देश में जब कोरोना की पहली लहर आयी थी, हमारी स्वास्थ व्यवस्था की पोल तभी खुल गयी थी. देश में कोरोना की जांच के लिए ज़्यादा लैब नहीं थीं, नए वायरस से लड़ने के लिए दवाई नहीं थी, खुद को कोरोना से बचाने के लिए मेडिकल स्टाफ के पास सुरक्षा कवच नहीं था. अस्पताल आने वाले कोरोना मरीजों से डॉक्टर और नर्सेज डरे हुए थे. मेडिकल स्टाफ अपनी सुरक्षा की कमी का रोना रो रहा था. अस्पतालों में दस्ताने, सैनिटाइज़र, पीपीई किट की भारी कमी थी. लिहाज़ा मरीज के पास जाने से मेडिकल स्टाफ झिझक रहा था. इसके चलते सैकड़ों मरीज़ों को गरम पानी, भंपारा जैसी मामूली चीज़ें भी अस्पताओं में मुहैया नहीं हुईं और कफ से उनके फेफड़े जाम हो गए.

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