भारत की ध्वस्त हो चुकी स्वास्थ व्यवस्था का हाल आज पूरी दुनिया देख रही है. विश्वगुरु बनने का दावा ठोंकने वाले देश के अस्पतालों में दम तोड़ रहे कोरोना मरीज़ों को प्राणवायु ऑक्सीजन नहीं उपलब्ध करा पा रहे हैं. दवा, इंजेक्शन, वैक्सीन की कालाबाज़ारी पर नकेल नहीं कस पा रहे हैं. कोरोना संक्रमण से मौतों का सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है. ना अस्पतालों में ज़िंदा लोगों के लिए जगह है और ना श्मशानों में मुर्दा लोगों के लिए. कोरोना का तांडव जारी है और संघ-भाजपा के सारे नेता मुँह छिपाये बैठे हैं. किसी के पास जवाब नहीं है कि बीते सात साल के शासनकाल में स्वास्थ्य व्यवस्था की ऐसी जर्जर हालत कैसे हो गयी? सात साल तक मोदी सरकार आखिर करती क्या रही?

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