उस दिन 12वीं कक्षा का गणित का पेपर था. एक इन्विजिलेटर ने एक छात्र को नकल करते रंगेहाथों पकड़ लिया. इस पर पहले तो नकलची छात्र उस इन्विजिलेटर से बहसबाजी करने लगा, फिर गुस्से में आ कर उस ने अपनी उत्तरपुस्तिका फाड़ कर फेंक दी. इस के बाद वह छात्र अपनी दादागीरी दिखाता परीक्षा कंट्रोल रूम में गया, जहां प्रिंसिपल भी मौजूद थे. उस ने संबंधित इन्विजिलेटर का गरीबान पकड़ा तथा उन के साथ बदसलूकी की. प्रिंसिपल बीचबचाव करने आए तो छात्र उन्हें धमकाता हुआ बोला, ‘‘अपने इन्विजिलेटर्स को समझा दें कि मुझ से पंगा न लें. आप जानते नहीं मैं कौन हूं. चाहूं तो एक मिनट में आप सब का ट्रांसफर करा दूं. यदि मेरा नकल प्रकरण बना कर भेजा गया, तो मैं किसी को छोडं़ूगा नहीं. उस इन्विजिलेटर को तो मैं ऐसा सबक सिखाऊंगा कि ताउम्र याद रखेगा.’’

प्रिंसिपल ने ऐसे बदतमीज छात्र के मुंह लगना उचित नहीं समझा और पुलिस को फोन कर उसे शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार करवा दिया. अगले दिन वह नकलची छात्र जमानत पर छूटने के बाद 15-20 गुंडों को ले कर स्कूल आ धमका और धमकाता हुआ बोला कि उस के खिलाफ की गई रिपोर्ट वापस ली जाए अन्यथा खैर नहीं. उस के साथ जो गुंडे आए थे उन के पास हौकी, लाठी, लोहे के सरिए आदि थे. इस प्रकार बलपूर्वक और अपना आतंक दिखा कर स्कूल प्रबंधन को रिपोर्ट वापस लेने पर मजबूर किया गया और इतना कुछ होने के बावजूद उस पर नकल प्रकरण दर्ज नहीं हुआ.

हाल में मध्य प्रदेश के एक कालेज में कतिपय छात्रों की गुंडागर्दी चरम पर पहुंच गई. बीएससी चतुर्थ वर्ष की मिडटर्म प्रायोगिक परीक्षा में कम नंबर मिलने पर छात्रों ने जम कर हंगामा किया. कुछ तो नारेबाजी करते हुए कालेज बिल्डिंग की छत पर चढ़ गए और वहां से कूदने की धमकी देने लगे. छात्रों का दबाव था कि उन के अंक बढ़ाए जाएं, जबकि डीन का कहना था कि नंबर देने में कोई लापरवाही नहीं बरती गई. एक अन्य महाविद्यालय में भी कुछ ऐसा ही हुआ. प्रिंसिपल चैंबर में प्रोफैसर्स की बैठक चल रही थी. इसी बीच छात्र नेता अपनी अनुचित मांग मनवाने हेतु नारेबाजी करने लगे. यही नहीं, उन्होंने प्रिंसिपल चैंबर को बाहर से बंद कर अपना ताला लगा दिया यानी प्रोफैसर्स और प्रिंसिपल को कमरे में बंद कर दिया. पुलिस के आने के बाद कहीं जा कर ताला खुला.

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