Download App
Home » पृष्ठ 3435

फ्लोरल है ऐवरग्रीन

मौसम कोई भी हो लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती हैं जो कभी नहीं बदलतीं. हर साल कुछ नए बदलावों के साथ ये दोबारा ट्रैंड में आ ही जाती हैं, जिस का असर रीयल लाइफ से ले कर रील लाइफ तक में देखने को मिलता है. फिर चाहे वह आउटफिट की डिजाइन हो, स्टफ हो या फिर प्रिंट.

प्रिंट की बात करें तो इन दिनों एक बार फिर से फ्लोरल प्रिंट का जादू सिर चढ़ कर बोल रहा है. 2014 में संपन्न हुए फेमिना मिस इंडिया 14 के फैशन शो में इस प्रिंट का जलवा खूब देखने को मिला. असल में इस प्रिंट के हौट व बोल्ड होने की वजह से सैलिब्रिटीज भी इसे पहनने का मोह नहीं छोड़ पाते हैं. ऐसे में फिर भला आप क्यों पीछे रहें. आइए, जानते हैं इस बारे में फैशन डिजाइनर पूनम बजाज से कि आखिर क्या खास है फ्लोरल में :

कलर

फ्लोरल प्रिंट ही वह प्रिंट है जो हर मौसम व हर उम्र में अच्छा लगता है. बस, इस के लिए आप को कलर कौंबिनेशन को ध्यान में रखना होगा. जैसे यदि आप इसे विंटर में पहनना चाह रही हैं तो मल्टी कलर पहन सकती हैं परंतु यदि आप इसे समर में कैरी करना चाहती हैं तो इस का बेस व्हाइट, औफ व्हाइट या ब्लैक रखें. साथ ही मल्टी कलर से दूर रहें. इन दिनों व्हाइट बेस के साथ पिंक, येलो व नियोन कलर फैशन में हैं.

फ्लोरल में भी कई औप्शन

यदि आप सोच रही हैं कि फ्लोरल का मतलब सिर्फ प्रिंट से है, तो गलत सोच रही हैं. आजकल इस में कई सारे औप्शंस आ गए हैंजो ड्रैसेज को और भी ग्लैमरस व रिच लुक देते हैं. जैसे कि फ्लोरल एंब्रौयडरी, फ्लोरल मोटिफ व आर्टिफिशियल फ्लावर आदि. आजकल पार्टी वियर के लिए फ्लोरल एंब्रौयडरी व फ्लोरल मोटिफ फैशन में हैं. इतना ही नहीं आप चाहें तो थोड़ी सी क्रिएटिविटी दिखा कर खुद अपनी फ्लोरल ड्रैस डिजाइन कर सकती हैं, जैसे कि एक सिंपल पार्टी वियर साटन के गाउन पर सोल्डरके वन साइड साटन के रिबन से बने फ्लावर को ब्रौच की तरह लगा लें. आप की ड्रैस पार्टी में चारचांद लगा देगी.

फैंसी ड्रैसेज पर सीक्वैंस एंब्रौयडरी भी ट्राई की जा सकती है. हालांकि मौडर्न फ्लोरल भी आजकल ट्रैंड में है. इस में बेस में डिफरैंट कलर के साथ व्हाइट फ्लावर्स दिए जाते हैं.

ऐक्सैसरीज में भी ढेरों औप्शंस

फ्लोरल प्रिंट्स का जादू सिर्फ आउटफिट्स तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह प्रिंट फुटवियर से ले कर बैग्स, बैल्ट्स, हेयर ऐक्सैसरीज तक खूब देखे जा रहे हैं. हेयर ऐक्सैसरीज में जहां यह हेयर बैंड्स से ले कर क्लचर्स, हेयर पिन तक में उपलब्ध हैं वहीं फुटवियर में सैंडिल से ले कर बेलीज व हील पर भी फ्लावर वाले डिजाइन ट्रैंड में हैं.                           

ध्यान रखने योग्य बातें

फ्लोरल प्रिंट को पहनते समय एक नजर अपनी बौडी पर डालें. अगर आप की हाइट कम व बनावट मोटी है तो आप बड़े फ्लावर्स पहनने से बचें. इस की जगह छोटे फ्लावर वाले प्रिंट्स को महत्त्व दें. यदि आप की हाइट लंबी और आप पतली हैं तो फिर आप पर बड़े व सिंगल साइज वाले फ्लावर प्रिंट्स खूब अच्छे लगेंगे. ब्यूटी ऐक्सपर्ट पूजा गोयल के मुताबिक इस आउटफिट के साथ नैचुरल व सिंपल लुक ही अच्छा लगता है, क्योंकि बोल्ड व हैवी मेकअप आप की ड्रैस को फीका कर देगा. हां, यदि पार्टी है तो आप ब्राइट मेकअप कर सकती हैं लेकिन ध्यान रखें कि आप की आउटफिट भी उसी हिसाब से बोल्ड व ब्राइट होनी चाहिए.

पार्किंग में बढ़ता माफियाराज

देश भर के अन्य शहरों की तरह हैदराबाद भी पार्किंग माफिया का शिकार है, जहां 2-4 गुंडे टाइप लोग जमा हो कर एक पार्किंग की जगह बना कर सड़क या पटरी को घेर कर पैसे वसूलने शुरू कर देते हैं. जो जगह पब्लिक के लिए हमेशा से फ्री रही हो, वहां अचानक पैसे लेने शुरू कर दिए जाएं तो शुरूशुरू में अजीब लगता है. कुछ लोग लड़ते हैं पर धीरेधीरे आदत हो जाती है और निठल्लों को मोटा पैसा बनाने का अवसर मिल जाता है.

हैदराबाद ट्रैफिक पुलिस ने 400 ऐसी जगहों पर फ्री पार्किंग के बोर्ड लगा कर उन्हें दबंगों से मुक्त कराया है. ट्रैफिक पुलिस अफसर ए.वी. रंगनाथ का कहना है कि पहले उन्होंने इधरउधर मुफ्त पार्किंग के चक्कर में खड़ी गाडि़यों का चालान करना शुरू करा था पर उस से बात नहीं बनी, क्योंकि उस से तो दबंग और शेर हो गए और उन्होंने और जगहों पर कब्जा करना शुरू कर दिया. अब जब से फ्री पार्किंग के बोर्ड लगने शुरू हुए हैं, स्थिति सुधरी है. दिल्ली में कौरपोरेशन ने मौलों और अस्पतालों में फ्री पार्किंग करवाई है, क्योंकि यह उन के नक्शे के अनुसार फ्री जगह थी.

देश भर में पार्किंग की जगह की किल्लत हो रही है, क्योंकि लोग अपने वाहन को ठीक दुकान या दफ्तर के सामने खड़ा करना चाहते हैं. हमारा आलस्यपन इतना है कि 100 कदम चलना भी हमारी जेवरों से लदीं स्मार्ट ड्रैस वाली महिलाओं को भारी लगता है. हर ऐसी जगह जहां बहुत लोग आते हों, पार्किंग आफत खड़ी कर देती है पर पार्किंग शुल्क लगाना कोई लाभदायक नहीं, क्योंकि उस में गुंडागर्दी ज्यादा होती है. 10 के 40 रुपए लिए जाते हैं.

शहरों में असल में सभी व्यस्त जगहों पर सड़कों को बंद कर के पैदल चलने वालों के लिए बना दिया जाना चाहिए ताकि दफ्तरों के कौंप्लैक्सों में लोगों को ठीक वैसे ही पैदल चलना पड़े जैसे मौलों में चलना होता है. गाड़ी दूर खड़ी करना अनिवार्य हो. हां, वहां शेड वाले रास्ते बनाए जा सकते हैं ताकि धूप और बारिश से बचाव हो सके. शहरों को भीड़ व प्रदूषण से बचाने के लिए पार्किंग महंगी करने की जगह, कहीं दूर बनवानी चाहिए ताकि लोगों को पैदल चलने की आदत पड़े. हर व्यस्त बाजार से मील 2 मील पर ऐसी जगह होती है जहां गाड़ी खड़ी की जा सकती है.

संसद का खाना हुआ महंगा

संसद की कैंटीन का खाना अकसर चर्चा का विषय बनता रहता है. कभी उस के पकवानों की चर्चा की जाती है, तो कभी चीजों के दाम मुद्दा बनते हैं. अब संसद का खाना महंगा होने जा रहा है. रियायती दरों पर खाना परोसे जाने संबंधी विवादों की वजह से ही दामों में इजाफा किया जा रहा है. नए शिड्यूल के मुताबिक 18 रुपए में मिलने वाली शाकाहारी थाली अब 12 रुपए के इजाफे के साथ 30 रुपए में मिलेगी. इसी तरह 33 रुपए में मिलने वाली थाली अब 27 रुपए के इजाफे के साथ 60 रुपए की हो जाएगी.

थ्री कोर्स मील की कीमत 61 रुपए से बढ़ कर 90 रुपए हो जाएगी और पहले 29 रुपए में मिलने वाली चिकन करी 40 रुपए की हो जाएगी. नए साल में होने वाली यह बढ़ोतरी सांसदों, लोकसभा अधिकारियों, राज्यसभा अधिकारियों, सुरक्षा अधिकारियों और मीडिया कर्मियों के साथसाथ संसद के विजिटरों पर भी लागू होगी. इस मामले में लोकसभा सचिवालय की ओर से कहा गया कि कीमतों में यह बदलाव लोकसभा अध्यक्ष के आदेश से किया गया है. संसद की कैंटीन के दामों में यह इजाफा 6 साल बाद किया गया है. आदेश के मुताबिक बीचबीच में कैंटीन की चीजों के दामों की समीक्षा की जाएगी.

सचिवालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि संसद की कैंटीन में रियायती दरों पर मिलने वाले खाने का मुद्दा मीडिया में चर्चा का विषय बना रहता है. इसी वजह से लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने संसद की फूड कमेटी को इस मामले में ध्यान देने के आदेश दिए थे. कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद कैंटीन को ‘न लाभ, न हानि’ के आधार पर चलाने का फैसला लिया गया.

चीनी के उत्पादन में इजाफा

चीनी का चकल्लस तो साल भर चलता ही रहता है. किसान भुगतान की मांग करते हैं और चीनी मिलें टालू मिक्सचर मिलाती रहती हैं. ऐसे में सरकार भी हाथापांव मारती नजर आती है. इन सब गतिविधियों के बीच अच्छी बात यह कही जा सकती है कि चीनी के कुल उत्पादन में गिरावट होने के अंदाजे के बावजूद चालू सीजन में उत्पादन में इजाफा जारी है. इंडियन शुगरमिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के मुताबिक 31 दिसंबर 2015 तक चीनी के उत्पादन में साल 2014 के 31 दिसंबर तक हुए उत्पादन के मुकाबले 6.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पिछले अक्तूबर, नवंबर व दिसंबर के दौरान चीनी का उत्पादन 75 लाख टन हुआ, जबकि इस साल गन्ने की पेराई ने वाली मिलों की कुल तादाद बीते साल के मुकाबले बेहद कम रही है. इस्मा का अंदाजा है कि इस साल चीनी का उत्पादन 2.7 करोड़ टन तक पहुंच सकता है. गौरतलब है कि पिछले साल चीनी का उत्पादन 2.8 करोड़ टन हुआ था.

इस्मा के आंकड़ों के मुताबिक 31 दिसंबर 2015 तक देश भर में कुल 470 चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी थी, जबकि 31 दिसंबर 2014 तक 490 चीनीमिलों में पेराई बाकायदा शुरू हो चुकी थी. बहरहाल, फिलहाल तो चीनीमिलों का काम बिल्कुल चौकस ही कहा जा सकता है.

दिलकश सलोनी, सनी लियोनी

फिल्म ‘एक पहेली-लीला’ से आप ने इमेज बदलने की कोशिश की थी, पर अब फिल्म ‘मस्तीजादे’ में आप एक बार फिर अपनी पुरानी इमेज में ही नजर आईं. इस की क्या वजह रही?

मैं ने कभी यह नहीं कहा कि मैं अपनी इमेज बदलना चाहती हूं. फिल्म ‘एक पहेली-लीला’ के वक्त भी मैं ने ऐसा कोई दावा नहीं किया था. उस फिल्म में मुझे जिस तरह का किरदार निभाने का मौका मिला, उसे मैं ने उसी रूप में परदे पर निभाया.

मैं हर फिल्म में कुछ अलग तरह का किरदार निभाना चाहती हूं. मेरा मानना है कि दर्शक भी मुझे अलगअलग तरह के किरदारों में देखना चाहते हैं. दूसरी बात यह कि दर्शकों ने मुझे फिल्म ‘मस्तीजादे’ में लैला और लिली के डबल रोल में देखा है. लैला और लिली दोनों एकदूसरे से अलग हैं. मेरे लिए लिली का किरदार निभाना आसान था, पर लैला का किरदार निभाना थोड़ा मुश्किल था. सच कहूं, तो मुझे सैक्सी किरदार निभाने में परेशानी होती है.

तो क्या आप अपनी सैक्सी इमेज को तोड़ना चाहती हैं?

अपनी इमेज को ले कर मैं ने कभी कुछ नहीं सोचा. मैं जो कुछ हूं, उस को ले कर मुझे कोई पछतावा नहीं है. मैं कुछ एडल्ट फिल्में कर रही हूं, पर इन फिल्मों की कहानियां काफी रोचक हैं. मैं फिल्मों में वह सबकुछ करना चाहती हूं, जो मेरे लिए आसान हो.

आप अपने सैक्सी लुक को बरकरार रखने के लिए क्या करती हैं?

जिस दिन शूटिंग नहीं होती है, उस दिन मैं जिम में 2 घंटे बिताती हूं. जिस दिन शूटिंग होती है, उस दिन जिम में सिर्फ 30 मिनट ही बिताती हूं. मेरी राय में हर औरत को हर दिन थोड़ीबहुत कसरत करनी चाहिए. मैं बौक्सिंग करती हूं. साइकिल चलाती हूं. मुझे पता है कि ज्यादा चौकलेट खाना नुकसान पहुंचाता है, लेकिन चौकलेट मेरी कमजोरी है, तो उसे मैं खा ही लेती हूं.

आप की बेइंतिहा खूबसूरती का राज?

मैं कौस्मैटिक्स का इस्तेमाल करने से बचती हूं. मिठाई और जंक फूड का सेवन भी नहीं करती हूं.

अब हौलीवुड फिल्में भी भारत में भारतीय भाषाओं में डब हो कर रिलीज हो रही हैं. आप इस का क्या असर देखती हैं?

इस की वजह से दर्शकों को अलगअलग तरह का सिनेमा देखने का मौका मिल रहा है. मेरा मानना है कि सिनेमा की कोई भाषा नहीं होती. दर्शक हर भाषा का सिनेमा देखते हैं, फिर चाहे वह हिंदी में हो या अंगरेजी या तमिल या तेलुगु भाषा में हो.

ऐसी क्या वजह है कि आज भी बौलीवुड के कई बड़े कलाकार आप के साथ काम नहीं करना चाहते हैं?

यह मेरे लिए चिंता वाली बात नहीं है. मैं वक्त पर यकीन करती हूं. एक न एक दिन यह वक्त जरूर बदलेगा. कई अच्छे कलाकार काम के प्रति मेरी गंभीरता को समझ रहे हैं और वे मेरे साथ आगे काम करना चाहेंगे.

आजकल सोशल मीडिया का जमाना है, लेकिन इस पर तरहतरह के कमैंट आते हैं. जब आप के बारे में सोशल मीडिया पर गलत कमैंट आते हैं, तब आप क्या करती हैं?

अगर बुरे कमैंट आते हैं, तो मैं उन्हें ब्लौक कर देती हूं.

अपनी शादीशुदा जिंदगी को ले कर आप क्या सोचती हैं?

हमारी शादी को 8 साल हो चुके हैं. पति डैनियल हर सुखदुख के मेरे साथी हैं. जिस वक्त मैं अपनी मां को खोने की वजह से निराश और डिप्रैशन में थी, उस वक्त मुझे डेनियल मिले थे. हम ने 3 साल डेटिंग की, फिर शादी की.

आगे आप और कौनकौन सी नई फिल्में कर रही हैं?

मार्च महीने में पत्रकार से फिल्म डायरैक्टर बने राजीव चौधरी की फिल्म ‘बेईमान लव’ रिलीज होगी, जिस में रोमांस और धोखा सबकुछ है. इस में एक बार फिर दर्शक मुझे रजनीश दुग्गल के साथ देखेंगे. इस फिल्म में मेरे कई हौट सीन हैं.

पीला गुलाब

‘यार, हौट लड़कियां देखते ही मुझे कुछ होने लगता है.’

मेरे पतिदेव थे. फोन पर शायद अपने किसी दोस्त से बातें कर रहे थे. जैसे ही उन्होंने फोन रखा, मैं ने अपनी नाराजगी जताई, ‘‘अब आप शादीशुदा हैं. कुछ तो शर्म कीजए.’’

‘‘यार, यह तो मर्द के ‘जिंस’ में होता है. तुम इस को कैसे बदल दोगी? फिर मैं तो केवल खूबसूरती की तारीफ ही करता हूं. पर डार्लिंग, प्यार तो मैं तुम्हीं से करता हूं,’’ यह कहते हुए उन्होंने मुझे चूम लिया और मैं कमजोर पड़ गई.

एक महीना पहले ही हमारी शादी हुई थी, लेकिन लड़कियों के मामले में इन की ऐसी बातें मुझे बिलकुल अच्छी नहीं लगती थीं. पर ये थे कि ऐसी बातों से बाज ही नहीं आते. हर खूबसूरत लड़की के प्रति ये खिंच जाते हैं. इन की आंखों में जैसे वासना की भूख जाग जाती है.

यहां तक कि हर रोज सुबह के अखबार में छपी हीरोइनों की रंगीन, अधनंगी तसवीरों पर ये अपनी भूखी निगाहें टिका लेते और शुरू हो जाते, ‘क्या ‘हौट फिगर’ है?’, ‘क्या ‘ऐसैट्स’ हैं?’ यार, आजकल लड़कियां ऐसे बदनउघाड़ू कपड़े पहनती हैं, इतना ज्यादा ऐक्सपोज करती हैं कि आदमी बेकाबू हो जाए.’

कभी ये कहते, ‘मुझे तो हरी मिर्च जैसी लड़कियां पसंद हैं. काटो तो मुंह ‘सीसी’ करने लगे.’ कभीकभी ये बोलते, ‘जिस लड़की में सैक्स अपील नहीं, वह ‘बहनजी’ टाइप है. मुझे तो नमकीन लड़कियां पसंद हैं…’

राह चलती लड़कियां देख कर ये कहते, ‘क्या मस्त चीज है.’

कभी किसी लड़की को ‘पटाखा’ कहते, तो कभी किसी को फुलझड़ी. आंखों ही आंखों में लड़कियों को नापतेतोलते रहते. इन की इन्हीं हरकतों की वजह से मैं कई बार गुस्से से भर कर इन्हें झिड़क देती.

मैं यहां तक कह देती, ‘सुधर जाओ, नहीं तो तलाक दे दूंगी.’

इस पर इन का एक ही जवाब होता, ‘डार्लिंग, मैं तो मजाक कर रहा था. तुम भी कितना शक करती हो. थोड़ी तो मुझे खुली हवा में सांस लेने दो, नहीं तो दम घुट जाएगा मेरा.’

एक बार हम कार से डिफैंस कौलोनी के फ्लाईओवर के पास से गुजर रहे थे. वहां एक खूबसूरत लड़की को देख पतिदेव शुरू हो गए, ‘‘दिल्ली की सड़कों पर, जगहजगह मेरे मजार हैं. क्योंकि मैं जहां खूबसूरत लड़कियां देखता हूं, वहीं मर जाता हूं.’’

मेरी तनी भौंहें देखे बिना ही इन्होंने आगे कहा, ‘‘कई साल पहले भी मैं जब यहां से गुजर रहा था, तो एक कमाल की लड़की देखी थी. यह जगह इसीलिए आज तक याद है.’’

मैं ने नाराजगी जताई, तो ये कार का गियर बदल कर मुझ से प्यारमुहब्बत का इजहार करने लगे और मेरा गुस्सा एक बार फिर कमजोर पड़ गया.

लेकिन, हर लड़की पर फिदा हो जाने की इन की आदत से मुझे कोफ्त होने लगी थी. पर हद तो तब पार होने लगी, जब एक बार मैं ने इन्हें हमारी जवान पड़ोसन से फ्लर्ट करते देख लिया. जब मैं ने इन्हें डांटा, तो इन्होंने फिर वही मानमनौव्वल और प्यारमुहब्बत का इजहार कर के मुझे मनाना चाहा, पर मेरा मन इन के प्रति रोजाना खट्टा होता जा रहा था.

धीरेधीरे हालात मेरे लिए सहन नहीं हो रहे थे. हालांकि हमारी शादी को अभी डेढ़दो महीने ही हुए थे, लेकिन पिछले 10-15 दिनों से इन्होंने मेरी देह को छुआ भी नहीं था. पर मेरी शादीशुदा सहेलियां बतातीं कि शादी के शुरू के महीने तक तो मियांबीवी तकरीबन हर रोज ही… मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर बात क्या थी. इन की अनदेखी मेरा दिल तोड़ रही थी. मैं तिलमिलाती रहती थी.

एक बार आधी रात में मेरी नींद टूट गई, तो इन्हें देख कर मुझे धक्का लगा. ये आईपैड पर पौर्न साइट्स खोल कर बैठे थे और…

‘‘जब मैं यहां मौजूद हूं, तो तुम यह सब क्यों कर रहे हो? क्या मुझ में कोई कमी है? क्या मैं ने तुम्हें कभी ‘न’ कहा है?’’ मैं ने दुखी हो कर पूछा.

‘‘सौरी डार्लिंग, ऐसी बात नहीं है. क्या है कि मैं तुम्हें नींद में डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था. एक टैलीविजन प्रोग्राम देख कर बेकाबू हो गया, तो भीतर से इच्छा होने लगी.’’

‘‘अगर मैं भी तुम्हारी तरह इंटरनैट पर पौर्न साइट्स देख कर यह सब करूं, तो तुम्हें कैसा लगेगा?’’

‘‘अरे यार, तुम तो छोटी सी बात का बतंगड़ बना रही हो,’’ ये बोले.

‘‘लेकिन, क्या यह बात इतनी छोटी सी थी?’’

कभीकभी मैं आईने के सामने खड़ी हो कर अपनी देह को हर कोण से देखती. आखिर क्या कमी थी मुझ में कि ये इधरउधर मुंह मारते फिरते थे?

क्या मैं खूबसूरत नहीं थी? मैं अपने सोने से बदन को देखती. अपने हर कटाव और उभार को निहारती. ये तीखे नैननक्श. यह छरहरी काया. ये उठे हुए उभार. केले के नए पत्ते सी यह चिकनी पीठ. डांसरों जैसी यह पतली काया. भंवर जैसी नाभि. इन सब के बावजूद मेरी यह जिंदगी किसी सूखे फव्वारे सी क्यों होती जा रही थी. एक रविवार को मैं घर का सामान खरीदने बाजार गई. तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही थी, इसलिए मैं जरा जल्दी घर लौट आई. घर का बाहरी दरवाजा खुला हुआ था. ड्राइंगरूम में घुसी तो सन्न रह गई. इन्होंने मेरी एक सहेली को अपनी गोद में बैठाया हुआ था.

मुझे देखते ही ये घबरा कर ‘सौरीसौरी’ करने लगे. मेरी आंखें गुस्से और बेइज्जती के आंसुओं से जलने लगीं. मैं चीखना चाहती थी, चिल्लाना चाहती थी. पति नाम के इस प्राणी का मुंह नोच लेना चाहती थी. इसे थप्पड़ मारना चाहती थी. मैं कड़कती बिजली बन कर इस पर गिर जाना चाहती थी. मैं गहराता समुद्र बन कर इसे डुबो देना चाहती थी. मैं धधकती आग बन कर इसे जला देना चाहती थी. मैं हिचकियां लेले कर रोना चाहती थी. मैं पति नाम के इस जीव से बदला लेना चाहती थी. मुझे याद आया, अमेरिका के राष्ट्रपति रह चुके बिल क्लिंटन भी अपनी पत्नी हिलेरी क्लिंटन को धोखा दे कर मोनिका लेविंस्की के साथ मौजमस्ती करते रहे थे, गुलछर्रे उड़ाते रहे थे. क्या सभी मर्द एकजैसे बेवफा होते हैं? क्या पत्नियां छले जाने के लिए ही बनी हैं. मैं सोचती.

रील से निकल आया उलझा धागा बन गई थी मेरी जिंदगी. पति की ओछी हरकतों ने मेरे मन को छलनी कर दिया था. हालांकि इन्होंने इस घटना के लिए माफी भी मांगी थी, फिर मेरे भीतर सब्र का बांध टूट चुका था. मैं इन से बदला लेना चाहती थी और ऐसे समय में राज मेरी जिंदगी में आया. राज पड़ोस में किराएदार था. 6 फुट का गोराचिट्टा नौजवान. जब वह अपनी बांहें मोड़ता था, तो उस के बाजू में मछलियां बनती थीं. नहा कर जब मैं छत पर बाल सुखाने जाती, तो वह मुझे ऐसी निगाहों से ताकता कि मेरे भीतर गुदगुदी होने लगती. धीरेधीरे हमारी बातचीत होने लगी. बातों ही बातों में पता चला कि राज प्रोफैशनल फोटोग्राफर था.

‘‘आप का चेहरा बड़ा फोटोजैनिक है. मौडलिंग क्यों नहीं करती हैं आप?’’ राज मुझे देख कर मुसकराता हुआ कहता.

शुरूशुरू में तो मुझे यह सब अटपटा लगता था, लेकिन देखते ही देखते मैं ने खुद को इस नदी की धारा में बह जाने दिया. पति जब दफ्तर चले जाते, तो मैं राज के साथ उस के स्टूडियो चली जाती. वहां राज ने मेरा पोर्टफोलियो भी बनाया. उस ने बताया कि अच्छी मौडलिंग असाइनमैंट्स लेने के लिए अच्छा पोर्टफोलियो जरूरी था. लेकिन मेरी दिलचस्पी शायद कहीं और ही थी.

‘‘बहुत अच्छे आते हैं आप के फोटोग्राफ्स,’’ उस ने कहा था और मेरे कानों में यह प्यारा सा फिल्मी गीत बजने लगा था :

‘अभी मुझ में कहीं, बाकी थोड़ी सी है जिंदगी…’

मैं कब राज को चाहने लगी, मुझे पता ही नहीं चला. मुझ में उस की बांहों में सो जाने की इच्छा जाग गई. जब मैं उस के करीब होती, तो उस की देहगंध मुझे मदहोश करने लगती. मेरा मन बेकाबू होने लगता. मेरे भीतर हसरतें मचलने लगी थीं. ऐसी हालत में जब उस ने मुझे न्यूड मौडलिंग का औफर दिया, तो मैं ने बिना झिझके हां कह दिया. उस दिन मैं नहाधो कर तैयार हुई. मैं ने खुशबूदार इत्र लगाया. फेसियल, मैनिक्योर, पैडिक्योर, ब्लीचिंग वगैरह मैं एक दिन पहले ही एक अच्छे ब्यूटीपार्लर से करवा चुकी थी. मैं ने अपने सब से सुंदर पर्ल ईयररिंग्स और डायमंड नैकलैस पहना. कलाई में महंगी घड़ी पहनी और सजधज कर मैं राज के स्टूडियो पहुंच गई.

उस दिन राज बला का हैंडसम लग रहा था. गुलाबी कमीज और काली पैंट में वह मानो कहर ढा रहा था.

‘‘हे, यू आर लुकिंग गे्रट,’’ मेरा हाथ अपने हाथों में ले कर वह बोला. यह सुन कर मेरे भीतर मानो सैकड़ों सूरजमुखी खिल उठे.

फोटो सैशन अच्छा रहा. राज के सामने टौपलेस होने में मुझे कोई संकोच नहीं हुआ. मेरी देह को वह एक कलाकार सा निहार रहा था. किंतु मुझे तो कुछ और की ही चाहत थी. फोटो सैशन खत्म होते ही मैं उस की ओर ऐसी खिंची चली गई, जैसे लोहा चुंबक से चिपकता है. मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था. मैं ने उस का हाथ पकड़ लिया.

‘‘नहीं नेहा, यह ठीक नहीं. मैं ने तुम्हें कभी उस निगाह से देखा ही नहीं. हमारा रिलेशन प्रोफैशनल है,’’ राज का एकएक शब्द मेरे तनमन पर चाबुक सा पड़ा.

‘…पर मुझे लगा, तुम भी मुझे चाहते हो…’ मैं बुदबुदाई.

‘‘नेहा, मुझे गलत मत समझो. तुम बहुत खूबसूरत हो. पर तुम्हारा मन भी उतना ही खूबसूरत है, लेकिन मेरे लिए तुम केवल एक खूबसूरत मौडल हो. मैं किसी और रिश्ते के लिए तैयार नहीं और फिर पहले से ही मेरी एक गर्लफ्रैंड है, जिस से मैं जल्दी ही शादी करने वाला हूं,’’ राज कह रहा था.

तो क्या वह सिर्फ एकतरफा खिंचाव था या पति से बदला लेने की इच्छा का नतीजा था?

कपड़े पहन कर मैं चलने लगी, तो राज ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे रोक लिया. उस ने स्टूडियो में रखे गुलदान में से एक पीला गुलाब निकाल लिया था. वह पीला गुलाब मेरे बालों में लगाते हुए बोला, ‘‘नेहा, पीला गुलाब दोस्ती का प्रतीक होता है. हम अच्छे दोस्त बन कर रह सकते हैं.’’

राज की यह बात सुन कर मैं सिहर उठी थी. वह पीला गुलाब बालों में लगाए मैं वापस लौट आई अपनी पुरानी दुनिया में…

उस रात कई महीनों के बाद जब पतिदेव ने मुझे प्यार से चूमा और सुधरने का वादा किया, तो मैं पिघल कर उन के आगोश में समा गई. खिड़की के बाहर रात का आकाश न जाने कैसेकैसे रंग बदल रहा था. ठंडी हवा के झोंके खिड़की में से भीतर कमरे में आ रहे थे. मेरी पूरी देह एक मीठे जोश से भरने लगी. पतिदेव प्यार से मेरा अंगअंग चूम रहे थे. मैं जैसे बहती हुई पहाड़ी नदी बन गई थी. एक मीठी गुदगुदी मुझ में सुख भर रही थी. फिर… केवल खुमारी थी. और उन की छाती के बालों में उंगलियां फेरते हुए मैं कह रही थी, ‘‘मुझे कभी धोखा मत देना.’’ कमरे के कोने में एक मकड़ी अपना टूटा हुआ जाला फिर से बुन रही थी.

इस घटना को बीते कई साल हो गए हैं. इस घटना के कुछ महीने बाद राज भी पड़ोस के किराए का मकान छोड़ कर कहीं और चला गया. मैं राज से उस दिन के बाद फिर कभी नहीं मिली. लेकिन अब भी मैं जब कहीं पीला गुलाब देखती हूं, तो सिहर उठती हूं. एक बार हिम्मत कर के पीला गुलाब अपने जूड़े में लगाना चाहा था, तो मेरे हाथ बुरी तरह कांपने लगे थे.

सलमान का इकरारनामा

टैलीविजन के रिएलिटी शो ‘बिग बौस’ के फिनाले में भले ही प्रिंस नरुला ने बाजी मारी, लेकिन सलमान खान के एक डायलौग ने माहौल को इश्क की गरमी से भर दिया. हुआ यों कि ‘बिग बौस’ के फिनाले पर आदित्य राय कपूर और कैटरीना कैफ अपनी नई फिल्म ‘फितूर’ के प्रमोशन के लिए आए थे, जहां सलमान खान ने कैटरीना से कहा कि वे पूरे भारत की तरह उन के लिए पागल हैं. अब जब कैटरीना कैफ और रणबीर कपूर के ब्रेकअप की खबरें आ रही हैं, तो सलमान का कैटरीना के लिए यह पागलपन कहीं इश्क की नई इबारत तो नहीं लिख रहा है?

तीर से दौड़े नंगे वीर

हीरो वीर दास ने अपनी सैक्स कौमेडी फिल्म ‘मस्तीजादे’ के प्रोमो के लिए मुंबई की सड़कों पर नंगा हो कर दौड़ लगाई. फिल्म ‘मस्तीजादे’ के इस प्रोमो में वीर दास एक औरत के साथ उस के घर पर सैक्स कर रहे होते हैं. इसी बीच उस औरत का पति आ जाता है और वीर को बिना कपड़े पहने ही खिड़की से कूद कर भागना होता है. यह सीन मुंबई के वर्ली लिंक इलाके में शाम के साढ़े 4 बजे फिल्माया गया था.

परिणीति और पीरियड्स

पिछले कुछ समय से परिणीति चोपड़ा बड़े परदे पर नहीं दिखाई दी हैं. पर जब से उन्होंने अपना वजन घटा कर खुद को छरहरा बनाया है, तब से वे पब्लिक इवैंट में खूब दिखाई देती हैं. ऐसे ही एक कार्यक्रम में परिणीति चोपड़ा ने औरतों की माहवारी के दौरान उन पर लगाई जाने वाली रोक पर खुल कर बात की. उन्होंने कहा कि खुद वे उन खास दिनों में बंदिश महसूस करती थीं. इस दौरान उन्हें अचार छूने नहीं दिया जाता. न वे मंदिर में जा सकती थीं और न ही रसोईघर में. इतना ही नहीं, वे अपना सिर भी नहीं धो पाती थीं. परिणीति चोपड़ा का एक सवाल भी था कि उन्हें ऐसा करने से क्यों रोका जाता था? अगर है जवाब तो दीजिए.

टीचर्स पर स्टूडैंट्स की दादागीरी

उस दिन 12वीं कक्षा का गणित का पेपर था. एक इन्विजिलेटर ने एक छात्र को नकल करते रंगेहाथों पकड़ लिया. इस पर पहले तो नकलची छात्र उस इन्विजिलेटर से बहसबाजी करने लगा, फिर गुस्से में आ कर उस ने अपनी उत्तरपुस्तिका फाड़ कर फेंक दी. इस के बाद वह छात्र अपनी दादागीरी दिखाता परीक्षा कंट्रोल रूम में गया, जहां प्रिंसिपल भी मौजूद थे. उस ने संबंधित इन्विजिलेटर का गरीबान पकड़ा तथा उन के साथ बदसलूकी की. प्रिंसिपल बीचबचाव करने आए तो छात्र उन्हें धमकाता हुआ बोला, ‘‘अपने इन्विजिलेटर्स को समझा दें कि मुझ से पंगा न लें. आप जानते नहीं मैं कौन हूं. चाहूं तो एक मिनट में आप सब का ट्रांसफर करा दूं. यदि मेरा नकल प्रकरण बना कर भेजा गया, तो मैं किसी को छोडं़ूगा नहीं. उस इन्विजिलेटर को तो मैं ऐसा सबक सिखाऊंगा कि ताउम्र याद रखेगा.’’

प्रिंसिपल ने ऐसे बदतमीज छात्र के मुंह लगना उचित नहीं समझा और पुलिस को फोन कर उसे शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार करवा दिया. अगले दिन वह नकलची छात्र जमानत पर छूटने के बाद 15-20 गुंडों को ले कर स्कूल आ धमका और धमकाता हुआ बोला कि उस के खिलाफ की गई रिपोर्ट वापस ली जाए अन्यथा खैर नहीं. उस के साथ जो गुंडे आए थे उन के पास हौकी, लाठी, लोहे के सरिए आदि थे. इस प्रकार बलपूर्वक और अपना आतंक दिखा कर स्कूल प्रबंधन को रिपोर्ट वापस लेने पर मजबूर किया गया और इतना कुछ होने के बावजूद उस पर नकल प्रकरण दर्ज नहीं हुआ.

हाल में मध्य प्रदेश के एक कालेज में कतिपय छात्रों की गुंडागर्दी चरम पर पहुंच गई. बीएससी चतुर्थ वर्ष की मिडटर्म प्रायोगिक परीक्षा में कम नंबर मिलने पर छात्रों ने जम कर हंगामा किया. कुछ तो नारेबाजी करते हुए कालेज बिल्डिंग की छत पर चढ़ गए और वहां से कूदने की धमकी देने लगे. छात्रों का दबाव था कि उन के अंक बढ़ाए जाएं, जबकि डीन का कहना था कि नंबर देने में कोई लापरवाही नहीं बरती गई. एक अन्य महाविद्यालय में भी कुछ ऐसा ही हुआ. प्रिंसिपल चैंबर में प्रोफैसर्स की बैठक चल रही थी. इसी बीच छात्र नेता अपनी अनुचित मांग मनवाने हेतु नारेबाजी करने लगे. यही नहीं, उन्होंने प्रिंसिपल चैंबर को बाहर से बंद कर अपना ताला लगा दिया यानी प्रोफैसर्स और प्रिंसिपल को कमरे में बंद कर दिया. पुलिस के आने के बाद कहीं जा कर ताला खुला.

आमतौर पर देखा गया है कि कुछ छात्र अपना दबदबा बनाए रखने के लिए टीचर्स पर दादागीरी करते हैं जो गुंडागर्दी यानी मारपीट में बदल जाती है. ऐसे छात्र गुरुशिष्य के रिश्ते को तारतार कर देते हैं. आमतौर पर ऐसे दादा किस्म के छात्रों का संबंध किसी नेता, विधायक, मंत्री या बड़े आदमी से होता है. इन आकाओं से उन्हें संरक्षण प्राप्त होता है. सत्तापक्ष चाहे जिस पार्टी का हो, उस के कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी हर स्कूलकालेज में चलती है और वे अनुचित काम के लिए दबाव बनाते हैं.

ऐसे गुंडेबदमाश छात्र देश के हर स्कूलकालेज में मिल जाएंगे जो भले ही संख्या में मुट्ठी भर हों पर उन का आतंक इतना होता है कि प्रिंसिपल और टीचर्स भी उन से खौफ खाते हैं और बच कर रहना चाहते हैं. यह विडंबना ही है कि ऐसे छात्र नेता कभी विद्यार्थियों की उचित मांग या उन के अधिकारों की लड़ाई नहीं लड़ते. वे सदैव अनुचित मांगों और गैरकानूनी काम करने के लिए ही अपनी दादागीरी दिखाते हैं. कई बार स्कूल या कालेज प्रबंधन न चाह कर भी उन की बात मानने पर विवश हो जाता है, जिसे ये छात्र नेता अपनी विजय मान लेते हैं. काश, कभी ये दादा विद्यार्थियों को यह कहते कि अच्छा पढ़ो और आगे बढ़ो.

टीचर्स पर गुंडागर्दी करने वाले लड़कों की सोच नकारात्मक और विध्वंसात्मक होती है. वे तोड़फोड़ करना चाहते हैं और बात का बतंगड़ बना कर स्कूलकालेज में धरना, प्रदर्शन, हड़ताल कर उसे जंग का मैदान बना देते हैं. वे अपनी ऊर्जा कभी रचनात्मक कार्यों में नहीं लगाते, क्योंकि उन की सोच ही एकतरफा होती है. स्कूलकालेज में अपना आतंक फैलाने वाले इन छात्रों का कैरियर चौपट हो सकता है. उन का ध्यान पढ़ाईलिखाई में तो होता नहीं, वे तो केवल गुंडागर्दी करते हैं. स्कूलकालेज छोड़ने के बाद जब ऐसे छात्रों को वास्तविक जिंदगी से रूबरू होना पड़ता है और किसी मोड़ पर सेर को सवा सेर मिल जाता है तो ऐसे छात्र अपनी सारी दादागीरी भूल जाते हैं.

दादा टाइप लड़कों को भी सही दिशा में मोड़ा जा सकता है. इस के लिए उन के पेरैंट्स से भी बात की जा सकती है. ऐसे छात्रों को स्कूलकालेज में अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. पैदाइशी कोई गुंडा या अच्छा नहीं होता. उसे गुंडाबदमाश परवरिश या माहौल बनाता है. ऐसे छात्रों का मनोविज्ञान समझने की जरूरत है. तदनुसार उन के साथ व्यवहार करने की जरूरत है. ऐसा नहीं है कि ये बिगड़ैल छात्र लाइन पर नहीं आ सकते. लेकिन इस के लिए टीचर्स को बुद्धिमानी व धैर्य से काम लेना चाहिए, न कि सबक सिखाने या बदले की भावना से उन का भविष्य बिगाड़ना चाहिए. जिस दिन गुंडागर्दी वाले छात्र को इस सच का पता लगेगा कि टीचर्स उस के दुश्मन नहीं, शुभचिंतक और भविष्य निर्माता हैं, वह उन के आगे नतमस्तक हो जाएगा.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें