निर्भया कांड हो या बदायूं कांड, छोटा शहर हो या महानगर, कसबा हो या गांव, विदेशी महिला हो या गांवदेहात की, सवर्ण हो या दलित. पुरुषों द्वारा किए जाने वाले गैंगरेप की घटनाएं पिछले कुछ सालों से तकरीबन हर रोज की खबर बन गई हैं. समाज एकल बलात्कार से ही परेशान था, अब तो सामूहिक बलात्कार आम बात होती चली जा रही है. इस में पीडि़ता के बचने की संभावना न के बराबर होती है.

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