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खतरे का संकेत है अखिलेश की बदली ‘बौडी लैंग्वेज’

साढ़े चार साल पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने जिस अखिलेश यादव की मधुर मुस्कान, सौम्य बातचीत और आम नेताओं से अलग ‘बौडी लैंग्वेज’ दिखती थी अब वह बदल गई है. अखिलेश जिन बातों का जबाव नहीं देना चाहते हैं उनसे बचने के लिये जब वह दूसरा जवाब देते हैं तो उसमें उनकी एग्रेशन दिखने लगी है.

समाजवादी पार्टी के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में जब उनसे पूछा गया कि वह इस कार्यक्रम में रहेंगे तो जबाव में गेहूं चावल की बात करने लगे. देखने में वह यह बात हंस कर रहे थे. उनकी हंसी के पीछे छिपा एग्रेशन नजर आ रहा था. पहले इस बात के सवालों को टालते हुये अखिलेश यादव जो बात कहते थे उसमें वह सौम्य नजर आते थे.

पारिवारिक विवाद में समाजवादी पार्टी को लेकर तमाम तरह की धारणायें बन रही है. इससे परिवार और पार्टी दोनों की छवि खराब हो रही है. पहले जो बात परिवार के अंदर की थी अब बाहर आ गई है. पार्टी के कार्यकर्ता जिस तरह से खेमे बंदी कर रहे हैं उससे उनको लाभ हो या नहीं पर पार्टी का नुकसान तय है. मुलायम परिवार का भला पार्टी के भले में ही निहित है.

पारिवारिक विवाद की बातें बाहर आने के बाद से पार्टी का नुकसान होने लगा है. शुरूआत में यह माना जा रहा था कि परिवार की बात परिवार के अंदर सुलझ जायेगी. अब यह विवाद बालू की तरह हाथ से फिसलता जा रहा है. ऐसे में अगर जल्द इसका सकारात्मक हल नहीं निकला तो मुठ्ठी खाली रह जायेगी.

असल में अब तक समझौते की मुद्रा में चल रहे अखिलेश यादव अब अपने को बदल चुके हैं. अब वह गुस्से में नजर आने लगे हैं. जानकार लोग कहते हैं कि अखिलेश यादव ने जिस समय अपने स्वभाव को बदला है वह सही समय नहीं है. उनके गुस्से से पार्टी टूट सकती है. जो परिवार, पार्टी और प्रदेश के हित में किसी भी तरह से नहीं है. यह सच है कि अखिलेश यादव को लेकर जिस तरह से चर्चायें चलती रही है उनको परिवार के अंदर से हवा दी जाती रही है.

इसके बाद भी मुख्यमंत्री जैसे पद पर होने के नाते उनसे उम्मीद की जा रही है कि वह पार्टी को टूटने नहीं देंगे. परिवार के झगड़े का असर पार्टी पर न पड़े इसमें बाकी लोगों के साथ अखिलेश की भी जिम्मेदारी है. यह बात सही हो सकती है कि परिवार के इस विवाद में बाहरी लोगों की साजिश हो सकती है.अब साजिश से बचना और पार्टी को बचाना अखिलेश के लिये बड़ी चुनौती है. नहीं तो इस बात की तोहमत उन पर लगेगी कि वह प्रदेश चला पाये न पार्टी.                 

 

फिल्म ‘रा वन’ का बनेगा सिक्वअल

2011 में दिवाली के समय अनुभव सिन्हा निर्देशित और शाहरुख खान के अभिनय से सजी बड़े बजट की फिल्म ‘रा वन’ प्रदर्शित हुई थी. बौलीवुड में ‘रा वन’ की गिनती असफल फिल्म के रूप में होती है, पर इस तथ्य को स्वीकार करने के लिए फिल्मकार अनुभव सिन्हा तैयार नहीं है. अनुभव सिन्हा का मानना है कि फिल्म ‘रा वन’ को असफल कहना एक फैशन बन गया है.

गौरतलब है की ‘रा वन’ के बाद उन्होंने फिल्म निर्देशन से तौबा कर ली थी. अब पूरे 5 साल बाद वह अपनी पहली और स्लीपर हिट फिल्म ‘तुम बिन’ का सिक्वअल ‘तुम बिन 2’ लेकर आ रहे हैं, मगर अनुभव सिन्हा ‘तुम बिन 2’ को सिक्वअल फिल्म नहीं मानते हैं. उनका मानना है कि ‘तुम बिन 2’ की कहानी अलग है.

हाल ही में अनुभव सिन्हा से ‘सरिता पत्रिका’ की मुलाकात हुई. हमने उनसे एक सीधा सवाल किया कि 2011 में फिल्म ‘रा वन’ के एक्शन दृष्यों की चर्चा हुई थी, मगर ‘रा वन’ को बॉक्स ऑफिस पर सफलता क्यों नहीं मिली थी. इस पर ‘सरिता पत्रिका’ से अनुभव सिन्हा ने कहा, ‘ऐसा लोगों ने प्रचारित किया, पर यह हकीकत नहीं है. मैं ‘रा वन’ को बिलकुल असफल नही मानता. मुझे एक बहुत बड़ा तबका मिलता है, जिसे ‘रा वन’ बहुत पसंद है और लगभग उतना ही बड़ा तबका मिलता है, जिसे ‘रा वन’ से नफरत है. 2011 में ‘रा वन’ ने करीबन 155 करोड़ रूपए कमाए थे. पर लोगों के लिए फैशन हो गया है, यह कहना कि ‘रा वन’ असफल फिल्म थी. इसके निर्माता ने मुझे बताया कि उन्होंने इस फिल्म से पैसा कमाया है. लेकिन मैं अपने आपको बरी नहीं कर रहा हूं. मैं इस बात को मानता हूं कि मुझे ‘रा वन’ को जितनी अच्छी फिल्म बनाना चाहिए था, उतनी अच्छी फिल्म नही बना पाया था.’

जब हमने पूछा कि ‘रा वन’ में गड़बड़ी कहां हुई थी? तो अनुभव सिन्हा ने कहा, ‘फिल्म रा वन खास दर्शकों की फिल्म थी. यह फिल्म बच्चों और युवा वर्ग की थी. फिल्म वीडियो गेम को लेकर थी. पर मुझे लगा कि मैं इस फिल्म के साथ भाभीयों, मांओं व बुआओं को भी जोड़ सकता हूं. इन लोगों को जोड़ने के लिए मैंने इस फिल्म में कुछ चीजें डाल दीं. पर मैं इन लोगों को फिल्म के साथ नहीं जोड़ पाया. मेरी पहली गलती यह रही कि मैं माओं, बुआओं व भाभीयों को फिल्म के साथ जोड़ने में असफल रहा. दूसरी गलती मैंने यह की कि इन्हें जोड़ने के चक्कर में पूरी फिल्म को भ्रमित कर दिया. इसके कारण जिन्हें यह फिल्म पसंद आ सकती थी, उन्होंने भी इस फिल्म को ठुकरा दिया था.’

तो क्या निर्देशक के तौर पर फिल्म ‘रा वन’ के समय अनुभव सिन्हा अपने व्यक्तित्व से अलग हो गए थे? इस सवाल पर उन्होंने कहा, ‘नहीं! मैंने अपने दिमाग का बहुत ज्यादा उपयोग किया था. फिल्म बड़े बजट की व बडे़ स्टार के साथ थी. तो मेरे दिमाग में आया कि बडे़ दर्शक वर्ग तक इस फिल्म को पहुंचाया जाए. जबकि मेरी फिल्म की कहानी इतने बडे़ दर्शक वर्ग के लिए थी ही नहीं. यह फिल्म बच्चों और युवा वर्ग के लिए ही थी. यही गलती मुझसे हुई थी. लोगों को शिकायत यह है कि ‘रा वन’ को ढाई सौ करोड़ कमाने चाहिए थे, पर कमा नहीं पायी. खैर, चिंता ना करें. मैं इसे फिर से बनाने जा रहा हूं.’

जब हमने कहा अच्छा तो अब आप ‘रा वन’ का सिक्वअल बनाने जा रहे हैं, तो इसे लगभग स्वीकार करते हुए अनुभव सिन्हा ने कहा, ‘जी हां. ‘रा वन’ का सिक्वअल बनाने वाला हूं. इस बार हमारी यह फिल्म 500 नहीं 700 करोड़ कमाएंगी. पर मैं इसे सिक्वअल नहीं कहूंगा. क्योंकि कहानी अलग होगी. इस फिल्म में शाहरूख खान होंगे या नहीं, यह भी अभी नहीं कह सकता.’

 उन्होंने आगे कहा, ‘देखिए,2011 में मैंने जो ‘रा वन’ बनायी थी, उससे मेरे अंदर यह आत्म विश्वास पैदा हुआ कि मुझे उस जॉनर की फिल्म दुबारा बनानी चाहिए. पिछली बार मैंने जो गलतियां की थी, वह भी समझ आ रही हैं. इसलिए उससे बेहतर बनाउंगा. आप मानकर चलें कि ‘रा वन’ का जो जॉनर है, उसका भविष्य उज्ज्वल है.’

‘ऐ दिल है मुश्किल’: किसकी जीत?

एक माह के विवाद के बाद अंततः करण जोहर की फिल्म ‘‘ऐ दिल है मुश्किल’’ के प्रदर्शन का रास्ता साफ हो गया है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे, करण जोहर व प्रोड्यूसर गिल्ड के नेताओं ने एक बैठकर कर निर्णय लिया.

इस बैठक के बाद प्रोड्यूसर्स गिल्ड के मुकेश भट्ट ने कहा कि फिल्म ‘‘ऐ दिल है मुश्किल’’ के प्रदर्शन की राह साफ हो गयी है. मुकेश भट्ट व करण जोहर इसे अपनी जीत बता रहे हैं. मुकेश भट्ट ने कहा कि देश की भावनाओं की कद्र करते हुए प्रोड्यूसर्स गिल्ड ने तय किया है कि अब आगे से किसी पाकिस्तानी कलाकार के साथ काम नहीं करेंगे.

उसके बाद राज ठाकरे ने प्रेस काँफ्रेंस करके मीडिया को बताया कि प्रोड्यूर्स गिल्ड ने उनकी तीन मांगे मान ली, इसलिए अब वह फिल्म के प्रदर्शन में रूकावट नहीं डालेंगे. लेकिन उम्मीद है कि लोग बहिष्कार करेंगें.

राज ठाकरे ने कहा- ‘‘करण जोहर ने आश्वासन दिया है कि फिल्म की शुरूआत से पहले सैनिकों को सलामी दी जाएगी. प्रोड्यूसर्स गिल्ड ने आश्वस्त किया है कि अब पाकिस्तानी गायक, अभिनेता या किसी भी पाकिस्तानी तकनीशियन को लेकर बौलीवुड में फिल्म नहीं बनेगी. इसके अलावा जिस फिल्म में पाकिस्तानी कलाकार हैं, उस फिल्म का निर्माता आर्मी रिलीफ फंड में पांच करोड़ रूपए देगा. फिल्म के प्रदर्शन से पहले निर्माता को यह बात लिखकर देनी होगी.’’

ज्ञातव्य है कि करण जोहर की फिल्म ‘‘ऐ दिल है मुश्किल’’ में पाकिस्तानी कलाकार फवाद खान ने अभिनय किया है. और पिछले एक माह से करण जोहर व प्रोडूसर्स गिल्ड के मुकेष भट्ट, अनुराग कश्यप, हंसल मेहता व महेश भट्ट चिल्ला रहे थे कि पाकिस्तानी कलाकारों पर बैन लगाना उचित नही है. पर अब प्रोड्यूसर्स गिल्ड कह रहा है कि वह पाकिस्तानी कलाकारों के साथ काम नहीं करेंगे.

बहरहाल, इस निर्णय के बाद बौलीवुड के बिचौलिए चर्चा कर रहे हैं कि करण जोहर व उनकी टीम पिछले एक माह से विवाद की शक्ल देकर अपनी फिल्म ‘‘ऐ दिल है मुश्किल’’ को चर्चा में बनाए हुए थे. करण जोहर की टीम अपनी फिल्म को फायदा दिलाने के लिए ही काम कर रही थी. अन्यथा करण जोहर पहले दिन ही इसी तरह की बैठक कर यही फैसला ले सकते थे.

व्‍हाट्सएप में आया वीडियो कॉलिंग फीचर

व्‍हाट्सएप ने यूजर्स के लिए वीडियो कॉलिंग फीचर की शुरुआत कर दी है. हालांकि अभी यह अपडेट सिर्फ विंडोज फोन यूजर्स के लिए उपलब्‍ध है. कई रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फीचर व्‍हाट्सएप बीटा v2.16.260 के अपडेट में पहले से इनेबल होकर आ रहा है.

वीडियो कॉल करने के लिए यूजर्स को सिर्फ कॉल बटन दबाना होगा और फिर ‘वॉयस’ और ‘वीडियो’ विकल्‍प में से एक को चुनना होगा. इसमें यूजर्स को फ्रंट कैमरा से रियर कैमरा और कॉल म्‍यूट करने का विकल्‍प दिया गया है. इसके अलावा यूजर्स को मिस्‍ड कॉल आने पर नोटिफिकेशन भेजा जाएगा.

कॉल बैक करने के लिए आपको उसी मेन्‍यू पर क्लिक करना होगा. अभी तक यह नहीं बताया गया है कि यह फीचर एंड्रॉयड और आईओएस पर कब आएगा. हालां‍कि जब यह अपडेट विंडोज फोन में आ गया है तो एंड्रॉयड और आईओएस प्‍लेटफॉर्म पर भी जल्‍द पहुंचने की उम्‍मीद है.

व्हाट्सएप ने अपने यूजर्स के लिए एक नया कैमरा फीचर अपनी एप में जोड़ा है जिसके चलते अब वे अपनी फोटो या वीडियो पर लिख सकते हैं और उसमें इमोजी भी जोड़ सकते हैं. यानी अब कोई भी यूजर्स नए वर्जन में फोटो और वीडियो को कस्टमाइज कर सकता है.लिहाजा इस नए फीचर के प्रयोग से यूजर फोटो और वीडियो में कुछ भी लिख सकते हैं और फोटो या वीडियो में इमोजी का यूज कर अपनी फीलिंग शेयर कर सकते हैं. और ये सब करना बहुत ही आसान होगा. जैसे ही आप किसी को फोटो या वीडियो भेजेंगे तो आटोमैटिकली फोटो या वीडियो को एडिट करने का टूल आपके सामने आ जाएगा और फिर आप उसे यूज कर पाएंगे.

व्हाट्सएप ने अपने ब्लॉग पर लिखा है, ‘‘आज हम आपके अपने दुनियाभर में फैले दोस्तों एवं परिवारों के साथ साझा की जाने वाली फोटो और वीडियो को और अधिक व्यक्तिगत रूप (कस्टमाइज) देने जा रहे हैं. व्हाट्सएप के नए कैमरा फीचर से अब आप अपने वीडियो और फोटो में लिख सकते हैं साथ ही इमोजी भी जोड़ सकते हैं.’

RBI ने आसान किए FDI के नियम

आरबीआई ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियमों को और सरल बना दिया है. इस बीच वह फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट-बैंक डिपॉजिट के मैच्योर होने पर 26 अरब डॉलर देश से बाहर जा सकने की स्थिति निपटने की तैयारी भी कर रहा है. आरबीआई ने बैंकों और बीमा कंपनियों को छोड़कर अन्य रेगुलेटेड फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियों में ऑटोमैटिक रूट से 100% फॉरेन इनवेस्टमेंट की इजाजत दी है.

आरबीआई ने स्टार्टअप्स में वेंचर कैपिटल फंड्स के निवेश के नियम भी आसान किए हैं. साथ ही, उसने एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग के नियमों में ढील दी है. भारत में 2015 के दौरान एफडीआई की मात्रा 28% बढ़कर 44.2 अरब डॉलर रही. यूनाइटेड नेशंस की जून में आई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि इस साल इंडिया में एफडीआई का आंकड़ा 60 अरब डॉलर से ज्यादा हो सकता है.

भारत में अधिकांश इक्विटी इनवेस्टमेंट सिंगापुर, मॉरीशस, अमेरिका, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन से आता है. विदेशी निवेश की आवक और बढ़ाने के लिए आरबीआई ने दूसरी फाइनेंशियल सर्विसेज में ऑटोमैटिक रूट से 100% विदेशी निवेश की इजाजत दी है. इनमें ऐसी एक्टिविटीज शामिल हैं, जिन्हें आरबीआई, सेबी और इरडा जैसे रेगुलेटर रेगुलेट करते हों.

आरबीआई ने कहा कि जो फाइनेंशियल सर्विसेज रेगुलेटेड न हों या आंशिक तौर पर रेगुलेटेड हों या जिनके रेगुलेशन के बारे में अस्पष्टता हो, उनमें 100% तक विदेशी निवेश की इजाजत सरकारी मंजूरी के जरिए होगी. जिस एक्टिविटी को खासतौर से किसी एक्ट के जरिए रेगुलेट किया जा रहा हो, उसमें विदेशी निवेश उस एक्ट में बताई गईं फॉरेन इनवेस्टमेंट लेवल्स/लिमिट्स के मुताबिक होगा. 

नोट 7 के बाद अब आइफोन 7 में भी हुआ ब्लास्ट

सैमसंग के गैलेक्सी नोट 7 के ब्लास्ट होने की खबरें तो आपने सुनी ही होंगी. लेकिन आज हम आपको ऐसी खबर बताने जा रहे हैं जिसे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे. दरअसल, गैलेक्सी नोट 7 के बाद ऑस्ट्रेलिया के एक व्यक्ति ने ये दावा किया है कि आईफोन 7 उसकी कार में ब्लास्ट हो गया है. उस व्यक्ति ने बताया कि जब फोन ब्लास्ट हुआ तब वो उस कार में नहीं था इसलिए उसे किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ.

एक रिपोर्ट की मानें तो मैट जोन्स नाम का एक व्यक्ति जो कि एक सर्फिंग इंस्ट्रक्टर है, वो अपना आईफोन 7 कार में छोड़कर सर्फिंग क्लास देने गया था. जब वो वापस लौटा तो उसकी कार की खिड़कियां बिल्कुल काली हो चुकी थी. जैसे ही उसने कार का दरवाजा खोला तो उसकी कार में आग लग गई थी. मैट जोन्स ने दावा किया है कि ये हादसा आईफोन के ब्लास्ट होने के चलते ही हुआ है.

फिलहाल इस हादसे की जानकारी एप्पल कंपनी को दे दी गई है. कंपनी इस मामले की जांच पड़ताल कर रही है. गैलेक्सी नोट 7 के बाद आईफोन 7 का ब्लास्ट होना एक गंभीर समस्या है. हालांकि, एप्पल इस मामले की गहन जांच कर रही है. प्राप्त खबरों की मानें तो कंपनी इसकी वजह पता लगाने की पूरी कोशिश कर रही है.

ATM सेंध: सर्जिकल स्ट्राइक का बदला?

बैंकों के डेबिट कार्ड्स से जुड़ी अहम जानकारी में लगी सेंध के मामले में नई जानकारियां सामने आई हैं. जानकारी मिली है कि साइबर हमलों को लेकर बार-बार अलर्ट किए जाने के बावजूद बैंकों ने इस खतरे को कोई खास तवज्जो नहीं दी. देश पर होने वाले साइबर हमलों पर नजर रखने वाली भारत सरकार की सर्वोच्च निगरानी एजेंसी कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम-इंडिया (CERT-In) ने भी ऐसी कई चेतावनियां जारी की थीं. यह एजेंसी बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को वक्त-वक्त पर संभावित साइबर खतरों के बारे में अडवाइजरी जारी करती है.

पाक से साइबर हमले की चेतावनी

CERT-In ने इस साल जुलाई और अगस्त में भी चेतावनियां जारी की थीं. इसी क्रम में सबसे ताजा अलर्ट इस साल 7 अक्टूबर को दी गई. वॉर्निंग दी गई कि पाकिस्तान की तरफ से बैंकों के नेटवर्क पर 'साइबर हमला' हो सकता है. यह अलर्ट जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमलों के बाद सीमा पर भारत के जवाबी हमले के मद्देनजर जारी की गई. इस एडवाइजरी के जारी होने से एक महीने पहले सितंबर की शुरुआत में ही बैकों को साइबर सुरक्षा में सेंध से जुड़ी शिकायतें मिलने लगी थीं. वहीं, सीमा पर भारत के जवाबी हमले के बाद पाकिस्तानी हैकर्स द्वारा विभिन्न भारतीय वेबसाइट्स को निशाना बनाया गया. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसे 7 हजार हमले पाकिस्तानी हैकर्स ने अंजाम दिए.

क्या है मामला?

मैलवेयर इन्फेक्शन की वजह से बैकों की साइबर सुरक्षा में लगी सेंध के कारण करीब 32 लाख डेबिट कार्ड की क्रिटिकल इन्फर्मेशन खतरे में पड़ने की बात सामने आई है. हालांकि, नैशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के मुताबिक, पूरी दुनिया में सिर्फ 1.3 करोड़ रुपए की अवैध धन निकासी हुई है. सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों और पेमेंट गेटवे कंपनियों को इस मामले की जांच करने का आदेश दिया है. हालांकि, माना जा रहा है कि अगर जारी अलर्ट को लेकर त्वरित और ठोस कार्रवाई होती तो इस साइबर हमले को काफी हद तक बेअसर किया जा सकता था.

बैंकों ने दर्ज नहीं कराई शिकायत

इस सेंध की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले बैंकों में एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, यस और एक्सिस बैंक शामिल हैं. सभी का कहना है कि उनका सिस्टम दुरुस्त है और प्रभावित कार्ड्स का इस्तेमाल शायद उन एटीएम पर हुआ जो संबंधित बैंकों के नेटवर्क के बाहर के थे. 32 लाख कार्ड्स की जानकारी में सेंध लगने की आशंका की खबर मीडिया में आने के बाद CERT-In और द नैशनल क्रिटिकल इन्फर्मेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर (NCIIPC) ने एसबीआई, एक्सिस और एचडीएफसी को ईमेल भेजकर कहा था कि वे इस मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कराएं. हालांकि, बैंकों की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई. अफसरों का कहना है कि बैंकों द्वारा इस मामले को रिपोर्ट न करना भी नियमों का उल्लंघन है.

फोन बिना रूट किए करें ये जरूरी टास्क

भारत के लिहाज से देखें तो यहां ज्यादातर यूजर्स एंड्रायड स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन एंड्रायड डिवाइस में कई जरुरी टास्क परफॉर्म करने के लिए स्मार्टफोन को रूट करने की जरुरत पड़ती है. स्मार्टफोन को रूट करना हमेशा सही नहीं माना जाता है. इसलिए कई लोग फोन को रूट नहीं करते हैं और ऐसा करने से कतराते हैं.

हालांकि एंड्रायड डिवाइस में आप स्मार्ट हैक्स के जरिए कई काम कर सकते हैं और आपको इसे रूट करने की भी आवश्यकता नहीं होगी. आज हम आपको ऐसे ही कमाल के हैक्स बताने जा रहे हैं जो आपके बेहद काम आएंगे और आपको इस्तेमाल करने के लिए फोन रूट नहीं करना होगा.

अपना डेस्कटॉप फोन से करें कंट्रोल

गूगल ने हाल ही में एक नया एप पेश किया है, जिसका नाम है क्रोम रिमोट डेस्कटॉप. यह एप आपको अपने एंड्रायड फोन से डेस्कटॉप को कंट्रोल करने देती है. अपने डेस्कटॉप को कंट्रोल करने के लिए आपको अपने स्मार्टफोन में इस एप को डाउनलोड करना होगा और उसी नाम का क्रोम एक्सटेंशन अपन डेस्कटॉप पर भी एड करना होगा.

स्क्रीन रिकॉर्डिंग

यदि आपके घर पर कोई बच्चा है या फिर कोई ऐसे टीनेजर जो बार बार आपका फोन लेते हैं तो बेहतर है कि आप अपने फोन में इन में से कोई एक एप जरुर रखें. Rec, AZ Screen recorder या Shou एप्स हैं जो आप इस्तेमाल कर सकते हैं. इन एप्स के लिए आपको फोन रूट करने की जरुरत नहीं होगी.

इनकमिंग और आउटगोइंग कॉक्स का रिकॉर्ड

आटोमेटिक कॉल रिकॉर्डर जैसी एप्स को एंड्रायड स्मार्टफोन रूटिंग की जरुरत नहीं है. आपको केवल इस एप्स को डाउनलोड कर इसे इंस्टॉल करना होगा.

नेविगेशन बटन एप शॉर्टकट

फोन में ऐसी कई एप्स होती हैं जो हम अक्सर इस्तेमाल करते हैं. इन एप्स को आप चाहें तो शॉर्टकट में इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे आपके लिए इन्हें इस्तेमाल करना आसान हो जाएगा.

बैकग्राउंड में प्ले करें यूट्यूब

जब यूट्यूब पर वीडियो देख रहे हों और एकदम से आप होमस्क्रीन पर जाएं तो आपका वीडियो चला जाता है और यूट्यूब बंद हो जाता है. लेकिन थर्ड पार्टी एप Awesome pop-up video का इस्तेमाल करने से आप यूट्यूब का इस्तेमाल आसानी से कर सकते हैं.

पेटीएम से भी मिलेगा आपको रेल का टिकट

पेटीएम से मोबाईल रिचार्ज, ऑटो-टैक्सी का भाड़ा और बिजली, पानी का बिल तो आपने कई बार अदा किया होगा लेकिन हो सकता है कि आने वाले दिनों में आप पेटीएम से ही रेल का टिकट खरीद सकें तो कैसा रहेगा? जी हां. यह संभव हो सकता है और रेलवे ने इसकी कवायद भी शुरू कर दी है. रेलवे को लग रहा है कि अगर उसकी यह स्कीम अमल में आ जाती है तो इससे न सिर्फ पैसेंजर के लिए टिकट लेना आसान हो जाएगा बल्कि इससे रेलवे का खर्चा कम हो जाएगा और पेटीएम को भी फायदा मिलेगा.

इंडियन रेलवे के सूत्रों के मुताबिक पेटीएम से अनरिजर्व टिकट की संभावनाओं को टटोलने के लिए काफी कवायद हो चुकी है. फिलहाल कुछ ऐसे मसले हैं, जिनके मामले में अभी स्पष्टीकरण दिए जा रहे हैं ताकि जब इसे लागू किया जाए तो किसी तरह की दिक्कत न हो. अगर रेलवे अधिकारी स्पष्टीकरण से संतुष्ट हो जाते हैं तो आने वाले दिनों में पेटीएम से रेल टिकट खरीदना संभव हो जाएगा.

इंडियन रेलवे के एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि दरअसल, अभी रिजर्व टिकट खरीदने के लिए तो ऑप्शन हैं कि रेलवे काउंटर के अलावा खुद ही कंप्यूटर से रेल टिकट रिजर्व कराया जा सकता है लेकिन अनरिजर्व टिकट के लिए अभी भी दिक्कत है. कुछ जगह जरूर पेपरलेस टिकट मिलने लगा है लेकिन अगर सभी रूटों पर पेपरलेस टिकट सिस्टम शुरू किया जाए तो उसमें काफी लंबा वक्त लगेगा. ऐसे में अगर पेटीएम वाला विकल्प अपनाया जाए तो इसमें ज्यादा वक्त नहीं लगेगा. अगर एक बार रेलवे बोर्ड ने इस प्रस्ताव पर अमल का फैसला कर लिया तो उसके बाद एक महीने में पूरे भारत में अनरिजर्व रेल टिकट लेना आसान हो जाएगा.

रेलवे बोर्ड के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक अगर फैसला हो जाता है तो अनरिजर्व रेल टिकटिंग सिस्टम को पेटीएम सिस्टम से जोड़ना होगा. इसके बाद जिस भी व्यक्ति के पास स्मार्ट फोन होगा, वह पेटीएम से टिकट ले सकेगा. उसके तहत सिर्फ एक क्यूआर कोड होगा, जिसे स्कैन करना होगा. उसके बाद रेल यात्रा शुरू होने से लेकर समाप्त होने का स्टेशन का नाम भरना होगा. किराए की राशि सीधे रेलवे के अकाउंट में जमा हो जाएगी और यात्री के मोबाइल पर रेल टिकट आ जाएगा.

फीफा रैंकिंग में भारत ने लगाई छलांग

भारतीय फुटबॉल टीम ने फीफा की ताजा रैंकिंग में 11 स्थान की लंबी छलांग लगाते हुए 137वां स्थान हासिल किया. अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ (एआईएफएफ) ने इसकी घोषणा की. एआईएफएफ के मुताबिक यह भारत की अगस्त, 2010 के बाद सर्वोच्च रैंकिंग है.

भारत ने 114वीं रैंकिंग वाली टीम प्योर्टो रिको को सितंबर में हुए दोस्ताना मैच में मात दी थी, उसका फायदा भारत को इस रैंकिंग में मिला है. भारत ने इस दौरान 230 अंक एकत्रित किए. टीम के मुख्य कोच स्टीफन कोंस्टैनटाइन इस बात से खुश हैं. एआईएफएफ की वेबसाइट ने कोच के हवाले से लिखा है, ‘जब मैं अपने दूसरे कार्यकाल के लिए यहां आया था, तब मेरा लक्ष्य हमारी फीफा रैकिंग में सुधार लाने का भी था. अभी तक हमें जो परिणाम मिले हैं उससे यह पता चलता है कि हमें सफलता मिली है.’

उन्होंने कहा, ‘यह पूरी टीम का प्रयास है. अगर एआईएफएफ के अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और महासचिव कुशल दास मुझे मेरे तरीके से काम करने नहीं देते तो यह मुमकिन नहीं हो पाता.’ कोंस्टैनटाइन ने जब फरवरी 2015 में दूसरी बार टीम की जिम्मेदारी संभाली तब भारतीय टीम की रैंकिंग 171वीं थी. मार्च 2015 में टीम को दो स्थान का नुकसान हुआ था और वह 173वीं रैकिंग पर फिसल गई थी.

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