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एक ‘कट’ के साथ ‘उड़ता पंजाब’ को रिलीज़ की इजाजत

आखिर काफी मुश्किलों के बाद फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ को एक ‘कट’ के बाद रिलीज़ करने की इज़ाज़त बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी. इस ख़ुशी में फिल्म के निर्माता अनुराग कश्यप ने सारी स्टार कास्ट के साथ प्रेस कांफ्रेंस कर मीडिया को धन्यवाद दिया कि सबके सफल प्रयास से ये काम हो पाया.

अनुराग ने इस अवसर पर कहा कि अगर ये फिल्म ऐसे आती या जाती, तो कोई बड़ी बात नहीं होती, खामखां सबने इसका विरोध किया. फिल्म को बनाने में अलिया भट्ट और शाहिद ने काफ़ी मेहनत की. स्क्रिप्ट पढकर  वे इतने  उत्साहित हुए कि वे ‘कम्फर्ट जोन’ से निकल कर अभिनय किया, जो काबिले तारीफ है.

मैं यहाँ बैठकर किसे निकालना या रखना है, इस बारें में बात नहीं कर सकता, मैं उनकी सभी फिल्मों का प्रशंशक हूं. कोई भी आये उसे नियम के अंतर्गत चलना पड़ेगा, ऐसे में अभी ‘हाई टाइम’ आ चुका है, जब ‘सिस्टम’ को बदलने की जरुरत है. तभी कुछ अच्छा रिजल्ट मिलने की उम्मीद की जा सकती है. शाहिद ने कहा कि इसे हमें ‘सेन्सर बोर्ड’ न कहकर ‘बोर्ड ऑफ़ सर्टिफिकेशन’ कहने की आवश्यकता है.

तो ये हैं देश की पहली महिला फिगर एथलीट

क्या आपको पता है कि देश की पहली महिला प्रोफेशनल एथलीट कौन है? दीपिका चौधरी को भारत की पहली महिला प्रोफेशनल एथलीट के सम्मान से नवाजा गया है. दीपिका को यह उपलब्धि फिगर डिविजन में मिली है जो इंटरनैशनल फेडरेशन ऑफ बॉडी बिल्डिंग द्वारा आयोजित की गई थी.

दीपिका पहली फिगर एथलीट हैं जिन्होंने कई प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है. दीपिका ने 'बैटल ऑफ द बीच' कॉम्पिटिशन में पहला स्थान हासिल किया था. साथ ही 2014 में लॉडेरडेल कप भी जीता था.

फिगर एथलीट के बारे में दीपिका बताती हैं कि यह केवल बॉडी बिल्डिंग नहीं है. इसमें अच्छे मसल्स के साथ-साथ शरीर में जीरो फैट चाहिए होता है.

फिगर एथलीट बनने के सफर के बारे में दीपिका बताती हैं कि वह बॉम्बशेल फिटनेस कंपनी के CEO शेनन डे के एक सेमिनार में गई थीं जहां उन्हें इसके बारे में पता चला और फिर उन्होंने खुद का कॅरियर फिगर एथलीट में बनाने का सोचा.

दीपिका अपने इस सफर को एक आध्यात्मिक यात्रा बताती हैं और कहती हैं कि जब वह वजन हाथ में लेती हैं तो उस समय एक खूबसूरत अहसास होता है.

दीपिका कहती हैं कि भारत में बॉडी बिल्डिंग का कॅरियर बढ़ रहा है और भारत में महिलाओं की भागीदारी से वह अभिभूत हैं. हालांकि वह सरकार की तरफ से इस ओर कम ध्यान देने से वह निराश भी होती हैं.

बीच मैच में अम्पायर ने छोड़ा मैदान, रुका मैच

क्रिकेट मैचों में कई बार अजीबोगरीब स्थितियां हो जाती हैं लेकिन इस बार जो घटना हुई है वो तो गली-मोहल्लों के क्रिकेट में भी नहीं दिखतीं. कभी आपने सुना है कि अंपायरिंग करते हुए दोनों अंपायर नाराज हो गए और मैच को बीच में ही मैच छोड़कर बाहर चले गए जिससे मैच का कोई परिणाम ही नहीं निकल सका.

लेकिन ऐसा सब कुछ हुआ है और यह तब हुआ जब उस मैच में दोनों टीमों से करीब 10 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी खेल रहे थे.

हम बात कर रहे हैं बांग्लादेश में खेली जा रही ढाका प्रीमियर लीग की जिसमें एक मैच अंपायरों के नाराज होने से मैच अधूरा रह गया और मैच का कोई परिणाम ही नहीं आ सका. ढाका प्रीमियर लीग इस बार इसलिए खास माना जा रहा था क्योंकि इस टूर्नामेंट में पहली बार भारतीय खिलाड़ी भाग ले रहे थे. विस्फोटक बल्लेबाज युसूफ पठान और सचिन बेबी जैसे कुछ बड़े भारतीय नाम इस लीग में खेलने गए हुए हैं.

बावजूद इसके एक मैच में अजीबोगरीब विवाद पैदा हो गया जब अंपायर के एक फैसले पर न सिर्फ खिलाड़ियों ने विरोध जताना शुरू कर दिया बल्कि स्टेडियम में बैठे दर्शक भी दोनों अंपायरों पर कमेंट करने लगे जिससे नाराज अंपायर मैच रेफरी को बताकर वहां से निकल गए और मैच पूरा नहीं खेला जा सका.

अंपायर के फैसले के बाद से शुरू हुआ पूरा विवाद

ढाका प्रीमियर लीग (डीपीएल) में यह पूरा मामला तब हुआ जब सावर के बांग्लादेश क्रीड़ा शिक्षा प्रतिष्ठान में प्राइम ढोलेश्वर स्पोर्टिंग क्लब और अबाहानी लिमिटेड के बीच मैच खेला जा रहा था. पहले बल्लेबाजी करते हुए अबाहानी की पूरी टीम 42.4 ओवर में 191 रन बनाकर सिमट गई. युसूफ पठान ने इसी टीम के साथ 2 मैच खेला और फिर रोजा के कारण स्वदेश वापस आ गए. बांग्लादेश टीम के तेज गेंदबाज अल-अमीन हुसैन ने शानदार गेंदबाजी करते हुए प्राइम ढोलेश्वर टीम को शुरुआती बड़े झटके दे दिए.

जवाब में प्राइम ढोलेश्वर की टीम उतरी और 11वें ओवर में उसके 2 विकेट 38 रन पर गिर गए. क्रीज पर तीसरे विकेट के लिए जोड़ी खेल रही थी और 16वें ओवर में एक मामले से पूरा मैच ही बिगड़ गया. हुआ यूं कि रकीबुल हसन को अंपायर गाजी सोहैल ने आउट नहीं दिया. लेफ्ट ऑर्म स्पिनर सकलैन साजिब ने स्टंप्ड आउट की मांग की जिसे अंपायर ने ठुकरा दिया.

इस फैसले के बाद क्षेत्ररक्षण करने वाली टीम अबाहानी की टीम के कप्तान तमीम इकबाल और दर्शक अंपायर के फैसले का लगातार विरोध करने लगे. दर्शकों ने अपनी सीमा भी लांघ ली और अंपायरों (गाजी सोहैल और तनवीर अहमद) को गाली देना शुरू कर दिया, जिससे अंपायर नाराज हो गए और वे मैच रेफरी मोंटू दत्ता से बातकर मैदान से बाहर चले गए.

अंपायर जब मैदान के बाहर गए तो उस समय क्रीज पर रकीबुल हसन और सचिन बेबी खेल रहे थे. बाद में इस टीम को डकवर्थ-लुइस नियम के आधार पर संशोधित लक्ष्य देने का प्रस्ताव दिया गया लेकिन टीम ने इसे यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि यहां कोई बारिश नहीं हो रही है. इस कारण मैच को अगले दिन यानी रिजर्व डे में नहीं कराया गया और मैच को रद्द कर दिया गया.

ओला ने दिल्ली-NCR में लॉन्च की ‘लक्स’ सर्विस

टैक्सी सर्विस ऐप ओला ने दिल्ली-एनसीआर में अपनी लक्जरी कैब सेवा 'लक्स' की शुरुआत की है जिसके तहत कन्ज़यूमर आधुनिक सीडान कारों और एसयूवी जैसे जैगवार, मर्सिडीज, ऑडी, बीएमडब्ल्यू, टोयोटा कैमरी, होंडा एकॉर्ड एवं फॉर्च्यूनर की सवारी का लुत्फ उठा सकते हैं.

कंपनी ने एक बयान जारी कर बताया कि ओला लक्स दो शहरों मुंबई और दिल्ली-एनसीआर में उपलब्ध है. फिलहाल दिल्ली-एनसीआर के चुनिंदा क्षेत्रों में ही इसकी सेवा शुरू हुई है. यह सेवा ओला ऐप पर न्यूनतम 200 रुपए के साथ 19 रुपये प्रति किलोमीटर की दरों पर उपलब्ध होगी. साथ ही 2 रुपए प्रति मिनट का राइड चार्ज भी लागू होगा. इस बारे में ओला के हेड ऑफ कैटिगरीज एवं चीफ मार्केटिंग ऑफिसर रघुवेश स्वरूप ने बताया, 'ओला लक्स हमारे कन्ज़यूमर्स को बेजोड़, स्टाइलिश एवं आरामदायक यात्रा का अनुभव प्रदान करेगी. ओला लक्स उन्हें अब ट्रैफिक जाम में गाड़ी चलाने और पार्किंग के लिए स्थान ढूंढने के झंझट से बचाएगी, साथ ही उन्हें अपनी लग्जरी लाइफ के साथ भी किसी तरह का समझौता नहीं करना पड़ेगा.'

लक्स का आइकन अब से दिल्ली-एनसीआर के कन्ज़यूमर्स के लिए ओला ऐप पर उपलब्ध होगा. ओला के अन्य फीचर्स जैसे ड्राइवर का विवरण, एसओएस बटन, ऑटो कनेक्ट वाई-फाई, लाइव ट्रैकिंग एवं ओला मनी के माध्यम से भुगतान आदि सभी सेवाएं ओला लक्स पर भी उपलब्ध होंगी.

 

डुबकी लगाई, आचमन किया, पर पिया नहीं गंगा जल

भारतीय जनता पार्टी की 2 दिन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर में हुई. राष्ट्रीय कार्यकारिणी की यह बैठक केवल बैठक भर नहीं थी. केन्द्र सरकार के जलवों की शानदार नुमाइश थी. इसके सहारे भाजपा ने उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों के प्रचार अभियान की शुरूआत की. भाजपा ने अपनी 2 साल की उपलब्धियों का प्रचार प्रसार किया. कार्यकर्ताओं से पार्टी ने अपील की कि उत्तर प्रदेश में सत्ता का 14 साल का वनवास पूरा हो चुका है. भाजपा ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के बजाय समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को निशाने पर लेते यह संदेश दिया कि जिस तरह से देश को कांग्रेस मुक्त किया गया, वैसे ही उत्तर प्रदेश को सपा-बसपा मुक्त करना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी जीत का पाठ पढाया.

भाजपा के नेता और प्रदेश के लोगों को उम्मीद थी कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद भाजपा उत्तर प्रदेश में उस चेहरे को सामने लायेगी जिसके सहारे उसे चुनावी वैतरणी पार करनी है. पार्टी में गुटबाजी को देखते हुये उत्तर प्रदेश के लिये किसी चेहरे को आगे नहीं किया गया. उम्मीद की जा रही थी कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह को चुनावी कमान सौंपी जा सकती है. अंतिम समय में इसको टाल दिया गया. प्रधानमंत्री ने राजनाथ सिंह को प्रदेश की आन बान और शान बताया. पार्टी ने यह साफ किया कि उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई और केन्द्र सरकार की उपलब्धियों पर ही लडे जायेंगे.

संगम नगरी इलाहाबाद का जिक्र हो और गंगा का नाम न लिया जाये, यह संभव नहीं है. भाजपा ने गंगा के महत्व को धर्म से जोडने के लिये ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के लिये इलाहाबाद का चुनाव किया था. जिस तरह से भाजपा के केन्द्रीय मंत्रियों और दूसरे नेताओं ने संगम तट पर गंगा में डुबकी लगाई, आचमन किया उससे यह बात और भी साफ होकर सामने आई. जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने कहा ‘गंगा पूरी तरह से साफ और स्वच्छ है. बचा हुआ काम भी जल्द पूरा होगा. केन्द्र सरकार इसके लिये पूरी तरह से प्रतिबद्व है’.

संगम तट पर गंगा में डुबकी लगाने वालों में तमाम केन्द्रीय मंत्रियों से लेकर सामान्य कार्यकर्ताओं ने गंगा की साफ सफाई पर सरकार की खूब प्रशंसा की. जब इस प्रशंसा को अमल में लाने का समय आये तो सभी किनारा काट कर निकल गये. राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आये छोटे बडे हर नेता ने संगम तट पर डुबकी लगाई, गंगा जल को हाथ में लेकर आचमन किया. जब बाद में पीने के पानी की बात आई तो सभी नेताओं ने बोतलबंद पानी ही पीना उचित समझा.

राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इलाहाबाद नगर निगम द्वारा सप्लाई किये पानी को पीने की पहल किसी भी नेता कार्यकर्ता ने नहीं दिखाई. सभी ने अपने सामने रखे बोतल बंद पानी को ही पीना पसंद किया. अच्छा होता कि गंगा की सफाई का बखान करने वाले नेता आगे बढ कर खुद ऐसा काम करते जिससे लोगों को भरोसा हो जाता कि सच में गंगा कितना साफ हो चुकी है. लोकसभा चुनाव में गंगा की सफाई बडा मुद्दा थी. मोदी सरकार ने गंगा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुये उमा भारती को इस विभाग का मंत्री भी बनाया. गंगा की सफाई का इससे बडा प्रमाण और क्या हो सकता है कि खुद मोदी सरकार के मंत्री गंगा जल पीने की पहल नहीं कर पाये. 

पार्टी से बाहर होंगे क्रास वोटिंग करने वाले विधायक

भारतीय जनता पार्टी ने जब निर्दलीय प्रत्याशी प्रीति महापात्रा को अपना समर्थन दिया, तो उसे उम्मीद नहीं थी कि उसका यह दांव खाली जायेगा. भाजपा को यह उम्मीद थी कि दूसरे दलों के तमाम विधायक उसकी पार्टी से टिकट पाने के लिये अपने दलों से टूट कर उसके पक्ष में वोटिग करेगे. जैसे जैसे वोंटिग का समय करीब आता गया, भाजपा का भ्रम टूटने लगा. भाजपा को जब यह लगा कि उसके पास टिकट के लिये बडी संख्या में विधायक नहीं आ रहे है. तो उसने प्रीति महापात्रा को उनके भरोसे छोड दिया, जिससे प्रीति जरूरत भर के वोट हासिल नहीं कर सकी और चुनाव हार गई.

भाजपा के 4 वोट मिलाकर प्रीति ने 18 वोट हासिल करके दिखा दिया कि अपने दम पर भी वोट हासिल हो सकते हैं. चुनाव के बाद सभी पार्टियां अपने ऐसे विधायकों से हिसाब किताब बराबर करने की तलाश में हैं. जल्द ही ऐसे विधायकों को पार्टियां बाहर का रास्ता दिखाने की योजना में है. हर दल ने भीतरघात करने वाले विधायकों की लिस्ट तैयार कर ली है. जल्द ही इसको अमल में लाया जायेगा.

37 साल की महिला समाजसेवी प्रीति महापात्रा ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य के लिये भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से नामांकन किया था. प्रीति के चुनाव मैदान में उतरने से लडाई रोचक हो गई और वोट पडना जरूरी हो गये. इसके चलते विधायको में क्रास वोटिंग यानि दलबदल कर वोट देने का रास्ता खुल गया था. सभी दलों को अपने विधायको से वोट लेने के लिये होटल से लेकर रिसोर्ट तक मे उनको रूकाना पडा. विधायकों को मनाने के लिये तमाम तरह के उपाय करने पडे.

इसके बाद भी करीब करीब सभी दलों के विधायको ने क्रास वोटिंग कर वोट दिये. उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 11 सीटों के लिये 401 सदस्यों ने मतदान किया. निर्दलीय प्रीति महापात्रा ने 18 वोट हासिल करके जीत भले न पाई हो, पर विधायकों की पोल खोलने में सफल हुई. 14 वोट दूसरे दलों के विधायको ने दिये. प्रीति ने कहा ‘हार से मायूस नहीं हूं. अपने दमखम से बडे नेताओं को दिखा दिया कि आम लोग भी चुनाव लड सकते हैं. सभी दलो के विधायको ने मुझे वोट दिया.’

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनावों में जमकर क्रास वोटिंग हुई. समाजवादी पाटी के विधायक रामपाल, श्रीभगवान शर्मा, गुड्डू पंडित और मुकेश पंडित ने भाजपा के पक्ष में वोट देना स्वीकार किया. बसपा के राजेश त्रिपाठी ने भाजपा को वोट देना कबूल किया. सपा के पक्ष में विजय बहादुर सिंह और विजय सिंह के द्वारा वोट देने की बात कही जा रही है. कांग्रेस के कई विधायको ने क्रास वोटिंग की जिससे पार्टी के प्रत्याशी कपिल सिब्बल को केवल 25 वोट ही मिल सके.

कपिल जीत भले गये पर अंत तक संशय बना रहा. समाजवादी पार्टी के तमाम विधायको ने क्रास वोटिंग की. क्रास वोटिंग से विधायकों को रोकने के लिये तमाम कवायद हुई. खुद पार्टी प्रमुख मुलायम सिह यादव को क्रास वोटिंग रोकने का प्रयास करना पडा इसके बाद भी क्रास वोटिंग हुई. अच्छी बात यह थी कि उसके लोग चुनाव जीत गये. क्रास वोटिंग ने विधायकों की पोल खोल दी. इससे यह साफ हो गया कि क्रास वोटिंग अपने अपने लाभ के कारण हुई.                

माइक्रोसॉफ्ट का नया कंसोल एक्सबॉक्स वन ‘एस’

माइक्रोसॉफ्ट ने अपने कामयाब एक्सबॉक्स कन्सोल के अपडेटेड वर्जन, एक्सबॉक्स वन 'एस' की जानकारी सार्वजनिक की है. इसे अगस्त में लॉन्च किया जाएगा.

इसमें 'एस' का मतलब स्लिम है यानी नया कंसोल देखने में और पतला होगा.

कंपनी ने अपने दूसरे नए कंसोल 'प्रोजेक्ट स्कॉर्पियो' का भी एलान किया है जिसमें वर्चुअल रिएलिटी और फोर-के रेजोल्यूशन वाली गेमिंग होगी.

इसे 2017 के क्रिसमस में लॉन्च किया जाएगा. हालांकि इसकी कीमत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है.

लॉस एंजिल्स में हो रहे सालाना ई-3 यानी इलेक्ट्रॉनिक इंटरटेनमेंट एक्सपो में इन नए प्रोडक्ट्स की जानकारी दी गई.

एक्सबॉक्स वन एस की कीमत 299 डॉलर यानी करीब 20 हजार रुपए होगी.

एक विश्लेषक का कहना है कि वीडियो गेमिंग के शौकीन एक्सबॉक्स वन की रिलीज के बाद जल्दी कोई नया कन्सोल नहीं खरीदना चाहेंगे.

सोनी भी अपने पीएस4 कंसोल का नया वर्जन 2017 की शुरुआत में लॉन्च करनेवाली है.

माइक्रोसॉफ्ट ने लिंक्डइन को खरीदा

दुनिया के सबसे अमीर शख्स बिल गेट्स की कंपनी माइक्रोसॉफ्ट, प्रोफेशनल सोशल नेटवर्क फर्म लिंक्डइन को 26.2 अरब डॉलर में खरीद रही है. यह नकद सौदा होगा. इस डील से अमेरिका की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी को क्लाउड कंप्यूटिंग और सर्विसेज सेगमेंट बिजनेस बढ़ाने में मदद मिलेगी.

माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला ने एक स्टेटमेंट में कहा, 'इस डील से दुनिया की लीडिंग प्रोफेशनल क्लाउड फर्म और दुनिया का लीडिंग प्रोफेशनल नेटवर्क साथ आ रहे हैं.' वहीं, दोनों कंपनियों के स्टेटमेंट के मुताबिक सौदे के बाद भी लिंक्डइन ब्रांड, कल्चर और काम करने की आजादी बनी रहेगी. डील के बाद भी जेफ वीनर कंपनी के सीईओ बने रहेंगे. उन्होंने बताया, 'जिस तरह से हमने दुनिया के कनेक्ट करने को एक ऑपर्च्युनिटी में बदला है, उसी तरह से माइक्रोसॉफ्ट के साथ रिश्ता हमें दुनिया के कामकाज करने का तरीका बदलने का मौका दे रहा है. माइक्रोसॉफ्ट की क्लाउड सर्विस और लिंक्डइन के नेटवर्क के साथ आने से यह संभव हुआ है.'

दोनों कंपनियों ने बताया कि डील पर सहमति बन गई है. इस साल के अंत में सौदा पूरा हो जाएगा. इसे लिंक्डइन के चेयरमैन और कंट्रोलिंग स्टेकहोल्डर रीड हॉफमैन का सपोर्ट भी हासिल है. 26 अरब डॉलर से अधिक के इस सौदे का ऐलान ऐसे वक्त में हुआ है, जब माइक्रोसॉफ्ट प्योर सॉफ्टवेयर फर्म से अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रही है. वहीं, लिंक्डइन भी ग्रोथ बढ़ाने के रास्ते तलाश रही थी.

लिंक्डइन के दुनिया भर में 43.3 करोड़ यूजर्स हैं. कंपनी अपने नेटवर्क पर आने वालों को वैसे ही प्रोफेशनल्स के साथ कनेक्ट करने और नौकरी ढूंढने में मदद करती है. मार्च क्वॉर्टर में कंपनी को 4.6 करोड़ डॉलर का घाटा हुआ था. वहीं, पिछले साल कंपनी को 16.6 करोड़ डॉलर का लॉस उठाना पड़ा था. उसके बाद इस साल कंपनी के शेयर की कीमत कई साल के निचले स्तर पर चली गई थी.

नडेला ने माइक्रोसॉफ्ट के स्टाफ को भेजी ईमेल में लिखा है कि कंपनी क्लाउड कंप्यूटिंग और सर्विसेज सेगमेंट पर फोकस कर रही है. लिंक्डइन डील उसकी एक कड़ी है. उन्होंने कहा कि कंपनी प्रॉडक्टिविटी और बिजनेस प्रोसेस को नए मुकाम पर ले जाना चाहती है. यह डील उस दिशा में बोल्ड स्टेप है. नडेला ने कहा, 'जरा सोचिए, लोग कैसे नौकरी तलाशेंगे, स्किल्ड बनेंगे, प्रॉडक्ट्स-सर्विसेज को कैसे बेचेंगे, मार्केट तक कैसे पहुंचेंगे और कैसे काम करेंगे. आखिरकार सफलता के लिए कनेक्टेड प्रोफेशनल वर्ल्ड की जरूरत पड़ेगी.' लिंक्डइन खुद को दुनिया का सबसे बड़ा और वैल्यूएबल प्रोफेशनल नेटवर्क बताती है. कंपनी मेसेजिंग, मोबाइल एप्लिकेशंस और 'न्यूजफीड' के जरिये बिजनेस बढ़ाने की कोशिश कर रही है.

पूरे घर को बिजली, सिर्फ एक फोन की कीमत में

भारत के कई भाग अभी भी अंधेरे में रहते हैं. भारतीय आबादी के एक बड़े हिस्से के लिए बिजली अभी भी सपना बनी हुई है. बिजली के इस संकट को दूर करने के लिए दो भाईयों ने एक कमाल का तरीका इजादा किया है. जिससे बेहद कम कीमत में आप पूरे घर के लिए खुद बिजली पैदा कर सकते हैं.

दो भाई अरुण और अनूप जॉर्ज ने बिजली संकट को दूर करने के लिए छोटे विंड टरबाइन (पवन चक्की) को तैयार किया है. जिसकी कीमत 750 अमरीकी डॉलर (करीब 50,000 रुपये) है जोकि एक आईफोन की कीमत कीमत से भी सस्ता कहा जा सकता है. अरुण का कहना है कि इससे जरा भी पारिस्थितिकी संतुलन पर असर नहीं पड़ेगा.

एवांट ग्रेड इनोवेशन के मुताबिक केरल के रहने वाले भाईयों ने बेहद कम लागत वाली ‌विंड टरबाइन तैयार की है जो पर्याप्त बिजली उत्पन्न कर सकती है. इससे जीवन भर के लिए पूरे घर में बिजली मिल सकती है. एक छत के पंखा के आकार की यह विंड टरबाइन प्रति दिन 3 से 5 किलोवाट/घंटा बिजली पैदा कर सकती है.

अरुण का कहना है कि जब छोटी विंड टरबाइन 1 किलोवाट ऊर्जा पैदा करती है जो इसका खर्च करीब 3-7 लाख रुपये (4,000-10,000 यूएस डॉलर) होता है. वह इस विंड टरबाइन को बाजार में लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं. 750 डॉलर (करीब 50 हजार रुपये) की कीमत कई भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक किफायती विकल्प हो सकता है.

बहरहाल अरुण का छोटा विंड टरबाइन प्रोजक्ट अभी शुरुआती दौर में है. अगर यह हकीकत का रूप लेकर बाजार में आता है तो निश्चित ही बिजली की एक बड़ी समस्या को दूर कर सकता है.

ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल के अनुसार भारत वैश्विक पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के मामले में चीन, अमेरिका और जर्मनी के बाद चौथे स्थान पर है.

महंगाई ने तोड़ी आम आदमी की कमर

खुदरा महंगाई के मई के आंकड़े फिर जनता के सामने हैं. खुदरा में रसोई की हर चीज की महंगाई बढ़ी है. सरकार ने आंकड़े जारी कर फिर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है. मई माह में ही राजधानी में तेल, सब्जियों से लेकर खाने-पीने के हर आयटम के दाम बढ़े हैं. महंगाई हर महीने अपना विकराल रूप दिखा रही है.

दालें सबसे ज्यादा महंगी

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल मई की तुलना में इस साल मई में खुदरा बाजार में दालें 31.57% महंगी हुईं. चीनी तथा कंफेक्शनरी उत्पादों के दाम 13.96% तथा सब्जियों के 10.77% बढ़े. मसाले 9.72%, अंडे 9.13%, माँस तथा मछली 8.67% तथा खाने-पीने के तैयार सामानों और मिठाइयों के दाम 5.86% बढ़ गए. तेल एवं वसा युक्त पदार्थ 4.83%, दूध एवं डेयरी उत्पाद 3.53% तथा अनाज एवं इनके उत्पाद 2.59% महंगे हो गए.

ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा बढ़ी महंगाई

ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई एक बार फिर शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ज्यादा बढ़ी है. ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा महंगाई की दर 6.45% तथा खाद्य महंगाई की 7.75% दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में ये दरें क्रमश: 4.89% तथा 7.24% रहीं.

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