चीनी का चकल्लस तो साल भर चलता ही रहता है. किसान भुगतान की मांग करते हैं और चीनी मिलें टालू मिक्सचर मिलाती रहती हैं. ऐसे में सरकार भी हाथापांव मारती नजर आती है. इन सब गतिविधियों के बीच अच्छी बात यह कही जा सकती है कि चीनी के कुल उत्पादन में गिरावट होने के अंदाजे के बावजूद चालू सीजन में उत्पादन में इजाफा जारी है. इंडियन शुगरमिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के मुताबिक 31 दिसंबर 2015 तक चीनी के उत्पादन में साल 2014 के 31 दिसंबर तक हुए उत्पादन के मुकाबले 6.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पिछले अक्तूबर, नवंबर व दिसंबर के दौरान चीनी का उत्पादन 75 लाख टन हुआ, जबकि इस साल गन्ने की पेराई ने वाली मिलों की कुल तादाद बीते साल के मुकाबले बेहद कम रही है. इस्मा का अंदाजा है कि इस साल चीनी का उत्पादन 2.7 करोड़ टन तक पहुंच सकता है. गौरतलब है कि पिछले साल चीनी का उत्पादन 2.8 करोड़ टन हुआ था.

इस्मा के आंकड़ों के मुताबिक 31 दिसंबर 2015 तक देश भर में कुल 470 चीनी मिलों में पेराई शुरू हो चुकी थी, जबकि 31 दिसंबर 2014 तक 490 चीनीमिलों में पेराई बाकायदा शुरू हो चुकी थी. बहरहाल, फिलहाल तो चीनीमिलों का काम बिल्कुल चौकस ही कहा जा सकता है.

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