Download App

कानून का मुंह काला करती जुगाड़ गाड़ी

आज भी बिहार और झारखंड के कई इलाकों में आटो रिक्शा, बस और टैक्सी जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा नहीं है. कहीं जाना है तो टमटम या बैलगाड़़ी की सवारी कीजिए या फिर पैदल ही चलिए. कहीं जल्दीबाजी में जाना हो तो कोई उपाय नहीं है. गांवों और कस्बों में टमटम और बैलगाड़ी से नजात दिला रही है एक गाड़ी. जिसे कहा जाता है जुगाड़ गाड़ी. जिसे प्यार से पटपटवा, छड़छड़वा, फटफटिवा, खरखरवा, ठेलवागाड़ी और न जाने क्या-क्या नाम से पुकारा जाता है, लेकिन वह जुगाड़ गाड़ी के नाम से ही फेमस है.

सरकारी कानूनों के चेहरे पर काला धुंआ उड़ाती यह जुगाड़ गाड़ी बेरोक-टोक धड़ल्ले से बिहार और झारखंड की सड़कों पर फर्राटे भर रही है. छोटे इलाकों से निकल कर अब यह पटना और रांची की सड़कों पर भी बेखौफ होकर दौड़ लगा रही है. सीमेंट, ईंट, बांस, लोहा का सरिया, टेंट-पंडाल का समान समेत किसी भी तरह की माल ढुलाई के लिए भी इस गाड़ी का जम कर इस्तेमाल होने लगा है.

बिहार की राजधानी पटना में में प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस के नाक के नीचे सामान ढोने के लिए जुगाड़ गाड़ी का जम कर इस्तेमाल हो रहा है. ट्रैफिक पुलिस जुगाड़ गाड़ी को गैरकानूनी करार दे चुकी है और कई जुगाड़ गाड़ी को पकड़ कर थानों में लगा दिया गया है. इसे न तो ट्रांसपोर्ट महकमे से रजिस्ट्रेशन कराया जाता है न ही गाड़ी को कोई नंबर होता है और तो और उसे चलाने वाले ड्राइवर के पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं होता है. तिपहिया ठेला गाड़ी चलाने वाले ही उसे फर्राटे से सड़कों पर दौड़ा रहे हैं और उस पर सवार लोगों की जान हलक में अटकी रहती है. ‘अनारकली लद के चली’ के नारे पर अमल करती यह गाड़ी कानून को ठेंगा दिखाते हुए धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ रही है. बिहार के गांव-देहात के इलाकों में तो तेज सवारी का दूसरा नाम बन गया है जुगाड़ गाड़ी.

कबाड़ी बाजार से पंपिंग मशीन, पुरानी मोटरसाइकिल, स्कूटर, आटो रिक्शा और आटा चक्की के पुराने पुर्जों को खरीद कर जोड़-तोड़ कर जुगाड़ गाड़ी तैयार की जाती है. इसे बनाने में 10 से 12 हजार रूपए तक खर्च आता है. तिपहिया ठेला गाड़ी में कल-पुर्जा लगा कर जुगाड़ गाड़ी बना ली जाती है. कोई भी मोटरसाइकिल, स्कूटर या औटो रिक्शा मैकेनिक उसे आसानी से तैयार कर देता है. पिछले दिनों नवादा शहर से कौवाकोल प्रखंड तक इस जुगाड़ गाड़ी से सफर करने वाले पटना के असलम परवेज बताते हैं कि इस गाड़ी से कहीं-कहीं सामानों को ढोते तो देखा था पर आदमियों को ढोते पहली बार देखा. जुगाड़ गाड़ी पर सफर करने वालों की जान हर वक्त हलक में अटकी रहती है.

जुगाड़ गाड़ी को चलाने वाले बड़े ही खतरनाक तरीके से सामानों को ढोते हैं. उस पर लोहे का सरिया, बांस और ईंट को लाद का गाड़ी का एक्सेलेटर दबाए तेजी से गाड़ी को सड़कों पर दौड़ाते रहते हैं. इससे उसके आस-पास चलती गाड़ियां हमेशा ही खतरे की जद में रहती है. पटना के कदमकुंआ मुहल्ले में रहने वाले भानु सिंह बताते हैं कि एक दिन वह अपनी बेटी को स्कूल बस के स्टौपेज पर छोड़ने जा रहे थे, अचानक पीरमुहानी मोड़ पर एक जुगाड़ गाड़ी तेजी से आई और उनकी कार से टकरा गई. कार बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई, लेकिन उन्हें और उनकी बेटी को हल्की खरोंच ही आई. उन्होंने जुगाड़ गाड़ी समेत उसे चलाने वाले को पकड़ कर थाना ले गए. थाना में एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई और गाड़ी वाले को केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया गया. बगैर किसी लाइसेंस के हजारों जुगाड़ गाड़ी सड़कों पर हादसों को हर घड़ी न्यौता देते घूम रहे हैं और उन्हें रोकने में कानून के रखवालों की कोई दिलचस्पी ही नहीं है.

सूबे के कई ग्रामीण इलाकों में लोकल ट्रांसपोर्ट की भारी कमी के बीच जुगाड़ गाड़ी फर्राटे से दौड़ रही है और गरीबों के रोजमर्रा के जीवन की राह को आसान तो बना रही है, पर इसके साथ ही वह ट्रैफिक नियमों को भी कदम-कदम पर तोड़ रही है और सड़कों पर मौत बन कर फिर रही है.       

अब 1 साल तक होगी आपके डेटा पैक की वेलिडिटी

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने शुक्रवार को मोबाइल डेटा पैक की वैधता अवधि को बढ़ाकर 365 दिन करने की मंजूरी दे दी. अभी तक यह वैधता 90 दिन की थी. ट्राई के इस कदम का मकसद डेटा का कम इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को प्रोत्साहन देना और पहली बार के इंटरनेट प्रयोगकर्ताओं को आकषिर्त करना है.

ट्राई ने कहा, ‘नियामक को डेटा पैक की वैधता अवधि बढ़ाने के लिए आग्रह मिल रहे हैं (ये विशेष टैरिफ वाउचर हैं जो सिर्फ डेटा लाभ के साथ आते हैं) मुख्य रूप से यह कदम उन ग्राहकों के लिए है जो कम मूल्य का अधिक वैधता अवधि का डेटा पैक चाहते हैं.’

अभी कोई भी कंपनी अधिकतम 90 दिन की वैधता अवधि का रिचार्ज वाउचर जारी कर सकती है. यदि ग्राहक निश्चित समयावधि में पूरे डेटा का  इस्तेमाल नहीं कर पाता है तो शेष डेटा समाप्त हो जाता है. ट्राई ने विचार विमर्श की प्रक्रिया के बाद दूरसंचार उपभोक्ता संरक्षण नियमन (टीसीपीआर) में संशोधन कर डेटा की वैधता अवधि 90 दिन से बढ़ाकर 365 दिन कर दी है.

फेसबुक ने छेड़ी नई जंग, ऑनलाइन खबरें पढ़ने वाले सावधान

ऑनलाइन विज्ञापन ब्लॉक करने वाले ऐप को लेकर अब जंग बढ़ती जा रही है.

फेसबुक ने कुछ दिन पहले घोषणा की थी कि एड ब्लॉक ऐप के खिलाफ उसने तैयारी कर ली है और अब ऐसे ऐप को खुद ही ब्लॉक करने को तैयार है.

इस खबर के अनुसार, एड ब्लॉक ऐप के खिलाफ उसने मोर्चा खोल दिया है. इससे इंटरनेट पर एड ब्लॉक ऐप इस्तेमाल करने वाले लोग उसका फायदा नहीं उठा पाएंगे.

लेकिन दूसरी तरफ एडब्लॉक प्लस नाम की कंपनी ने एक फिल्टर लॉन्च किया है जिससे फेसबुक की एडब्लॉक ऐप को ब्लॉक करने की कोशिश बेकार हो जाएगी.

अगर आप क्रोम या फायरफॉक्स ब्राउजर इस्तेमाल करते हैं तो ये फिल्टर इस्तेमाल करके ऑनलाइन विज्ञापनों को ब्लॉक कर सकते हैं.

क्या है मामला

फेसबुक जैसी कंपनी की मोटी कमाई ऑनलाइन विज्ञापनों से ही होती है और इसीलिए उसने इस काम को करने का बीड़ा उठाया है.

गूगल की भी कमाई ऐसे ही होती है, लेकिन उसके ईमेल, यूट्यूब, सर्च, मैप जैसे कई और सर्विस से तरह तरह के ग्राहकों के बारे में जानकारी मिल जाती है.

ऑनलाइन विज्ञापन देने वाली कंपनियों और इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों के बीच ये लड़ाई पिछले एक-दो साल में काफी तेज हो गई है.

फेसबुक जैसी हजारों ऑनलाइन कंपनियों का मानना है कि ऑनलाइन ग्राहकों को मुफ्त का कंटेंट मिल रहा है, इसलिए उन्हें तरह-तरह के विज्ञापन दिखाए जाने चाहिए.

ऑनलाइन ग्राहकों और प्राइवेसी के हक में बोलने वालों का मानना है कि ग्राहकों को विज्ञापन तो दिखाए जा ही रहे हैं. इससे बचने के लिए वो एड ब्लॉक ऐप का इस्तेमाल जायज समझते हैं.

अखबार और मैगजीन छापने वाली भारतीय कंपनियां

कुछ अखबार और मैगजीन छापने वाली भारतीय कंपनियों ने हाल ही में ऐसे एड ब्लॉक ऐप के खिलाफ भी जंग छेड़ दी है.

अगर आपके डिवाइस पर ये ऐप हैं तो ये कंपनियां चाहती हैं कि इन वेबसाइट के विज्ञापन को ऐसे एड ब्लॉकर से बख्श दिया जाए.

उनका कहना है कि चूंकि लोग ऑनलाइन पढ़ने के लिए पैसे नहीं देते हैं इसलिए कंपनियां विज्ञापन के सहारे ही ये कंटेंट लोगों तक पहुंचा सकती हैं. दोनों पक्ष के इस झगड़े पर आपको नजर रखना जरूरी है.

अगर आप विज्ञापन नहीं चाहते हैं तो हो सकता है आपको इंटरनेट के तरह तरह के कंटेंट को पढ़ने के लिए अब पैसे देने पड़ें.

शराब के शौकीनों के लिए बुरी खबर

सर्विस टैक्स अथॉरिटीज की पैनी नजर अब शराब पर भी पड़ चुकी है. अब शराब विक्रेताओं को लाइसेंस शुल्क पर भी टैक्स देना होगा, जिसके कारण शराब की कीमतें बढ़ सकती हैं. अथॉरिटी का मानना है कि शराब विक्रेता राज्य सरकारों को लाइसेंस के लिए दी जाने वाली राशि पर टैक्स नहीं चुका रहे हैं. ऐसी राशि को पिछले साल ही टैक्सेबल किया गया था.

शराब बेचने वाले बार और रेस्तरां भी इसमें शामिल होंगे. शराब विक्रेताओं को रिवर्स चार्ज मेकनिजम के तहत यह टैक्स की राशि चुकानी पड़ेगी. इसका मतलब इस सेवा का अंतिम भार सेवा लेने वालों अर्थात ग्राहकों पर ही पड़ेगा. अथॉरिटी के लेटर शराब विक्रेताओं के लिए समस्याएं भी पैदा कर सकता है. अब या तो शराब विक्रेताओं को टैक्स को चुकाना पड़ेगा या राज्य सरकार से MRP बढ़ाने के लिए कहना होगा जो कि बहुत मुश्किल है. इससे कीमत बढ़ सकती है जिससे शराब बिक्री पर प्रभाव पड़ेगा.

एक शराब कंपनी के एक्जिक्युटिव ने कहा, 'यह शराब इंडस्ट्री के लिए एक संकट जैसा है. बढ़ी कीमतों का सीधा प्रभाव बिक्री पर पड़ेगा. अगर कीमतें नहीं बढ़ाई गईं तो इसकी बिक्री अधिक रहेगी. लेकिन विक्रेताओं को टैक्स तो चुकाना ही है.' फाइनैंस ऐक्ट में पिछले साल हुए बदलावों के कारण लाइसेंस शुल्क, ऑक्शन और डिवेलपमेंट राइट टैक्सेबल हो गए थे. अभी शराब विक्रेताओं को इन नए नियमों की जानकारी नहीं है, इस कारण अथॉरिटीज इन नियमों को सभी शराब विक्रेताओं तक पहुंचना चाहते हैं.

बोल्ट ने लगाई गोल्ड की हैट्रिक

धरती के सबसे तेज धावक, अविश्वसनीय एथलीट और खुद को दिग्गज बता चुके जमैका के यूसेन बोल्ट ने अपने सपने को पूरा करते हुये रियो ओलंपिक में 4×100 मीटर रिले दौड़ में भी गोल्ड मेडल जीतने के साथ 'स्प्रिंट स्वीप' कर लिया है.

बोल्ट ने रियो ओलंपिक शुरु होने से पहले कहा था कि वह अपने आखिरी ओलंपिक खेलों में 'स्प्रिंट स्वीप' करना चाहते हैं और यही उनका सपना है. बोल्ट ने फर्राटा दौड़ 100 और 200 मीटर के बाद 4×100 मीटर रिले स्वर्ण भी जीत लिया है जो उनकी इन तीनों रेसों में बीजिंग और लंदन ओलंपिक के बाद लगातार तीसरी ओलंपिक स्वर्णिम हैट्रिक है.

बोल्ट का रियो ओलंपिक में यह लगातार तीसरा गोल्ड मेडल और कुल 9वां ओलंपिक गोल्ड है.

दुनिया के महान एथलीट बोल्ट ने जमैकन टीम की अगुवाई करते हुए 4×100 मीटर रिले में गोल्ड मेडल हासिल किया. जमैका की टीम ने 37.27 सेकेंड में रेस पूरी करते हुये पहला स्थान हासिल किया. जापान की टीम ने 37.60 सेकेंड के साथ दूसरे स्थान पर रहकर रजत हासिल किया जो उनका ओलंपिक स्प्रिंट रिले में पहला पदक है. वहीं 37.64 सेकेंड के साथ कनाडा तीसरे स्थान पर रहा और ब्रोन्ज मेडल जीता.

धरती के सबसे तेज धावक बन चुके बोल्ट ने अपनी टीम के लिये एंकर लेग में दौड़ लगाई और लगातार तीसरी बार जमैका को 4×100 मीटर रिले दौड़ का स्वर्ण पदक भी दिला दिया. बोल्ट अब अपने नौ ओलंपिक स्वर्ण पदकों के साथ ओलंपिक इतिहास के ट्रैक एंड फील्ड के सबसे सफल एथलीटों की श्रेणी में भी शामिल हो गये हैं.

उन्होंने 20वीं सदी में लंबी दूरी के धावक पावो नूर्मी तथा अमेरिकी धावक ओर लांग जंपर कार्ल लुईस के नौ पदकों की भी बराबरी कर ली है.

गोल्ड के साथ अपने ओलंपिक कॅरियर को अलविदा कहने वाले बोल्ट ने कहा कि अब मैं कह सकता हूं कि मैं महान हूं. मैं बहुत राहत महसूस कर रहा हूं कि ऐसा हो गया. मैं बहुत खुश हूं और खुद पर गर्व महसूस कर रहा हूं. यह सच हो गया है. मेरे ऊपर बहुत दबाव था. मैं इस जीत को बड़ी उपलब्धि मानता हूं.

वहीं जापान के लिये रयोटो यामागाटा ने ओपनिंग लेग में दौड़ लगाई और टीम को रजत जीतने में मदद की जो जापान का ओलंपिक स्प्रिंट रिले में पहला पदक है. टीम ने इसी के साथ क्वालिफाइंग में कायम किये एशियाई रिकॉर्ड में भी सुधार किया वहीं कनाडा ने 37.64 सेकेंड का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाते हुए कांस्य पदक हासिल किया जो आंद्रे डी ग्रासे का रियो में तीसरा पदक है. उन्होंने 100 मीटर में ब्रोंज और 200 मीटर में सिल्वर मेडल जीता है.

लेकिन यह रेस अमेरिका के लिये दिल तोड़ने वाली रही जब ट्रेवोन ब्रामेले बहुत ही आक्रामकता के साथ आगे आये कि वह लगभग झुक ही गये और अमेरिकी टीम को लगा कि 37.62 सेकेंड के साथ वह कांस्य जीत गये हैं. लेकिन स्थिति तब खराब हो गई जब उन्हें त्रिनिदाद एंड टोबैगो के साथ अयोग्य करार दे दिया गया. टीवी पर तस्वीरों से साफ हुआ कि ब्रोमेल गलती से बोल्ट की लेन में आ गये हैं.

पूर्व विश्व रिकॉर्डधारी अमेरिकी धावक टाइसन गे ने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि हम इस मामले में अपील कर सकते हैं, लेकिन हमें अयोग्य करार दे दिया गया. लेकिन हम फिर भी अपील करने पर विचार कर रहे हैं.

रेस में जमैकन टीम में असाफा पावेल, योहान ब्लेक, निकले एश्मांडे ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया और दो बार के विश्व रिकॉर्डधारी के काफी करीब रहे. लेकिन बोल्ट ने आखिरी पांच मीटर में जापान के अस्का कैमब्रिज को पीछे छोड़ते हुए अपना काम पूरा किया.

बोल्ट को ओसाका में साल 2007 में हुई विश्व चैंपियनशिप में 200 मीटर रेस में हराने वाले एकमात्र खिलाड़ी टाइसन ने अपनी टीम के अयोग्य करार दिये जाने पर गहरी निराशा जताई लेकिन साथ ही बोल्ट की जमकर तारीफ भी की. उन्होंने कहा वह महान धावक हैं. उनके लिये बस यही कहा जा सकता है. वह जिस तरह के इंसान है उसे शब्दों में बयान ही नहीं किया जा सकता है. उन्होंने जो किया वह काबिलेतारीफ है.

मौडल बनेंगे पीएम नरेंद्र मोदी

अत्युल्य भारत अभियान के प्रचार से अभिनेता आमिर खान का चेहरा अब गायब हो रहा है. अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अत्युल्य भारत के प्रचार में प्रयोग किया जायेगा. इसके लिये प्रधानमंत्री मोदी को अत्युल्य भारत अभियान का ब्रांड एम्बेसडर जैसे नामों से नहीं जाना जायेगा. कब तक के लिये प्रधानमंत्री को इस अभियान से जोड़ा जा रहा है यह अभी तय नहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर अत्युल्य भारत अभियान की शूटिंग के लिये नई प्रचार सीरिज को तैयार जा रही है. इसकी जल्द शूटिंग की तैयारी की जा रही है. शूटिंग के बाद ही यह पता चल सकेगा कि अत्युल्य भारत अभियान के प्रचार में कैसा दिखेगा. वैसे भी केन्द्र सरकार के प्रचार सामाग्री में प्रधानमंत्री मोदी के फोटो का प्रयोग किया जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी अपनी पोशाक और स्टाइल के लिये पहले से ही काफी मशहूर रहे हैं. उनके सूट की चर्चा लोकसभा में हो चुकी है.

मीडिया के नये जमाने में पोशाक और स्टाइल का अपना महत्व होता है. ऐसे में नेताओं के पहनावे में काफी तेजी से बदलाव होने लगा है. केवल पहनावा ही नहीं पूरा स्टाइल बदल चुका है. प्रधानमंत्री मोदी खुद अपने स्टाइल की चर्चा करते रहते है. उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद जैकेट और हाफ बांह वाले लम्बे कुर्ते का प्रचलन बढ गया है. केवल नेता ही नही युवाओं ने भी तेजी से उसे पहनना शुरू कर दिया है. सरकार को इसी कारण से लगा होगा कि वह अत्युल्य भारत अभियान के प्रचार में प्रधानमंत्री मोदी की छवि का प्रयोग करे. जानकार लोग मानते हैं कि इससे प्रधानमंत्री मोदी को पूरे देश में पहुंचाना सरल हो जायेगा.

विरोधी कुछ भी कहें पर प्रधानमंत्री मोदी के नये लुक को देखने के लिये एडवरटाइजिंग बिजनेस से जुडे लोग बेसब्र हो रहे हैं. उनको यह देखना है कि मोदी का क्या रूप सामने आता है और क्या जनता उसको स्वीकार करती है. इसी वजह से पूरी रणनीति सामने नहीं रखी जा रही है. जानकार लोगों का कहना है कि अत्युल्य भारत अभियान की शूटिंग होने के बाद ही यह तय होगा कि प्रचार का स्वरूप क्या होगा? तब तक इस मसले पर कोई बोलने को तैयार नहीं है. यह तय है कि अगर सबकुछ अच्छा रहा तो जल्द ही प्रधानमंत्री मोदी अत्युल्य भारत अभियान के तहत भारत की कला, संस्कृति और मेहमानवाजी की तारीफ करते नजर आयेगे.           

मिट्टी नमी सूचक यंत्र जानिए सिंचाई का सही समय

कुछ सालों से देश पानी के संकट से जूझ रहा है, इस से फसलों की सिंचाई तो दूर, लोग पीने वाले पानी तक के लिए तड़प रहे हैं. ऐसे में हमें बूंदबूंद पानी की कीमत को हर हाल में समझना ही चाहिए. वैसे भी सब से ज्यादा पानी की खपत खेती में ही होती है, इसलिए खेती में हमें जरूरत के मुताबिक सही मात्रा में पानी का इस्तेमाल करना चाहिए.

गन्ना जैसी फसलों व घर के गमलों में सिंचाई की बहुत जरूरत पड़ती है. सभी तरह की फसलों में सिंचाई के लिए एक निश्चित समय होता है. कई बार किसान इस समय का सही अंदाजा नहीं लगा पाते हैं, जिस से पैदावार कम होने के साथ ही साथ ढेर सारा पानी बरबाद हो जाता है. इन्हीं सब परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए भारतीय अनुसंधान संस्थान के कोयंबटूर स्थित गन्ना प्रजनन संस्थान के वैज्ञानिकों ने खेत में मौजूद नमी के मुताबिक सिंचाई की जानकारी देने वाला एक मिट्टी नमी सूचक (स्वायल मौइस्चर इंडीकेटर) यंत्र बनाया है, जिसे एसएमआई के नाम से जाना जाता है.

इस यंत्र की खास बात है कि यह इलैक्ट्रानिक एलईडी लाइट के जरीए मिट्टी में मौजूद नमी के आधार पर सिंचाई करने की सूचना देता है. यह इस्तेमाल करने में बेहद आसान, मजबूत, कम कीमत वाला, कम रखरखाव व खेत में इस्तेमाल के लिए मुनासिब है. खास बात यह है कि यह यंत्र इस काम के लिए बाजार में मौजूद दूसरे यंत्रों से बेहद सस्ता और ज्यादा खूबियों वाला है.

क्या है अंदर की तकनीक : पौधों के लिए कितने पानी की जरूरत है, ताकि मिट्टी में सही नमी बनी रहे और पेड़ मुरझाए नहीं की गणना इस यंत्र से आसानी से की जा सकती है. मिट्टी की नमी के 2 बिंदु होते हैं. इस मिट्टी नमी सूचक यंत्र में मिट्टी के नमी स्तर को दर्शाने के लिए इन्हीं दोनों बिंदुओं को आधार बनाया गया है. इस के अलावा यह यंत्र मिट्टी की नमी जानने की खास जिप्सम ब्लाक तकनीक के अनुसार काम करता है.

इस यंत्र में धातुओं की बनी 2 सेंसर छड़ें होती हैं, जो मिट्टी में धंसाने व बटन को दबाने पर बिजली की सर्किट सुचालकता या रोधिता को समझती हैं व मिट्टी की नमी के स्तर को एलईडी के एक रंग के चमकने से जाहिर करती है. तमाम मिट्टियों के सही अनुमान के लिए 3 रंगों की एलईडी लाइट लगी रहती है.

कैसे काम करता है : एलईडी बल्बों के अलगअलग रंगों में चमकने से हम खेत में मौजूद नमी के आधार पर सिंचाई के बारे में जानकारी पाते हैं, जो इस प्रकार है :

लाल लाइट : यह सिंचाई की तुरंत जरूरत को दर्शाती है. दरअसल स्थायी मुरझान बिंदु से थोड़ा अधिक नमी स्तर लाल या संतरी एलईडी लाइट की चमक से प्रदर्शित होता है.

हरी लाइट : यह बताती है कि तुरंत सिंचाई की जरूर नहीं है. कुछ दिन इंतजार किया जा सकता है. दरअसल, स्थायी बिंदु से पर्याप्त ऊपर और क्षेत्र धारिता से कम मिट्टी नमी अवस्था, हरी लाइट की चमक से जाहिर होती है.

नीली लाइट : यह पर्याप्त या पर्याप्त से अधिक मिट्टी नमी को दर्शाती है. दरअसल, क्षेत्र धारिता पर मिट्टी की नमी की स्थिति नीली लाइट के जलने से पता चलती है.

फायदे ही फायदे : इस यंत्र को किसान अपने खेतों में पहले से मौजूद सिंचाई निर्धारण यंत्र टेंसियोमीटर की तुलना में रख चुके हैं. किसानों के अनुभव से पाया गया कि यह टेंसियोमीटर से कई मामलों में जैसे खेत के अलगअलग हिस्सों में मल्टीयूनिटों के स्थायी स्थापना, सिंचाई के तुरंत बाद संग्रह नलिका में पानी भर जाने, खालीपन, रिसाव की समस्या समेत दूसरी समस्याओं से पूरी तरह से छुटकारा दिलाता है. इस के अलावा यह टेंसियोमीटर से बहुत ही सस्ता है.

कहां से मिलेगा : पूरी जानकारी के लिए कोयंबटूर, तामिलनाडु को गन्ना प्रजनन संस्थान व उस से संबंधित करनाल, हरियाणा स्थित क्षेत्रीय गन्ना प्रजनन केंद्र से सीधे फोन पर या पत्राचार द्वारा संपर्क किया जा सकता है.

पता और फोन नंबर

* डा. बक्शी राम, निदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, गन्ना प्रजनन संस्थान कोयंबटूर, तामिलनाडु- 641007

फोन : 0422-2472986

* डा. कुलश्रेष्ठ, विभागाध्यक्ष, क्षेत्रीय गन्ना प्रजनन केंद्र, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, करनाल, हरियाणा

फोन : 0184- 226556, 2268096

संस्थान ने 3 निजी फर्मों को भी इस के निर्माण और बिक्री के लिए लाइसेंस दिया है. संस्थान के निदेशक डा. बक्शी राम के दावों के मुताबिक इन में से एक फर्म ने इस के निर्माण और बिक्री का काम तेजी से शुरू कर दिया है. जिस का पता और फोन नंबर इस प्रकार है:

टेक सोर्स सोल्यूसंस, 163, राजेश्वरी कांप्लेक्स, द्वितीय तल, कर्नाटका बैंक के ऊपर, आरवी रोड, निकट मिनर्वा सर्किल बेंगलूरू-560004. मो.: 9035067427,

अब टैटू से करें स्मार्टफोन कंट्रोल

माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च और एमआईटी मीडिया लैब ने साथ मिल कर डुओ स्किन तैयार किया है जिससे किसी के शरीर पर एक टैटू जैसे आकार के बन जाने पर वो अपने साथ रखे किसी भी डिवाइस को कंट्रोल कर सकता है. बस ये टैटू अपने शरीर पर बना लीजिये और उसके बाद पास के डिवाइस पर अपनी उंगलियों को फेरना बिलकुल आसान है.

ये टैटू जिस मटेरियल का बना होता है, वो इतना पतला होता है कि अगर आपके हाथ पर उसे कोई लगा दे तो शायद पता भी नहीं चलेगा. फिलहाल, शुरुआती दौर में इसे स्मार्टफोन  और लैपटॉप से कनेक्ट कर सफल परीक्षण किया जा चुका है. लेकिन आम लोगों तक पहुंचने में थोड़ा समय लगेगा क्योंकि कंपनियों को ऐसी कनेक्टिविटी के लिए अपना डिवाइस भी तैयार रखना होगा.

माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च और एमआईटी मीडिया लैब के इस प्रोजेक्ट ने ये दिखा दिया है कि इन टैटू से तीन तरह के कंट्रोल अब बनाये जा सकते हैं. पहले तरह का कंट्रोल ऐसा हो जो किसी भी डिवाइस के लिए इनपुट कंट्रोल कर सकता है, जैसे बज रहे म्यूजिक की आवाज बढ़ाना या कम करना.

दूसरी तरह के टैटू आपके शरीर पर लगने के बाद अपना रंग बदल सकते हैं. अगर आप खुश हैं तो ये रंग बदल सकता है या फिर अगर आपने एक फूल का टैटू लगाया है तो वो रंग भी बदल सकता है.

नियर फील्ड टेक्नोलॉजी या एनएफसी जैसे टैग को भी इन टैटू की तरह लगाया जा सकता है. इसके कोई भी डिवाइस आपके इस टैटू में छुपी जानकारी को पढ़ भी सकता है. बस अपने स्मार्टफोन  के कैमरे को उसके ऊपर रखिये और आपका काम हो जाएगा.

ये सभी टैटू को कुछ ऐसा बनाने की कोशिश हो रही है जिससे कि बहुत आसानी से कोई भी इसे घर में बना सके. एमआईटी मीडिया लैब का कहना है कि ये फैशन के रूप में भी इस्तेमाल हो सकता है. जब आप किसी शाम दोस्तों के साथ बाहर जा रहे हैं तो ऐसा भी हो सकता है कि इस टैटू को आप बाजार में लगवा लें और बस इसे अपने स्मार्टफोन  से कनेक्ट कर लीजिये.

खूबियों का खजाना है हलदी

पीले रंग की हलदी अपनेआप में किसी अजूबे से कम नहीं होती है. इस में छिपे गुण बेहद असरदार साबित होते हैं. तमाम तरह की तकलीफों के देशी इलाज में हलदी का बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. इन्हीं वजहों से हलदी को खासीयतों की खान माना जाता है. हलदी महज एक मसाला ही नहीं है, बल्कि कई लिहाज से यह खासीयतों का खजाना है. चटक पीले रंग की हलदी का वजूद किसी आयुर्वेदिक दवा से कम नहीं है. यह हर उम्र के लोगों के लिए कारगर साबित होती है.

हलदी खासतौर पर शरीर में कफ बनने से होने वाले रोगों को दूर करती है. यह कुदरती एंटीबायोटिक और एंटीएलर्जिक होती है, इसी वजह से बदन में चोट लगने, फोड़ेफुंसी होने या कीड़ेमकोड़े के काटने पर इस का लेप किया जाता है. हलदी के लेप से काफी फायदा होता है और दर्द भी दूर होता है. यदि किसी वजह से खून जम गया हो, तो वह हलदी के असर से फैल जाता है. हलदी का इस्तेमाल सिर के दर्द, मांसपेशियों के दर्द व जोड़ों के दर्द में  भी किया जाता है. शरीर में मोच आने पर भी हलदी के लेप से राहत मिलती है. दर्द, खांसीजुकाम व सूजन वगैरह होने पर कुनकुने दूध में हलदी मिला कर पीने से काफी फायदा होता है. चोट लगने पर भी हलदी वाला दूध राहत देता है. हलदी शरीर की ऊर्जा बढ़ाती है, जिस से शरीर को रोगों का डट कर मुकाबला करने की ताकत मिलती है. हलदी पाचन क्रिया को बेहतर बनाती है और कोलेस्ट्राल की मात्रा घटाती है. यह शरीर में खून का संचार भी बढ़ाती है. इस के इस्तेमाल से दिमाग व तंत्रिकातंत्र से जुड़े तमाम रोगों को ठीक किया जा सकता है. हलदी में पाया जाने वाला सरक्यूमिन बदहजमी (डिस्पेप्सिया)  के मरीजों को राहत पहुंचाता है. यह पित्तनाशक होती है. इस से खून और त्वचा की तमाम तकलीफों में काफी फायदा पहुंचता है.

अब तो हलदी से कैंसर जैसी बीमारी की दवाएं भी बनने लगी हैं. इस से खून की कमी भी दूर होती है. इस के अलावा यह शरीर की हड्डियों को भी मजबूत करती है. इस के इस्तेमाल से आस्टियोपोरोसिस (हड्डियों की बीमारी) होने का खतरा कम हो जाता है. आधे गिलास दूध में आधा चम्मच हलदी का पाउडर डाल कर उबालने के बाद ठंडा कर के पीने से शरीर की तमाम तकलीफों से राहत मिलती है. अगर मसूढ़ों में दर्द या कोई और तकलीफ हो तो आधा चम्मच हलदी के पाउडर में चुटकीभर नमक व थोड़ा सा सरसों का तेल मिला कर सोने से पहले मसूढ़ों पर मलें और निकलने वाली लार को थूकते रहें. आधा घंटे बाद कुनकुने पानी से कुल्ला करें. ऐसा नियमित रूप से करने से मसूढ़ों और दांतों को काफी फायदा होता है. अगर दांत हिल रहे हों, तो थोड़े से हलदी के पाउडर में बराबर मात्रा में खाने वाला सोडा मिला कर उस से रोजाना 2 बार मंजन करने से बहुत आराम मिलता है. कुछ ही दिनों में दांत काफी मजबूत हो जाते हैं.

अगर शरीर को सर्दी बरदाश्त न होती हो या एलर्जी हो, तो 250 ग्राम हलदी के पाउडर को 4 चम्मच देशी घी के साथ तवे पर भून लें. इस मिश्रण की थोड़ी सी मात्रा को 1 चम्मच शहद के साथ 5 महीने तक लगातार रोजाना 2 बार खाएं. ऐसा करने से एलर्जी, जुकामखांसी व सांस के रोगों में बहुत आराम मिलता है.

अगर दमे की तकलीफ हो, तो 2 चम्मच हलदी के पाउडर को आधा चम्मच देशी घी के साथ तवे पर डाल कर धुआं निकलने तक भूनें और इस धुएं को नाक से खींचें. ऐसा करने से दमे के दौरे में आराम पहुंचेगा और बलगम भी बाहर निकलेगा. अलबत्ता नाक से धुआं खींचते वक्त इस बात का पूरा खयाल रखें कि नाक गरम तवे से छुलने न पाए, वरना बिलावजह दूसरी  तकलीफ पैदा हो जाएगी.

शरीर में कहीं भी दर्द हो, तो 1 चम्मच हलदी के पाउडर में 1 चम्मच अदरक का रस मिला कर गरम करें और दर्द वाली जगह पर दिन में 2 दफे लेप करें. लेप करने के 1 घंटे बाद दर्द वाली जगह की सिंकाई करें. इस इलाज से दर्द में बहुत राहत मिलती है.

अगर बुखार की वजह से बदन में दर्द हो, तो 1 चम्मच हलदी के पाउडर को 1 गिलास कुनकुने दूध के साथ फांक लें. इस से काफी जल्दी राहत मिलती है. बदन में अंदरूनी चोट लगने पर 2 गिलास पानी में 1 चम्मच हलदी का पाउडर व 1 चम्मच नमक डाल कर उबालें. जब पानी सेंकने लायक ठंडा हो जाए तो उस में साफ कपड़ा भिगो कर चोट वाली जगह की सिंकाई करें. ऐसा करने से काफी आराम मिलेगा. अगर बदन में कहीं मोच आ गई हो, तो 1 चम्मच हलदी के पाउडर में 1 चम्मच शहद व आधा चम्मच चूना मिलाएं और इस मिश्रण का मोटा लेप मोच वाली जगह पर करें और ऊपर से हलकी सी रुई की परत बिछा दें. लेप करने के साथसाथ 1 गिलास दूध में 1 चम्मच हलदी का पाउडर मिला कर 3 दिनों तक रोजाना 2 बार पिएं. इस इलाज से मोच के दर्द व सूजन में बहुत आराम मिलेगा. शहद न होने पर सिर्फ हलदीचूना का लेप भी काफी असरदार साबित होता है. इस के अलावा सरसों के तेल में हलदी का पाउडर मिला कर मोच वाली जगह पर हलके हाथों से मलने पर भी काफी आराम मिलता है.

अगर खांसी की वजह से गले व सीने में तकलीफ हो रही हो, तो पानी में थोड़ा सा हलदी का पाउडर व नमक मिला कर उबाल लें और घूंटघूंट कर के पीएं. इस से बहुत आराम मिलेगा. यदि जुकाम की वजह से गले में दर्द हो या टांसिल की तकलीफ हो, तो हलदी का पाउडर व नमक डाल कर उबाले हुए पानी से गरारा करें. ऐसा करने से काफी राहत मिलेगी और टांसिल भी जल्दी ठीक हो जाएंगे.

गले के बाहर जहां टांसिल की सूजन हो, वहां पर हलदी के पाउडर को पानी में मिला कर लेप करें. इस के अलावा आधा चम्मच शहद में 1 चौथाई भाग हलदी का पाउडर मिला कर दिन में 3 बार चाटें, इस से कफ, सर्दी व गले की तकलीफ में आराम मिलेगा. जुकाम के साथ खांसी होने पर 1 कप गरम दूध या पानी में 1 चम्मच हलदी का पाउडर उबाल कर पीएं. इस से जुकाम, खांसी व गले की खराश में बहुत फायदा होगा. जुकाम के इलाज में हलदी कई तरह से कारगर साबित होती है. आधा चम्मच हलदी के पाउडर में 5 कालीमिर्च पीस कर मिलाएं और उसे गरम दूध या गरम पानी में घोल कर पिएं, इस से जुकाम जल्दी ठीक हो जाता है. इस इलाज में यह ध्यान रखना जरूरी है कि काली मिर्च व हलदी का घोल पीने के बाद 1 घंटे तक पानी नहीं पीना है. सर्दी की वजह से जुकाम होने पर 1 चम्मच हलदी का पाउडर 1 कप गरम दूध में उबाल कर पिएं. इस में स्वाद के लिए थोड़ा गुड़ या चीनी मिला सकते हैं. इसे लगातार 4 दिनों तक पीने से जुकाम से जल्दी छुटकारा मिल जाएगा. हलदी का पाउडर व सोंठ का पाउडर बराबर मात्रा में मिला कर एक डब्बे में रख लें. इस मिश्रण की 1 चम्मच मात्रा को कुनकुने दूध या पानी के साथ फांकने से भी जुकाम ठीक हो जाता है.

गरमी के मौसम में धूप में चलने के बाद अंदर आते ही ठंडा पानी पीने से बदन की सर्दी और गरमी का संतुलन बिगड़ जाता है, नतीजतन जुकाम हो जाता है और गला खराब हो जाता है. इसी तरह  पसीनापसीना हो कर अंदर आने के तुरंत बाद ठंडा पानी पीने या नहाने से भी जुकाम व बुखार हो जाता है.

ऐसी हालत में 2 चम्मच हलदी के पाउडर व 2 चम्मच अजवायन को 2 कप पानी में डाल कर उबालें. यह मिश्रण खौल कर आधा हो जाने के बाद उस में स्वाद के मुताबिक थोड़ा सा गुड़ मिलाएं और आंच से उतार कर ठंडा करें. जब यह पीने लायक गरम रहे तब इसे छान कर पीएं. यह पेय रोजाना सुबहशाम पीने से जुकामबुखार ठीक हो जाएगा. वैज्ञानिकों द्वारा की गई खोजों से पता चला है कि हलदी दिल की तकलीफों को भी ठीक करती है, इसीलिए इसे बेहद कारगर माना जाता है. अगर शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो, तो आधा चम्मच हलदी के पाउडर को कुनकुने दूध के साथ दिन में 2 दफे फांकें. लगातार इस खुराक को लेने से हीमोग्लोबिन में काफी इजाफा होता है. शरीर में कहीं पर भी दाग, खुजली या कोई चर्म रोग हो तो 1 चम्मच हलदी के पाउडर में आधा चम्मच पीसी हुई मिश्री मिला कर सुबहशाम पानी के साथ फांकें. इस के अलावा 1 चम्मच नारियल के तेल में चौथाई चम्मच हलदी का पाउडर मिला कर रोगी की त्वचा पर लगाएं. इस से चर्म रोग में बहुत आराम मिलेगा.

इसी तरह कीलमुहांसे या फोड़ेफुंसी होने पर शुरुआत में ही हलदी का पाउडर व लौंग पीस कर बनाया गया मिश्रण लगाने से काफी फायदा होता है. आमतौर पर साबुत सूखी हलदी को सिलबट्टे से पीस कर बतौर मसाला इस्तेमाल किया जाता है या बाजार से तैयार हलदी पाउडर खरीद कर इस्तेमाल किया जाता है. इसी तरह कच्ची हलदी को भी अलग तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है. इस के लिए कच्ची हलदी को धो कर कद्दूकस कर लें व थाली या ट्रे में रख कर धूप में सुखाएं. अच्छी तरह सूखने के बाद इसे एयरटाइट डब्बे में रखें. इसे सब्जी या दूध में इसी रूप में या मिक्सी से पीस कर इस्तेमाल कर सकते हैं.

आजकल आरगैनिक हलदी की मांग

बढ़ गई है. ऐसी हलदी को बगैर किसी फर्टीलाइजर, रसायन, इंसेक्टीसाइड व पेस्टीसाइड के इस्तेमाल के उगाया जाता है. ऐसी हलदी और भी ज्यादा कारगर व फायदेमंद साबित होती है.

मिर्च की उन्नत खेती

हमारे यहां मिर्च एक नकदी फसल है. इस की व्यावसायिक खेती कर के ज्यादा लाभ कमाया जा सकता?है. यह हमारे खाने में इस्तेमाल होती है. मिर्च में विटामिन ए और सी पाए जाते हैं और कुछ लवण भी होते हैं. मिर्च का इस्तेमाल अचार, मसालों और सब्जी में भी किया जाता है. मिर्च पर पाले का असर ज्यादा होता है, इसलिए जहां पाला ज्यादा पड़ता?है उन इलाकों में इस की अगेती फसल लेनी चाहिए. ज्यादा गरमी होने पर फूलों व फलों का झड़ना शुरू हो जाता है. मिर्च की खेती के लिए मिट्टी का पीएच मान 6 से 7.5 के बीच होना अच्छा माना जाता?है. अच्छी फसल के लिए उपजाऊ दोमट मिट्टी जिस में पानी का अच्छा निकास हो अच्छी मानी जाती है.

उन्नत किस्में

चरपरी मसाले वाली : एनपी 46 ए, पूसा ज्वाला, मथानिया लोंग, पंत सी 1, जी 3, जी 5, हंगेरियन वैक्स (पीले रंग वाली), पूसा सदाबहार, पंत सी 2, जवाहर 218, आरसीएच 1, एक्स 235, एलएसी 206, बीकेए 2, एससीए 235. शिमला मिर्च (सब्जी वाली) : यलो वंडर, केलीफोर्निया वंडर, बुलनोज व अर्का मोहिनी.

नर्सरी तैयार करना : सब से पहले नर्सरी में बीजों की बोआई कर के पौध तैयार की जाती?है. खरीफ की फसल के लिए मई से जून में व गरमी की फसल के लिए फरवरी से मार्च में नर्सरी में बीजों की बोआई करें. 1 हेक्टेयर में पौध तैयार करने के लिए 1 से डेढ़ किलोग्राम बीज और संकर बीज 250 ग्राम प्रति हेक्टेयर काफी रहता है. नर्सरी वाली जगह की गहरी जुताई कर के खरपतवार रहित बना कर 1 मीटर चौड़ी, 3 मीटर लंबी और 10 से 15 सेंटीमीटर जमीन से उठी हुई क्यारियां तैयार कर लें. बीजों को बोआई से पहले केप्टान या बाविस्टिन की 2 ग्राम मात्रा से प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें. पौधशाला में कीड़ों की रोकथाम के लिए 3 ग्राम फोरेट 10 फीसदी कण या 8 ग्राम कार्बोफ्यूरान 3 फीसदी कण प्रति वर्गमीटर के हिसाब से जमीन मिलाएं या मिथाइल डिमेटोन 0.025 फीसदी या एसीफेट 0.02 फीसदी का पौधों पर छिड़काव करें. बीजों की बोआई कतारों में करनी चाहिए. नर्सरी में विषाणु रोगों से बचाव के लिए मिर्च की पौध को सफेद नाइलोन नेट से ढक कर रखें.

रोपाई : नर्सरी में बोआई के 4 से 5 हफ्ते बाद पौधे रोपने लायक हो जाते हैं. तब पौधों की रोपाई खेत में करें. गरमी की फसल में कतार से कतार की दूरी 60 सेंटीमीटर व पौधे से पौधे की दूरी 30 से 45 सेंटीमीटर रखें. खरीफ की फसल के लिए कतार से कतार की दूरी 45 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 30 से 45 सेंटीमीटर रखें. रोपाई शाम के समय करें और रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई कर दें. पौधों को 40 ग्राम एजोस्पाइरिलम 2 लीटर पानी के घोल में 15 मिनट डुबो कर रोपाई करें.

खाद व उर्वरक : खेत की अंतिम जुताई से पहले प्रति हेक्टेयर करीब 150 से 250 क्विंटल अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद खेत में डाल कर अच्छी तरह मिला दें. इस के अलावा मिर्च का अच्छा उत्पादन लेने के लिए 70 किलोग्राम नाइट्रोजन, 48 किलोग्राम फास्फोरस व 50 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की जरूरत होती है. नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपाई से पहले जमीन की तैयारी के समय व बची मात्रा आधीआधी कर के 30 व 45 दिनों बाद खेत में छिड़क कर तुरंत सिंचाई कर दें.

सिंचाई व निराईगुड़ाई : गरमी में 5 से 7 दिनों के अंतर पर और बरसात में जरूरत के हिसाब से सिंचाई करें. खरपतवार की रोकथाम के लिए समयसमय पर निराईगुड़ाई करनी चाहिए. खरपतवार नियंत्रण के लिए 200 ग्राम आक्सीफ्लूरोफेन प्रति हेक्टेयर का पौधों की रोपाई के?ठीक पहले छिड़काव (600 से 700 लीटर पानी में घोल कर) करें.

कीड़े व रोग

सफेद लट : इस कीट की लटें पौधों की जड़ों को खा कर नुकसान पहुंचाती?हैं. इस पर काबू पाने के लिए फोरेट 10 जी या कार्बोफ्यूरान 3 जी 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से रोपाई से पहले जमीन में मिला देना चाहिए. सफेद मक्खी, पर्णजीवी (थ्रिप्स), हरा तेला व मोयला : ये कीट पौधों की पत्तियों व कोमल शाखाओं का रस चूस कर उन्हें कमजोर कर देते हैं. इन के असर से उत्पादन घट जाता?है. इन पर काबू पाने के लिए मैलाथियान 50 ईसी या मिथाइल डिमेटोन 25 ईसी 1 मिलीलीटर या इमिडाक्लोरोपिड 0.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़ाकव करें. 15-20 दिनों बाद दोबारा छिड़ाकव करें.

मूल ग्रंथि सूत्रकृमि : इस के असर से पौधों की जड़ों में गांठें बन जाती?हैं और पौधे पीले पड़ जाते हैं. पौधों की बढ़वार रुक जाती?है, जिस से पैदावार में कमी आ जाती है. इस की रोकथाम के लिए रोपाई के स्थान पर 25 किलोग्राम कार्बोफ्यूरान 3 जी प्रति हेक्टेयर की दर से जमीन में मिलाएं.

आर्द्र गलन : इस रोग का असर पौधे जब छोटे होते हैं, तब होता है. इस के असर से जमीन की सतह पर स्थित तने का भाग काला पड़ कर कमजोर हो जाता?है व नन्हे पौधे गिर कर मरने लगते हैं. रोकथाम के लिए बीजों को बोआई से पहले थाइरम या केप्टान 3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें. नर्सरी में बोआई से पहले थाइरम या केप्टान 4 से 5 ग्राम प्रति वर्गमीटर की दर से जमीन में मिलाएं. नर्सरी आसपास की जमीन से 4 से 6 इंच उठी हुई जमीन में बनाएं.

श्याम ब्रण : इस रोग से पत्तियों पर छोटेछोटे काले धब्बे बन जाते हैं और पत्तियां झड़ने लगती?हैं. जब इस का असर ज्यादा होता है, तो शाखाएं ऊपर से नीचे की तरफ सूखने लगती हैं. पके फलों पर भी बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं. रोकथाम के लिए जाइनेब या मेंकोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल कर 2 से 3 बार छिड़काव 15 दिनों के अंतराल पर करें.

पर्णकुंचन व मोजेक विषाणु रोग : पर्णकुंचन रोग के असर से पत्ते सिकुड़ कर छोटे रह जाते हैं व उन पर झुर्रियां पड़ जाती?हैं. मोजेक विषाणु रोग के कारण पत्तियों पर गहरे व हलका पीलापन लिए हुए धब्बे बन जाते हैं. रोगों को फैलाने में कीट सहायक होते?हैं. रोकथाम के लिए रोग लगे पौधों को उखाड़ कर जला देना चाहिए. रोग को आगे फैलने से रोकने के लिए डाइमिथोएट 30 ईसी 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें.

नर्सरी तैयार करते समय बोआई से पहले कार्बोफ्यूरान 3 जी 8 से 10 ग्राम प्रति वर्गमीटर के हिसाब से जमीन में मिलाएं. रोपाई के समय निरोगी पौधे काम में लें. रोपाई के 10 से 12 दिनों बाद मिथाइल डिमेटोन 25 ईसी 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें. छिड़काव 15 से 20 दिनों के अंतर पर जरूरत के हिसाब से दोहराएं. फूल आने पर मैलाथियान 50 ईसी 1 मिलीलीटर प्रति लीटर के हिसाब से छिड़कें.

तना गलन : गरमी में पैदा होने वाली मिर्च में तना गलन को रोकने के लिए टोपसिन एम 0.2 फीसदी से बीजोपचार कर के बोआई करें.

तोड़ाई व उपज : हरी मिर्च के लिए तोड़ाई फल लगने के 15 से 20 दिनों बाद कर सकते हैं. पहली तोड़ाई से दूसरी तोड़ाई का अंतर 12 से 15 दिनों का रखते?हैं. फलों की तोड़ाई उस के अच्छी तरह से तैयार होने पर ही करनी चाहिए. हरी चरपरी मिर्च तकरीबन 150 से 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और 15 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर सूखी लाल मिर्च प्राप्त की जा सकती है.

मिर्ची से माणक हुआ मालामाल

माणक लाल सिरोही जिले के उथमन गांव के रहने वाले सीमांत किसान हैं. माणक के पास मात्र 10 से 12 बीघे जमीन होने के कारण ज्यादा आमदनी नहीं हो पाती थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से माणक मिर्च की उन्नत खेती कर के काफी फायदा कमा रहे हैं. माणक आज एक संपन्न किसान बन चुके हैं. माणक मिर्ची उत्पादन की उन्नत तकनीक के साथसाथ 1 हेक्टेयर मिर्च की बोआई को 4 भागों में बांट कर 15-15 दिनों के अंतर पर 4 बार रोपाई करते हैं, जिस से लंबे समय तक फलों की तोड़ाई चलती?है और अच्छा बाजार भाव मिलता है. आज माणक 1 बीघा जमीन में तकरीबन 20 हजार रुपए का खर्च कर के 1.0-1.25 लाख रुपए की मिर्च बेच देते हैं. परिवार के सभी सदस्यों को रोजगार भी मिल रहा?है. साथ में अच्छी आमदनी भी हो रही?है और माणक के घर के सभी लोग काफी खुशहाल जिंदगी गुजार रहे?हैं. माणक के परिवार की औरतें तोड़ाई करती हैं, तो माणक मिर्च को आसपास के बाजार में बेचने के लिए ले जाते?हैं. मिर्च उत्पादन की सभी बातों की अच्छी जानकारी होने की वजह से गांव के दूसरे किसान भी उन से सलाह लेते?हैं.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें