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मोबाइल वॉलेट से भी हो सकती है पॉकेटमारी

स्मार्टफोन पर आप मोबाइल वॉलेट इस्तेमाल करते हैं तो उसके खतरे भी काफी होते हैं. कहीं ऐसा न हो कि कोई आपसे जाने अनजाने में पासवर्ड ले ले और आपके बैलेंस को साफ कर दे.

देश के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने कहा है कि वो सभी मोबाइल वॉलेट के ऑनलाइन इस्तेमाल और उस पर ऑनलाइन पैसे लोड करने के फीचर को फिलहाल बंद कर रहा है.

मीडियानामा की इस रिपोर्ट के अनुसार ऐसे कई मामले सामने आये हैं जब 'विशिंग' के कारण लोगों के साथ धोखा किया गया.

'विशिंग' कॉल उन्हें कहते हैं जब कोई भी आपके अकाउंट के बारे में जानकारी मांगता है.

ऐसे कॉल करने वाला अपने आप को बैंक या किसी कंपनी का अधिकारी बताता है, और बातों-बातों में मोबाइल वॉलेट से जुड़े लॉग इन और पासवर्ड ले लेता है.

पासवर्ड मिलते ही उचक्के मोबाइल वॉलेट में पैसे ट्रांसफर कर लेते हैं और फिर उसे दूसरे बैंक अकाउंट में भेज देते हैं.

अब स्टेट बैंक कई वॉलेट कंपनियों से बात कर रही है ताकि उसकी शर्तों को मान कर ही लोग वॉलेट में पैसे ट्रांसफर करें.

इस रिपोर्ट के अनुसार, कुछ इ-कॉमर्स वेबसाइट पर स्टेट बैंक के नेट बैंकिंग से भी पैसे ट्रांसफर करना संभव नहीं है क्योंकि उन्हें ब्लॉक किया गया है.

स्टेट बैंक का ये कदम ये दिखाता है कि ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करना कई बार खतरे से खाली नहीं होता है.

जब भी ऑनलाइन पेमेंट करें, कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

– अगर पेमेंट मोबाइल ऐप के जरिये कर रहे हैं तो एक बार ये जरूर सोच लीजिए कि वो सुरक्षित है या नहीं.

– ऐप की रेटिंग देख लीजिए और रिव्यु को जरूर पढ़ लीजिए.

– जो भी वेबसाइट पर आप पैसे ट्रांसफर करने की सोच रहे हैं वो 'https' से शुरू होना चाहिए.

इससे आपके पैसे किसी उचक्के के पास पहुंचने के आसार थोड़े कम हो जाते हैं.

– अगर ऐप पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर सकते हैं तो 'कैश ऑन डिलीवरी' विकल्प का इस्तेमाल कीजिए.

– ईमेल में अगर प्रमोशनल ऑफर आते हैं तो जिस कंपनी का भी ऑफर है उसी की वेबसाइट पर जाकर उसका फायदा उठाने का सोचिए.

– अगर ऐसे लिंक पर आप अपने बारे में जानकारी देते हैं तो वो जानकारी अक्सर दूसरी कंपनियों के पास जाती है.

– कोई भी वेबसाइट, ऐप या कॉल करने वाला अगर आपसे पासवर्ड या लॉग इन की जानकारी मांगता है तो वो उचक्का ही हो सकता है.

– सभी बैंक और मोबाइल वॉलेट कंपनियां ये हमेशा कहती हैं कि उनका कोई भी कर्मचारी आपसे पासवर्ड कभी नहीं मांगेगा.

सीरीज जीतने के बाद भी क्यों चिंतित हैं धोनी!

टीम इंडिया के अनुभवी कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरा वनडे जीतकर सीरीज पर कब्जा कर लिया है. धोनी ने अपनी कप्तानी में पहली बार जिम्बाब्वे की धरती पर वनडे सीरीज जीती.

भारतीय टीम जिम्बाब्वे पर वनडे सीरीज में वाइटवॉश करने की ओर बढ़ रही है लेकिन कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने कहा कि वह इस बात से चिंतित हैं कि अब तक दौरे पर उनके ज्यादातर बल्लेबाजों को मौका नहीं मिला है.

भारत ने दूसरे वनडे में जिम्बाब्वे पर आठ विकेट से जीत दर्ज कर तीन मैचों की सीरीज में 2-0 से अजेय बढ़त बना ली. धोनी ने मैच के बाद कहा कि अभी तक हमारे शीर्ष बल्लेबाजों में से केवल तीन को ही खेलने का मौका मिला है. बल्लेबाजी विभाग में हम कुछ बदलाव करना चाहेंगे.

अंतिम वनडे और तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में टीम के संयोजन में बदलाव के संदर्भ में उन्होंने कहा, हम बैठकर अगले मैच में बदलाव के लिए संजय बांगड़ से चर्चा करेंगे. एक मैच में इतने सारे खिलाड़ी नहीं खेल सकते. हम देखेंगे कि हम टी20 टीम में किसे रख सकते हैं और हम कुछ गेंदबाजों को आराम देंगे.

धोनी ने इस जीत के लिए अपने गेंदबाजों को श्रेय दिया. उन्होंने कहा कि हमारे गेंदबाजों ने उन्हें रोकने का शानदार काम किया, मुझे लग रहा था कि वे 200 रन से आगे बढ़ जायेंगे लेकिन हमारे स्पिनरों ने हमें अहम विकेट दिलाये.

रिचमंड मुतुम्बामी के कैच के बारे में पूछने पर धौनी ने कहा, कैच लेना हमेशा अच्छा होता है और बल्ले के अंदरूनी किनारे को लगकर गयी गेंद को पकड़ना हमेशा अच्छा होता है. भारत ने पहले वनडे में नौ विकेट से जीत दर्ज की थी.

धोनी ने कहा, यह प्रदर्शन पहले मैच से अलग था, पिच भी थोड़ी अलग थी. पहले 10 ओवरों में खेले गए कुछ शॉट से लग रहा था कि गेंद बल्ले पर अच्छी तरह आ रही थी.

टीम के दबदबे भरे प्रदर्शन के बीच धोनी को एक बार भी बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला है लेकिन उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. उन्होंने कहा, सबसे अहम चीज मैच जीतना है और जब पेशेवर होने की बात आती है तो हमारी बल्लेबाजी इस पर खरी उतरी है, यहां तक कि पहले मैच में भी.

दूसरे दर्जे की भारतीय टीम ने फिर दबदबे भरा प्रदर्शन किया और गेंदबाजों ने मेजबान टीम को 34.3 ओवर में 126 रन के स्कोर पर आउट कर दिया. फिर बल्लेबाजों को इस लक्ष्य को हासिल करने में जरा भी पसीना नहीं बहाना पड़ा और उन्होंने महज 26.5 ओवर में जीत दर्ज की.

जिम्बाब्वे टीम के कप्तान ग्रेम क्रेमर इस परिणाम से निराश थे, उन्होंने कहा, फिर से टॉस गंवाने ने भी इस हार में भूमिका अदा की, लेकिन हमारे बल्लेबाजों ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया. हम 240 रन का स्कोर बनाकर उन्हें दबाव में लाना चाहते थे. चोटें हमेशा निराशाजनक होती हैं लेकिन मुझे लगता है कि हमारे पास अच्छा स्कोर बनाने के लिए काफी बल्लेबाज थे. हमें चार मैच और खेलने हैं और उम्मीद है कि हम टी20 में उन्हें चुनौती देंगे.

मैन ऑफ द मैच लेग स्पिनर युजवेंद्र चाहल ने 25 रन देकर तीन विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया., उन्होंने कहा, मैंने गेंदबाजी का लुत्फ उठाया, विकेट थोड़ा धीमा था.

नदी जोड़ योजना पर काम शुरू

अगर कोई नया पेंच नहीं फंसे तो बिहार की पहली नदी जोड़ योजना को जल्द ही मंजूरी मिलने के आसार हैं. नदियों में पानी की उपलब्धता को ले कर केंद्र सरकार द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब बिहार सरकार ने भेज दिए हैं. बिहार सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि राज्य की संकरीनाटा नदियों में केवल मानसून के समय ही पानी रहता है. नदी जोड़ योजना से इस पानी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो सकेगा.

गौरतलब है कि राज्य की नदी जोड़ योजना में केंद्र सरकार रोज नया पेंच फंसा रही है और अभी तक एक भी योजना को मंजूरी नहीं मिली है. संकरीनाटा योजना की तमाम खानापूरी हो चुकी है, पर केंद्र ने पानी उपलब्धता को ले कर नया अडंगा लगा दिया है.

बिहार सरकार सिंचाई प्रबंधन के लिए बनी 3 नदी जोड़ योजनाओं में संकरीनाटा लिंकिंग योजना को इसी साल शुरू करने की तैयारी में है. केंद्र सरकार ने 2903 करोड़ रुपए की लागत वाली कोसीमेची नदी जोड़ योजना के अलावा 572 करोड़ रुपए की संकरीनाटा नदी जोड़ योजना पर सहमति दे दी है.

राज्य सरकार का दावा है कि केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद साल 2018 तक संकरीनाटा लिंक योजना को पूरा कर लिया जाएगा. इस योजना के लिए आपसी सहमति के आधार पर जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है. इस योजना के पूरा होने के बाद राज्य के कई जिलों को फायदा होगा.         

क्रिकेट बना शांतिदूत

1994 में रवांडा में जो कुछ हुआ, उसे शायद ही कोई भूल सके. तुत्सी और हुतु समुदाय के बीच नरसंहार ने रवांडा को बर्बाद कर दिया था. 100 दिन तक चले नरसंहार में 80000 से भी ज्यादा लोगों की जान चली गयी थी. कई परिवार उजड़ गए थे. लोगों ने अपना देश छोड़ पड़ोसी मुल्क में शरण ली थी. आज भी वहां के लोग सदमे है, अपने परिवार को याद करते हैं.

लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि दोनों समुदाय के लोग एक-दूसरे के करीब आने लगे हैं. इन समुदाय को करीब लाने में क्रिकेट शांतिदूत के रूप में काम कर रहा है. क्रिकेट के प्रति प्यार लोगों के बीच नफरत और दूरियां कम हो रही है.

क्यों हुआ था नरसंहार…

रवांडा में तुत्सी और हुतु समुदाय के लोगों के बीच संघर्ष होता रहा है. वहां एक समुदाय दूसरे समुदाय के ऊपर अपना हक़ जमाने की कोशिश करता रहा है. लेकिन 1994 में यही संघर्ष नरसंहार के रूप में बदल गया था. 1994 में रवांडा के राष्ट्रपति हेबिअरिमाना और बुरुन्डियान के राष्ट्रपति सिप्रेन की हवाई जहाज पर बोर्डिंग के दौरान हत्या कर दी गई थी.

उस वक्त हुतु समुदाय की सरकार थी और उन्हें लगा कि यह हत्या तुत्सी समुदाय के लोगों ने की है. इसके बाद नरसंहार शुरू हो गया था. हुतु सरकार ने अपने सैनिकों के जरिए तुत्सी समुदाय के लोगों को मारना शुरू किया. पूरे देश में यह आदेश दिया गया था कि जहां भी तुत्सी समुदाय के लोग दिखें, उन्हें मार दिया जाए. इस नरसंहार में 80000 से भी ज्यादा तुत्सी समुदाय के लोगों को मार दिया गया था. कई लोग छुपकर देश छोड़कर भाग गए थे.

कैसे शुरू हुआ क्रिकेट…

रवांडा में क्रिकेट 1994 के नरसंहार के कुछ सालों बाद शुरू हुआ. 1959 में दोनों समुदाय के बीच हुए संघर्ष के दौरान कुछ लोग देश छोड़कर चले गए थे और पड़ोसी देश में बस गए थे. लेकिन 1994 नरसंहार के बाद इनमें कुछ लोग रवांडा वापस आना चाहते थे और क्रिकेट के जरिए लोगों के बीच की दूरियां और नफरत कम करना चाहते थे.

रवांडा में क्रिकेट शुरू करने में सबसे बड़ा हाथ जिसका है, वह है चार्ल्स हबा. 1959 में चार्ल्स रवांडा छोड़ कर युगांडा में बस गए थे. 1994 के नरसंहार के बाद चार्ल्स हबा रवांडा वापस आए और रवांडा में क्रिकेट के बढ़ावा के लिए काम शुरू कर दिए.

रवांडा में क्रिकेट की शुरूआत सन् 2000 के करीब हुई थी अब रवांडा में 6000 से भी ज्यादा क्रिकेट खिलाड़ी हैं. कई खिलाड़ी अपने अतीत को भूलकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. टीम में दोनों समुदाय के खिलाड़ी है. मिल जुलकर खेलते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. रवांडा में एक क्रिकेट एसोसिएशन भी बनाई गई है जिसके अध्यक्ष चार्ल्स हबा हैं.

प्रख्यात क्रिकेटर ब्रायन लारा कर रहे हैं मदद…

रवांडा में कोई बड़ा क्रिकेट स्टेडियम नहीं है. रवांडा की राजधानी किगाली में एक क्रिकेट स्टेडियम तो बना हुआ है लेकिन इसमें ज्यादा सुविधाएं नहीं हैं. इस स्टेडियम को वर्ल्ड क्लास स्टेडियम बनाने के लिए “रवांडा क्रिकेट स्टेडियम फाउंडेशन” का गठन किया गया है जिसमें प्रख्यात क्रिकेटर ब्रायन लारा और इंग्लैंड के प्रधानमंत्री डेविड कैमरून जैसे लोग सहायक साबित हो रहे हैं.

लारा के मदद करने के पीछे बहुत बड़ी वजह है. 16 अप्रैल 1994 में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए टेस्ट मैच में ब्रायन लारा ने शानदार 375 रन बनाए थे जो उनके टेस्ट कॅरियर का सर्वाधिक स्कोर था लेकिन उसी समय रवांडा में नरसंहार चल रहा था और लारा इस नरसंहार को लेकर काफी दुखी थे.

किसने किया लारा को मदद करने के लिए प्रेरित…

ब्रायन लारा ने इंग्लैंड के मैगज़ीन “द स्पेक्टेटर” में एक लेख लिखते हुए बताया है कि कैसे वह 2009 में रवांडा घूमने गए थे और उस दौरान इस देश की हाल देखकर हैरान हो गए थे. इस लेख में लारा ने लिखा है कि रवांडा के क्रिकेटर ऑडिफक्स बिरिंगिरो से उनकी मुलाकात हुई थी और इस मुलाकात ने लारा को एहसास कराया कि उनको रवांडा क्रिकेट के लिए कुछ करना चाहिए.

लारा ने लिखा है कि जब 1994 में वह शानदार फॉर्म में चल रहे थे तब बिरिंगिरो छह महीने का बच्चा था. 1994 में हुई नरसंहार में उसके पिता और तीन भाइयों की हत्या कर दी गई, सिर्फ बिरिंगिरो और उनकी मां बच गए थे. बिरिंगिरो ने 14 साल के उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था.

लारा ने लिखा है कि 2009 में ऑडिफक्स से जब वह मिले थे वह यह देखते हुए आश्चर्य हो गए थे कि कैसे क्रिकेट उसकी ज़िंदगी को बदल दिया है. क्रिकेट के जरिये कैसे वह अपने अतीत को भुलाकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है. स्कूल जाने से पहले और स्कूल से आने के बाद वह सिर्फ क्रिकेट में अपना समय बिता रहा था, यह जानते हुए भी रवांडा में क्रिकेट में कोई भविष्य नहीं है. 2011 में राष्ट्रीय टीम में बिरिंगिरो को मौका मिला. आज बिरिंगिरो पढ़ाई के साथ-साथ भी स्कूल में यूनिवर्सिटी में और अनाथ बच्चों को कोचिंग दे रहे हैं.

सिगरेट पैकेट पर चेतावनी

यदि आप सिगरेट पीने वालों में से हैं तो अब सिगरेट पैक पर डराने वाले फोटो देखने को तैयार हो जाएं. सिगरेट से होने वाली कैंसर मौतों से बचने के लिए दुनियाभर के डाक्टर इस तरह की चेतावनी की वकालत करते हैं कि हर सिगरेट मौत का बुलावा है चाहे पीने वाला जितना मरजी कहे कि उस की तलब के बिना वह जिंदा नहीं रह सकता. सरकार ने सिगरेट पैक के हर तरफ 85 फीसदी जगह पर डराने वाले फोटो लगाने की बात इसलिए कही है, ताकि लोग उसे खरीदते हुए घबराएं.

सिगरेट उत्पादकों ने बहुत हल्ला मचाया है कि इस से तंबाकू उगाने वाले लाखों बेकार हो जाएंगे, दुकानदारों की रोजीरोटी छिन जाएगी, लोग बेचैन हो जाएंगे, बीड़ी को अपना लेंगे. ये दलीलें लचर हैं. अगर लाखों बेकार होंगे, तो करोड़ों की बीमारियां कम होंगी. अरबों रुपया जो धुएं में बेकार होता है, बचेगा. सरकारी व निजी अस्पतालों में भीड़ कम होगी.

सिर्फ इसलिए कि किसी गलत व्यापार में लोग लगे हैं, उसे चालू रखने की मांग सिरफिरी है. कुछ इस तरह कि कल को चोरियों पर रोक हटाने की मांग करते हुए कहा जाए कि चोर न हों तो पुलिस वालों की नौकरियां समाप्त हो जाएंगी, अदालतें बंद हो जाएंगी, वकील बेकार हो जाएंगे. चोर बेकार हो जाएंगे. उन के घर नहीं चलेंगे.

सिगरेट ही नहीं पान मसाला और शराब के पैक पर भी इस तरह की तसवीरें छपने का कानून बनना चाहिए. लोगों की सेहत से जम कर खिलवाड़ किया जा रहा है. शराब पीने वाले तो बहक कर दूसरों को परेशान भी करते हैं, जो कम से कम पान मसाला और सिगरेट वाले नहीं करते. नशे में गाडि़यां चलाने वाले सब से ज्यादा खतरनाक हैं, बंदूकधारी आतंकवादियों से भी ज्यादा. डरावनी तसवीरें शराब की हर बोतल पर होनी ही चाहिए.

हिंदी फिल्मों में तो अब सिगरेट पीना दिखाना बंद सा कर दिया गया है, पर हौलीवुड अभी भी दिखाता है. इतने सालों की रोक के बावजूद सिगरेट की कुल बिक्री जस की तस बनी है. औरतों ने भी शान में आ कर पीना शुरू कर दिया है.

नशा एक बार आदत बन जाए तो आसानी से नहीं जाता चाहे सिगरेट का हो, शराब का, पान मसाले का या मादक दवाओं का. सरकारों को इन्हें रोकना ही होगा. यह अच्छी बात है कि औरतों के वोट पाने के लिए अब यह चुनावी मुद्दा बनने लगा है.

सिगरेटशराब कोई खाना नहीं है कि इस के बिना मौत आ जाएगी. यह लूटने की साजिश का हिस्सा है और आमतौर पर सरकार भी इस में शामिल रहती है, तभी तो सिगरेटबंदी और शराबबंदी पर सरकार हिचक कर ही कदम उठाती है. ऊपरी कमाई के ये ही तो स्रोत हैं.                                 

 

नसीर की भड़ास या कड़वे सच की बयानी

इन दिनों बौलीवुड के कई  कलाकार बौलीवुड में अपने करियर को धता बताकर विदेशी धरती पर यानी कि हौलीवुड फिल्मों में अपना करियर संवारने पर ध्यान लगा रहे हैं. फिर चाहे वह दीपिका पादुकोण हों या अनिल कपूर हों या प्रियंका चोपड़ा हों या राधिका आप्टे हो या इरफान खान ही क्यों न हों. इन सभी कलाकारों पर निशाना साधते हुए नसिरूद्दीन शाह ने कहा कि हौलीवुड के लिए जान झिड़क रहे यह सारे बौलीवुड कलाकार बहुत जल्द बैरंग वापस लौटने वाले हैं.

नसिरूद्दीन शाह ने हाल ही में पत्रकारों से कहा-‘‘हिंदी फिल्मों के कलाकार हौलीवुड फिल्मों पर मरते हैं. वहां जाने के लिए हमेशा अपनी बाहें फैलाए रहते हैं. जिन्होंने भी हौलीवुड का रूख किया है, वह सब बहुत जल्द लौट आएंगे. एशियन्स को हौलीवुड में मुख्य भूमिका निभाने के लिए कोई जगह नहीं है.’’ जब से नसिरूद्दीन शाह ने यह सब कहा है, तब से बौलीवुड के गलियारों में लोग इसे नसिरूद्दीन शाह की भड़ास बता रहे हैं. सूत्रों के अनुसार कई लोगों की राय में नसिरूद्दीन शाह खुद को ‘इंस्टीट्यूट आफ एक्टिंग’ मानते हैं, पर वह भारतीय फिल्मों तक ही सीमित होकर रह गए. जबकि दूसरे कलाकार अंतरराष्ट्रीय शोहरत बटोर रहे हैं, इसलिए वह फस्ट्रेशन में इस तरह की बातें कर रहे हैं.

वास्तव में हौलीवुड में स्टार बन जाने का सपना देख रहे बौलीवुड कलाकारों को नसिरूद्दीन शाह द्वारा कहा गया यह कड़वा सच परेशान कर रहा है. सूत्रों का दावा है कि इसी के चलते यह कलाकार नसिरूद्दीन शाह के बयान पर अपने करीबियों से अनापशनाप बयानबाजी करवा रहे हैं, जबकि ध्यान से देखें तो नसिरूद्दीन शाह ने सच ही कहा है.

दीपिका पादुकोण व प्रियंका चोपड़ा ने जब से हौलीवुड में सक्रिय हुई हैं, तब से इनके पास बौलीवुड में कोई काम नही है. आज की तारीख में प्रियंका चोपड़ा व दीपिका पादुकोण के पास एक भी हिंदी फिल्म नहीं है. भारत में अपनी उपस्थिति को बनाए रखने के लिए मजबूरन प्रियंका चोपड़ा ने कम बजट की भोजपुरी फिल्म ‘‘बम बम बोल रहा है काशी’’ का निर्माण किया है. सूत्र बता रहे हैं कि दीपिका पादुकोण भी निर्माण के क्षेत्र में कदम रखने की सोच रही हैं. दूसरी बात प्रियंका व दीपिका दोनो हौलीवुड में मुख्य हीरोईन के किरदार नहीं निभा रही हैं.

अनिल कपूर ने कुछ हौलीवुड प्रोजेक्ट किए, पर उनके पास भी फिलहाल एक भी हिंदी फिल्म नहीं है. अनिल कपूर ने हौलीवुड के सीरियल ‘24’ में अभिनय किया था. उसके बाद वह इस सीरियल के अधिकार खरीदकर अब हिंदी में सीरियल का निर्माण व उसमें अभिनय कर रहे हैं.

कहा जा रहा है कि इरफान खान हालीवुड में सबसे ज्यादा व्यस्त हैं. पर क्या इरफान खान हालीवुड फिल्मों में मुख्य हीरो होते हैं? दूसरी बात हौलीवुड की वजह से क्या उनके बौलीवुड करियर पर असर नहीं पड़ रहा. अब तो इरफान खान भी फिल्म निर्माण में उतर चुके हैं. उन्होने निशिकांत कामत के निर्देशन में फिल्म ‘मदारी’ का निर्माण किया है और खुद ही मुख्य भूमिका निभायी है. यह फिल्म कम से कम एक साल से रिलीज नहीं हो पा रही हैं. अभी दस जून को रिलीज होने वाली थी, पर अब कहा जा रहा है कि 15 जुलाई को  रिलीज होगी.

इसी तरह बिपाशा बसु, मल्लिका शेरावत व इमरान हाशमी ने भी हौलीवुड फिल्में की, पर अब यह कहां हैं? राधिका आप्टे भी हौलीवुड के लिए हाथ पैर मारती रहती हैं. फिलहाल एक फिल्म ‘‘आश्रम’’ की शूटिंग की है, जिसे भारत में शिमला में ही फिल्माया गया. फिल्म ‘आश्रम’ की कहानी पूरी तरह से भारतीय पृष्ठभूमि की है.

नसिरूद्दीन शाह के बयान को कड़वा सच बताने वालों का तर्क है कि बौलीवुड के कलाकार यह भूल रहे हैं कि भारत व अमेरिका या इंग्लैंड की सभ्यता, संस्कृति, पहनावे आदि में बहुत फर्क है. इसी तरह सिनेमा में भी फर्क है. दूसरी बात सिनेमा में किरदार के अनुरूप कलाकारो का चयन लाजमी है. फिल्म के पात्र के साथ कलाकार का लुक मिलना चाहिए. इस शर्त पर भारतीय कलाकार खरे नहीं उतरते. पर यह इस बात को क्या समझे. हमारे यहां तो बायोपिक फिल्मों के निर्माण के समय भी लुक पर ध्यान नहीं दिया जाता.

अनुराग कश्यप की बढ़ती मुश्किलें

बौलीवुड में चर्चाएं गर्म हैं कि इस बार अपनी फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ को लेकर जिस तरह का पंगा अनुराग कश्यप ने लिया है, उससे लगता है कि उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जाने वाली हैं. सूत्रों की माने तो ‘उड़ता पंजाब’ को लेकर मुंबई हाईकोर्ट का निर्णय चाहे जो रहे, पर अनुराग की मुसीबतें कम होंगी, ऐसा नहीं लगता.

सूत्रों के अनुसार अनुराग अपनी सफलतम फिल्म ‘‘गैंग आफ वासेपुर’’का तीसरा भाग ‘‘गैंग आफ वासेपुर 1.5’’ का निर्माण करने जा रहे हैं. जिसके निर्देशन की जिम्मेदारी अनुराग ने ‘‘गैंग आफ वासेपुर भाग एक व दो’’ के लेखक तथा मूलतः वासेपुर निवासी जीशान कादरी को सौंपी है. इस फिल्म की शूटिंग बहुत जल्द झारखंड में धनबाद जिले के वासेपुर में ही शुरू होनी है. पर अब वासेपुर से जो खबरें मिल रही हैं, वह अनुराग के पक्ष में नहीं हैं.

सूत्रों के अनुसार इस बार अनुराग कश्यप के लिए ‘‘गैंग आफ वासेपुर 1.5’’ की शूटिंग वासेपुर  में करना आसान नहीं होगा. सूत्रों के अनुसार वासेपुर में अनुराग का विरोध शुरू हो गया है. वासेपुर निवासियों के अनुसार अनुराग ‘गैंग आफ वासेपुर’ भाग एक व दो से जितना वासेपुर को बदनाम करना चाहते थे, वह कर चुके, पर अब उन्हे आगे ऐसा नहीं करने दिया जाएगा और अब किसी भी सूरत में तीसरे भाग की शूटिंग नहीं करने दी जाएगी.

सूत्रों की माने तो जीशान कादरी के घर के सामने प्रदर्शन का दौर शुरू हो चुका है. जबकि जीशान कादरी अब लोगों को समझाने में लगे हुए हैं कि लोगों को फिल्म को फिल्म की तरह ही लेना चाहिए, जबकि यही जीशान कादरी ‘गैंग अफ वासेपुर’ भाग एक और दो को यथार्थ का दर्शन बताते रहे हैं. सूत्रों की माने तो वासेपुर के पढ़े लिखे लोग लामबंद हो चुके हैं, जो कि अनुराग कश्यप के लिए कई तरह क मुसीबतें खड़ी कर सकते हैं.

ऐश्वर्या चौबे का पब्लिसिटी स्टंट या…?

बौलीवुड में लोग अपने आपको सुखिर्यों में बनाए रखने के लिए कुछ भी करते रहते हैं. यूं भी बालीवुड से जुडे़ ज्यादातर लोग यह मानकर चलते हैं कि, ‘बदनाम हुए तो क्या हुआ, नाम तो हुआ.’’ खैर, कश्मीर से मुंबई आकर बौलीवुड में पैर जमाने के लिए संघर्षरत अदाकारा ऐश्वर्या चौबे और अभिनेता एजाज खान के बीच पैदा हुई तल्खी की चर्चाएं हैं.

सूत्रों के अनुसार सोनाक्षी सिन्हा के साथ फिल्म ‘‘अकीरा’’ में अभिनय कर बौलीवुड में ऐश्वर्या चौबे कुछ लोगों की नजरों में तो आ ही चुकी हैं. बौलीवुड से जुड़े कुछ कलाकार व फिल्मकार भी उनके संपर्क में हैं. कुछ दिन पहले तक ऐश्वर्या चौबे को अभिनेता एजाज खान के साथ कई फिल्मी पार्टिर्यों में एक साथ देखा गया. सूत्रों की माने तो एजाज खान ने ऐश्वर्या चौबे को राम गोपाल वर्मा सहित कुछ फिल्मकारों से भी मिलवाया. मगर अब वही एजाज खान, ऐश्वर्या की नजर में सबसे बडे़ दुश्मन हो गए हैं.

ऐश्वर्या चौबे ने मुंबई के वर्सोवा पुलिस स्टेशन में लिखायी गयी अपनी एफआरआई में शिकायत की है कि ‘एजाज खान ने उनसे दोस्ती की और फिल्मों में काम दिलवाने के वायदे के साथ निर्माताओं से मिलवाया. उसके बाद एजाज खान ने अपने इस काम की उससे कीमत वसूलनी चाही. एजाज ने ऐश्वर्या चौबे के सामने अपनी मदद की कीमत के बदले में जो प्रस्ताव रखा, उसे ऐश्वर्या चौबे ने जब ठुकरा दिया, तो एजाज खान बुरा मान गए. उसके बाद एजाज खान ने अपने मोबाइल से ऐश्वर्या चौबे को अश्लील संदेश भेजने शुरू किए, जिससे तंग आकर ऐश्वर्या ने पुलिस से मदद की गुहार लगायी है.

ऐश्वर्या चौबे पुलिस स्टेशन में इन एसएमएस को जमा करवा चुकी हैं और वह हर पत्रकार को एजाज खान के भेजे एसएमएस पढ़ाती भी हैं. उधर एजाज खान ने अपने वकील के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचकर खुद को निर्दोष साबित करने के कुछ सबूत दिए हैं. एजाज का दावा है कि उसने तो ऐश्वर्या चौबे की मदद करने की कोशिश की. मगर पता नहीं ऐश्वर्या चौबे उन पर इस तरह का आरोप क्यों लगा रही हैं.

एजाज का दावा है कि दोस्ती के चलते वह कुछ फिल्मी पार्टियों में एक साथ जाते रहे हैं. एक दिन ऐश्वर्या चौबे ने उनका मोबाइल मांगा, तो उन्होंने दोस्त होने के नाते मोबाइल पकड़ा दिया. उसके बाद वह दूसरे दोस्त से बात करते रहे. कुछ देर बाद उनका मोबाइल उन्हे ऐश्वर्या ने लौटा दिया. एजाज का दावा है कि जब ऐश्वर्या ने उनसे उनका मोबाइल मांगा था, तभी ऐश्वर्या ने खुद ही अश्लीलल एसएमएस उनके मोबाइल पर लिखकर अपने मोबाइल पर भेज दिया होगा.

बहरहाल, दोनों तरफ से मीडिया में एक दूसरे के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं. पुलिस का दावा है कि वह इसकी जांच कर रही है. मगर बौलीवुड से जुड़े सूत्र इसे ऐश्वर्या चौबे का पब्लिसिटी स्टंट ही बता रहे हैं. खैर, हम निगाह बनाए हुए हैं कि इसका अंत क्या होता है. पर बौलीवुड एक्टरों की फितरत समझने वालों को पूरा यकीन है कि यह महज पब्लिसिटी स्टंट ही है.

जूही चावला ने क्यों किया कन्नड़ फिल्म में आइटम नंबर

बौलीवुड अदाकारा जूही चावला ने अपने अब तक के अभिनय करियर में किसी भी फिल्म में आइटम नंबर नहीं किया है, लेकिन जब से यह खबर फैली है कि जूही चावला ने हिंदी नहीं बल्कि रमेश अरविंद की सौंवी कन्नड़ फिल्म में एक आइटम नंबर किया है, तब से हर कोई आश्चर्यचकित है. जबकि जूही चावला का दावा है कि उन्होंने इस फिल्म में अपने आपको ही निभाया है.

मीडिया से बात करते हुए जूही चावला ने कहा है-‘‘यह सच है कि मैने अपने अब तक के करियर में किसी भी हिंदी फिल्म में आइटम नंबर नहीं किया है. मगर मैंने पहली बार कन्नड़ फिल्म में आइटम नंबर किया है, जो कि अभी तक रिलीज नहीं हुई है. वास्तव में जब मुझे इस आइटम नंबर के लिए याद किया गया, तो मुझे भी आश्वर्य हुआ, पर जब मुझे बताया गया कि फिल्म की कहानी अस्सी के दशक की है. जिसमें जेल के अंदर एक संगीत कार्यक्रम हो रहा है, इस कार्यक्रम में एक बौलीवुड अभिनेत्री आकर डांस करती है. तो मुझे यह कांसेप्ट अच्छा लगा.

फिल्म में मैंने अस्सी के दशक का ही नृत्य किया है. गाने के बोल भी बहुत अच्छे हैं. देखिए,मैं कोई बड़ा किरदार निभाउं या छोटा, मैं हमेशा दिल से काम करती हूं. इसलिए यह आइटम नंबर भी लोगों को बहुत पसंद आएगा. यह गाना जेल के कैदियों को प्रेरणा देने वाला, तकदीर में यकीन करने, उनका हौसला आफजाई करने वाला है. यह गाना जिंदगी को लेकर भी बात करता है. इस गाने में बीच बीच में हिंदी शब्द भी हैं. इसे बंगलोर में फिल्माय गया है. मैने काफी लंबे समय बाद इस नृत्य किया है. मेरे पति व बच्चों ने अभी तक इस गाने को देखा नहीं है, लेकिन जिन्होंने भी देखा है, वह सभी मेरी तारीफ कर रहे हैं.’’

सेलुलर बाई देगी सेल्फी टिप्स

सोशल मीडिया का बुखार सिर चढ कर बोल रहा है. सेल्फी फोटो लेना तो कई तरह से अपराध भी घोषित किया जा रहा है. सेल्फी पर तमाम तरह की रिसर्च भी हो रही है. इसे मनोविज्ञान से लेकर समाजशास्त्र तक से जोडा जा रहा है. सेल्फी की तरह फेसबुक पर बारबार अपनी फोटो और स्टेटस अपलोड करना भी खतरनाक श्रेणी में गिना जाने लगा है. ऐसे व्यवहार और जिज्ञासा को लेकर पर्सनाल्टी पर रिसर्च हो रही है. यह सब मनोरंजन का साधन भी बन चुका है.

एंड टीवी के कामेडी शो ‘लाइफ का रिचार्ज’ इस तरह की सोशल मीडिया की कहानी को लेकर ही बनाया गया है. विकल्प मेहता और मिंटू शर्मा की एंकरिंग में शीबा राना, ओमप्रकाश डिमरी, आधार गोस्वामी, नेहा शर्मा इसमें अलग अलग तरह से कामडी कर सबकों हंसाने की कोशिश करेगे. शो में सबसे मजेदार भूमिका सेलुलर बाई की है, जिसे शीबा राना निभा रही हैं.

सेलुलर बाई बनी शीबा राना घर की नौकरानी है, जिसपर सबके दिल लटटू हो जाते हैं. वह खुद भी सोशल मीडिया पर बहुत एक्टिव रहती है. शीबा ने सेल्फी लेने के कई लाभ बताये और दिखाया कि किस तरह से सेल्फी ली जा सकती है. मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की रहने वाली शीबा ने टीवी शो ‘लाइफ का रिचार्ज’ के पहले मौडलिंग और दक्षिण भारत की कई फिल्मों में काम किया है.

पूजा भट्ट के निर्देशन में उनकी हिंदी फिल्म ’कैबरे’ बन चुकी है और जल्द ही रिलीज होने वाली है. वह कहती हैं कि खूबसूरत नौकरानी के प्रति पड़ोसी तक कैसी नजर रखते हैं, इसको दिखाने का काम ‘लाइफ का रिचार्ज’ में किया है. यह बहुत ही चुलबुला किरदार है. हम ऐसी नौकरानी बने हैं जो हमेशा डिजिटल रहती हैं. कान में ब्लूटूथ और झाडू के सेल्फी स्टिक होती है. माथे की बिंदी भी वाईफाई होती है.

कामेडी शो में एडल्ट कटेंट के विषय में वह कहती हैं ‘यह शो पूरी तरह से फेमिली शो है. हर बार कोई विषय लेकर उस पर कामेडी की जायेगी.’ टीवी सीरियलों में कामेडी का नया चलन है. ऐसे सीरियल कम लागत में तैयार होते हैं. ज्यादा कलाकार नहीं होते. जिससे शो लाभ में बना रहता है. एंड टीवी पर ही सीरियल ‘भाभी जी घर पर हैं’ भी अपने चुलबुली देशी पुट वाली बातों के लिये पसंद किया जा रहा है. सेलुलर बाई बनी शीबा राना की साडी ब्लाउज को बहुत ही सुदंर तरीके से पहनाया गया है. जिससे देखने वालों को ग्लैमर का पुट भी मिलता रहे. इसके साथ शीबा के बिंदास हंसने का अदाज दर्शको का दिल कैसे जीतता है यह देखने वाली बात होगी.               

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