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अब्दू रोजिक के दुश्मन करेंगे बिग बॉस 16 को ज्वॉइन

बिग बॉस 16 के घर में अब्दू रोजिक खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं, हाल ही में अब्दू रोजिक को रोते हुए देखा गया था, जिसके बाद से अब सबकुछ ठक हो गया है.

अब्दू रोजिक के चार्म ने सबका दिल जीत लिया है, इससे सभी फैंस उनके दीवाने हो गए हैं,आए दिन कुछ न कुछ ऐसा करते हैं जो लोगों को खूब पसंद आता है. अब खबर ये आ रही है कि जल्द ही बिग बॉस 16 में अब्दू रोजिक के दुश्मन की एंट्री होने वाली है.

 

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खुद सलमान भी अब्दू रोजिक की तारीफ करते नहीं थकते हैं, जिससे अब्दू रोजिक का फेम लगातार बढ़ते जा रहा है. वहीं खबर ये हैं कि जल्द बिग बॉस 16 अब्दु रोजिक के दुश्मन की एंट्री होने वाली है.

हसबुल्ला मोगोदेवो को अप्रोच किया जा रहा है, अगर सबकुछ ठीक रहा तो जल्द हसबुल्ला की एंट्री होगी. वैसे हसबुल्ला और अब्दु रोजिक की लड़ाई के बारे में सब जानते हैं. सोशल मीडिया पर हसब्बुला  और अब्दु रोजिक की लड़ाई की वीडियो वायरल हो रही है. अब बिग बॉस टीआरपी बटोरने के लिए ये सब कुछ करने वाला है.

वैसे ये पहली बार नहीं है जब मेकर्स ने बिग बॉस में 2 दुश्मनों को कैद कर लिया है, इससे पहले भी बिग बॉस में कई लोगों की ऐसी एंट्री हो चुकी है.

VIDEO: उर्फी जावेद को स्टाइल मारना पड़ा महंगा, झूले से गिरी धड़ाम

अपनी बोल्ड सेक्सी अदाओं से लोगों का दिल जीतने वाली उर्फी जावेद एक बार फिर से चर्चा में आ गई हैं, हाल ही में उनका एक गाना रिलीज हुआ है जिसमें उनका मिला जुला रिएक्शन मिला है. इसी बीच उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसे लोग खूब पसंद कर रहे हैं.

इस वीडियो को देखकर लोग जमकर मजे ले रहे हैं, और कमेंट भी कर रहे हैं, इस वीडियो में आप देख सकती हैं कि उर्फी झूला झूल रही हैं , झूला झूलते हुए उर्फी धड़ाम से गिरती हैं , जैसे ही उर्फी जावेद झूला पर चढ़ती हैं वैसे ही बैलेंस बिगड़ जाता है और नीचे आ जाती हैं.

 

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इस वीडियो का लोग खूब मजे ले रहे हैं, फैंस भी खूब कमेंट कर रहे हैं, दरअसल, इस वीडियो को उर्फी जावेद ने अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है, वीडियो  शेयर करते हुए उर्फी ने लिखा हाय राम ये तो सच में हाय हाय हो गया.

 

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हालांकि इस वीडियो में उर्फी ने नारंगी रंग की साड़ी पहनी हुई हैं, अचानक झूलते -झूलते अनबैलेंस हो जाती हैं. लड़के उन्हें संभआलने लगते हैं. लोग उनका खूब मजे ले रहे हैं. एक ने कमेंट करते हुए लिखा कि बहन अगर तुम्हें कुछ हो जाता तो एंटरटेनमेंट का क्या होता.

इस दिवाली अपने पेट्स का भी रखें ध्यान

दिवाली का त्योहार वैसे तो खुशियों का है लेकिन पटाखे की आवाज, धुएं और गंध से सबसे अधिक परेशान पालतू जानवर होते हैं, खासकर कुत्ते. वे तेज आवाज से घबराकर खाना छोड़ देते हैं. कहीं दुबककर बैठ जाते हैं. जो उनके शरीर के लिए मुश्किल भरा होता है.

दिवाली को मनाने के साथ-साथ पेट्स का भी ख्याल अवश्य करें ताकि आपकी खुशियाँ और अधिक हो. इस बारें में साउथ ईस्ट एशिया मार्स इंडिया के वाल्थम साइंटिफिक कम्युनिकेशन मैनेजर डॉ. कल्लाहल्ली उमेश कहती है कि दिवाली का समय पेट्स के लिए बहुत ही क्रूशियल समय होता है. जब वे समझ नहीं पाते हैं कि उन्हें करना क्या है. चारों तरफ रौशनी और आवाज उन्हें दुविधा में डाल देती है.

जैसा कि छोटे बच्चे को दिवाली के पटाखे और आवाज को समझने में समय लगता है, वैसे ही पेट्स को भी समझने में समय लगता है. खासकर अगर ‘पपी’ आपके घर में हो तो उसे अधिक सम्हालना पड़ता है. ऐसे में घर में रहने वाले लोगों को उसके इस डर को दूर भगाना पड़ता है. पेट्स को इन आवाजों से परिचय करवाने के लिए पहले से कुछ तैयारियां करनी पड़ती है.

पेट्स को करायें आवाज से परिचय

टेप या रिकॉर्ड से आवाज सुनाकर पेट्स को उस आवाज से परिचय करवाया जा सकता है.

आवाज को सुनाकर उसे कुछ मनपसंद खाना दिया जा सकता है ताकि उस आवाज से उसका ध्यान हट जाय

इस काम के लिए वेटेनरी डॉक्टर की सलाह भी लिया जा सकता है.

लेकिन अगर आपने ऐसा नहीं किया है तो पेट्स का खास ख्याल रखें, ताकि वह भी इस दिवाली में आपके साथ हो.

ऐसे करें अपने पेट्स का डर कम

पटाखे बजाने से पहले पेट्स को बाहर घूमा कर लायें.

घर की खिड़की और दरवाजे बंद रखें, पर्दा गिरा दें, ताकि रौशनी की चमक दिखायी न पड़े.

टीवी और रेडियो के वॉल्यूम को थोड़ा ऊपर रखें जिससे उसे पटाखे की आवाज सुनाई न पड़े.

उसे अकेला न छोड़े बल्कि साथ में रखे और थोड़ी-थोड़ी देर बाद मनपसंद खाना देंअगर वह अधिक सेंसिटिव है तो कानों थोड़ी रुई डाल दें.

उसे जहाँ बैठने की इच्छा हो उसे वही रहने दें, परेशान न करें

नेचुरल वातावरण बनाये रखने के लिए फूलों की सुगंध या लैवेंडर का छिड़काव करें

कुछ काम दिवाली को खुशनुमा बनाने के लिए कभी न करें

स्ट्रीट डॉग्स के ऊपर पटाखे न फेकें, न ही उनके दुम में पटाखे बांधे, ये आपके लिए मजेदार हो सकती है पर उनके जान पर बन आती है, कई बार वे जल जाते हैं.पटाखों या फुलझड़ी से उन्हें डरायें नहीं, इससे डरकर वे ट्रैफिक के नीचे आकर मर सकते हैं.

अगर वे आहत हो गए हो तो उन्हें शरण दें और इलाज़ करवाएं.

शादी को 10 साल हो गए हैं, मैं अपनी पत्नी को संतुष्ट नहीं कर पाता , कुछ सुझाव दें

सवाल
हमारी शादी हुए 10 साल हो चुके हैं. हमारी 5 साल की एक बच्ची भी है. मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हूं. वे भी मुझे सैक्सुअली पूरी तरह संतुष्ट करने की कोशिश करते हैं लेकिन मुझे और्गेज्म तक पहुंचने में बहुत देर लग जाती है. पति को खुश करने के लिए कईर् बार मैं  बोल देती हूं कि मेरा और्गेज्म हो गया है लेकिन होता नहीं है. पति की खुशी से ही मैं संतुष्ट हो जाती हूं. लेकिन फिर भी अंदर ही अंदर मुझे कई बार बहुत खराब लगता है. कहीं इस से मेरी सैक्स लाइफ खराब न हो जाए. क्या करूं?
जवाब
ऐसा कई महिलाओं के साथ होता है कि उन्हें और्गेज्म तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है. ऐसी स्थिति में वे खुद की सैक्स लाइफ खराब मानने लगती हैं. हो सकता है आप का पार्टनर आप को सही तरीके से उत्तेजित नहीं कर पा रहा हो. अगर आप इस तरह की परेशानी का सामना कर रही हैं तो इस में ओरल सैक्स आप की मदद कर सकता है. इस के अलावा फिंगर सैक्स से महिलाओं को और्गेज्म तक पहुंचने में मदद मिलती है. यानी सैक्स का यह तरीका न केवल आप को चरमसुख तक पहुंचाता है बल्कि सैक्सलाइफ को रोमांचक बनाता है. इस में पुरुष महिला की योनि में उगलियों को प्रवेश कराता है. सैक्स के इस तरीके से वैंजाइना में उत्तेजना आती है और और्गेज्म तक पहुंचने में आसानी होती है. आप अपने पति से इस बारे में खुल कर बात करें. अपनी समस्या उन से शेयर नहीं करेंगी तो उन्हें पता कैसे चलेगा. पति से बात करें. जरूर आप की प्रौब्लम सौल्व हो जाएगी और आप सैक्स एंजौए करेंगी.

विवाद: चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी एमएमएस कांड

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में 60 छात्राओं के नहाते हुए कथित वायरल वीडियोज ने हड़कंप मचा दिया है. हैरानी यह है कि इसे वायरल करने वाली खुद एक लड़की है. पंजाब के मोहाली में स्थित चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में एक छात्रा द्वारा लगभग 60 छात्राओं के बाथरूम में नहाते हुए वीडियो बना कर वायरल कर देना कानून के लिए जहां आज एक प्रश्नचिह्न बना हुआ है, वहीं समाज के लिए भी एक चिंता का विषय है. ऐसे भयावह मामलों में आखिर क्या कदम उठाए जाएं.

सब से बड़ी बात है कि आगे ऐसा न हो, इस के लिए सरकार और समाज क्या कर सकते हैं. मामला सामने आने के बाद पूरे अपराध की जड़ छात्रा से चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी कैंपस में पूछताछ का कथित वीडियो भी सामने आया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, होस्टल वार्डन ने जब पूछा तो उस ने कहा कि उस ने एक लड़के को ये वीडियोज भेजे थे जिसे वह नहीं जानती. वार्डन ने यह भी पूछा कि वह कब से वीडियो बना रही है तो उस ने जवाब नहीं दिया. एक वीडियो में कथित रूप से छात्रा कह रही है कि ‘गलती हो गई, आगे ऐसा नहीं करूंगी.’ दरअसल आज जिस तरह मोबाइल का चलन बढ़ चुका है, इसे हम एक हथियार कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. मोबाइल एक ऐसा हथियार बन चुका है जो दोतरफा वार करता है. आप को, समाज को लाभान्वित कर सकता है तो आप को और समाज को गहरे संशय में भी डाल सकता है.

ऐसे में इस हथियार के इस्तेमाल के लिए जहां समझदारी की आवश्यकता है वहीं अपने बचाव के लिए आज विशेष रूप से युवतियों को, जागरूक होना आवश्यक हो गया है. चंडीगढ़ विश्वविद्यालय की घटना पूरे देश को चिंतित कर रही है. यह अपनेआप में एक अलग ही तरह का चिंताजनक मामला है जो देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है. आज आवश्यकता है कि ऐसे मामलों पर सरकार और समाज ऐसे कदम उठाए कि जिस से आगामी समय में ऐसे कृत्यों की पुनरावृत्ति न हो. आरोपी छात्रा और कथित लड़के को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दूसरे 31 साल के एक युवक से पूछताछ जारी है. इन में एक युवक चंडीगढ़ की एक बेकरी में काम करता है.

इस मामले में पीडि़त लोगों और समर्थन में आए लोगों ने रातभर प्रदर्शन किया तब स्थिति का जायजा लेने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के परिसर पहुंचे. पंजाब की अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक गुरप्रीत देव के मुताबिक, ऐसा लगता है कि आरोपी छात्रा ने अपना एक वीडियो युवक के साथ साझा किया और किसी अन्य छात्रा का कोई आपत्तिजनक वीडियो नहीं मिला है. विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने भी उन खबरों को निराधार बता कर खारिज कर दिया जिन में दावा किया गया था कि विश्वविद्यालय के छात्रावास में कई छात्राओं के वीडियो बनाए गए और सोशल मीडिया पर साझा किए गए व कुछ ने इस प्रकरण के बाद आत्महत्या का प्रयास किया.

विश्वविद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में छात्रछात्राओं ने विरोध प्रदर्शन किया. इस मामले को ले कर रोष इतना ज्यादा था कि प्रदर्शनकारियों ने काले कपड़े पहन रखे थे और उन्होंने पुलिस की मौजूदगी में ‘सरकार से हमें न्याय चाहिए’ जैसे नारे लगा रहे थे. मोहाली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विवेक शील सोनी के मुताबिक कई छात्राओं का वीडियो बना कर लीक किए जाने की अफवाह के बाद विश्वविद्यालय में आधी रात के बाद प्रदर्शन हुआ. उन्होंने कहा कि गिरफ्तार छात्रा का मोबाइल फोन फोरैंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया गया है और किसी छात्रा के आत्महत्या की कोशिश करने का मामला सामने नहीं आया है. अधिकारियों ने बताया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 354 सी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है.

मुख्यमंत्री भगवंत मान इस मामले को ले कर चिंतित हैं. उन्होंने कड़ी कार्रवाई और जांच का आदेश दे दिया है. वहीं पुलिस भी मुस्तैद हो गई है और आने वाले समय में पूरे मामले की सचाई सामने होगी. मगर अभी जो खबरें आ रही हैं उन के मुताबिक यह मामला अत्यंत गंभीर है और यह संदेश दे रहा है कि आज मोबाइल से स्वयं को बचाने का समय आ गया है. नहीं तो आप की निजता भंग होने का खतरा है और आप का कोई भी वीडियो व फोटो वायरल हो सकता है.

पवित्र बंधन : जीजासाली का अनोखा रिश्ता

क्या ‘कांग्रेस’ भाजपा के चक्रव्यूह में फंस गई

“कौवा कान ले गया” यह कहावत आपने सुनी होगी. क्या यह भारतीय राजनीति में भी आने वाले समय में एक किवदंती बन जाएगी. अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर प्रस्तुत है एक ऐसा विश्लेषण, जो आने वाले समय के लिए एक नजीर हो सकता है.

सच तो यह है कि भारतीय जनता पार्टी के दो महत्वपूर्ण चेहरे नरेंद्र दामोदरदास मोदी और अमित शाह बारंबार यह हडबोंग लगाते और मचाते रहे हैं कि अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर श्रीमती सोनिया गांधी और उनके सुपुत्र राहुल गांधी की छाया है. यह तो मां बेटे की पार्टी है. ऐसे आरोप लगातार लगते लगते इन नेताओं ने देश भर में ऐसा माहौल बना दिया कि अंततः श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी आखिरकार उनके बुने गए “चक्रव्यूह” में फंसी गए .

आज जब अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में मलिकार्जुन खरगे का चयन हो गया है और यह सत्य आज देश के सामने है कि कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष अब गांधी परिवार से नहीं है इस सब के बाद अगर देखा जाए तो यह एक ऐतिहासिक मौका कहा जा रहा है और यह कहने में कोई पीछे नहीं है कि श्रीमती सोनिया और राहुल ने देखिए किस तरह कांग्रेस ने एक गैर गांधी परिवार के कद्दावर कांग्रेसी को अपना अध्यक्ष चुन लिया है. मगर पाठकों जरा रुकिए! आगे कहानी… कथानक में बहुतेरे पेंच है जो देश के हित में और कांग्रेस के हित में हैं. और देश हित में इस ओर दृष्टिपात करना आज नितांत आवश्यक है.

भाजपा का दांव सफल रहा

दरअसल, हम यह कहने जा रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी और उसके प्रमुख नेता विचारधारा के लोग कांग्रेस पार्टी और सोनिया गांधी परिवार पर हमेशा यह आरोप लगाते रहे हैं कि कांग्रेस तो सोनिया और राहुल के जेब की पार्टी है मां बेटे की पार्टी है. लंबे समय से कांग्रेस नेहरू गांधी परिवार की छाया में ही रही है यह एक ऐसा सच है जिससे कोई इनकार नहीं कर सकता. अगर हम गांधी की बात करें तो महात्मा गांधी के समय काल में भी कांग्रेस पार्टी उनकी छाया में रही, भले ही वे कभी भी पार्टी के अध्यक्ष नहीं बने. इसी तरह मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल नेहरू भी कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और पार्टी को नेतृत्व दिया. लंबे समय बाद श्रीमती इंदिरा गांधी की छाया में कांग्रेस पार्टी ने देश का नेतृत्व किय और दिशा दी. आगे राजीव गांधी के प्रधानमंत्री काल में और नरसिम्हा राव के कार्यकाल को छोड़ दें तो कांग्रे सदैव गांधी नेहरू परिवार के छाया में ही देश की सेवा करती रही है मगर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी ने मानो एक नीति के तहत यह माहौल बनाना शुरू कर दिया कि कांग्रेस पार्टी मां और बेटे अर्थात सोनिया गांधी और राहुल गांधी की पार्टी मात्र है. और जब लगातार दो चुनाव कांग्रेस पार्टी हार चुकी है और देश भर में अनेक राज्यों से हाशिए पर पहुंच गई है ऐसे में कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर मलिकार्जुन खरगे अध्यक्ष बन करके पार्टी को संभालने वाले हैं.

यह कहा जा सकता है कि सीधे-सीधे यह प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी की एक सफल रणनीति रही है कि कांग्रेस को कैसे पतनोन्मुखी किया जाए. जिस तरह महाभारत में एक चक्रव्यूह बुनकर के अभिमन्यु की हत्या कर दी गई थी कांग्रेस को भी समाप्त कर दिया जाए. क्योंकि गांधी और नेहरू परिवार के बिना कांग्रेस ज्यादा समय तक राजनीति के अखाड़े में सरवाइव नहीं कर पायेगी .

अब रिमोट कंट्रोल की सरकार

पाठकों को हम याद दिलाते चलें कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में वर्चस्व बनाने के लिए अमित शाह ने समाजवादी पार्टी में ऐसे ही मुलायम सिंह और अखिलेश सिंह में फूट डलवाने के लिए अपवाह का सहारा लिया था जो हाल ही में मुलायम सिंह के निधन के बाद चर्चा में आई .ऐसे में, कांग्रेस के नए अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे के निर्वाचन के बाद भाजपा की चक्रव्यूह में नए शिगुफे अब देखने को मिलेंगे जिसमें सबसे महत्वपूर्ण है मलिकार्जुन खरगे को लेकर. आप तो सोनिया गांधी के राहुल के रिमोट से चल रहे हैं अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सोनिया गांधी के अदृश्य रिमोट में काम कर रहे है ऐसी बातें और अफवाहें फैलाने में यह श्री मान लग जाएंगे.

दरअसल, नैतिक अफवाहें और शिगुफा फैलाने में भारतीय जनता पार्टी और उसके नेता सिद्धहस्त हैं. और यह नहीं भूलना चाहिए कि मीडिया का एक बहुत बड़ा वर्ग इनके साथ हो जाता है. आगे देश भर में यह माहौल बनाने का प्रयास किया जाएगा कि बेचारे खरगे तो आज भी बेचारे हैं. कांग्रेस पार्टी का कोई भविष्य नहीं है इसलिए देश की जनता हम आपको नेतृत्व देंगे और देश को आगे ले जाएंगे ऐसी बातें करके आने वाले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी चुनाव मैदान में होगी. अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या भाजपा के इस चक्रव्यूह में देश की जनता फंसने को तैयार है.

धरा – भाग 4 : धरती पर बोझ नहीं बेटियां

“अरुण… देखना, हमारी बेटियां भी एक दिन हमारा नाम जरूर रोशन करेंगी, यह मेरा विश्वास है. अरुण… देखो, छुओ मेरे पेट को कि क्या तुम्हारे दिल में अपनी बच्ची के लिए दर्द नहीं हो रहा? फिर कैसे तुम इसे मरते देख सकते हो अरुण? प्लीज, अपना फैसला बदल दो. बेटियां तो आने वाला सुनहरा कल होती हैं. हमें ही देख लो न, हम 4 बहनें ही हैं, तो क्या हम अपने मांपापा का ध्यान नहीं रखते? रखते हैं न?बारीबारी से हम उन की ज़िम्मेदारी बड़ी सिद्दत से निभाते आए हैं. बेटियां बोझ नहीं होती हैं. अरुण, एक बार मेरी बात पर विचार कर के देखो, अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है.”

लेकिन, अरुण लैपटौप शर्टडाउन करते हुए बोला कि वो अपनी मां की बात से बाहर नहीं जा सकता है, सो प्लीज, वही बातें बारबार दोहरा कर उस का मूड न खराब करे.

यह बात तो तय थी कि यह सब सुमित्रा के कहने पर ही हो रहा था. वही नहीं चाहती थी कि शिखा बेटी पैदा करे. वही चाह रही थी कि जितनी जल्दी हो, इस बच्चे को गिरवा दिया जाए. हां, माना कि अरुण को भी बेटे की चाह है, पर अपनी बच्ची को मारना उसे भी अच्छा नहीं लग रहा था. अरुण ने आज तक अपनी मां की एक भी बात नहीं काटी, उन्होंने जो कहा, किया. यहां तक कि शिखा से शादी भी उस ने अपनी मां के कहने पर ही की थी, वरना तो उस की पसंद कोई और थी. तो आज वह अपनी मां के फैसले से अलग कैसे जा सकता था.

समाज और लोग यह क्यों नहीं समझते कि प्रकृति ने बेटियों को भी बेटे के बराबर जीने का हक दिया है. उसे भी इस हवा में सांस लेने का उतना ही अधिकार है, जितना लड़कों को. और मां के पेट में, बेटों की तरह बेटियां भी तो 9 महीने रहती हैं. फिर वह इस दुनिया में क्यों नहीं आ सकती? कोई तो जवाब दे? अपने मन में ही सोच शिखा बिलख पड़ी, पर कौन था उस का रोना सुनने वाला, कोई तो नहीं. वह पति जो उस के साथ सात वचनों में बंधा था, वह भी नहीं.‘

कहते हैं, ‘प्रकृति और पुरुष मिल कर सृष्टि का संचालन करते हैं. लेकिन, जब प्रकृति ही नहीं बचेगी, फिर सृष्टि का संचालन क्या संभव है?’ अपने मन में ही सोच शिखा ने अरुण की तरफ देखा, जो चैन की नींद सो रहा था. लेकिन शिखा को नींद कैसे आ सकती थी भला. घड़ी में देखा तो सुबह के 4 बज रहे थे. शिखा वहां से उठ कर बेटियों के कमरे में जाने ही लगी कि देखा सुमित्रा अपने कमरे में ध्यान लगा कर बैठी थी.

वह रोज सुबहसवेरे उठ कर ध्यान लगा कर बैठ जाती है. फिर स्नान आदि से निवृत हो कर पूजापाठ, मंदिर आदि के बाद ही नाश्ता करती है. मन हुआ शिखा का कि वहां जा कर उन के पैर पकड़ ले और कहे, बख्श दे उन की बच्ची को. इस के लिए जीवनभर वह सुमित्रा की गुलाम बन कर रहेगी. परंतु वह अपनी सास के स्वभाव को अच्छे से जानती थी. बहुत ही कड़क मिजाज की औरत है, जो कह दिया सो कह दिया. उन की बात पत्थर की लकीर होती है.

कल को अगर सुमित्रा कह दे कि अरुण अपनी पत्नी शिखा को छोड़ दे, तो वह भी करने को तैयार हो जाएगा अरुण. तभी तो सुमित्रा कहते नहीं थकती कि अरुण उस का श्रवण बेटा है. शिखा को लग रहा था कि समय बस यहीं ठहर जाए. अपने पेट पर हाथ रख वह रो पड़ती. सोच कर ही वह सिहर उठती कि आज उस का बच्चा हमेशा के लिए उस से बिछड़ जाएगा.

फोन की आवाज से शिखा चौंक उठी. अरुण का फोन बज रहा है. उसे जगा कर शिखा खुद किचन में चली गई. सुमित्रा को चाय दे कर वह अरुण के लिए चाय ले कर कमरे में पहुंची तो देखा कि वह बाथरूम में था. आश्चर्य हुआ कि बिना चाय पिए अरुण की तो नींद ही नहीं खुलती कभी, तो आज कैसे ?‘ शायद बेटी के मरने की खुशी में नींद खुल गई होगी,’ सोच कर ही शिखा का मन कड़वा हो गया. वह कंबल समेट ही रही थी कि अरुण कहने लगा कि जल्दी से उस के कपड़े जमा दे. अभी आधे घंटे में निकलना है.

“पर कहां?” शिखा ने अचकचा कर पूछा, “आज तो आप ने छुट्टी ले रखी है. और हमें अस्पताल जाना था अबोर्शन के लिए…”

“वह सब छोड़ो अभी,” शिखा की बात को बीच में ही काटते हुए अरुण बोला, “मुझे अभी दिल्ली के लिए रवाना होना पड़ेगा. कल बहुत बड़े क्लाइंट के साथ अर्जेंट मीटिंग है. जानती हो शिखा, अगर यह मीटिंग सक्सेस रही तो इस बार मेरा प्रमोशन होना तय है. और सब से बड़ी बात कि बौस ने इस काम के लिए मुझे चुना है, यह बहुत बड़ी बात है,” अरुण काफी खुश लग रहे थे. उन की खुशी उन के चेहरे से साफ झलक रही थी. लेकिन जातेजाते अस्पताल का काम सुमित्रा को थमा गए.

शिखा यह सोच कर बस रोए जा रही थी कि जिस बच्ची को उस ने अपनी कोख में 3 महीने संभाल कर रखा, आज उसे उस के शरीर से नोच कर फेंक दिया जाएगा.

जूही को गोद में लिए शिखा अस्पताल जाने के लिए घर से निकल ही रही थी कि सुमित्रा का फोन घनघना उठा. जाने उधर से किस ने क्या कहा कि फोन सुमित्रा के हाथ से छूट कर नीचे गिर पड़ा और वह खुद भी लड़खड़ा कर जमीन पर गिर पड़ी.

“मम्मीजी… मम्मीजी… क्या हुआ आप को?” शिखा घबरा कर सुमित्रा को उठाने लगी. लेकिन सुमित्रा, ’वो… निशा’ बोल कर बेहोश हो गई.

शिखा ने जब फोन उठाया, तो सुन कर वह भी सन्न रह गई. अस्पताल से फोन था. निशा का एक्सीडेंट हो गया, लेकिन अब शिखा क्या करेगी, क्योंकि अरुण तो मीटिंग में है और उस ने अपना फोन भी म्यूट कर के रखा हुआ था. तभी उसे पड़ोस के राहुल का खयाल आया, जो शिखा को अपनी बहन की तरह मानता है.

सारी बातें जानने के बाद वह सुमित्रा के साथ मुंबई जाने को तैयार हो गया और जो सब से पहली फ्लाइट मिली, उस में टिकट करा कर वे तुरंत मुंबई के लिए रवाना हो गए.

शिखा इसलिए नहीं गई, क्योंकि सोनी और मोही अभी स्कूल से आए नहीं थे. अरुण को जब निशा के एक्सिडेंट का पता चला, तो वह भी वहीं से फ्लाइट पकड़ कर मुंबई पहुंच गया. शिखा भी अपने भाई को बुला कर तीनों बच्चों को ले कर मुंबई पहुंच गई, क्योंकि यहां उस का जी घबरा रहा था. मन में अजीब बुरेबुरे खयाल आ रहे थे.

दरअसल, निशा अपनी गाड़ी से जब घर आ रही थी, तभी पीछे से एक ट्रक ने उसे ज़ोर का धक्का दे दिया और गाड़ी दूर जा कर पलट गई. ट्रक वाला तो वहां से नौ दो ग्यारह हो गया. लेकिन आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस को फोन कर निशा को गाड़ी से बाहर निकालने की कोशिश की. खून से लथपथ शिखा को जल्दी अस्पताल पहुंचाया गया, तब जा कर उस का इलाज शुरू हुआ. वरना तो शायद वह बच भी न पाती. पता चला कि ट्रक ड्राइवर शराब पी कर गाड़ी चला रहा था. अकसर हमें सुनने को मिलता रहता है कि शराब पी कर गाड़ी चालक ने 4 लोगों को कुचल डाला. फूड स्टाल पर खाना खा रहे लोगों पर गाड़ी चढ़ा दी. जाने क्यों लोग ऐसी हरकतें करते हैं? खुद की जान तो जोखिम में डालते ही हैं, बल्कि दूसरों की जिंदगी भी तबाह कर देते हैं. खैर, शुक्र था कि निशा की जान बच गई, लेकिन अभी उसे एकडेढ़ महीना और अस्पताल में रहना होगा. डाक्टर का कहना था कि निशा के कमर और हाथपैरों की हड्डी जुड़ने में वक्त लगेगा.

अपनी बेटी की हालत देख अभी भी सुमित्रा के आंसू रुक नहीं रहे थे. बारबार उस के दिमाग में यही बात चल रही थी कि अगर निशा को कुछ हो जाता तो, तो वह भी मर जाती.

“मां… अब दीदी ठीक है. आप चिंता मत करो और डाक्टर ने कहा है कि दीदी अब खतरे से बाहर हैं, फिर आप क्यों रो रही हो? मां, अब मुझे निकलना होगा, क्योंकि शिखा को डाक्टर के पास भी तो ले कर जाना है न? अभी थोड़ी देर पहले डाक्टर का फोन आया था, कह रहे थे कि इस काम में जितनी ज्यादा देर होगी, रिस्क उतना ही ज्यादा बढ़ेगा. इसलिए जा कर यह काम निबटा ही लेता हूं,” अरुण बोला.

आज सुमित्रा भली प्रकार से शिखा का दर्द महसूस कर पा रही थी. अपने बच्चे के लिए मां की तड़प वह बहुत गहराई से महसूस कर रही थी.

शिखा भले ही चुप थी, मगर उस के दिल में क्या चल रहा है, सुमित्रा से छुपा न रहा. यही कि आज जब अपनी बेटी की जान पर बन आई तो किस कदर सुमित्रा छटपटा उठी. फिर यही उस ने शिखा के लिए क्यों नहीं महसूस किया? मां और बच्चे का रिश्ता तो हर रिश्ते से बड़ा होता है, क्योंकि उन का रिश्ता 9 महीने ज्यादा होता है. एक मां अपने बच्चे को अपने खून से सींचती है, फिर कैसे एक मां उस के बहते खून को देख सकती है भला… अपनी करनी की सोच कर सुमित्रा का रोमरोम सिहर उठा… कि कैसे वह एक मां की गोद उजाड़ने चली थी. और होती कौन है वह ऐसा करने वाली? आज जब उस की बेटी पर मुसीबत आ पड़ी, तब उसे एहसास हुआ कि वह शिखा के साथ कितना बड़ा अन्याय करने जा रही थी.

‘ये मैं क्या करने जा रही थी? प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने जा रही थी. एक मां से उस के बच्चे को छीनने का पाप करने जा रही थी? ओह, कितनी बड़ी पापिन हूं मैं? नहीं, मैं ऐसा नहीं होने दूंगी. मेरी पोती इस दुनिया में जरूर आएगी,’ अपने मन में ही सोच सुमित्रा उठ खड़ी हुई.

“रुको अरुण, अब कोई अबोर्शन नहीं होगा, बल्कि मेरी पोती इस दुनिया में आएगी,” यह सुन अरुण हैरान हो गया कि मां सुमित्रा यह क्या बोल रही हैं? कल तक तो यही पीछे पड़ी थी कि जितनी जल्दी हो इस मुसीबत से छुटकारा पाओ.

“क्या सोच रहे हो? यही न कि कल तक मैं जिस बच्चे से नफरत करती थी, अचानक आज मुझे क्या हो गया… तो आज मुझे अपनी गलती का एहसास हो चुका है अरुण कि मैं जो करने जा रही थी, वह गलत ही नहीं, बल्कि महापाप था. अपनी बेटी को जिंदगी और मौत से जूझते देख मैं खुद कितनी मौतें मरी हूं, यह मैं ही जानती हूं. एकएक पल कैसे कटा मेरा, नहीं बता सकती तुम्हें. तो फिर उस मां का क्या हाल होगा, जिस की आंखों के सामने ही उसbकी बेटी के टुकड़े कर दिए जाएंगे?”

“मैं ने तय कर लिया है कि मेरी धरा… यानी इस धरती पर वह जरूर आएगी,” शिखा को अपने सीने से भींचते हुए सुमित्रा कलपते हुए बोली, “बहू, मुझे माफ कर दो. मैं पुत्र मोह में अंधी हो गई थी, इसलिए तुम्हारा दर्द समझ नहीं पाई.”

यह सुन शिखा भी सुमित्रा के गले लग कर फूटफूट कर रोने लगी. आज अरुण भी दिल से अपनी मां का शुक्रगुजार था कि उन्होंने उस की अजन्मी बेटी की जिंदगी बख्श दी. नहीं पता है शिखा को, पर कितना दुख हो रहा था उसे अपनी ही बेटी को मारने का सोच कर भी.

सुमित्रा के कारण वह चुप था, वरना तो वह कभी ऐसा सोच भी नहीं सकता था. कई बार अपने आंसुओं को अंदर ही रोके रखने के प्रयास में अरुण की आंखें लाल हो जाया करती थीं. और फिर वही जमा आंसू को बाथरूम में जा कर वह बहाता था. लेकिन आज वह बहुत खुश है. अरुण और शिखा के साथसाथ सुमित्रा को भी धरा के आने का बेसब्री से इंतजार था.

मैं शादी करना चाहती हूं पर घरवाले मना कर रहे हैं, मैं क्या करूं

सवाल

मैं 2 साल से एक युवक से बहुत प्यार करती हूं. वह भी मुझे बहुत चाहता है. हम दोनों शादी करना चाहते हैं, पर दोनों अलग कास्ट के हैं, जिस की वजह से मेरे परिवार वाले उस युवक से मेरी शादी नहीं करेंगे. कई बार मैं ने अपनी फैमिली से दोनों की शादी की बात करनी चाही पर कह नहीं पाई. हम दोनों एकसाथ रहना चाहते हैं. कई बार घर छोड़ने की भी सोची पर घर वालों की बदनामी न हो इसलिए घर नहीं छोड़ पाई. अब आप ही बताएं मैं क्या करूं?

जवाब

यह अच्छी बात है कि आप अपने परिवार वालों के बारे में अभी भी सोच रही हैं और उन की इज्जत के कारण घर से भाग कर शादी करने का फैसला टाल रही हैं. यह याद रखें कि नए रिश्तों को संवारने के साथसाथ पुराने रिश्ते न बिखरने पाएं. आप परिवार वालों से खुद शादी की बात न करें, बल्कि अपनी बड़ी बहन या परिवार का ऐसा कोई सदस्य जिस के सामने आप खुल कर बात कर सकती हैं, को अपने परिवार वालों से बात करने का माध्यम बनाएं. समस्या का समाधान मुश्किल नहीं होता, लेकिन व्यवहार की जटिलता से समस्या पर समस्या खड़ी होती जाती है. हर किसी की भावना की इज्जत करते हुए शांति से बातचीत के रास्ते खोलें.

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ये है दुनिया की सबसे रिस्की सेक्स पोजीशन

साइंटिस्ट्स ने सबसे कॉमन सेक्स पोजीशंस में से एक को सबसे खतरनाक बताया है. साइंटिस्ट्स के मुताबिक, आधे से ज्यादा पीनाइल फ्रैक्चर्स के लिए वूमन ऑन टॉप पोजीशन जिम्मेदार है. ब्राजील के रिसर्चर्स ने तीन हॉस्पिटल्स में केसेज की स्टडी के बाद ये खुलासा किया है.

इस पोजीशन में महिलाएं अपने पूरे बॉडी वेट के साथ पेनिस को कंट्रोल करती हैं. अगर पेनेट्रेशन में जरा भी गड़बड़ी हुई तो मर्द कुछ नहीं कर पाते. इसमें महिलाओं को तो दर्द नहीं होता लेकिन पेनिस को चोट पहुंचती है. डॉगी स्टाइल सेक्स भी 29 परसेंट फ्रैक्चर्स के लिए जिम्मेदार माना गया है.

रिसर्च में, मिशनरी पोजीशन सेक्स के लिए सेफेस्ट पोजीशन के तौर पर सामने आई है. रिसर्चर्स ने हॉस्पिटल में इलाज कराने आए 44 पुरुषों का अध्ययन किया. इनमें से 28 फ्रैक्चर्स हेट्रोसेक्सुअल सेक्स से हुए, 4 होमोसेक्सुअल से और 6 पेनिस मैनिपुलेशन से. हालांकि बाकी 4 फ्रैक्चर्स का कारण डॉक्टर्स को समझ नहीं आया.

रिसर्चर्स ने नोट किया कि केसेज में चोट अनकॉमन है और जिन्हें फ्रैक्चर होता है, वे बताने से डरते हैं. ऐसे में इस तरह के फ्रैक्चर्स की असल संख्या और ज्यादा हो सकती है. रिसर्च पेपर के कंक्लूजन में लिखा है, “हमारी स्टडी के मुताबिक, वूमन ऑन टॉप पोजीशन के साथ सेक्सुअल इंटरकोर्स पीनाइल फ्रैक्चर्स के लिए सबसे रिस्की है. जब एक मर्द मूवमेंट को कंट्रोल करता है तो वो पेनेट्रेशन के दौरान पेनिस में दर्द को रोकने की स्थिति में होता है.”

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ड्राई फ्रूट्स की मदद से ऐसे बनाएं अखरोट लड्डू और खजूरी बिस्कुट

अखरोट लड्डू

सामग्री
20 नग दो टुकड़े वाली अखरोट की गिरी, 8 बीजरहित काले खजूर, 1 बड़ा चम्मच बारीक कतरे बादाम और छोटे चम्मच बारीक कतरा पिस्ता.

विधि
खजूर को नौनस्टिक पैन में धीमी गैस पर गरम करें फिर मैश कर लें. इस में बादाम की कतरन मिलाएं. आधे अखरोट के टुकड़ों पर थोड़ा सा यह मिश्रण रखें व उसे अखरोट के आधे टुकड़ों से ढक दें. स्टफ्ड अखरोट के चारों तरफ पिस्ता चिपका दें. अखरोट के ये छोटेछोटे लड्डू खाने में सभी को स्वादिष्ठ लगेंगे.

खजूरी बिस्कुट

सामग्री
100 ग्राम मैदा, 25 ग्राम पिसी चीनी, 50 ग्राम नमकीन मक्खन, 1/2 कप खजूर बीजरहित, 1/2 छोटा चम्मच बेकिंग पाउडर, 2 बड़े चम्मच भुने व बारीक कतरे बादाम, 1 बड़ा चम्मच दूध, 1 बड़ा चम्मच बारीक कतरा पिस्ता और 1/2 बड़ा चम्मच वनीला ऐसेंस.

विधि
मैदे में बेकिंग पाउडर डाल कर छानें. मक्खन में पिसी चीनी डाल कर फेंटें. खजूर को दूध के साथ हैंड मिक्सर में चर्न करें. पिस्ता छोड़ कर सभी सामग्री मिलाएं और मुलायम आटे की तरह गूंधें. मिश्रण को फ्रिज में 15 मिनट तक ठंडा कर के तेज चाकू से चौकोर छोटेछोटे बिस्कुट काट लें. ऊपर से पिस्ता चिपका दें. पहले से गरम किए ओवन में 150 डिगरी सैल्सियस पर 15-20 मिनट पकाएं. जब बिस्कुट लाल होने लगें तो ओवन बंद कर दें. खजूरी बिस्कुट तैयार हैं.

मुसेली कुकीज

सामग्री  
12 मैरी बिस्कुट, 3/4 कप काले गूदे वाले बीजरहित खजूर, 1/2 कप मुसेली, 3 बड़े चम्मच मक्खन, 1 बड़ा चम्मच बारीक कतरे बादाम, 4-5 बूंदें वनीला ऐसेंस और बड़े चम्मच नारियल बुरादा.

विधि
मैरी बिस्कुट व मुसेली को हैंडमिक्सर से थोड़ा सा चर्न कर के दरदरा बुरादा बना लें. खजूर को भी हैंडमिक्सर से चर्न करें और बिस्कुट वाले चूरे में मिलाएं. बिस्कुट के चूरे में वनीला ऐसेंस और बारीक कतरे बादाम व मक्खन मिलाएं. यह सख्त पूरी लायक आटा सा बन जाएगा. थोड़ाथोड़ा मिश्रण ले कर बेलें और कटर से काट लें. एक प्लेट में नारियल बुरादा फैलाएं और उस में यह कुकीज रख कर रोल करें. शुगर फ्री कुकीज तैयार हैं.

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