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मुसलिमों पर मोदी की नई सोच

छुआछूत के मुद्दे पर दलित अलग थलग पड़ते थे, तो राष्ट्रवाद के नाम पर मुसलिम. अब भाजपा नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह समझ आ रहा है. वह दलित और मुसलिमों को लेकर नई सोच बना रहे हैं, जो देश और समाज के हित में है. परेशानी की बात यह है कि उनकी बात खुद उनके संगठन और उससे जुड़े संगठनों को कितना समझ में आयेगी. पाकिस्तान के साथ गरम माहौल के बीच केरल के कोझीकोड में भाजपा की नेशनल काउंसिल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा ‘मुसलिमों को अपना समझे. इनको वोट बैंक का माल नहीं समझा जाना चाहिये.’

प्रधानमंत्री मोदी ने जनसंघ के विचारक दीनदयाल उपाध्याय के कथन को सामने रखते हुए कहा ‘मुसलमानो को न पुरस्कृत किया जाये और न फटकारा जाये, बल्कि उन्हे अपने पांव पर खड़ा करके मजबूत बनाया जाये. उन्हे अपना समझा जाये. न कि वोट बैंक की वस्तु या फिर नफरत का सामान.’ प्रधानमंत्री मोदी यही नहीं रुकते हैं, वह आगे वह कहते हैं ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने मुसलमानो को करीब आने और उनकी तरक्की के लिये यह मंत्र 50 साल पहले दिया था. कुछ लोगों ने पहले जनसंघ और बाद में भाजपा को समझने में गलती की. कुछ जानबूझ कर अब भी ऐसा कर रहे है‘.

असल में नरेन्द्र मोदी को मुसलिम और दलित प्रेम यूं ही नहीं जन्मा है. गोरक्षा के नाम पर पहले मुसलिमों और बाद में दलितों के साथ भेदभाव भरा व्यवहार किया गया. इसमें राष्ट्रवादी कहे जाने वाले संगठनों का बहुत बड़ा हाथ था. गोमांस के नाम पर कई हिंसक कांड हुये, जिसमें भाजपा ने चुप्पी साध ली थी. जब यह मसले आगे बढ़े तो प्रधानमंत्री ने 80 फीसदी गोरक्षा संगठनों को फर्जी बता दिया. अब दलितों के बाद मुसलिमों की बारी आई. पाकिस्तान के साथ तनाव भरे माहौल में भाजपा पर नैतिक दबाव आने लगा. उस पर मुसलिम विरोध का पुराना लेबल लगा है. ऐसे में माहौल को हल्का करने के लिये प्रधानमंत्री मोदी ने अपना मुसलिम राग छेड़ दिया.

भाजपा की राजनीति का केन्द्र बिंदू मुसलिम विरोध रहा है. देश में मंदिर मस्जिद विवाद के पहले हिन्दू मुसलिम एक साथ गंगा जमुनी सभ्यता के साथ रहते थे. अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाये जाने के बाद देश में साम्प्रदायिक माहौल खराब हुआ. मुम्बई का बम विस्फोट ऐसी पहली बड़ी घटना थी जिसने इस दूरी को आतंकवाद से जोड़ दिया. इसके बाद देश में होने वाली आतंकी घटनायें बढ़ने लगी. देश विरोघी ताकतों को मजहबी दूरी बढ़ाने में मदद मिली. वह इस दूरी के बहाने देश को आतकवाद के मुहाने पर ले आये.

भाजपा वोट के धुव्रीकरण का आरोप कांग्रेस और दूसरे दलों पर लगाती है. सच यह है कि खुद भाजपा कांग्रेस और दूसरे दलों की तरह ही वोट बैंक की परिपाटी पर ही चलती रही है. 2014 के लोकसभा चुनाव में पाकिस्तान भारत के संबंधों को प्रचार के रूप में प्रयोग किया गया और कांग्रेस पर पाकिस्तान समर्थक होने के आरोप लगे. सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक के बाद एक इस बात का आभास होने लगा है कि देश की एकता और अखंडता के लिये दलित और मुसलिम भी बेहद जरूरी हैं. इनको साथ लेकर चले बिना देश का विकास संभव नहीं है. मुश्किल बात यह है कि यह सच प्रधानमंत्री तो समझ गये, पर उनसे जुडे फायर ब्रांड वक्ता यह बात समझे तो बात बने.      

                   

ग्रोथ पर है RBI गवर्नर की नजर

आरबीआई गवर्नर के रूप में अपनी पहली बातचीत में ऊर्जित पटेल ने महंगाई के खतरे को कम तवज्जो दी और ग्रोथ पर फोकस बढ़ाने पर जोर दिया. 5 सितंबर को रघुराम राजन से आरबीआई की बागडोर संभालने वाले पटेल ने मीडिया से दूरी बनाए रखी थी और कोई बयान देने से परहेज किया था.

मीडिया की नजरों से दूर हुई इस बैठक में शामिल होने वालों ने यह नतीजा निकाला है कि अक्टूबर की मॉनेटरी पॉलिसी में अगर ब्याज दरों में कमी नहीं की जाए तो भी ब्याज दरों और लिक्विडिटी के मामले में आरबीआई का रुख नरम रह सकता है. ब्याज दरों पर अब कोई भी फैसला छह सदस्यों की नवगठित मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी करेगी, जिसमें पटेल मेंबर हैं.

बैठक में हुई चर्चा की जानकारी रखने वाले एक शख्स ने बताया, 'गवर्नर की सोच यह है कि जीएसटी लागू होने से महंगाई सिर नहीं उठाएगी. उन्होंने कहा कि कई चीजों के दाम घटेंगे और इससे कंजम्प्शन के दूसरे आइटम्स की कीमतों में बढ़ोतरी का असर कुछ हद तक घटाने में मदद मिलेगी.

उनका यह भी मानना है कि कंज्यूमर प्राइस इंडेंक्स के कैलकुलेशन में पब्लिक सेक्टर हाउसिंग और रेंट को दिया गया वेटेज घटाया जाना चाहिए. पटेल ने अर्थशास्त्रियों के एक ग्रुप से इस पर अनौपचारिक बातचीत की थी कि वैट घटाया जाना चाहिए या नहीं.' हाल में जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, महंगाई घट रही है, जबकि इंडस्ट्रियल प्रॉडक्शन ग्रोथ नेगेटिव टेरिटरी में चली गई है.

फ्री वाई फाई का इस्तेमाल पड़ सकता है महंगा

पब्लिक वाई फाई का इस्तेमाल करते समय आपको सावधानी बरतना जरूरी है.

इन दिनों बहुत सारे पब्लिक प्लेटफॉर्म्स पर फ्री वाई फाई की सुविधा उपलब्ध है  और समय काटने के लिए अक्सर लोग रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट पर फ्री वाई फाई का इस्तेमाल करते हैं. पर फ्री वाई फाई का इस्तेमाल करते समय आपको कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए जिससे आप अपने सोशल अकाउंट्स और अन्य जानकारियां सुरक्षित रह सकें.

– सोशल मीडिया पर अपनी जानकारियां शेयर करते समय सावधानी बरतें.

– जब आप छुट्टी पर जाएं तो अपनी लोकेशन की जानकारी दूसरों से शेयर न करें. यह जानकारी सिर्फ उन्हीं को दें जो जिन्हें देना जरूरी है. इससे आपकी प्राइवेसी सिक्योर रहती है.

– ब्लूटूथ और वाईफाई से शेयर करते समय अपनी पुरानी हिस्ट्री क्लियर करना न भूलें. खास तौर पर जब आप पेमेंट ट्रांजिक्शन की जानकारी शेयर कर रहे हों.

– किसी असुरक्षित वाई फाई या ब्लूटूथ डिवाइस से कनेक्ट होने से पहले अपना पुराना ट्रांसफर डाटा क्लियर करना जरुरी है वरना जिस डिवाइस से आप कनेक्ट कर रहे हैं उसे आपकी पुराने डाटा की जानकारी मिल सकती है. अपने बैंक अकाउंट के ट्रांजैक्शन पर भी नजर बनाएं रखें.

– पब्लिक वाई फाई से जब आप कनेक्टेट हों तब पैसे का लेन देन करने से परहेज करें. 

500वें टेस्ट में 200 विकेट ले अश्विन ने बनाया रिकॉर्ड

ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन अपने 37वें टेस्ट मैच में 200वां विकेट लेकर सबसे कम मैचों में यह उपलब्धि हासिल करने वाले दुनिया के दूसरे नंबर के गेंदबाज बन गए हैं. न्यूजीलैंड के खिलाफ कानपुर टेस्ट मैच में अश्विन शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं.

अश्विन ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट क्रिकेट मैच के चौथे दिन कीवी कप्तान केन विलियमसन को आउट करके यह उपलब्धि हासिल की. आस्ट्रेलिया के क्लेरी ग्रिमेट ने 36 टेस्ट मैचों में 200 विकेट लिए थे. जबकि अश्विन ने इस मुकाम पर पहुंचने के लिए उनसे एक टेस्ट मैच अधिक खेला.

अश्विन ने लिली और वकार यूनिस को पीछे छोड़ा

भारत के इस ऑफ स्पिनर ने इस तरह से डेनिस लिली और वकार यूनिस को पीछे छोड़ा जिन्होंने 38वें टेस्ट मैच में 200 विकेट पूरे किए थे. मौजूदा समय में खेल रहे गेंदबाजों में दक्षिण अफ्रीका के डेल स्टेन 39 मैचों में इस मुकाम पर पहुंचे थे.

यदि भारतीय रिकार्ड की बात करें तो अश्विन ने एक दूसरे ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह का रिकार्ड तोड़ा जिन्होंने 46वें मैच में अपना 200वां विकेट हासिल किया था. उनके बाद अनिल कुंबले 47, भगवत चंद्रशेखर 48 और कपिल देव 50 मैच का नंबर आता है.

अश्विन भारत के नौं और पांचवे स्पिनर बने

अश्विन भारत की तरफ से 200 विकेट लेने वाले नौवें गेंदबाज और पांचवें स्पिनर बन गए हैं. भारत की तरफ से 200 या इससे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों में अनिल कुंबले 619, कपिल देव 434, हरभजन सिंह 417, जहीर खान 311, बिशन सिंह बेदी 266, चंद्रशेखर 242, जवागल श्रीनाथ 236, ईशांत शर्मा 209 और अश्विन 200 शामिल हैं.

KYC करें अपडेट वरना खाता हो जाएगा बंद

अगर आपका खाता पंजाब नैशनल बैंक में है तो अपनी जानकारी तुरंत अपडेट कराएं वरना आपका अकाउंट ब्लॉक किया जा सकता है. पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) ने अपने सभी कस्मटर्स को 1 अक्टूबर 2016 तक केवाईसी (नो योर कस्टमर) अपडेट कराने के लिए कहा है. बैंक का कहना है कि जो ग्राहक ऐसा नहीं करते हैं, एटीएम समेत उनका अकाउंट ब्लॉक किया जा सकता है. केवाईसी, कस्टमर के बारे में जानकारी अपडेट करने की प्रक्रिया है. इससे सुनिश्चित होता है कि बैंकिंग सेवाओं का दुरुपयोग तो नहीं हो रहा है.

पीएनबी ने कहा है कि अगर किसी भी अकाउंट का केवाईसी अपडेट नहीं है तो 1 अक्टूबर 2016 के पहले इसे जरूर अपडेट करा लें. जो अकाउंट होल्डर्स ऐसा नहीं करते हैं तो बैंक के पास उनका एटीएम, पॉइंट ऑफ सेल और इंटरनेट मोबाइल बैंकिंग समेत सभी बैंकिंग ट्रांजेक्शन ब्लॉक करने का अधिकार है.

सेविंग्स अकाउंट के लिए अकाउंट होल्डर्स को पासपोर्ट, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, नरेगा कार्ड, इलेक्शन आईडी, पैन कार्ड (केवल आईडी प्रुफ के लिए) की फोटो कॉपी जमा करानी होगी. करंट अकाउंट्स के लिए अड्रेस प्रूफ और अपनी पहचान से जुड़े दस्तावेजों की कॉपी जमा करा सकते हैं. प्रोपराइटर्स अपनी पहचान और अड्रेस से जुड़े दस्तावेज जमा करा सकते हैं. 

उग्रवाद, भ्रष्ट नेता और विकास की इबारत

भारत की सीमाओं के अंदर गोया एक अलग ही संसार है पूर्वोत्तर. चीन की संस्कृति से प्रभावित, लेकिन रहन सहन भारतीयता से परिपूर्ण और बदला-बदला सा खानपान इस बात का अहसास कराता है. प्राकृतिक विविधताओं के बीच नदी में लिपटा संसार का सबसे लंबा द्वीप, कंचनजंघा की बर्फीली पहाड़ियों पर सर्पीले रास्ते, दुनिया का सबसे नम स्थान, घने मनोहारी जंगल, मूसलधार बारिश, चाय के बाग, सौंदर्य बिखेरते परंपरागत आवास और जंगलों में गैंडे व याक का वास. यही है सेवन सिस्टर्स यानी पूर्वोत्तर की पहचान.

प्रकृति ने पूर्वोत्तर को हर तरह की सौगात दी. लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में इसका समुचित दोहन होना अब भी बाकी है. इन आठ राज्यों में असम, मणिपुर, नगालैंड, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम व सिक्किम में उग्रवाद व अलगाववादी ताकतें विकास की हवा पहुंचने नहीं दे रही हैं. पहाड़ी राज्यों में ट्रेन रूट व सड़कों का अभाव विकास को भी आगे नहीं बढ़ने दे रहा है. कई राज्यों में तो एक किमी भी रेल पटरी नहीं बिछी. समूचे पूर्वोत्तर के बाशिंदे मुख्यत: सड़क परिवहन पर ही निर्भर हैं.

अरुणाचल से लेकर सिक्किम तक पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में स्वाधीनता और स्वायत्तता का जुनून छा रहा है. इन राज्यों में सीमा विवाद भी चरम पर है. बांग्लादेशी घुसपैठ खत्म नहीं हो रही तो चीन की अरुणाचल पर गिद्धदृष्टि है. वोट की राजनीति के चलते उग्रवादी तत्वों को हवा मिल रही है. राज्य सरकारें केंद्र से आतंकवाद से जूझने के लिए मिलने वाली राशि के लालच में उग्रवादी तत्वों के साथ नूराकुश्ती खेल रही हैं. यहां सिक्किम ही इकलौता राज्य है, जो तीन तरफ विदेशी सीमाओं से घिरे होने के बावजूद शांति का टापू बना हुआ है. बांग्लादेशी घुसपैठ से पश्चिम बंगाल भी अछूता नहीं है. इसके प्रमाण कोलकाता स्थित रेडलाइट एरिया समेत जेलों में बंद बांग्लादेशी कैदियों से मिलते हैं.

इधर कोलकाता जरूर हाईटेक बनने को करवट बदल रहा है. एशिया के सबसे बड़े आईटी पार्क के द्वार खुल रहे हैं. यहां सड़कों पर जीवन बसता है. गगनचुंबी अट्टालिकाओं के बीच शापिंग मॉल में मल्टीनेशनल कंपनियों का पिज्जा तीन सौ रुपए में बिकता है तो फुटपाथ पर मात्र बीस रुपए में भी खाना मिल जाता है. कोलकाता दिहाड़ी मजदूर का पेट भरता है तो अरबपतियों को मालामाल भी करता है. पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे बिहार की तस्वीर से बदनामी की कालिख धुल रही है. बिहार अब पुराने ढर्रे से निकलकर पटरी पर आ रहा है. अपराधों से कांपने वाले बिहार में अब राज्य सरकार की सख्ती से अपराधी कांपने लगे हैं. यहां भी विकास अब जाकर शुरू हो रहा है. इन्वेस्टर्स बिहार का रुख कर रहे हैं.

सियासतदां मानते हैं कि छोटे राज्यों के गठन से विकास को गति मिली है. लेकिन झारखंड में यह उक्ति गलत सिद्ध हो रही है. झारखंड नेताओं के सियासी खेल का अखाड़ा बन गया है. भ्रष्ट नेताओं के कारनामों और कुर्सी का बेजा फायदा उठाने की ललक ने राज्य को विकास के मामले में बहुत पीछे धकेल दिया है. छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के झंझावतों से जूझते हुए भी विकास की इबारत लिख रहा है. रायपुर विकास की अंगड़ाई लेते शहरों में शुमार हो चला है. यहां शापिंग मॉल कल्चर की हवा बहने लगी है.

सियासतदां मानते हैं कि छोटे राज्यों के गठन से विकास को गति मिली है. लेकिन झारखंड में यह उक्ति गलत सिद्ध हो रही है. भ्रष्ट नेताओं के कारनामों और कुर्सी का बेजा फायदा उठाने की ललक ने राज्य को विकास के मामले में बहुत पीछे धकेल दिया है. छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के झंझावतों से जूझते हुए भी विकास की इबारत लिख रहा है. रायपुर विकास की अंगड़ाई लेते शहरों में शुमार हो चला है. यहां शापिंग मॉल कल्चर की हवा बहने लगी है.

मौजूदा नंबर पर ही लें Jio सर्विस का मजा

रिलायंस जियो की सर्विस शुरू होने के बाद कस्‍टमर को सबसे ज्‍यादा दिक्‍कत सिम की हो रही है. सिम मिल भी जा रहा है तो वह कई दिनों तक एक्टिवेट नहीं हो पा रहा है. ऐसे में कस्‍टमर्स के पास अपने मौजूदा नंबर पर ही जियो सर्विस का लाभ लेने का ऑप्‍शन मौजूद हैं. इसके लिए कस्‍टमर को मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) का प्रयोग करना होगा.

रिलायंस जियो को मुकेश अंबानी ने 5 सितंबर को लॉन्‍च किया था. 31 दिसंबर तक ‘जियो वेलकम ऑफर’ के तहत जियो की डाटा, कॉल सभी सर्विस फ्री हैं. इसके बाद डाटा पैक के अनुसार चार्ज देना होगा. जियो के तहत कॉलिंग सर्विस लाइफ टाइम फ्री है.

– सबसे पहले आपको अपने करंट ऑपरेटर के पास एमएनपी के लिए टैक्‍स मैसेज भेजना होगा. इसके लिए मैसेज बॉक्‍स में PORT लिखकर 1900 नंबर पर भेजना होगा.

– इस फॉर्मेट में एसएमएस भेजें:- < PORT > < space> < mobile number > फिर इसे 1900 पर सेंड कर दें. इसके लिए कोई चार्ज नहीं होगा.

– इस मैसेज को सेंड करने के बाद आपको एक यूनिक पोर्टिंग कोड (यूपीसी) का एसएमएस आएगा.

– यह कोड 15 दिन के लिए वैलिड रहता है. कस्‍टर इसके बाद अपने नंबर को रिलायंस में पोर्ट कर सकते हैं.

कस्‍टमर किसी भी रिलायंस मोबाइल स्‍टोर या रिटेलर के पास जाकर कस्‍टमर अप्‍लीकेशन फॉर्म (सीएएफ) भरें.

मोबाइल स्‍टोर या रिटेलर के पास आपको इस फॉर्म के साथ कुछ जरूरी डॉक्‍यूमेंट जैसे एड्रेस प्रूफ, आइडेंटिटी प्रूफ और एक फोटो देना होगा.

इस प्रॉसेस को पूरा करने के बाद रिलायंस मोबाइल स्‍टोर या रिटेल से आपको एक सिम जारी कर दिया जाएगा.

इस सिम के एक बार एक्टिवेट होने के बाद आप अपने पुराने नंबर पर ही रिलायंस जियो की सर्विस का लाभ ले सकेंगे.

रिलायंस जियो सिम को एक्टिवेट होने में 7 दिन तक का समय लग सकता है.

नया सिम एक्टिवेट होने के बाद पुरान सिम डिएक्टिवेट हो जाएगा. इसके लिए आपको 19 रुपए फीस देनी होगी.

– नंबर पोर्ट होने के बाद सिम एक्टिवेट होने से पहले आपका फोन दो घंटे के लिए डेड हो सकता है. यह समय रात के 10 बजे से सुबह 5 बजे तक का हो सकता है.

– एकबार जब आपका सिम ‘नो सर्विस’ दिखाने लगे तो इसके बाद आप नया रिलायंस जियो सिम लगा सकते हैं.

– यह बात भी ध्‍यान रखिए कि एक बार जियो में नंबर पोर्ट कराने के बाद आप 90 दिन तक एमएनपी अपने पुराने ऑपरेटर या किसी अन्‍य के पास नहीं करा पाएंगे.

– बता दें, एजीएम में मुकेश अंबानी ने सभी ऑपरेटर्स से गुजारिश की थी कि वह कस्‍टमर को जियो अपनाने में उनके एमएनपी के अधिकार को न रोकें.

– रिलायंस जियो की सर्विस का अनुभव उसके कस्‍टमर के लिए काफी खराब हो रहा है. जियो का आरोप है कि दूसरे टेलिकॉम ऑपरेटर इंटरकनेक्टिविटी नहीं दे रहे हैं, जिसके चलते जियो की कॉल फेल हो रही है.

– जियो का आरेाप है कि पिछले हफ्ते उसकी करीब 5 करोड़ कॉल फेल हुई है.

प्रगति में रोड़ा, पूंजी की बरबादी

भारतीय कभी अमेरिकी नहीं बन पाएंगे. यह हौलीवुड का अदना सा फाइटर हीरो नाथन जौंस जानता है. उस ने भारतीय फिल्मों में काम करना शुरू किया है और जब उस से पूछा गया कि दोनों देशों की फिल्म प्रोडक्शन में क्या अंतर है तो उस ने कहा कि उन के यहां पूरा अनुशासन है और जिस ने जो करना है वह पहले लिख लिया जाता है. सुधार किया जाता है. कई बार फिल्माते हुए सैट पर भी, लेकिन भारत की तरह नहीं जहां हर चीज अस्तव्यस्त है.

उस का कहना था कि तमिल फिल्म निर्माता जो बौलीवुड से बेहतर हैं, कोई काम ढंग से नहीं करते, सबकुछ बिखरा सा रहता है और हर कोई मनमानी करता नजर आता है.

भारत के साथ दिक्कत ही यह है कि हमारे यहां अनुशासन  से रहना भी नहीं सिखाया जाता. हम कहीं कतार में सीधे नहीं लग सकते. हम मेज पर सामान ढंग से नहीं रख सकते. हमारी फिल्मों में सैट निर्माताओं को नकली शहर बसाते हुए खयाल रखना पड़ता है कि कूड़े के ढेर नजर आएं, दीवारों पर पान की पीक दिखे, सड़कों पर पानीपूरी खा कर बिखरे पत्ते दिखें.

फिल्मों में भी हमारी अस्तव्यस्तता दिखती है. पहले तो सालों में बनती थीं पर जब से विदेशी निर्माता आए हैं, कुछ ढंग से काम होने लगा है और 6 माह पहले रिलीज की तिथि आ जाती है. अब तो सैंसर बोर्ड को फोर्स किया जा रहा है कि वह समय पर फिल्म देखे और सर्टिफाई करे.

नाथन जौंस ने आस्टे्रलिया में रह कर भारतीयों के बारे में बहुत कुछ जाना था, क्योंकि उस के पड़ोस में कई भारतीय मूल के परिवार थे. यहां का दर्शक असल में एक काम को लंबा खींचते देखना चाहता है. यहां खलनायक मरता दिखता है, पर फिर उठ जाता है और नायक को मारने दौड़ता है. यही अंतिम क्षण तक बहुत देर तक पहुंचने की आदत है जो हमारे सामाजिक व व्यावसायिक जीवन में बुरी तरह घुसी है.

देश की प्रगति में रोड़ा हमारी पूंजी की कमी इतनी नहीं जितनी पूंजी की बरबादी है. हम कोई चीज ढंग से इस्तेमाल करना ही नहीं जानते. गंदगी तो एक बात है वरना अधूरा काम छोड़ना तो हमारी फितरत बनी हुई है. स्कूलकालेजों से हमें यह शिक्षा दी जाती है कि हर चीज का शौर्टकट है, इस का भरपूर उपयोग करो. चाहे कक्षा की बात हो या कैंटीन की. हमारे यहां बिखरे डैस्क और भिनभिनाती मक्खियां हमारे जीवन का अंग हैं.

यह आश्चर्य है फिर भी केवल जनसंख्या के बल पर हम विशाल अर्थव्यवस्था बन गए हैं और हमारे आका अपने को चीन, अमेरिका के बराबर समझने लगे हैं. देखा जाए तो हमारी संसद तक बिखरी रहती है. कहीं जाले लगे हैं, कहीं प्लास्टर उखड़ा है, कहीं कूड़े के ढेर हैं. सुंदर अभिनव बिल्डिंग को जिस तरह रखा जा रहा है, यह देश की स्थिति बताती है.                               

युवा शटलर लक्ष्य सेन ने रचा इतिहास

उत्तराखंड के युवा शटलर लक्ष्य सेन ने ऑल इंडिया सीनियर रैंकिंग बैडमिंटन टूर्नामेंट में खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है. वह सबसे कम उम्र में खिताब जीतने वाले खिलाड़ी बने गए हैं. वर्तमान में लक्ष्य सेन अंडर-17 वर्ग में नेशनल चैंपियन भी हैं.

अल्मोड़ा निवासी लक्ष्य सेन अब सीनियर खिलाड़ियों पर भी भारी पड़ने लगे हैं. ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश में खेली जा रहे टूर्नामेंट में अपने से उम्र में बड़े शटलरों को शिकस्त देकर लक्ष्य ने यह कारनामा कर दिखाया है.

पुरुष एकल वर्ग के फाइनल में 10वीं वरीयता प्राप्त लक्ष्य सेन ने दूसरी वरीयता प्राप्त कर्नाटक के डेनियल फरीद एस को सीधे सेटों में 21-9, 21-19 से हराकर खिताब जीत लिया. इससे पहले खेले गये सेमीफाइनल मैच में लक्ष्य ने टूर्नामेंट के प्रथम वरीयता प्राप्त चंडीगढ़ के श्रेयाश जायसवाल को 21-19, 11-21, 21-18 और क्वार्टर फाइनल में अपने बड़े भाई चिराग सेन को 21-12, 21-15 से हराया था.

लक्ष्य सेन को बैडमिंटन का खेल विरासत में मिला है. उनके पिता डीके सेन राष्ट्रीय बैडमिंटन कोच हैं. उनकी देखरेख में लक्ष्य ने बैडमिंटन का ककहरा सीखा. उत्तरांचल स्टेट बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव ने बताया कि सीनियर रैंकिंग बैडमिंटन टूर्नामेंट में एकल वर्ग का खिताब जीतने वाले लक्ष्य सेन सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं.

वह अभी 17वें वर्ष में चल रहे हैं. उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के ही बोधित जोशी ने टूर्नामेंट में कांस्य पदक हासिल किया है.

लक्ष्य की इस सफलता पर अध्यक्ष एडीजी अशोक कुमार, सचिव बीएस मनकोटी, जिला बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव नवनीत सेठी, आइजी संजय गुंज्याल, बैडमिंटन प्रशिक्षक दीपक रावत ने शुभकामनाएं दी हैं.

जब एक इनिंग में बने थे 1000 से ज्यादा रन

28 दिसंबर, 1926 में फर्स्ट क्लास क्रिकेट का हाइएस्ट स्कोर बना था. ऑस्ट्रेलिया में विक्टोरिया और न्यू साउथ वेल्स के बीच खेले गए इस मैच में विक्टोरिया टीम ने करीब 191 ओवर खेलते हुए अपनी पहली इनिंग में 1107 रन बनाए थे.

ऐसे बना था स्कोर

28 दिसंबर, 1926 को विक्टोरिया ने अपनी पहली इनिंग में 1107 रन बनाए थे. विक्टोरिया की ओर से एक ट्रिपल सेन्चुरी, एक डबल सेन्चुरी, दो सेन्चुरी और दो हाफ सेन्चुरी लगी थीं.

मैच के टॉप स्कोरर विक्टोरिया के ओपनर बिल पॉन्सफोर्ड रहे थे, जिन्होंने 352 रन बनाए थे. ये मैच ऑस्ट्रेलिया के घरेलू टूर्नामेंट शेफील्ड शील्ड में हुआ था.

मैच में विक्टोरिया के खिलाफ न्यू साउथ वेल्स की टीम ने पहली इनिंग में 221 रन और दूसरी इनिंग में 230 रन बनाए थे. विक्टोरिया ने इस मैच में एक इनिंग और 656 रन से जीत दर्ज की थी.

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