‘सूटबूट’ वाली केन्द्र सरकार‘ शुरू से ही मजदूर और गरीब विरोधी रही है. नोटबंदी से लेकर जीएसटी तक जितने भी फैसले हुये वह सब मजदूर विरोधी थे. नोटबंदी और जीएसटी से प्रभावित हुये कारोबार का सबसे अधिक प्रभाव मजदूरों पर ही पड़ा. कारोबार के धीमे होने से मजदूरों को ही सबसे पहले अपनी रोजीरोटी से हाथ धोना पड़ा.

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