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कबड्डी वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचा भारत

कबड्डी वर्ल्ड कप के दूसरे सेमीफाइनल में जिसकी उम्मीद थी वही हुआ. मेजबान भारत ने दूसरे सेमीफाइनल में थाईलैंड को 53 अंकों के अंतर से मात देते हुए फाइनल में जगह बना ली है. आसान मुकाबले में भारत ने थाईलैंड को 73-20 से मात देते हुए फाइनल में प्रवेश किया. फाइनल में उसका सामना ईरान से होगा. ईरान ने कोरिया को पहले सेमीफाइनल में कड़े मुकाबले में 28-22 से हराते हुए फाइनल में जगह बनाई है.

सभी को इस ड्रीम फाइनल की उम्मीद थी और अब शनिवार को एशियाई कबड्डी के दो दिग्गज विश्व विजेता बनने के लिए एक दूसरे से जोर आजमाइश करेंगे. भारत को सेमीफाइनल मुकाबला जीतने में किसी तरह की कोई परेशानी नहीं हुई. उसने शुरुआत से ही बेहतरीन खेल दिखाया और लगातार पांच अंक हासिल किए. थाईलैंड की टीम को इसके बाद एक अंक मिला. लेकिन भारत ने लगातार अंक लेना जारी रखा और पहले हाफ की समाप्ति तक 36-8 की बढ़त ले ली. मेजबानों का फाइनल में पहुंचना तय लग रहा था.

स्टेडियम में हर तरफ भारत के समर्थन की आवाजें थीं. दूसरे हाफ में दर्शकों को बस अंतिम मिनट का इंतजार था. भारत ने इस हाफ में भी अपना दबदबा कायम रखा और थाई खिलाड़ियों को आसानी से आउट किया. इस हाफ में मेजबानों ने 37 अंक अपने खाते में डाले. वहीं थाईलैंड की टीम सिर्फ 12 अंक ही अपने नाम कर सकी. भारत के लिए अजय ठाकुर ने इस मैच में कुल 11 अंक अपने नाम किए. इस मैच से पहले उनके 41 अंक थे. अब उनके कुल 52 अंक हो गए हैं जोकि बांग्लादेशी कप्तान अरुदजमन मुंशी के बराबर हैं.

भारत ने रेड से 42 और टैकल से 18 अंक अपने नाम किए. ऑलआउट से वह 12 अंक हासिल करने में सफल रही. उसे एक अतिरिक्त अंक भी मिले. वहीं थाईलैंड ने रेड से 12 और टैकल से चार अंक जोड़े. ऑलआउट से उसे एक भी अंक नहीं मिला. वह एक अतिरिक्त अंक हासिल करने में सफल रही.

सुशील कुमार ने कुश्ती छोड़ WWE किया जॉइन

भारत के ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट कुश्ती खिलाड़ी सुशील कुमार के वर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट (WWE) जॉइन करने की खबर है. हालांकि सुशील की ओर से अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की गई है. WWE जॉइन करने की खबरों के बाद से सुशील ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है. सुशील कुमार से जब संपर्क साधने की कोशिश की जाती है तो वह किसी बहाने से फोन काट देते हैं और फिर फोन स्विच ऑफ कर देते हैं.

ओलंपिक में कुश्ती का सिल्वर मेडल देश के नाम करने वाले सुशील 2016 में रियो में हुए ओलंपिक के लिए चोट के कारण क्वालिफाई नहीं कर पाए थे. इंटरनैशनल रेसलिंग फेडरेशन (IWF) ने सुशील की 66 किलोग्राम कैटिगरी हटा दी थी. उन्होंने IWF से दोबारा फ्रेश ट्रायल कराने की गुजारिश की. उसके बाद सुशील ने कोर्ट का सहारा भी लिया.

कोर्ट का फैसला अपने पक्ष में आने पर सुशील के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रहने के लिए कोई ऑप्शन नहीं बचा था. सूत्रों के अनुसार WWE के चैंपियन रहे ग्रेट खली ने सुशील को WWE में उतरने के लिए प्रोत्साहित किया. उसके बाद खली की मदद से 33 साल के सुशील ने WWE के अधिकारियों से मिल कर डील फाइनल की है.

31 अक्टूबरः विषयवस्तु के साथ न्याय नहीं

मराठी फिल्म ‘‘धग’’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म निर्देशक शिवाजी लोटन पाटिल से कुछ दिन पहले जब उनकी 1984 के सिख विरोधी दंगों पर आधारित फिल्म ‘‘31 अक्टूबर’’ को लेकर चर्चा हुई थी, तो उस वक्त शिवाजी लोटन पाटिल ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा था कि, ‘‘सेंसर बोर्ड ने हमारी फिल्म के 40 दृश्य काट दिए.

उन्होंने बीच बीच में दृश्य काटे हैं, अब जो दृश्य हटा, उसकी जगह खालीपन आ गया, उसे भरने के चक्कर में आस पास के दृश्य भी हटाए, तो राजनीति के सारे  दृश्य हट गए.

आपके पास 12 पत्ते हैं, उसमें से दो पत्ते निकाल दें, तो वह जगह तो खाली हो ही जाएगी. फिल्म की आत्मा तो रही नहीं. हम उस वक्त की घटना की वास्तविकता को दिखाना चाहते थे, पर अब यह एक परिवार की भावानात्मक कहानी रह गयी है.’’

शायद इसी के चलते 31 अक्टूबर 1984 को पूर्व प्रधानमंत्री स्व.इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जिस तरह की घटनाएं हुई थीं, जिस तरह से सिस्टम व राज्य प्रायोजित कारनामे हुए थे, उनसे वाकिफ लोगों को फिल्म ‘‘31 अक्टूबर’’ देखकर इस बात का अहसास होना स्वाभाविक है कि फिल्म में हकीकत नहीं बयां की गयी है.

फिल्म ‘‘31 अक्टूबर’’ की शुरूआत 31 अक्टूबर 1984 की सुबह सात बजे से होकर देर रात तक चलती है. कहानी के केंद्र में सरदार देवेंद्र सिंह (वीर दास), उनकी पत्नी तेजेंदर कौर(सोहा अली खान) और उनके तीन छोटे बच्चे हैं.

फिल्म की शुरूआत में दिखाया गया है कि देवेंद्र सिंह व उनकी पत्नी तेजेंदर सिंह कितने भले लोग हैं. हर इंसान की मदद की ही बात सोचते हैं.

मगर इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख विरोधी दंगो की अग्नि में पूरा देश जल उठता है. तेंजेदर कौर को पता चलता है कि किस तरह उनकी कई रिश्तेदारों के साथ साथ सरदार यानी कि सिख परिवारों का कत्लेआम हो रहा है. उस वक्त जिन पर देवेंद्र सिंह को सबसे ज्यादा भरोसा था, वह भी उनसे कन्नी काट लेते हैं. फिर भी देवेंद्र सिंह के कुछ हिंदू दोस्त उस रात देवेंद्र सिंह के परिवार को बचाने को आगे बढ़ते हैं.फिर इनके साथ दिल्ली के  एक छोर से दूसरे छोर पहुंचने तक जो कुछ होता है,वही सब फिल्म में नजर आता है.

उस वक्त की असलियत को दिखाने में असफल फिल्मकार व पटकथा की कमी के लिए उसके पास अब सेंसर बोर्ड का बहाना तो है ही. निर्देशक व पटकथा लेखक ने उस वक्त जिस तरह से राजनेता इस कत्लेआम का हिस्सा बने थे, उसका जिक्र नहीं कर पाया. पिछले 32 वर्ष से अदालत में जो मुकदमे चल रहे हैं, उनका सही ढंग से जिक्र भी फिल्म में नहीं है. संजीदा विषय पर एक स्तरहीन फिल्म बनकर रह गयी. फिल्म के संवाद बहुत घटिया हैं. इस तरह की फिल्म के लिए संवाद बहुत मायने रखते हैं.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो वीर दास ने भले ही चेहरे पर दाढ़ी व सिर पर सिख पगड़ी बांध ली हो, पर वह दर्शकों से जुड़ नहीं पाते. वह एक गंभीर किरदार को निभाने में बुरी तरह से असफल रहे हैं. इस फिल्म से यह बात उभरती है कि वीर दास सिर्फ हास्य किरदारों के लिए ही ठीक है.

एक सरदारनी के किरदार में सोहा अली से बहुत आपेक्षाएं थीं, जिसे पूरा करने में वह काफी हद तक सफल रही हैं. अपनी आंखों के सामने किसी अपने की हत्या होते देख कुछ न कर पाने व मजबूर चुप रह जाने के दर्द को वह बयां कर जाती हैं. एनआरआई से प्यार कर बैठी लड़की के छोटे किरदार में सेजल शाह प्रभावित नहीं कर पाती.

फिल्म के निर्माता हैरी सचदेवा की तरफ से फिल्म के अंत में एक पंक्ति आती है ‘‘ए ट्रिब्यूट बाय हैरी सचदेवा’’. पर फिल्म देखने पर लगता है कि सिख विरोधी दंगों में पीड़ितों के संग यह फिल्म पूरी तरह से न्याय नहीं कर पायी. फिल्म में एक शराबी द्वारा एक सरदार को सुरक्षा देने के नाम पर उसके पास मौजूद पैसा, घड़ी व सोने की चैन वगैरह लेने के बाद उसे दंगाईयों के हवाले कर देने के दृश्य  को पिरोकर फिल्मकार ने मुख्य संजीदगी से भटकाव का अहसास कराता है. इस  दृश्य की वजह से पिछले 32 वर्ष से अदालत में चल रहे मुकदमें बेमानी हो जाते हैं.

फिल्मकार के इरादों पर सवाल नहीं उठाया जा सकता. यह फिल्म अंत में यह संदेश देती है कि 1984 के सिख विरोधी दंगे के पीड़ितों को अभी तक न्याय नहीं मिल पाया. मगर जिस तरह से फिल्म बनी है, उससे इसे अपेक्षित दर्शक मिल सकेंगे,इसमें संदेह है.

1 घंटा 42 मिनट की अवधि वाली फिल्म के लेखक व निर्माता हैरी सचदेवा, निर्देशक शिवाजी लोटन पाटिल, कैमरामैन रमानी रंजन दास तथा कलाकार हैं- सोहा अली खान, वीर दास, सेजल शाह, नागेश भोसले, दीपराज राणा, लखा लखविंदर सिंह, विनीत शर्मा, दया शंकर पांडे व अन्य.

फेसबुक, ट्विटर ने IPL मीडिया अधिकार की निविदा खरीदी

सोशल नेटवर्किंग की दिग्गज कंपनियां ट्विटर और फेसबुक उन 18 कंपनियों में शामिल हैं जिन्होंने लुभावनी इंडियन प्रीमियर लीग के मीडिया अधिकार (प्रसारण, डिजिटल और मोबाइल) निविदा के लिए आमंत्रण (आईटीटी) खरीदा है.

बीसीसीआई ने बयान में कहा, ‘‘इंडियन प्रीमियर लीग मीडिया अधिकार आईटीटी को प्रमुख मीडिया और प्रौद्योगिकी कंपनियों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है. आईटीटी दस्तावेज 19 सितंबर से 18 अक्तूबर 2016 तक बिक्री के लिए उपलब्ध था.’’

जिन अधिकारों की पेशकश की जा रही है, उसमें भारतीय उपमहाद्वीप के 2018 से 2027 तक (10 आईपीएल सत्र: टेलीविजन अधिकार), भारतीय उप महाद्वीप के 2018 से 2022 (पांच आईपीएल सत्र) तक डिजिटल अधिकार और शेष विश्व के 2018 से 2022 (पांच आईपीएल सत्र) तक के अधिकार शामिल हैं.

मीडिया अधिकार की बोली जमा कराने की प्रक्रिया 25 अक्तूबर शुरू होगी. बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने कहा, ‘यह भारतीय क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक लम्हा होगा. आईपीएल मीडिया अधिकारों के लिए मीडिया और प्रौद्योगिकी कंपनियों की प्रतिक्रिया से मैं खुश हूं’

ट्विटर और फेसबुक के अलावा स्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्‍स प्राइवेट लिमिटेड और रिलायंस जियो डिजिटल सर्विस प्राइवेट लिमिटेड दावेदारों में शामिल हैं. सूत्रों के अनुसार बीसीसीआई को इन अधिकारों की बिक्री से चार अरब 50 करोड़ डालर की कमाई की उम्मीद है.

आईटीटी खरीदने वालों की सूची

स्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, एमेजन सेलर सर्विस सर्विस प्राइवेट लिमिटेड, टाइम्स इंटरनेट लिमिटेड, फालोअन इंटरेक्टिव मीडिया प्राइवेट लिमिटेड, ताज टीवी प्राइवेट लिमिटेड, सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्‍स प्राइवेट लिमिटेड, सुपर स्पोर्ट्स इंटरनेशल प्राइवेट लिमिटेड, रिलायंस जियो डिजिटल सर्विस प्राइवेट लिमिटेड, गल्फ डीटीएच एफजेड एलएलसी, ग्रुपएम मीडिया इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, बीइन आईपी लिमिटेड, इकोनेट मीडिया लिमिटेड, स्काई यूके लिमिटेड, ईएसपीएन डिजिटल मीडिया :इंडिया: प्राइवेट लिमिटेड, बीटीजी लीग सर्विसेज, बीटी पीएलसी ट्विटर इंक, फेसबुक इंक.

अपने स्मार्टफोन को बनाएं राउटर

अगर आप अपने एंड्रायड फोन या आईफोन से मोबाइल डेटा को वाई-फाई राउटर या मोबाइल हॉट स्‍पॉट बनाना चाहते हैं तो हम आपको बताते हैं कि आप ऐसा किस प्रकार कर सकते हैं. जानिए किस प्रकार अपने मोबाइल के डेटा को वाई-फाई या हॉटस्‍पॉट बना दें.

एंड्रायड यूजर्स के लिए:

अगर आप अपनी एंड्रायड डिवाइस को राउटर बनाना चाहते हैं तो निम्‍न्‍लिखित स्‍टेप को फॉलो करें-

1. सबसे पहले अपनी डिवाइस के मेन्‍यू में जाएं. और उसमें से सेटिंग को क्लिक करें.

2.स्‍क्रॉल डाउन करें, आपको टिथरिंग और मोबाइल हॉटस्‍पॉट का ऑप्‍शन दिखाई देगा.

3.पोर्टबल वाई-फाई स्‍पॉट को सेलेक्‍ट करेंए अब आपका फोन राउटर की तरह काम करने लगा है.

4. किसी भी डिवाइस को आप अपने फोन के हॉॉटस्‍पॉट से कनेक्‍ट कर सकते हैं.

आईफोन यूजर्स के लिए:

अगर आपके पास आईफोन है और आप उसमें हॉटस्‍पॉट को एक्टिव करना चाहते हैं तो निम्‍नलिखित स्‍टेप को फॉलो करें-

1. अपने फोन के होम स्‍क्रीन से सेटिंग में जाएं.

2. पर्सनल हॉट स्‍पॉट पर क्लिक करें और इसमें अपनी इच्‍छानुसार ऑन या ऑफ कर दें.

3. ऑन करने पर आपके सामने एक वाई-फाई पासवर्ड आ जाएगा और आप उसे कहीं नोट कर लें.

4. अब आप उस पासवर्ड से किसी भी डिवााइस को कनेक्‍ट कर सकते हैं.

फोन से राउटर इस्‍तेमाल करने के फायदे:

फोन से राउटर को इस्‍तेमाल करने की आवश्‍यकता आपको कभी भी पड़ सकती है. आप किसी सफर में हैं और अचानक से आपको लैपी पर काम आ जाता है तो आप आसानी से कनेक्‍टीविटी बना सकते हैं और अपने काम को पूरा कर सकते हैं.

एडल्ट वेबसाइट ब्राउज करने के हैं ये बड़े खतरे

पॉर्न देखने का शौक आपको मुश्किल में डाल सकता है. इसे नैतिक रूप से गलत माना जाना चाहिए या नहीं, यह एक बिल्कुल अलग बहस है. लेकिन प्रिवेसी और सिक्यॉरिटी के ऐंगल से तो यह खतरे से बिल्कुल खाली नहीं है. यह एक ऐसी चीज है जिसमें बड़े-बड़े सिक्यॉरिटी एक्सपर्ट्स मात खा जाते हैं.

1. यूजर ट्रैकिंग और प्रोफाइल

क्या आप जानते हैं कि एजेंसियां यह ट्रैक करती हैं कि आप किस वेबसाइट पर क्या ऐक्शन ले रहे हैं और किस तरह के लिंक्स क्लिक करने में आपकी दिलचस्पी है? जी हां, ऐसा होता है और इसी के आधार पर वे आपकी प्रोफाइल बनाती हैं. इन प्रोफाइलों का इस्तेमाल सिर्फ यह तय करने के लिए किया जाता है कि आपको आपकी रुचि के हिसाब से कौन-से ऐड दिखाए जाएं. वे एजेंसियां आपकी ब्राउजिंग हिस्ट्री में आपके उन विजिट्स का डेटा भी सहेजकर रख सकती हैं. इस फजीहत से बचने के लिए आमतौर पर इनकॉग्निटो विंडो खोल ली जाती है, ब्राउजर कुकीज हटा दी जाती हैं और ऐंटी-ट्रैकिंग एक्सटेंशन भी इन्स्टॉल किए जाते हैं. मगर इन दिनों हर दिन बदलती टेक्नॉलजी के साथ ये नुस्खे भी काम नहीं आते.

2. डेटा लीक और ब्रीच

एक अडल्ट वेबसाइट पर विजिट करने से आपको ब्लैकमेलिंग या एक्सटॉर्शन का सामना भी करना पड़ सकता है. यहां सिर्फ रिवेंज पॉर्न की बात नहीं हो रही है. चाहे वह असल पॉर्न साइट हो या कोई सामान्य ऑनलाइन डेटिंग साइट, आपकी हिस्ट्री को आपके खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है. उन सभी यूजर्स से पूछिए, जिन्होंने ऐश्ली मैडिसन पर विश्वास किया. जब इस चैटिंग साइट का डेटा लीक हुआ तो लाखों जिंदगियां दांव पर लग गईं. लोगों के सेक्शुअल प्रिफरेंस और जियॉग्रैफिकल डेटा भी सामने आ गया. इस सबके कारण कुछ लोगों को इतनी शर्मिंदगी उठानी पड़ी कि वे सुसाइड जैसा कदम उठा बैठे.

3. स्कैमर और फ्रॉड

जहां अडल्ट वेबसाइटों का नाम आता है, वहां स्कैम भी अमूमन नजर आ जाते हैं और जो लोग पॉर्न के लिए पैसा दे रहे हैं, वे इन झांसों में सबसे पहले फंसते हैं. वेब पर बिखरे फ्री पॉर्न के बावजूद आप सोच रहे होंगे कि इसे पैसा देकर कौन देखता होगा. सच यह है कि अधिकतर पॉर्न खरीदने वाले वे होते हैं जो कुछ खास कैटिगरी का पॉर्न देखना चाहते हैं जो इतना रेयर है कि उसे देखने का चार्ज लगता है. लोगों की इन्हीं इच्छाओं का फायदा ये स्कैमर उठाते हैं. सस्ते या फ्री ट्रायल्स के लालच में आकर कई लोग स्कैम सब्स्क्राइब कर ढेर सारा पैसा उड़ा बैठते हैं. लेकिन इससे खतरनाक है फिरौती. अडल्ट साइट ब्राउज करने पर कई मैलवेयर आपका सिस्टम लॉक कर देते हैं और मनचाही मांगें पूरी करने के लिए कहते हैं, मसलन, वे आपकी पॉर्न हिस्ट्री जगजाहिर करने की धमकी देते हैं, FBI को यह बताने की धमकी देते हैं कि आपका बच्चा पॉर्न देखता है, और इस तरह की स्थितियों से बचाने के एवज में आपसे पैसे मांगते हैं.

4. मैलवेयर

पहले हमने फिरौती के बारे में बात की, लेकिन मैलवेयर और भी गंभीर मुद्दा है जो अडल्ट वेबसाइट ब्राउज करने के वक्त आपके सामने आता है. यह पाइरेटेड चीजें डाउनलोड करते वक्त भी आपपर हमला कर सकता है. अडल्ट साइट्स खुद ये मैलवेयर नहीं बांटतीं. वे चाहती हैं कि यूजर उनके पास लौटे इसलिए वे छोटे-मोटे लालच में नहीं पड़तीं. अच्छी अडल्ट साइट से कभी परेशानी नहीं होती. दिक्कत दरअसल मैलवर्टाइजिंग से होती है. यानी मैलवेयर आमतौर पर ऐड्स के साथ फैलाया जाता है. एक गलत क्लिक से आप वायरस, ट्रोजन, वर्म या ऐसे संदिग्ध सामान डाउनलोड कर बैठते हैं. इस तरह के मैलवेयर से बचने के लिए बार-बार सिस्टम स्कैन करते रहना जरूरी है.

5. कानूनी पचड़े

अडल्ट वेबसाइट्स विजिट करने वाले लोग अगर सावधान न रहें, तो उन्हें कानूनी दिक्कतें हो सकती हैं. चाइल्ड पॉर्नोग्रफी काफी फैल रही है और गंभीर रूप धारण कर रही है. लेकिन जिन लोगों की इसमें शामिल होने की कोई मंशा नहीं होती उनपर भी इसका प्रभाव हो सकता है. अगर आप इस तरह का मीडिया डाउनलोड न कर सिर्फ ब्राउजर पर देखते हैं तो दिक्कत इतनी बड़ी नहीं होती. लेकिन गैरकानूनी फाइल्स दूसरे रास्तों से आपके सिस्टम में घुसकर आपको मुसीबत में डाल सकती हैं.

सबके बागी भाजपा के साथी

लोकसभा चुनाव में चला मोदी मैजिकविधानसभा चुनावों में चलता दिख नहीं रहा. जिसकी वजह से भाजपा को दूसरे दलों से बगावत करने वालों को अपने साथ लेना पड़ रहा है.

उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 73 सीटें जीतने वाली भाजपा को अब अपने दम पर बहुमत हासिल होता नहीं दिख रहा. जिसकी वजह से भाजपा को बसपा से स्वामी प्रसाद मौर्य और कांग्रेस से रीता बहुगुणा जोशी जैसे उन नेताओं को पार्टी में शामिल करना पड़ रहा है जो कुछ समय पहले तक भाजपा और उसके नेताओं को कोसतेथे.

भाजपा में प्रदेश स्तर के नेताओं में कोई ऐसा बड़ा नाम नहीं रह गया जिसको आगे का चुनाव लड़ाया जा सके. भाजपा में गिरे हुये इस आत्मविश्वास के चलते प्रदेश से केन्द्र की राजनीति में गये नेता वापस आना पंसद नहीं कर रहे. ऐसे में भाजपा को अब दूसरे दलों के बागी नेताओं को अपना साथी बनाने पर मजबूर होना पड़ रहा है.

कांग्रेस नेता रीता बहुगुणा जोशी कांग्रेस छोड़ने का मन तब से बना रही थी जब से उनको प्रदेश कांग्रेस पद से हटा दिया गया था. वह समाजवादी पार्टी के साथ सांठगांठ कर रही थी. सपा उनको पार्टी में लेने को तैयार थी पर रीता विधायक पद छोड़ने के एवज में विधानपरिषद या राज्यसभा जाना चाहती थी. सपा इसके लिये तैयार नहीं थी.

ऐसे में वह कांग्रेस में बनी रही. इस बीच उत्तराखंड कांडमें रीता के भाई विजय बहुगुणा ने जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार को गिराया तब से कांग्रेस में रीता बहुगुणा जोशी पूरी तरह से अलग थलग पड़ गई थी.

विजय बहुगुणा की मध्यस्था से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने रीता बहुगुणा जोशी को भाजपा में शामिल कराने की योजना बनाई. रीता बहुगुणा जोशी ने भाजपा को यह भरोसा दिलाया है कि वह कांग्रेस के कुछ दूसरे बड़े नेताओं को भाजपा में लाने का काम करेंगी. इनमें कुछ दूसरे राज्य के हैं और कुछ उत्तर प्रदेश के नेताओं के नाम हैं.

कांग्रेस के लिये ही नहीं दूसरे किसी के लिये भी रीता का कांग्रेस से जाना कोई चैकाने वाला काम नहीं था. इन सवालों को पहले रीता काल्पनिक बताती थीं. दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की अगुवाई में रीता बहुगुणा जोशी कांग्रेस छोड़ भाजपा में जब शामिल हुई तो उनको ब्रेनवाश हो चुका था.

जिस अमित शाह को वह दगा हुआ कारतूसकहती थीं वही अब पालनहार बन चुके हैं. जिस नरेंद्र मोदी को कट्टरपंथ का प्रतीक बताया था उन्हें राष्ट्रवादी बता रही हैं. कांग्रेस के राहुल और सोनिया गांधी की तारीफ में कल तक उनकी जुबान नहीं थकती थी आज उन्हीं को कोस रही हैं. राजनीति का यह रंग चुनावी होता है. नेता अब अपनी सुविधा के हिसाब से रंग बदलते हैं.

अब कांग्रेस के नेता राज बब्बर रीता को दगाबाज कह रहे हैं तो गुलाम नबी आजाद उनको अवसरवादी कह रहे हैं. इस तरह से दलबदल से नेताओं को नुकसान नहीं होता यह बात जरूर है कि पार्टी को नुकसान होता है. भाजपा के पुराने नेता और कार्यकर्ता इन बाहरी नेताओं के साथ तालमेल नहीं रख पा रहे हैं. चाल चरित्र और चेहरा की बात करने वाली भाजपा घर और बाहर के नेताओं के बीच कैसे तालमेल बैठायेगी यह देखने वाली बात होगी. घर के कार्यकर्ताओं से नाराज और दुखी होने से पार्टी के प्रदर्शन पर असर पड़ेगा.

उत्तर प्रदेश में बिहार की तरह विपक्ष एकजुट भले न हो पर सपा और बसपा से तगड़ा मुकाबला होने के कारणा भाजपा को अपने पर भरोसा नहीं हो पा रहा है. जिसकी वजह से उसे बाहरी नेताओं को पार्टी में शामिल करना पड़ रहा है.

अब डाक के साथ दाल लायेगा डाकिया

त्यौहारों के इस मौसम में सरकार अब डाकघरों से चना दाल बेचने की तैयारी में है, क्योंकि खुले बाजार में इसकी कीमत आसमान छू रही है. गुरुवार को दिल्ली में इसकी कीमत 140 रुपये प्रति किलो रही जो अब तक की सबसे ज्यादा है.

दिल्ली में 135 से 140 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही चने की दाल से दुकानदारों का कारोबार खराब हो रहा है. संकट दिल्ली तक सीमित नहीं है, अन्य शहरों में भी यही हाल है. खाद्य मंत्रालय के पास मौजूद ताजा आंकड़ों के मुताबिक 1 अक्टूबर से 18 अक्टूबर के बीच चना दाल 10 रुपये प्रति किलो या इससे ज्यादा महंगी हो गई है.

पणजी में  145 रुपये किलो, मुंबई  में 142 रुपये किलो, लखनऊ में 140 रुपये किलो, जम्मू में 140 रुपये किलो और रायपुर में 140 रुपये किलो चना दाल बिक रही है. केंद्रीय भंडार फिलहाल 78 रुपये किलो अनपॉलिश्ड चना दाल बेच रहा है. वहां लोग बड़ी तादाद में पहुंच रहे हैं.

कैबिनेट सचिव ने बुधवार की शाम को आदेश दिया कि डाकघरों में चना दाल बेची जाए. इस बारे में सैद्धांतिक फैसला पिछले हफ्ते शुक्रवार को लिया जा चुका है. लेकिन असली चुनौती चना दाल की जमाखोरी से निबटने की है. सरकार अब राज्यों को एडवाइज़री जारी कर जमाखोरों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है.

BCCI लागू करे लोढ़ा कमिटी की सिफारिश: SC

बीसीसीआई के मामले में जारी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए कहा कि बीसीसीआई जल्द से जल्द लोढ़ा पैनल की सिफारिशों को मानने का एफिडेविट कोर्ट में पेश करे. कोर्ट ने कहा कि लोढ़ा पैनल एक स्वतंत्र ऑडिटर नियुक्त करेगा जो बीसीसीआई के तमाम दिए जाने वाले ठेकों की जांच करेगा.

कोर्ट ने बीसीसीआई द्वारा राज्य क्रिकेट बोर्डों को फंड जारी करने पर भी रोक लगाई और कहा कि तब तक फंड न दिए जाएं जब तक राज्य के बोर्ड भी लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने के संबंध में एफिडेविट नहीं दे देते.

कोर्ट में यह भी साफ हो गया कि बीसीसीआई प्रमुख अनुराग ठाकुर 3 दिसंबर को कोर्ट में इस संबंध में हलफनामा देंगे. इस मामले में अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी.

कोर्ट ने आज इसी के साथ लोढ़ा पैनल को बड़ी जिम्मेदारी भी दी. लोढ़ा पैनल अब बीसीसीआई के लिए स्वतंत्र ऑडिटर नियुक्त करेगा. यह ऑडिटर BCCI के सारे कांट्रेक्ट अब इनकी निगरानी में होंगे. लोढ़ा पैनल ही कांट्रेक्ट तय करेगा.

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि BCCI चेयरमैन हलफनामा दाखिल कर बताएंगे कि 18 जुलाई के आदेश का पालन करेंगे. तीन दिसंबर तक बीसीसीआई प्रमुख हलफनामा दाखिल करेंगे और इससे पहले वह लोढ़ा पैनल को बताएंगे कि रिफार्म कैसे करेंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा था कि क्या क्रिकेट के लिए BCCI में प्रशासक नियुक्त किए जाए या नहीं. BCCI को और वक्त दिया जाए कि वो लिखित में अंडरटेकिंग दे कि वो लोढ़ा पैनल की सिफारिशों को तय वक्त में लागू करेंगे.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आप लगातार कोर्ट के आदेशों में रुकावट पैदा कर रहे हैं. लोढ़ा पैनल का भी यही मानना है कि BCCI सिफारिशों को लागू नहीं करना चाहता, इसलिए पदाधिकारियों को हटा देना चाहिए.

17 अगस्त को सुनवाई के दौरान इस मामले में एमिकस क्यूरी गोपाल सुब्रमण्यम ने एक बार फिर बीसीसीआई का काम देखने के लिए प्रशासकों की नियुक्ति की सिफारिश की. सुब्रमण्यम ने कहा था कि बीसीसीआई के अधिकारियों के रवैये से साफ है कि वो किसी भी तरह से सुधार को टालना चाहते हैं. ये सिविल औरआपराधिक अवमानना का केस है. देश में क्रिकेट को चलाने वाली संस्था, बीसीसीआई में सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा कमिटी का गठन किया था.

इस साल 18 जुलाई कोर्ट ने कमिटी की सभी सिफारिशें मंजूर की थीं. कोर्ट ने छह महीने में इन्हें लागू करने का आदेश दिया था. अब कमिटी ने शिकायत की है कि बीसीसीआई जान-बूझ कर सुधार की राह में रोड़ा अटका रहा है.

बीसीसीआई की दलील है कि वो सिफारिशें लागू करने को तैयार है. कई सिफारिशें लागू भी की गईं हैं. पूरी तरह बदलाव के लिए 2 तिहाई राज्य क्रिकेट संघों के वोट जरूरी हैं. उन्हें मनाने की कोशिश की जा रही है. इस दलील पर नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट सुधार में अड़चन डाल रहे राज्य क्रिकेट संघों का फंड रोकने को कह चुका है.

एमिकस क्यूरी गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा था बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघ एक ही हैं. सिर्फ भ्रम फैलाने के लिए कहा जा रहा है कि राज्य संघ तैयार नहीं हैं. गोपाल सुब्रमण्यम ने बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर के हलफनामे पर भी सवाल उठाए.

सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर से पूछा था कि उन्होंने आईसीसी के सीईओ डेविड रिचर्डसन को लोढ़ा कमिटी की सिफारिशों का विरोध करने के लिए कहा था या नहीं. जवाब में ठाकुर ने कहा है कि उन्होंने ऐसा नहीं किया.

सिर्फ मौजूदा आईसीसी अध्यक्ष शशांक मनोहर के उस बयान की याद दिलाई थी जो उन्होंने बीसीसीआई अध्यक्ष रहते दिया था. तब मनोहर ने कहा था कि बीसीसीआई में सीएजी के प्रतिनिधि की नियुक्ति काम-काज में सरकारी दखल है.

ठाकुर के मुताबिक उन्होंने सिर्फ पुराने बयान के आधार पर स्पष्टता देने को कहा था. वो ये जानना चाहते थे कि कहीं आईसीसी बीसीसीआई के खिलाफ कोई कार्रवाई तो नहीं करेगी. लेकिन आईसीसी ने कहा कि वो बयान सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले का है. अब फैसला आ चुका है. आईसीसी उसका सम्मान करती है.

सवाल उठाते हुए एमिकस क्यूरी ने कहा था हलफनामे से साफ है कि उन्होंने इस बात की कोशिश की कि आईसीसी बीसीसीआई में सुधार के मामले में दखल दे. इस तरह के लोगों से ये उम्मीद नहीं की जा सकती कि वो सुधारों को लागू होने देंगे.

सुब्रमण्यम ने लोढ़ा कमिटी को जानकारी दिए बिना राज्यों को फंड देने और क्रिकेट ब्रॉडकास्ट अधिकार बेचे जाने पर भी सवाल उठाए. उन्होंने सिफारिश की कि जब तक बीसीसीआई में सुधार पूरी तरह लागू नहीं होते तब तक उसे कांट्रेक्ट टेंडर देने या फंड जारी करने का काम लोढ़ा कमिटी से पूछ कर करने को कहा जाए.

क्या आपका डेबिट कार्ड भी हुआ फर्जीवाड़े का शिकार

भारतीय बैंकों ने 32 लाख अकाउंट्स की जानकारी लीक होने के बाद डेबिट कार्ड्स बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. कहा जा रहा है कि इस बड़ी लीक को चीन से अंजाम दिया गया है. एसबीआई समेत देश के अन्य बड़े बैंक इस लीक का शिकार हुए हैं. भले ही कस्टमर्स के हितों को बचाने के लिए बड़े कदम उठाए जा रहे हों फिर भी कुछ चीजें आप को ध्यान में रखनी चाहिए जब इतने बड़े स्तर पर कोई लीक हो.

अगर आप का पैसा अकाउंट से गायब हो जाए तो क्या करें?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का निर्देश है, 'सिक्यॉरिटी में सेंध के कारण कस्टमर को हुए किसी भी तरह के पैसे के लॉस के लिए बैंक पूरी तरह से जिम्मेदार है.' आरबीआई द्वारा जारी किए गए ड्राफ्ट के अनुसार कस्टमर के नोटिफाई करने पर बैंक को 10 वर्किंग दिनों के भीतर कस्टमर के अकाउंट में गायब हुआ पैसा क्रेडिट करना होगा. कस्टमर को यह दिखाना होगा कि उसकी तरफ से किसी तरह का ट्रांजेक्शन नहीं हुआ है और पैसा बिना उसकी जानकारी के गलत तरह से गायब हुआ है.

आरबीआई ने निर्देश दिए हुए हैं कि बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कस्टमर की शिकायत का निपटारा 90 दिनों के अंदर हो जाए. क्रेडिट कार्ड से पैसे गायब होने की स्थिति में बैंक यह सुनिश्चित करें कि कस्टमर को किसी भी तरह का ब्याज न देना पड़े.

पैसा गायब होने की स्थिति में सबसे पहला काम है अपने बैंक को इसकी जानकारी देना. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो बैंक पैसा देने के लिए बाध्य नहीं होगा.

आगे ऐसी स्थिति से बचने के लिए क्या करें?

बैंक आप को फ्री में दूसरा कार्ड बना कर देंगे. आप नया पिन SMS से या IVRS से या इंटरनेट बैंकिंग के जरिए बिना बैंक जाए बना सकते हैं. इसके अलावा आप अपनी होम ब्रान्च से पिन के लिए आवेदन भी कर सकते हैं जो आप को मेल के जरिए पहुंचाया जाएगा.

अधिकतर बैंक आप को ज्यादा सिक्यॉरिटी मुहैया कराने के लिए कार्ड नेटवर्क कंपनी चुनने का ऑप्शन भी देती हैं. आप अपनी जरूरत के अनुसार पैसा निकालने की अधिकतम सीमा भी तय कर सकते हैं. इससे आप ज्यादा नुकसान से बच सकते हैं.

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