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अनुराग कश्यप की बढ़ती मुश्किलें

बौलीवुड में चर्चाएं गर्म हैं कि इस बार अपनी फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ को लेकर जिस तरह का पंगा अनुराग कश्यप ने लिया है, उससे लगता है कि उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जाने वाली हैं. सूत्रों की माने तो ‘उड़ता पंजाब’ को लेकर मुंबई हाईकोर्ट का निर्णय चाहे जो रहे, पर अनुराग की मुसीबतें कम होंगी, ऐसा नहीं लगता.

सूत्रों के अनुसार अनुराग अपनी सफलतम फिल्म ‘‘गैंग आफ वासेपुर’’का तीसरा भाग ‘‘गैंग आफ वासेपुर 1.5’’ का निर्माण करने जा रहे हैं. जिसके निर्देशन की जिम्मेदारी अनुराग ने ‘‘गैंग आफ वासेपुर भाग एक व दो’’ के लेखक तथा मूलतः वासेपुर निवासी जीशान कादरी को सौंपी है. इस फिल्म की शूटिंग बहुत जल्द झारखंड में धनबाद जिले के वासेपुर में ही शुरू होनी है. पर अब वासेपुर से जो खबरें मिल रही हैं, वह अनुराग के पक्ष में नहीं हैं.

सूत्रों के अनुसार इस बार अनुराग कश्यप के लिए ‘‘गैंग आफ वासेपुर 1.5’’ की शूटिंग वासेपुर  में करना आसान नहीं होगा. सूत्रों के अनुसार वासेपुर में अनुराग का विरोध शुरू हो गया है. वासेपुर निवासियों के अनुसार अनुराग ‘गैंग आफ वासेपुर’ भाग एक व दो से जितना वासेपुर को बदनाम करना चाहते थे, वह कर चुके, पर अब उन्हे आगे ऐसा नहीं करने दिया जाएगा और अब किसी भी सूरत में तीसरे भाग की शूटिंग नहीं करने दी जाएगी.

सूत्रों की माने तो जीशान कादरी के घर के सामने प्रदर्शन का दौर शुरू हो चुका है. जबकि जीशान कादरी अब लोगों को समझाने में लगे हुए हैं कि लोगों को फिल्म को फिल्म की तरह ही लेना चाहिए, जबकि यही जीशान कादरी ‘गैंग अफ वासेपुर’ भाग एक और दो को यथार्थ का दर्शन बताते रहे हैं. सूत्रों की माने तो वासेपुर के पढ़े लिखे लोग लामबंद हो चुके हैं, जो कि अनुराग कश्यप के लिए कई तरह क मुसीबतें खड़ी कर सकते हैं.

ऐश्वर्या चौबे का पब्लिसिटी स्टंट या…?

बौलीवुड में लोग अपने आपको सुखिर्यों में बनाए रखने के लिए कुछ भी करते रहते हैं. यूं भी बालीवुड से जुडे़ ज्यादातर लोग यह मानकर चलते हैं कि, ‘बदनाम हुए तो क्या हुआ, नाम तो हुआ.’’ खैर, कश्मीर से मुंबई आकर बौलीवुड में पैर जमाने के लिए संघर्षरत अदाकारा ऐश्वर्या चौबे और अभिनेता एजाज खान के बीच पैदा हुई तल्खी की चर्चाएं हैं.

सूत्रों के अनुसार सोनाक्षी सिन्हा के साथ फिल्म ‘‘अकीरा’’ में अभिनय कर बौलीवुड में ऐश्वर्या चौबे कुछ लोगों की नजरों में तो आ ही चुकी हैं. बौलीवुड से जुड़े कुछ कलाकार व फिल्मकार भी उनके संपर्क में हैं. कुछ दिन पहले तक ऐश्वर्या चौबे को अभिनेता एजाज खान के साथ कई फिल्मी पार्टिर्यों में एक साथ देखा गया. सूत्रों की माने तो एजाज खान ने ऐश्वर्या चौबे को राम गोपाल वर्मा सहित कुछ फिल्मकारों से भी मिलवाया. मगर अब वही एजाज खान, ऐश्वर्या की नजर में सबसे बडे़ दुश्मन हो गए हैं.

ऐश्वर्या चौबे ने मुंबई के वर्सोवा पुलिस स्टेशन में लिखायी गयी अपनी एफआरआई में शिकायत की है कि ‘एजाज खान ने उनसे दोस्ती की और फिल्मों में काम दिलवाने के वायदे के साथ निर्माताओं से मिलवाया. उसके बाद एजाज खान ने अपने इस काम की उससे कीमत वसूलनी चाही. एजाज ने ऐश्वर्या चौबे के सामने अपनी मदद की कीमत के बदले में जो प्रस्ताव रखा, उसे ऐश्वर्या चौबे ने जब ठुकरा दिया, तो एजाज खान बुरा मान गए. उसके बाद एजाज खान ने अपने मोबाइल से ऐश्वर्या चौबे को अश्लील संदेश भेजने शुरू किए, जिससे तंग आकर ऐश्वर्या ने पुलिस से मदद की गुहार लगायी है.

ऐश्वर्या चौबे पुलिस स्टेशन में इन एसएमएस को जमा करवा चुकी हैं और वह हर पत्रकार को एजाज खान के भेजे एसएमएस पढ़ाती भी हैं. उधर एजाज खान ने अपने वकील के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचकर खुद को निर्दोष साबित करने के कुछ सबूत दिए हैं. एजाज का दावा है कि उसने तो ऐश्वर्या चौबे की मदद करने की कोशिश की. मगर पता नहीं ऐश्वर्या चौबे उन पर इस तरह का आरोप क्यों लगा रही हैं.

एजाज का दावा है कि दोस्ती के चलते वह कुछ फिल्मी पार्टियों में एक साथ जाते रहे हैं. एक दिन ऐश्वर्या चौबे ने उनका मोबाइल मांगा, तो उन्होंने दोस्त होने के नाते मोबाइल पकड़ा दिया. उसके बाद वह दूसरे दोस्त से बात करते रहे. कुछ देर बाद उनका मोबाइल उन्हे ऐश्वर्या ने लौटा दिया. एजाज का दावा है कि जब ऐश्वर्या ने उनसे उनका मोबाइल मांगा था, तभी ऐश्वर्या ने खुद ही अश्लीलल एसएमएस उनके मोबाइल पर लिखकर अपने मोबाइल पर भेज दिया होगा.

बहरहाल, दोनों तरफ से मीडिया में एक दूसरे के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं. पुलिस का दावा है कि वह इसकी जांच कर रही है. मगर बौलीवुड से जुड़े सूत्र इसे ऐश्वर्या चौबे का पब्लिसिटी स्टंट ही बता रहे हैं. खैर, हम निगाह बनाए हुए हैं कि इसका अंत क्या होता है. पर बौलीवुड एक्टरों की फितरत समझने वालों को पूरा यकीन है कि यह महज पब्लिसिटी स्टंट ही है.

जूही चावला ने क्यों किया कन्नड़ फिल्म में आइटम नंबर

बौलीवुड अदाकारा जूही चावला ने अपने अब तक के अभिनय करियर में किसी भी फिल्म में आइटम नंबर नहीं किया है, लेकिन जब से यह खबर फैली है कि जूही चावला ने हिंदी नहीं बल्कि रमेश अरविंद की सौंवी कन्नड़ फिल्म में एक आइटम नंबर किया है, तब से हर कोई आश्चर्यचकित है. जबकि जूही चावला का दावा है कि उन्होंने इस फिल्म में अपने आपको ही निभाया है.

मीडिया से बात करते हुए जूही चावला ने कहा है-‘‘यह सच है कि मैने अपने अब तक के करियर में किसी भी हिंदी फिल्म में आइटम नंबर नहीं किया है. मगर मैंने पहली बार कन्नड़ फिल्म में आइटम नंबर किया है, जो कि अभी तक रिलीज नहीं हुई है. वास्तव में जब मुझे इस आइटम नंबर के लिए याद किया गया, तो मुझे भी आश्वर्य हुआ, पर जब मुझे बताया गया कि फिल्म की कहानी अस्सी के दशक की है. जिसमें जेल के अंदर एक संगीत कार्यक्रम हो रहा है, इस कार्यक्रम में एक बौलीवुड अभिनेत्री आकर डांस करती है. तो मुझे यह कांसेप्ट अच्छा लगा.

फिल्म में मैंने अस्सी के दशक का ही नृत्य किया है. गाने के बोल भी बहुत अच्छे हैं. देखिए,मैं कोई बड़ा किरदार निभाउं या छोटा, मैं हमेशा दिल से काम करती हूं. इसलिए यह आइटम नंबर भी लोगों को बहुत पसंद आएगा. यह गाना जेल के कैदियों को प्रेरणा देने वाला, तकदीर में यकीन करने, उनका हौसला आफजाई करने वाला है. यह गाना जिंदगी को लेकर भी बात करता है. इस गाने में बीच बीच में हिंदी शब्द भी हैं. इसे बंगलोर में फिल्माय गया है. मैने काफी लंबे समय बाद इस नृत्य किया है. मेरे पति व बच्चों ने अभी तक इस गाने को देखा नहीं है, लेकिन जिन्होंने भी देखा है, वह सभी मेरी तारीफ कर रहे हैं.’’

सेलुलर बाई देगी सेल्फी टिप्स

सोशल मीडिया का बुखार सिर चढ कर बोल रहा है. सेल्फी फोटो लेना तो कई तरह से अपराध भी घोषित किया जा रहा है. सेल्फी पर तमाम तरह की रिसर्च भी हो रही है. इसे मनोविज्ञान से लेकर समाजशास्त्र तक से जोडा जा रहा है. सेल्फी की तरह फेसबुक पर बारबार अपनी फोटो और स्टेटस अपलोड करना भी खतरनाक श्रेणी में गिना जाने लगा है. ऐसे व्यवहार और जिज्ञासा को लेकर पर्सनाल्टी पर रिसर्च हो रही है. यह सब मनोरंजन का साधन भी बन चुका है.

एंड टीवी के कामेडी शो ‘लाइफ का रिचार्ज’ इस तरह की सोशल मीडिया की कहानी को लेकर ही बनाया गया है. विकल्प मेहता और मिंटू शर्मा की एंकरिंग में शीबा राना, ओमप्रकाश डिमरी, आधार गोस्वामी, नेहा शर्मा इसमें अलग अलग तरह से कामडी कर सबकों हंसाने की कोशिश करेगे. शो में सबसे मजेदार भूमिका सेलुलर बाई की है, जिसे शीबा राना निभा रही हैं.

सेलुलर बाई बनी शीबा राना घर की नौकरानी है, जिसपर सबके दिल लटटू हो जाते हैं. वह खुद भी सोशल मीडिया पर बहुत एक्टिव रहती है. शीबा ने सेल्फी लेने के कई लाभ बताये और दिखाया कि किस तरह से सेल्फी ली जा सकती है. मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की रहने वाली शीबा ने टीवी शो ‘लाइफ का रिचार्ज’ के पहले मौडलिंग और दक्षिण भारत की कई फिल्मों में काम किया है.

पूजा भट्ट के निर्देशन में उनकी हिंदी फिल्म ’कैबरे’ बन चुकी है और जल्द ही रिलीज होने वाली है. वह कहती हैं कि खूबसूरत नौकरानी के प्रति पड़ोसी तक कैसी नजर रखते हैं, इसको दिखाने का काम ‘लाइफ का रिचार्ज’ में किया है. यह बहुत ही चुलबुला किरदार है. हम ऐसी नौकरानी बने हैं जो हमेशा डिजिटल रहती हैं. कान में ब्लूटूथ और झाडू के सेल्फी स्टिक होती है. माथे की बिंदी भी वाईफाई होती है.

कामेडी शो में एडल्ट कटेंट के विषय में वह कहती हैं ‘यह शो पूरी तरह से फेमिली शो है. हर बार कोई विषय लेकर उस पर कामेडी की जायेगी.’ टीवी सीरियलों में कामेडी का नया चलन है. ऐसे सीरियल कम लागत में तैयार होते हैं. ज्यादा कलाकार नहीं होते. जिससे शो लाभ में बना रहता है. एंड टीवी पर ही सीरियल ‘भाभी जी घर पर हैं’ भी अपने चुलबुली देशी पुट वाली बातों के लिये पसंद किया जा रहा है. सेलुलर बाई बनी शीबा राना की साडी ब्लाउज को बहुत ही सुदंर तरीके से पहनाया गया है. जिससे देखने वालों को ग्लैमर का पुट भी मिलता रहे. इसके साथ शीबा के बिंदास हंसने का अदाज दर्शको का दिल कैसे जीतता है यह देखने वाली बात होगी.               

इंटरनेट पर स्मार्ट वर्क के लिए Shortcuts Keys

हर इंटरनेट ब्राउजर के अपने अलग शॉर्टकट्स होते हैं. कई बार अलग-अलग ब्राउजर इस्तेमाल करने के कारण शॉर्टकट्स में यूजर्स का कन्फ्यूज होना आम बात है. इंटरनेट ब्राउजर्स में कुछ ऐसे शॉर्टकट्स भी होते हैं जो लगभग सभी ब्राउजर्स पर काम करते हैं. चाहें आप इंटरनेट एक्सप्लोरर पर काम कर रहे हैं, क्रोम पर या मोजिला फायरफॉक्स पर इन शॉर्टकट्स का इस्तेमाल किया जा सकता है.

1. Ctrl+1(1 से 8 तक सभी नंबर काम करते हैं)

इस शॉर्टकट की मदद से आप ब्राउजर में खुले टैब्स के बीच शफल कर सकते हैं. ctrl के साथ जो भी नंबर दबाया जाएगा उस नंबर का टैब खुल जाएगा.

2. Ctrl+9

किसी भी ब्राउजर में खुले आखिरी टैब पर जाने के लिए.

3. Ctrl+Tab

जिस टैब पर आप हैं उससे अगले पर जाने के लिए इसके अलावा, Ctrl+Page Up का भी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन ये शॉर्टकट इंटरनेट एक्सप्लोरर पर काम नहीं करेगा.

4. Ctrl+Shift+Tab

जिस टैब पर आप हैं उसके पहले वाले टैब पर जाने के लिए.

 5. Ctrl+W या Ctrl+F4  

सभी टैब्स को बंद करने के लिए.

6. Middle Click a Tab (किसी भी टैब के ऊपर जाकर माउस से मिडिल क्लिक करना) – टैब को बंद करने के लिए.

7. Ctrl+Left Click, Middle Click – बैकग्राउंड में मौजूद किसी भी लिंक को दूसरे टैब में खोलने के लिए.

8. Shift+Left Click- किसी भी लिंक को दूसरी ब्राउजर विंडो में खोलने के लिए.

9. Ctrl+Shift+Left Click – किसी भी लिंक को पहले टैब में खोलने के लिए.

10. Alt+space (स्पेस बटन) – मेन मेनु खोलने के लिए.

11. Alt+Right Arrow, Shift+Backspace – ऑनलाइन वीडियो को फॉरवर्ड करने के लिए.

12. F5 – पेज रीलोड करने के लिए.

13. Esc- बंद करने के लिए.

14. Alt+Home – ब्राउजर का होम पेज लोड करने के लिए.

15. Ctrl और ‘+’ – जूम इन (पेज के कंटेंट को जूम करना)

16. Ctrl और ‘-’  – जूम आउट

17. Ctrl+0 – पेज को डिफॉल्ट जूम पर सेट करने के लिए.

18. F11 – फुल स्क्रीन मोड पर ले जाने के लिए.

19.  स्पेसबार या पेज डाउन बटन (Space, Page Down) – वेबपेज को स्क्रॉल डाउन करने के लिए (पेज पर नीचे की ओर जाने के लिए)

20. Shift+Space, Page Up – वेबपेज को स्क्रॉल अप करने के लिए (पेज पर ऊपर की ओर जाने के लिए)

21. होम (Home)- वेबपेज पर सबसे ऊपर जाने के लिए.

22. एंड (End)-  वेबपेज पर सबसे नीचे जाने के लिए.

23. मिडिल क्लिक (माउस से वेबपेज पर मिडिल क्लिक करना)- माउस के मूवमेंट पर वेबपेज की स्क्रॉलिंग सेट करना.

24. Ctrl+L, Alt+D, F6 – एड्रेस बार पर फोकस करना ताकी उसपर टाइप किया जा सके.

25. Ctrl+Enter – एड्रेस बार पर कोई भी शब्द टाइप करने के बाद अगर Ctrl+Enter दबाया जाए तो ब्राउजर पर अपने आप उस शब्द के सामने www. और अंत में .com लग जाएगा.

26. Alt+Enter – एड्रेस बार में टाइप किए गए लिंक को दूसरे टैब में खोलना.

27.  Ctrl+F, F3 – वेबपेज पर सर्च बॉक्स खोलने के लिए.

28. Ctrl+G, F3 – वेबपेज पर अगला मैच करने वाला टेक्स्ट आइटम ढूंढने के लिए.

29. Ctrl+Shift+G, Shift+F3 – वेबपेज पर पिछला मैच करने वाला टेक्स्ट आइटम ढूंढने के लिए.

30. Ctrl+H –  ब्राउजिंग हिस्ट्री खोलने के लिए.

31. Ctrl+J – डाउनलोड हिस्ट्री खोलने के लिए.

32. Ctrl+D – जिस बेवसाइट को खोला हुआ है उसे बुकमार्क करने के लिए.

33. Ctrl+Shift+Del – ब्राउजिंग हिस्ट्री डिलीट करने वाली विंडो को खोलने के लिए.

34. Ctrl+P – खुले हुए वेबपेज का प्रिंट आउट लेने के लिए.

35. Ctrl+S – खुले हुए वेबपेज को कम्प्यूटर में सेव करने के लिए.

36. Ctrl+O – अपने कम्प्यूटर में सेव की हुई कोई भी फाइल खोलने के लिए.

37. Ctrl+U – किसी भी वेबपेज का सोर्स कोड खोलने के लिए (ये शॉर्टकट इंटरनेट एक्सप्लोरर पर काम नहीं करता है. )

बटन दबाते ही कौल दर्ज

हंसता खेलता मासूम बच्चा जब अपराध का शिकार होता है तो न सिर्फ उस का कोमल मन तारतार होता है, इस सदमे को वह जीवन भर भूल नहीं पाता. बच्चों पर बढ़ते अपराध के चलते उन्हें रोकने के लिए यों तो चाइल्ड लाइन 1098 की सुविधा काफी सालों से चल रही है, लेकिन पिछले कुछ महीनों से बाल एवं महिला मंत्रालय ने इस में अपनी नई भागीदारी तय की है सा िही कई सुधार भी किए हैं. जो महत्त्वपूर्ण है.

चाइल्ड लाइन एप

महिला बाल विकास मंत्रालय मोबाइल फोन में बच्चों के लिए चाइल्ड लाइन एप लाने के लिए जोरशोर से काम कर रहा है. चाइल्ड लाइन फाउंडेशन के सहयोग से एप को तैयार किया जा रहा है और इस एप को डाउनलोड करने के बाद अगर बच्चा बटन दबाता है तो पैरेंट्स के साथसाथ चाइल्ड लाइन सैंटर पर भी कौल दर्ज हो जाएगी और मदद के लिए टीम बच्चे तक पहुंच जाएगी.

परफैक्ट काउंसलर

इस समय चाइल्ड लाइन एप में 25 भाषाओं में निपुण भाषा की जानकार उस की समस्या सुनेगी. अगर शिकायतकर्ता पंजाबी भाषा से है तो पंजाबी भाषा में निपुण काउंसलर उस से बात करे, तमिलनाडु से है तो तमिल भाषा की जानकार उस की समस्या सुनेगी. लेकिन बहुत सी कौल में बच्चों को काउंसलिंग की नहीं बल्कि तुरंत मदद की जरूरत पड़ती है और इस के लिए देश भर में जुड़े एनजीओ पुलिस की मदद से बच्चों तक पहुंचते हैं.

प्रोसेस

इस चाइल्ड लाइन में फोन बजते ही 6 सेकेंड में यह पता कर लिया जाता है कि शिकायत कहां से आ रही है. पिछले 1 साल में इस चाइल्ड लाइन में 2.5 लाख बच्चों को बचाया गया है. इस साल मार्च में 10 लाख से ज्यादा बच्चों और बड़ों ने चाइल्ड लाइन में फोन किया. इस में आने वाली फोन में 80 से ज्यादा रियल कौल्स नहीं होती. 20 फीसदी कौल्स काफी रियल होती हैं.

रियल कौल्स: इस में बच्चों का यौन शोषण, घर से भगा लाना, बेच देना, नाबालिग से काम कराना जला देना आदि तमाम शिकायतें आती हैं.

फेक कौल्स: स्कूल में टीचर ने डांटा, मम्मीपापा ने पैसे नहीं दिए आदि.

बच्चों की आयुसीमाः इस चाइल्ड लाइन पर फोन करने वालों में 11 से 14 साल के बच्चों की संख्या सब से ज्यादा है. लड़के इस लाइन पर मदद के लिए ज्यादा फोन करते हैं.

एनजीओ की संख्या: बाल विकास मंत्रालय का लक्ष्य है कि जल्द ही इस लाइन को हर जिले तक पहुंचाया जाए. अभी ये लगभग 400 जिले में उपलब्ध हैं और इस से करीब 800 एनजीओ जुड़े हुए हैं.

स्मार्टफोन के फीचर्स अब तय करेंगे आप

स्मार्टफोन चुनना कितना आसान हो जाता अगर आप और हम ये तय कर सकते कि उसमें हमें कितनी मेमोरी, कितना स्टोरेज और कौन सा प्रोसेसर चाहिए और उसका कैमरा कितने मेगापिक्सेल का चाहिए.

वैसे ये असम्भव भी नहीं है. कुछ ऐसी कंपनियां हैं जो आपके लिए इसे संभव बनाती हैं.

लेकिन स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों के एक साथ काम नहीं करने के कारण ऐसी कंपनियों के प्रोडक्ट के फायदे आम लोगों तक नहीं पहुंच रहे हैं.

इस साल की शुरुआत में एलजी ने जी5 लॉन्च किया था जिसमें मॉड्यूलर फीचर है. कोई भी कंपनी इसके लिए बैटरी या दूसरे फीचर वाले प्रोडक्ट बना सकती है, एलजी ने लॉन्च के समय घोषणा की थी.

2014 में लेनोवो ने भी ऐसा फोन लॉन्च किया था जिसमें माड्यूलर फीचर थे. लेनोवो वाइब एक्स2 में अलग अलग 'लेयर' थे. अलग अलग कवर लगाने पर स्मार्टफोन में नए फीचर काम करने लगते थे. उसके एक कवर लगाकर आप जेबीएल स्पीकर इस्तेमाल कर सकते थे.

जब म्यूजिक सुनने का मन हुआ तो नया कवर लगा लिया. लेकिन आपके हाथ में स्मार्टफोन हमेशा एक ही था.

फेयरफोन ने भी ऐसा ही मॉड्यूलर स्मार्टफोन बनाया है. इसमें होने वाली परेशानी को आप खुद ही ठीक कर सकते हैं.

इस वीडियो में आप फेयरफोन  स्मार्टफोन की झलक देख सकते है.

फेयरफोन  का पहला फोन तो बहुत चला नहीं लेकिन फेयरफोन 2 में काफी सुधार करने का दावा किया गया है. फिलहाल बाजार में कुछ लोग उसके लॉन्च का इंतजार कर रहे है.

वैसे दुनिया के पहले मॉड्यूलर फोन का नाम 'मोडू' था और उसे 2007 में लॉन्च किया गया था.

सभी स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियां चाहती हैं कि वो कुछ ऐसा मॉड्यूलर स्मार्टफोन बनाएं जो आपके लिए हर समय काम करे. चाहे आप ऑफिस में हों, घर पर हों या शाम को कहीं बाहर जाएं.

गूगल भी मॉड्यूलर स्मार्टफोन बनाना चाहता है. और प्रोजेक्ट आरा की वही कोशिश है.

शुरूआती डिजाइन में आरा में छह स्लॉट होंगे. इसमें आप कोई भी फीचर जोड़ सकते हैं और उसी तरह कोई भी निकाल भी सकते हैं.

अगर आपको बेहतर कैमरा चाहिए तो अभी के स्लॉट से कैमरा निकाल कर दूसरा लगा दीजिए.

गूगल इसमें तुरंत मिलने वाले ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट, हवा प्रदूषण पर नजर रखने के फीचर जैसी और भी खासियतों को जोड़ने के बारे में सोच रहा है.

लेकिन इन सभी फीचर के बाद भी इस फोन के प्रोसेसर, रैम या स्क्रीन को आप बदल नहीं सकते. कम से कम अभी तो ऐसा नहीं कर सकते.

पिछले महीने वायर्ड मैगजीन को इस स्मार्टफोन को परखने का मौका मिला और इस रिपोर्ट के अनुसार प्रोजेक्ट आरा का स्मार्टफोन लोगों तक पहुंचने के लिए तैयार है.

एक बात तो साफ है. स्मार्टफोन के फीचर अब सिर्फ फोन बेचने वाली कंपनियां नहीं तय करेंगी. उन्हें आप भी तय करेंगे और कंपनियां इसके लिए अपनी तैयारी कर रही हैं.

बिल का भुगतान अब और भी आसान

आपके लिए स्कूल फीस, पानी का बिल, म्युनिसिपैलिटी बिल, टेलिफोन बिल, मोबाइल बिल, क्रेडिट कार्ड बिल का पेमेंट करना बहुत आसान होने वाला है. कंज्यूमर को अपने सभी तरह के यूटिलिटी बिल पेमेंट करने की सुविधा ऑनलाइन करने के साथ-साथ एटीएम, बिजनेस कॉरस्पॉडेंट सहित भारत बिल पेमेंट आउटलेट पर भी मिलेगी. यानी आप को अपने यूटिलिटी बिल का पेमेंट करने के लिए अलग-अलग कंपनियों की वेबसाइट और उनके आउटलेट पर नहीं जाना होगा. एनपीएसीआई (नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ) जल्द ही भारत बिल पेमेंट शुरू करने जा रहा है.

एनपीसीआई से मिली जानकारी के मुताबिक भारत बिल पेमेंट सिस्टम को जुलाई के महीने में लांच करने के तैयारी है.इसके लिए 38 बैंकों और 7 कंपनियों को पेमेंट लेने की मंजूरी मिल गई है. आरबीआई ने इन्हें मंजूरी दी है. सभी प्रमुख बैंकों के साथ-साथ बिल डेस्क, टेक प्रोसेस, ऑक्सीकैश जैसी कंपनियां भारत बिल पेमेंट आउटलेट खोलेंगी.

कभी भी, कहीं भी पेमेंट की सुविधा

– भारत बिल पेमेंट सिस्टम के लिए आरबीआई ने नवंबर 2014 में गाइडलाइन जारी की थी. – नए पेमेंट सिस्टम में कंज्यूमर कभी भी किसी भी सर्विस के लिए कहीं भी पेमेंट कर सकेगा.

– इसके लिए आरबीआई ने एनीटाइम एनीवेयर की बात कहीं थी.

– यानी कंज्यूमर को हर तरह के बिल पेमेंट सुविधा कभी भी और कहीं भी मिलेगी.

ऐसे काम करेगा सिस्टम

1. अभी आपके पास पेमेंट करने के दो ऑप्शन होते हैं, पहला सरकारी डिपार्टमेंट या प्राइवेट कंपनियों की अलग-अलग वेबसाइट पर जाकर, दूसरा उनके आउटलेट पर जाकर पेमेंट कर सकते हैं.

2. नए सिस्टम में आप भारत बिल पेमेंट सिस्टम पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे. जहां पर आपको कस्टमर आईडी मिल जाएगी. इसके लिए आपको ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर और एक पर्सनल आईडी की जानकारी देनी होगी.

3. रजिस्ट्रेशन के बाद आप अपने सभी तरह के बिल का पेमेंट भारत बिल रिटेल आउटलेट और वेबसाइट पर कर सकेंगे.

4. खास बात यह है कि ये पेमेंट आप रिटेल आउटलेट पर डेबिट, क्रेडिट कार्ड, मोबाइल वॉलेट, मोबाइल बैंकिंग, नेट बैंकिंग जैसे तरीके से कर सकेंगे.

9.30 लाख करोड़ का होगा बिल पेमेंट सिस्टम

– आरबीआई के अनुमान के मुताबिक साल 2019 तक देश के 20 शहरों में अकेले 9.30 लाख करोड़ रुपए के बिल पेमेंट होंगे.

– ऐसे में भारत बिल पेमेंट सिस्टम शुरू होने से छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में लोगों को काफी सहूलियत मिल जाएगी.

– जहां पर अभी भी ऑनलाइन पेंमेंट का प्रचलन काफी कम है. साथ ही कैशलेस ट्रांजेक्शन को भी बढ़ावा मिलेगा.

बोल्ट ने बनाया एक और रिकॉर्ड

जमैका के फर्राटा धावक उसेन बोल्ट ने खराब शुरुआत से उबरते हुए रेसर्स ग्रां प्री एथलेटिक्स मीट में सौ मीटर की दौड़ 9.88 सेकेंड के समय के साथ जीती. उनका यह समय इस वर्ष दुनिया का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. इस जीत से उन्हनें रियो ओलंपिक के लिए अपनी तैयारी का अहसास कराया.

रेसर्स ग्रां प्री एथलेटिक्स मीट में जीत के बाद बोल्ट ने कहा, ‘यह परफेक्ट रेस नहीं थी, लेकिन अच्छी बात यह है कि मैं जीता और चोटिल भी नहीं हुआ.’

निकेल एश्मीएडे और योहान ब्लैक ने 9.94 सेकेंड का समय निकाला, जबकि असाफा पॉवेल ने 9.98 सेकेंड में रेस पूरी की. यह चौथा मौका है जब दुनिया के तीन धुरंधर बोल्ट, पूर्व विश्व रिकॉर्ड धारक पॉवेल और 2011 के विश्व चैंपियन ब्लैक एक साथ किंगस्टन में 30 हजार दर्शकों के सामने दौड़े.

बोल्ट दो वर्ष बाद पहली बार घरेलू दर्शकों के सामने दौड़े. इस वर्ष का सबसे तेज समय फ्रांस के जिम्मी विकाउत ने निकाला था, जिन्होंने मांट्रियल में 9.86 सेकेंड के साथ रेस जीती थी.

महिला वर्ग में शैली को मिली जीत

उधर, महिला वर्ग में वर्ल्ड और ओलंपिक चैंपियन शैली अन फ्रेसर प्रायस को जीत मिली. उन्होंने 100 मीटर रेस 11.09 सेकंड में पूरी कर ली, जबकि अमेरिका की बारबरा पियरे दूसरे और त्रिनिदाद टोबैगो की कैली अन बापटिस्टे तीसरे स्थान पर रहीं.

सोच को निखारें रंग को नहीं

गोरी हैं कलाइयाँ, ’ गोरे गोरे  मुखड़े पे काला काला चश्मा ‘आजा पिया तोहे प्यार दूं गोरी बैयाँ तोपे वार दूँ चिट्टियाँ कलाइयाँ वे ,ये काली काली आँखें ये गोर गोरे गाल …… गोरेपन का  जादू कुछ इस कदर हम सब पर छाया  हुआ है कि फ़िल्में भी इससे अछूती नहीं रह पायीं. फिल्म-दर-फिल्म, पत्रिका-दर-पत्रिका, विज्ञापन-दर-विज्ञापन, होर्डिंग-दर-होर्डिंग गोरेपन का प्रचार हो रहा है . शादी के विज्ञापनों में भी "फ़ेयर एंड ब्यूटीफुल" यानी "साफ़ और सुन्दर" एक कसौटी बन चुकी है. खूबसूरती के साथ गोरेपन की चाहत मानो जीवन के हर कदम पर  अनिवार्यता  या कहें ओबसेशन बन चुका है. गोरे रंग के  इस ओबसेशन  के खिलाफ  बोलीवूड फिल्म अभिनेत्री नंदिता दास ने  एक अभियान भी शुरू किया था ‘स्टे अनफेयर,स्टे ब्यूटीफुल’ यानी सांवली बनी रहो, खूबसूरत बनी रहो.

अब घाना जैसे छोटे से देश ने गोरेपन के ऑब्सेशन के खिलाफ एक  ऐसा कदम उठाया है, जो अभी तक भारत नहीं कर पाया है. इंडिया और दूसरे एशियन देशों के बाद अफ्रिका में भी लोग गोरेपन को लेकर काफी क्रेज़ी हैं, जहां औरतें गोरी होने के लिए केमिकल्स का सहारा ले रही हैं. एक रीसर्च के मुताबिक 75 प्रतिशत नाइजीरियन औरतें, 27 प्रतिशत सेनेगलीज़ औरतें और 33 प्रतिशत साउथ ऐफ्रिकन औरतें नियमित तौर पर स्किन-लाइटनिंग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती हैं. (वहीं इडिया में बिकने वाले कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में से आधी फेयरनेस क्रीम्स हैं.)

कई शोधों से पता चला है कि फेयरनेस क्रीम्स स्किन में डिसकलरेशन लाता है और इसे स्किन कैंसर से भी जोड़कर भी देखा गया है, जिसके चलते फ़ूड एंड ड्रग्स अथोरिटी  ने इनकी बिक्री पर रोक लगा दी. इस बैन के पीछे का कारण सिर्फ हेल्थ पर पड़ता  बुरा असर नहीं है बल्कि गोरेपन को लेकर लोगों के दिमाग में बैठा फितूर भी  है जो शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से काफी खतरनाक है.नंदिता दास की ही तरह  घाना  की ऐक्ट्रेस अमा के अबेब्रेसे ने  भी गोरेपन को प्रमोट करते हुए ऐड्स देखने के बाद ‘लव यूअर नेचुरल स्किन टोन’ नाम से एक कैंपेन भी शुरू किया था.

38 साल पहले 1978 में हिंदुस्तान यूनिलीवर महिलाओं की त्वचा को गोरा और उजला करने के लिए फ़ेयर ऐंड लवली लेकर आया था और कोलकाता के इमामी ग्रुप ने फ़ेयर ऐण्ड हैंडसम के नाम से पुरूषों को गोरा करने का बीड़ा उठा रखा है. अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2025 तक भारत का मध्यमवर्ग 10 गुना बढ़कर 58 करोड़ 30 लाख हो जाएगा.यह उद्योग काफी समय से देश में टिका हुआ है समय के साथ टारगेट ग्रुप बदल गया. हिंदुस्तान यूनिलिवर की ओर से किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि दक्षिण भारत के तमिलनाडु, केरल,कर्नाटक और आंध्रप्रदेश के पुरुष गोरा करने वाली क्रीम के बड़े ख़रीदार है. त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य तौर पर गोरा दिखाने वाले उत्पाद नुकसानदायक नहीं होते लेकिन जो शरीर में मेलानिन के पिगमेंट कम करते हैं वह नुकसान पहुंचा सकते हैं .

सुंदरता की परिभाषा हर समाज में अलग अलग होती है. जहाँ भारत में गोरे रंग का मापदंड माना जाता है वहीँ  यूरोप और यूएस में स्किन का कलर ब्राउन होना काफी अच्छा माना जाता है. अपनी त्वचा का रंग गहरा करने के लिए लोग तरह-तरह के जतन करते रहते हैं. लेकिन वे इसके लिए प्राकृतिक  तरीकों के बजाय दूसरे तरीकों का इस्तेमाल अधिक करते हैं. इसकी वजह एक है कि यूरोपीय देशों में सिर्फ 3 या 4 महीने ही सूरज निकलता है इसलिए लोगों को धूप बहुत कम मिलती है. लोग टैनिंग करना इसलिए भी पसंद करते हैं कि इसे फिटनेस, खूबसूरती का प्रतीक माना जाता है. इसमें शरीर पर कृत्रिम तरीके से विशेष रोशनी डाली जाती है. इससे शरीर का रंग ब्राउन होने लगता हैं. यूरोप और यूएस में तो  बडे पैमाने पर इसके लिए  सैलून भी  खुले हैं.

आज भी भारत में अच्छी नौकरी, कामयाब ज़िंदगी और सर्वगुणसम्पन्न पति पाने के लिए गोरापन ज़रूरी है.त्वचा के रंग का भारत में बहुत गंभीर असर होता है. आज भी भाई बहनों में, दोस्तों में अगर कोई सांवला है तो उसे हिकारत की निगाह से देखा जाता है उसके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार होता है .   यह  सोच बहुत ही घातक और खतरनाक है. क्योंकि यह सोच एक इंसान के आत्मविश्वास को तोड़ देती है .गोरा दिखने के  दीवाने  भारतीय समाज की इस सोच को बदलना ज़रूरी है यह सोच तभी बदलेगी जब लोग यह समझ सकेंगे कि सुंदरता का त्वचा के रंग से कोई लेना देना नहीं है..

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