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ये फोन बन गया है ISIS आतंकियों का फेवरेट

हाल ही में आई NBC न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार नोकिया 105 ISIS लड़ाकों का सबसे पसंदीदा डिवाइस बन गया है. भारत में ये फोन 830 रुपए से 1200 रुपए की रेंज में मिल रहा है. इसकी कीमत इंटरनेशनल मार्केट में कहीं भी 30 डॉलर से ज्यादा नहीं है. ये फोन आखिर क्यों ISIS आतंकियों का पसंदीदा फोन बन गया है….

 – बॉम्ब ट्रिगर के लिए

बॉम्ब ट्रिगर के लिए दो फोन का इस्तेमाल होता है एक कॉल करने के लिए और दूसरा सिग्नल भेजने के लिए. इसके लिए सबसे बेस्ट डिवाइस नोकिया 105 है.

– बैटरी लाइफ

ये बहुत सस्ता होने के साथ-साथ सबसे ज्यादा बैटरी लाइफ देता है. ये फोन दो दिन तक बिना चार्ज के रह सकता है.

– बेहद सस्ता और आसानी से उपलब्ध

नोकिया 105 काफी सस्ता है और आसानी से उपलब्ध है. इंटरनेशनल मार्केट में इसकी कीमत 30 डॉलर से ज्यादा कहीं नहीं है.

– वाइब्रेशन है बहुत स्ट्रॉन्ग

नोकिया 105 का वाइब्रेशन फीचर काफी स्ट्रॉन्ग है इस वजह से भी ये बॉम्ब का ट्रिगर बनाने के लिए उपयुक्त फोन है.

– किसी ऐप का नहीं होता इस्तेमाल

इस फोन में कैमरा और बाकी किसी ऐप का ज्यादा इस्तेमाल नहीं होता इसलिए इस ट्रैक करना बाकी स्मार्टफोन्स के मुकाबले थोड़ा मुश्किल है. इसी के कारण, ये हैंग भी नहीं होता.

– कहां से मिलते हैं फोन

ISIS को ये फोन अधिकतर छोटे बिजनेस मैन से मिलते हैं. ये पूरी तरह से लीगली खरीदे जाते हैं.

– कंपनी क्यों नहीं लेती कोई एक्शन

माइक्रोसॉफ्ट कंपनी इसको लेकर कोई एक्शन नहीं ले सकती है. क्योंकि ये लीगल तौर पर छोटे बिजनेस ओनर को बेचे जाते हैं.  NBC News की रिपोर्ट के अनुसार ईराक में कंपनी 10 मोबाइल फोन से ज्यादा किसी एक वेंडर को नहीं दे रही है इसका यही कारण है.

– उपलब्धता बहुत ज्यादा

माइक्रोसॉफ्ट नोकिया के इस फोन की उपलब्धता काफी ज्यादा है. कन्ज्यूमर गुड्स मार्केट में इस फोन की काफी मांग है. इसलिए ये ISIS का पसंदीदा फोन बन गया है.

नहीं रहे पाक के ‘लिटिल मास्टर’

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और महान बल्लेबाज हनीफ मुहम्मद का लंबे समय तक फेफड़ों के कैंसर से जूझने के बाद निधन हो गया. हनीफ का आगा खान अस्पताल में इलाज चल रहा था. अस्पताल के प्रवक्ता ने 81 साल की उम्र में इस दिग्गज बल्लेबाज के निधन की पुष्टि की है.

प्रवक्ता ने कहा, ‘सांस से जुड़ी समस्याओं के कारण उन्हें आईसीयू और वेंटीलेटर पर रखा गया था और उनका निधन हो गया.’ वह 30 जुलाई से वेंटिलेटर पर थे और उनकी हालत नाजुक थी. इससे पहले भी हनीफ की दिल की धड़कन लगभग छह मिनट के लिए रूक गयी थी और डाक्टरों ने उन्हें ‘क्लीनिकल तौर पर मृत’ घोषित कर दिया था लेकिन बाद में डाक्टरों को उनकी धड़कन वापस लाने में सफलता मिल गयी.

इससे पहले हनीफ के बेटे शोएब मुहम्मद ने अस्पताल से कई लोगों को बताया कि उनके पिता का निधन हो गया है लेकिन कुछ ही मिनटों बाद उन्होंने फिर से घोषणा की कि उनका निधन नहीं हुआ और वह जीवित हैं.

शोएब ने कहा, ‘उनके दिल की धड़कन छह मिनट के लिए रूक गयी थी लेकिन डॉक्टर उनकी दिल की धड़कन वापस लाने में सफल रहे.’ लेकिन कुछ घंटों बाद शोएब ने फिर पुष्टि की कि उनके पिता का निधन हो गया है.

शोएब ने कहा, ‘उन्होंने अपनी बीमारियों से कड़ी जंग लड़ी और चार साल पहले फेफड़ों के कैंसर का पता चलने के बाद पिछले कुछ वर्षों से वह काफी बीमार थे.’ पूर्व टेस्ट बल्लेबाज शोएब ने कहा, ‘हमारा परिवार शोक में डूबा है लेकिन हम सिर्फ उनके प्रशंसकों से कह सकते हैं कि उनके लिए दुआ करें कि अल्लाह उन्हें जन्नत में जगह दे. वह पिछले कुछ हफ्तों से काफी दर्द में थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.’

हनीफ उस पाकिस्तानी टीम के सदस्य थे जिसने पहली बार 1954-55 में भारत का दौरा किया था. उन्होंने 55 टेस्ट मैच खेले थे और वेस्टइंडीज के खिलाफ 1957-58 में 337 रन की यादगार पारी खेली थी. यह टेस्ट इतिहास की सबसे लंबी पारी है और 40 साल से अधिक समय तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट की सबसे लंबी पारी भी रही. हनीफ ने अपने टेस्ट करियर में 12 शतक की मदद से 43.98 की. औसत से 3915 रन बनाए. उन्होंने अपने प्रथम श्रेणी करियर में 238 मैचों में 52.32 की औसत से 17059 रन बनाए.

आईसीसी ने हनीफ के निधन पर शोक प्रकट किया

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने पूर्व पाकिस्तानी कप्तान और आईसीसी हाल आफ हेम में शामिल हनीफ मोहम्मद के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा कि वह कई बल्लेबाजों के लिये प्रेरणास्रोत थे.

आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेविड रिचर्डसन ने एक बयान में कहा, ‘हनीफ के निधन की खबर काफी दुखद है, मैं और आईसीसी में हर कोई उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहेगा. हनीफ बल्लेबाजी को काफी उंचाई तक ले गये थे और कई बल्लेबाजों ने उनसे प्रेरणा ली.’

उन्होंने कहा, ‘उनका खेल में योगदान अपार है और इतने वर्षों में उनकी बल्लेबाजी का जैसा प्रभाव था, उसकी सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है. हनीफ का वेस्टइंडीज के खिलाफ तिहरा शतक महान पारी थी और वह आईसीसी क्रिकेट हाल आफ फेम में शामिल होने वाले पहले खिलाड़ियों में से एक थे.’

दर्शकों को बांधकर रखती है “रूस्तम”

1959 में नेवी अफसर के एम नानावटी के साथ हुए हादसे से प्रेरित फिल्म ‘‘रूस्तम’’ में देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के साथ साथ इस बात की ओर भी इशारा किया गया है कि एक ईमानदार फौजी देश की रक्षा करते करते अपने परिवार की रक्षा नहीं कर पाता है. फिल्म की लंबाई अधिक होने के बावजूद फिल्म अंत तक दर्शकों को बांधकर रखती है. फिल्म में नाटकीयता काफी है.

कहानी की शुरूआत आईएनएस मैसूर पर तैनात नेवी कमांडर रूस्तम पावरी (अक्षय कुमार) से होती है, जिनका यह जलयान छह माह से पहले ही मुंबई वापस लौट आता है. रूस्तम की गिनती एक देशभक्त व ईमानदार फौजी के रूप मेंहोती है. रूस्तम अपने घर पहुंचते हैं. घर पर उनकी पत्नी सिंधिया पावरी (ईलियाना डिक्रूजा) मौजूद नहीं होती हैं. घर की नौकरानी जमनाबाई (उषा नाडकर्णी) से पता चलता है कि सिंधिया पावरी दो दिन से घर से बाहर है.

रूस्तम को बेडरूम में फूलों के गुच्छे के साथ पत्र मिलता है, जिससे रूस्तम के मन में कुछ शंका पैदा होती है और वह अलमारी खोलता है, उसे कई प्रेम पत्र मिलते हैं. वह प्रेम पत्र पढ़ना शुरू करता है, जिनसे पता चलता है कि वह पत्र विक्रम मखीजा (अर्जन बाजवा) ने रूस्तम की पत्नी सिंधया पावरी के नाम लिखे हैं. रूस्तम, विक्रम के घर पर फोन लगाते हैं, फोन विक्रम का नौकर उठाता है और कहता है कि विक्रम घर पर नहीं है. रूस्तम अपनी गाड़ी लेकर विक्रम के घर के सामने पहुंचता है, तो वह बालकनी में अपनी पत्नी सिंधिया और विक्रम मखीजा को देखता है.

वह चुपचाप घर आकर व्हिस्की पीने लगता है. दूसरे दिन सुबह सिंधिया घर लौटती हैं, जिसके माथे पर चोट लगी होती है. वह सिंधिया से पूछताछ करने की बजाय आईएनएनस मैसूर जलयान पर जाकर बंदूक लेता है. रास्ते में जीपीओ से दिल्ली फोन करता है और फिर विक्रम के आफिस पहुंचता है. विक्रम आफिस में नहीं मिलता. तो वह विक्रम के घर पहुंचता है और विक्रम को सीन में तीन गोली दाग देता है. फिर खुद पुलिस स्टेशन जाकर आत्मसमर्पण कर देता है.

विक्रम मखीजा की बहन प्रिया मखीजा (ईशा गुप्ता) हर हाल में रूस्तम को जेल भिजवाना चाहती है. वह रूस्तम को सजा दिलाने के पब्लिक प्रोसीक्यूटर यानी कि वकील लक्ष्मण खंगाणी (सचिन खेड़ेकर) की सेवाएं लेती है. इस केस की जांच पड़ताल इंस्पेक्टर लोबो (पवन मल्होत्रा) शुरू करते हैं. अदालत में जज (अनंग देसाई) केस की सुनवाई शुरू करते हैं और साथ में नौ सदस्यीय ज्यूरी भी होती है. रूस्तम पावरी खुद अपना मुकदमा लड़ते हैं, वह वकील की सेवाएं नहीं लेते. उधर एक समाचार पत्र का संपादक रूस्तम के पक्ष में जनता के बीच माहौल बनाने की जिम्मेदारी लेकर समाचार पत्र में खबरें छापना शुरू करता है.

अदालत में इस मुकदमे की सुनवाई के साथ ही इस कहानी की परते खुलना शुरू होती हैं. पता चलता है कि विक्रम मखीजा बहुत बड़ा सौदागर है. वह कई विदेशी कंपनियों का भारत में प्रतिनिधित्व करता है और कई गलत कामों में लिप्त है. उसके काम में उसकी बहन प्रिया भी साथ देती है. अदालत में साबित होता है कि विक्रम मखीजा को बहुत जल्द गुस्सा आता है. गुस्से में वह बंदूक निकाल लेता है. अदालत के सामने रूस्तम तर्क देता है कि वह विक्रम के घर उससे यह पूछने गया था कि उसने उसके साथ ऐसा क्यों किया? विक्रम के स्वभाव से परिचित होने की वजह से ही वह आत्मरक्षा के लिए बंदूक लेकर गया और उसने आत्मरक्षा के लिए ही बंदूक चलायी, जिसमें व्रिकम मारा गया. उधर इंस्पेक्टर लोबो जांच करते करते रूस्तम के दिल्ली फोन का पता लगाकर दिल्ली में डिफेंस सेक्रेटरी केजी बख्शी से मिलता है. केजी बख्शी इंस्पेक्टर लोबो को उस फोन की रिकार्डिंग देता है, जिसमें रूस्तम कहता है कि वह विक्रम को छोड़ेगा नहीं. इंस्पेक्टर लोबो वह रिकार्डिंग भी अदालत को देता है. अब अदालत के जज ज्यूरी का निर्णय जानकर दूसरे दिन फैसला सुनाने वाले हैं.

इधर जेल में रूस्तम शतरंज खेल रहा है, तो वहीं इंस्पेक्टर लोबो भी परेशान है. वह रूस्तम के पास जेल में जाता है. वहां रूस्तम उसे असलियत बताते कहता है- ‘‘विक्रम ने नेवी के एडमिरल कामत को खरीद रखा था और उसने मुझसे व मेरी पत्नी से भी दोस्ती की थी. मुझे खास मकसद से छह माह के लिए लंदन भेजा गया था. जिससे मैं भारत सरकार यानी कि रक्षा मंत्रालय द्वारा खरीदे जाने वाले एअरक्राफ्ट के सही होने की पुष्टि कर दूं. पर मैंने देखा तो वह एअरक्राफ्ट जंग खाया हुआ था. मैने मना कर दिया. तो विक्रम ने मुझे दस लाख रूपए देने की बात की, जबकि उसे इसके एवज में पांच करोड़ रूपए मिल रहे थे. मैने उसे मना कर दिया और लंदन में ही मौजूद रक्षा सचिव केजी बख्शी को सच्चाई बतायी. तो केजी बख्शी ने कहा कि विक्रम मुझे बीस लाख रूपये देगा.

मेरे मना करने पर विक्रम के कहने पर मेरा तबादला किया गया और मुझे समय से पहले आईएनएस मैसूर में भारत लौटना पड़ा. विक्रम के घर जाने से पहले मैंने के जी बख्शी को फोन किया था, उन्होंने मुझसे कहा था कि विक्रम से उन्होंने बात कर ली है. वह मुझसे मिलकर मामला सुलझा लेगा. मैने बख्शी से कहा था कि एअरक्राफ्ट की रिपोर्ट का पन्ना मेरे पास है, जिसे मैं रक्षा मंत्रालय भेजकर सबकी पोल खोल दूंगा. इसलिए उसने आधी रिकार्डिंग देकर मेरे खिलाफ काम किया.’’

जब इंस्पेक्टर लोबो ने कहा कि रूस्तम ने यह सच अदालत को क्यों नहीं बताया, तो रूस्तम ने कहा,‘‘मै आम जनता के सामने नेवी व रक्षा मंत्रालय की छवि खराब नहीं करना चाहता. देशभक्त हूं. देश की रक्षा करते करते मैं अपने परिवार की रक्षा नहीं कर पाया. दूसरे दिन अदालत मे जूरी के नौ में से आठ सदस्य रूस्तम को बरी कर देते हैं. पूरी जनता खुश हो जाती है.

कुछ माह पहले प्रदर्शित फिल्म ‘‘1920 लंदन’’ देखकर बहुत निराशा हुई थी, पर ‘रूस्तम’ देखकर इस बात का अहसास ही नही होता कि ‘रूस्तम’ का निर्देशन ‘1920 लंदन’ के निर्देशक टीनू सुरेश देसाई ने ही किया है. ‘‘रूस्तम’’ एक परिपक्व निर्देशक की फिल्म लगती है. फिल्म में रोमांच के तत्व के साथ साथ इमोशन, एक्शन सहित सब कुछ है. अक्सर वह फिल्में काफी नीरस हो जाती हैं, जिनमें कोर्टरूम ड्रामा होता है, पर टीनू सुरेश देसाई के निर्देशन का कमाल ही कहा जाएगा कि फिल्म शुष्क या नीरस नहीं होती है. कोर्टरूम ड्रामा भी अच्छे से पेश किया गया है. पचास के दशक को यथार्थ रूप में परदे पर पेशस करने में भी वह सफल रहे हैं.

कहानी व पटकथा लेखक विपुल रावल ने यदि थोड़ी कसावट की होती, तो यह फिल्म ज्यादा बेहतर हो जाती. फिल्म थोड़ी सी लंबी हो गयी है. बीच बीच में कहानी की गति धीमी भी होती है. इसके अलावा फिल्म में कोर्टरुम की कार्यवाही, जज व ज्यूरी के आने जाने को यथार्थ के धरातल पर पेश करने के चक्कर में भी फिल्म कुछ लंबी हुई है, जिससे बचा जा सकता था.

यदि यह फिल्म एक काल्पनिक कथा है तो यह सवाल उठना लाजमी है कि पत्नी का गैर मर्द के साथ रिश्ता बनाने को सही ठहराने के लिए क्या देश की सुरक्षा से जुड़े मामले को जोड़ा जाना सही है? नेवी अफसर रूस्तम के किरदार में अक्षय कुमार ने अपनी चिरपरिचित शेली में बेहतर अभिनय किया हैं, पर अभी उन्हे अपने चेहरे पर भाव लाने के लिए मेहनत करने की जरुरत नजर आती है. ईलियाना डिक्रूजा, ईशा गुप्ता, सचिन खेड़ेकर ने भी अपने अपने किरदारों के साथ न्याय किया है.

फिल्म के कैमरामैन संतोष ठुंडयिल ने भी बेहतरीन काम किया है. फिल्म का गीत संगीत ठीक ही है. कुल मिलाकर ‘‘रूस्तम’’ कोई अद्भुत फिल्म नहीं है. पर अक्षय कुमार के प्रशंसकों और रोमांचक फिल्म देखने के शौकीनों के लिए यह फिल्म ठीक है.

दो घंटे 32 मिनट की अवधि वाली फिल्म का निर्माण नीरज पांडे, शीतल भाटिया, जी स्टूडियो, लेखक विपुल के रावल, निर्देशक टीनू सुरेश देसाई, संगीतकार अंति तिवारी, जीत गांगुली, राघव सचर तथा कलाकार हैं-अक्षय कुमार, ईलियाना डिक्रूजा, ईशा गुप्ता, अर्जन बाजवा, उषा नाउकर्णी, अनंग देसाई, ब्रजेंद्र काला व अन्य.

VIDEO: ओलिंपिक में चल रहा है ये गंदा काम, देखकर आप भी हो जाएंगे हैरान

ब्राजील के रियो में ओलिंपिक चल रहा है, लेकिन रियो डि जेनेरियो का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है.

अगर आप भी ये वीडियो देखेंगे तो हैरान रह जाएंगे कि ओलिंपिक में ये सब क्या हो रहा है.

वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें…

Thieves Targeting Tourists At Rio Olympic In Brazil

ब्राजील के रियो में ओलिंपिक चल रहा है, लेकिन यहां आने वाले पर्यटकों को यहां के चोर निशाना बना रहे हैं. वे बेखौफ चलते रास्‍ते पर्यटकों के हैंडबैग, वॉलेट लेकर भाग जाते हैं. इतना ही नहीं कुछ चोर तो पकड़ में भी आ जाते हैं और उनकी धुनाई शुरू हो जाती है, लेकिन वे चोरी करना नहीं छोड़ते.

रियो डि जेनेरियो का यह वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें चोर चोरी के लिए पर्यटकों के पीछे पड़ जाते हैं.

ब्राजील में चल रहे रियो ओलिंपिक ने वहां के चोरों को लूट का मौका दे दिया. कई ऐसे वीडियो सामने आए हैं जिसमें टीनएज लड़के दिनदहाड़े वहां आए पर्यटकों का सामान छीनते नजर आ रहे हैं. ये लड़के खुलेआम ऐसी वारदात को अंजाम दे रहे हैं. पर्यटकों से ज्यादातर उनके पर्स, मोबाइल, ईयर फोन और इसी तरह के गैजेट्स छीने जा रहे हैं. ऐसी घटनाओं के वक्त ये लड़के कभी अकेले होते हैं तो कभी ग्रुप में.

रियो ओलंपिक में चोरी हो रहा सामान, सुरक्षा बढी़

ओलंपिक में भाग लेने के लिए पहुंचे आस्ट्रेलियाई दल का एक लैपटाप और टीम पोशाकें चोरी हो गईं हैं, जिसके कारण ओलंपिक खेल गांव में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. आस्ट्रेलियाई दल की नेता किटी चिलर ने बताया कि आग लगने की एक घटना के बाद जब उनके खिलाडिय़ों और अधिकारियों को बाहर जाने के लिए कहा गया तब यह चोरी हुई.

उन्होंने कहा कि पांचवें तल से साईकिलिंग के हमारे एक अधिकारी का लैपटाप चुरा लिया गया. आइटी से जुड़े हमारे उपकरणों से भी छेड़छाड़ की गई. बीच में जब मैं अंदर आई तो मैंने तीन अग्निशमन अधिकारियों को हमारी टीम शर्ट ले जाते हुए देखा. मैं नहीं जानती कि वे कौन थे. मुझे नहीं पता कि वे कितनी शर्ट लेकर गए और हां यह चिंता का विषय है." चिलर ने कहा कि आग लगने की घटना के बाद आयोजकों ने ओलंपिक गांव की सुरक्षा बढ़ा दी है.

वहीं, रियो ओलंपिक के खेलगांव में डेनमार्क के खिलाड़ियों ने कहा कि उनका सामान चोरी हो गया है. इसके लिए आयोजकों ने उनसे सार्वजनिक माफी मांगी है. ऐसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर झटका माना जा रहा है. चोरी की ऐसी कई घटनाएं खेलगांव से सुनने को मिल रही हैं.

डेनमार्क के दल प्रमुख मोर्टिन रोडविट ने टीवी टू को बताया कि मोबाइल फोन, कपड़े और आई पैड गायब हो गए हैं. उन्होंने कहा, ‘खेलगांव में हमारी जरूरतों और अनुरोध के बाद कई अतिरिक्त कर्मचारी, सफाईकर्मी और हाउसकीपर लाए गए हैं लेकिन यहां सिलसिलेवार चोरियां हो रही हैं. फोन, आई पैड और चादरें तक चोरी हो गई हैं.’ डेनमार्क के दल ने 18 जुलाई को यहां आने के बाद से करीब 150 शिकायतें दर्ज कराई है. इसके अलावा आस्ट्रेलियाई दल का लैपटॉप और टीम शर्ट चोरी हो गए हैं.

जाते-जाते राजन ने कही ‘मन की बात’

खुद पर हुए राजनीतिक हमले को घटिया बताते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि वे आरबीआई गवर्नर के तौर पर आगे भी काम करना चाहते थे, जिससे बैंकों की बैलेंस शीट को साफ करने का अपना अधूरा काम पूरा कर सकें. लेकिन वे अपना कार्यकाल पूरा कर यहां से जाते हुए भी खुश हैं.

राजन ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत की प्रकिया उस स्‍टेज पर नहीं पहुंच सकी जहां वे अपने पद पर बने रहने के लिए सहमत हो सकें. राजन ने जून में फैसला किया था कि वे अपना 3 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद अगले टर्म की मांग नहीं करेंगे. उन्‍होंने कहा कि वे अगले टर्म या सरकार में आगे कैरियर को लेकर कभी चिंतित नहीं थे और देश के हित में जो भी कर सकते थे किया. राजन ने कहा कि वे बेस्‍ट टीम प्‍लेयर थे.

खास मकसद से किए गए हमले

राजन ने कहा कि यूनिवर्सिटी में रहने की वजह से उनकी चमड़ी काफी मोटी हो गई है लेकिन उस समय जो हमले हुए वे घटिया नहीं थे. उन्‍होंने बताया कि उन पर हाल में हुए कुछ हमले घटिया थे. ये हमले किसी खास मकसद से किए गए. बिना किसी आधार के आरोप लगाए गए थे. इसी वजह से मैंने उन पर कोई ध्‍यान नहीं दिया.

स्वामी ने लगाए थे आरोप

अपने कार्यकाल के आखिरी दौर में राजन ने भाजपा सांसद सुब्रमण्‍यम स्‍वामी के व्यक्तिगत हमलों का सामना किया. स्‍वामी ने आरोप लगाया था कि पूर्व आईएफ चीफ इकनॉमिस्‍ट मानसिक तौर पर पूरी तरह से भारतीय नहीं हैं और उन्‍होंने गुप्‍त और संवेदनशील वित्‍तीय सूचनाएं विदेश भेजी हैं.

 राजन ने कहा कि जब लोगों ने उनसे पूछा कि क्‍या वे दूसरा टर्म चाहते थे तो उन्होंने कहा कि हालांकि उन्‍होंने आरबीआई में अपनी सभी पहल तीन साल के कार्यकाल को ध्‍यान में रख कर शुरू की थी लेकिन सरकारी बैंकों की बैलेंस शीट साफ करने और मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी फ्रेमवर्क स्‍थापित करने का काम अधूरा है.

रियो: सेल्फी बनेगी सजा-ए-मौत की वजह

क्या सेल्फी लेना जान पर भारी पड़ सकता है, तो हां, यह मुमकिन है. दरअसल, इन दिनों सोशल मीडिया पर एक सेल्फी काफी हिट है. वायरल हो चुकी इस तस्वीर में दो लेडी जिमनास्ट साथ में हैं. अब आप सोच रहे होंगे कि दो जिमनास्ट एकसाथ फोटो लें तो यह गुनाह तो नहीं है!

बिल्कुल सही, यह आपकी नज़र में गुनाह भले ही न हो लेकिन जिस देश से ये इत्तेफाकक रखती हैं, वहां यह गुनाह से भी कम नहीं है.

जी हां, हम बात कर रहे हैं उत्तरी कोरिया की हॉन्ग यूं और दक्षिणी कोरिया की एथलीट यू लू की. ये दोनों इन दिनों रियो ओलंपिक में भाग ले रही हैं. इन्होंने ट्रेनिंग सेशन के दौरान दोनों देशों की आपसी कड़वाहट को नजरअंदाज करते हुए खेल भावना दिखाई और एकसाथ फोटो क्लिक की.

लेकिन यह सेल्फी इसे लेने वाली महिला जिमनास्ट हॉन्ग यूं के लिए जानलेवा साबित हो सकती है.

​मौत का है नियम

दरअसल, नॉर्थ कोरिया और साउथ कोरिया में दुश्मनी है. नॉर्थ कोरिया में यह नियम है कि अपने दुश्मन देश के लोगों के साथ सेल्फी लेने पर सजा-ए-मौत सुनाई जाती है. वैसे भी वहां का तानाशाह किम जोंग बेरहम है.

उनकी सनक के आगे किसी की नहीं चलती. दुनियाभर में उनके किस्से मशहूर हैं. यहां तक कि वो अपने सबसे खास इंसान पर भी जल्द रहम नहीं करते. किसी को मौत के घाट उतार देना उनके लिए बाएं हाथ का खेल है.

इस सेल्फी के सामने आने के बाद से पूरे नॉर्थ कोरिया की टीम में पशोपेश की स्थिति बनी हुई है. दुश्मन देश की खिलाड़ी के साथ सेल्फी लेने का खामियाजा इस उत्तर कोरिया की एथलीट को उठाना ही पड़ेगा.

फोन खुद बताएगा कैसे करें मरम्मत

एंड्रॉयड फोन का इस्तेमाल करने वाले  जितने भी लोग हैं सभी के मन में कभी ना कभी अपने एंड्रॉयड फोन के सिस्टम के बारे में जानने का ख्याल आता होगा. बहुत सी चीजों के बारे में हमें अपने फोन में से ही जानकारी मिल जाती है लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती है जिनकी जानकारी आपको फोन के अंदर नहीं मिलती.

स्मार्टफोन के अंदर कुछ ऐसे जादुई कोड होते हैं जिनके इस्तेमाल से आप अपने फोन की सभी जरूरी चीजों के बारे में जान सकते हैं और साथ ही एंड्रॉयड फोन में होने वाली समस्याओं को भी सुलझा सकते हैं.

आज हम आपको एंड्रॉयड के कुछ ऐसे कोड्स के बारे में बताने जा रहे हैं. जिससे आपको फोन में परेशानी होने के बाद सर्विस सेंटर की मदद नहीं लेनी पड़ेगी, आप खुद ही कोड्स का इस्तेमाल करके अपना फोन ठीक कर सकते हैं.

1. सबसे पहले फोन का डायल पैड खोलें और *#*#4636#*#* इस कोड को डालें. इसे डायल करते ही आपके सामने फोन इंफॉरमेशन, बैटरी इंफॉरमेशन, यूसेज स्टैटिक्स और वाईफाई इंफॉरमेशन का ऑप्शन आएगा.

2. फोन इंफॉरमेशन को क्लिक करते ही आपके सामने फोन से संबंधित IMEI नंबर, नेटवर्क सर्विस, GPRS जैसी कई जानकारियां सामने आ जाएंगी.

3. बैटरी इनफॉरमेशन को क्लिक करने पर वहां आपको फोन के बैटरी के बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी. ​आपके फोन की बैटरी कितने फीसदी चार्ज है और बैटरी की हेल्थ कैसी है. यह सभी जानकारियां आपके सामने आ जाएंगी.

4. यूसेज स्टैटिक्स के जरिए आप जान सकते हैं कि आपने किस फीचर को कितने समय तक इस्तेमाल किया है.

5. आपके लिए वाईफाई से संबंधित जानकारी प्राप्त करना बहुत ही जरूरी है. यहां आपको वाईफाई कनेक्शन के बारे में पूरी जानकारी मिलती है. वाईफाई कनेक्ट है या नहीं, कौन-कौन से नेटवर्क उपलब्ध हैं अैर नेटवर्क स्ट्रेंथ कैसा है. इसके अलावा भी कई तकनीकी जानकारियां मिलेंगी.

कुछ कोड्स ऐसे भी हैं जिनकी मदद से आप एंड्रॉयड के कुछ फंक्शन का इस्तेमाल कर सकते हैं.

1. *#*#7780#*#*: इस कोड का उपयोग आप अपने एंड्रॉयड स्मार्टफोन को रीसेटिंग के लिए कर सकते हैं. इसके माध्यम से सिर्फ एप्लिकेशन डेटा और एप्लिकेशन को डिलीट किया जा सकता है.

2. *2767*3855#: यदि एंड्रॉयड स्मार्टफोन को पूरी तरह से वाइप करना चाहते हैं तो यह कोड कार्य करेगा. डेटा वाइप कर यह फर्मवेयर को फिर से इंस्टॉल करेगा.

3. *#*#34971539#*#*: फोन के कैमरा से सम्बंधित जानकारी के लिए इस कोड का उपयोग कर सकते हैं.

4.*#*#273283*255*663282*#*#*: फाइल बैकअप के लिए इस कोड का उपयोग करें.

5. *#*#0*#*#*: एलसीडी डिसप्ले टेस्ट के लिए इस कोड को टाइप करें.

कहीं आपका पीएफ कंपनी की जेब में तो नहीं जा रहा?

आप हर महीने अपनी सैलरी के पैसों से पीएफ भरते है. आपकी मेहनत की कमाई का एक हिस्सा आपकी कंपनी आपके पीएफ के लिए भरती भी है या नहीं या सारे पीएफ के पैसे कंपनी की जेब में चले जाते है. यह सवाल इसलिए क्योंकि देशभर में हजारों कंपनियां ऐसी हैं जिन पर ईपीएफओ का हजारों करोड़ रुपये बकाया है. यानी, उन कंपनियों ने कर्मचारियों की सैलरी से काटे रुपये खुद ही गटक लिए.

10,000 से ज्यादा कंपनियां कर रही धोखा

ऐसा करने वाली कोई एक दो कंपनियां नहीं है जो इस तरह से पीएफ के पैमेंट में गड़बड़ कर रही हैं. 10,000 से ज्यादा कंपनियों ने एंप्लॉयीज प्रविडेंट फंड पेमेंट्स में गड़बड़ी की है. इनमें 2,200 कंपनियों पर ईपीएफओ का कम-से-कम 2,200 करोड़ रुपये बकाया है. यह राशि एंप्लॉयीज की सैलरी से काटी गई वह रकम है जिसे ईपीएफओ में जमा करवाना चाहिए था.

बढ़ रही गड़बड़ कंपनियों की तादाद

गड़बड़ियां करनेवाली संस्थाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. 2014-15 में डिफॉल्टर्स की तादाद 10,091 थी जो दिसंबर 2015 में बढ़कर 10,932 हो गई. ऑनलाइन कन्जयूमर फोरम पर शिकायतों की बाढ़ आ रही है. नौकरी छोड़नेवाले या रिटायर होनेवाले सैकड़ों कर्मचारियों को पीएफ का पैसा नहीं मिल रहा mहै.

तमिलनाडु टॉप पर

डिफॉल्टर्स की लिस्ट में पुदुचेरी और तमिलनाडु की 2,644 कंपनियों के साथ टॉप पर हैं. इनके बाद महाराष्ट्र (1,692), केरल और लक्षद्वीप (1,118) का नंबर आता है.

टॉप डिफॉल्टर कंपनियां

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया गड़बड़ी करनेवाली संस्थाओं में टॉप पर है. उसके पास ईपीएफओ का 192 करोड़ का बकाया है. फिर नंबर आता है मुंबई के एचबीएल ग्लोबल, दिल्ली के अहलुवालिया कॉन्ट्रैक्ट्स इंडिया लि. का जिन पर 64.5 करोड़ और 54.5 करोड़ रुपये बकाया है.

कंपनियों पर केस

डिफॉल्टिंग कंपनियों को दंडित किए जाने के लिए ईपीएफओ ने 2012-13 में 317 मामले दर्ज करवाए थे जो 2015 के आखिर में बढ़कर 1491 हो चुके हैं.

ईपीएफओ की गड़बड़ी

सैलरीड क्लास की बचत के पहरेदार के रूप में ईपीएफओ कहीं ज्यादा गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है. यह तब तक एंप्लॉयीज को नहीं बताता है कि उनकी कंपनियां गड़बड़ी कर रही हैं जब तक कि एंप्लॉयी पैसे निकालने के लिए ईपीएफओ के पास नहीं जाते. ऐसे में सेटलमेंट का इंतजार कर रहे लोगों की तादाद बढ़ रही है. वहीं, ईपीएफओ में भ्रष्टाचार बेरोकटोक बरकरार है.

Facebook को टक्कर देने आ रहा है Orkut

ऑरकुट के बारे में आपको याद ही होगा. जी हां, हम सभी के लिए पहली सोशल साइट, जिसके माध्‍यम से हम कॉलेज में दोस्‍तों से जुड़ा करते थे. ऑरकुट को 2014 में बंद कर दिया गया था. जब इसे बंद किया गया, तब ऑरकुट के फाउंडर ने किसी भी प्रकार की अगली योजना की जानकारी नहीं दी.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऑरकुट के फाउंडर का नाम बुयुक्‍कोकेट्न है. हाल ही में इन्‍होंने अपनी एक नई सोशल साइट को लांच किया है. इस साइट का मुख्‍य उद्देश्‍य, फेसबुक को टक्‍कर देना है.

इस सोशल साइट में लोग कई कैटेगरी के हिसाब से अपनी तरीके के लोगों का चयन करके उन्‍हें अपना दोस्‍त बना सकते हैं. इस बारे में बुयुक्‍कोकेट्न ने ब्‍लॉग पोस्‍ट किया है कि, सोशल नेट‍वर्किंग साइट में ऑरकुट ने एक क्रांति ला दी थी, जिससे लोगों ने एक दूसरे के साथ जुड़ने के लिए सीख ली और प्रेरित हुए.

उसी दिशा में आप सभी का आभार व्‍यक्‍त करते हुए अब मैं एक नई सोशल साइट को आप सभी के समक्ष ला रहा हूं.

हैलो एप्लिकेशन क्या है?

हैलो के बारे में फाउंडर ने कहा कि मैं अलविदा कहने में कच्‍चा हूँ इसलिए हैलो बोल रहा हूँ. यह एक पहली ऐसी सोशल साइट है जिसे लाइक पर नहीं बल्कि प्‍यार पर बनाया गया है. यह अगली पीढ़ी के लिए ऑरकुट है. इससे लोग अपनी रूचियों के हिसाब से जुड़ पाएंगे. इस प्रकार, हम फिर से एक नए तरीके से जुडेंगे.

हैलो, दुनिया का ऐसा शब्‍द है जिसे हर देश और जगह के लोग जानते हैं और यहीं आपको दोस्‍त बना देता है. इस सोशल साइट का हिस्‍सा बनने के लिए आपको इसमें साइन अप करना होगा. इसके लिए, वेबसाइट पर जाएं और अपनी मेलआईडी डालकर स्‍वयं को रजिस्‍टर करें. ध्‍यान रहें कि यह साइट आपके पैशन के आधार पर बनाई गई है तो आपको लोगों का चयन भी उसी के अनुसार करना होगा.

आपको एक सूची भी प्रदर्शित की जाएगी. आप चाहें तो बाद में इसमें बदलाव भी कर सकते हैं. आप अपनी रूचि के अन्‍य लोगों से भी मिल सकते हैं.

उपलब्‍धता:

हैलो, सोशल साइट तीन भाषाओं में है. इंग्लिश, फ्रैंच और पुर्तगाली में अभी इसे तैयार किया गया है. कम्‍पनी ने हैलो एप को भी आईओएस और एंड्रायड के लिए तैयार कर दिया है. यह, अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, आयरलैंड, और ब्राजील में उपलब्ध है. जल्‍दी ही इसे भारत में भी लांच किए जाने का इरादा है. साथ ही उसी समय में, जर्मनी और मैक्सिकों में भी लांच कर दिया जाएगा.

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