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बॉक्स आफिस पर ‘उड़ता पंजाब’ और ‘शहर मसीहा नहीं’ की टक्कर

इन दिनों बौलीवुड में बिहार, पंजाब और नशाखोरी व मादक पदार्थों की तस्करी को केंद्र में रखकर बनायी गयी दो फिल्में चर्चा के केंद्र में हैं. एक फिल्म अभिषेक चौबे निर्देशित ‘‘उड़ता पंजाब’’ है, जिसका निर्माण अनुराग कश्यप ने ‘‘फैंटम फिल्म्स’’ के बैनर तले किया है. फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ विवादों में है. इस फिल्म का कई लोग विरोध कर रहे हैं. नीतू चंद्रा ने तो सोशल मीडिया पर फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ में बिहारी लड़की का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री आलिया भट्ट व फिल्म के निर्देशक अभिषेक चौबे के नाम ‘खुला पत्र’ लिखकर बिहारियों को नीचा दिखाने का आरोप लगाया है. फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ से जुडे़ लोग फिल्म के कथानक को लेकर सिर्फ यही कह रहे हैं कि यह फिल्म मादक दृव्यों की तस्करी के खिलाफ बात करती है. पर पंजाब के खेतों में भूखे पेट काम करने वाले बिहारियों का फिल्म की कहानी से क्या संबंध है, इस पर सब चुप हैं.

जबकि दूसरी फिल्म बिहार की प्रतिभाओं की उपेक्षा और उनके उपहास पर आधारित ‘‘शहर मसीहा नहीं’’ है, जो कि मशहूर उपन्यासकार डॉं अरूणेंद्र भारती के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है. अमर वत्स निर्देशित इस फिल्म में ‘‘चार्ली चैप्लिन द्वितीय’’ के नाम से मशहूर अभिनेता राजन कुमार ने मुख्य भूमिका निभायी है. बौलीवुड में चर्चाएं गर्म है कि फिल्म ‘‘शहर मसीहा नहीं’’ में बिहार की अच्छी छवि पेश करते हुए पूरे भारत वासियों से बिहारियों को भी अपना भाई समझने का आहवान किया गया है.

मजेदार बात यह है कि फिल्म ‘‘शहर मसीहा नहीं’’ के निर्माताओ ने अपनी इस फिल्म को प्रयोग के तौर पर बिहार के मुंगेर जिले के दो तीन थिएटरों में तीन जून को रिलीज किया और इस फिल्म को जिस तरह से वहां पसंद किया जा रहा है, उससे उत्साहित होकर निर्माताओं ने अब अपनी फिल्म ‘‘शहर मसीहा नहीं’’ को पूरे देश में ‘उड़ता पंजाब’ के ही साथ 17 जून को रिलीज करने की योजना बनायी है. सूत्रों की माने तो बिहार के सिर्फ एक जिले में ‘शहर मसीहा नही’ को मिल रही सफलता ने ‘उड़ता पंजाब’ के निर्माताओं को चिंता में डाल दिया है. फिलहाल ‘‘उड़ता पंजाब’’ के निर्माताओं ने पंजाब से उम्मीदे लगा रखी हैं, इसलिए वह फिल्म से पंजाब शब्द को हटाना नहीं चाहते.

सूत्रों के अनुसार फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ में मादक दृव्यों की तस्करी के साथ साथ बिहारी लड़की व पंजाबी लड़के की प्रेम कहानी है. जबकि नशाखोरी की खिलाफत करने वाली फिल्म ‘‘शहर मसीहा नहीं’’ में बिहारी लड़के व पंजाबी लड़की की प्रेम कहानी है.

जी हॉ! फिल्म ‘‘शहर मसीहा नहीं’’ बिहार की प्रतिभाओं की उपेक्षा और उनके उपहास को लेकर चिंता व्यक्त करती एक उद्देश्यपरक फिल्म है. कहानी के अनुसार मुंगेर निवासी युवक राजन सहाय (राजन कुमार) गांव में एक चिटफंड कंपनी के लिए पैसा जमा करवाता है. लेकिन, कंपनी जब भाग जाती है, तो राजन अचानक कई तरह के संकटों से घिर जाता है, टूटने लगता है. लेकिन, मां के उत्साहवर्द्धक शब्दों से उसमें एक नया जोश जागता है. वह दिल्ली पहुंचता है. जहां बिहारी होने की वजह से उसे नौकरी नहीं मिलती है, पर एक दिन उसे एक कंपनी में नौकरी मिलती है और अंततः वह अपने परिश्रम के बूते उसी कंपनी का मैनेजर बनता है और साबित कर देता है कि बिहार में भी टैलेंट है, भले ही सायलेंट है. इस बीच दिल्ली में एक पंजाबी लड़की को राजन सहाय से प्रेम हो जाता है. पर राजन सहाय के बिहारी होने का विरोध लड़की का भाई करता है.

फिल्म ‘‘शहर मसीहा नहीं’’ के मुख्य अभिनेता राजन सहाय ने अपनी फिल्म को मकसदपूर्ण फिल्म बताते हुए ‘‘सरिता’’ पत्रिका से कहा- ‘‘वास्तव में बिहार से भागकर मुंबई आने के बाद मुंबई, दिल्ली के अलावा मैं कई शहरों में गया हूं. विदेश भी गया हूं. तमाम लोगों से मेरी बातचीत होती रही है. मैंने महसूस किया कि हर कोई बिहार व बिहार के लोगों को नीची नजरों से ही देखता है. हमने फिल्म में कहा है कि बिहार भी भारत का ही हिस्सा है. बिहार में भी अच्छे लोग बसते हैं. चाणक्य, डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद भी बिहार से थे. तमाम बड़े बड़े धर्म गुरू व आई ए एस आफिसर बिहार से रहे हैं. इस फिल्म में एक संदेश है कि हम सब पहले भारतीय हैं, फिर बिहारी या उत्तर भारतीय या महाराष्ट्यिन. फिल्म देखने के बाद लोगों को यह संदेश मिलता है हमें बिहार के लोगों को भी अपना भाई ही समझना चाहिए.’’

राजन कुमार ने आगे कहा- ‘‘हमारी फिल्म में दूसरे राज्यों या शहरों में ऊंचे पदों पर आसीन बिहार वासियों का आहवान किया है कि वह बिहार से बाहर निकलकर दूसरे शहरो में सौ प्रतिषश दे रहे हैं, यदि उसका 10 प्रतिशत भी अपने बिहार के गांव के लिए दें, तो बिहार के हालात बदल सकते हैं. बिहार की छवि बदल जाएगी. फिल्म में नशाखोरी के खिलाफ भी बात की गयी है. यह नशा तंबाकू, खैनी या शराब के रूप में बहुत ज्यादा है. हमने लोगों से कहा है कि वह नशाखोरी छोड़कर मानव जीवन जिएं. लोग अपने लिए, परिवार के लिए या देश के लिए सोचें. बड़े शहरों में जिस तरह से पानी की बर्बादी की जाती है, उस पर भी हमने कमेंट किया है. इसी के साथ हमने एक बात और की है कि हिम्मत करने वालों की कभी हार नहीं होती.’’

‘‘उड़ता पंजाब’’ के ही साथ ‘‘शहर मसीहा नहीं’’ को भी रिलीज करने के सवाल पर राजन कुमार ने कहा-‘‘देखिए, हमारी फिल्म कम बजट की फिल्म है. हमने प्रयोग के तौर पर इसे तीन जून को बिहार के मुंगेर में रिलीज किया. चार दिन के अंदर हमें अच्छी सफलता मिली है. अब हम लोग अपनी इस फिल्म को पंजाब सहित पूरे देश के सिनेमाघरों में 17 जून को रिलीज करने की योजना पर काम कर रहे हैं. ऐसा हम ‘उड़ता पंजाब’ को टक्कर देने के लिए नहीं कर रहे हैं. सच तो यही है कि हमें ‘उड़ता पंजाब’ के कथानक के बारे में कुछ पता ही नहीं है.’’ 

किसने तोड़ा द्रविड़-गांगुली का 17 साल पुराना रिकॉर्ड

मिशेल लंब और रिकी वेसेल्स ने इंग्लैंड में नॉर्थम्प्टनशर के गेंदबाजी अटैक की धज्जियां उड़ाते हुए 17 साल पुराना राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली का रिकॉर्ड तोड़ डाला. दोनों ने ट्रेंट ब्रिज में खेले जा रहे इस मैच में लिस्ट-ए मैच में इंग्लैंड में नया रिकॉर्ड बना डाला है.

दोनों ने पहले विकेट के लिए 39.2 ओवर में 342 रन जोड़ डाले. रॉयल लंदन वनडे कप के ग्रुप मैच में दोनों ने यह रिकॉर्ड बनाया. इंग्लैंड में इससे पहले विकेट के लिए वनडे में इतने रनों की साझेदारी कभी नहीं हुई है.

इस तरह से दोनों ने इंग्लैंड में पहले विकेट के लिए द्रविड़ और गांगुली का 1999 वर्ल्ड कप में बनाए गए पहले विकेट के लिए 318 रनों की साझेदारी का रिकॉर्ड तोड़ डाला. इन दोनों ने तब श्रीलंका के खिलाफ पहले विकेट के लिए 318 रनों की साझेदारी की थी.

नॉटिंघमशर ने 50 ओवर में आठ विकेट पर 445 रन बनाए. लिस्ट-ए मैच में यह दुनिया का दूसरा बेस्ट टोटल था. सबसे ज्यादा रनों का रिकॉर्ड सरे के नाम दर्ज है जिसने 2007 में ओवल में चार विकेट पर 496 रन बनाए थे.

लंब ने अपनी 184 रनों की पारी में 150 गेंदों का सामना किया और 21 चौके और 6 छक्के जड़े. वहीं वेसेल्स ने 97 गेंद पर 146 रन ठोक डाले. उनके बल्ले से 14 चौके और 8 छक्के निकले.

जाति ही पूछो रसोइये की

बहिन मायावती वैसे तो हमेशा ही तिलमिलाइ सी दिखती हैं पर अब पानी सर से गुजरता जा रहा है. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने गाँव जोगियापुर जिला वाराणसी राज्य उत्तर प्रदेश के एक दलित परिवार के घर जाकर खाना खा लिया है. तय है खाना खाने के बाद वे वोट भी मांगेगे. बिहार की हार से भगवा खेमे में बड़ा तनाव था कि दलितों ने वोट क्यों नहीं दिये.  उज्जैन का कुम्भ आते आते जो मंथन भज भज मंडली ने किया, उससे एक कलश जबाब की शक्ल में यह निकला कि राम से तुमने कुछ सीखा नहीं, उसने शबरी के झूठे बेर खाये थे, तुम लोग खाना खाओ, तब कहीं जाकर यूपी के ख्वाब देखना.

अब जिसे देखो वो दलितों के घर खाना खाने दौड़ रहा है, मानो  मुफ्त का लंगर चल रहा हो या अमृत बंट रहा हो. मायावती को भरोसा नहीं हो रहा कि उनकी आँखों के सामने उनकी ही आंखो के काजल पर मनुवादी डाका डाल रहे हैं और वे कुछ नहीं कर पा रहीं, इसलिए उन्हें शुबहा हुआ कि जरूर दाल में कुछ काला है. लिहाजा अपने सेवकों को उन्होने यह कहते एक मिशन पर लगा दिया है कि जरूर वो रसोइया जिसने अमित शाह का खाना बनाया, ऊंची जाति वाला रहा होगा, उसे ढूंढ कर लाओ और मेरे सामने पेश करो. अगर खाना वाकई दलित गृहणी ने नहीं, किसी किराए के रसोइये ने बनाया होगा तो जरूर अमित शाह को घेरा जा सकता है.

बहिन जी की दुकान खतरे में है. वर्ण व्यवस्था के निर्माताओं के मानद वंशज ही उसे ध्वस्त कर रहे हैं, तो अब वे क्या खाकर वोट मांगेंगी. राहुल गांधी भी यही करते थे, लेकिन चूंकि कांग्रेसी थे इसलिए बड़ा खतरा साबित नहीं हुये उन्हे दलितों ने खाना तो बड़े प्रेम से खिलाया पर सत्ता की मलाई से दूर रखा, जिसकी असल  वजह भाजपाई ही बता रहे हैं कि नेहरू गांधी परिवार को तो खूब खिला दिया, मायावती को भी खिलाया पर क्या इससे तुम्हारी दशा सुधरी, मुलायम अखिलेश के राज में अब पिछड़े तुम पर जूते चटका रहे हैं, इसलिए अब हमे खाने दो, चूंकि इस दुर्दशा के असली जिम्मेदार या गुनहगार हम ही हैं, इसलिए इसे दूर करने का मंत्र भी हमारे पास ही है. हम पिछड़ों को धकियाकर तुम्हें साथ ले लेंगे. इससे हालांकि कुछ ब्राह्मण नाराज होंगे, पर तुम उनकी चिंता या लिहाज मत करना, क्योंकि हम उन्हे कुछ ऊंची कुर्सियां देकर खामोश करा देंगे.

हम पुराने पापों के प्रायश्चित के अधिकारी हैं हम संविधान से आरक्षण तो हटा सकते हैं पर धर्म ग्रन्थों से शूद्र शब्द हटा पाने का अधिकार या हिम्मत कुछ भी समझ लो हममे नहीं है. दलित अब धर्म संकट में है कि लो दीनदायल खुद द्वार पर भिक्षा पात्र लिए पहली बार आये हैं और हम हरि के जन उन्हे खाली हाथ टरका दें, तो क्या हमें पाप नहीं लगेगा?  हमारे घर खाना खाकर हमारा उद्धार करने वाले हम से एक वोट ही तो मांग रहे हैं, जो निहायत ही क्षुद्र चीज है. किसी को भी दे दें, हमारा क्या बनना बिगड़ना है, हम तो जैसे थे वैसे ही रहेंगे. इसी धर्मसंकट से बहिन जी दुखी हैं कि विकास की कर लेते, मंदिर की कर लेते, पर ये राम दूत तो भेड़ की खाल में आ गए. अब इन का क्या किया जाए, इसलिए उस रसोइये को सवर्ण साबित किया जाए, जो सारे ड्रामे की जड़ है.

टांय-टांय फिस्स टौपर्स

इंटर की परीक्षा के टौपर्स घोटाला को लेकर बिहार को एक बार फिर कलंकित होना पड़ा है. इंटर आर्टस टौपर रूबी राय से पूछा गया कि पौलिटिकल साइंस में किस चीज की पढ़ाई होती है, तो उसने कुछ देर सोचने के बाद जबाब दिया कि पौलिटिकल साइंस में खाना बनाने की पढ़ाई होती है. रूबी के इस बेतुके जबाब ने बिहार के पूरे एजुकेशन सिस्टम को ही कई सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. देश भर में इंटर टौपर्स की कलई खुलने पर बिहार के सिर पर एक बार फिर कलंक लग गया है.

अब सरकार अपनी नाक बचाने के लिए टौपर्स की दुबारा टेस्ट लेने के बाद उनके रिजल्ट को रद्द कर दिया है, पर इस पूरे मामले की अगर गहराई से और सही जांच हो, तो कई बड़ी मछलियां कानून के फंदे में फंस सकती हैं. मुख्यमंत्री फिलहाल गहराई से जांच करने की बात कह रहे हैं, पर शिक्षा माफियाओं से निबटना उनके लिए काफी बड़ी चुनौती होगी.

इंटर साइंस और आर्टर्स के टौपर्स को लेकर बिहार स्कूल एक्जामिनेशन बोर्ड कई दिनों तक असमंजस की हालत में रहा. टौपर्स की योग्यता पर सवालिया निशन लगने के बाद बोर्ड ने टौपर्स का इंटरव्यू लेने का फैसला किया. मामला तब सामने आया जब एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में टौपर्स सब्जेक्ट का सही उच्चारण तक नहीं कर सके.

इंटर आर्टर्स टौपर्स को बिहार बोर्ड ने इंटरव्यू के लिए बुलाया. इंटर आटर्स टौपर रूबी राय को छोड़कर सभी 13 टौपर्स बोर्ड के दफ्तर में पहुंच गए. रूबी राय के पिता ने बोर्ड को पत्र के जरिए सूचित किया किया कि रूबी डिप्रेशन की शिकार हो गई है, इसलिए वह बोर्ड के इंटरव्यू में नहीं पहुंच सकती है. उसके ठीक होने के बाद वह बोर्ड के सामने हाजिर होगी. बोर्ड के पैनल ने सभी टौपर्स से 30-30 सवाल पूछे और सभी ने अधिकतर सवालों के सही जबाब दिए. पैनल में 11 शिक्षकों की टीम मौजूद थी.

बोर्ड के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद ने टौपर्स के टेस्ट के बाद दावा किया कि सभी टौपर्स ने सारे सवालों के सही जबाब दिए. सभी बच्चे टैलेंटेड और अप टू मार्क हैं. अध्यक्ष के दावे के उलट इंटर साइंस टौपर सौरभ श्रंप्ठ और थर्ड टौपर राहुल कुमार को नौलेज टैस्ट में जीरो नंबर मिले. सौरभ को गणित में 85 नंबर आए थे, पर कमिटी के टेस्ट में उसे 25 में से 3 नंबर मिले. अंग्रेजी के पर्चा में उसे 87 नंबर आए थे, जबकि टेस्ट में उसे जीरो नंबर मिले. भौतिक विज्ञान में 83 नंबर लाने वाले सौरभ को कमिटी में टेस्ट में महज 5 नंबर मिले. र्थड टौपर राहुल को अंग्रेजी में 87 नंबर मिले थे पर टेस्ट में उसे जीरो मिला. 25-25 नंबर के टेस्ट में राहुल को भौतिकी में 2, रासायन विज्ञान में 3, गणित में 2 नंबर मिला.

टेस्ट के बाद दोनों का रिजल्ट रद्द कर दिया गया. बिहार स्कूल एक्जामिनेशन बोर्ड के इतिहास में यह पहला मौका है जब टौपर्स का रिजल्ट रद्द कर दूसरे को टौपर घोषित किया गया हो. दोनों ही टौपर विशन राय कौलेज के स्टूडेट हैं.

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के पूर्व अध्यक्ष राजमणि प्रसाद का कहना है कि बिहार बोर्ड के रिजल्ट में शिक्षा माफियाओं की जम कर चलती रही है. साल 2014 में जब वह बोर्ड के अध्यक्ष थे, तो रिजल्ट आने के पहले ही सभी टौपर्स की कौपियों की दुबारा जांच की गई थी. 40 टौपर्स को पत्र भेज की बोर्ड के दफ्तर बुलाया गया था, पर केवल 5 छात्र ही पहुंच सके थे. साल 2013 में भी ऐसे मामलों का खुलासा हुआ था. शिक्षा मापिफया मूल्यांकन केंद्र पर ही अपना सारा खेल खेलते हैं. इस खेल में ज्यादातर एफिलिएटेड कौलेजों से जुड़े लोग शमिल होते हैं. कौपी के जांच के दौरन मनमाफिक नंबर बिठा लिए जाते हैं.

कीरतपुर राजारामपुर के विशन राय कौलेज के डिप्टी डायरेक्टर नंदकिशोर यादव का दावा है कि रूबी पढ़ाई में काफी तेज है, लेकिन वह बोलने में हिचकती है. सब के सामने बोलने से घबराती है. रिजल्ट को लेकर हंगामा मचने पर रूबी डर गई है और मानसिक रूप से परेशन है. उन्होंने कहा कि उनके कौलेज का रिजल्ट सुर्खियों में है और छात्रों को उनकी प्रतिभा के आधर पर ही नंबर मिला है.

वैशाली जिला का विशनराय कौलेज पहले भी विवादों में रह चुका है. इस साल आटर्स की टौपर रूबी राय, इंटर साइंस का टौपर सौरभ श्रेष्ठ और तीसरे नंबर पर रहे राहुल राज इसी कौलेज के छात्रा हैं. साइंस टौपर्स में सातवें नंबर पर रही शिवानी भी इसी कौलेज की है. साल 2005 में इस कौलेज के 374 छात्रों ने परीक्षा दी थी जिसमें सभी छात्रा प्रथम श्रेणी से पास कर गए थे. एक ही कौलेज से इतने फर्स्ट डिवीजन देखकर तब के बोर्ड अध्यक्ष नागेश्वर शर्मा ने रिजल्ट रोक दिया था. दोबारा उनके कौपियों की जांच की गई तो केवल 4 छात्र ही फर्स्ट डिवीजन से पास हो सके.

इस साल राज्य में साइंस का रिजल्ट 67.07 फीसदी रहा, वहीं विशनराय कौलेज के इंटर साइंस का रिजल्ट 97.52 फीसदी रहा. परीक्षा में शमिल 646 छात्रों में से 630 पास हुए और 534 छात्रों ने फर्स्ट डीविजन से पास किया. 96 छात्रों ने सेकेंड क्लास से पास किया और 14 छात्रा फेल हुए.

गौर करने वाल बात यह है कि वैशाली जिला के सभी परीक्षा केंद्रो की कौपियां मूल्यांकन के लिए रोहतास भेजी गई, तो विशनराय कौलेज की कौपियों की मूल्यांकन पटना के राजेंद्र नगर हाई स्कूल में क्यों कराया गया? सबसे बड़ा सवाल यह है कि मेरिट लिस्ट को बोर्ड के अध्यक्ष और सचिव मिल कर तैयार करते हैं, उसके बाद भी क्यों और कैसे गड़बड़ी हुई? इसका जबाबदेह यह दोनों क्यों नहीं है? इस घोटाले की जांच खुद बिहार बोर्ड ही कर रहा है, जो खुद ही इसमें शमिल रहा है? किसी दूसरी एजेंसी से जांच क्यों नहीं कराई गई? बोर्ड के एक्ट में इंटरव्यू लेने का अधिकार उसे नहीं है, फिर उसने छात्रों का इंटरव्यू क्यों लिया?

बिहार सरकार ने इस साल कदाचार मुक्त परीक्षा का नारा दिया था और उसमें वह काफी हद तक कामयाब भी रही. सरकार एक मकसद में कामयाब रही, तो शिक्षा माफियाओं ने मूल्यांकन में सारा खेल करके नया घोटाले में सरकार की गर्दन फंसा दी है. शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी कहते हैं कि यह काफी निराशजनक स्थिति है और पूरे मामले की जांच की जा रही है और इसमे शमिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी काररवाई की जाएगी. बोर्ड के अफसरों के साथ भी कोई रियायत नहीं होगी.

बिहार की शिक्षा व्यवस्था और उसमें गहरी जड़े जमा चुकी भ्रष्टाचार को लेकर पूरी दुनिया में भद्द पिटने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कहना पड़ा कि इंटर टौपर्स घोटाले में शमिल लोगों को बख्श नही जाएगा. इसमें दोषी पाए जाने वालों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा. बोर्ड के अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद भी पूरे मामले की जांच की बात दोहरा रहे हैं, पर बोर्ड के सूत्रों की मानें तो सारे गड़बड़ियों का सिरा बोर्ड अध्यक्ष के दफ्तर की ओर ही जाता दिख रहा है.

औनलाइन कैरियर

औनलाइन ऐडमिशन, औनलाइन टैस्ट, औनलाइन आवेदन, औनलाइन ऐग्जाम, औनलाइन इंटरव्यू, औनलाइन डिस्कशन, औनलाइन कंसल्टैंसी, औनलाइन प्रैस्क्रिप्शन, औनलाइन सर्टिफिकेशन, औनलाइन पेमैंट यानी कैरियर और ऐजुकेशन की दुनिया में सबकुछ औनलाइन है. आज सचाई तो यह भी है कि सिर्फ कैरियर और ऐजुकेशन ही नहीं इस दौर की समूची लाइफ औनलाइन के पहियों पर चढ़ कर तेज रफ्तार से घूम रही है. शायद ही आज की तारीख में हमारी जीवनशैली का कोई ऐसा पहलू हो जो औनलाइन गतिविधि पर निर्भर न होे.

औनलाइन शौपिंग, औनलाइन टिकट रिजर्वेशन, औनलाइन होटल बुकिंग, औनलाइन बधाई, औनलाइन पूजा, औनलाइन मनोरंजन और यहां तक कि औनलाइन सैक्स, सबकुछ औनलाइन हो गया है. लगता है कोई आंधी आई है जिस में अब औफलाइन कुछ बचा ही नहीं. हमें किसी को होली, दीवाली, ईद आदि की मुबारकबाद देनी है तो भी औनलाइन. किसी को खाने पर बुलाना है तो भी ज्यादातर निमंत्रण औनलाइन. गीतसंगीत सुनना है तो भी औनलाइन का ही सहारा ले रहे हैं. कुल मिला कर हमारी जिंदगी के हर पहलू पर औनलाइन का कब्जा हो गया है.

लेकिन हम यहां कैरियर और ऐजुकेशन की बात कर रहे हैं, इसलिए अपनी बात इन्हीं क्षेत्रों पर फोकस रखेंगे. हालांकि आज भी ज्यादातर परीक्षाओं का रजिस्ट्रेशन औनलाइन के साथसाथ औफलाइन भी हो रहा है, लेकिन वह दिन दूर नहीं जब रोजमर्रा की जिंदगी से औफलाइन की मौजूदगी बिलकुल गायब ही हो जाएगी. आज की तारीख में देश में राष्ट्रीय स्तर की 234 और प्रादेशिक स्तर की 700 से ज्यादा सरकारी, अर्धसरकारी परीक्षाएं होती हैं. इन सब में आवेदन औनलाइन अनिवार्य हो चुका है. उन तमाम परीक्षाओं के लिए सिर्फ औनलाइन आवेदन ही करना पड़ता है. सारे रिजल्ट औनलाइन हो गए हैं.

एक जमाना था जब रिजल्ट जारी होने के बाद भी 3-4 दिन तक पता ही नहीं चलता था. अखबारों में 20-20 पेज के स्पैशल पुलआउट छपते थे. स्कूल के सार्वजनिक बोर्ड में सफल हुए विद्यार्थियों के रोल नंबर चिपकाए जाते थे और अगर इन दोनों जगहों पर रोल नंबर नहीं होता था तो एक सांत्वना यह होती थी कि शायद मिसप्रिंट हो गया हो. लेकिन अब ऐसा नहीं है. रिजल्ट जारी होने के कुछ ही मिनटों या घंटों में हर छात्र अपना रिजल्ट देख लेता है. अब यहां न तो मिसप्रिंट होने की आशंका रहती है और न ही घर वालों को यह समझाने की कि मार्क्सशीट से पता चलेगा एक्चुअल पोजिशन क्या है.

दरअसल, अन्य चीजों की अपेक्षा ऐजुकेशन और कैरियर लगभग पूरी तरह से औनलाइन के गुलाम हो चुके हैं. औनलाइन को जरूरत कहें, मजबूरी कहें या शैली अब भविष्य में इस के बिना कैरियर और ऐजुकेशन की डगर की कल्पना करना भी नासमझी होगी. आज की तारीख में 80% से ज्यादा ऐंट्रैंस ऐग्जाम औनलाइन हो चुके हैं, जबकि ऐडमिशन के मामले में या रजिस्टे्रशन के संदर्भ में यह प्रतिशत बढ़ कर 98 के करीब पहुंच गया है. यह औनलाइन व्यवस्था ही है जिस के चलते आज समूचे हिंदुस्तान के किसी भी कोने में ऐडिमशन मिल सकता है और आप कहीं भी नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं.

आमतौर पर पहले सरकारी क्षेत्र तकनीकी के मामले में निजी क्षेत्रों से पीछे रहे, लेकिन इन दिनों सरकारी क्षेत्र भी निजी क्षेत्रों की ही तरह तकनीकी के मामले में औनलाइन प्रेमी हो गए हैं. तीनों सेनाओं के लिए लगभग सारे रिक्रूटमैंट फौर्म औनलाइन भरे जाते हैं. हालांकि फौर्म अभी औफलाइन ही स्वीकार किए जा रहे हैं, लेकिन दिन पर दिन इस व्यवस्था को हतोत्साहित किया जा रहा है, क्योंकि इस का खर्च ज्यादा है. इस में ज्यादा श्रमशक्ति की जरूरत पड़ती है और तीव्रता की भी बेहद कमी है. यही वजह है कि आजकल सभी परीक्षाओं की तारीखें और उन के दिशानिर्देश सब औनलाइन ही जारी होते हैं.

अब निजी क्षेत्र की ही तरह तमाम सरकारी क्षेत्रों में भी औनलाइन इंटरव्यू का चलन शुरू हो गया है. पिछले दिनों डीआरडीओ ने अपने यहां कुछ भरतियों के लिए औनलाइन वीडियो इंटरव्यू सीधे इसरो हैडऔफिस बेंगलुरु से किए.

जहां तक प्राइवेट नौकरियों का सवाल है तो आजकल बड़ी और मझोली तकरीबन 80% नौकरियां औनलाइन चयन के जरिए ही दी जा रही हैं.

विभिन्न जौब वैबसाइट्स आज की तारीख में उसी तरह व्यस्त हैं जैसे मैट्रिमोनियल वैबसाइट्स काम के बोझ से दोहरी हैं. वास्तव में निजी क्षेत्र की तमाम नौकरियां वैबसाइट्स के जरिए ही दी जा रही हैं. खुद को नौकरी दिलाने वाली भारत की नंबर एक वैबसाइट नौकरी डौट कौम के मुताबिक वह हर महीने तकरीबन ढाई लाख लोगों को नौकरी मुहैया करवाती है और हर महीने उस के यहां रजिस्टर्ड करने या कराने वाले लोगों की संख्या 6 लाख से ऊपर पहुंच चुकी है. निसंदेह इन में 50% से ज्यादा ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने दूसरी वैबसाइट्स में भी अपनेआप को रजिस्टर्ड किया है. इन सब के बावजूद वैबसाइट्स नौकरी दिलवा रही हैं? इस में अब दोराय नहीं है.

आज की तारीख में तकनीकी में पारंगत होना सफल कैरियर के लिए शायद इसलिए भी जरूरी हो गया है, क्योंकि सबकुछ औनलाइन हो गया है. आवेदन से ले कर इंटरव्यू और चयन तक की सारी कवायद औनलाइन है, जिस के कारण कैरियर की दुनिया में कदम रखने वाले छात्रों, प्रतियोगियों के लिए कंप्यूटर में दक्ष होना, कम से कम उस के कम्युनिकेशन इस्तेमाल में दक्ष होना अनिवार्य हो गया है. इस सदी के पहले दशक में एक जुमला काफी हिट हुआ था कि 21वीं सदी में कंप्यूटर न जानना इलिट्रेट होना है और अब यह कहना अनिवार्य हो गया है कि सिर्फ कंप्यूटर जानना ही सबकुछ नहीं है, अगर औनलाइन स्किल में आप शून्य हैं तो भी आप इलिट्रेट हैं. सिर्फ नौकरी ही नहीं बल्कि बहुत सारे डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स आज हम देशदुनिया की तमाम नामीगिरामी यूनिवर्सिटीज से कर सकते हैं और वह भी बिना कहीं गए और बिना किसी से मिले औनलाइन.

इग्नू सहित तमाम ओपन यूनिवर्सिटीज से आप बेकरी, डेयरी उत्पाद, वैब डिजाइनिंग जैसे सैकड़ों डिप्लोमा कोर्स घर बैठे औनलाइन कर सकते हैं. तमाम विदेशी विश्वविद्यालय और दूसरे प्रोफैशनल शैक्षिक संस्थान यह सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं. पढ़ाई के लिए आज जितनी विस्फोटक सुविधाएं हाल के कुछ सालों में उभर कर सामने आई हैं, उन में 80% औनलाइन हैं. आज आप घर बैठे 190 देशों के विभिन्न शैक्षिक संस्थानों में आवेदन कर सकते हैं या वहां उपलब्ध विभिन्न शैक्षिक पाठ्यक्रमों को औनलाइन पढ़ कर उन में डिग्री या डिप्लोमा हासिल कर सकते हैं. यह सुविधा पहले नहीं थी.

लब्बोलुआब यह कि आज कैरियर के लिए औनलाइन मुख्य इंजन बन गया है. इसलिए बिना औनलाइन दक्षता हासिल किए आप आज शैक्षिक और कैरियर की गतिविधियों को रफ्तार नहीं दे सकते. इसलिए यदि अभी तक आप औनलाइन गतिविधियों में रुचि नहीं ले रहे हैं तो तुरंत औनलाइन प्रेमी बन जाइए, क्योंकि आप के पास कंप्यूटर है या नहीं है. आप को इंटरनैट की सुविधा हासिल है या नहीं है. आप से अब यह सवाल कोई नहीं पूछने वाला. न तो कोई शैक्षिक संस्थान, न कोई एंप्लौयर. हर कोई औनलाइन की दिशा में ही आगे बढ़ेगा. यदि आप ने अभी भी अपनेआप को औफलाइन बनाए रखने का हठ किया तो औन होने के बजाय औफ ही बने रहेंगे?

औनलाइन कमाई भी संभव

आजकल सोशल नैटवर्किंग साइट्स पर औनलाइन अर्निंग के विज्ञापनों की भरमार रहती है लेकिन ये सभी विज्ञापन यकीन करने के लायक नहीं होते. बहरहाल, आप नकारात्मक सोचने के बजाय सकारात्मक सोच से काम शुरू करें. इस में कोई दोराय नहीं कि औनलाइन कमाई संभव है, मगर इस के लिए कुछ बातें गांठ बांधनी होंगी. डैडलाइन, ऐक्यूरेसी और क्वालिटी. आप कहेंगे ये सब तो औफलाइन काम के लिए भी जरूरी हैं. लेकिन काम चाहे जिस पद्धति से किया जाए हर जगह ये 3 पैमाने जरूरी हैं.

औनलाइन काम मिलना इसलिए शुरू हुआ कि विदेशों में श्रम काफी महंगा है, जबकि भारत में काफी सस्ता है. इसलिए तमाम कंपनियां जो अपनी उत्पादन लागत कम करना चाहती हैं, भारत जैसे देशों से औनलाइन काम कराती हैं. मगर अगर एंप्लौयर सामने नहीं है तो इस का मतलब यह नहीं है कि आप कैसा भी काम कर के दे दें. जब मन आए तब करें और काम में एक्यूरेसी न हो. जी हां, ऐसा बिलकुल नहीं चलेगा. औनलाइन कमाई के लिए और भी कुछ बातें ध्यान में रखनी जरूरी हैं. तो सब से पहले उन वैबसाइट्स की लिस्ट बनाएं जहां से आप को फ्रीलांसिंग के तौर पर काम मिल सकता है. इंटरनैट पर ऐसी अनेक साइट्स उपलब्ध हैं, बस, आप को अपनी जरूरत के अनुसार इन्हें ढूंढ़ना है.

सोशल मीडिया पर प्रेम खतरा मोल न लें

दुनिया के अलगअलग कोने में बैठे लोगों के दिलों के तार जोड़ने वाली ये सोशल नैटवर्किंग साइट्स कई बार दिल जोड़ने के साथसाथ दिल तोड़ने और किसी बड़ी मुसीबत का सबब भी बन जाती हैं. इसलिए ध्यान दें कि कहीं कोई आप को अपने प्रेमजाल या फिर प्यार की लुभावनी बातों में तो नहीं फंसा रहा है. सच तो यह है कि इन सोशल नैटवर्किंग साइट्स की दोस्ती बुरी नहीं है, लेकिन असली जिंदगी की तरह यहां भी सावधानी बरतने की जरूरत है. दरअसल, फेसबुक जैसी साइट्स पर दोस्त बनाने के चक्कर में लोग बिना सोचेसमझे फ्रैंड रिक्वैस्ट एक्सैप्ट कर लेते हैं. यहीं से खतरे की घंटी बजनी शुरू हो जाती है. यह दोस्ती कब प्यार में बदल जाती है पता ही नहीं चलता और इस दौरान लोग अपनी तसवीरों से ले कर निजी राय भी शेयर कर बैठते हैं, जो कई बार खतरनाक साबित होता है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है इसलिए ऐसे लोगों से चौकस रहने की जरूरत है. आइए, जानें कैसे सावधानी बरत कर हम इन साइट्स का बेहतर लाभ उठा सकते हैं :

प्रेम में जरा संभल कर

ब्लाइंड ट्रस्ट न करें : विश्वास करना बुरी बात नहीं है. आखिर विश्वास से ही तो रिश्ते गहरे बनते हैं. लेकिन वह विश्वास इतना अंधा भी नहीं होना चाहिए कि आप हर चीज को जानतेबूझते इग्नोर करें. अगर साथी की किसी बात पर कोई शक हो रहा है तो उसे इग्नोर न करें बल्कि शक की तह तक जाएं और अच्छी तरह जांचपरख लें. कई बार शक बिलकुल सही निकलता है इसलिए आंखें खोल कर रिश्ते को आगे बढ़ाएं.

– मिलने की जल्दबाजी दिखाने वालों से सतर्क रहें.

– आप की पर्सनल जानकारी चाहने वालों से सतर्क रहें.

किसी को राजदार बनाएं : अपने इस सोशल मीडिया पर बने बौयफ्रैंड को सिर्फ अपने तक ही सीमित न रखें, बल्कि अपनी किसी खास दोस्त, बहन या अन्य किसी से इस बारे में डिस्कस जरूर करें. खासकर जब आप उस से फर्स्ट मीटिंग की प्लानिंग कर रही हों, ताकि वे आप को सही सलाह दे सकें, क्योंकि कई बार हम भावनाओं में इतना बह जाते हैं कि सहीगलत का अंदाजा नहीं लगा पाते. ऐसे में सच्चा दोस्त ही सही राह दिखाता है और खतरे में फंसने से बचाता भी है. इसलिए अपनी बातें किसी एक से शेयर जरूर करें.

प्रेमी को बुलाएं खुद न जाएं : अगर प्रेमी मिलने की बात करता है और आप को अपने शहर बुलाता है तो उसे साफ मना कर दें कि मैं कहीं नहीं जाऊंगी, बल्कि प्रेमी को अपने शहर बुलाएं. किसी दूसरे शहर जा कर युवक से मिलना न आप के लिए सुविधाजनक होगा और न ही सेफ. दूसरे शहर में कई तरह की परेशानियां होती हैं. ये सब बातें अपने बौयफ्रैंड को समझाएं और उसे अपने शहर आने के लिए कहें.

पब्लिक प्लेस में ही मिलें : यदि वह आप के ही शहर का है और मिलने के लिए किसी सुनसान जगह या फिर अपने दोस्त आदि के फ्लैट पर बुला रहा है तो इस के लिए उसे मना कर दें और कहें कि मैं पब्लिक प्लेस पर ही ज्यादा कंफर्टेबल महसूस करती हूं और खुल कर बातचीत कर सकती हूं. आप अपनी बात पर कायम रहेंगी तो उसे आप की बात माननी पड़ेगी. आप अकसर जिस रैस्टोरैंट और एरिया में जाती हैं उसे मिलने के लिए वहीं बुलाएं या फिर भीड़भाड़ वाले स्थान जैसे मौल आदि में मिलें और अपने किसी करीबी को साथ ले कर जाएं, अकेले कभी न मिलें.

प्रेम और आकर्षण में फर्क समझें : आप अपना मन अच्छी तरह टटोल लें कि क्या आप उस युवक को प्यार करती हैं या सिर्फ यह एक आकर्षण मात्र है, हो सकता है कि फेसबुक या अन्य किसी सोशल साइट के जरिए जानपहचान होने के बाद आप ने एकदूसरे से बातचीत की हो और आप दोनों को चैटिंग करते हुए वक्त बिताना अच्छा लगता हो और फिर इस तरह की बातचीत का क्या भरोसा कि उस ने आप से कितना सच बोला. अगर यह वास्तव में एकदूसरे के प्रति आकर्षण है तो इस का भूत कुछ दिन में ही उतर जाएगा और फिर उस से प्रेम संबंध बनाने का कोई फायदा नहीं. इसलिए पहले यह समझ लें कि आप उस से वाकई प्रेम करती हैं और सीरियसली उस के बारे में सोच रही हैं या सिर्फ टाइम पास कर रही हैं. कहीं ऐसा न हो कि वह तो सीरियस हो जाए और फिर आप उस से पीछा छुड़ाना भी चाहें तो वह न छोड़े.

फिजिकल न हों : अगर उस औनलाइन फ्रैंड से आप का मिलनाजुलना हो गया है तो हमेशा अपनी एक सीमा में रहें. यदि साथी फिजिकल होने की कोशिश करता है या ऐसी कोई डिमांड रखता है तो आप भावनाओं में बह कर गलत कदम न उठाएं और न ही ऐसा सोचें कि यदि साथी नाराज हो गया तो फिर क्या होगा. एक बात हमेशा याद रखें कि अगर वह युवक सही है तो आप के एक बार मना करने पर आप की बात जरूर समझेगा और अपनी मर्यादा में रहेगा, क्योंकि आप एकदूसरे के साथ अगर पूरी लाइफ बिताने की प्लानिंग भी कर रहे हैं तो कुछ समय इंतजार तो किया ही जा सकता है. यदि ऐसा नहीं है तो फिर दोस्त के साथ ऐसा कर के प्रैगनैंसी आदि की मुसीबत मोल न लें.

अपने पर्सनल फोटो शेयर न करें : यदि साथी आप से डिमांड कर रहा है कि आप उसे अपने कुछ न्यूड फोटोज भेजें या फिर कोई स्पैशल ड्रैस पहन कर फोटो भेजने की बात करता है तो ऐसा कतई न करें. यह सेफ नहीं है. आप द्वारा भेजी गई तसवीरों का वह गलत इस्तेमाल भी कर सकता है. सिर्फ अपने ही नहीं बल्कि अपनी फैमिली मैंबर्स के फोटो भी शेयर करने से बचें. अपने परिवार की इन्फौर्मेशन किसी अनजान को देना उचित नहीं है.

नौनवेज चैट न करें : साथी से क्लोज होने का मतलब यह नहीं कि जो मन में आएं बातें करें. आप एकदूसरे के सामने बैठ कर नहीं बल्कि नैट के जरिए चैटिंग कर रहे हैं और आजकल टैक्नोलौजी इतनी आगे निकल चुकी है कि आप की चैट किसी दूसरे द्वारा पढ़ना कोई मुश्किल नहीं है. वैसे भी यह सब लिखित में होगा तो क्यों ऐसी गलती की जाए जिस से बाद में खुद को ही प्रौब्लम हो.

इस बात का भी क्या भरोसा कि आज आप का अपने प्रेमी से जैसा रिश्ता है, कुछ समय बाद भी वैसा ही रहेगा. अगर यह रिश्ता ज्यादा न चल पाया या मनमुटाव हो गया और चिढ़ कर साथी ने आप के मेल आप के फ्रैंड्स या फैमिली मैंबर्स को भेज दिए या फिर उन का गलत इस्तेमाल किया तो फिर शर्मिंदगी आप को ही झेलना पड़ेगी, इसलिए ऐसा कोई काम न करें जिस का लिखित में कोई प्रमाण हो.

गिफ्ट का पेमैंट करने से मना कर दें: अगर साथी दूसरे शहर या विदेश से आप के लिए कोई महंगा गिफ्ट भेजता है और कहता है कि वह कस्टम में फंस गया है इसलिए आप कुछ पैसे दे कर उसे रिसीव कर लें तो ऐसा कतई न करें. अकसर मीडिया में इस तरह की खबरें आती रहती हैं जब साथी ने इस तरह बेवकूफ बना कर हजारोंलाखों लूट लिए. इसलिए समझदारी इसी में है कि ऐसे किसी चक्कर में न पड़ें. साथी को साफ कह दें कि आप के पास इतने पैसे नहीं हैं. आप को कुछ नहीं चाहिए और इस का पेमैंट वह अपने किसी दोस्त से करवा कर तब आप के पास भेजे.

गलती बरदाश्त न करें : यदि साथी की कुछ बातें आप को नापसंद हैं, कभीकभी वह अपनी बेतुकी हरकतों और बातों से आप को टौर्चर करता है या फिर कई बार उस का व्यवहार असामान्य सा लगता है, तो उसे बिलकुल भी इग्नोर न करें बल्कि उस से खुल कर बात करें और साफसाफ बता दें कि आप गलत बात किसी भी कीमत पर बरदाश्त नहीं करेंगी. अगर वह आप से कुछ ऐसा करने को कहता है जो आप के उसूलों के खिलाफ है तो उस के दबाव में न आएं, बल्कि उसे स्पष्ट रूप से मना कर दें.

युवक के घर वालों से मिलें : अगर आप उस युवक से शादी के लिए सीरियस हैं, तो उस के घर वालों और छोटे बहनभाइयों से मिलें. संभव हो तो उस के घर भी जाएं. इस से आप को पता चल जाएगा कि वह फैमिली वाला है या नहीं. इस से उस की सीरियसनैस भी पता चलेगी और आप को रिश्ते को आगे बढ़ाने का एक पुल भी मिल जाएगा.

शादी की बात पर परिवार वालों को बीच में लाएं

अगर आप दोनों शादी की बात सोच रहे हैं तो स्थिति चाहे जो भी हो आप भाग कर या मंदिर आदि में शादी कतई न करें बल्कि इस के लिए अपने और उस के घर वालों के सामने बात करें. अगर वह युवक सही है तो आप के घर वाले भी मान ही जाएंगे, इसलिए उन से छिपा कर ऐसा कोई काम न करें जो आप के लिए अच्छा न हो. वे आप के मातापिता हैं और जो कहेंगे, सोचेंगे वह आप के भले के लिए ही होगा.

क्या खतरे हैं

–       दिल टूट सकता है.

–       रेप हो सकता है.

–       जान भी खतरे में पड़ सकती है.

–       बदनामी का डर रहता है.

–       ब्लैकमेलिंग का खतरा रहेगा.

खतरे से कैसे बचें

प्रोफाइल देख कर फैसला न करें : अकसर लोग मैट्रिमोनियल साइट पर मौजूद प्रोफाइल और तसवीर को देख कर ही फैसला कर लेते हैं, पर कई बार तो लोग अपना प्रोफाइल प्रभावी बनाने के लिए गलत जानकारियां भी डाल देते हैं. ऐसे में सिर्फ प्रोफाइल देख कर चैटिंग करतेकरते प्यार के जाल में फंस कर मिलने का फैसला न करें.

सर्चिंग का फंडा अपनाएं : अगर किसी का प्रोफाइल पसंद आ भी जाए तो उस से तुरंत संपर्क करने के बजाय पहले ट्विटर, फेसबुक आदि के जरिए उस के बारे में जानकारी हासिल करें. गूगल के 4-5 पेज पीछे तक जा कर सर्च करें. इस से साथी के अतीत के बारे में भी जानकारी मिल जाएगी. उस की फ्रैंडलिस्ट में जा कर उस के दोस्तों से भी बातचीत करें. इस से पता चल जाएगा कि वह कैसा व्यक्ति है जिस के साथ आप इतना आगे बढ़ना चाहती हैं.

रिलेशनशिप में जल्दबाजी न करें : हर मैट्रिमोनियल साइट पर संभावित साथी में दिलचस्पी दिखाने और संपर्क स्थापित करने का विकल्प होता है. पहले सिर्फ उस में दिलचस्पी का विकल्प चुनें. फिर दूसरे पक्ष से गंभीर जवाब मिलने के बाद ही संपर्क स्थापित करें.

चैट करें संभल कर : अगर किसी साथी से बातचीत करना आप को बहुत अच्छा लगने लगा है और आप के मन में प्यार की  पींगें बढ़ने लगी हैं तो भी चैट संभल कर करें.

पर्सनल इन्फौर्मेशन पर्सनल ही रखें : फेसबुक, गूगल प्लस इत्यादि सोशल मीडिया वैबसाइट्स की सिक्योरिटी सैटिंग्स में जा कर देख लें कि आप की कौनकौन सी जानकारियां सार्वजनिक हो रही हैं. आप उन सैटिंग्स को बदल कर उन्हें नियंत्रित कर सकती हैं.

सोशल मीडिया पर बने दोस्त की जांचपड़ताल करें

–       फ्रैंड की फ्रैंड लिस्ट में जा कर एक बार उस के दोस्तों को जरूर चैक करें. इस से थोड़ा आइडिया हो जाएगा कि उस के दोस्त किस तरह के हैं.

–       असली फ्रैंड्स खुल कर बात करते हैं और अगर आप के फ्रैंड के अकाउंट पर विदेशी दोस्तों की भरमार है तो यह फेक भी हो सकते हैं.

–       रियल अकाउंट की फ्रैंडलिस्ट में फैमिली और औफिस के लोग भी जरूर होते हैं. फेक और रियल में अंतर समझें

–       रिक्वैस्ट भेजने वाले से पूछें कि वह आप का फ्रैंड क्यों बनना चाहता है और उसे आप का प्रोफाइल कैसे मिला?

–       प्रोफाइल पर जा कर कौमन फ्रैंड या फिर फौलोवर्स देखें. अगर कोई कौमन फ्रैंड है तो उस से जानकारी लें.

–       प्रोफाइल अच्छी तरह पढ़ें और जानकारियों के आपसी संबंध की जांच करें.

–       प्रोफाइल फोटो सेव कर गूगल पर इमेज सर्च करने की कोशिश करें कि क्या यह वास्तविक फोटो है या किसी दूसरे की तसवीर यूज की गई है.

–       फेसबुक पर रियल फोटो शेयर न करने वाले अकसर शक के दायरे में रहते हैं, क्योंकि उन के फेक होने के चांस ज्यादा होते हैं.

– रिक्वैस्ट भेजने वाले की फ्रैंडलिस्ट चैक करें. अगर संख्या ज्यादा है और उस में प्रोफाइल के मुताबिक दोस्त नहीं हैं तो रिक्वैस्ट एक्सैप्ट न करें.

–       वाल चैक करें कि रिक्वैस्ट भेजने वाला किस तरह की पोस्ट डालता है. अश्लील या संदिग्ध पोस्ट होने पर इसे ब्लौक कर दें.

–       कई लोग एकसाथ फेक अकाउंट भी चलाते हैं और देखने पर यह दोस्तों का ग्रुप लगता है, जबकि यह एक ही व्यक्ति होता है. ऐसे ग्रुप से बचें.

अनफ्रैंड करने में देर न करें

–       अगर आप को अपने साथी पर जरा सा भी शक है तो प्यार में भावुक हो कर फैसला न करें, बल्कि प्रैक्टिकल हो कर सोचें और फेसबुक पर बने उस फ्रैंड को तुरंत अनफ्रैंड कर दें.

–       दूर बैठा फेक दोस्त आप की फ्रैंडलिस्ट में मौजूद रह कर अन्य लोगों को भी नुकसान पहुंचा सकता है

फर्जी प्रोफाइल का पता ऐसे लगाएं

सोशल साइट्स पर अपनी पहचान छिपाने या गलत पहचान शो करने के चलते इसराईल की एक कंपनी ने ऐसा सौफ्टवेयर तैयार किया है, जो फेसबुक पर फर्जी अकाउंट पहचानने में मदद करेगा. ‘फेकऔफ’ नाम के इस ऐप द्वारा आप उन फर्जी प्रोफाइल्स का पता लगा सकते हैं जिन्हें आप ने अपने औनलाइन फ्रैंड्स समझ कर ऐड कर लिया था.

सोशल मीडिया के जरिए हुए प्रेम में अपराध

 

–       16 अक्तूबर, 2015 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी की एक युवती की कुछ माह पहले फेसबुक पर एक युवक से दोस्ती हुई थी. आरोपी युवक ने अपना नाम और खुद को ब्रिटेन का रहने वाला बताया. उस ने युवती को अपने प्रेम जाल में फंसाया और शादी की बात की.

इस के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई. कुछ माह बाद उस ने युवती को बताया कि विदेश से उस ने एक बहुत महंगा गिफ्ट युवती के लिए भेजा था जो दिल्ली एयरपोर्ट पर कस्टम वालों ने रोक लिया है. कस्टम ड्यूटी देने के बाद गिफ्ट उसे मिल जाएगा. इस के बाद आरोपी ने युवती को एक बैंक खाता दिया और उस में रुपए जमा करा लिए. भोलीभाली युवती आरोपी के झांसे में आ गई और उस ने उस खाते में रुपए भी जमा करा दिए. इस तरह आरोपी ने युवती से गिफ्ट के बहाने कई बार में करीब 3 लाख 45 हजार रुपए ऐंठे.

–       18 अक्तूबर, 2015 को लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में एक और नाइजीरियन के खिलाफ ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई. गोमतीनगर और सीतापुर में रहने वाली 2 महिलाओं को एक नाइजीरियन ने अपने प्रेमजाल में फंसाया और खुद को कई फैक्ट्रियों का मालिक बताया. उस ने इन महिलाओं से करीब 20 लाख रुपए की ठगी की. शिकायत पर साइबर सैल की टीम ने आरोपी को दबोचने के लिए टीम बनाई.

–       18 अक्तूबर, 2015 को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक व्यापारी की पुत्री को झांसी के प्रदीप पोरवाल उर्फ शंकर ने अपने प्रेमजाल में फंसाया. फेसबुक पर लगातार हो रही बातचीत के चलते दोनों में नजदीकियां बढ़ीं और शारीरिक संबंध भी बन गए. इस दौरान शंकर ने उस का अश्लील वीडियो बना लिया. शंकर ने अपनी मां की बीमारी का हवाला दे कर उस से साढ़े 3 लाख रुपए ऐंठ लिए. इस के बाद भी वह लगातार पैसे की डिमांड करता रहा.

जब युवती ने और पैसे देने से इनकार कर दिया तो उस ने युवती को धमकी दी कि वह उस की सारी तसवीरें लोगों को दिखा देगा. साइबर टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शंकर को हिरासत में ले लिया. पूछताछ के दौरान जांच में उस के लैपटौप से 15 अन्य लड़कियों की तसवीरें और फोन नंबर मिले.

–       फरवरी, 2014 को मुंबई की एक युवती कासगंज के एक फेसबुक फ्रैंड के जाल में ऐसी फंसी कि वैलेंटाइन डे पर सबकुछ छोड़ कर के उस के पास चली आई. स्टेशन पहुंची तो प्रेमी के चेहरे का दीदार हुआ. उस के चेहरे के पीछे दूसरा चेहरा छिपा था. युवती का अपहरण कर लिया गया. युवक ने युवती का फोन कब्जे में ले कर उस में दूसरी सिम डाल कर युवती के भाई को फिरौती के लिए फोन कर दिया. बाद में मुंबई पुलिस ने छापा मार कर युवती को मुक्त कराया.

…तो इस खिलाड़ी से होगा विजेन्दर का मुकाबला

प्रो मुक्केबाजी में लगातार छह मुकाबले नॉकआउट अंदाज में जीत चुके भारत के प्रो मुक्केबाज विजेन्दर सिंह विश्व मुक्केबाजी संगठन (डब्ल्यूबीओ) के एशिया सुपर मिडिलवेट चैम्पियनशिप मुकाबले में 16 जुलाई को ऑस्ट्रेलिया के कैरी होप के खिलाफ रिंग में उतरेंगे. इस बात की घोषणा कर दी गई है. 30 वर्षीय विजेंदर का यह छठवां पेशेवर मुकाबला होगा. वह इससे पहले अपने पांचों पेशेवर मुकाबलों में जीत हासिल कर चुके हैं.

पेशेवर मुक्केबाजी में कदम रखने के बाद भारत के मुक्केबाज विजेंदर सिंह पहली बार अपनी सरजमीं पर मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. मुकाबला पहले 11 जून को होना था, लेकिन संसाधन संबंध कुछ वजहों से इसे टाल कर 16 जुलाई को कराने का फैसला किया गया. मुकाबला त्यागराज स्टेडियम में होगा.

विश्व के पूर्व नंबर एक मुक्केबाज, 2008 ओलम्पिक में कांस्य पदक जीतने वाले और 2009 में विश्व चैम्पियनशिप जीतने वाले विजेंदर के पेशेवर करयिर का यह अभी तक का सबसे कड़ा मुकाबला होगा. उनके विपक्षी आस्ट्रेलिया के होप के पास 12 वर्षो का विशाल अनुभव है.

विजेंदर ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, “मैं भारत में मुकाबले के लिए उत्साहित हूं. अपने घर में अपने लोगों के सामने रिंग में उतरने के लिए यह मेरे लिए खास मौका होगा. इसलिए मैं आराम नहीं कर रहा हूं और लगतार अभ्यास कर रहा हूं क्योंकि मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहता हूं.”

वेल्स में पैदा हुए होप पूर्व मिडिलवेट यूरोपियन चैम्पियन हैं और उन्होंने अपने 30 मुकाबलों में से 23 में जीत हासिल की है. उनके पास 183 राउंड का अनुभव है जो कि विजेंदर से कहीं ज्यादा है.

होप ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, “वह (विजेंदर) पेशेवर मुक्केबाजी में पिछले एक साल से हैं. इससे पहले उन्होंने ओलम्पिक में पदक भी हासिल किया था और वह विश्व चैम्पियनशिप में भी विजेता रहे थे, लेकिन मैं यह सब पहले से देख चुका हूं. मेरे पास 12 वर्षों का अनुभव है. मैं जानता हूं कि उन्हें लोगों का समर्थन मिलेगा, लेकिन मुझे मुकाबले में कमजोर बताया जाना पसंद है. दबाव उन पर है, उन्हें ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है.”

उन्होनें यह भी कहा कि “मैं विश्व नंबर तीन रह चुका हूं. मैंने उनकी उपलब्धियों के बारे में सुना है, लेकिन वह एमैच्योर रहते हुए हासिल की गई थीं. पेशेवर मुक्केबाजी में मेरे पास काफी अनुभव है.”

विजेंदर ने कहा, “मैंने अभी तक अच्छा प्रदर्शन किया है. मुझे पेशेवर मुक्केबाजी में आए हुए 12 महीने हो गए हैं, इसलिए मेरे पास अनुभव है. समय बताएगा कि 16 जुलाई को क्या होगा, इंतजार कीजिए.”

मुकाबले की प्रायोजन भारत की इनफिनिटी ओपटिमल सोल्यूशन (आईओएस) और ब्रिटेन की क्वींसबेरी प्रमोशन कर रहे हैं.

आईओएस के निर्देशक नीरव तोमर ने कहा, “हमें स्टेडियम खचाखच भरा होने की उम्मीद है. टिकट की कीमत 1000 से 15,000 रुपये तक है. यह भारतीय मुक्केबाजी इतिहास में शायद सबसे बड़ा पल है.”

इस मुकाबले का पहला टिकट भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज और विजेंदर के दोस्त वीरेंद्र सहवाग को दिया गया. सहवाग ने मुकाबले के लिए दोनों खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं.

विजेंदर इस समय शानदार फॉर्म में

विजेंदर के सामने उनकी अब तक की सबसे बड़ी चुनौती होगी क्योंकि उनके विपक्षी होप के पास 12 वर्षों का अनुभव है. होप के लिए विजेंदर के खिलाफ खेलना आसान नहीं होगा क्योंकि भारतीय खिलाड़ी इस समय शानदार फॉर्म में हैं, लेकिन होप का मानना है कि वह विजेंदर को आसानी से हरा देंगे क्योंकि उनके पास भारतीय खिलाड़ी से ज्यादा अनुभव है.

होप अनुभव के मामलें में विजेंदर पर हावी

होप ने कहा, मेरे लिए यह मुकाबला बड़ा है. मैं पहली बार सुपर मिडिलवेट चैम्पियनशिप में खेल रहा हूं, लेकिन मेरे पास अपने पिछले मुकाबलों का अनुभव है. मैं इस मुकाबले में खिताब जीतना चाहता हूं. होप अनुभव के मामलें में विजेंदर पर हावी हैं. उनके पास 12 साल की पेशेवर मुक्केबाजी का अनुभव है. उन्होंने अभी तक खेले 30 मुकाबलों में से 23 में जीत हासिल की है और 183 राउंड खेले हैं, लेकिन होप अपने घर से बाहर विजेंदर के घर, भारत में खेल रहे हैं. उनसे जब पूछा गया कि क्या घर से बाहर खेलना उनके लिए मुश्किल साबित हो सकता है तो उन्होंने कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं होगा.

भारत में पहला मुकाबला खेलेंगे होप

होप ने कहा, मैंने अलग-अलग देशों में मुकाबले खेले हैं. मैं भारत में पहला मुकाबला खेलूंगा. मैं अच्छी शुरुआत करना चाहता हूं. रिंग में सिर्फ मैं और वह (विजेंदर) होंगे, और कोई नहीं. होप से जब पूछा गया कि विजेंदर के खिलाफ उनका मजबूत पहलू क्या है तो उन्होंने कहा, बेशक मेरा अनुभव. मुझे इसका फायदा मिलेगा. यह हमारे मुकाबले में अहम भूमिका निभाएगा.

उनसे जब विजेंदर के खिलाफ रणनीति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, हां, मैं इस पर काम कर रहा हूं, लेकिन जैसा मैंने पहले कहा, मेरे पास अनुभव है. मैं रातों रात अपने आप में बदलाव कर सकता हूं. मैं जब देखूंगा की वह क्या कर रहे हैं तो हो सकता है मैं अपनी रणनीति बदल लूं.

विजेंदर का सामना बाएं हाथ के खिलाड़ी से

होप बाएं हाथ के खिलाड़ी हैं. मुकाबले में उनका बायां हाथ ज्यादा सक्रिय रहता है. विजेंदर का सामना बाएं हाथ के खिलाडिय़ों से बहुत कम हुआ है. क्या इसका फायदा विजेंदर के खिलाफ उन्हें मिल सकता है, इस सवाल पर होप ने कहा, हो सकता है, लेकिन इसके अलावा भी काफी चीजें होती हैं. मेरा ध्यान इस पर नहीं है.

विशाल और अदभुत देश अमेरिका

पर्यटन के लिए विश्व के 212 देशों में यदि आप सर्वोत्तम देश की तलाश में हैं तो मैं कहूंगी कि संयुक्त राज्य अमेरिका देखिए. 50 सुंदर राज्यों से गठित, 30 करोड़ की आबादी वाले और भारत के मुकाबले तीनगुना क्षेत्रीय विस्तार वाले इस अनोखे जनतंत्र की सैर से आप वाकई चमत्कृत हो जाएंगे. फिर भी आप अगर पूछें कि अमेरिका ही क्यों, तो मेरा जवाब इस प्रकार है :यह देश न केवल बेहद खूबसूरत और साफसुथरा है बल्कि आज के दहशत भरे आतंकवाद से पूरी तरह मुक्त भी है. हम भारतीयों के लिए तो यह और खास है क्योंकि अमेरिका में अंगरेजी बोली जाती है. अत: घूमनेफिरने और संवाद के लिए हमारा अंगरेजी ज्ञान उपयोगी है. बड़े शहरों में सड़कों पर आप को भारतीय भी दिखेंगे जिन से यदि जरूरत हो तो मार्गदर्शन सहज मिल जाता है. और हां, यूरोपीय देशों के मुकाबले अमेरिका कम महंगा है. अमेरिका में हर जगह लोग इज्जत से पेश आते हैं.

अमेरिका में कुदरत के खुले नजारों का साक्षात अनुभव सच में एक अलग एहसास करने की चीज है. मैं तो कहूंगी कि अमेरिका के कई स्थल तो कश्मीर से भी ज्यादा हसीन हैं. वर्षा यहां नियमित नहीं होती. अत: मौसम के अनुसार कपड़ों के साथ छाता रख लेना भी समझदारी होगी. और हां, विमान में घर से खाना ले जाने की जरूरत नहीं, क्योंकि इंटरनेशनल एअरलाइंस से टिकट लेते समय यह साफ लिखवा दीजिए कि आप को वेज, नानवेज, कम कैलोरी, कम कोलेस्टराल या कम फैट वाला कैसा भोजन चाहिए. हां, यात्रा में नियमित व जरूरत पड़ने पर काम आने वाली दवाएं रखना अक्लमंदी होगा. पर याद रखें, सिर्फ पैकिंग सहित दवाएं ही ले जाएं. वह भी कैशमीमो के साथ. अमेरिकी इमिग्रेशन पार करते ही आप इन्हें इस्तेमाल कर सकते हैं.

यह मुमकिन नहीं कि आप एक ही बार में इतने बड़े अमेरिका की सैर कर लें. इसलिए आप को अपनी यात्रा की सही रूपरेखा पहले ही बना लेनी होगी. आप को स्वयं तय करना होगा कि आप क्याक्या देखना पसंद करेंगे. अमेरिका में देखने योग्य अनेक स्थल हैं जिन में विश्व के कई मौजूदा आश्चर्य भी शामिल हैं. चौंकिए मत, हमारी बात सही है. हैंपशायर की ए.ए. पब्लिशिंग कंपनी द्वारा प्रकाशित ‘100 ग्रेट वंडर्स आफ द वर्ल्ड’ में बताया गया है कि भारत के 2 आश्चर्यों (ताजमहल तथा लालकिला) के मुकाबले अमेरिका में पूरे 15 आश्चर्य हैं. पुस्तक में क्रम से इन के नाम हैं : न्याग्रा प्रपात, स्टैच्यू आफ लिबर्टी, लिंकन मेमोरियल, माउंट रशमोर, एंपायर स्टेट बिल्डिंग, जायोन नेशनल पार्क, हूवर डैम, गोल्डन गेट ब्रिज, सैनफ्रांसिस्को, डैविल्स टावर, योसमाइट नेशनल पार्क, द ग्रैंड कैन्यन, रेडवुड्स एंड जाइंट सेक्वाय, मीटियोर क्रेटर, द एवरग्लेड्स, हवाई आइलैंड्स.

मैं बता दूं कि इन आश्चर्यों में 7 हम ने देखे तो दांतों तले उंगली दबाई. मजे की बात तो यह कि इन में कुदरती तथा मानव निर्मित दोनों स्थल ऐसे संवारे गए हैं कि इन का नजारा देखते ही बनता है. अमेरिका में सैकड़ों स्थल अथवा वस्तुएं ऐसी हैं जो आश्चर्यों में भले शामिल न हों पर ये भी कम नहीं. मसलन, मयामी बीचेज, डिजनीवर्ल्ड, डिजनीलैंड, लास वेगास (गेमिंग सिटी), टाइम्स स्क्वायर, आर्लिंगटन सिमेट्री, हालीवुड आदि भी खूब चित्ताकर्षक हैं. तो मित्रो, अब आप ने अगर अमेरिका की सैर का मन बना लिया है तो निश्चय कर लीजिए कि कहां से यह सैर शुरू करेंगे. जी हां, भारत से आप न्यूयार्क, वाशिंगटन, लास एंजिल्स अथवा शिकागो सीधे जा सकते हैं.

विश्व की राजधानी से कीजिए शुरुआत : आप न्यूयार्क से पर्यटन शुरू करें जो मुंबई की तरह अमेरिका की आर्थिक रीढ़ है. न्यूयार्क की ऐतिहासिक महानता के पीछे इस की जबर्दस्त विविधता है. 100 से ज्यादा देशों की 300 भाषाएं बोलने वाले सभी लोग यहां सद्भाव से रहते हैं जिन में 10 प्रतिशत एशियन हैं. यहां शान से खड़ी ‘स्टैच्यू आफ लिबर्टी’ और सब से ऊंची ‘एंपायर स्टेट बिल्डिंग’ तो देखिए ही, ब्राडवे सड़क की सैर करते न्यूयार्क स्टाक एक्सचेंज, टाइम्स स्क्वायर, राकफेलर सेंटर, सेंट पैट्रिक्स कैथीड्रल, राष्ट्रसंघ मुख्यालय, इंट्रेपिड म्यूजियम तथा सेंट्रल पार्क का लुत्फ लेना भी न भूलिए. और हां, न्यूयार्क का ब्रुकलिन ब्रिज, सीपोर्ट म्यूजियम, म्यूजियम आफ नैचुरल हिस्ट्री तथा म्यूजियम आफ माडर्न आर्ट देखना भी जरूरी समझिए.

समय कम होने के चलते आप गेम्स सिटी लास वेगास नहीं जा पा रहे हैं तो कोई बात नहीं. न्यूयार्क से 150 मील दूर ‘अटलांटिक सिटी’ चले जाइए. वहां भी खेलने वाली मशीनों का आनंद बखूबी लिया जा सकता है. न्यूयार्क के उत्तर में 6-7 घंटे की बस यात्रा द्वारा विश्व का एक बड़ा आश्चर्य न्याग्रा प्रपात को देखना भी मत भूलिएगा. न्यूयार्क राज्य में ही मौजूद 10 हजार साल पुराने ये फाल्स बहुत ही खूबसूरत हैं. और हां, न्यूयार्क शहर की हड्सन नदी के उस किनारे न्यू जर्सी है जहां का लिबर्टी साइंस सेंटर भी मशहूर है. यह स्थान दूर नहीं, समय हो तो जरूर देख आइए.

अत्यंत सुंदर वाशिंगटन : आइए, अब न्यूयार्क से आप को लग्जरी बस में बैठा कर हम लगभग 40 किलोमीटर दूर 2 सदियों के इतिहास वाली अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन ले चलते हैं.

दिल्ली से बहुत कुछ मिलताजुलता है वाशिंगटन. कम ऊंची बिल्डिंगें, खुलापन, संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रपति भवन (वाइट हाउस) आदि यहां के दर्शनीय स्थल हैं. वाशिंगटन की एक खास विशेषता है यहां का इतिहास बखान करते भव्य मेमोरियल (स्मारक), जिन में प्राचीन यूनानी तर्ज पर निर्मित लिंकन मेमोरियल तो अत्यंत विस्मयकारी है. पोटोमैक नदी पर बसी इस राजधानी में कई  दर्शनीय म्यूजियम भी हैं जिन में स्मिथसोनियन संस्था के 30 वर्ष पुराने नेशनल स्पेस एंड एअर म्यूजियम ने हमें सब से ज्यादा प्रभावित किया. इस में प्रवेश करते ही हम ने पहले साक्षात चंद्रमा को छुआ. जी हां, अमेरिकी चंद्रयात्रियों द्वारा लाई गई चंद्र चट्टानों का एक गोल टुकड़ा प्रवेश कक्ष के बीचोंबीच रखा हुआ है.

आकाश और अंतरिक्ष की भव्यता के रोमांच का एहसास कराता यह म्यूजियम हमें भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा के इन शब्दों से कायल कर देता है कि सचमुच पृथ्वी का भविष्य अंतरिक्ष में है. लिंकन मेमोरियल के सामने बने आर्लिंगटन मेमोरियल ब्रिज द्वारा पोटोमैक नदी को पार कर कुछ ही दूर आप वर्जीनिया राज्य में पाएंगे एक सर्वथा अविश्वसनीय मगर भावुक दृश्य, जिस का नाम है आर्लिंगटन नेशनल सिमेट्री. वर्जीनिया राज्य में स्थित विश्व की विशालतम कब्रगाह में देश पर शहीद हर अमेरिकन की समाधि स्थापित है. इन में राष्ट्रपति कैनेडी की कब्र है तो कल्पना चावला के नाम का अनूठा पत्थर भी है जिस में कल्पना व कोलंबिया शटल के सभी बहादुर साथियों को भावपूर्ण शब्दों में याद किया गया है.

हालीवुड और डिजनीलैंड : अमेरिका के पूर्वी भाग से अब हम आप को ले कर चलते हैं पश्चिम की ओर. करीब 6 घंटे की उड़ान के बाद जब आप हालीवुड शहर लास एंजिल्स पहुंचेंगे तो वाकई खुश हो जाएंगे.

यहां आप देखिए, हालीवुड जहां सड़क के किनारे पेवमेंट पर आप के चहेते अभिनेता- अभिनेत्रियों के बचपन के चित्र गोदे गए हैं. इस क्षेत्र का एक मशहूर कोडिक आडिटोरियम भी बेहद दर्शनीय है जहां फिल्मी आस्कर आदि पुरस्कार वितरित किए जाते हैं. हां, लास एंजिल्स में आप ने अगर डिजनीलैंड नहीं देखा तो सच में पछताएंगे. यह तो ऐसा परीलोक है जहां बच्चे तो क्या, बड़े भी यहां के नजारे देख कर नहीं थकते. हमें यहां का मिकी माउस, डोनाल्ड डक, टौम एंड जैरी आदि पात्रों की परेड एक अद्भुत शोभायात्रा लगी. पश्चिमी क्षेत्र में ही आप को जायोन नेशनल पार्क, हूवर डैम, गोल्डन गेट ब्रिज, योसमाइट नेशनल पार्क, गै्रंड कैन्यन, रेड वुड्स तथा मीर्टियोर क्रेटर जैसे आश्चर्य दिखेंगे. धूपछांव बादलों के साए गैंड कैन्यन का प्राकृतिक नजारा इतना मोहक था कि बस, देखते ही रह गए. पहाडि़यों को काटती हुई जब नदी बहती है तो कैन्यन बनता है. ग्रैंड कैन्यन के कई शिखरों को भारतीय नाम दिए गए हैं. इसी ट्रिप में हम लास वेगास तक भी हो आए.

100 रुपए हर रोज में ऋषिकेश घूमें

पहाड़ी वादियों में बसा ऋषिकेश इतना खूबसूरत है कि हर  किसी का मन वहां जाने को करेगा. पहाडि़यों के बीचोंबीच अठखेलियां करती गंगा की लहरें व ठंडी आबोहवा हर किसी का मनमोह लेती है तभी तो छुट्टियां शुरू होने से पहले ही लोग ऋषिकेश घूमने का प्रोग्राम बनाना शुरू कर देते हैं. खासतौर से ऋषिकेश किशोरों को बहुत भाता है. वे जम कर यहां मस्ती करते हैं, लेकिन मस्ती और आनेजाने के लिए  जब आप की जेब में एक दिन के लिए सिर्फ 100 रुपए ही हों तो आप को अपनी यात्रा कैसे मैनेज करनी होगी, यह जानना भी बेहद जरूरी है.

अगर किशोर इस तरह से जुगाड़ लगा कर जाएं तो 100 रुपए प्रतिदिन से भी कम खर्च में इस शहर को घूम कर आ सकते हैं.

बैठाएं आनेजाने का जुगाड़

रोहित और उस के फ्रैंड्स आपस में कहीं घूमने जाने की प्लानिंग कर रहे थे कि इतने में सोहन बीच में आ टपका और घूमने जाने की बात सुनते ही नाच उठा. तभी रोहित उसे टोकते हुए बोला कि यार, जेब में पैसे बहुत कम हैं. तभी सोहन झट से बोल उठा कि मेरे रहते नो टैंशन, हम ऋषिकेश चलते हैं क्योंकि तुम्हें पता ही है कि मेरे पापा की बसें चलती हैं और वे खुद हफ्ते में 3 दिन वहां का चक्कर लगाते हैं. मैं बात कर लूंगा. हम सब उन्हीं के साथ चलेंगे, जिस से हमारी पौकेट भी ढीली नहीं होगी और हम मजा भी कर पाएंगे. सभी सोहन की बात सुन कर जोश से भर गए, क्योंकि उन के आनेजाने का मसला जो सौल्व हो गया था.

पैसेंजर ट्रेन से जाएं

अगर आप के पास ऋषिकेश जाने का कोई जुगाड़ नहीं है तो आप पैसेंजर ट्रेन का रुख करें, जिस में किराया भी कम लगता है और आप पौकेट मनी से मैनेज भी कर पाएंगे.

बैग पैक में खाने को भी करें शामिल

अगर पौकेट में कड़की है तो घर से ही बढि़या खाना बनवा कर ले जाएं, जिस से एक तरफ के खाने का खर्च तो बचेगा ही. कुछ चीजें जैसे मठरी, शकरपारे आदि ले लें ताकि चाय के साथ खा कर गुजारा हो सके. अगर सफर छोटा है तो ब्रैड और जैम भी साथ ले जा सकते हैं. इस तरह बाहर खाने पर आप को पैसे भी नहीं खर्च करने पडेंगे.

शेयरिंग में जाना बैस्ट

कम पैसों में अगर आप अकेले घूमने जाने का मूड बना रहे हैं तो अपना यह आइडिया फ्लौप ही समझें, क्योंकि अकेले व कम पैसों में कहीं बाहर घूमने जाना नामुमकिन है इसलिए आप अपने दोचार दोस्तों को साथ ले लें. इस से फायदा यह होगा कि चीजें मैनेज करने में आसानी होगी और साथ ही खर्च बराबरबराबर बंटने से आप ज्यादा ऐंजौय भी कर पाएंगे.

ठहरने का बंदोबस्त हो सस्ता

घर से तो निकल पड़े घूमने के लिए लेकिन वहां एक रात रुकने की व्यवस्था तो करनी ही पड़ेगी, ऐसे में आप होटल में रुकने के बजाय धर्मशाला में रुकें. ऐसी धर्मशाला ढूंढ़ें जिस में फ्री में रहने की व्यवस्था हो जाए. ऋषिकेश में आप को ऐसी कई धर्मशालाएं मिल जाएंगी, लेकिन आप को 3-4 धर्मशालाओं का चक्कर अवश्य लगाना पड़ेगा.

आश्रम में ठहरें

अगर आप की किसी आश्रम में जानपहचान है तो आप वहां ठहरने के साथसाथ खानेपीने व नाश्ते का जुगाड़ भी कर सकते हैं. बस, शर्त वहां ठहरने की यह होती है कि आप को वहां सफाई और टाइम का ध्यान रखना होगा. अरे भई, जब खानेपीने व रहने का फ्री में बंदोबस्त हो रहा है तो उस के लिए आप इतना तो कर ही सकते हैं. हां, आश्रम में आप पुरोहितों से बचें, क्योंकि कई आश्रमों में पूजा व चढ़ावे के नाम पर पैसा वसूला जाता है. ऐसे में साफ कह दें कि हम तो विद्यार्थी हैं, हमारे पास देने को कुछ नहीं है.

कहां कहां घूमें

यों तो पहाड़ी स्थान पर पगडंडी से ले कर पहाड़ की चोटी तक सौंदर्य बिखरा होता है, लेकिन कुछ परिचित स्थानों पर घूमना आनंददायी एहसास देने के साथसाथ रोमांचक भी साबित होता है. ऋषिकेश में आप इन स्थानों पर सैरसपाटा कर सकते हैं :

लक्ष्मण झूला

लक्ष्मण झूला 450 फुट लंबा ब्रिज है. वहां खड़े हो कर आप मनमोहक दृश्यों को निहार सकते हैं. अगर आप पानी के बीचोंबीच खड़े होने का लुत्फ उठाना चाहते हैं तो इस झूले पर जरूर जाएं. यह झूला चलने पर हिलता है, जो आप को बहुत ही आनंददायी एहसास देगा.

शिवपुरी

वैसे तो शिवपुरी ऐडवैंचर प्रेमियों के लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि यहां आ कर राफ्टिंग जैसे स्पोर्ट्स का मजा लिया जा सकता है. अगर आप भी थोड़ा दिमाग लगाएं तो फ्री फंड में राफ्टिंग कर सकते हैं. जैसे कोई ऐसी फैमिली देख लें जो काफी रिच लगती हो. फिर उन के सामने जा कर पर्स चोरी होने का नाटक करने लगें और मासूम बन कर उन के सामने सिर्फ यही कहें कि अब कैसे पहुंचेंगे घर और कैसे कर पाएंगे राफ्टिंग. तो ऐसे में वे आप पर तरस खा कर आप को राफ्टिंग कराने के साथसाथ कुछ पैसे भी दे देंगे. यह चांस की बात है, अगर तुक्का लग गया तो वारेन्यारे नहीं तो गंगा किनारे बैठ कर लहरों का ही मजा लीजिए. और हां, ध्यान रहे अगर कोई पैसे देने के बजाय पुलिस कंप्लेंट लिखवाने की बात करे तो रहने दें कह कर मना कर दें. कानूनी पचड़ों में न पड़ें.

परमार्थ निकेतन

भले ही आप को लगे कि आश्रम भी कोई देखने की चीज है तो आप को बता दें कि यहां आप को ढेरों ज्ञानवर्धक बातें सीखने को मिलेंगी और वह भी फ्री में. इसलिए ऋषिकेश जाएं तो यहां जाना न भूलें.

नीलकंठ

भले ही यह मंदिर है और आप की धर्म में बिलकुल भी आस्था नहीं है तब भी कोई बात नहीं. आप वहां घूमने के लिहाज से जाएं और वहां का नजारा देखें. यहां जाने के लिए आप को ऋषिकेश से ही जीप या टैक्सी मिलेगी जिस में एक मैंबर का 50-60 रुपए के आसपास एक तरफ का किराया लगता है तो आप ड्राइवर को इस तरह सैट करें कि बीचबीच में गाड़ी हम भी चलाएंगे और आप का रास्ते भर पूरा ऐंटरटेनमैंट करेंगे. अगर मान जाए तो ठीक है नहीं तो वहां सामान लाने लेजाने के लिए टैंपो चलते हैं. उस के ड्राइवर से आप कम पैसों में बात कर के वहां पहुंच सकते हैं.

त्रिवेणी घाट

यह ऋषिकेश का सब से प्रमुख घाट है क्योंकि यहां 3 नदियों का संगम है. इस घाट पर आ कर लोग नहाए बिना नहीं रह पाते तो आप भी ऐंजौय करें.

राम झूला

यह झूला गंगा के एक किनारे को दूसरे किनारे से जोड़ता है. इस से आप यहां की खूबसूरती का नजारा ले सकते हैं.

बोटिंग

ऋषिकेश में बोटिंग की व्यवस्था भी है. अगर आप भी बोटिंग का मजा लेना चाहते हैं तो इस के लिए आप को 5-10 रुपए खर्च करने पड़ेंगे.

कनदीयाला विलेज

कनदीयाला एक छोटा सा विलेज है जो ऋषिकेश से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. घने जंगलों से घिरा यह गांव समुद्रतल से काफी ऊंचाई पर स्थित है. यहां आने वाले पर्यटक राफ्टिंग का मजा लेने के साथसाथ घनी हरियाली के बीच कुछ पल सुकून के भी बिता सकते हैं.

नरेंद्र नगर

यह जगह ऋषिकेश से 15 किलोमीटर दूर है, जो पुरातात्विक और ऐतिहासिक रूप से महत्त्वपूर्ण है.

कहां खाएं

जब आप दिन में घूमने जा रहे हैं तो आप वहां की मार्केट से गोलगप्पे, पापड़ी, टिक्की, मैगी, नूडल्स आदि खा कर पेट भर लें. परहैड 30 रुपए के करीब खर्च आएगा. अगर आप आश्रम में रुके हैं तब तो आप की रात के खाने की कोई टैंशन नहीं वरना पास के लोकल रैस्टोरैंट में कम पैसे में खा लें.

कैसी हो पैकिंग

अगर आप दोस्तों के साथ घूमने जा रहे हैं तो कोशिश करें कि कम से कम सामान ले कर जाएं. जैसे कपड़े हर दिन के लिए अलगअलग न रखें बल्कि एकदो जोड़ी ही रखें और वहां पर धोने का झंझट न पालें. बैग में साबुन, कंघा, क्रीम, टौवल व एक मोटी चादर रखना न भूलें

कुछ बातों को अमल में लाएं

– पैदल चल कर ज्यादा जगह देखें.

-अपने साथ छोटा तंबू ले कर चलें और खाली खेत या सड़क के किनारे सुरक्षित जगह देख कर वहां टैंट लगा लें व रात गुजारें. सुबह सब समेट कर आगे बढ़ जाएं.

– रास्ते में किसी प्रकार के कानूनी पचड़ों में न उलझें. किसी तरह की समस्या आने पर उसे आराम से निबटाएं.

– अधिकतर जगहें दूर से ही देखें न कि टिकट ले कर अंदर जाने की कोशिश करें

चीनी हो या जर्मन, अब सब समझ आएगा

जब भी आप टूरिस्ट बन कर किसी नई जगह जाते हैं तो वहां की भाषा के बारे में बहुत ज्यादा जानने की कोशिश नहीं करते.

लेकिन अपने स्मार्टफोन से आप इस समस्या को सुलझा सकते हैं. हर स्मार्टफोन में कैमरा होता है और वो कैमरा आपके आसपास जो भी लिखा है उसे पढ़कर आपकी भाषा में अनुवाद कर सकता है.

ये एप आईफोन और एंड्रायड दोनों पर काम करता है और गूगल ट्रांसलेट आप फ्री डाउनलोड कर सकते हैं.

जहां पर भी आपको कोई जानकारी चाहिए आप उसकी एक तस्वीर ले लीजिए और गूगल ट्रांसलेट आपका काम कर देगा.

हां, आपके लिए ये तुरंत तो नहीं होगा, लेकिन इतनी तेजी से होगा कि आपका काम आसान जरूर हो जाएगा.

सैलानियों के लिए तरह-तरह की जानकारियां ऐसे बहुत आसानी से मिल सकती हैं. लेकिन गूगल ट्रांसलेट फिलहाल परफेक्ट नहीं है और ट्रांसलेशन में कई बार गलतियां देखने को मिलेंगी.

इन गलतियों के बावजूद आपको ये बात समझ में आ जाएगी की दूसरी भाषा में क्या लिखा है.

हर ट्रांसलेशन एप में ऐसी दिक्कतें होती हैं. 100 से भी ज्यादा भाषाओं में आपके अनुवाद के काम ये कर सकता है. कम ही लोग होंगे जिन्हें इन सब की जरूरत होगी.

लेकिन धीरे-धीरे और नई भाषाएं भी आपको यहां मिलेंगी.

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