मशहूर खगोलविद, गणितज्ञ और दार्शनिक गैलीलियो पर रोमन कैथोलिक चर्च ने एक मुकदमा  दायर किया था जिस का फैसला 1633 में सुनाया गया था. गैलीलियो का दोष था कि उन्होंने ईसाइयों के पवित्र ग्रंथ में वर्णित धार्मिक मान्यता के चीथड़े न केवल उड़ा कर रख दिए थे बल्कि अपने कहे को तथ्यों से साबित भी कर दिखाया था कि सूर्य पृथ्वी के नहीं, बल्कि पृथ्वी सूर्य के चक्कर लगाती है. इस गलती या गुस्ताखी पर उन्हें मौत की सजा होना तय थी. लेकिन, गैलीलियो बेवक्त इसलिए नहीं मरना चाहते थे क्योंकि वे अपने वैज्ञानिक शोध जारी रखना चाहते थे.

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