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5जी फोन के बारे में ये 5 खास बातें जानते हैं आप..!

धीरे-घीरे चर्चा बटोरने वाले 4-जी स्मार्टफोन की लोकप्रियता कम होने वाली है. चूंकि बाजार में मोबाइल नेटवर्क की पांचवी पीढ़ी यानी 5जी नेटवर्क के भविष्य में आने की बात की जा रही है. इस तकनीक के आने के बाद आप इंटरनेट से केवल 1 सेकेंड में 100 फिल्में एकसाथ डाउनलोड कर सकते हैं.

विशेषज्ञों की माने तो एक नये तरह की क्रांति के सूत्रपात में 5जी तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, जो कि पूरे विश्व में अनेक क्षेत्रों के अंतर्गत बड़े परिवर्तनों को जन्म देगी.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह तकनीक विदेशों के साथ भारत में भी विकसित की जा रही हैं. चलिए आपको इसके बारे में जानकारी दिए देते हैं-

5जी तकनीक
वैज्ञानिकों की माने तो 5जी तकनीक पांच साल बाद 2020 में हमारे सामने आ सकती है. उस समय आज का कोई भी स्मार्टफोन उस तकनीक का उपयोग नहीं कर सकेगा. मोबाइल निर्माताओं के सामने 5जी सपोर्टेड मोबाइल बनाने की भी एक बड़ी चुनौती रहेगी. इस तकनीक से आपकी डाटा स्पीड 100 गीगाबाइट्स प्रति सैकेण्ड तक पहुंच जाएगी अर्थात् सौ फिल्में एक साथ एक सैकेण्ड में डाउनलोड हो सकेगी. 5जी तकनीक में न्यू रेडियो एक्सेस (एनएक्स), नई पीढ़ी का एलटीई एक्सेस तथा बेहतर कोर नैटवर्क होगा. इससे डाटा के तीव्र आदान-प्रदान के साथ ही इन फोनों पर इंटरनेट ऑफ थिंग्स या आई.ओ.टी. की सुविधा भी मिल सकेगी.

अगले कुछ वर्षों में भारत में हो सकती है 5जी तकनीक
अगले कुछ वर्षों में भारत में भी इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए 5जी तकनीक लॉन्च हो सकती है. चूंकि कुछ कंपनियां इसकी तैयारियों में जुट चुकी है. यह बात दूसरी है कि फिलहाल अभी तक 2जी/3जी का दौर ही चल रहा है और 4जी तकनीक तो अभी तक शुरुआती दौर में ही है. वहीं बात करें विश्व के दूसरे देशों की तो वहां 5जी तकनीक पर बहुत तेजी से काम हो रहा है.

इंटरनेट में भी 5जी तकनीक का विकास
वैज्ञानिकों को 5जी तकनीक के लिए एक से दो गीगाहट्र्ज की चैनल बैण्ड विड्थ इस्तेमाल करने वाला एंटीना विकसित करना होगा, जोकि वर्तमान में 4 जी के लिए 20 मैगाहट्र्ज ही है. 2020 तक इंटरनेट से कनेक्टेड बहुत सारे नये गैजेट आ सकते हैं. वीडियो ट्रैफिक 22 गुना तक बढ़ जायेगा. स्मार्टफोन टेलीविजन की तरह होंगे जिसमें यूजर्स लाइव फिड्स प्राप्त करते हैं.

मोबाइल भी ऐसी तकनीक वाले होंगे
5जी तकनीक में बहुत बड़ी स्पेक्ट्रम बैण्डविड्थ का इस्तेमाल होगा. फिलहाल अधिकांश मोबाइल एंटीना 10-20 मेगाहट्र्ज बैंडविड्थ पर ही काम करते हैं, जबकि 5जी में 2 गीगाहट्र्ज बैण्डविड्थ पर काम करने वाले मोबाइल विकसित करने पड़ेंगे. इसलिए स्मार्टफोन नेटवर्क तकनीक विकसित करने में वैज्ञानिकों को इतना समय लग रहा है.

2021 तक 5जी मोबाइल कर जाएंगे 15 करोड़ का आंकड़ा पार
दूरसंचार उपकरण निर्माता कंपनी एरिक्सन की मोबिलिटी रिपोर्ट की माने तो विश्व में साल 2021 तक 5जी सुविधा से लैस मोबाइल फोनों की संख्या 15 करोड़ पर पहुंच जाएगी. 4जी मोबाइल की तुलना में 5जी मोबाइल की बिक्री अधिक तेजी से बढ़ेगी. 5जी नेटवर्क के व्यावसायिक प्रयोग का आरंभ 2020 से होने का अनुमान लगाते हुए कहा गया है कि 2021 में 5जी मोबाइल फोन यूजर्स की संख्या में सबसे अधिक बढ़ोतरी दक्षिण कोरिया, जापान, चीन तथा अमरीका में होगी.

गूगल ने रंग-बिरंगे डूडल से किया नए साल का आगाज

गूगल ने नए साल पर अपना रंग बिरंगा डूडल पेश करते हुए सभी को नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं. गूगल के इस डूडल में रंग-बिरंगी चिड़ियाएं एक डाल पर बैठी हुई हैं. चिड़ियाएं चह्कते हुए नए और नन्हें मेहमानों का स्वागत करती हैं.

गूगल के इस डूडल में ठीक मध्यरात्रि में नन्हें मेहमानों का आगमन होता है. यदि पेज को रिफ्रेश किया जाए तो आप देखेंगे कि डाल पर दिख रहा अंडा तीन बार अलग अलग बच्चों को जनम देता है. एक बार उसमें पांच टर्टल दिखाई देते हैं, एक बार बेबी मगरमच्छ और एक बार एक डक नजर आ रहा है.

गूगल का यह डूडल नए साल की नई आशाओं, नई उम्मीदें और नई सोच पर आधारित है.

फेसबुक पर मिलेगी प्लम्बर-फोटोग्राफर की सुविधा..!

जल्द ही आप फेसबुक पर आस-पास के प्लंबिंग और फोटोग्राफी जैसी सेवा देने वालों को भी ढूंढ पाएंगे. सोशल नेटवर्किंग साइट ने फेसबुक प्रोफेशनल सर्विसेज फीचर लांच किया है, जो आपको आस-पास के उच्च रेटिंग वाले स्थानीय सेवा प्रदाताओं की एक डायरेक्टरी से जोड़ेगा.

इस पृष्ठ पर सेवा प्रदाताओं के फोन नंबर और अन्य जरूरी सूचनाएं मिल जाएगी. इस प्रकार की सेवा हालांकि फेसबुक से पहले अमेजन और गूगल भी दे रही हैं. इस सेवा के तहत कारोबारी अपने कारोबार का स्थानीय स्तर पर प्रचार कर सकते हैं.

एक साल में सबसे ज्यादा गोल का रिकॉर्ड बार्सिलोना के नाम

अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर लियोनेल मेसी के गोल की बदौलत बुधवार को बार्सिलोना ने रियल बेटिस को 4-0 से मात दी. स्पेनिश लीग लिस्ट में बार्सिलोना 38 प्वॉइंट के साथ टॉप पर है.

बार्सिलोना ने इस साल 180 गोल दागे हैं, जो साल 2014 में मेड्रिड की ओर से दागे गए 178 गोल से अधिक है. इस बीच, बार्सिलोना के साथ अपना 500वां मैच खेलने वाले मेसी ने कहा, ‘यह साल बहुत ही शानदार रहा और हम इसे इसी तरह खत्म करना चाहते थे. इससे बेहतर करना थोड़ा मुश्किल होगा, लेकिन हमेशा की तरह हम इससे बेहतर करने की कोशिश करेंगे.’

स्पेनिश लीग लिस्ट में एटलेटिको मेड्रिड 38 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर है. बार्सिलोना और एटलेटिको के अंक बराबर हैं, लेकिन गोल की संख्या में अंतर है. इस लीग लिस्ट में रियल मेड्रिड 36 प्वॉइंट के साथ तीसरे स्थान पर है.

पिछले 12 महीनों में बार्सिलोना ने चैम्पियन लीग, ला लीग, कोपा डेल रे, यूईएफए सुपर कप और क्लब वर्ल्ड कप खिताब जीते हैं और इन सभी जीत के साथ क्लब ने साल में 180 गोल दागने का नया रिकॉर्ड बनाया है.

IPL-8 के सबसे महंगे खिलाड़ी युवराज को दिल्ली ने निकाला

टीम इंडिया में वापसी का जश्न मना रहे युवराज सिंह, वीरेंद्र सहवाग और ईशांत शर्मा के लिए 2015 का अंत अच्छा नहीं रहा. इन खिलाड़ियों को IPL-9 के लिए संबंधित फ्रेंचाइजी ने टीम से रिलीज कर दिया. अब इनके भविष्य का फैसला 9 फरवरी को होने वाली बोली में तय होगा.

पिछले सीजन में दिल्ली ने युवी को 16 करोड़ रुपए में खरीदा था. गौरतलब है कि आईपीएल 2016 के लिए खिलाड़ियों को रिटेन करने की विंडो 31 दिसंबर शाम पांच बजे तक थी.

जहां दिल्ली डेयरडेविल्स ने युवराज को बाहर किया, वहीं किंग्स इलेवन पंजाब ने वीरेंद्र सहवाग को और सनराइजर्स हैदराबाद ने ईशांत शर्मा को टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया.

आइए एक नजर डालते हैं कि आईपीएल टीमों ने 31 दिसंबर की डेडलाइन पर कुल कितने प्लेयर्स को रिलीज किया और कितने को रिटेन किया-

  • 24 विदेशी खिलाड़ियों सहित 61 को टीमों ने बोली के लिए रिलीज कर दिया.
  • 6 फ्रेंचाइजी टीमों ने 37 विदेशी खिलाड़ियों सहित कुल 101 खिलाड़ियों को टीम में बनाए रखा.

कौन से खिलाड़ी हुए रिलीज

  • दिल्ली डेयरडेविल्स ने युवराज के अलावा मनोज तिवारी, जयदेव उनादकट, एंजेलो मैथ्यूज और ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी गुरिंदर संधू सहित 10 को बाहर कर दिया.
  • बेंगलुरू ने घरेलू क्रिकेट में जबरदस्त प्रदर्शन करने वाले जलज सक्सेना सहित सबसे अधिक 14 खिलाड़ियों को रिलीज किया.
  • किंग्स इलेवन पंजाब ने विस्फोटक वीरेंद्र सहवाग और ऑस्ट्रेलिया के जॉर्ज बेली सहित 8 खिलाड़ियों को रिलीज किया.
  • कोलकाता नाइटराइडर्स ने 10 खिलाड़ियों और मुंबई ने जोस हेजलवुड और प्रज्ञान ओझा सहित 10 खिलाड़ियों को बाहर किया.
  • हैदराबाद ने ईशांत शर्मा और डेल स्टेन सहित 9 खिलाड़ियों को बोली के लिए रिलीज कर दिया.
  • रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूरु ने वेस्टइंडीज के डेरेन सैमी को रिलीज किया.

किस टीम के पास कितना पैसा बाकी है

  • दिल्ली डेयरडेविल्स के पास नीलामी के लिए 36 . 85 करोड़ रुपये होंगे. दिल्ली ने 29.15 करोड़ रुपए खर्च किए हैं.
  • सनराइजर्स हैदराबाद के पास 30 करोड़ 15 लाख रुपये का पर्स होगा.
  • मुंबई इंडियंस के पास 14 करोड़ 40 लाख रूपये होंगे. मुंबई ने सबसे ज्यादा 51.59 करोड़ रुपए खर्च किए हैं.
  • केकेआर के पास 17 करोड़ 95 लाख रुपए खर्च कर दिए हैं.
  • पंजाब और आरसीबी के पास क्रमश: 23 करोड़ और 21 करोड़ 62 लाख रुपए होंगे.
  • दो नई टीमों इंटेक्स राजकोट और संजीव गोयनका की पुणे फ्रेंचाइजी के पास 27 करोड़ रुपए होंगे. उन्होंने प्रतिबंधित चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स से पांच-पांच खिलाड़ी खरीदे हैं.  

42 साल बाद कोई भारतीय बना वर्ल्ड का नंबर वन गेंदबाज

भारत के स्टार ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को साल के आखिरी दिन गुरूवार को बेहतरीन तोहफा मिला. अश्विन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की ताजा जारी टेस्ट रैंकिंग में विश्व के नंबर एक गेंदबाज बन गए हैं.

आईसीसी ने डरबन में खेले गए इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के टेस्ट मैच और मेलबोर्न में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बीच समाप्त हुए बॉक्सिंग डे टेस्ट के बाद यह रैंकिंग जारी की है. बाक्सिंग डे टेस्ट से पहले दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज डेल स्टेन नंबर एक टेस्ट गेंदबाज थे, लेकिन अब अश्विन ने यह स्थान हासिल कर लिया है.

अश्विन के करियर की यह सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग हैं. वह 871 रेटिंग अंकों के साथ शीर्ष पर हैं, जबकि दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाज स्टेन उनसे चार अंक पीछे 867 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर खिसक गए हैं. अश्विन को स्टेन के चोटिल होने का फायदा मिला है. अश्विन ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ गत माह संपन्न हुई घरेलू टेस्ट सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया था. स्टेन 2009 से टेस्ट गेंदबाजी रैंकिंग में शीर्ष पायदान पर थे.

गत सप्ताह आईसीसी द्वारा 2015 के सर गारफील्ड सोबर्स ट्रॉफी पुरस्कार से सम्मानित किया ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीवन स्मिथ टेस्ट बल्लेबाजी रैंकिंग में शीर्ष पायदान पर पहुंच गए हैं. 26 साल के स्मिथ को चार स्थान का फायदा हुआ है और वह केन विलियमसन , ए बी डीविलियर्स और जो रूट को पछाड़ते हुए नंबर एक पर पहुंच गए हैं.

42 साल बाद किसी किसी इंडियन बॉलर को यह कामयाबी मिली है. आखिरी बार 1973 में लेफ्ट आर्म स्पिनर बिशन सिंह बेदी नंबर वन बने थे. 

धार्मिक कट्टरता के माने

धार्मिक कट्टरता के विवाद के पीछे असल में पैसा और पावर ही है, चाहे वह इस्लामिक स्टेट का मामला हो, कैथोलिक पोप का या भारत के आरएसएसनुमा का. केंद्र में जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई है, भगवाई धंधे को चमकाने के लिए तरह-तरह की बातें होने लगी हैं और सभी का छिपा मकसद एक ही है कि किसी तरह धर्म के इर्द-गिर्द पैसा जमा करने के स्रोतों को और पक्का किया जा सके.

अयोध्या का मामला हो, गाय के मांस का हो, हिंदू ग्रंथों का हो या पाकिस्तान से बातचीत का, उद्देश्य यही है कि पंडेपुजारियों की श्रेष्ठता को साबित किया जा सके, ताकि मंदिरों व योगाश्रमों में पैसा बरसता रहे. धर्मप्रचारक जानते हैं कि उनकी बातों में लोच है. उनके आदर्श हिंदू देवी-देवताओं की कहानियों में न केवल अनैतिकता, बेईमानी, भ्रष्ट आचरण, धोखा भरा है, बल्कि बहुत से तो बेहद कामुक कुकृत्य भी करते रहे हैं. उनके बारे में  चर्चा न हो, यह टोपीधारी से ले कर तिलकधारी तक, सब चाहते हैं.

लेखकों से उन लोगों को खास चिढ़ है, क्योंकि लेखन से पोल खुलती है. मार्टिन लूथर ने 500 साल पहले पोपशाही को नुकसान पहुंचाया था, तो लिखित शब्दों से, जो उन्होंने कैथोलिक चर्च के दरवाजे पर कील से ठोंके थे और जिस की प्रतियां छाप कर पूरे यूरोप में बेची गई थीं. इस्लामिक स्टेट ने शार्ली एबदो पर हमला इसीलिए कराया था, क्योंकि लिखित, मुद्रित शब्द ज्यादा वजनदार होते हैं बजाय लड़ाकू हवाई जहाजों के.

पुणे में जब लेखिका अरुंधति राय को महात्मा फूले समता पुरस्कार दिया जा रहा था, तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने हल्ला किया, क्योंकि वे लेखकों की कलम बंद करना चाहते हैं. सदियों से ईश निंदा के नाम पर यूरोप, भारत और अमेरिका में धर्म की पोल खोलने वालों को अरुंधती राय की तरह काले झंडों को सहना पड़ रहा है. अगर साहित्यकार अपने सम्मान लौटा रहे हैं, तो इसलिए कि वे समझते हैं कि सरकार का उद्देश्य कट्टरता को बढ़ावा देना व धर्म का प्रचार करना भर रह गया है और अगर उस का वश चले, तो स्वधर्मी आलोचकों को किलों की दीवारों में जिंदा चिनवा दे.

यह तो अरविंद केजरीवाल, लालू प्रसाद यादव और हार्दिक पटेल जैसे नेताओं का कमाल है कि उन्होंने भगवाई आतंकवाद को रोकना शुरू किया है, हालांकि उनका उद्देश्य नितांत राजनीतिक ही है. मौका मिला तो वे भी सच बोलने वालों का मुंह बंद करने से बाज नहीं आएंगे. देश की उन्नति सामाजिक सुधारों से संभव है, वित्त मंत्री के दफ्तर से नहीं, जहां दरवाजे पर पुरातनवादी मूर्ति पर रोज फूल चढ़ाए जाते हैं. आर्थिक सुधार बेमतलब हैं, अगर मानसिक सुधार न हों.

भारत-पाक: नफरत के रिश्ते पर अमन की उम्मीद

दिल मिले न मिले, हाथ मिलाते रहिए, इसी तर्ज पर रिश्तों में कड़वाहट के बीच भारत और पाकिस्तान एक बार फिर बातचीत के लिए तैयार हुए हैं. इसलामाबाद में हार्ट औफ एशिया सम्मेलन के बाद दोनों देशों के बीच सहमति बनी है. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की इसलामाबाद यात्रा के बाद दोनों देशों के विदेश सचिव वार्त्ता का ब्लूप्रिंट तैयार करने में जुट गए हैं.

अब सब का ध्यान दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत पर लगा है. भारत और पाकिस्तान के रिश्ते पिछले कई सालों से कड़वाहट भरे रहे हैं. मजहबी नफरत की बुनियाद पर टिके रिश्तों में शुरू से ही तल्खी रही है. 3 युद्धों को छोड़ कर बात की जाए तो मुंबई हमला, संसद पर हमला और आएदिन सीमा पर हो रही मौतें आपसी संबंधों में कड़वाहट को कम नहीं होने दे रही हैं.

आतंकियों की घुसपैठ, बारबार सीजफायर उल्लंघन, जम्मूकश्मीर पर पुराना रुख और कट्टरपंथी नेताओं के परस्पर विषवमन ने रिश्तों की दूरी और चौड़ी कर दी. कुछ समय पहले भारत में तैनात पाकिस्तानी राजदूत की कश्मीर के अलगाववादी नेताओं के साथ बैठक के बाद भारत ने कड़ा रुख अपना लिया और बातचीत से इनकार कर दिया था.

हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच एक टेबल पर आने के लिए बेताबी देखी गई. सितंबर माह में भारत व पाक के रेंजर्स की बातचीत हुई. नवंबर माह में दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नजीर जंजुआ और अजीत डोभाल के बीच बैंकौक में वार्त्ता हुई. फिर पेरिस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ चुपकेचुपके मिले और अब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पाकिस्तान के विदेश मामले के सलाहकार सरताज अजीज व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से वार्त्ता किए जाने का निर्णय कर लौटी हैं.

भारत व पाकिस्तान पर आपस में बातचीत करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दबाव तो है ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी विश्व नेता के तौर पर अपनी छवि बनाने के लिए पड़ोसी देशों से शांति के प्रयास में सक्रिय नजर आते हैं. भले ही वे अपने ही कट्टरपंथियों पर नियंत्रण रख पाने में नाकाम दिखाई दे रहे हों.

उधर, कहने को पाकिस्तान में चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार है पर उस देश की हकीकत यह है कि वहां लोकतंत्र सेना, आईएसआई और कट्टरपंथियों के यहां गिरवी रहा है.

अंतर्राष्ट्रीय दबाव
बहरहाल, वार्त्ता के मुद्दे चिरपरिचित हैं. कश्मीर, सियाचिन, सरक्रीक, तस्करी और आतंकवाद पर एक बार फिर चर्चा होगी. इन मुद्दों पर कभी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. पाकिस्तान का हर नेता यही कहता आया है कि कश्मीर उन की रगों में बह रहा है. वे कश्मीर मुद्दे को नहीं छोड़ सकते. उधर, भारत कश्मीर को अपना अभिन्न हिस्सा मानता आया है. पाकिस्तान कश्मीर में आतंकवाद को शह देता रहा है. वह इसे कब्जाना चाहता है. दोनों देशों के पास परस्पर आरोपप्रत्यारोपों की लंबी फेहरिस्त है.

विश्व में आईएस के बढ़ते प्रभाव और बदलते हालात में दोनों देश वार्त्ता के लिए इस बार गंभीर दिखते हैं पर विपक्ष के साथसाथ दोनों देश अपनेअपने धार्मिक कट्टरपंथियों से भी जूझ रहे हैं. भारत में विपक्षी दलों द्वारा पाकिस्तान के आगे झुकने का सरकार पर आरोप लगाया जा रहा है. कहा जा रहा है कि भारत पाकिस्तान को ले कर अपना रुख लगातार बदल रहा है. उधर, पाकिस्तानी सांसदों ने नवाज शरीफ को घेर रखा है. उन से पूछा जा रहा है कि किन शर्तों पर भारत के साथ बातचीत हो रही है. दोनों देशों के कट्टरपंथी भी कुलबुला रहे हैं.

बातचीत के विवादास्पद मुद्दों के बीच दोनों देशों में व्यापारिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक समझौते गौण हो जाते हैं. कई वस्तुओं के कारोबार अब भी प्रतिबंधित हैं. विश्व के देश भारत व पाकिस्तान के बीच शांति, परस्पर सहयोग का आदानप्रदान देखना चाहते हैं पर यह लगभग असंभव दिखता है. दोनों देशों के बीच कोई हस्तक्षेप नहीं करना चाहता. अमेरिका तो स्पष्ट कहता आया है कि भारत व पाकिस्तान मिलबैठ कर बातचीत के जरिए अपनी समस्याओं का हल खुद निकालें, हालांकि संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने बिचौलिए की भूमिका निभाने के लिए खुद को तैयार बताया था.

इराक व अफगानिस्तान युद्धों के बाद अमेरिका आतंकवाद को खत्म करने के लिए पाकिस्तान को करोड़ों डौलर की मदद देता है पर स्थिति जस की तस है. जैशे मोहम्मद, लश्करे तैयबा, तालिबान जैसे आतंकी संगठन पूर्व की तरह फलफूल रहे हैं.

पाकिस्तान में हर सरकार को आईएसआई, सेना तथा कठमुल्लों की कठपुतली बन कर शासन करना पड़ता है. दोनों देशों के बीच विदेश सचिव स्तर की वार्त्ता 2012 में संप्रग शासन के कार्यकाल में विदेश मंत्री एस एम कृष्णा की पाकिस्तान यात्रा के दौरान हुई थी. बातचीत को ना-ना करते हुए मोदी सरकार अब सहमत हुई है तो सवाल उठ रहे हैं कि एनडीए सरकार पूर्ववर्ती सरकारों से हट कर क्या ठोस परिणाम देगी? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले कह चुके हैं कि आतंकवाद और बातचीत साथसाथ नहीं चल सकते.

असल में भारत और पाकिस्तान के बीच अच्छे संबंध बनने के बीच सब से बड़ी बाधा धर्म है. भारत का विभाजन धर्म के नाम पर हुआ और पाकिस्तान की नींव धर्म पर पड़ी. तब से ले कर अब तक लाखों लोग मारे जा चुके हैं. तनावपूर्ण रिश्तों के चलते दोनों देशों के लोगों को बहुत अधिक परेशानी उठानी पड़ती है.

पाकिस्तान के सामंत, जमींदार आज भी उसी ठसक के साथ रह रहे हैं. गरीबी, पिछड़ेपन का आलम वहां यह है कि लोग भूखे मर जाएंगे पर मजहब के अमानवीय व्यवहार को नहीं छोड़ेंगे. पाकिस्तान का समाज हिंसक सांप्रदायिक दरार से जूझ रहा है. तालीम के नाम पर वहां अधिकांश बच्चों, युवाओं को मजहब के लिए जीनामरना सिखाया जाता है. वहां का समाज भारत व पश्चिम विरोधी पूर्वाग्रहों से इतना ग्रस्त है कि विश्वास पर आधारित शांति, प्रेम की फिलहाल कल्पना करना मुश्किल है.

वहां का राजनीतिक नेतृत्व कट्टरपंथियों के सामने बिलकुल बौना है जो देखने में असैन्य लोकतंत्र लगता है पर वास्तव में सभी मामलों में वहां सेना प्रमुख ही प्रमुख हैं. बातचीत सरकारों के बीच होती है पर पीठ पर दोनों ही देशों के कट्टरपंथी खड़े रहते हैं. कट्टरपंथियों का स्वार्थ किसी तरह प्रभावित न हो, इस बात का पूरा बंदोबस्त पहले ही कर दिया जाता है.

पड़ोसी चीन के साथ सीमा विवाद है पर वहां धर्म बीच में नहीं है. अगर दलाई लामा को छोड़ दिया जाए तो भारत व चीन के बीच कोई मजहबी दुश्मनी नहीं है. इसलिए चीन के साथ व्यापारिक, आर्थिक साझेदारी ने रिश्तों को ज्यादा बिगड़ने नहीं दिया. हालिया सालों में आर्थिक उदारीकरण के चलते छोटेमोटे विवादों को भुला कर कई देश करीब आए हैं पर भारत व पाकिस्तान के बीच कदमकदम पर मजहबी कट्टरता बीच में आ खड़ी होती है. मजहब ने खेल, सांस्कृतिक संबंधों से भी भारत और पाकिस्तान को दूर धकेल दिया है.

दुश्मनी की सियासत
पाकिस्तान मजहब से दूर नहीं जा सकता. अगर वह आतंकवाद के खिलाफ कार्यवाही करता है तो समूचे देश में गृहयुद्ध होने का खतरा है. दशकों से बातचीत का सिलसिला चल रहा है. ज्योंज्यों दवा की, मर्ज बढ़ता ही गया यानी वार्त्ताओं से हासिल कुछ नहीं हुआ, हालात और बिगड़ते रहे. जब तक दोनों देश संकीर्ण मजहबी सोच नहीं छोड़ देंगे तब तक अमन, तरक्की की उम्मीद करना बेमानी होगा.

दोनों देश पूर्व की सरकारों की नीतियों और सोच से हट कर संबंधों में सुधार कर पाएंगे, ऐसा नामुमकिन लगता है. राजनीतिबाजों को अपनीअपनी सियासत चलाने और उसे कायम रखने के लिए एक दुश्मन की जरूरत होती है. पाकिस्तान के सियासतदां वहां के लोगों में हिंदू, हिंदुस्तान का हौवा खड़ा करते हैं तो भारत में भाजपा जैसी धार्मिक पार्टियां हिंदुओं को एक रखने के लिए पाकिस्तान का भय खड़ा रखती हैं. ऐसे में रिश्ते कैसे सुधर पाएंगे?

जरमन कंपनी “मेसा” बनाएगी सोलर इनवर्टर

विंड टरबाइन बनाने वाली जरमनी की कंपनी मेसा भारत में सौर ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की योजना बना रही है. उसे उम्मीद है कि भारत सरकार सौर ऊर्जा भारत सरकार को जिस तरह से बढ़ावा दे रही है उसे देखते हुए पवन ऊर्जा उत्पादन के लिए टरबाइन बनाने के साथ ही सौर ऊर्जा क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कारोबार करने में वह सफल होगी.

कंपनी भारत में सोलर पैनल तैयार करने के पक्ष में नहीं है बल्कि कंपनी सोलर फार्म विकसित करने के साथ ऐसा इनवर्टर बनाना चाहती है जिस से सोलर पैनल करंट वैकल्पिक करंट के रूप में तबदील हो सके. उस कंपनी का विंड का वैश्विक स्तर पर बड़ा कारोबार है. वह ब्राजील, चीन तथा दक्षिण अफ्रीका में विंड टरबाइन की बिक्री के कारोबार से लंबे समय से जुड़ी है और इस क्षेत्र में दुनिया की शीर्ष कंपनियों में शामिल है.

कंपनी ने 5-6 साल पहले भारत में अपनी गतिविधियां शुरू की थीं और इस साल उस ने भारत में 900 मेगावाट की बिक्री कर ली. कंपनी का भरोसा भारत के सौर ऊर्जा कार्यक्रम पर है जिस को ले कर केंद्र सरकार बड़ीबड़ी घोषणाएं कर रही है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैश्विक मंच पर सौर ऊर्जा के उत्पादन की महत्ता और इसे भविष्य की ऊर्जा बता कर विश्व समुदाय को सौर ऊर्जा उत्पादन क्षेत्र में आने के लिए उत्साहित कर रहे हैं.

 

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