पहली दिसंबर को पहली दफा जब राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी गुजरात के साबरमती आश्रम पहुंचे तो वे तकरीबन गांधीजी जैसी वेशभूषा में थे. वहां उन्होंने एक अहम बात कही जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान पर निशाना साधती लगी. बकौल प्रणब मुखर्जी, असल गंदगी गलियों में नहीं, बल्कि हमारे दिमाग में है.

गंदगी के प्रकारों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से संदेश यह दे डाला कि सड़क का कचरा तो झाड़ुओं से हट जाएगा पर कट्टरवाद का जो कीचड़ दिलोदिमाग में जमा हुआ है वह किसी झाड़ू से साफ नहीं होने वाला. राष्ट्रपति की तारीफ में अकसर कसीदे गढ़ते रहने वाले नरेंद्र मोदी के पास शायद ही इस मशवरे का कोई जवाब हो, इसलिए उन्हें अभी सहिष्णु बने रहने में ही भलाई नजर आ रही है.

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