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सोशल मीडिया पर सक्रिय बौलीवुड

एक फेयरनैस क्रीम के विज्ञापन में ऐक्टर सिद्धार्थ मल्होत्रा ऐक्टर और फैंस के रिलेशन में आए चेंज को अच्छी तरह डिफाइन करते हुए कहते हैं कि अब फैंस औटोग्राफ नहीं सैल्फी की डिमांड करते हैं. यह हलकीफुलकी लगने वाली बात दरअसल इशारा है युवाओं के तकनीकी मिजाज और मनोरंजन के संसार को ले कर उन की बदलती अप्रोच का, आज युवा किसी अभिनेता की तसवीर दीवार पर चिपकाने के बजाय उसे अपने अलबम में चस्पां रखते हैं, ताकि वे उसे औनलाइन प्लेटफौर्म पर पोस्ट कर सैल्फ पब्लिसिटी के साथ अपने ग्रुप में ट्रेडिंग टौपिक या वायरल फैक्टर बना सकें. दिल्लीमुंबई जैसे शहरों की मैट्रो ट्रेंस हों या छोटे कसबों के नुक्कड़ पर बैठे युवा, प्रत्येक कान में इयरफोन और हाथ में बड़ी स्क्रीन वाले आईफोन

या टैबलेट लिए फिल्में देखते आसानी से दिख जाते हैं. एक दौर में तो लोगों के लिए मनोरंजन का साधन सिनेमाघर मात्र हुआ करते थे. लेकिन आज युवाओं ने मनोरंजन को स्मार्टफोन, लैपटौप, आईपैड और डिजिटल वर्ल्ड में समेट लिया है. इन के इस तकनीकी कदमताल को समझते हुए मनोरंजन उद्योग ने भी इंटरनैट, सोशल मीडिया, डिजिटल वर्ल्ड में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है ताकि युवाओं को वह अपना मनोरंजन बेच सके. फिल्म उद्योग अब सिर्फ सिनेमाघरों तक  ही सीमित नहीं है बल्कि इंटरनैट की विशाल दुनिया तक पहुंच गया है. यूट्यूब पर जहां फिल्मों के सब से पहले ट्रेलर रिलीज होते हैं, वहीं ट्विटर पर फर्स्ट लुक शेयर किया जाता है और फेसबुक पर पेज लाइक्स किए जाते हैं. ट्विटर पर सैलिब्रिटीज को फौलो करना क्रेज बन चुका है. अगर किसी नामी फिल्मी हस्ती ने एक ट्वीट कर दिया तो उसे फौलो करने वालों की लाइन लग जाती है. 

इंटरनैट क्रांति के इस दौर में फिल्मी हस्तियां व निर्मातानिर्देशक भी यह समझ चुके हैं कि यदि युवाओं को मनोरंजन के संसार से जोड़ना है तो उन के हाईटैक रास्ते पर चलना होगा. इसलिए सोशल मीडिया की लाइक और शेयर की ताकत के बूते फिल्मों का नया वर्चुअल वर्ल्ड युवाओं को अपनी जद में लाने के लिए कमर कस रहा है.

डिजिटल वर्ल्ड का युवा

देश में इस समय करीब 65त्न युवा हैं जो किसी अन्य देश में नहीं हैं और इन युवाओं को जोड़ने का काम सोशल मीडिया कर रहा है. युवावर्ग में सोशल नैटवर्किंग साइट्स का क्रेज दिनोदिन बढ़ रहा है. आजकल हर युवा स्मार्टफोन से लैस है और उस में फेसबुक, ट्विटर आदि साइट्स हैं. जैसे ही युवा किसी फिल्म को देख कर सिनेमाघर से बाहर निकलता है, उसे फिल्म कैसी लगी, तुरंत रिव्यू पोस्ट कर देता है. फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, पिंटरेस्ट, टंब्लर, गूगल प्लस जैसे अनेक प्लेटफौर्म पूरी दुनिया के मनोरंजन का बड़ा माध्यम बन कर उभरे हैं. इन प्लेटफौर्म्स ने कई फिल्मों को जबरदस्त कामयाबी दी है.

लाइक्स, फौलो और शेयर का ट्रैंड

बैस्ट ऐक्टर के कई अवार्ड अपने नाम कर चुके बिग बी उस समय चौंक गए जब उन्हें पता चला कि ‘सोशल मीडिया पर्सन औफ द ईयर’ का अवार्ड उन्हें दिया जा रहा है. मुंबई में बाकायदा एक कार्यक्रम में जब उन्हें यह ट्रौफी मिली तब सोशल मीडिया की पर्सनल ब्रैंडिंग, पब्लिसिटी पोटैंशियल का अंदाजा उन्हें भी हो गया जो इसे महज टाइम पास टूल मानते हैं. व्यक्तिगत ब्रैंडिंग के लिए भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल अभिनेताओं द्वारा धड़ल्ले से किया जा रहा है.  बिग बी जहां अपने ट्विटर और ब्लौग्स के जरिए करोड़ों फैंस से बातें करते हैं, वहीं उन की देखादेखी बौलीवुड का हर कलाकार सोशल मीडिया पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करने को बेताब है.  महानायक अमिताभ बच्चन के ट्विटर पर 1 करोड़ 80 लाख से ज्यादा फौलोअर्स हैं, जबकि शाहरुख खान के 1 करोड़ 64 लाख फौलोअर्स हैं. दीपिका का फेसबुक पेज तो बिग बी के फेसबुक पेज से भी ज्यादा पौपुलर है. दीपिका के 2 करोड़ 30 लाख प्रशंसक हैं. ट्विटर पर उन्हें फौलो करने वालों की संख्या करीब 80 लाख और इंस्टाग्राम पर करीब 60 लाख है. दीपिका इंस्टाग्राम पर ऐक्टिव है. दीपिका के बाद सलमान खान, शाहरुख खान, प्रियंका चोपड़ा, रितिक रोशन, सोनाक्षी सिन्हा, आलिया भट्ट, जैकलिन फर्नांडीस, सोनम कपूर और श्रद्धा कपूर आते हैं.

विदेशी सैलिब्रिटीज की बात करें तो फुटबौलर क्रिस्टिआनो रोनाल्डो दुनिया के पहले एथलीट बन गए हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया पर लोकप्रियता का चरम छुआ है. ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर उन के फौलोअर्स की संख्या बढ़ कर 20 करोड़ से भी अधिक हो गई है. उन के फौलोअर्स की संख्या ग्रेट फुटबौलर मेसी की तुलना में 64त्न से अधिक है. सोशल मीडिया पर एक और रिकौर्ड बनाया हौलीवुड अभिनेता लियोनार्डो डिकेप्रियो ने. इंस्टाग्राम पर प्रियंका चोपड़ा के औस्कर रैड कारपेट वाले फोटो लाखों की संख्या में लाइक किए गए. प्रियंका चोपड़ा इंस्टाग्राम पर भारत की सब से लोकप्रिय अभिनेत्री साबित हुई हैं.

ट्वीट से कमाई करते स्टार्स

ऐसा नहीं कि फिल्म स्टार्स सोशल मीडिया पर सिर्फ पब्लिसिटी के लिए ही अपना कीमती वक्त देते हैं, बल्कि वे यहां से मुफ्त में प्रचार करने के अलावा मोटी कमाई भी करते हैं. कुछ ही लोग जानते हैं कि बौलीवुड व हौलीवुड सैलिब्रिटीज अपने ट्विटर अकाउंट से ही लाखोंकरोड़ों रुपए की कमाई कर लेते हैं. असल में कमाई का मुख्य जरिया कुछ ब्रैंड प्रमोशन हैं, जिन्हें ये ट्विटर के जरिए प्रमोट करते हैं और बदले में हर क्लिक पर इन्हें पैसा मिलता है. दरअसल, यह पैसा उन्हें उन कंपनियों से मिलता है जिन के ब्रैंड्स वे अपने पेज पर फौलो और लाइक्स करवाते हैं. अगर बौलीवुड की बात करें तो यहां भी स्टार्स ट्विटर से कमाई में पीछे नहीं हैं. इन्हें भी एकएक ट्वीट पर लाखों रुपए मिलते हैं. सोनाक्षी सिन्हा के ट्विटर पेज पर इंडियन आइडल के लिए ट्वीट्स देखने को मिलते हैं. सोनाक्षी एक ट्वीट का कंपनियों से 4-5 लाख रुपए वसूलती हैं. वे अपने 52 लाख फौलोअर्स के जरिए भी करोड़ों रुपए कमाती हैं. इसी तरह शाहिद कपूर ने एक टीवी शो के प्रमोशन के लिए 12 लाख रुपए चार्ज किए थे. अनुमान बताते हैं कि शाहिद एक ब्रैंड के मैसेज को ट्वीट करने के 10 से 12 लाख रुपए चार्ज करते हैं. प्रियंका के ट्विटर पर 1 करोड़ से ज्यादा फौलोअर्स हैं. कपिल शर्मा एक ट्वीट का 1 से 5 लाख रुपए के बीच लेते हैं.

फ्री का पीआर : होर्डिंग से हैंगआउट्स तक

कभी फिल्मों का प्रचार दीवारों पर पोस्टर, होर्डिंग्स लगाने या फिर टीवीरेडियो पर प्रोमो के जरिए होता था, लेकिन अब फिल्म पब्लिसिटी दीवारों के होर्डिंग्स से निकल कर गूगल हैंगआउट्स तक जा पहुंची है. अब स्टार्स किसी फिल्म का ट्रेलर सोशल साइट पर अपलोड करते हैं और देखतेदेखते उसे करोड़ों हिट्स मिल जाते हैं यानी बिना पैसा खर्च किए बड़े स्तर पर पब्लिसिटी हो जाती है. फेसबुक पेज पर कई तरह के औफर्स शुरू कर के दर्शकों को जोड़ने का प्रयोग भी सफल हो रहा है. कभी ‘फ्री कपल टिकट’ तो कभी ‘मूवी मर्चेंटाइज’ युवाओं को फिल्मों के नजदीक ले आते हैं. फिल्म ऐक्सपर्ट मानते हैं कि युवा औनलाइन मंच पर फिल्म के बारे में चर्चा करना पसंद करते हैं. लिहाजा, फिल्म निर्माता कंपनियां अब यूट्यूब और फेसबुक जैसे मंचों का सहारा लेती हैं. सोशल मीडिया के जरिए प्रचार न केवल आसान है बल्कि दूसरे कई माध्यमों की अपेक्षा सस्ता भी है.

इन दिनों फिल्म से जुड़ी गेम्स, ऐप्लिकेशंस के जरिए युवाओं को लुभाया जा रहा है. जैसे यूटीवी मोशन पिक्चर्स ने ‘बर्फी’ फिल्म के लिए एक खास ऐप बनाया था. जिसे महज 2 हफ्ते में ही ढाई लाख लोगों ने इसे इस्तेमाल किया, जिस के आधार पर गूगल इंडिया ने पिछले एकडेढ़ साल में इंटरनैट पर सब से बेहतरीन पहल करार दिया. इसी तरह का दावं ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ टीम ने भी खेला और जम कर पब्लिसिटी बटोरी.

कई स्टार्स नैगेटिव पब्लिसिटी के जरिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर सुर्खियों में रहते हैं. इस तरीके से कई सैलिब्रिटीज को काम भी मिलता है. मसलन, टीवी अभिनेता अभिनव शुक्ला ने अपनी न्यूड तस्वीरें पोस्ट कर सोशल मीडिया पर सनसनी फैला कर जम कर सुर्खियां बटोरीं.

 इंडिपैंडैंट सिनेमा का प्रोमोटर

सोशल मीडिया ने इंडिपैंडैंट सिनेमा को नई औक्सीजन देने में अहम रोल निभाया है, जो फिल्में कभी रिलीज होने की राह ताकती थीं, बजट संकट या प्रचार की कमी का शिकार हो कर डब्बाबंद हो जाती थीं, वे अब सोशल मीडिया की ताकत से सिनेमाघरों तक पहुंचने लगी हैं. इस संबंध में फिल्म समीक्षक मिहिर का एक छोटा सा उदाहरण सामने है, निर्देशक पवन कुमार जब अपनी फिल्म के लिए बजट जुटाने में असफल रहे तो उन्होंने ‘मेकिंग एनीमीज’ शीर्षक से जो ब्लौग लिखा, उसे पढ़ कर लोगों ने आगे बढ़ कर उन्हें पैसा देना शुरू किया और यहीं से थ्रिलर फिल्म ‘लूसिया’ की असल शुरुआत हुई, जिसे इंटरनैट पर क्राउडफंडिंग से जुटाए 52 लाख रुपए में बनाया गया. आज इसे कन्नड़ सिनेमा की सब से बड़ी स्वतंत्र सफलताओं में गिना जा रहा है.  इसी तर्ज पर यूट्यूब ने फिल्मों के प्रदर्शन के लिए बौक्स औफिस चैनल की शुरुआत की है, जहां जल्द छोटे बजट की कई फिल्में दिखेंगी. याहू ने भी भारतीय फिल्मों के लिए नैट पर अपना एक अलग चैनल शुरू किया है.

अब युवाओं को लुभाने के लिए एक कदम आगे बढ़ कर यशराज जैसा बड़ा बैनर ‘मांस वर्ल्ड’ और ‘बैंड बाजा बारात’ जैसी वैब सीरीज बना रहा है. वैब रिएलिटी शो का ट्रैंड भी जोर पकड़ रहा है. सोशल नैटवर्किंग साइट आईबीबो पर वैब सीरियल ‘द हंट’ प्रसारित हुआ. इस सस्पैंस थ्रिलर में काम करने वाले कलाकारों से ले कर पटकथा लेखक और निर्देशक तक सभी सोशल नैटवर्किंग साइट पर औनलाइन औडिशन के जरिए चुने गए हैं.

ट्रोल के मारे सितारे

डिजिटल वर्ल्ड की अपनी खामियां हैं जिन में कई बार युवा बह कर सीमा लांघ जाते हैं और फिल्म स्टार्स के साथ बदतमीजी पर उतर आते हैं. जैसा कि पिछले दिनों शाहरुख खान, अभिषेक बच्चन, नील नितिन मुकेश और आलोक नाथ के साथ हुआ. इन सैलिब्रिटीज को ट्रोलिंग का शिकार होना पड़ा. ट्रोलिंग वह स्थिति है जब कलाकारों को डिजिटल दुनिया में निजी अकाउंट्स पर नफरत भरे कमैंट्स, पिक्स, आपत्तिजनक पोस्ट व तसवीरों से दोचार होना पड़ता है. जिस तरह आजकल अभिनेता अभिषेक बच्चन जम कर कोसे जा रहे हैं. कोई उन्हें सब से कम प्रसिद्ध सितारा बता रहा है तो कोई बेरोजगार. पिछले दिनों जब अभिषेक बच्चन भारतपाक क्रिकेट मैच देखने कोलकाता पहुंचे तो उन की उपस्थिति को ले कर ट्विटर पर जम कर मजाक उड़ाया गया कि इतनी बेरोजगारी भी ठीक नहीं कि हर मैच देखने पहुंच जाओ. हालांकि अभिषेक बच्चन अपने सैलिब्रेटी स्टेटस का मजाक उड़ते देख चुप नहीं रहे और अपने चिरपरिचित अंदाज में ट्विटर पर खुद पर कसे जा रहे तानों का जवाब दिया.

अधिकतर कलाकार सोशल मीडिया पर बढ़ रही ट्रोलिंग से तंग आ कर इस से दूरी बना रहे हैं. किंग खान ने भी कुछ अरसा पहले अपने फैंस को भी ट्विटर व फेसबुक पर गाली देने और ट्रोलिंग से परहेज करने को कहा है. उन्होंने तो ट्विटर छोड़ने की भी बात की और लिखा कि मैं इसलिए ट्विटर पर नहीं आया कि लोग मुझे गाली दें. यहां कई इडियट हैं जो गंदी बातें करते हैं, मैं नहीं चाहता कि उन्हें पढ़ूं. कई और ऐक्टर्स सोशल मीडिया पर गालीगलौज करने वाले फैंस को झाड़ लगा चुके हैं. इस तरह जहां शाहरुख ने फैंस से गुजारिश की थी कि उन्हें ट्रोल न करें, सलमान खान भी कुछ महीने पहले अपने फैंस को इसे ले कर वार्निंग दे चुके हैं. इस के अलावा नेहा धूपिया, दिया मिर्जा, श्रुति सेठ भी ट्विटर पर ट्रोलिंग का शिकार हो चुकी हैं. इंटरनैट ऐंड मोबाइल एसोसिएशन औफ इंडिया द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 35 प्रमुख शहरों के सर्वे बताते हैं कि 77त्न उपयोगकर्ता सोशल मीडिया का इस्तेमाल मोबाइल से करते हैं और इस में भी युवाओं की भूमिका प्रमुख है. आंकड़े यह भी बताते हैं कि देश में सोशल मीडिया पर अधिकतम कालेज जाने वाले युवा विद्यार्थी अधिक से अधिक समय बिताते हैं. जाहिर है इतनी बड़ी तादाद में तकनीक का इस्तेमाल करता युवा बड़ा उपभोक्ता है और इस के लिए सोशल मीडिया जैसे प्लेटफौर्म के जरिए ऐंटरटैनमैंट वर्ल्ड न सिर्फ उन के इंटरैस्ट का कंटैंट मुहैया करा रहा है बल्कि उन्हें अपने करीब भी ला रहा है.   

ऐसे बढ़ाएं फौलोअर्स

– अपने ट्विटर, ब्लौग या वैबसाइट का भी लिंक साझा करते रहें.

– कोई आप को ट्वीट करे तो उस का  जवाब दें, देख लें कि कोई स्पैम तो नहीं.

– जो आप का ट्वीट शेयर करते हैं, उन्हें थैंक्स करें.

– हर लिंक या शेयर में कोई न कोई जानकारी का स्रोत दें.

– अपने ट्वीट में हैशटैग का इस्तेमाल जरूर करें.

– रीट्वीट ट्विटर का बहुत जरूरी है.

– ट्रैंडिंग टौपिक को समझें.

– ट्विटर के जरिए लोगों को कुछ बेचने की जरूरत नहीं है.

अमेरिकन टीम से अर्जुन कपूर सीख रहे हैं बॉस्केटबाल

जब से बाक्स आफिस पर अर्जुन कपूर की फिल्म ‘‘की एंड का’’ मुंह के बल गिरी है, तब से अर्जुन कपूर अपने करियर की गाड़ी को आगे बढ़ाने के लिए कई स्तर पर काम कर रहे हैं. एक तरफ वह अपने आपको सदैव सुर्खियों में बनाए रखने के लिए कई तरह की खबरे फैलाते रहते हैं, तो दूसरी तरफ वह अपनी नई फिल्म ‘‘हाफ गर्ल फ्रेंड’’ की शूटिंग शुरू करने से पहले इसके किरदार के अनुरूप खुद को तैयार करने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं. सूत्रों की माने तो फिल्म ‘‘हाफ गर्ल फ्रेंड’’ में अर्जुन कपूर माधव झा नामक एक बिहार बॉस्केटबाल खिलाड़ी का किरदार निभा रहे हैं.

सूत्रों के अनुसार इस किरदार के साथ न्याय करने के लिए इन दिनों अर्जुन कपूर एक अमेरिकन इंटरनेशनल बॉस्केटबाल टीम के खिलाड़ियो के साथ बॉस्केटबाल खेल की ट्रेनिंग ले रहे हैं. तो दूसरी तरफ आलिया भट्ट के पदचिन्हों पर चलते हुए बिहारी लहजे की भाषा भी सीख रहे हैं. अर्जुन कपूर कहते हैं-‘‘मैं अपनी हर फिल्म के किरदार को सही ढंग से निभाने के लिए हमेशा ही होमवर्क करता हूं. जरुरत के अनुसार ट्रेनिंग भी लेता हूं. फिल्म ‘की एंड का’ की शूटिंग शुरू करने से पहले मैने तीन सप्ताह के लिए कूकिंग क्लासेस में पढ़ाई की थी और अब बॉस्केटबाल खेलना सीख रहा हूं.’’

रोमांटिक प्यार को जरूरी मानती हैं काजल अग्रवाल

दक्षिण की सुपर स्टार काजल अग्रवाल की तीसरी हिंदी फिल्म ‘‘दो लफ्जों की प्रेम कहानी’’ इसी शुक्रवार को रिलीज हो रही है. इस फिल्म में काजल अग्रवाल ने एक नेत्रहीन लड़की जेनी का किरदार निभाया है, जिसे एक पूर्व बाक्सर से प्यार है. इससे पहले भी वह कई फिल्मों में रोमांटिक किरदार निभा चुकी हैं. मगर काजल अग्रवाल का मानना है कि निजी जिंदगी में फिल्मों जैसा रोमांटिक प्यार नहीं होता है. हाल ही में जब उनसे मुलाकात हुई, और हमने उनसे प्यार को लेकर उनकी सोच के बारे में जानना चाहा, तो काजल अग्रवाल ने ‘‘सरिता’’ पत्रिका से कहा-‘‘प्यार अलग अलग रूपों में होता है. बहन, मां, पिता, दोस्त सभी के साथ अलग तरह का प्यार होता है. प्यार का मतलब सिर्फ रोमांटिक प्यार नहीं होता है.’’

जब हमने उनसे पूछा कि तो क्या रोमांटिक प्यार की जरूरत नही है? इस पर काजल अग्रवाल ने कहा-‘‘जिंदगी जीने के लिए रोमांटिक प्यार की भी जरूरत है. मगर इस तरह का प्यार होने में समय लगता है. यह प्यार धीरे धीरे दो लोगों के बीच आपसी विश्वास और समझ के साथ विकसित होता है. अचानक प्यार कभी नहीं होता. जिस तरह से फिल्मों में ‘लव एट वन साइड’ दिखाया जाता है, वैसा प्यार निजी जिंदगी में नहीं होता है. मेरे साथ तो अभी तक ‘लव एट वन साइड’ हुआ नही है. अभी तक मेरा किसी के साथ रोमांटिक अफेयर नहीं चला है, इसलिए इस बारे में कुछ कह नहीं सकती.’’

…तो क्या अब गेल फुटबॉल में भी हाथ आजमाएंगे!

वेस्टइंडीज के तूफानी बल्लेबाज क्रिस गेल एक नए अवतार में दिख सकते है. क्रिकेट मैदान पर अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए विख्यात वेस्टइंडीज के तूफानी बल्लेबाज क्रिस गेल फिलहाल क्रिकेट के मैदान पर फ्लॉप चल रहे हैं लेकिन गेल मैनचेस्टर यूनाइटेड की तरफ से वेन रूनी के साथ फुटबॉल के मैदान में नजर आ सकते है. इस बात की जानकारी खुद क्रिस गेल ने दी है.

सूत्रों के अनुसार कैरेबियाई स्टार गेल क्रिकेट से इतर फुटबॉल में भी हाथ अजमाने की कोशिश कर रहे हैं और इसी के मद्देनजर उन्होंने इंग्लिश क्लब मैनचेस्टर यूनाइटेड के नये मैनेजर जोस मोरिन्हो से हाल ही में मुलाकात की थी। क्रिस गेल ने मैनचेस्टर यूनाइटेड के मैनेजर के साथ हुई बैठक के बाद इंस्टाग्राम पर एक फोटो भी पोस्ट की है जिसमें वह यूनिर्वस बॉस 333 की अपनी जर्सी के साथ नजर आ रहे हैं.

गेल ने इंस्टाग्राम पर एक फोटो पोस्ट की है जिसमें वह मैनचेस्टर स्थित प्रसिद्ध ओल्ड ट्रैफर्ड स्टेडियम में क्लब की लाल शर्ट और स्कार्फ पहने नजर आ रहे हैं।

कुछ समय से क्रिस गेल ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में बल्ले से कोई कमाल नहीं दिखा पा रहे हैं. इंग्लैंड के खिलाफ लगाए गए शतक के बाद आईपीएल सीजन 9 में भी उनका बल्ला अधिकतर खामोश ही रहा. फिलहाल वह इंग्लिश काउंटी में खेल रहे हैं.

क्रिकेट के मैदान पर ना सही लेकिन, मैदान से बाहर क्रिस गेल हमेशा सुर्खियों में बने रहते हैं, चाहे बिग बैश में महिला पत्रकार के साथ ‘डोंट ब्लश बेबी’ कांड हो या फिर हाल ही में ब्रिटिश महिला पत्रकार के साथ एक इंटरव्यू दौरान ‘बिग बैट’ की बात, गेल को जितना क्रिकेट की पिच पर अपने लंबे शॉट के लिए जाना जाता है, उतना ही अपने बयानों से भी सुर्खियों बटोरते हैं.

अपने इन बयानों की वजह से क्रिस गेल को काफी आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा है और बिग बैश लीग से भी बाहर होना पड़ा.

आ गया मच्छरों को दूर भगाने वाला TV सेट

दक्षिण कोरियोई टिकाउ उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनी एलजी ने आज अपनी मच्छरों को दूर रखने वाली टीवी सेट की सीरीज पेश की जो मच्छरों को भगाने का काम करती है. इसकी कीमत भारतीय बाजार में 26,900 से 47,500 रुपये के बीच है.

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने एक बयान में बताया, ‘एलजी मॉस्किटो अवे टीवी भारतीय ग्राहकों को ध्यान में रखकर विकसित की गई है. इसमें एक अल्ट्रा सॉनिक प्रणाली लगी हुई है जो एक बार चालू होने के बाद मच्छरों को दूर रखती है.

इसमें ध्वनि तरंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जिसके चलते किसी हानिकारक रेडिएशन के उत्सर्जन के बिना मच्छरों को दूर रखा जा सकता है.’

कंपनी का दावा है कि यह तकनीक वैश्विक संगठनों के नियमों के अनुरूप है. इसकी जांच भारत के अंतरराष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी एवं विषज्ञान संस्थान में भी की गई है.

कंपनी ने बताया कि इस प्रौद्योगिकी में किसी भी प्रकार के हानिकारक रसायन या विष का प्रयोग नहीं किया गया है और ना ही इसे किसी तरह के रखरखाव या दुबारा भरे जाने की जरूरत है.

इसके अलावा इस मच्छर भगाने वाली तकनीक का प्रयोग करने के लिए टीवी को हमेशा चालू रखने की भी जरूरत नहीं है.

स्मार्ट शहरों में होंगे ‘स्मार्ट बैंक’

स्मार्ट शहर बनाने की महत्वाकांक्षी योजना शुरु करने के बाद सरकार अब इन शहरों में स्मार्ट बैंकिंग सुविधा देने की तैयारी भी कर रही है. इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से कहा है कि वे स्मार्ट शहरों के लिए अभी से अपने कामकाज का तरीका स्मार्ट बनाने में जुट जाएं.

आधिकारिक सूत्रों का कहना है सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों की सोमवार को हुई उच्च स्तरीय बैठक में मंत्रालय ने यह निर्देश दिए. इस बैठक में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकारी बैंकों के कामकाज की समीक्षा की थी.

वित्त मंत्रालय ने बैंकों को स्पष्ट कहा है कि स्मार्ट सिटी टेक सेवी होंगे और उनमें पर्याप्त डिजीटल सुविधाएं होंगी. ऐसे में सरकारी बैंकों को अभी से इन शहरों के लिए अपनी योजनाएं बनानी शुरु कर देनी चाहिए. मंत्रालय ने कहा कि सरकारी बैंकों को इन शहरों की क्रियान्वयन एजेंसियों के साथ संपर्क कर साझेदारी करनी चाहिए ताकि वे शहरों में डिजिटल पेमेंट का इको सिस्टम प्रदान कर सकें.

दुनियाभर के स्मार्ट शहरों का अनुभव बताता है कि वहां कैश लेन-देन कम होता है. पार्किग से लेकर, बिजली-पानी के बिल, परिवहन, खरीददारी जैसे कामों के लिए कार्ड या आनलाइन भुगतान होता है. स्मार्ट शहरों में सभी परिवारों के पास बैंकिंग सुविधा होने और सूचना प्रौद्योगिकी की सुविधाएं होने से लोग कैश में लेन-देन करने से बचते हैं.

बैंकों को प्रौद्योगिकी के बेहतर इस्तेमाल के साथ-साथ सभी एटीएम मशीनों को 'आधार' के लायक बनाने को कहा है. ऐसा होने पर सभी मौजूदा एटीएम मशीनों और नए एटीएम को ऐसा बनाना होगा जो ग्राहक की अंगुलियों की छाप (बॉयोमीट्रिक्स) को पहचान सकें. ऐसा होने पर एटीएम कार्ड की सुरक्षा बढ़ जाएगी.

उल्लेखनीय है कि सरकार ने 100 शहरों को स्मार्ट बनाने की घोषणा की है जिसमें से पहले चरण में 20 शहरों को स्मार्ट बनाया जा रहा है.

 

‘प्राइवेट ब्राउजिंग’ में है समझदारी

बिना अपने कंप्यूटर पर कूकीज डाउनलोड किये या फिर अपने बारे में किसी भी वेबसाइट को कम जानकारी देकर भी आप ब्राउजिंग कर सकते हैं. उसके लिए आपको 'प्राइवेट ब्राउजिंग' या 'इनकौगनीटो मोड' में करना होगा और उसको करना बहुत आसान है.

अगर आप किसी भी प्रोडक्ट या सर्विस के लिए वेब सर्च कर रहे हैं तो 'प्राइवेट ब्राउजिंग ' से सर्च सेव नहीं होता है.

कोई भी जब आपका कंप्यूटर इस्तेमाल करेगा तो उसे पता नहीं चलेगा कि आपने क्या सर्च किया है. वर्ना सभी सर्च जो आपके गूगल अकाउंट से किया जाता है उसका गूगल के पास रिकॉर्ड होता है.

गूगल क्रोम पर 'प्राइवेट ब्राउजिंग' करने के लिए ब्राउजर लांच करने के बाद दाहिनी तरफ ऊपर में ये तीन लाइन दिखाई देती हैं उनपर क्लिक कीजिये. वहां पर 'न्यू इनकौगनीटो विंडो' लिखा दिखाई देगा जिसपर आपको क्लिक करना होगा.

उसके बाद जो ब्राउजर खुलेगा उसपर आप 'प्राइवेट ब्राउजिंग' कर सकते हैं. ये 'प्राइवेट  ब्राउजिंग' तब तक चलेगा जब तक आप उसी विंडो पर किसी भी वेबसाइट पर जाएंगे.

अगर आप क्रोम ब्राउजर इस्तेमाल करते हैं तो 'प्राइवेट  ब्राउजिंग' के समय भी अपने  ब्राउजिंग  की हिस्ट्री को सुरक्षित रखने के लिए एक एक्सटेंशन डाउनलोड कर सकते हैं.

'ऑफ द रिकॉर्ड हिस्ट्री' नाम के इस एक्सटेंशन को इस्तेमाल कर के आप जितनी देर 'प्राइवेट ब्राउजिंग' करेंगे, आपकी हिस्ट्री बरकरार रहेगी. एक बार आप ब्राउजर को बंद कर देंगे तो ये हिस्ट्री मिट जायेगी.

वैसे अपने रोजाना के ब्राउजिंग के बारे में जानने के लिए ब्राउजर की 'सेटिंग' में जाकर बीते दिनों आप जिस भी वेबसाइट पर थे उनके बारे में जानकारी मिल जायेगी. ये हिस्ट्री आप अपने कंप्यूटर से मिटा तो सकते हैं लेकिन आपके ब्रॉडबैंड सर्विस प्रोवाइडर के पास ये जानकारी हमेशा रहती है.

'प्राइवेट ब्राउजिंग' करके आप कानूनी एजेंसियों से भी बच नहीं सकते हैं.

लेकिन इ कॉमर्स या फेसबुक, ट्विटर जैसे कंपनियों की कूकीज से बचने का ये बहुत बढ़िया तरीका है. 'प्राइवेट ब्राउजिंग' करने पर ऐसे वेबसाइट को आपके बारे में सीमित जानकारी मिल पाती है और वो आपको सिर्फ आपके पसंद के विज्ञापन नहीं दिखा पाएंगे.

धोनी बोले, BCCI करेगा मेरी कप्तानी के बारे में फैसला

वनडे में टीम इंडिया के कैप्टन महेंद्र सिंह धोनी को लेकर पिछले काफी समय से कयास लगाए जा रहे हैं. धोनी ने साफ कर दिया कि उनकी कप्तानी के बारे में फैसला करने का हक बीसीसीआई को है. दरअसल रवि शास्त्री ने तीनों फॉर्मेट में विराट को कैप्टन बनाने की बात कही थी. वहीं, नए कोच के सवाल पर धोनी बोले- 'कोच को हिन्दी आती है या नहीं, ये अलग बात है. लेकिन उन्हें हमारे कल्चर के बारे में पता होना चाहिए.'

 जिम्बाब्वे के खिलाफ टीम इंडिया को खेलने है 3 वनडे- 2 T-20…

भारत को जिम्बाब्वे के खिलाफ 11 जून से 3 वनडे और 2 टी20 मैचों की सीरीज खेलनी है. इससे पहले टीम इंडिया के पूर्व डायरेक्टर रवि शास्त्री ने सभी फॉर्मेट की कप्तानी विराट कोहली को सौंपने की बात कही थी.

टीम के जिम्बाब्वे दौरे के लिए रवाना होने से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में धोनी ने कहा, 'ऐसा नहीं है कि मैं खेल को एन्जॉय नहीं कर रहा, लेकिन ये फैसला बीसीसीआई को करना है, मैं इस बारे में डिसीजन नहीं ले सकता.' धोनी के इस बयान को शास्त्री के बयान का जवाब माना जा रहा है.

शास्त्री ने कहा था, 'धोनी से कप्तानी की जिम्मेदारी वापस लेकर उन्हें फ्री होकर खेलने देना चाहिए.' बता दें कि धोनी टेस्ट क्रिकेट से रिटायरमेंट ले चुके हैं और वनडे और टी20 खेल रहे हैं.

बीसीसीआई की सबसे बड़ी शर्त- हिंदी आना जरूरी

बोर्ड ने पिछले दिनों हेड कोच के लिए जो एडवर्टाइजमेंट जारी किया था, उसके छठे प्वाइंट में लिखा गया है, "एक इंटरनेशनल टीम के कोच के लिए कम्युनिकेशन स्किल्स बेहतर होना जरूरी है."

"इसके अलावा, मैसेज भी असरदार तरीके से कम्युनिकेट करने के लिए अंग्रेजी में प्रोफिशिएंसी होना जरूरी है. हिंदी और दूसरी रीजनल लैंग्वेज में अपनी बात रखना भी आना चाहिए.''

और कौन कर सकता है अप्लाई?

जानकारी के मुताबिक, बीसीसीआई के पास अभी बहुत ज्यादा एप्लिकेशन नहीं आए हैं. रवि शास्त्री के अलावा संदीप पाटिल का नाम सबसे आगे है जो अप्लाई कर सकते हैं. राहुल द्रविड़ के नाम की भी चर्चा में है.

संजय बांगड़, भरत अरुण और आर. श्रीधर के साथ अगले कुछ दिनों में बीसीसीआई के कोचिंग स्टाफ के लिए दोबारा अप्लाई करेंगे. हालांकि, इनमें शायद ही कोई हेड कोच के लिए अप्लाई करे.

'कुछ नया-नया होगा नई टीम की अगुआई करना'

जिम्बाब्वे दौरे की टीम में विराट कोहली, रोहित शर्मा, शिखर धवन और आर. अश्विन जैसे स्टार प्लेयर्स नहीं हैं. एक तरह से धोनी इस दौरे पर दूसरे दर्जे की टीम की अगुआई करेंगे.

धोनी ने कहा, 'मुझे लगता है कि मेरे लिए यह कुछ अलग एक्सपीरियंस होगा. जब आप लंबे समय तक एक ही ग्रुप के साथ खेलते हैं तो आपको पता होता है कि किस खिलाड़ी का क्या रोल है. इस सीरीज में कई खिलाड़ी ऐसे हैं जिनके साथ मैं पहली बार खेलूंगा.'

धोनी ने ये भी कहा, 'इसलिए मुझे जल्द से जल्द उनकी ताकत का आकलन करना होगा और टीम का सही कंपोजिशन बिठाना होगा.'

'कोच ऐसा जो हमारा कल्चर जाने'

टीम इंडिया के कोच के बारे में पूछे जाने पर धोनी बोले- 'उन्हें हिन्दी की ज्यादा जानकारी हो या न हो लेकिन कल्चर के बारे में पता होना चाहिए.' बता दें बोर्ड ने कोच के लिए अपने ऐड में हिन्दी की जानकारी होने की भी एक शर्त रखी है.

धोनी के मुताबिक, 'कम्युनिकेशन बड़ी समस्या नहीं है. हमें नहीं लगता कि नए खिलाड़ियों के साथ अंग्रेजी कोई दिक्कत है. मुझे लगता है कि हिन्दी में बात करना एक क्राइटेरिया हो सकता है लेकिन इकलौता क्राइटेरिया नहीं हो सकता. बेस्ट को ही चुना जाना चाहिए.'

उन्होंने कहा, 'हम बहुत क्रिकेट खेलते हैं. हमें बेस्ट ऑप्शन को देखना चाहिए. ऐसा व्यक्ति हो जो कि हिन्दी या अंग्रेजी से ज्यादा हमारे कल्चर को समझता हो.' बता दें कि टीम इंडिया के रवि शास्त्री ने भारतीय क्रिकेट टीम के चीफ कोच के लिए अप्लाई कर दिया कर दिया है.

'वर्ल्ड कप के बारे में अभी से कहना जल्दबाजी'

2019 के वर्ल्ड कप के सवाल पर धोनी बोले- 'मुझे लगता है कि 2019 वर्ल्ड कप के बारे में कुछ भी कहना बहुत जल्दबाजी होगा. मुझे लगता है कि काफी कुछ बदलेगा. अभी मेरा फोकस जिम्बाब्वे दौरे और उसके बाद अगले साल चैंपियंस ट्रॉफी पर है.'

'मैं इस समय 35 साल का हूं. मुझे पता है कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब में इतनी तेज नहीं भाग सकूंगा जितना कि आज भागता हूं. इसलिए मुझे ज्यादा से ज्यादा फिट रहने की जरूरत है.' वे ये भी कहते हैं, 'हां, मैं तेज गेंदबाज नहीं हूं कि मुझे उसके जैसी फिटनेस की जरूरत नहीं है.'

शास्त्री ने हेड कोच के लिए दी CV

टीम इंडिया के पूर्व डायरेक्टर रवि शास्त्री जल्द ही हेड कोच के तौर पर दिखाई दे सकते हैं. शास्त्री ने इंडियन क्रिकेट टीम के हेड कोच के लिए अप्लाई कर दिया. बता दें कि पिछले दिनों बीसीसीआई ने एडवर्टाइजमेंट जारी कर हेड कोच के लिए एप्लिकेशन मांगे थे. उसमें हिंदी आने की भी शर्त रखी गई थी. इसके चलते कयास लगाए गए थे कि बोर्ड ने विदेशी कोच को दूर रखने के लिए ऐसी शर्त जोड़ी है. एप्लिकेशन की डेडलाइन 10 जून तक है. शास्त्री ने कहा- एडवर्टाइजमेंट के हिसाब से सबमिट की है सीवी…

शास्त्री ने कहा, ''हां, मैंने चीफ कोच के पोस्ट के लिए अप्लाई कर दिया है. मैंने एडवर्टाइजमेंट के हिसाब से सारे डॉक्युमेंट्स सबमिट किए हैं.''

शास्त्री टीम इंडिया के साथ 18 महीने डायरेक्टर के तौर पर काम कर चुके हैं.शास्त्री का कॉन्ट्रैक्ट इस साल आईसीसी वर्ल्ड कप टी-20 के साथ खत्म हुआ था.

कैसे कर रहे हैं तैयारी?

शास्त्री से जब मीडिया ने पूछा, ''क्या वे कोई तैयारी या रोडमैप बना रहे हैं?'' 80 टेस्ट खेलने वाले शास्त्री ने कहा, ''बीसीसीआई की ओर से जो मांगा गया है मैंने सब मुहैया कराया है.''

''अगर आप पूछ रहे हैं कि मैं कितना कॉन्फिडेंट हूं? तो मैं यही कह सकता हूं कि मेरा काम अप्लाई करना था वो मैंने कर दिया है.''

रवि शास्त्री के फेवर में हैं ये बातें

वे BCCI के हर रूल पर खरा उतरते हैं. नए प्रेसिडेंट अनुराग ठाकुर भी अक्सर शास्त्री की तारीफ करते रहते हैं. यही नहीं, अनुराग के प्रेसिडेंट बनने से पहले शास्त्री, बांगड़, अरुण और श्रीधर ने दिल्ली में उनसे मुलाकात की थी.

रवि शास्त्री टीम इंडिया के डायरेक्टर पद पर भी रह चुके हैं. उनकी कोई बड़ी कॉन्ट्रोवर्सी भी नहीं है. वे विराट कोहली के करीबी भी माने जाते हैं. ऐसे में, रवि शास्त्री कोच पद के लिए लीड कर रहे हैं.

Micro SD कार्ड खरीदते हुए न करें ये गलतियां…!

स्मार्टफोन की मैमोरी बढ़ानी हो या कैमरे में फोटोज ज्यादा हो जाए इन सभी डिवाइस के लिए हमें मैमोरी कार्ड की जरुरत पड़ती है. इसकी बढ़ती डिमांड को देखते हुए छोटी कंपनियां भी माइक्रोएसडी कार्ड बनाने लगी हैं, जो कि कभी कभार काम ही नहीं करते हैं.

एक अच्छा मैमोरी कार्ड लेने के लिए ये समझना जरुरी है कि हर कार्ड एक जैसा नहीं होता है. सबकी अलग स्पीड, अलग क्लास और साइज होते हैं. फोन की मैमोरी बढ़ाने के लिए एसडी कार्ड काफी अच्छे रहते हैं. लेकिन इसे खरीदते समय हमें कुछ बातें ध्यान में रखनी चाहिए.

1. मैमोरी कार्ड का साइज

माइक्रो एसडी कार्ड तीन फॉर्मेट में मौजूद हैं. एसडी, एसडीएचसी एंड एसडीएक्ससी. ये तीनों ही अलग होते हैं और सभी स्लॉट्स में काम नहीं करते हैं.

अंतर

एसडी- इसमें 2जीबी तक की स्टोरेज होती है और ये किसी भी स्लॉट में प्रयोग किया जा सकता है.

एसडीएचसी- यह 2जीबी से 32जीबी स्टोरेज तक आते हैं.

एसडीएक्ससी- यह 32जीबी से शुरू होकर 2 टीबी तक होते हैं और यह केवल एसडीएक्ससी में सपोर्ट होते हैं.

2. स्पीड

एसडी कार्ड अलग अलग क्लास में उपलब्ध हैं, क्लास 2, 4, 6 और 10. यह नंबर इनकी स्पीड बताती है. यानी कि कितनी स्पीड से ये फाइल्स ट्रान्सफर कर सकते हैं.

3. डिवाइस सपोर्ट करता है या नहीं

जब आप कार्ड खरीद रहे हों तो आपको जरुरत है ये ध्यान में रखने की कि वो आपके डिवाइस के लिए सही हो. ज्यादा स्पीड और मैमोरी का कार्ड आपके लिए बेकार है यदि ये आपका डिवाइस सपोर्ट न करे.

4. डुप्लीकेट तो नहीं

कार्ड खरीदते हुए आपको थोड़ी सावधानी बरतने की जरुरत भी है. ऐसा अक्सर होता है कि हमारा पल्ले डुप्लीकेट कार्ड पड़ जाता है. मार्केट में उपलब्ध हर तीसरा कार्ड फेक हो सकता है.

5. सस्ते के चक्कर में न पड़ें

क्या मैमोरी कार्ड काम नहीं कर रहा..! ऐसा मौका हर किसी के साथ आता है. इसे अवॉयड करने के लिए आप सस्ते के चक्कर में पड़ना छोड़ दें. इससे आपको परफॉरमेंस भी अच्छी मिलेगी और इस तरह की कोई दिक्कत भी नहीं होगी. 

सिब्बल-प्रीति मुकाबले में खुलेगी विधायकों की पोल

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव हर दल के लिये कड़ी चुनौती बन गये हैं. हर दल अपने विधायकों की क्रास वोटिंग को संभालने में जुट गया है. इसके लिये हर तरह के इंतजाम किये जा रहे है. भाजपा समर्थित राज्यसभा की निर्दलीय प्रत्याशी प्रीति महापात्रा के चुनाव लड़ने से कांग्रेस प्रत्याशी कपिल सिब्बल की मुश्किले बढ़ गई हैं. कांग्रेस के साथ ही साथ समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी के नेताओं में भी अपने विधायकों को लेकर अविश्वास पैदा हो गया है. सभी दलों ने उतने ही उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे, जितने वोट उनके पास थे. कांग्रेस के पास अपने प्रत्याशी को जिताने भर के वोट नहीं थे. कांग्रेस को भरोसा है कि सपा और बसपा के बचे वोट कपिल सिब्बल को मिलेगे.

समाजसेवी प्रीति महापात्रा के चुनाव मैदान में उतरने से हर दल का गणित गडबडाने लगा है. भाजपा प्रीति महापात्रा को जितवाकर कपिल सिब्बल की सीट फंसाना चाहती है. कपिल सिब्बल के वोट का प्रबंध करने वाली समाजवादी पार्टी को अपने कई विधायकों से खतरा लग रहा है.

प्रीति महापात्रा को जितवाने का जिम्मा भाजपा ने अपने बडे नेताओं को दिया है. इन नेताओं के सपा में तमाम लोगों से करीबी रिश्ते है. यह जानकारी सपा के प्रमुख नेताओं को लगी, तो वह वहां से विधायकों की तोडफोड रोकने का प्रयास शुरू कर दिया है. भाजपा के निशाने पर वह विधायक हैं जो अपने दलों से नाराज चल रहे हैं. ऐसे विधायको की सबसे ज्यादा संख्या सपा में है. बसपा में भी तमाम विधायको को अपने टिकट कटने का अंदेशा है.

यह लोग भाजपा की राह को आसान कर सकते है. कांग्रेस के भी 4 विधायक ऐसे हैं जो क्रास वोटिंग कर सकते है. दरअसल क्रास वोटिंग ऐसे ही नहीं हो रही है. अंदरखाने विधायकों की खरीदफरोख्त चल रही है. खरीदफरोख्त की रकम पहले दिन से लगातार बढती जा रही है. विधायकों को लगता है कि अगर क्रास वोटिंग से उनको पैसा मिल जायेगा, तो उनका विधानसभा चुनाव लडना सरल हो जायेगा.

प्रीति माहपात्रा की उम्मीदवारी को पहले बहुत हल्के में लिया गया था. ज्यादातर लोगों को उम्मीद थी कि वह अपना नाम खुद वापस लें लेंगी. इसके बाद जब प्रीति ने अपना नाम वापस नहीं लिया, तो उनके खिलाफ मीडिया वार चलाया गया. जिसमें उनकी जायदाद और भाजपा नेताओं से संबंध को निशाने पर लिया गया. इन सबको नजर अंदाज कर प्रीति ने अपना काम जारी रखा. प्रीति के समर्थन में तमाम महिलायें एकजुट हो गई. जिसके बाद प्रीति की उम्मीदवारी अब गंभीरता से ली जाने लगी है.

प्रीति को मिल रहे समर्थन से कांग्रेस सहित दूसरे दलों की नीद उड गई है. प्रीति की जीत में दूसरे राजनीतिक दलों की हार छिपी है. ऐसे में हर किसी को अपने दल की फिक्र हो रही है. कोई भी दल यह पंसद नहीं करेगा कि उसके विधायक क्रास वोटिंग करे. जैसे जैसे मतदान की तारीख करीब आ रही है क्रास वोटिंग को लेकर धडकने तेज हो गई है. कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल और निर्दलीय प्रत्याशी प्रीति महापात्रा की लडाई में दूसरे दल बेनकाब होंगे.             

 

                    

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