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क्या करें, मन ही तो है

कालेज हो या कोई अन्य जगह, जहां चार हमउम्र युवकयुवतियों में मित्रता होती है, वहीं कुछ साथी एकदूसरे को अपना दिल भी दे बैठते हैं. इस का कारण है उन का एकदूसरे के प्रति आकर्षण, क्योंकि युवावस्था आते ही युवकयुवतियों में शारीरिक व मानसिक कई तरह के बदलाव आते हैं. साथ ही विपरीत लिंगी के प्रति उन में आकर्षण भी पैदा होने लगता है. आखिर मन ही तो है, यह किसी के बस में नहीं होता.

युवावस्था भटकने वाली अवस्था होती है. इस में युवाओं को सही राह दिखाना अति आवश्यक होता है. प्रेम के चक्कर में पड़ कर वे अपना भविष्य खराब कर बैठते हैं.

स्नेहा आज बहुत उदास थी. जब उस के घर के सदस्यों ने उस की उदासी का कारण पूछा तो उस ने बताया कि उस का मित्र सुरेश अब उस से बोलता तक नहीं है. वह उस की सहेली का मित्र बन गया है. लेकिन वह मुझे बहुत अच्छा लगता है. अब मैं क्या करूं?

युवकयुवतियों का आपस में दोस्त होना तथा एकदूसरे के प्रति आकर्षित होना आम बात है. युवावस्था में युवकयुवतियों के मन में रंगीन सपने होते हैं, ऐसे में यदि उन्हें सही राह न मिले तो वे भटक जाते हैं और गलत राह अपना लेते हैं. उन का मन बस में नहीं रहता. वे खोएखोए से रहने लगते हैं. वे अपने साथी के साथ हर समय रहना चाहते हैं. यदि कोई उन्हें रोकता है, तो उन्हें बहुत बुरा लगता है. ऐसे में वे अपने दिमाग से नहीं बल्कि मन के अनुसार चलते हैं. ऐसी परिस्थिति में चाहे युवक हो अथवा युवती दोनों का हाल बुरा होता है. आखिर वे क्या करें? इन परिस्थितियों में उन्हें दुलार की आवश्यकता होती है. मातापिता अथवा घर का कोई सदस्य ही सही ढंग से समझा कर उन्हें सही राह दिखा सकता है.

शानू के सहपाठी ने एक दिन कहा कि तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो, क्या तुम मेरी दोस्त बनना पसंद करोगी? शानू ने भी उसे हां कर दी, क्योंकि शानू को भी उस से दोस्ती करने का मन था. मन यदि कुछ कहे, तो वह काम स्वत: हो जाता है. मन के अनुसार यदि अच्छे दोस्त बन जाएं तो समझो सही मंजिल मिल गई. यदि मन नहीं है, तो वह कार्य भी व्यक्तिविशेष नहीं कर सकता है.

युवा मन तो बहुत चंचल होता है, इसलिए वह अच्छाबुरा कम ही सोच पाता है. युवाओं में बहुत उत्साह होता है, किसी भी कार्य को करने का, नएनए दोस्त बनाने का व दोस्तों के साथ घूमने का. कहने का तात्पर्य यह है कि युवाओं का मन जो चाहे वह करता है. बस, उन को कोई रोकेटोके नहीं. चाहे वे गलत हों या सही.

रोकने पर वे विरोधी स्वभाव के बन जाते हैं, लेकिन यदि उन्हें प्यार से समझा कर गलतसही का एहसास कराया जाए तो वे सही राह पर चलेंगे और उन का मन सही कार्यों को करने का करेगा. फिर वे सहीगलत का निर्णय लेते हुए सही मंजिल की तरफ बढ़ेंगे और न यह कह सकेंगे कि मन नहीं होता बस में.

होस्टल में वृद्धाओं संग युवतियां

हर शहर में कामकाजी या स्टूडैंट युवतियों के लिए होस्टल्स की मांग बढ़ रही है. गांवों या दूसरे शहरों से आने वाली युवतियों को सुरक्षित छत के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं और पैसे से ज्यादा व्यावहारिक कठिनाइयां झेलनी पड़ती हैं. जो लोग इन्हें मकान किराए पर देते हैं उन्हें डर लगा रहता है कि युवतियां उन पर यौन शोषण का आरोप न लगा दें या फिर वास्तव में वहां वेश्यावृत्ति जैसे मामले होने लगें.

इस समस्या से छुटकारा आसान है. युवतियों के होस्टल्स में 20 फीसदी जगह वृद्ध महिलाओं के लिए सुरक्षित होने लगे जो एकमुश्त पैसा जमा कर लंबे समय तक रहने का हक पा सकें. होस्टल का निर्माण ही ऐसा हो कि युवतियों के टू टीयर, थ्री टीयर कमरों के साथ थोड़े बड़े स्टूडियो कमरे जिन में किचनपैंट्री का इंतजाम भी हो, बनें, जिन में वृद्ध महिलाएं रह सकें.

ये वृद्ध महिलाएं जानेअनजाने उन युवतियों की हमदर्द बन जाएंगी, कुछ की दादीमां बन जाएंगी और उन्हें सुरक्षा भी देंगी और अपने लिए भी सुरक्षा पाएंगी. वृद्ध महिलाओं के लिए वृद्धाश्रम का कौंसैप्ट ही खराब है. यह जेल सा लगता है, जो छवि सामने आती है, वह बेचारी बीमार, अशक्त महिलाओं के समूह की आती है जो वृंदावन की विधवाओं की याद दिलाती है. उधर युवतियां अपने घरों से दूर किसी ऐसे का सहारा चाहती हैं जिस से सलाह ले सकें, जिस के साथ अपने दुख शेयर कर सकें. मिश्रित ग्रुप होने के कारण छेड़खानी भी नहीं होगी और होस्टल पूरे साल चलते रहेंगे. कुछ मामलों में तो होस्टल का पूरा प्रबंध अनुभवी और युवा मिल कर खुद चला लेंगे.

सरकार से अपेक्षा करना बेकार है. अगर सरकार मुफ्त पानी, गृहकर से, भारी लाइसैंसों से मुक्ति दे दे तो ही काफी है, आज सरकार से कुछ मांगने जाना अपना मखौल उड़वाना है, क्योंकि सरकारी अफसर तो कफन से भी हिस्सा ले लें और मुरदे को जलाने या दफनाने की अनुमति देने में 2 साल लगा दें. यह समस्या आम समाज की है और समाज को ही निबटानी होगी.

आखिर रिचा क्यों पहुंची स्वर्ण मंदिर…?

मूलतः अमृतसर निवासी अदाकारा रिचा चड्ढा का इन दिनों धार्मिक स्थलों के प्रति कुछ ज्यादा ही लगाव नजर आ रहा है. सूत्रों की माने तो जब वह अमृतसर रहा करती थी, तब वह अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में माथा टेकने नहीं गयी. लेकिन ‘‘गैंग आफ वासेपुर’’ व ‘‘मसान’’ जैसी फिल्मों में अभिनय कर कान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल सहित कई फिल्म समारोहों में शिरकत करने के बाद रिचा चड्ढा का धार्मिक स्थलों के प्रति कुछ ज्यादा ही रूझान हो गया है. इन दिनों वह अमृतसर में फिल्म ‘‘सरबजीत’’ की शूटिंग कर रही हैं और शूटिंग बीच में ही छोड़कर एक दिन वह स्वर्ण मंदिर में मत्था टेकने पहुंच गयीं तथा वहां पर लंगर का हिस्सा बनकर भोजन भी किया.

सूत्रों की माने तो जब से रिचा चड्ढा को ऐश्वर्या राय बच्चन के साथ फिल्म ‘‘सरबजीत’’ करने का अवसर मिला है, तब से वह कुछ ज्यादा ही चिंतिंत हैं. रिचा चड्ढा के नजदीकी सूत्रों के सूत्रों के अनुसार रिचा चड्ढा चाहती हैं कि फिल्म ‘सरबजीत’ में ऐश्वर्या राय से ज्यादा उनके अभिनय की तारीफ हो. इसीलिए वह हर धार्मिक स्थाल का चक्कर लगा रही हैं. मगर खुद रिचा चड्ढा कहती हैं-‘‘मैं पहली बार स्वर्ण मंदिर में मत्था टेकने पहुंची और मुझे बहुत ही ज्यादा रहस्यमय व सुखद अनुभव हुए.

इस अनुभव को शब्दों में बयां करना मुश्किल है. इस तरह के अनुभव मुझे पहली बार नही हुए. बल्कि मैं जब भी किसी धार्मिक स्थल पर गयी हॅूं, तो मुझे सुखद व रहस्यमय अनुभव हुए हैं. मैं अपने आपको धन्य मानती हूं कि मुझे स्वर्ण मंदिर में कुछ समय बिना किसी तरह की बंदिश के बिताने का मौका मिला. स्वर्ण मंदिर ही क्यों किसी भी धार्मिक स्थल पर जाने के पीछे मेरी कोई वजह नहीं होती है. मैं किसी से प्रतिस्पर्धा नहीं करती हूं. मैं तो सिर्फ अपने हिस्से के काम को बेहतर तरीके से अंजाम देने का प्रयास करती हूं. मैं एक धार्मिक इंसान हूं और ईश्वर की आराधना करने से मुझे सकून मिलता है.’

अब आ रहा है 5जी, 5 सेकेंड में डाउनलोड होगी फिल्म

इंटरनेट पर सबसे परेशानी वाला वक्त वो होता है, जब हम कोई वीडियो डाउनलोड कर रहे हों और इंटरनेट की स्पीड कम होने की वजह से वह वीडियो डाउनलोड होने में बहुत ज़्यादा वक्त लगता है. 3जी मोबाइल इंटरनेट और तेज़ ब्रॉडबैंड कनेक्शन आने से पहले तो मूवी डाउनलोड करना कुछ मिनटों नहीं, बल्कि घंटों का काम हुआ करता था. ऐसे में यह जानना एक बड़ी हैरानी का विषय हो सकता है कि 5जी से पूरी मूवी सिर्फ 5 सेकेंड्स में ही डाउनलोड हो जाएगी.

मौजूदा तेज मोबाइल इंटरनेट स्पीड से होगी 100 गुना तेज
जी हां, आपने बिल्कुल ठीक पढ़ा है. नई टेक्नोलॉजी, जिस पर फिलहाल काम चल रहा है, यह संभव बना देगी कि आपको वर्तमान में मिल रही इंटरनेट स्पीड से 100 गुना ज़्यादा तेज़ डाउनलोड स्पीड मिले. दरअसल एक्सपर्ट्स 5जी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं, जिससे आप पूरी मूवी को अविश्वसनीय लगने वाली स्पीड पर केवल 5 सेकेंड में ही डाउनलोड कर सकेंगे. अभी हम जो इंटरनेट स्पीड यूज़ कर रहे हैं, यह स्पीड उससे 100 गुना ज़्यादा तेज़ होगी.

यूनिवर्सिटी ऑफ सर्रे में नई तकनीक पर काम जारी
इसके लिए नेटवर्क को पहले से तेज़ बनाने की योजना बनाई गई है, जिससे यूज़र्स आसानी से, बिना किसी बफरिंग के वीडियो देख सकेंगे और बहुत ही तेज़ गति से उन्हें डाउनलोड भो कर सकेंगे. दुनिया भर के रिसर्चर्स इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ सर्रे में इस नई तकनीक पर काम में जुटे हुए हैं. सैमसंग और फुजिट्सू जैसी दुनिया की बड़ी टेकनोलॉजी कंपनियां भी ऐसी मोबाइल इंटरनेट तकनीक की खोज में सहयोग कर रहे हैं, जो अभी मौजूद किसी भी इंटरनेट स्पीड से कहीं ज़्यादा तेज़ हो.

2018 तक यूज़र्स के पास पहुंच सकती है 5जी इंटरनेट सर्विस
बताया जाता है कि 2018 तक वायरलेस 5जी यूज़र्स के लिए बाज़ार में उतरी जाएगी और उसकी स्पीड 4जी की एडवांस टेकनोलॉजी से भी ज़्यादा तेज़ होगी. 5जी फोन्स के शुरुआती प्रोटोटाइप्स पर इंटरनेट की गति 3.77 जीबी प्रति सेकेंड दर्ज की गई है, जो कि गूगल फाइबर नेटवर्क से 300 गुना ज़्यादा तेज़ है और आज की सबसे तेज़ मोबाइल इंटरनेट 4जी से भी 

25 की उम्र में इस तरह बनिए फाइनेंशियली स्मार्ट

इंजीनियरिंग कॉलेज से पास आउट होते ही 23 साल की उम्र में ही कार्तिक को बैंगलुरू की आईटी कंपनी में नौकरी मिल गई थी. कार्तिक का पैकेज काफी बढि़या था. नौकरी लगते ही उसकी लाइफस्‍टाइल ही बदल गई. लेकिन नौकरी लगने के साल भर के भीतर ही उसकी यूएस बेस्‍ड कंपनी बंद हो गई. कार्तिक जॉब लैस हो गया, लाइफस्‍टाइल पर खर्च तो क्‍या उसे अपने जरूरी खर्च के लिए पैसे भी अपने पैरेंट्स से मांगने पड़े.

नौकरी करते वक्‍त उसे लगता था कि अब कभी भी घर वालों से पैसे नहीं मांगने पड़ेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. कार्तिक ने इस बारे में काफी सोचा. अंत में जाकर उसे कुछ ऐसी बातों का अहसास हुआ कि वह कहां गलत जा रहा था. आज हम आपको बताते हैं कि किस तरह 25 की उम्र में आप स्‍मार्ट तरीके से इंवेस्‍टमेंट कर सिक्‍योर हो सकते हैं.

70 फीसदी का रूल फॉलो करना
एक अच्छी वेल टू डू फैमली में परवरिश होने की वजह से कभी कार्तिक को खर्चों की दिक्कत नहीं हुई. लेकिन बड़े शहर में नौकरी करने के बाद उसे इस बात का पता चला कि उसकी सैलरी से केवल रोजमर्रा के खर्चे ही हो पा रहे थे. उसके बाद कार्तिक ने नौकरी छोड़ी तो पता चला कि अगर वह अपनी सैलरी का 70 फीसदी खर्च करता और अपने बेफिजूल खर्चों पर लगाम लगाता. तो जरूरत के दिनों में उसके पास एक अच्छी खासी सेविंग्स होती. नौकरी के शुरुआती दिनों में आप पर जिम्‍मेदारियां कम होती हैं. ऐसे में आप आसानी से 30 फीसदी सैलरी को बचा सकते हैं.

इमरजेंसी फंड का निर्माण करना
शुरुआती वर्षों में पार्टी और मूवीज में अनावश्यक खर्चे के कारण कभी भी बचत नहीं कर पाया. इन सब के बाद उसे समझ आया कि हर महीने अपनी सैलरी का 20 फीसदी से 30 फीसदी तक की सेविंग करनी चाहिए. यदि आप भी अपनी सेविंग्‍स का एक हिस्‍सा इमरजेंसी फंड के रूप में बचाते हैं तो नौकरी जाने जैसी स्थिति में आपको परेशान होने की जरूरत नहीं होती.

सामान्‍य मामलों में आपकी करीब 6 महीने की सैलरी के बराबर आपके पास इमर्जेंसी फंड होना चाहिए. इमर्जेंसी फंड होने के चलते आप अपने लंबे समय के लक्ष्यों पर फोकस कर सकते हैं. साथ ही होम लोन लेने या फिर बड़े खर्चों के लिए भी आपके पास कॉर्पस इकट्ठा हो जाता है.

बिना सोचे समझे बड़ी राशि से खरीदारी न करें
ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते चलन से खुद को उनकी आकर्षक डील्स में फंसने से रोक पाना थोड़ा मुश्किल है. लेकिन खरीदारी से पहले कार्तिक ने इस पर और विचार किया और सोचा कि ये सब वे खर्चे हैं जिसकी कोई खास जरूरत नहीं है. 50 फीसदी डिस्काउंट देखते ही लोग अक्सर अपनी सेविंग्स के लिए जुटाई गई राशि खर्च कर देते हैं. यदि आप भी ऐसा करते हैं, तो अपने को रोकें, आपकी आज की बचत ही आपको लंबे समय के लिए फाइनेंशियली सिक्‍योर बनाते हैं. इसलिए जरूरी है कि अपनी मंथली सैलरी आने के 3 से 5 दिनों के भीतर ही आवश्‍यक निवेश जैसे एसआईपी में इंवेस्‍ट कर दें.

अपने क्रेडिट कार्ड के बिलों का समय पर भुगतान करना
कार्तिक को जब उसका पहला क्रेडिक कार्ड मिला तो यह सोचकर बहुत खुश हुआ कि अब उसे अपने माता पिता पर आर्थिक रूप से निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. वह जब चाहे शॉपिंग कर सकता है. ऐसे में कई बार उसने अपनी लिमिट भी एक्सीड कर दी. जिसके वजह से उसके पिता को उसके एकाउंट में पैसे ट्रांस्फर करने पड़ गए. तब जाकर उसे अहसास हुआ कि क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल सोच समझकर करना चाहिए. इससे वह बेफिजूल के खर्चों से बच सकेगा.

सिर्फ सेविंग्स ही नहीं निवेश भी जरूरी है
जब तक कार्तिक सीनियर एग्जेक्यूटिव बना तब तक उसकी अच्ची खासी सेविंग्स इकट्ठी हो गई थी. उस उसे समझ आय़ा कि कि पैसों को बढ़ाने के लिए सेविंग्स ही काफी नहीं है. समय के साथ-साथ महंगाई की वजह से पैसों की वैल्यु कम होती जाती है. सरल भाषा में 5 फीसदी का कंज्यूमर प्राइज इंडेक्स रेट (यानि कि जनवरी में सीपीआई 5.69 फीसदी था), तो साल की शुरुआत के 100 रुपए की कीमत साल के अंत तक 95 फीसदी रह जाती है. इसलिए आप चाहे एफडी में निवेश करें या म्युचुअल फंड्स में आपका लक्ष्य महंगाई को मात देने वाले रिटर्न्स पर होना चाहिए.

पत्रलेखा किसे और क्यों मानती हैं अपना गुरू

हंसल मेहता निर्देशित फिल्म ‘‘सिटी लाइट्स’’ से चर्चा में आयी अभिनेत्री पत्रलेखा इन दिनों विक्रम भट्ट निर्देशित फिल्म ‘‘लव गेम्स’’ को लेकर चर्चा में है. मगर पत्रलेखा के इस दावे से लोग हैरान हैं कि वह फिल्मकार हंसल मेहता को अपना गुरू मानती हैं. लोगों के हैरान होने की कई वजहे हैं.

फिल्म ‘‘सिटी लाइट्स’’ में राजकुमार राव के पत्रलेखा, पति पत्नी के किरदार में थे. इस फिल्म में राज कुमार राव व पत्रलेखा के इंटीमेंट दृश्यों की भी काफी चर्चा हुई थी. इन दृश्यों को करने में पत्रलेखा शायद इसलिए सहज रहीं थीं, क्योंकि निजी जिंदगी में पत्रलेखा, राज कुमार राव के साथ डेटिंग कर रही हैं. राज कुमार राव अपने आप में बेहतरीन अभिनेता हैं और वह हंसल मेहता के निर्देषशन में ‘‘सिटी लाइट्स’’ के अलावा ‘‘शाहिद’’ और ‘‘अलीगढ़’’ सहित तीन फिल्में कर चुके हैं.

इतना ही नहीं ‘‘सिटी लाइट्स’’ और ‘‘लव गेम्स’’ इन दोनों फिल्मों के निर्देशक अलग अलग हैं, मगर इन दोनों ही फिल्मों का निर्माण महेश भट्ट कैंप यानी कि ‘‘विशेष फिल्मस’’ के बैनर तले हुआ है.

ऐसे में पत्रलेखा महेष भट्ट का जिक्र करने की बजाय सिर्फ हंसल मेहता के गुण गा रही हैं. यह बात बौलीवुड में किसी को भी हजम नहीं हो रही है. पर पत्रलेखा कहती हैं-‘‘अब तक मैंने सिनेमा और अभिनय के बारे में जो कुछ सीखा, वह सब हंसल मेहता से ही सीखा है. इसलिए मैं हंसल मेहता को अपना गुरू मानती हूं. उनके निर्देशन में फिल्म ‘सिटी लाइट्स’ में अभिनय करना स्कूल की पढ़ाई करने जैसा ही था. जब मेरे पास किसी नई फिल्म का आफर आता है,तो उस फिल्म को साइन करने से पहले मैं हंसल मेहता जी से एक बार राय जरुर लेती हूं.’’

अंडर वाटर फाइटिंग में व्यस्त हैं राणा डग्गूबटी

वीएफएक्स के क्षेत्र में नाम कमाने के बाद अभिनय की तरफ मुड़े राणा डग्गूबटी अब तक दक्षिण भारतीय फिल्मों के अलावा हिंदी फिल्मों में भी अभिनय कर चुके हैं. इन दिनों वह 1971 युद्ध के समय विशाखापट्टनम के पास डूबे पाकिस्तानी जलयान ‘‘पीएनएस गाजी‘‘ की अनकही कहानी और भारतीय जल सेना यानी कि नेवी पर आधारित फिल्म ‘‘गाजी’’ में एक नेवी अफसर का किरदार निभा रहे हैं.

यह फिल्म हिंदी के अलावा तमिल व तेलगू में एक साथ बन रही है. यह भारत की पहली सब मरीन पर आधारित युद्ध फिल्म है. सूत्रों के अनुसार पिछले एक माह से इस फिल्म की शूटिंग करते हुए राणा डग्गूबटी अंडर वाटर युद्ध के दृश्यों की शूटिंग कर रहे हैं.राणा डग्गूबटी के लिए अंडर वाटर युद्ध के दृश्यों की शूटिंग करना आसान हो रहा है, क्योंकि वह प्रशिक्षित स्कूबा डायवर हैं.

इस फिल्म की चर्चा चलने पर राणा डग्गूबटी कहते हैं-‘‘इस फिल्म के लिए निर्देशक के साथ मिलकर काफी रिसर्च करने के बाद हमने तीन जनवरी 2016 से फिल्म की शूटिंग करनी शुरू की थी. हैदराबाद के विशाल स्वीमिंग पुल में हमने दो जलयान तैयार किए. मैं प्रशिक्षित स्कूबा डायवर हूं. मगर पिछले चार साल से मैने स्कूबा डायविंग नहीं की थी. मगर इस फिल्म की शूटिंग के लिए मुझे सुबह छह बजे से रात दो बजे तक पानी के नीचे ही रहना पड़ता था. यह बहुत कठिन व कष्टदायी था, मगर मैंने किरदार के साथ न्याय करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी. अब मैने 12 दिन का ब्रेक लिया है और पुनः 10 मार्च से शूटिंग शुरू करूंगा. हमें इस तरह की फिल्मों के लिए कठिन मेहनत करनी ही पड़ती है. इससे पहले मैने फिल्म ‘बाहुबली’ के लिए भी 120 दिनों तक कठिन युद्ध दृश्य फिल्माए ही थे. मैंने ‘बाहुबली’ के लिए वजन बढ़ाया था, जबकि फिल्म ‘गाजी’ के लिए मुझे अपना वजन कम करना पड़ा है. फिलहाल हम ‘गाजी’ को हिंदी और तेलगू भाषाओं में फिल्मा रहे हैं, जिसे बाद में हम तमिल भाषा में डब करेंगे. मैने रिसर्च के दौरान कुछ ऐसे नेवी अफसरों से बात की, जो कि उस वक्त आईएनएस विक्रांत पर कार्यरत थे.’’

अमृता राव को अब छोटे परदे का सहारा

‘‘अब के बरस’’, ‘‘विवाह’’, ‘‘इश्क विश्क’’, ‘‘मैं हूं ना’’, ‘लव यू मिस्टर कलाकार’’ जैसी दो दर्जन भर फिल्मों में अभिनय कर चुकी फिल्म अभिनेत्री अमृता राव ने अब अपनी छोटी बहन प्रीतिका राव के पदचिन्हो पर चलते हुए छोटे परदे की शरणागति स्वीकार कर ली है. वास्तव में 2011 के बाद से अमृता राव घर पर खाली बैठी हुई थी. पिछले पांच साल के अंतराल में उन्हे एक भी फिल्म का आफर नहीं मिला. परिणामतः उन्हें खालीपन खाए जा रहा था. इस खालीपन से उबरने के लिए ही अब अमृता राव ने अपनी छोटी बहन प्रीतिका राव की तरह टीवी पर काम करना स्वीकार कर लिया है.

वह बहुत जल्द ‘एंड टीवी’ पर प्रसारित होने वाले सीरियल ‘‘मेरी आवाज ही पहचान है’’ में अभिनय करते हुए नजर आने वाली हैं. यानी कि अब उनकी प्रतिस्पर्धा उनकी अपनी छोटी बहन के संग होने वाली है. मगर अमृता राव ऐसा नही मानती हैं. वह कहती हैं-‘‘यह सच है कि मैं टीवी पर काम कर रही हूं. पर मेरी बहन प्रीतिका से मेरी कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है. मैने तो उसे काम करते हुए देखकर बहुत कुछ सीखा है. वह अक्सर कहती थी कि उसके सीरियल का एक एपीसोड मेरी एक फिल्म के बराबर है. अब मैं भी उसी अनुभव से गुजरने वाली हूं. मैं फिल्मों में अभिनय करते हुए भी किसी से प्रतिस्पर्धा नहीं करती थी, तो फिर अब बहन के संग कैसी प्रतिस्पर्धा..? मुझे तो उससे मदद मिल रही है.’’

हास्य अभिनेता असरानी पहली बार भावुक किरदार में

पिछले पचास दशकों से अभिनय करते आ रहे असरानी हास्य व ह्यूमरस किरदारों के पर्याय सा बने हुए हैं. मगर पचास साल बाद पहली बार वह निर्देशक सुजाद इकबाल खान की फिल्म ‘‘मुरारी:द मैड जेंटलमैन’’ में एक अति भावुक किरदार में नजर आने वाले हैं. असरानी का दावा है कि इस फिल्म में वह खुद रोए हैं और फिल्म देखते हुए दर्शक भी रोएंगे. इससे अधिक वह इस फिल्म को लेकर बात नहीं करना चाहते.

क्या मोनी राय और मोहित रैना ने की सगाई…?

टीवी इंडस्ट्री में चर्चाएं गर्म है कि अभिनेत्री मोनी राय ने अपने प्रेमी व अभिनेता मोहित रैना के साथ सगाई कर ली है. वास्तव में इन दिनों सीरियल ‘‘नागिन’’ में अभिनय कर रही मोनी राय की रिंग फिंगर में एक अंगूठी नजर आ रही है, जिससे यह चर्चा गर्म हुई है कि मोनी राय ने अपने प्रेमी मोहित रैना के संग सगाई कर ली है.

सूत्र दावा करते हैं कि फिलहाल मोहित रैना के पास कोई काम नही है, इसलिए सगाई की खबर को छिपाया जा रहा है. सूत्रों की माने तो सीरियल ‘‘महादेव’’ के सेट पर ही मोहित रैना और मोनी राय के बीच प्रेम परवान चढ़ा था. तब से यह दोनो डेटिंग करते आ रहे हैं. यही वजह है कि इनकी सगाई की खबरों पर लोग आसानी से यकीन कर रहे हैं. मगर इस बारे में मोनी राय और मोहित रैना ने चुप्पी साध रखी है.

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