शुक्रवार सुबह जैसे ही लोगों ने अपने टेलीवीजन और मोबाइल पर नजर दौड़ाई खुशी की लहर दौड़ गई. खुशी का कारण था कानून का एनकाउंटर. एक ऐसा एनकाउंटर जिससे भले ही जनता को राहत मिली हो लेकिन उसने कानून की धज्जियां उड़ा दी. भारत के संविधान में शायद यही खूबसूरती है कि यहां आरोपी को भी अपनी बात कहने का पूरा हक है. इस बात से कोई भी तार्रुफ नहीं रखेगा कि दुष्कर्म किसी भी मायने भी संगीन जुर्म नहीं है.  इस जुर्म की सजा ही मौत है. लेकिन कानूनन. शाम होते होते एक और खबर आ गई कि उन्नाव गैंगरेप पीड़िता की सफदरगंज अस्पताल में मौत हो गई. दो दिन तक मौत से लड़ने वाली उन्नाव की बेटी मौत से जंग हार गई.

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