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करोड़ों का खर्च पी एम के खाने पर

जान कर कोफ्त होती है और हैरानी भी कि खुद को चाय बेचने बाला और उतने ही गर्व से मजदूर नंबर वन बताने बाले प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के खाने पर करोड़ों रु खर्च किए जा रहे हैं । 14 मई को उज्जैन के नजदीक निनोरा में मोदी वैचारिक महाकुभ का समापन करने आ रहे हैं जिनके भोजन की ज़िम्मेदारी मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम की अगुवाई में इंदौर के एक नामी होटल को सौंपी गई है जो 56 भोग नुमा खाना बनाने में जुटा हुआ है पी एम के खाने मे खास तौर से शामिल कुछ पकवानों के नाम हैं जोधपुरी कोफ़्ता , केरसागरी का कोफ़्ता , गट्टा पुलाव घेवर मलाई और टिक्कड़ ( एक तरह की मोटी रोटी जिसे हाथ से गूँथा जाकर कोयले पर सेका जाता है रईस लोग इसे देसी घी में डुबोकर और गरीब प्याज के साथ खाते हैं ) ।

हैरानी की दूसरी बात यह है कि पी एम के लंच का इंतजाम निनोरा के अलावा इंदौर में भी किया जा रहा है क्योंकि वे 14 मई को दोपहर कोई साढ़े बारह बजे इंदौर लेंड करेंगे अब अगर उनकी इच्छा इंदौर में ही खाने की हुई तो खाना उन्हे वहाँ भी तैयार मिलेगा । हैरानी की तीसरी बात इस भोज का जरूरत से ज्यादा प्रचार है जिससे लग ऐसा रहा है कि प्रधान मंत्री निनोरा वैचारिक महा कुम्भ का समापन करने नहीं बल्कि ये लजीज और मंहगे पकवान खाने आ रहे हों और मुद्दत से उन्होने इस तरह का खाना नहीं खाया हो । देश के 50 करोड़ लोग सूखे से जूझते बूंद बूंद पानी को तरस रहे हैं कई तो प्यासे मर भी चुके हैं ऐसे में अरबों का सिंहस्थ और 100 करोड़ का आंकड़ा छूने जा रहा वैचारिक महाकुंभ का खर्चीला

आयोजन याद नबाबी और राजे रजबाड़ों के युग की दिलाता है इधर करोड़ों के इस शाही भोज से लग भी रहा है कि गरीबी,भूख  प्यास सब फेशनेबुल बातें हैं जिनसे हमदर्दी बटोरते आप एक दफा  पी एम तो बन सकते हैं लेकिन देश चलाने ये छोटी मोटी बातें भूल जाना मजबूरी हो जाती है । पैसा उस गरीब जनता का है जो देसी घी इश्तहारों मे देख उसके स्वाद और गुणों का अंदाजा अपने सूखे होठों पर फेर कर लगा लेती है और अच्छे दिनो का सपना देखते भूखी ही सो जाती है उसे नहीं मालूम रहता कि उसकी भूख पर कैसे कैसे पुलाव , घेवर और कोफ्ते खाकर ही देश के नेता उसके भले के बारे मे सोच पाते हैं और फिर सोचते सोचते वे भी  सो जाते हैं क्योकि ज्यादा गरिष्ठ खाने से उन्हे आलस आने लगता है  । इस कड़वी हकीकत से परे भोपाल-इंदौर-उज्जैन के सियासी गलियारों में यह चर्चा भी गरम है कि इस मंहगे भोज का प्रचार जानबूझ कर मोदी की छवि बिगाड़ने किया जा रहा है नहीं तो आप देश के किसी भी कोने में चले जाइए अच्छे से अच्छा और मंहगे से मंहगा खाना हजार रु थाली में मिल जाता है । अगर यह सब मोदी जी जानकारी और मर्जी से हो रहा है तो इतना ही कहते संतुष्ट हुआ जा सकता है कि समरथ को नहीं दोष गुसाई।  

ड्रैस नहीं मानसिकता छोटी

आज लड़कियों के छोटे कपड़ों पर तरहतरह के कमैंट आम बात है लेकिन हद तो तब हो गई जब कुछ लड़कों ने एक युवती को सिर्फ इसलिए पीटा कयोंकि उस ने छोटे कपड़े पहने हुए थे. दरअसल पुणे की एक घटना सामने आई है जिस में एक लड़की अपने दो दोस्तों के साथ दोस्त की शादी के संगीत से वापस लौट रही थी. तभी कुछ लड़कों ने उसे जबरदस्ती कार से खींच कर बाहर निकाला और उस के शौर्ट ड्रैस पहनने पर चेतावनी दी. लड़कों ने युवती से कहा कि इतनी छोटी ड्रैस पहन कर वह दो पुरुषों के साथ कैसे घूम सकती है? पुणे में इस की अनुमति नहीं है. पुणे के नियम कानून समझाते हुए लड़की को पीटा और उस के दोस्तों को भी परेशान किया.

यह कोई पहला मामला नहीं है जिस में लड़कियों को उन के कपड़े की वजह से इस तरह की हिंसा का सामना करना पड़ा हो. इस से पहले भी कई तरह के मामले सामने आ चुके हैं. एक बैंगलौर की घटना है जिस में एक औटो वाले ने एक लड़की को छोटे कपड़े न पहनने की सलाह दी जबकि लड़की ने घुटने तक की ड्रैस पहनी हुई थी. जिस पर कमैंट करते हुए औटो ड्राइवर ने कहा कि ‘‘मैडम प्लीज बुरा मत मानिएगा लेकिन आप को इस तरह के छोटे कपड़े नहीं पहनने चाहिए. अच्छे घर की लड़कियां ऐसे कपड़े नहीं पहनतीं.’’

सेलिब्रिटी भी नहीं अछूते

इस तरह की हिंसा की शिकार केवल आम लड़कियां ही नहीं हैं बल्कि छोटी मानसिकता के लोग सैलिब्रिटीज को भी नहीं छोड़ते. ऐसा ही कुछ ‘बिग बौस 7’ की विजेता गौहर खान के साथ भी हुआ था. एक रियालिटी शो की शूटिंग के दौरान दर्शकों में मौजूद एक व्यक्ति ने थप्पड़ मार दिया था सिर्फ इसलिए कि गौहर मुसलमान हो कर छोटे कपड़े कैसे पहन सकती है.

महिलाओं के कपड़ों को ले कर अक्सर विवाद होता है कि रेप लड़की के पहनावे की वजह से होता है, वे छोटे कपड़े पहनती हैं जिस की वजह से पुरुष उत्तेजित हो उठते हैं लेकिन यहां एक सवाल यह उठता है कि क्या पुरुष इतने कमजोर हैं कि महिलाओं के सिर्फ छोटे कपड़े की वजह से अपना आपा खो देते हैं? देश के नेता भी हमेशा यह टिप्पणी देते हैं कि रेप लड़की के पहनावे की वजह से होता है. अगर ऐसा है तो उन लड़कियों का क्या जो अपने घरों में पूरे कपड़े पहन कर लाजलज्जा में रहती हैं और घर के अंदर ही दरिंदे उन्हें तारतार कर देते हैं.आज सब से बड़ा सवाल है कि भारत एक आजाद देश है यहां पर हर व्यक्ति को अपनी इच्छानुसार बोलने, खाने और पहनने का अधिकार है तो क्यों महिलाएं केवल पुरुषों की सोच के लिए अपना पहनावा बदलें

…तो इस हीरोइन ने किया कंगना को रिप्लेस

अभिनेत्री जरीन खान को निर्देशक साई कबीर की आगामी फिल्म 'डिवाइन लवर्स' में कंगना रनोट की जगह शामिल किया गया है. इस फिल्म में जरीन के अलावा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तारीफ पा चुके अभिनेता इरफान खान भी हैं.

जरीन खान का फिल्मी सफर वीर के साथ शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने सलमान खान के साथ काम किया. उनकी आखिरी फिल्म हेट स्टोरी-3 काफी पसंद की गई.

वहीं कंगना ने फैशन, तनु वेड्स मनु, क्वीन जैसी फिल्मों से दर्शकों का दिल जीत लिया.

इस खबर की पुष्टि करते हुए कबीर ने अपने बयान में कहा, 'हां, यह सच है. हम पठानी रूप वाली एक लड़की ढूंढ रहे थे और जरीन इसके लिए एकदम सही हैं.'

कंगना की इच्छा इरफान के साथ काम करने की थी लेकिन शूटिंग की तारीख में तालमेल नहीं बैठने की वजह से वह फिल्म से बाहर हो गईं. पिछली बार विशाल पांड्या की फिल्म 'हेट स्टोरी 3' में नजर आने वाली जरीन फिल्म की शूटिंग शुरू करने से पहले दो महिने का प्रशिक्षण लेंगी, जिसका निरीक्षण स्वयं इरफान करेंगे.

यह फिल्म काफी एडवेंचर कॉमेडी है. इसकी शूटिंग सितम्बर में शुरू होगी. 'डिवाइन लवर्स' समाज के निचले मध्यम वर्ग के इर्द-गिर्द घूमती है.

अब देखने वाली बात ये होगी कि इस फेर-बदल का किस पर क्या असर पड़ता है. कंगना रनोट पहले से ही मुश्किलों में घिरी हैं.

 

जल्द आ रहे हैं 1000 रुपए के नए नोट

भारतीय रिजर्व बैंक जल्द ही 1000 के ऐसे नोट जारी करेगा जिसमें नोट के दोनों क्रमांक पैनलों के पार्श्व (इनसेट लेटर) में 'R' अक्षर होगा. रिजर्व बैंक ने एक विज्ञप्ति में बताया कि इसके अलावा नोट में अन्य सुरक्षा मानक जैसे कि बढ़ते क्रम में नोट क्रमांक, किनारे पर लाइन (ब्लीड लाइन) इत्यादि भी रहेंगे.

इन नोटों पर रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम जी. राजन के हस्ताक्षर होंगे एवं पीछे की तरफ 2016 अंकित होगा. विज्ञप्ति में कहा गया है, 'नए जारी होने वाले 1000 रुपये के नोट डिजाइन में 2005 में महात्मा गांधी सीरीज के जारी 1000 रुपये के नोटों जैसे ही होंगे.' आरबीआई ने कहा कि नए नोट आने के बाद 1000 रुपये के पुराने नोट भी चलन में रहेंगे.

 

 

अब आपका सेविंग्स खाता कभी नहीं होगा ‘निगेटिव’

अब आपका बचत खाता निगेटिव नहीं होगा. यानी उसमें शून्य से कम राशि नहीं होगी. न्यूनतम बैलेंस के रखरखाव की पेनाल्टी की वजह से ऐसी स्थिति बनती थी, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के ताजा निर्देशों के बाद अब ऐसा नहीं होगा.

आरबीआई ने बैंकों से कहा है कि जिन खातों का बैलेंस शून्य हो गया है, उनमें न्यूनतम बैलेंस का रखरखाव नहीं करने संबंधी चार्ज न लगाएं.

हालांकि यह नियम पिछले साल से लागू है, लेकिन कुछ बैंक अब भी सेविंग्स खातों में निगेटिव बैलेंस की स्थिति खड़ी कर रहे थे. आरबीआई के मुताबिक, जीरो बैलेंस के बाद यदि कोई बैंक चार्ज लगाता है तो खाताधारक उसकी शिकायत कर सकता है.

बैंक अधिकारियों के मुताबिक, अधिकांश मामलों में ऐसा तब होता है जब खाताधारक अपनी नौकरी बदल लेता है और उसके सैलरी खाते में राशि आना बंद हो जाती है. हालांकि सैलरी खातों को कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं, लेकिन जब उनमें राशि आना बंद हो जाती है तो कुछ बैंक न्यूनतम राशि की शर्त लगा देते हैं.

बैंक सेविंग्स खातों पर इस तरह की पेनाल्टी नहीं लगाता है. वहीं यदि कोई खाता निश्चित अवधि तक बंद रहा है तो उसे दोबारा चालू कराने के लिए भी कोई राशि नहीं वसूली जाती है. एक्सिस के साथ ही आईसीआईसीआई बैंक ने भी यही दावा किया है.

 

आठ महीने में सुधारें या वापस जाएं आर्थर: अख्तर

पाकिस्तान के पूर्व तेज गेदबाज शोएब अख्तर ने पाकिस्तानी टीम में सुधार के लिए नए कोच मिकी आर्थर को आठ महीने का वक्त दिया है. अख्तर ने कहा है कि इस बीच आर्थर या तो पाकिस्तानी टीम में सुधार करें या फिर पद छोड़कर चले जाएं.

अख्तर ने कहा कि वह आर्थर को कोच बनाए जाने का समर्थन करते हैं. वह काफी अनुभवी कोच हैं. वह साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया जैसी टॉप टीमों के कोच रह चुके हैं. एक स्थानीय टीवी चैनल से अख्तर ने कहा कि 'लेकिन आठ महीने का समय हमें बता देगा कि वह फर्क पैदा करेंगे या अपने से पहले के कोचों की तरह चले जाएंगे. क्योंकि इस समय के दौरान हमें कुछ बेहद महत्वपूर्ण श्रृंखलाएं खेलनी हैं. इसलिए या तो वह हमारे क्रिकेट खेलने के तरीके में बदलाव करें या अलविदा कहने का फैसला करें.'

इस पूर्व तेज गेंदबाज ने साफ किया कि पाकिस्तान टीम को कोचिंग देना चुनौतीपूर्ण और हताशा भरा होगा.

श्रीनि ईमानदार शत्रु, शशांक पीठ में छुरा घोंपने वाला: वर्मा

हाल ही में बीसीसीआई अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले शशांक मनोहर को आदित्य वर्मा ने जमकर लताड़ लगाई है. आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में याचिका दायर करने वाले आदित्य ने शशांक को धोखेबाज करार देते हुए कहा कि कुर्सी के लिए शशांक कुछ भी कर सकते हैं. साथ ही आदित्य ने कहा कि कम से कम श्रीनिवासन दुश्मनी तो ईमानदारी से निभाया करते थे.

गुस्साए वर्मा ने कहा कि शशांक मनोहर का ताजा फैसला ये दर्शाता है कि वह कुर्सी के लिए कुछ भी कर जाने वाले अधिकारियों में हैं. जब वह बीसीसीआई के अध्यक्ष नहीं थे तब क्रिकेट को मैच फिक्सिंग और स्पॉट फिक्सिंग जैसी कुरीतियों से निजात दिलाने की बातें किया करते थे लेकिन अब वह बीसीसीआई को अपनी जिम्मेदारी पूरी किए बिना ही छोड़े जा रहे हैं और आईसीसी में आकर्षक पद मिलते ही भाग रहे हैं. वह एक ऐसे इंसान है जो पीठ में छुरा भोंकने में विश्वास करते हैं और उन्होंने और उनके साथियों ने पहले श्रीनिवासन के खिलाफ मेरा इस्तेमाल किया और फिर मुझे भी धोखा दिया.

श्रीनिवासन दुश्मनी भी शान से करते थे और उन्होनें अपने दोस्तों को कभी धोखा नहीं दिया. पर मनोहर के लिए वायदों के कोई मायने नहीं है. मुझे ये भी मालूम है कि रत्नाकर शेट्टी की मदद से मुझे बीसीसीआई ऑफिस से बाहर करवाने के पीछे शशांक मनोहर का ही हाथ था. मैंने शेट्टी को लेकर कई शिकायतें भी दर्ज कराई लेकिन उन शिकायतों की कोई सुनवाई नहीं हुई.

उन्होंने कहा कि श्रीनिवासन की भले ही कोई भी मंशा रही हो लेकिन कम से कम उनमें इतना दम तो था कि उन्होंने जो किया सबके सामने किया और कभी अपने दोस्तों को धोखा नहीं दिया. आदित्य ने आगे कहा कि मेरे लिए अब एक ही उम्मीद बची है और वह सुप्रीम कोर्ट का फैसला. मैं उम्मीद करता हूं कि बिहार के नौजवानों को एक बार फिर आईपीएल के टूर्नामेंट में खेलने का मौका मिलेगा.

आपने कभी नहीं सुना होगा इन 7 गैजेट्स के बारे में

क्‍या आपने कभी ऐसी घड़ी के बारे में सुना है जो आपको सुबह उठाने के लिए अलार्म न बजाकर करंट मारे. मैंने तो कभी नहीं सुना, लेकिन अब ऐसी घड़ी मार्केट में आ चुकी है. इस तरह के कई स्‍मार्ट गैजेट्स मार्केट में इन दिनों लांच हो रहे हैं. इन्‍हें देखकर आपको ऐसा लगेगा कि आप जेम्‍स बांड वर्ल्‍ड में आ चुके हैं लेकिन ये मन का धोखा नहीं बल्कि सच हैं.

इस तरह के हाई स्‍मार्ट गैजेट्स काफी मंहगे होते हैं और ये विशेष तौर पर स्‍मार्ट और टेकी यूजर्स के लिए बने होते हैं. इन गैजेट्स का लुक और इनकी बनावट यूजर फ्रैंडली तरीके से डिजाइन होती है जिससे इस्‍तेमाल करने में किसी प्रकार की कोई समस्‍या नहीं आती. आज आपको इस आर्टिकल में हम, ऐसे ही 7 सुपर स्‍मार्ट गैजेट के बारे में बताएंगे, जो आपको अचरज में डाल सकते हैं:

क्‍लॉक

सुबह उठने के टाइम पर आपका ब्रेन, अलॉर्म के लिए तैयार रहता है, आप भी सोचते हैं कि अलॉर्म बजेगा तब उठा जाएगा. लेकिन ये क्‍या… अलॉर्म की बजाय आपको करंट लगा. जी हां… शॉक क्‍लॉक की यही खास बात है. इस क्‍लॉक को बैंड की तरह हाथ में पहनना होता है और अगर आपने उठने में आलस दिखाते हुए स्‍नूज की बटन दबा दी तो आपको झटका लग सकता है और पल भर में ही बिस्‍तर के नीचे दिखाई पड़ सकते हैं.

सोच बदल दे

कई बार आपको ऐसा लगता है कि आपका ध्‍यान कुछ पल के लिए कहीं और लग जाए. लेकिन ऐसा खुद से कर पाना संभव नहीं होता है. थाइंक ने आपकी इस समस्‍या को हल कर दिया. थाइंक नामक इस छोटी सी डिवाइस को आपको सिर में पहनना होता है और आप अपने विचारों को बदल सकते हैं. विचार बदलने की इस प्रक्रिया को न्‍यूरोसिग्‍नलिंग कहते हैं जिसमें डिवाइस के कारण विचारों और मानसिक स्थिति को शिफ्ट कर दिया जाता है.

जूते के फीते खुद-ब-खुद बंध जाएं

नाइकी ने हाल ही में जूतों के मॉडल ''हाइपर एडॉप्‍ट 1.0'' को लांच किया, जो सुपर स्‍मार्ट शू हैं. इस शू को पहनते ही यूजर की एड़ी, एक विशेष प्रकार के सेंसर पर पड़ती है और शू के लैस अपने आप टाइट हो जाते हैं. यानि आपको जूतों के फीते बांधने में वक्‍त जाया नहीं करना पड़ेगा. अगर आपको लगता है कि शू कुछ टाइट या ढीला है तो साइड में दो बटन भी दिए गए हैं जिसकी मदद से आप फीतों का कस सकते हैं या ढीला कर सकते हैं.

पीठ को रखे सीधा

सारा दिन बैठे-बैठे काम करने से पीठ के निचले हिस्‍से में अकड़न हो जाती है और वो सही नहीं होती. ये डिवाइस ऐसे में काफी हेल्‍पफुल रहती है. 4 इंच लम्‍बी अपराइट नामक इस डिवाइस को पीठ में निचले हिस्‍से पर फिक्‍स करना होता है, इससे आप अपनी पीठ नीचे से झुकाकर नहीं बैठ पाते और दर्द भी नहीं होता है. सही मुद्रा में बैठने के कारण स्‍वास्‍थ्‍य सम्‍बंधी समस्‍या भी नहीं होती है.

सोनी की स्‍मार्ट वॉच

सोनी ने हाल ही में एक एफईएस वॉच को स्‍ट्रेप्‍स के साथ लांच किया है जिसमें पैटर्न को बदला जा सकता है. इस घड़ी में डिस्‍प्‍ले के 24 पैटर्न हैं जिन्‍हें यूजर अपने हिसाब से सेलेक्‍ट कर सकता है. सोनी ने वॉच फेस और स्‍ट्रेप के लिए इलेक्‍ट्रॉनिक पेपर का इस्‍तेमाल किया है जोकि इसकी खासियत है.

स्‍मार्ट फीचर वाली अंगूठी

यह रिंग, 18 कैरेट सोने से बनी हुई हैं जिसमें अंदर एक सेंसर फिट होता है जो स्‍मार्ट फोन से कनेक्‍ट होता है. अगर आपका फोन कहीं अंदर या पर्स में रखा हुआ है और इस रिंग में कॉल या मैसेज ब्लिंक करता हुआ दिखेगा. इस तरह, बिना जरूरी कॉल ड्रॉप किए हुए महिलाएं अब पार्टी या फंक्‍शन को एंजाय कर सकती हैं.

हाथ को बनाएं टचस्‍क्रीन

हाल ही में कार्नेगी मेल्‍लॉन प्रोजेक्‍ट के तहत स्‍कि‍नट्रैक नामक डिवाइस तैयार की जा रही है जो बैंड और रिंग के कॉम्‍बो में होगी. इसे पहनने के बाद, हाथ को पूरा स्‍क्रीन में बदला जा सकता है जिससे कभी भी कहीं भी काम करने में आसानी होगी और मजा भी आएगा. यूनिवर्सिटी में फिलहाल इस प्रोजेक्‍ट के अगले स्‍तर पर शोध कार्य किया जा रहा है कि बैंड पहनने वाले की स्किन और साथ में बैठे वाले की हैंड स्किन भी टचस्‍क्रीन में बदल जाएं, जिससे कम्‍यूनिकेट करने में आसानी होगी. इस डिवाइस की रिंग में हाई फ्रिक्‍वैंसी इलेक्ट्रिकल सिग्‍नल होते हैं जो स्‍मार्टफोन से दूर बैठे होने पर भी आपको अपडेट रखते हैं कि क्‍या हो रहा है. इस टेक्‍नोलॉजी का इस्‍तेमाल करते हुए, यूजर की बांह में उसकी अंगुलियों की स्थिति का भी पता लगाया जा सकता है.

स्नैपडील पर अब नहीं मिलेगा डीप डिस्काउंट

स्नैपडील ने 13 मई से अपने प्लेटफॉर्म सेलर्स को किसी भी प्रॉडक्ट के मैक्सिमम रिटेल प्राइस पर 70% से ज्यादा डिस्काउंट देने से रोक दिया है. ऑनलाइन मार्केटप्लेस ने बायर्स की रिटर्निंग हैबिट पर लगाम लगाने के लिए किया है.कंपनी ने 9 मई को सभी सेलर्स को एक मेसेज भेजा था.

उसके मुताबिक, 'हमने पाया है कि बहुत ज्यादा डिस्काउंट यानी डीप डिस्काउंटिंग वाले प्रॉडक्ट्स अक्सर कस्टमर्स की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते. इसके चलते प्रॉडक्ट्स को लेकर कस्टमर्स में अंसतोष बढ़ता है और उसको रिटर्न किए जाने के मामले भी बढ़ते हैं.कस्टमर्स एक्सपीरियंस बेहतर बनाने के लिए अब आपको न तो एमआरपी पर 70% से ज्यादा डिस्काउंट पर नए प्रॉडक्ट्स लिस्ट कराने और न ही लिस्टेड प्रॉडक्ट्स की प्राइस अपडेट करने दिया जाएगा.'

स्नैपडील सहित बाकी दिग्गज मार्केटप्लेस के सेलर्स की शिकायत है कि ई-कॉमर्स कंपनियों के ‘नो क्वेश्चन आस्क्ड पॉलिसी’ के चलते बायर्स के मर्चेंडाइज लौटाने की घटनाएं बढ़ रही हैं. सेलर्स का कहना है कि मर्चेंडाइज रिटर्न बढ़ने से लॉजिस्टिक्स संबंधित दिक्कतें हो जाती हैं क्योंकि इनवेंटरी लंबे समय के लिए ट्रांजिट में फंस जाती है और उसके चलते एकाउंटिंग में भी गड़बड़ियां हो जाती हैं.

रिटेल कंसल्टेंसी फर्म थर्ड आइसाइट के देवांग्शु दत्ता के मुताबिक, ‘यह स्ट्रैटेजी कारगर हो सकती है क्योंकि ईकॉमर्स में नई एफडीआई पॉलिसी को सेलर्स चैलेंज कर सकते हैं. उन्होंने कहा, 'नई ई-कॉमर्स पॉलिसी का मकसद साफ है. सरकार डीप डिस्काउंटिंग को कंट्रोल करना करना चाहती है. इसलिए सरकार को स्नैपडील के फैसले से कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए. लेकिन यह पॉलिसी कीमतों को प्रभावित करेगी इसलिए सेलर्स इसको चुनौती दे सकते हैं.'

डीप डिस्काउंटिंग पर स्नैपडील की पाबंदी कई कैटेगरी के प्रॉडक्ट्स पर लागू होगी, जिनमें औरतों और मर्दों के फैशन, फुटवियर, स्मार्टफोन एक्सेसरीज वगैरह शामिल होंगे. कुछ सेलर्स का कहना है कि यह एक अच्छा कदम है जबकि दूसरों का कहना है कि यह सेलर्स की इनवेंटरी क्लीयर करने की कोशिश में आड़े आ सकती है.

 

गांगुली बन सकते हैं बीसीसीआई सचिव

बीसीसीआई अध्यक्ष पद से शशांक मनोहर के इस्तीफा देने के बाद बीसीसीआई सचिव अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है. ठाकुर के बीसीसीआई अध्यक्ष बनने की स्थिति में बीसीसीआई सचिव पद खाली हो जाएगा इसलिए माना जा रहा है कि सौरव गांगुली बीसीसीआई सचिव का पद संभाल सकते हैं.

बोर्ड के नियमों के अनुसार कार्यकाल के बीच में सचिव पद खाली होने की स्थिति में अध्यक्ष को सचिव नामित करने का अधिकार है. इसके चलते ठाकुर द्वारा सौरव गांगुली को यह जिम्मेदारी सौंपा जाना लगभग तय माना जा रहा है.

अनुराग ठाकुर की क्रिकेट और राजनीति में गहरी पैठ के चलते उन्हें यह पद संभालने में कोई परेशानी नहीं होगी. वैसे आईपीएल चेयरमैन राजीव शुक्ला और महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन के अजय शिर्के को भी अध्यक्ष पद का दावेदार माना जा रहा है.

राजीव शुक्ला को बोर्ड में काफी समर्थन हासिल है, लेकिन वे अपने दोस्त ठाकुर की राह में मुश्किलें खड़ी नहीं करेंगे और वे आईपीएल चेयरमैन जैसा दमदार पद भी छोड़ना नहीं चाहेंगे. पूर्व बीसीसीआई कोषाध्यक्ष शिर्के को शरद पवार का समर्थन हासिल है, लेकिन लोढ़ा समिति की सिफारिशों के चलते दबाव में चल रहे बीसीसीआई में चुनाव की नौबत आने की संभावना नहीं के बराबर है.

ठाकुर को बीसीसीआई अध्यक्ष पद के पूर्व क्षेत्र के 6 राज्य इकाइयों में से किसी एक से नामांकन मिलना चाहिए, जिसमें उन्हें मुश्किल नहीं आएगी. ठाकुर के क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के अध्यक्ष सौरव गांगुली से मधुर संबंध है और उन्हें वहां से आसानी से नामांकन मिल जाएगा.

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