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काबिल यामी और रितिक

फिल्म ‘सनम रे’ की रिलीज के बाद ही यामी गौतम ने एक जोरदार घोषणा करते हुए रितिक के साथ फिल्म ‘काबिल’ में अभिनय करने का खुलासा किया. पहली बार किसी सुपरस्टार के साथ काम कर रही यामी बहुत ही उत्साहित हैं. वे ट्विटर पर लिखती हैं, ‘‘इस सफर पर जाने के लिए मैं और इंतजार नहीं कर सकती. आप के साथ काम करने के लिए मैं काफी उत्सुक हूं.’’

संजय गुप्ता द्वारा निर्देशित होने वाली इस फिल्म का निर्माण राकेश रोशन कर रहे हैं. हालांकि संजय गुप्ता फिल्म में सहनिर्माता की भी भूमिका में है. गौरतलब है कि अब तक यामी फिल्म ऐक्शन जैक्शन, बदलापुर में छोटे किरदारों में ही नजर आई हैं. ऐसे में रितिक के अपोजिट काम पा कर उन का उत्साहित होना बनता भी है.

प्रयोगधर्मी ऋषि कपूर

बतौर कलाकार ऋषि कपूर इन दिनों खासे प्रयोगों से गुजर रहे हैं. सालोंसाल रोमांटिक हीरो की छवि में कैद रहे कपूर अब ‘अग्निपथ’ जैसी फिल्म में खूंखार विलेन का रोल करते हैं तो करन जौहर की फिल्म ‘स्टूडैंट औफ द इयर’ में गे प्रिंसिपल का भी किरदार निभा चुके हैं.

आगामी फिल्म ‘कपूर ऐंड संस’ में कपूर 90 साल के बुजुर्ग का किरदार कर रहे हैं. 63 साल के कपूर को यह किरदार इतना चुनौतीपूर्ण लगा कि इस के लिए वे घंटों बैठ कर मेकअप भी करवाने को राजी हो गए.

बताया जा रहा है कि करन जौहर बतौर निर्माता ऋषि कपूर के लुक पर विदेशी टीम को लाए थे. इसलिए उन का यह लुक बनाने में करीब डेढ़ करोड़ रुपए खर्च हो गए. गौरतलब है कि इस फिल्म में ऋषि के अलावा सिद्धार्थ कपूर, आलिया भट्ट और फवाद खान अहम किरदारों में हैं.

‘अलीगढ़’ की मुश्किलें

मनोज बाजपेयी निर्माण के क्षेत्र में उतर कर फिल्म ‘अलीगढ़’ का निर्माण कर चुके हैं. समस्या यह है कि फिल्म को सैंसर से ‘ए’ सर्टिफिकेट मिला है जबकि निर्देशक हंसल मेहता का मानना है कि फिल्म को यूए सर्टिफिकेट मिलना चाहिए था. हंसल सैंसर बोर्ड के इस निर्णय से बेहद खफा हैं. वे कानूनी लड़ाई तक लड़ने को तैयार हैं. हालांकि मनोज बाजपेयी बतौर निर्माता कभी नहीं चाहेंगे कि उन की फिल्म रिलीज से पहले ही कानूनी पचड़ों में फंसे लेकिन वे बेचारे क्या करें, निर्देशक की तो उन्हें माननी ही पड़ेगी क्योंकि फिल्म के निर्देशन का जिम्मा मनोज ने ही हंसल मेहता को सौंपा था.

नाना की पहल

अभिनेता नाना पाटेकर अपनी बेबाक राय और गंभीर अभिनय के लिए जाने जाते हैं. महाराष्ट्र में आत्महत्या कर चुके किसानों की मदद करते हैं. इस काम के लिए उन्होंने ‘नाम फाउंडेशन’ नामक संस्था भी बनाई है. महाराष्ट्र के कोंकण में बीते दिनों एक शैक्षिक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि उन्हें धर्म और जाति जैसी चीजों पर बिलकुल यकीन नहीं है. लिहाजा, सभी आवेदन पत्रों पर मौजूद इस कौलम को हटा देना चाहिए. नाना पाटेकर की तरह अगर अन्य चर्चित अभिनेता भी जातिधर्म से बाहर निकलने का आग्रह करेंगे तो लोगों में सार्थक संदेश जाएगा.

सबक लेने की जरूरत

टी-20 सीरीज में टीम इंडिया श्रीलंका को हरा कर जहां नंबर वन की पोजीशन पर पहुंच गई वहीं भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को अंडर 19 वर्ल्ड कप के फाइनल में हमारी जूनियर टीम के हारने से निराश होना पड़ा.

वेस्टइंडीज के युवा खिलाडि़यों ने भारत को 5 विकेट से हरा कर अंडर 19 वर्ल्ड कप 2016 का खिताब अपने नाम कर लिया. भले ही जूनियर टीम वेस्टइंडीज से हार गई पर कई खिलाडि़यों ने अपने परफौर्मेंस से एक अच्छे भविष्य का संकेत दिया है. इन में से बल्लेबाज सरफराज खान ने 6 मैचों में 355 रन बना कर यह साबित किया कि वे सीनियर टीम में जगह बना सकते हैं. वहीं, गेंदबाज आवेश खान ने 6 मैचों में 12 विकेट चटकाए. इस मीडियम पेसर ने दिखा दिया कि अगर मौका मिले, वे आगे और भी विकेट चटकाने में सक्षम हैं. इसी तरह गेंदबाज मयंक डागर ने 4 मैचों में 11 विकेट चटकाए. हालांकि मयंक सभी मैच खेल नहीं पाए लेकिन उन्हें जब भी मौका मिला, बल्लेबाजों को बाहर जाने का रास्ता दिखा दिया.

टीम के कप्तान ईशान किशन ने माना कि फाइनल मैच में फील्ंिडग सही नहीं रही और कुछ कैच छोड़े जो काफी महत्त्वपूर्ण थे. पर यह मानने भर से जूनियर खिलाडि़यों का भला नहीं होने वाला है. उन्हें फील्ंिडग की कमी को दूर करना होगा. इन खिलाडि़यों को अभी लंबा सफर तय करना है. भारतीय अंडर 19 टीम के कोच राहुल द्रविड़ ने भी यही बात कही है. जूनियर खिलाडि़यों को इस हार से सबक लेने की जरूरत है.

कैंसर पीड़ितों के लिए संग्राम

आज के दौर में भारत में क्रिकेट के बाद कबड्डी और कुश्ती को ज्यादा सुर्खियां मिलने लगी हैं. कुश्ती की बात करें तो संग्राम सिंह का चेहरा सामने आता है. हाल ही में उन्होंने चंडीगढ़ के पीजीआई के कैंसर पीडि़त बच्चों के लिए ‘कुश्ती फोर कौज’ नाम से कुश्ती का आयोजन किया जिस में उन्होंने अमेरिकी पहलवान रौबी ई को 5 राउंड तक चले मुकाबले में 16-7 के स्कोर से हरा दिया.

मोहाली इंटरनैशनल हौकी स्टेडियम दर्शकों से खचाखच भरा था. संग्राम सिंह भारत में कुश्ती को प्रमोट करने के लिए जुटे हुए हैं. इस मैच को जीतने के बाद उन्होंने कहा कि मैं मोहाली के लोगों का उत्साह देख कर रोमांचित हूं. मेरे लिए अपने लोगों के सामने खेलना सम्मान की बात है. मैं देश के हर कोने से बेहतर खिलाड़ी निकालने की कोशिश करूंगा.

संग्राम सिंह ने एक महत्त्वपूर्ण बात यह कही कि प्रो कुश्ती के जरिए वे देश के कोनेकोने से उभरते पहलवानों की पहचान करेंगे और उन्हें बेहतरीन ट्रेनिंग सुविधाओं में बेस्ट ट्रेनर प्रदान करेंगे.

कैंसर पीडि़तों के लिए इस तरह के आयोजन सराहनीय हैं. कुश्ती को लोकप्रिय बनाने के लिए चैंपियंस प्रो कुश्ती ने इस मैच को देखने के लिए लोगों को खुला आमंत्रण दिया था.

भले ही यह मैच कैंसर पीडि़तों के लिए खेला गया था पर जानेमाने उद्यमी जनार्दन पांडे के साथ मिल कर संग्राम सिंह ने वर्ल्ड रेसलिंग प्रोफैशनल यानी डब्लूडब्लूपी, साउथ अफ्रीका की सहभागिता में चैंपियंस प्रो कुश्ती की शुरुआत की है. इस के माध्यम से गांवों और कसबों में भारतीय रेसलिंग को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि कुश्ती की शानदार प्रतिभाएं मिलें.

यह बात सही भी है कि गांव और कसबों में बहुत से ऐसे प्रतिभावान खिलाड़ी मौजूद हैं पर उन्हें सही प्लेटफौर्म नहीं मिल पाता है और आर्थिक तंगी की वजह से वे आगे नहीं बढ़ पाते हैं. संग्राम सिंह की इस पहल से न सिर्फ गांवों के प्रतिभावानों को मौका मिलेगा बल्कि देश को कई अच्छे पहलवान भी मिलेंगे.

ओलंपिक में लहरा ‘तिरंगा’

साल 2016 के रियो ओलिंपिक खेलों की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है. लाखोंकरोड़ों दर्शक टैलीविजन पर तो इन खेलों का मजा लेंगे ही, बहुत से खेलप्रेमी ब्राजील जा कर भी अपने पसंदीदा खिलाडि़यों की हौसलाअफजाई करेंगे.

इस सिलसिले में ‘फैनेटिक स्पोर्ट्स’ ने ‘रियो ओलिंपिक 2016’ के मैच टिकटों को भारत में लौंच किया. ‘फैनेटिक स्पोर्ट्स’ कंपनी विभिन्न बड़े खेल आयोजनों के लिए टूर का प्रबंध करती है, जिस में खेलप्रेमियों को मैचों के टिकटों को बेचना और उन के ठहरने व खाने का शानदार इंतजाम करना शामिल है. दिल्ली में हुए उन के एक कार्यक्रम ‘लहरा तिरंगा’ में 2 बार के ओलिंपिक मैडल विजेता पहलवान सुशील कुमार और भारतीय महिला हौकी टीम की कप्तान रितु रानी ने शिरकत कर अपने अनुभव बांटे और खेलप्रेमियों को ब्राजील जा कर ओलिंपिक का लुत्फ लेने के लिए प्रेरित किया.

शेयर बाजार में निराशा का माहौल

नए साल के पहले माह के दौरान बौंबे स्टौक एक्सचेंज यानी बीएसई में गिरावट का रुझान फरवरी में भी जारी रहा और महीने के पहले 12 दिनों के दौरान बाजार ने बड़ी गिरावट का रुख किया और सूचकांक 11 महीने के निचले स्तर पर चला गया. इस से पहले 12 जनवरी को सूचकांक 52 सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया था.

जनवरी के आखिरी सप्ताह में बाजार में हलकी रौनक रही लेकिन फरवरी के पहले 3 कारोबारी दिनों में बाजार टूट गया जिस से निवेशकों को भारी नुकसान हुआ. हालांकि चौथे दिन जापान में अप्रत्याशित स्तर पर की गई ब्याज दरों में कटौती, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में तेजी, अमेरिकी फैडरल रिजर्व के ब्याज दरों में बदलाव नहीं करने तथा वित्त मंत्री अरुण जेटली के अर्थव्यवस्था में तेजी रहने संबंधी बयान का बाजार पर थोड़ा सा सकारात्मक असर हुआ और सूचकांक में तेजी दर्ज की गई. वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथलपुथल के चलते घरेलू बाजार में आई नरमी पर सरकार चौंकन्ना है. केंद्र सरकार के आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने इस उथलपुथल के असर को रोकने के लिए कदम उठाने का भरोसा दिया है. आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि आगामी बजट और शेष दुनिया में गहराती आर्थिक नरमी के कारण आगे की राह आशंकाओं भरी है.

औनलाइन औषधि खरीद पर रोक

औनलाइन खरीद के इस दौर में महानगरों व अन्य शहरों में खरीदारी के लिए बाजार जाने की परंपरा कम हो रही है. आधिकारिक तौर पर इस तरह का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है लेकिन औनलाइन का प्रचलन बढ़ने तथा औनलाइन कारोबार में जुटी कंपनियों के कारोबार से साफ है कि हर वर्ग का खरीदार औनलाइन खरीदारी को उत्साह से ले रहा है. शहरी युवापीढ़ी तो इस की दीवानी हो गई है. सबकुछ औनलाइन उपलब्ध है. फ्रौड भी औनलाइन कारोबार में जम कर हो रहा है. इधर, कंपनियों ने दवा खरीद के लिए भी औनलाइन व्यवस्था कराई है. बड़े स्तर पर लोग दवा भी औनलाइन खरीद कर रहे हैं. उन का विश्वास है कि इस खरीद में नकली दवा की कम संभावना है. औनलाइन खरीद के लिए लोगों का उत्साह देखते हुए सरकार ने सभी राज्यों को दवा की औनलाइन खरीद पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं.

औषधि नियंत्रक महानिदेशालय का कहना है कि दवा बेचने के लिए लाइसैंस और कंपनी के लिए दवा बेचने के वास्ते प्रशिक्षित फार्मेसिस्ट रखना कानूनन जरूरी है. साथ ही, डाक्टर द्वारा सुझाई गई दवा ही बेचने की अनुमति है. जब तक डाक्टर की दवा लिखी परची नहीं होगी, विक्रेता खरीदार को दवा नहीं बेच सकता. महानिदेशालय का कहना है कि जब औषधि नियंत्रक कानून बना था उस समय औनलाइन खरीदारी का प्रचलन नहीं था, इसलिए कानून में इस तरह के कारोबार में दवा बिक्री की व्यवस्था नहीं है. इस स्थिति में औनलाइन दवा को नहीं बेचा जा सकता. कानून और कारोबारियों के बीच पिस तो खरीदार रहा है लेकिन लोगों को यह ध्यान रखना जरूरी है कि डाक्टर की लिखी परची के बिना दवा नहीं खरीदी जा सकती और न ही इस का सेवन करना चाहिए.

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