. सारिका की हत्या की खबर सुन कर मैं खुद हैरान हूं. वैसे भी मैं कई दिन से परेशान हूं क्योंकि मेरा 22-23 साल का बेटा सत्येंद्र 7 मई की शाम यह कह कर घर से निकला था कि दवा लेने शुक्लागंज जा रहा है, कुछ देर में आ जाएगा, लेकिन तब से वापस नहीं आया. मैं ने चौकी में इस की गुमशुदगी भी दर्ज करा दी है.’’

सुंदरलाल ने थानाप्रभारी को चौंकाने वाली एक बात यह बताई कि सत्येंद्र और सारिका एकदूसरे से प्यार करते थे और शादी करना चाहते थे. इस के लिए वह तो तैयार था लेकिन सारिका का पिता राकेश तैयार नहीं हुआ. सुंदरलाल ने बेटे सत्येंद्र के गायब होने में राकेश का ही हाथ बताया.

सुंदरलाल की बात सुन कर थानाप्रभारी का माथा ठनका. वह सोचने लगे कि कहीं सारिका की तरह सत्येंद्र की भी हत्या तो नहीं कर दी गई. कहीं यह औनर किलिंग का मामला तो नहीं है.

इसी के साथ उन्होंने सत्येंद्र की खोज शुरू कर दी. उन्होंने वायरलैस द्वारा यह सूचना प्रसारित कराई कि 6 मई के बाद उन्नाव के किसी थाने के तहत 22-23 साल के अज्ञात युवक का शव तो बरामद नहीं हुआ है. अगर हुआ हो तो उस की जानकारी थाना गंगाघाट को दी जाए.

इस के बाद 18 मई की सुबह 10 बजे उन्नाव कोतवाली से थानाप्रभारी हरिप्रसाद को सूचना मिली कि 8 मई की सुबह मगरवारा रेलवे ट्रैक पर एक युवक की क्षतविक्षत लाश मिली थी. लाश की शिनाख्त न होने पर अज्ञात में पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि युवक की हत्या गला दबा की गई थी. हत्यारों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए लाश को रेलवे ट्रैक पर रख दिया था.

यह जानकारी पाते ही थानाप्रभारी हरिप्रसाद अहिरवार थाना उन्नाव कोतवाली पहुंचे. वहां से वह पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा शव के फोटो ले कर वापस थाने लौट आए. अब तक मृतका सारिका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक सारिका की हत्या गला दबा कर की गई थी. उस के साथ बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई. सिर पर चोट का निशान पाया गया था. दोनों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एक समानता यह थी कि दोनों की हत्या गला दबा कर की गई थी.

थानाप्रभारी अहिरवार ने सुंदरलाल को पुन: थाना गंगाघाट बुलवा लिया और रेलवे ट्रैक से बरामद युवक के शव के फोटो उन्हें दिखाए. फोटो देखते ही सुंदरलाल फफक पड़ा. उस ने बताया कि यह फोटो उस के 22 वर्षीय बेटे सत्येंद्र के हैं. सत्येंद्र और सारिका की लाशों की शिनाख्त हो चुकी थी. पुलिस का अगला काम हत्यारों तक पहुंचना था.

यह मामला अब तक 3 थाना क्षेत्रों गंगाघाट, उन्नाव सदर कोतवाली तथा माखी से जुड़ गया था. गंगाघाट थानाक्षेत्र में सारिका का शव बरामद हुआ था, जबकि माखी थाने में उस की गुमशुदगी दर्ज थी. उन्नाव सदर कोतवाली थाना क्षेत्र से सत्येंद्र की लाश बरामद हुई थी, जबकि उस की गुमशुदगी थाना गंगाघाट में दर्ज हुई थी.

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थानाप्रभारी हरिप्रसाद अहिरवार ने अब तक की जांच से एसपी माधव प्रसाद वर्मा को अवगत कराया तो उन्होंने डबल मर्डर के खुलासे के लिए सीओ (सिटी) उमेशचंद्र त्यागी व एएसपी विनोद कुमार पांडेय के निर्देशन में 3 थानों की एक संयुक्त टीम गठित कर दी.

इस टीम में माखी थानाप्रभारी श्याम कुमार पाल, गंगाघाट थानाप्रभारी हरिप्रसाद अहिरवार, चौकीप्रभारी हामिद, एसआई सुधाकर सिंह, संजीव कुमार, ओमकार यादव, हैडकांस्टेबल राजेंद्र मिश्रा, रामनरेश सिंह, कांस्टेबल दिलीप कुमार, सद्दाम, बलराम गोस्वामी तथा महिला सिपाही रिचा त्रिवेदी व रेनू कनौजिया को शामिल किया गया.

संयुक्त पुलिस टीम ने सब से पहले उस स्थान का निरीक्षण किया, जहां सारिका का शव दफन किया गया था. फिर मगरवारा रेलवे ट्रैक का निरीक्षण किया, जहां सत्येंद्र का शव क्षतविक्षत अवस्था में पाया गया था. टीम ने अतरी, घोंघी रौतापुर तथा पंडितखेड़ा गांव जा कर अनेक लोगों से पूछताछ की तथा उन का बयान दर्ज किए.

मृतक सत्येंद्र के परिजनों के बयानों में जहां समानता थी, वहीं मृतका सारिका के मातापिता के बयानों में विरोधाभास था. उन के हावभाव से भी लग रहा था कि वह पुलिस से कुछ छिपा रहे हैं. सारिका के संबंध में राकेश ने पड़ोसियों को भी गुमराह किया था. लाश मिलने के बावजूद उस ने पड़ोसियों को सारिका की हत्या किए जाने की बात नहीं बताई थी.

लिहाजा पुलिस टीम के शक की सुई राकेश लोध की ओर घूमी तो पुलिस टीम ने 20 मई, 2019 को राकेश व उस की पत्नी रेनू को हिरासत में ले कर कड़ी पूछताछ की.

पहले तो वे दोनों पुलिस को गुमराह करते रहे. लेकिन सख्त रुख अपनाने पर दोनों टूट गए और हत्या का जुर्म स्वीकार कर लिया. राकेश लोध ने बताया कि सत्येंद्र व सारिका की हत्या उस ने अपने भांजे संजय व अतरी गांव निवासी दुर्गेश के साथ मिल कर की थी. सत्येंद्र ने उस की इज्जत पर हाथ डाला था. इसलिए उसे मौत के घाट उतार दिया.

इस के बाद पुलिस ने राकेश की निशानदेही पर अतरी गांव से दुर्गेश लोध को उस के घर से हिरासत में ले लिया. उसी दिन पुलिस टीम ने नवाबगंज (कानपुर) से संजय को भी उस के घर से गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस टीम ने डबल मर्डर का परदाफाश करने तथा हत्यारोपियों को पकड़ने की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दे दी. जानकारी मिलते ही कप्तान माधव प्रसाद वर्मा ने पुलिस लाइन सभागार में प्रैस वार्ता की और अभियुक्तों को पत्रकारों के समक्ष पेश कर दोहरे मर्डर का खुलासा किया. खुलासा करने वाली टीम को उन्होंने 15 हजार रुपए ईनाम देने की भी घोषणा की.

चूंकि सत्येंद्र व सारिका की हत्या माखी थानाक्षेत्र में की गई थी, अत: थाना माखी पुलिस ने भादंवि की धारा 302, 201 के तहत राकेश, संजय, दुर्गेश व रेनू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली और उन चारों को विधिसम्मत बंदी बना लिया. अभियुक्तों से की गई पूछताछ में प्रेमी युगल के प्यार को दफन करने की सनसनीखेज कहानी प्रकाश में आई.

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के माखी थानांतर्गत एक गांव है पंडितखेड़ा. इसी गांव में राकेश लोध अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी रेनू के अलावा 2 बेटियां और एक बेटा राजू था. राकेश लोध किसान था. वह बड़ी बेटी की शादी कर चुका था.

छोटी बेटी सारिका थी, जो अपनी बड़ी बहन से ज्यादा खूबसूरत थी. उस की इस खूबसूरती में चारचांद लगाता था उस का स्वभाव. तनमन से सारिका जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही पढ़नेलिखने में तेज थी. उन्नाव के सरस्वती बालिका इंटर कालेज से उस ने हाईस्कूल की परीक्षा पास कर के 11वीं कक्षा में दाखिला ले लिया था. अपने कामधाम और स्वभाव की वजह से सारिका अपने मांबाप की आंखों की तारा बनी हुई थी.

सारिका की मौसी रेखा गंगाघाट थाना अंतर्गत घोंघी रौतापुर गांव में रहती थी. सारिका गरमियों की छुट्टी में मौसी के घर चली जाती थी. फिर वह महीनों वहां रहती थी. मौसी सारिका को बहुत प्यार करती थी. अपनत्व के कारण ही वहां सारिका का मन लगता था. स्कूल खुलने के समय सारिका वापस घर आती थी.

मौसी के घर रहने के दौरान ही एक रोज सारिका की मुलाकात सत्येंद्र से हुई. सत्येंद्र सजीला व रंगीला युवक था. खूब बनठन कर रहता था. सत्येंद्र का घर सारिका की मौसी के घर के पास ही था. किसानी के साथ सत्येंद्र के पिता सुंदरलाल व्यापार भी करते थे. अत: उन की आर्थिक स्थिति मजबूत थी.

सारिका उस रोज मोहल्ले के ही राधे तिवारी की दुकान पर घर का कुछ सामान लेने गई थी. वहीं दुकान पर खड़े मंदमंद मुसकराते सत्येंद्र से उस की पहली मुलाकात हुई थी. सारिका और सत्येंद्र ने जब पहली बार एकदूसरे को देखा तो देखते ही रह गए. दोनों के दिल में जाने कैसी कशिश हुई थी. उन दोनों के दिलों में आकर्षण के रास्ते प्यार का पौधा पनप चुका था.

सारिका मौसी के घर का कोई सामान लाने के बहाने घर से निकलती तो सत्येंद्र राधे तिवारी की दुकान पर पहले से खड़ा मिलता था. इस तरह उन की रोज मुलाकात होती. धीरेधीरे उन के बीच प्यारमोहब्बत की बातें भी होने लगी थीं.

सारिका और सत्येंद्र के बीच पलने वाले प्यार से दुकानदार राधे तिवारी भलीभांति परिचित था. किसी अपने की शह मिल जाए तो कहते हैं कि प्यार की बेल बड़ी तेजी से बढ़ती है. सत्येंद्र और सारिका के साथ भी यही हुआ. वे अब दुकान के साथसाथ गांव के बाहर बगीचे में मुलाकात करने लगे थे. लेकिन घोंघी रौतापुर छोटा सा गांव है. उन का यूं गांव में मिलना कब तक छिपा रहता. एक न एक दिन तो राज खुलना ही था. अंतत: एक दिन धमाका हो ही गया.

हुआ यह कि एक दिन जब सत्येंद्र और सारिका गांव के बाहर बगीचे में बैठ कर बातें कर रहे थे तो रेखा के किसी परिचित ने उन्हें देख लिया. उस ने सारा किस्सा जा कर रेखा को बता दिया. कुछ देर बाद सारिता जब घर पहुंची तो रेखा ने उसे आड़े हाथों लिया, ‘‘कहां से आ रही है तू?’’

‘‘जी मौसी, सहेली के घर से.’’ सारिका ने जवाब दिया.

‘‘सहेली के घर से या…’’ आगे का वाक्य जानबूझ कर रेखा ने अधूरा छोड़ दिया.

‘‘मौसीजी, मैं सच बोल रही हूं. सहेली के घर ही गई थी.’’ सारिका ने सफाई दी.

‘‘झूठ बोल रही है. तू सहेली के घर नहीं बल्कि बगीचे में बैठ कर इश्क लड़ा रही थी.’’

सारिका ने चुप्पी साथ ली. उसे चुप देख रेखा सोचने लगी, ‘इतनी उम्र और इश्क का भूत.’ उस के दिमाग में आया कि यह लड़की कहीं उस के साथ भाग गई तो लोग उसी को दोषी ठहराएंगे. इस के पहले कि कोई अनर्थ हो, सारिका के मांबाप को बुला कर बात करनी चाहिए.

इस के बाद रेखा ने अपनी बहन रेनू से मोबाइल पर बात की और सारिका की लव स्टोरी बता कर तत्काल घोंघी रौतापुर गांव आने को कहा. बहन की बात सुन कर रेनू असहज हो गई.

दरअसल उसे अपनी बेटी पर अटूट विश्वास था. वह समझती थी कि जमाना चाहे जितना बदल गया हो, लेकिन उस की बेटी सारिका के कदम नहीं डगमगा सकते. रेनू ने अपने पति राकेश से जब सारिका के प्रेम संबंध के बारे में बताया कि उस का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा.

दूसरे दिन राकेश पत्नी को साथ ले कर घोंघी रौतापुर पहुंचा. वहां उस ने सारिका को न सिर्फ डांटाफटकारा बल्कि उस की पिटाई भी कर दी. रेनू ने भी बेटी को पहले फटकार लगाई. फिर प्यार से समझाया. राकेश लोध ने सत्येंद्र तथा उस के बाप सुंदरलाल से भी झगड़ा किया.

राकेश ने सुंदरलाल से कहा कि वह अपने आवारा लड़के को रोक ले और उस की लड़की को न बरगलाए. वरना अंजाम अच्छा न होगा.

इस पर सुंदरलाल बोला, ‘‘तुम पहले अपनी बेटी के बहकते कदमों को रोको. वही हमारे बेटे को मजबूर कर रही है. वैसे तुम ठंडे दिमाग से बात करो तो हमें रिश्तेदारी करने में ऐतराज नहीं है.’’ रिश्ते की बात पर राकेश और भड़क गया. उस रोज दोनों में खूब तूतू मैंमैं हुई.

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इश्क में अंधी बेटी कहीं प्रेमी के साथ भाग न जाए, इसलिए राकेश और रेनू सारिका को अपने साथ गांव ले आए. सारिका गांव आ गई तो सत्येंद्र और सारिका का मिलना बंद हो गया. कुछ महीने तक दोनों एकदूसरे की जुदाई बरदाश्त करते रहे. फिर जब उन से रहा नहीं गया तो मिलने के लिए बेचैन रहने लगे.

आखिर सत्येंद्र ने ही इस का रास्ता निकाला. सत्येंद्र का दोस्त था. राधे तिवारी उसे दोनों की लवस्टोरी पता थी. सत्येंद्र ने राधे के मार्फत सारिका को एक मोबाइल फोन भिजवा दिया और बात करने को कहा.

सारिका को जब प्रेमी द्वारा भेजा गया नया मोबाइल फोन मिला तो उस की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. अब जब घर में कोई नहीं होता तो सारिका सत्येंद्र से बात कर लेती और दिल की लगी बुझा लेती.

बात करने के बाद सारिका नंबर डिलीट कर देती थी और मोबाइल छिपा देती. एक शाम बातचीत के दौरान सत्येंद्र ने मिलने की इच्छा जाहिर की तो नानुकुर के बाद सारिका मान गई और उस ने गांव के बाहर सत्येंद्र से मिलने का वादा कर लिया.

सत्येंद्र के पास मोटरसाइकिल थी, वह बनसंवर कर सारिका के गांव पंडितखेड़ा पहुंच गया. गांव के बाहर सारिका और सत्येंद्र मिले. मिलते ही दोनों एकदूसरे की बांहों में समा गए. कुछ देर बाद दोनों अलग हुए और पुन: मिलने का वादा कर सत्येंद्र चला गया. इस के बाद तो यह सिलसिला बन गया. जब भी दोनों को मौका मिलता, मिल लेते.

लेकिन 7 मई, 2019 को दोनों के मिलन का भांडा फूट गया. हुआ यह कि शाम को जब सारिका फोन पर सत्येंद्र से बतिया रही थी, तभी छिप कर सारिका की मां रेनू ने उस की सारी बातें सुन लीं. इस का आभास सारिका को नहीं हुआ. रेनू ने पति राकेश को बता दिया कि सारिका और सत्येंद्र अब भी गांव के बाहर मिलते हैं.

आज भी सत्येंद्र सारिका से मिलने आने वाला है. यह जान कर राकेश के तनबदन में आग लग गई. संयोग से उस दिन राकेश का भांजा संजय और अतरी गांव निवासी रिश्तेदार दुर्गेश लोध भी घर में थे. सब ने एक राय हो कर सत्येंद्र को निपटाने की योजना बना ली.

7 मई, 2019 को रात 8 बजे सारिका दिशामैदान के बहाने प्रेमी से मिलने के लिए घर से निकली. तभी पीछे से रेनू भी चल पड़ी. उस के पीछे राकेश, संजय व दुर्गेश हो लिए. खेत में पहुंच कर जब सारिका और सत्येंद्र मिले, तभी राकेश, संजय और दुर्गेश ने सत्येंद्र को दबोच लिया और उसे पीटने लगे.

उन तीनों ने पीटतेपीटते सत्येंद्र को अधमरा कर दिया. सारिका अपने प्रेमी सत्येंद्र को बचाने आई तो रेनू ने उस की भी जम कर पिटाई कर दी. इसी बीच उन तीनों ने सत्येंद्र को गला घोंट कर मार डाला. सारिका को घर ला कर कमरे में बंद कर दिया गया.

सत्येंद्र मोटरसाइकिल से यह कह कर घर से निकला था कि वह दवा लेने शुक्लागंज जा रहा है. लेकिन फिर वापस नहीं लौटा. सत्येंद्र के पिता सुंदरलाल ने 2-3 दिन उस की खोजबीन की, लेकिन जब उस का कुछ भी पता नहीं चला तो गंगाघाट पुलिस चौकी में गुमशुदगी लिखा दी.

सारिका के परिजनों ने उसे मारपीट कर घर में कैद कर लिया था. उन्हें शक था कि वह कोई बखेड़ा न खड़ा कर दे, इसलिए सारिका को गुमराह कर नवाबगंज, कानपुर ले आए.

नवाबगंज में राकेश लोध की बहन सावित्री रहती थी. उन की आपस की बातचीत से सारिका को पता चला कि उन सब ने मिल कर सत्येंद्र को मार डाला है. इस पर सारिका ने धमकी दी कि वह सब कुछ पुलिस को बता देगी.

इस धमकी से राकेश, उस की बहन सावित्री, पत्नी रेनू तथा भांजे संजय के होश उड़ गए. वे सब कई दिनों तक सारिका को समझाते रहे और किसी को कुछ न बताने का दबाव बनाते रहे. लेकिन सारिका नहीं मानी.

भेद खुलने के डर से अंतत: उन लोगों ने सारिका की भी हत्या की योजना बना ली. इसी योजना में उन्होंने अतरी गांव निवासी रिश्तेदार दुर्गेश लोध को भी शामिल कर लिया.

13 मई की शाम 7 बजे 2 मोटरसाइकिलों से वे सभी नवाबगंज से पंडितखेड़ा गांव जाने के लिए निकले. एक मोटरसाइकिल पर सारिका उस की मां रेनू बैठी, जिसे संजय चला रहा था तथा दूसरी पर राकेश लोध बैठा, जिसे दुर्गेश चला रहा था.

योजना के तहत पंडितखेड़ा गांव से लगभग एक किलोमीटर पहले दुर्गेश व संजय ने मोटरसाइकिल रोक दी. तब तक रात के 8 बज चुके थे. यहां राकेश व उस की पत्नी रेनू ने एक बार फिर बेटी को समझाने का प्रयास किया. लेकिन सारिका अपने निर्णय पर अडिग रही. उस ने साफ कह दिया कि तुम लोगों ने मेरे प्यार का गला घोंटा है, इसलिए वह सजा दिला कर रहेगी.

सारिका की इस बात से उस के पिता राकेश लोध का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा. उस ने सारिका को पकड़ कर पीटना शुरू कर दिया. सारिका चीखने लगी तो रेनू ने उस का मुंह दबा लिया. इस के बाद राकेश, संजय व दुर्गेश ने मिल कर सारिका की गला दबा कर हत्या कर दी.

इस के बाद उन लोगों ने सारिका के शव को ठिकाने लगाने के लिए आपस में विचारविमर्श किया. योजना के अनुसार, दुर्गेश रेनू को गांव के बाहर तक छोड़ आया. फिर वे तीनों सारिका के शव को अतरी गांव के बाहर ले आए.

दुर्गेश अतरी गांव का ही रहने वाला था. वह अपने घर से फावड़ा ले आया और अरविंद के खेत से कुछ दूरी पर झाड़ी के किनारे गड्ढा खोदा. फिर तीनों ने मिल कर सारिका के शव को गड्ढे में दफन कर दिया. शव को ठिकाने लगाने के बाद दुर्गेश के घर पर रात में राकेश व संजय भी रुक  गए. सुबह दोनों अपनेअपने घर चले गए.

14 मई की शाम राकेश लोध थाना माखी पहुंचा और सारिका की गुमशुदगी दर्ज करा दी. चूंकि सारिका कई दिन से गांव में नहीं दिखी थी सो आसपड़ोस के लोगों ने भी मान लिया कि वह कहीं गायब है. इधर 15 मई को अचानक मौसम खराब हो गया. आंधी के साथ बरसात भी हुई थी. पानी गड्ढे के अंदर गया तो सारिका का शव फूल गया जिस से मिट्टी में दरारें पड़ गईं.

17 मई को सुबह इस मिट्टी को कुत्तों के झुंड ने पंजों से कुरेदा और शव का एक पैर व हाथ बाहर निकाल लिया. कुत्ते शव को नोंच रहे थे तभी अतरी गांव का अरविंद आ गया. उस ने यह जानकारी गांव वालों को दी.

अभियुक्तों की निशानदेही पर पुलिस ने दोनों मोटरसाइकिलें और लाश दफनाने के लिए प्रयुक्त हुए फावउ़े को बरामद कर लिया.

21 मई, 2019 को थाना माखी पुलिस ने अभियुक्त राकेश लोध, दुर्गेश, संजय तथा रेनू को उन्नाव जिला अदालत में रिमांड मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया.द्य

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

कहानी सौजन्य: मनोहर कहानी 

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