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क्रिकेटरों के बोर्ड से जुड़ने में ‘कूलिंग ऑफ’ सबसे बड़ा रोड़ा

भारतीय टीम के पूर्व निदेशक रवि शास्त्री ने लोढ़ा समिति द्वारा प्रस्तावित तीन साल के 'कूलिंग ऑफ' (दो बार पद पर आसीन होने के लिए तीन साल का अंतर) के बारे में अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे पूर्व क्रिकेटर बीसीसीआई प्रशासन में जुड़ने से बचेंगे.

शास्त्री को लगता है कि एक प्रशासक को कम से कम छह साल तक काम करने का समय मिलना चाहिए और स्पष्ट किया कि भारत जैसे बड़े देश को 'पांच चयनकर्ताओं' की जरूरत है, न कि तीन की, जिसकी उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित लोढ़ा पैनल द्वारा सिफारिश की गई है.

शास्त्री ने कहा, "मुझे लगता है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत की जरूरत है. इस संबंध में प्रयास किये जाने चाहिए और इसे एक दूसरे के खिलाफ द्वंद्व नहीं बनाना चाहिए."

शास्त्री ने स्पष्ट किया कि अगर इस तरह का नियम जैसे 'दो बार पद पर आसीन होने के लिए तीन साल का अंतर' शामिल कर दिया गया तो कोई भी पूर्व क्रिकेटर बीसीसीआई प्रशासन पद से नहीं जुड़ेगा.

उन्होंने पूछते हुए कहा, "मैं बीसीसीआई से क्यों जुडूंगा, अगर यह तीन साल तक बाहर रहने का नियम होगा? कोई भी तीन साल में क्या कर पायेगा? अगर मेरा पास कोई रचनात्मक विचार है जो मैं कर सकता हूं तो आपको कैसे पता कि जो उस पद पर मेरे बाद आएगा, वह उसे करने के लिए इतना योग्य होगा? "

उन्होंने कहा, "अगर मैंने कोई बेहतरीन काम किया है तो इसके लिए मेरा सम्मान किया जाना चाहिए. अगर मुझे छह साल का कार्यकाल मिलता है तो इसमें कोई नुकसान नहीं. यहां तक कि भारत के राष्ट्रपति उम्मीदवार को पांच साल दिए जाते हैं.”

यात्रा से जुड़ी उलझनों को सुलझाएगा ‘गूगल ट्रिप्स’

नए शहर में घूमने जाने से पहले कई तरह के सवाल आपके इर्द-गिर्द घूमते हैं. मिसाल के तौर पर किस जगह रुकेंगे और उसके आस-पास घूमने के लिए क्या है और उस होटल के पास किराए पर बाइक या कार मिलेंगी या नहीं. इस तरह के सवालों का हल निकालने के लिए मुफ्त एप्लीकेशन का प्रयोग कर सकते हैं.

गूगल ट्रिप्स: यह एप नई जगह पर आपका पर्सनल गाइड बनकर रहता है और जरूरी बातों की जानकारी फोन से पहुंचाता है. यह एप यूजर की लोकेशन के पास मौजूद पर्यटन स्थल की भी जानकारी देता है. Google Trips नाम वाला यह एप गूगल प्ले स्टोर और आईट्यूंस दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है.

यह एप जीमेल पर आने वाले टिकट से यात्रा संबंधी जानकारी जुटाता है. इसे डाउनलोड करने के बाद जीमेल पर टिकट आते ही उपभोक्ता को उस लोकेशन से संबंधित जानकारी मिलने लगती है.

इसका दूसरा खास फीचर यह है कि इसमें हवाई जहाज के किराए और ट्रेन रिजर्वेशन से संबंधित सूचनाएं भी सर्च की जा सकती हैं. इसे ऑफलाइन भी प्रयोग किया जा सकता है मगर उस मोड में कुछ फीचर कम हो जाते हैं.

इस एप्लीकेशन को गूगल प्ले स्टोर पर 4.3 रेटिंग दी गई है. इस एप में स्थानीय परिवहन की भी जानकारी देने का फीचर है. साथ ही गूगल मैप से रास्ता दिखाने का विकल्प भी है.

कीमत की तुलना करता है स्काईस्कैनर

किसी नई जगह घूमने की सोच रहे हैं मगर वहां जाने के लिए हवाई जहाज का किराया और होटल में मिलने वाले कमरों के किराए का अनुमान नहीं है तो उन लोगों के लिए Skyscanner Flights, Hotel, Car एप एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है.

यह एप वेबसाइट ‘माईस्मार्ट प्राइज’ की तरह की तरह कीमतों की तुलना करके बताता है. साथ ही इसमें प्राइस अलर्ट भी सेट किया जा सकता है. उदाहरण के तौर पर दिल्ली से गोवा जाने के लिए हवाई जहाज का टिकट देख रहे हैं मगर सस्ते टिकट का इंतजार हैं तो इस स्काइस्कैनर एप में अलर्ट सेट कर सकते हैं. ऐसा करने से जैसे ही कीमतों में बदलाव होगा तो यह एप उसी समय नोटिफिकेशन से अलर्ट भेज देगा.

मौसम की जानकारी देगा एप

फोन में मौजूद जीपीएस से यूजर की लोकेशन पर नजर रखने वाला ‘डार्क स्पाई’ एप मौसम में होने वाले बदलावों के जानकारी 15 मिनट पहले ही अलर्ट कर देता है. यह यूजर के फोन पर नोटिफिकेशन भेजकर बताता है कि बारिश कब शुरू होगी और इसके कब तक जारी रहने का अनुमान है. इस एप पर यूजर किसी खास लोकेशन का नाम डालकर वहां के मौसम की जानकारी भी हासिल कर सकते हैं. यह आंधी-तूफान की आशंका के प्रति भी आगाह करता है.

‘मेगा शो’ में बदल गई राहुल कि ‘किसान यात्रा’

देवरिया से दिल्ली तक राहुल कि किसान यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ी वह एक मेगा शो में बदलती दिखी. इसमें किसान तो पीछे छूट गये मंदिर, मंस्जिद, गुरूद्वारा और चर्च की परिक्रमा ही दिखने लगी. यह किसी सामान्य राजनीतिक यात्रा सी होकर रह गई है. राहुल गांधी वैसे तो ‘देवरिया से दिल्ली’ तक ‘किसान यात्रा’ निकाल रहे थे पर इसमें वह किसानों के अलावा धार्मिक पांखड करते भी नजर आये.

किसान यात्रा बेहद गंभीर और सामयिक विषय था. देश में किसान बड़ी परेशानियों से गुजर रहे हैं. ऐसे में राहुल गांधी से उम्मीद थी कि वह कुछ नई बहस शुरू कर सकेंगे. राहुल गांधी कि किसान यात्रा में कुछ अलग नहीं दिखा. सामान्य नेता की तरह वह किसानों के कर्ज माफ करने की बात ही करते नजर आये. राहुल गांधी को पता ही नहीं है कि अब कर्ज माफ करने का ट्रम्प कार्ड से किसानों को रिझाया नहीं जा सकता.

ऐसे किसानों की संख्या बहुत अधिक है जिन्हें कर्ज मिलता ही नहीं है. कांग्रेस संगठन की कमजोरी और नेताओं में मुखरता के अभाव में किसान यात्रा पर खाट पंचायत भारी पड़ी. राहुल गांधी के भाषण से ज्यादा चर्चा गांव वालों के खाट ले जाने की हुई. राहुल गांधी ने अपनी किसान यात्रा में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजपार्टी की आलोचना कम की इससे यह साफ जाहिर होता है कि वह चुनाव के बाद के समीकरण देखकर चल रहे हैं.

असल में राहुल की किसान यात्रा आगे चल कर एक मेगा शो में तब्दील हो गई. इसमें उन्होंने केवल किसानों की ही बात नहीं की पर वह बाकी मुद्दों पर भी बात करते नजर आए. धार्मिक एजेंडें को लेकर चलते हुए उन्होंने मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारा और चर्च जाकर माथा टेका. पाकिस्तान के साथ भारत के बिगड़ते रिश्तों के बीच मुस्लिम वर्ग में कांग्रेस के प्रति एक झुकाव दिख रहा है. इसको देखते हुए राहुल लखनऊ में मुसलिम बिरादारी के बड़े लोगों से भी मिले.

कांग्रेस की छवि हिंदू विरोधी न दिखे इसलिये वह मंदिर भी गये. अयोध्या से यात्रा की शुरूआत और वहां पूजापाठ करते नजर आये. लखनऊ में वह दलित जातियों के लिये रविदास मंदिर गये. देवरिया से शुरू हुई किसान यात्रा जैसे जैसे आगे बढ़ी वोट के लिये राहुल को शहरों में लाया जाने लगा, जहां किसान नहीं रहते. उनकी किसान यात्रा में और दूसरी राजनीतिक यात्राओं में फर्क खत्म हो गया. यह सच है कि राहुल की यात्रा में लोगों की भीड़ दिख रही थी. ऊंची जाति के ब्राहमणों के अलावा मुस्लिम एक बार फिर से कांग्रेस की ओर उम्मीद से देख रहे हैं. दलितों में भी कांग्रेस के प्रति मोह बढ़ता दिख रहा है. अब देखने वाली बात यह है कि कांग्रेस इस झुकाव को वोट में कैसे बदलती है. भीड़ को वोट में बदलने के लिये कांग्रेस को युवा मेहनती नेताओं को आगे लाना पड़ेगा. जब तक कांग्रेस यह होमवर्क नहीं करती भीड़ को वोट में नहीं बदला जा सकेगा.

सैयामी खेर व हर्षवर्धन की केमिस्ट्री का राज

बॉलीवुड में राकेश ओम प्रकाश मेहरा की प्रेम कहानी प्रधान फिल्म ‘मिर्जिया’ से दो नवोदित कलाकार सैयामी खेर व हर्षवर्धन कपूर अभिनय जगत में कदम रख रहे हैं.

इस फिल्म के कुछ किसिंग सीन काफी चर्चा में हैं. कहा जा रहा है कि इन दोनों नवोदित कलाकारों ने सिनेमा के परदे पर बिना किसी झिझक के शानदार किसिंग सीन दिए हैं. इन दोनो कलाकारों ने जितनी शिद्दत से अति संजीदा प्रेम या चुंबन दृष्यों को अंजाम दिया है, उससे यही आभास होता है कि दोनों काफी मंजे हुए कलाकार हैं. अन्यथा एक दूसरे से अनजान दो नए कलाकारों से पहली फिल्म में इस तरह के दृष्यों की उम्मीद कम ही की जाती है.

बॉलीवुड में जितनी चर्चा फिल्म के किसिंग सीन की हो रही है, उतनी ही चर्चा इन दोनों कलाकारों के बीच की केमिस्ट्री और इनके बीच के रिश्ते को लेकर भी हो रही है.

बॉलीवुड के कुछ लोग इसे फिल्म के निर्देशक राकेश ओम प्रकाश मेहरा द्वारा इन दोनों कलाकारों को अठारह माह तक दिलायी गयी गहन ट्रेनिंग  का असर बता रहे हैं. तो कुछ लोग तरह तरह की बातें कर रहे हैं.

जबकि हर्षवर्धन के साथ अपनी इस बेहतरीन केमिस्ट्री के लिए सैयामी खेर स्पोर्ट्स में रूचि को बताती हैं. वह कहती हैं, ‘‘हर्षवर्धन के साथ ट्यूनिंग बनाने में समस्या नहीं आयी. मुझे स्पोर्ट्स में काफी दिलचस्पी है और हर्षवर्धन को भी. तो दिल्ली में जब हम छह माह के लिए एक साथ ट्रेनिंग ले रहे थे, तब हम लोग एक साथ टीवी पर क्रिकेट मैच देखा करते थे. इसलिए हमारे बीच बहुत जल्दी दोस्ती हो गयी थी. फिर हमने पूरे दो साल एक साथ बिताए हैं, तो हम एक दूसरे को ज्यादा बेहतर समझ पाए. हमारे बीच बॉन्डिंग बढ़ गयी.’’

तो वहीं हर्षवर्धन कपूर का दावा है कि वह और सैयामी अगली फिल्म में इससे भी बेहतर केमिस्ट्री के साथ काम कर सकेंगे. वह कहते हैं, ‘‘मेरी व सैयामी की परवरिश में बहुत बड़ा अंतर है. मेरी तरह वह अभिनय को नही अपनाती. वह जो अहसास करती है, उसे ही परफॉर्म करती है. वह बहुत ही ज्यादा स्पॉनटेनियस कलाकार है. जबकि मैं हर सीन पर बहुत सोचता हूं.”

उन्होंने कहा, “देखिए, जून 2013 में हम और सयामी खेर मिले थे. तीन साल हो गए, तो अब जाकर हमें लग रहा है कि हम दोनों अच्छे दोस्त बन गए. पहले एक डेढ़ साल तो हम दोनों के बीच ना के बराबर बातचीत हुई. वह ट्रेनिंग का दौर था. हमारी जिम्मेदारी इतनी थी कि एक दूसरे को समझने व बात करने का समय ही नहीं होता था. अब हम काफी करीब आ गए हैं. अब जब हम दूसरी फिल्में करेंगे, तो वहां ज्यादा फायदा होगा क्योंकि अब हम सहज हो चुके हैं.’’

अमेरिका को संवार रहे हैं ‘भारतीय’

अमेरिकी शोध संस्था की एक ताजा रिपोर्ट में इस मान्यता को चुनौती दी गयी है कि दूसरे देशों से अमेरिका आने वाले प्रवासी अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बोझ हैं. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2015-16 में प्रवासियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 2,000 अरब डॉलर का योगदान दिया और इन प्रवासियों में भारत से आए लोगों का समूह 'सबसे उद्यमशील समूह है.'

नैशनल अकैडमीज ऑफ सायेंस, इंजिनियरिंग ऐंड मेडिसिन ने 'आव्रजन के आर्थिक एवं वित्तीय परिणाम' पर अपनी रिपोर्ट में कहा कि प्रवासियों के योगदान से 2015-16 में अमेरिका की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में अनुमानित तौर पर करीब 2,000 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई. इस रिपोर्ट से इस बात की पुष्टि होती है कि प्रवासियों और उनकी आगे की पीढ़ी ने अमेरिका की आर्थिक वृद्धि, देश में नवप्रवर्तन और उद्यमों के विकास में अहम योगदान दिया है.

इसमें कहा गया, 'भारतीय प्रवासी देश में यहां के मूल निवासियों सहित किसी भी जातीय समूह में सबसे अधिक उद्यमशील हैं.' रिपोर्ट ने यह तथ्य भी उजागर किया है कि अमेरिका में परिवहन, आवास, मनोरंजन और सेवा-सत्कार क्षेत्र में एक चौथाई कंपनियां प्रवासियों की ही हैं. '

अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर इमीग्रेशन से नफे और नुकसान का मुद्दा हमेशा ही गरम रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डॉनल्‍ड ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि सत्ता में आने पर वह अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे.

निवेश और बचत में न हो कन्फ्युज

बचत और निवेश में काफी अंतर होता है. बचत हम अपनी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए करते हैं, जबकि निवेश लंबी अवधि में अपने वित्‍तीय लक्ष्‍यों को हासिल करने के लिए किया जाता है.

अक्‍सर लोग बचत को ही निवेश समझ बैठते हैं और बाद में परेशानी उठाते हैं. अधिकांश लोग बचत और निवेश में यह गलती करते हैं, लेकिन समय रहते इसे सुधारा जा सकता है. यदि देर कर दी तो शायद ये गलती काफी महंगी साबित हो सकती है.

बचत और निवेश में अंतर क्या है?

निवेश में यह कोशिश होती है कि धनराशि बढ़े. इसमें बचत के मुकाबले ज्‍यादा रिस्क होता है, लेकिन अधिक रिटर्न मिलने की संभावना भी है. निवेश लंबे समय के लिए किया जाता है. दूसरी तरफ बचत करना सुरक्षित होता है, लेकिन इसमें रिटर्न की गति धीमी होती है. ये पैसा बचाने और सुरक्षित रखने का अच्छा जरिया है, जो कम समय के लक्ष्यों को पूरा करने में मददगार साबित होता है.

लंबी अवधि के लिए होता है निवेश

निवेश के तहत आप अपने धन को एक या कई जगह लगाते हैं, और लंबी अवधि के लिए बुद्धिमानी से धन का इस्तेमाल, प्रोफिट के लिए करते हैं. निवेश किए हुए धन को आप जल्द ही वापस नहीं निकालते, बल्कि धन के बढ़ने का इंतजार करते हैं. वैसे कुछ निवेश कम अवधि के लिए भी किए जाते हैं.

कई जगह करें निवेश

निवेश में डायवर्सिफिकेशन होना चाहिए. अपने धन का जोखिम कम करने के लिए आपको अलग-अलग तरह के निवेश करने चाहिए. क्योंकि सारा धन एक ही जगह निवेश करने से नुकसान की संभावना अधिक रहती है. आप अपना पैसा स्टॉक, बॉन्ड्स और म्यूचुअल फंड में लगा सकते हैं. जमीन या रियल एस्‍टेट (प्रॉपर्टी) में निवेश कर सकते हैं. सोना खरीदना भी अपने आप में निवेश ही माना जाता है.

निवेश के प्रकार

– सरकारी बांड्स

– स्टॉक

– म्यूचुअल फंड

– प्रॉपर्टी

– सोना

निवेश का जोखिम ऐसे करें कम

अपना पोर्टफोलियो तैयार करें. पोर्टफोलियो निवेशों का संग्रह (कलेक्शन) है. आप निवेश में जोखिम कम कर सकते हैं अगर आपने अलग-अलग जगह या संपत्ति में निवेश किया हो. निवेश की शुरुआत करते वक्त दो बाते बहुत मायने रखती हैं. ये हैं डायवर्सिफिकेशन और एसेट अलोकेशन.

इन ऐप्स की बदौलत फोन नहीं होगा डिस्चार्ज

लोगों की सबसे अहम जरूरत बन चुका मोबाइल फोन भी कभी-कभी परेशान कर देता है. सुबह उठते सबसे पहले आपको जिस चीज की याद आती है वो होता है मोबाइल फोन. ऐसे में अगर मोबाइल फोन स्लो काम करने लग जाए या बात करते करते फोन की बैटरी दगा दे दे तो आपका दिमाग खराब होना लाजमी है.

लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि बाजार में ऐसे काफी सारे ऐप उपलब्ध हैं जो आपकी इन छोटी-मोटी परेशानियों को झट से दूर कर सकते हैं. इन सारे ऐप्स को आप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं.

ये ऐप्स आपके फोन की सेहत को हमेशा दुरुस्त रखेंगे और आपको कभी भी परेशानी नहीं होगी. अगर आपका फोन एंड्रॉयड है तो आप इन्हें अभी डाउनलोड कर सकते हैं. आज हम आपको कुछ ऐसी ही ऐप्स के बारे में बताएंगे जो आपके स्मॉर्टफोन को वाकई में स्मॉर्ट बना देंगे.

क्लीन हिस्ट्री: यह ऐप आपके फोन के लिए काफी बेहतर साबित हो सकता है. अगर आप इस ऐप को डाउनलोड करते हैं तो यह आपके मोबाइल की इंटरनेट सर्च हिस्ट्री, डाउनलोडिंग, ऐप कैशे मेमोरी को क्लीन करके स्पेस बनाता है ताकि मोबाइल फोन स्मूथनेस के साथ काम कर सके.

शेयर इट: यह ऐप भी कमाल का है. यह ब्लूटूथ की समस्या का रामबाण इलाज है. आमतौर पर ब्लूटूथ छोटी फाइलों को तो झट से भेज देता है, लेकिन वह बड़ी फाइल भेजने में असमर्थ होता है, जबकि आपक शेयर इट के जरिए बड़ी से बड़ी फाइल को भी चंद सेकेंडों में एक फोन से दूसरे फोन में साझा कर सकते हैं.

डीयू बैटरी: स्मार्टफोन की सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि इसकी बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है. ऐसे में यह ऐप आपकी मदद कर सकता है. यह ऐप बैटरी की लाइफ को 50 फीसदी तक बढ़ा देती है. यह न सिर्फ चार्जिंग की स्पीड को बढ़ा देता है बल्कि बैकग्राउंड में चालू ऐप्स जिस ऊर्जा की खपत कर रही होती हैं उसे भी रोक देता है.    

फ्री में बढ़ाएं जियो 4जी की इंटरनेट स्पीड

रिलायंस जियो ने मार्केट में आते ही बवाल मचा दिया है. इस वक्त जियो के कई यूजर्स हैं और कई ऐसे हैं जो रिलायंस जियो 4जी सिम इस्तेमाल करना चाहती हैं. लेकिन हर यूजर जियो की स्पीड से खुश नहीं है.

रिलायंस जियो के प्रीव्यू ऑफर के दौरान यूजर्स ने जियो 4जी की शानदार स्पीड का अनुभव किया. यूजर्स को लगभग 10 से 20 एमबीपीएस स्पीड मिल रही थी. लेकिन जियो की कमर्शियल लॉन्च के बाद जियो की डिमांड अधिक तेजी से बढ़ी मगर जियो की स्पीड पहले से काफी कम हो गई. ऐसा जियो नेटवर्क पर ज्यादा भर पड़ने से हुआ है.

यदि आप भी जियो की कम स्पीड से परेशान हैं तो आप नीचे दिए ट्रिक्स अपनाकर स्पीड को बढ़ा सकते हैं. ये 6 ट्रिक्स आपके रिलायंस जियो 4जी की स्पीड जरुर बढ़ा देंगी.

एपीएन सेटिंग्स में बदलें

अपने रिलायंस जियो 4जी की स्पीड बढ़ाने के लिए आप एपीएन सेटिंग्स में बदलाव कर सकते हैं. इसके लिए आप सेटिंग्स में जाएं और मोबाइल नेटवर्क्स के विकल्प में जाएं. आप प्रिफर्ड नेटवर्क टाइप को LTE में सेट करें. अब वापस जाकर एपीएन (एक्सेस पॉइंट नेम्स) सेलेक्ट करें और स्क्रॉल करते हुए नीचे जाएं व एपीएन प्रोटोकॉल विकल्प चुनें. इसे lpv4/lpv6 कर दें. इसके बाद बेयरर विकल्प में जाकर LTE सेलेक्ट और सभी सेटिंग्स को सेव कर दें.

रूट फोन के लिए

यदि आपके पास रूट हुआ एंड्रायड फोन है तो 3जी/4जी स्पीड ऑप्टिमाइजर एपीके अपने फोन में डाउनलोड करें, और नेटवर्क स्पीड सेलेक्ट करें. वहां आपको 12/28/7 चुनना है. इसके बाद अप्लाई पर क्लिक कर फोन को रीस्टार्ट कर दें.

वीपीएन के इस्तेमाल से

स्नैप वीपीएन को प्ले स्टोर से डाउनलोड करें. एप खोलने पर आपको देश की लिस्ट और उनके सामने सिग्नल स्ट्रेंथ दिखाई देगी. अच्छी स्ट्रेंथ वाले देश को सेलेक्ट करें और कनेक्ट करें. जैसे ही कनेक्शन हो जाता है, अपने इंटरनेट की स्पीड चेक करें. LTE बैंड बदलें

बैंड 40 बेहतर स्पीड ऑफर करता है जबकि बैंड 3 और 5 बेहतर कवरेज देता है. बैंड 40 में आपको 50 एमबीपीएस की डाउनलोड स्पीड मिलती है. आप LTE बैंड को अपने आप से बदल सकते हैं. यदि आपका फोन क्वालकॉम या मीडियाटेक चिपसेट वाला है.

सर्वर का नाम बदलें

आप एपीएन सेटिंग्स में जाकर सर्वर पर जाएं. वहां जाकर आपको www.google.com टाइप करना है और सेटिंग्स को सेव करना है. तब आप इंटरनेट को कनेक्ट करें और एक बार फिर इंटरनेट स्पीड देखें.

क्लियर कैश

एंड्रायड सिस्टम रैंडमली कुछ फाइल्स इस्तेमाल करता है और उन्हें सेव कर लेता है. इन फाइल्स को कैश फाइल्स कहते हैं. जियो कैश फाइल्स के जरिए यूजर्स को कुछ बढ़ा कंटेंट डाउनलोड करने से रोक सकता है. इसलिए कैश फाइल डिलीट कर आप स्पीड बढ़ा सकते हैं.

जल्द बिक जाएगा ट्विटर

माइक्रोब्‍लॉगिंग साइट ट्विटर जल्‍द ही बिक सकता है. एक बिजनस न्‍यूज चैनल ने अपने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि टेक्‍नॉलजी क्षेत्र की कई कंपनियों ने ट्विटर को खरीदने में दिलचस्‍पी दिखाई है और जल्‍द ही इस बारे में आधिकारिक रूप से घोषणा हो सकती है.

सूत्रों के मुताबिक, जिन कंपनियों ने ट्विटर को खरीदने में दिलचस्‍पी दिखाई है वे गूगल और सेल्‍सफोर्स डॉट कॉम हैं. खरीदारी को लेकर ट्विटर की कई कंपनियों से बातचीत चल रही है जिनमें ये दोनों कंपनियां भी शामिल हैं. बता दें कि गूगल जहां दुनिया की सबसे बड़ी सर्च इंजन कंपनी हैं वहीं सेल्‍सफोर्स अमेरिका स्थित एक बड़ी क्‍लाउड कम्‍प्‍यूटिंग कंपनी है.

जैसे ही इस बारे में खबर आई है कि ट्विटर को खरीदने के लिए कंपनियां संभावित डील पर बातचीत कर रही हैं, ट्विटर के शेयरों में 15 प्रतिशत से ज्‍यादा का उछाल आ गया है.

इस मामले पर करीबी नजर रखने वाले सूत्रों ने कहा कि ट्विटर के बोर्ड ऑफ डायरेक्‍टर्स बिक्री संबंधी डील को लेकर काफी इच्‍छुक हैं लेकिन बहुत जल्‍दी इस तरह के डील की संभावना नहीं है. सूत्रों ने कहा कि इस बात का भरोसा नहीं दिया जा सकता कि इस तरह की डील परवान चढ़ेगी लेकिन बिक्री संबंधी बात काफी तेजी से आगे बढ़ रही है और इस साल के आखिर तक संभवत: डील हो सकती है.

लगातार 45 दिन दौड़ अमेरिकी अल्ट्रामैराथनर ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

6000 हजार फीट ऊंचे पहाड़ों पर अमेरिकी अल्ट्रामैराथनर कार्ल मेल्टजर ने एक अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है. जी हां, इतनी ऊंचाई पर वे लगातार 45 दिन दौड़े. वह रोज 15 घंटे में 77 किमी दौड़ते थे. इस दौरान वे सनक और जुनून में कई नदियां और पुल पार करते रहे. उन्होंने 5 लाख फीट क्लाइंबिंग भी की.

आखिर कैसे किया उन्होंने ये सब

कार्ल ने स्प्रिंगर माउंटेन पर पहुंच कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया. उन्होंने यह रेस 45 दिन 22 घंटे 38 मिनट में पूरी की. उन्होंने अपने दोस्त और ट्रेनिंग पार्टनर स्कॉट जुरेक (46 दिन, 8 घंटे, 7 मिनट) का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया.

इस दौरान कार्ल ने 345122 कैलोरी बर्न की. अमेरिका के 12 स्टेट क्रॉस किए. रेस में 20 पेयर शूज बदले. यानी, हर दो दिन में एक पेयर शू. 678 घंटे दौड़ लगाई.

अपालाचियन ट्राइल रेस में 11 हजार लोगों ने हिस्सा लिया था. लेकिन कार्ल सबसे तेज रहे. वे तीसरी बार इस रेस में हिस्सा ले रहे थे. रेस फिनिश होने के बाद उन्होंने पिज्जा और बीयर के साथ जीत का जश्न मनाया.

वे रेस के दौरान अनहेल्दी डाइट लेते थे. उनके पास हमेशा कैंडी होती. दिनभर में पांच एनर्जी ड्रिंक लेते. बर्गर, पेस्ट्री, आइसक्रीम और जंक फूड खाते थे. वे ऐसी डाइट लेते, जिसमें शुगर और प्रोटीन का कांबिनेशन होता था. रोजाना रेस के बाद सोने से पहले बीयर पीते थे.

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