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पब्लिक रोती रहे सरकार को क्या

देश के सारे शहर पटरियों पर लगने वाली दुकानों और खाने के ढाबों से परेशान हैं. कुछ शहरों में तो बेहद भीड़भाड़ वाले इलाके में पहले तो दुकानदार अपना सामान दुकान से निकाल कर 5-7 फुट तक पटरी पर सजा देते हैं और फिर उस के आगे जगह बचती है तो असली पटरी वाले दुकानें लगा लेते हैं. कहीं भी एक बार दुकान लग गई और 4-5 दिन चल गई तो इस जगह पर परमानैंट कब्जा समझिए, चाहे उस से गंद फैले, ट्रैफिक रुके, सड़क पर चलने को मजबूर होना पड़े.

आम संभ्रांत मध्यवर्गीय शहरी इन पटरी वालों को जम कर कोसता है और इन्हें राजनीतिबाजों और पुलिस वालों की देन समझता है. औरत किट्टी पार्टियों में और आदमी ग्रुपों में इन पर हल्ला मचाते रहते हैं और लगता है कि मानो इतने विरोध के बावजूद सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंगती.

सरकार सुने या न सुने, पहली बात तो यह समझ लेनी चाहिए कि पटरी की दुकानें चलती तभी हैं जब वहां बिक्री हो. इसलिए दोषी दुकानदार नहीं, खरीददार हैं, जो इन से सामान खरीदते हैं और इन्हें दानापानी देते हैं. लंबी गाडि़यों में चलने वाले अकसर इन पटरी दुकानों से ड्राइव इन शौपिंग करते नजर आ सकते हैं और इस दौरान जहां वे दुकानदार से ज्यादा पैसे दे कर सामान खरीदते हैं, क्योंकि यह सुविधाजनक है, वहीं वे सड़क पर ट्रैफिक रोकते समय यह भूल जाते हैं कि चाय की चुसकियों के समय वे ही पौलीटिशियनों और अफसरों को गालियां देते हैं.

पटरियों पर दुकानें इस वजह से भी पनप रही हैं कि हर शहर में गांवोंकसबों से आने वाले फटेहाल से लोगों की गिनती बढ़ रही है, जिन्हें बड़ी दुकानों और एअरकंडीशंड मौलों में जाने में हिचक होती है.

शहरों को जिंदा रखने के लिए करोड़ों लोग गांव छोड़ कर शहरों में छोटेमोटे काम करने आ रहे हैं और वहां झोंपडि़यों और छोटे मकानों में ठुंसठुंस कर रह रहे हैं. उन्हें सामान तो चाहिए पर सामान किस ब्रैंड का और किस क्वालिटी का है, इस से उन्हें कोई मतलब नहीं. उन्हें सामान मुहैया कराना दुकानों के बस का नहीं, क्योंकि शहरों में दुकानों की कीमतें बेहद बढ़ गई हैं और जहां खाली जगह मिले वहीं बनी दुकानें ही उन्हें सामान दे सकती हैं.

दुकानदार भी बहुत होते हैं, क्योंकि ज्यादातर के पास कोई हुनर होता ही नहीं. वे थोक बाजार से सामान ले कर पटरी पर बेचते हैं और एक ही सामान 1 मील की दूरी पर 20-25 पटरी दुकानों पर मिल जाएगा.

जब तक शहरों के प्रबंधक दुकानों का प्रबंध न करेंगे, पटरी दुकानें लगेंगी ही. यह साफसुथरी सड़क पर चाहे कब्जा हो, इस का कोई सरल उपाय नहीं है.

अब पेट्रोल पंप पर पेट्रोल के साथ मिलेगा कैश

क्या आप कैश के लिए बैंक और एटीएम की लंबी लाइन में लगकर थक चुके हैं? अब आपको और परेशान होने की जरूरत नहीं है. आप नजदीक के पेट्रोल पंप पर जाकर भी कैश निकाल सकते हैं. आपको सरकारी कंपनी के पेट्रोल पंप पर जाकर अपना डेबिट कार्ड स्वाइप करना होगा और आपको 2,000 रुपये मिल जाएंगे. शुरुआती दौर में यह सुविधा देश भर के 2,500 पेट्रोल पंपों पर दी गई है, जहां स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की स्वाइप मशीनें उपलब्ध हैं

अगले तीन दिनों में यह सुविधा देश के 20,000 पेट्रोल पंपों पर मिलने लगेगी, जिनके पास एचडीएफसी, सिटीबैंक और आईसीआईसीआई बैंक की कार्ड स्वाइप मशीनें उपलब्ध होंगी. 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बंद किए जाने के बाद देश भर में एटीएम और बैंकों पर नकद निकासी को लेकर भीड़ लगी हुई है. इस वजह से ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स असोसिएशन ने सरकार को इस तरह का सुझाव दिया था. इससे भीड़ कुछ हद तक कम हो सकेगी.

हालांकि इसके चलते पेट्रोल पंपों पर भी भीड़ की स्थिति हो सकती है, जिससे उनके कामकाज पर भी विपरीत असर पड़ सकता है. पेट्रोल पंपों से कैश निकालने को लेकर गुरुवार को इंडियन ऑइल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम के सीनियर अधिकारियों और एसबीआई की चीफ अरुंधति भट्टाचार्य के बीच बैठक हुई थी. इसके बाद ही इस फैसले को मंजूरी दी गई.

 

धावक धर्मवीर पर आठ साल का प्रतिबंध

डोप टेस्ट में फेल होने के कारण रियो ओलंपिक में भाग लेने नहीं जा सके हरियाणा के फर्राटा धावक धर्मवीर सिंह पर राष्ट्रीय डोपिंग निरोधक एजेंसी (नाडा) ने आठ साल का प्रतिबंध लगाया है. इस प्रतिबंध के साथ ही धर्मवीर का करियर अब खत्म हो गया है.

200 मीटर के धावक धर्मवीर को बंगलुरु में 11 जुलाई को इंडियन ग्रां प्रि के दौरान डोप टेस्ट में पाजीटिव पाए गए थे. दूसरी बार डोपिंग में पकड़े जाने के कारण नाडा की डोपिंग निरोधक अनुशासन समिति ने उन्हें आठ साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया.

नाडा के शीर्ष सूत्र ने बताया, ‘धर्मवीर पर आठ साल का प्रतिबंध लगाया गया है. चूंकि यह उसका दूसरा अपराध था. नाडा ने इसकी सूचना इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ एथलेटिक्स फेडरेशन (आइएएएफ) और वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा) को दे दी है.’

इससे पहले 2012 में अनिवार्य डोप टेस्ट नहीं देने के कारण 27 वर्षीय धर्मवीर से राष्ट्रीय अंतर प्रांत चैंपियनशिप में जीता 100 मीटर का स्वर्ण पदक छीन लिया गया था. धर्मवीर ने इंडियन ग्रां प्रि में 200 मीटर में राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ 20.45 सेकेंड का समय निकाला था. इससे शक की सुई उन पर घूमने लगी थी, क्योंकि उनका प्रदर्शन पिछले कुछ अर्से से अच्छा नहीं था. उन्होंने राष्ट्रीय शिविर की बजाय रोहतक में अपने कोच के साथ अभ्यास किया था.

बंद हो जाएगी आपकी जियो सिम

अगर आप भी Reliance Jio के वेलकम ऑफर का फायदा उठा रहे हैं तो ये खबर आपके लिए ही है. Reliance Jio जल्द ही अपने कुछ यूजर्स के लिए वेलकम ऑफर बंद करने जा रही है और उनका सिम भी जल्दी ही ब्लॉक कर दिया जाएगा. ऐसे लोगों को मैसेज भी आने शुरू हो गए हैं. अगर ऐसे मैसेज आपको भी आने लगे हैं तो आपको जल्दी ही संभल जाना चाहिए.

असल में ऐसा उन लोगों के साथ हो रहा है जो अभी तक भी अपनी पहचान प्रमाणित करने में विफल रहे हैं. गौरतलब है कि जियो ने वेलकम ऑफर के साथ फ्री सिम कार्ड दिए थे. इसके लिए आधार कार्ड प्रूफ के तौर पर देना था. इसके बाद कस्टमर को रिलायंस डिजिटल स्टोर पर जाकर फिंगरप्रिंट वेरिफिकेशन करवाना था.

इस वेरिफिकेशन में कई यूजर फेल हुए हैं, तो कुछ वेरिफिकेशन के लिए डिजिटल स्टोर गए ही नहीं. ऐसे लोगों पर अब उनके वेलकम ऑफर समेत सिम के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है. जिन लोगों ने बाहर के आधार कार्ड से ई-केवाईसी के जरिए सिम लिया है उन्हें Jio सिम बंद होने का मैसेज भेजा जा रहा है. इसके अलावा अगर आपने फिंगरप्रिंट वेरिफिकेशन नहीं कराया तो भी आप सर्विस का लाभ नहीं उठा पाएंगे.

जिन यूजर्स को मैसेज मिला है उन्हें अपनी ID प्रूफ के साथ रिलायंस डिजिटल स्टोर पर जाका फिंगरप्रिंट वेरिफिकेशन प्रॉसेस को पूरा करना होगा. अगर कंपनी द्वारा दिए गए टाइम फ्रेम में इस प्रॉसेस पूरा नहीं किया गया तो फ्री सर्विस का फायदा नहीं मिलेगा.

बहुत काम की हैं ये गूगल ट्रिक्स

गूगल जानकारी का भंडार है, मगर तुरंत सही जानकारी जुटाने में कई बार दिक्कत हो जाती है. ऐसा इसलिए, क्योंकि कई बार हमें सर्च टर्म्स की सही जानकारी ही नहीं होती कि क्या सर्च करने पर सटीक रिजल्ट आएगा. कई बार हमें आधी जानकारी होती है और उस आधी जानकारी के जरिए सर्च करने पर सही कॉन्टेंट ढूंढने में वक्त लग जाता है. हम बता रहे हैं ऐसे तरीके, जिनकी मदद से आप चंद सेकेंड्स में जानकारी पा लेंगे, जिसकी आपको तलाश है.

1. जब सही टर्म की जानकारी न हो

जब आप इस बात को लेकर आश्वस्त न हों कि जो आप सर्च करना चाहते हैं वह सही है या नहीं, आप कुछ और शब्द इसमें डाल सकते हैं. उदाहरण के लिए अगर आप किसी दुकान को सर्च करना चाहते हैं और आपको पता न हो कि दुकान का नाम Mehta Traders है या Mehta Brothers तो आप दोनों टर्म्स को लिखिए और बीच में | का सिंबल लगा दो. आप इस सिंबल की जगह Or भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

2. जब सब्जेक्ट से जुड़ी वेबसाइट ढूंढनी हो

अगर आपको किसी सब्जेक्ट से जुड़ी वेबसाइट ढूंढनी है तो सर्च में '~' सिंबल इस्तेमाल कर सकते हैं. उदाहरण के लिए आप ppf का इंटरेस्ट रेट जानना चाहते हैं तो इस तरह से सर्च करें 'interest rates ~ ppf'. इससे आपको ppf के इंटरेस्ट रेट और कैलकुलेटर वगैरह के रिजल्ट मिल जाएंगे.

3. किसी वेबसाइट के अंदर कुछ सर्च करना हो

अगर आप किसी वेबसाइट के अंदर का कुछ कॉन्टेंट सर्च करना चाहते हैं तो वेबसाइट का अड्रेस डालें फिर स्पेस दें और कीवर्ड या वाक्य डालें. एंटर प्रेस करते ही आपके सामने उसका रिजल्ट होगा.

4. ऐस्टेरिक (*) की ताकत

जब आप कोई कीवर्ड या वाक्य आदि भूल जाते हैं तो उस वर्ड की जगह * इस्तेमाल करें. इससे आपको सही रिजल्ट मिलेगा.

5. जब बहुत सारे शब्द मिसिंग हों

आप जिस वाक्य के बारे में सर्च कर रहे हैं, उसका महत्वपूर्ण हिस्सा भूल गए हैं तो पहले और आखिरी शब्दों के बीच AROUND+ (जितने भी शब्द मिसिंग हैं, उनका नंबर) टाइप करें.

6. टाइम फ्रेम यूज करने के लिए

किसी खास टाइम पीरियड के घटनाक्रम के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए डेट्स के बीच में तीन डॉट्स टाइप करके सर्च करें.

7. टाइटल या URL सर्च करना होगा

अगर कोई कीवर्ड या आर्टिकल का टाइटल ढूंढना हो तो सर्च टर्म से पहले intitle: टाइप करें, वह भी बिना स्पेस के.

8. मिलती-जुलती वेबसाइट्स ढूंढें

अगर आपको इंटरनेट पर कोई मजेदार साइट मिली है और आप उससे मिलती-जुलती वेबसाइट्स ढूंढना चाहते हैं तो related: टाइप करें और फिर अपनी पसंद की साइट टाइप करें. ध्यान रहे कि बीच में स्पेस न हो.

9. पूरा वाक्य या शब्दावली ढूंढना

आप अपनी सर्च टर्म या शब्दावली से संबंधित एकदम सटीक कॉन्टेंट सर्च करना चाहते हैं तो सर्च टर्म को इन्वर्टेड कॉमाज के अंदर टाइप करें. इससे जैसा आपने सर्च किया होगा, वही आपके रिजल्ट में आएगा.

10. गैरजरूरी टर्म को हटाना

किसी सर्च से अप्रासंगिक शब्द हटाने के लिए उस शब्द से पहले माइनस का सिंबल टाइप करें. उदाहरण के लिए अगर आप दोहे ढूंढ रहे हैं, मगर कबीर के दोहे नहीं चाहिए तो दोहे लिखकर – का चिह्न लगाएं और बिना स्पेस दिए कबीर लिखें. रिजल्ट में आपको कबीर के दोहों के अलावा अन्य दोहे मिल जाएंगे.

भारत-इस्राइल: मजबूत होते रिश्ते

इस्राइली राष्ट्रपति यूर्वेन रिवलिन की आठ दिवसीय भारत यात्रा से द्विपक्षीय संबंधों को गति मिलने की उम्मीद है. इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापारिक और रक्षा सौदों से संबंधित अनेक अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हो रहे हैं. राष्ट्रपति रिवलिन ने आतंकवाद के विरुद्ध भारत के रुख का समर्थन किया है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम में भी भागीदारी का भरोसा भी जताया है. वर्ष 1992 में दोनों देशों के बीच पूर्ण कूटनीतिक संबंध बहाल होने के बाद राष्ट्रपति रिवलिन भारत आनेवाले दूसरे इस्राइली राष्ट्राध्यक्ष हैं.

पिछले साल राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और इस साल के शुरू में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज इस्राइल जा चुके हैं. प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा भी जल्दी संभावित है. रक्षा खरीद, पर्यटन, कृषि तकनीक, शिक्षा और वाणिज्य के क्षेत्र में दोनों देशों की निकटता के सकारात्मक असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के मंच पर भी परिलक्षित हो रहे हैं. इस्राइल ने सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के भारते के दावे का समर्थन किया है. वैश्विक आतंकवाद पर भारतीय पहल को कारगर बनाने के लिहाज से भी इस्राइली सहयोग महत्वपूर्ण है.

दोनों देशों के बीच फिलीस्तीन के मसले पर मतभेद हैं, पर इस्राइली राष्ट्रपति ने भी स्वीकार किया है कि मित्रता में असहमतियों की गुंजाइश भी होनी चाहिए. इस मसले पर अरब देशों की शंका दूर करने के लिए विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर कुछ दिन पहले ही फिलीस्तीन गये थे. भारत प्रारंभ से ही इस विवाद के शांतिपूर्ण निपटारे का पक्षधर रहा है.

बीते ढाई दशकों में इस्राइल और भारत बहुत करीब आये हैं. साथ ही, मध्य-पूर्व और मध्य एशिया के उन देशों के साथ भी भारत के रिश्ते मजबूत हुए हैं, जिनके संबंध इस्राइल के साथ तनावपूर्ण हैं. राष्ट्रपति रिवलिन की मौजूदा यात्रा के दौरान भी भारत ने जहां वैश्विक मानवता के दुश्मन आतंकवाद का मिलजुल कर मुकाबला करने का आह्वान किया है, वहीं द्विपक्षीय और बहुपक्षीय साझेदारी से आर्थिक वृद्धि करने की जरूरत को भी रेखांकित किया है. इस्राइल ने पानी की कम उपलब्धता के बावजूद तकनीकी कौशल से खेती में उल्लेखनीय विकास किया है. इस क्षेत्र में उसकी प्रगति से भारत लाभान्वित हो सकता है.

दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात की प्रचुर संभावनाएं हैं. भारत इस्राइल से अत्याधुनिक हथियारों और रक्षा उपकरणों की खरीद करता है. 'मेक इन इंडिया' के तहत इनका साझा उत्पादन हमारे आर्थिक और सामरिक विकास का महत्वपूर्ण कारक हो सकता है. इस यात्रा के संकेत सकारात्मक हैं और आशा है कि आपसी सहयोग से दोनों देशों के आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक संबंध मजबूत होंगे.

स्टूडियो को डुबाने में माहिर फरहान अख्तर

फरहान अख्तर ने आज से पंद्रह वर्ष पहले 2001 में अपने मित्र रितेश सिद्धवानी के साथ मिलकर फिल्म निर्माण कंपनी ‘‘एक्सेल इंटरटेनमेंट’’ की शुरुआत की थी और उन्होंने इस बैनर तले पहली फिल्म ‘‘दिल चाहता है’’ का निर्माण व निर्देशन कर निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा था. उस वक्त फरहान ने इस फिल्म को प्रति टेरेटरी ढाई करोड़ के हिसाब से वितरकों को बेचा था, मगर हर वितरक को दो करोड़ का नुकसान हुआ था. मगर इस फिल्म में आमिर खान की मुख्य भूमिका थी, इसलिए इस फिल्म की चर्चाएं काफी हुई थी. इस फिल्म के असफल होने के बाद लोगों का अनुमान था कि अब फरहान फिल्म निर्माण या निर्देशन से तोबा कर लेंगें. मगर ऐसा नहीं हुआ.

पिछले 15 वर्ष में फरहान अख्तर ने अपनी कंपनी ‘‘एक्सेल इंटरटेनमेंट’’ के तहत कुल सोलह फिल्में बनायी. इन फिल्मों के बाक्स आफिस कलेक्शन पर बारीकी से गौर किया जाए, तो एक बात साफ तौर पर उभरकर आती है कि ‘दिल चाहता है’ को छोड़कर जिन सात फिल्मों का निर्माण फरहान अख्तर ने अपनी इस कंपनी के तहत किया, उन फिल्मों ने पैसे कमा कर दिए. मगर फरहान ने जिन फिल्मों का निर्माण स्टूडियो से पैसे लेकर किया, उन सभी फिल्मों ने स्टूडियो को करोड़ो का नुकसान पहुंचाया. एक अनुमान के मुताबिक फरहान अख्तर निर्मित फिल्मों ने सबसे ज्यादा ‘इरोस’ को करीबन सौ करोड़ रूपए और रिलायंस इंटरटेनमेंट को करीबन बीस करोड़ का नुकसान पहुंचाया. ‘रिलायंस इंटरटेनमेंट’ ने तो अब फिल्म निर्माण से तोबा कर ली है.

‘‘दिल चाहता है’’ के असफल होने के बाद फरहान अख्तर ने तीन वर्ष बाद ‘एक्सेल इंटरटेनमेट’ के ही तहत ‘लक्ष्य’ का निर्माण व निर्देशन किया. इस फिल्म से वितरकों को चार करोड़ का घाटा हुआ था. इसके बाद फरहान अख्तर ने ‘डॉन’ निर्देशित की, जिसने ‘एक्सेल इंटरनटेनमेंट’ को कमा कर दिया. उसके बाद ‘एक्सेल इंटरटेनमेंट’ की रीमा कागती निर्देशित कम बजट की फिल्म ‘हनीमून ट्रेवल्स प्रा.लिमिटेड’ ने अपना पैसा निकाल लिया था.

फिर 2008 में फरहान अख्तर की कंपनी ने ‘रॉक ऑन’ का निर्माण किया, जिसका निर्देशन अभिषेक कपूर ने किया था. इस फिल्म से फरहान अख्तर ने अभिनेता के साथ साथ संवाद लेखक के रूप में भी कदम रखा था. फिल्म को काफी चर्चा मिली थी. इस फिल्म के लिए अर्जुन रामपाल को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था. मगर इस फिल्म का वितरण करने वाले स्टूडियो ‘रिलायंस बिग पिक्चर्स’ को सात करोड़ का नुकसान हुआ था. रिलायंस स्टूडियों का साथ मिलते ही फरहान अख्तर की कंपनी ‘एक्सेल’ ने फिल्म ‘लक बाय चांस’ बना डाली, जिससे फरहान अख्तर की बहन जोया अख्तर ने निर्देशन में कदम रखा. इससे रिलायंस को 13 करोड़ का नुकसान हुआ.

उसके बाद रिलायंस ने ‘एक्सेल इटरटेनमेंट’ के साथ भविष्य में न जुड़ने का फैसला किया था. यह एक अलग बात है कि रिलायंस अपने इस निर्णय पर कायम नहीं रहा था. रिलायंस ने 2011 में ‘एक्सेल’ के साथ मिलकर ‘डॉन 2’ का निर्माण किया, जिसका निर्देशन फरहान अख्तर ने ही किया था. इस फिल्म से रिलायंस को फायदा हुआ. उसके बाद ‘रिलायंस’ कभी भी फरहान अख्तर की कंपनी ‘एक्सेल’ से नहीं जुड़ा.

लेकिन रिलांयस स्टूडियों द्वारा हाथ खींच लेने के बाद ‘एक्सेल’ ने अकेले ही विजय लालवानी के निर्देशन में ‘कार्तिक कालिंग कार्तिक’ का निर्माण किया. जिसने ‘एक्सेल’ को कमा कर दिया. इसके बाद ‘एक्सेल’ ने ‘इरोस’ के साथ ‘गेम’ और ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ इन दो फिल्मों का निर्माण किया. ‘जिंदगी न मिलेगी दोबारा’ से ‘ईरोस’ को फायदा हुआ, मगर ‘गेम’ की वजह से इरोस को 18 करोड़ का नुकसान हुआ था. फिर ‘एक्सेल’ ने आमिर खान को लेकर रीमा कागती के निर्देशन में ‘तलाश’ बनायी, जिसने फायदा दिया. फिर ‘एक्सेल’ ने मृगदीप सिंह लांबा के निर्देशन में कम बजट की फिल्म ‘‘फुकरे’’ का निर्माण व वितरण किया, जिसने ‘एक्सेल’ को कमा कर दिया.

इसके बाद जैसे ही ‘एक्सेल’ ने ‘जंगली पिक्चर्स’ के साथ दो फिल्मों का अनुबंध कर ‘बंगिस्तान’ और ‘दिल धड़कने दो’ का निर्माण किया, वैसे ही ‘जंगली पिक्चर्स’ को ‘बंगिस्तान’ की वजह से दस करोड़ का घाटा हुआ.

अब एक बार फिर ‘एक्सेल’ ने अपनी नित्या मेहरा निर्देशित फिल्म ‘‘बार बार देखो’’ को ‘इरोस’ को बेचा और इरोस को इस फिल्म से 25 करोड़ की चपत लगी. और अब ‘एक्सेल’ की 16वीं फिल्म ‘‘रॉक ऑन 2’’ की वजह से ‘इरोस’ को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा. 75 करोड़ की लागत की यह फिल्म पहले वीकेंड में बाक्स आफिस पर महज सात करोड़ ही कमा पायी है. सूत्रों की माने तो अब ‘इरोस’ के अंदर उच्चस्तरीय बैठकों का दौर जारी है. इन बैठकों में इस बात पर चर्चा की जा रही है कि उन्हे फरहान अख्तर की कंपनी ‘‘एक्सेल’’ के साथ भविष्य में जुड़ना चाहिए या नहीं..

वैसे स्टूडियो के हाथ पीछे खींच लेने की वजह से ‘‘एक्सेल’’ ने ‘‘लखनऊ सेंट्ल’’ सहित कुछ फिल्मों का निर्माण स्थगित कर दिया है.

इस तरह यदि फरहान अख्तर की कंपनी ‘एक्सेल’ के 15 वर्षों पर गौर किया जाए, तो एक बात साफ तौर पर सामने आती है कि ‘एक्सेल’ ने अपने बलबूते पर हमेशा कम बजट की फिल्में बनायी और दो फिल्मों को नजरंदाज कर दें, तो उनकी फिल्में लाभ में रहीं. मगर ‘एक्सेल’ ने जब भी किसी स्टूडियो के साथ कोई फिल्म बनायी, तो वह बड़े बजट की रही और सभी फिल्मों ने करोड़ों का नुकसान स्टूडियो को दिया. अब इसे महज संयोग कहा जाए या…

कंगना व रितिक का मामला हुआ टांय टांय फिस्स

बौलीवुड की दो बड़ी हस्तियों कंगना रानौट और रितिक रोशन के बीच गत वर्ष एक विवाद गरमाया रहा. इस विवाद ने एक दूसरे पर अति घटिया स्तर पर बयान बाजी की. फिर यह मामला पुलिस तक पहुंच गया था. आरोप था कि कंगना रानौट ने रितिक रोशन को कुछ ईमेल लिखे. जबकि कंगना का आरोप था कि रितिक रोशन ने उन्हे ईमेल लिखे. यहां तक कि रितिक रोशन ने तो इन सभी ईमेल को मुंबई के एक अंग्रेजी अखबार में छपवाकर खुद को साफ सुथरा साबित करने का प्रयास किया था. उसके बाद भी मामला शांत होने की बजाय बढ़ता ही रहा. एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी जारी रही. तब इस प्रकरण की जांच के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज की गयी थी. पुलिस ने इस पूरे मामले की जांच करने के बाद इस केस में कुछ भी गलत नहीं पाया और केस को हमेशा के लिए बंद कर दिया.

मुंबई क्राइम ब्रांच के ज्वायंट कमिश्नर संजय सक्सेना ने इस संबंध में एक अंग्रेजी अखबार से कहा है-‘‘हमें ईमेल में कुछ भी नहीं मिला, क्योंकि इसका सर्वर अमेरिका में है. इसलिए यह तय करना संभव नही है कि कौन ईमेल अकाउंट का उपयोग कर रहा था. इसलिए हमें इस केस को लेकर जो सबूत मौजूद हैं, उन्ही के आधार पर बंद करना है.’’ मुंबई की फोरेंसिक लैब भी इस जांच में कुछ भी स्थापित नही कर पायी.

मुंबई पुलिस की तरफ से आए इस बयान के बाद कंगना रानौट और उनके वकील रिजवान सिद्दिकी इसे अपनी जीत बता रहे हैं. कंगना रानौट ने रितिक रोशन पर आरोप लगाया था कि रितिक रोशन और उनके बीच रिश्ते रहे हैं. उसके बाद आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हुआ था.

क्या फरहान अख्तर ने डुबायी ‘‘रॉक ऑन 2’’

फरहान अख्तर ने आठ वर्ष बाद अपनी पहली फिल्म ‘‘रॉक ऑन’’ का सिक्वअल ‘रॉक ऑन 2’ का निर्माण अपनी फिल्म निर्माण कंपनी ‘‘एक्सेल इंटरटेनमेंट’’ के बैनर तले किया, जिसमें उनके मित्र रितेश सिद्धवानी भागीदार हैं. पहली फिल्म ‘‘रॉक ऑन’’ ने भी बाक्स आफिस पर कुछ खास कमायी नहीं की थी, मगर इस फिल्म ने फरहान अख्तर को बतौर गायक व संगीतकार म्यूजिकल कंसर्ट करने की एक नई राह जरूर मिल गयी थी. लगभग सत्तर म्यूजिकल कंसर्ट करने के बाद फरहान अख्तर को अपने आपको लेकर ऐसी गलत फहमी हुई कि उन्होंने 75 करोड़ की लागत से ‘रॉक ऑन’ का सिक्वअल ‘‘रॉक ऑन 2’’ का निर्माण कर डाला. पर इस फिल्म की बाक्स आफिस पर बड़ी दुर्गति हुई.

पहले दिन बड़ी मुश्किल से ‘‘रॉक ऑन 2’’ ने 2 करोड़ ही बाक्स आफिस पर कमाए और पूरे वीकेंड में साढ़े सात करोड़ का आंकड़ा नही दे पायी. यानी कि लागत का दस प्रतिशत भी नहीं कमा पायी. अब फरहान अख्तर अपनी गलती को कबूल करने की बजाय चिल्ला रहे हैं कि मोदी के नोट बंदी आदेश के चलते उनकी फिल्म को बाक्स आफिस पर दर्शक नहीं मिले. तो वहीं फिल्म ‘‘रॉक ऑन 2’’ के ही कलाकार अर्जुन रामपाल का कहना है कि देश की भलाई के लिए उठाए गए नोट बंदी के कदम के लिए कुर्बानी देना ही चाहिए.

मगर जानकर लोगों की राय में यदि नोट बंदी न हुई होती, तो भी फरहान अख्तर की फिल्म ‘‘रॉक ऑन 2’’ को दर्शक न मिलते. अब तक फरहान अख्तर की कंपनी ‘‘एक्सेल इंटरटेनमेंट’’ आठ असफल फिल्मों का निर्माण कर वितरकों व स्टूडियो को करोड़ो रूपए की चपत लगा चुकी है. इसी के चलते अब कोई स्टूडियो उनके साथ काम करना नहीं चाहता. इसी वजह से पिछले दिनो एक्सेल इंटरटेनमेंट ने कुछ फिल्मों के निर्माण से तौबा कर ली है.

पर जहां तक फिल्म ‘‘रॉक ऑन 2’’ की दुर्गति का सवाल है, तो सभी जानकर इसके लिए पूरी तरह से फरहान अख्तर को अकेले ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. फरहान अख्तर के अति नजदीकी सूत्रों के अनुसार ‘‘रॉक ऑन 2’’ देखने के बाद फरहान अख्तर के पिता व मशहूर पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने फरहान से कह दिया था कि उनकी फिल्म ‘रॉक ऑन 2’ को दर्शक नहीं मिलेंगे.

सूत्र बताते हैं कि जावेद अख्तर ने अपने बेटे फरहान को सलाह दी थी कि वह कम से कम आधी फिल्म को नए सिरे से पुनः फिल्माएं. मगर हठी फरहान ने ऐसा करने से साफ इंकार कर दिया था. सूत्रों का दावा है कि जबकि फरहान ने ‘रॉक ऑन 2’ की अदाकारा प्राची देसाई को खुश करने के लिए दो तीन सीन मुंबई में पुनः फिल्माए थे.

इतना ही नहीं फरहान अख्तर के उपर म्यूकिल कंसर्ट का भूत इस कदर हावी रहा कि वह  अपनी फिल्म को बहुत गलत ढंग से प्रचारित करते रहे. फिल्म ‘‘रॉक ऑन 2’’ देखने पर पता चलता है कि इसमें किसानों की समस्या, गांव के बच्चों की शिक्षा का मसला, पूरे गांव में आग लगने के बाद गांव वालों को राजनेता के बेटे के अहम के चलते किस तरह भूखे मरना पड़ता है, जैसे कुछ मुद्दे बहुत अच्छे ढंग से उठाए गए हैं, मगर फरहान अख्तर अपनी फिल्म ‘रॉक ऑन 2’ को महज एक म्यूजिकल फिल्म बताते रहे.

जब संगीत का शौकीन दर्शक सिनेमा घर के अंदर पहुंचा, तो उसे संगीत के नाम पर घटिया संगीत ही मिला. इसलिए उसने फिल्म की बुरायी की, जिसके चलते फिल्म देखने का इच्छुक दर्शक भी बिदक गया. जो दर्शक सामाजिक समस्याओं को परदे पर देखना चाहता है, वह सिनेमा घर के अंदर गया ही नहीं.

यहां तक कि जब फिल्म ‘‘रॉक ऑन 2’’ के प्रदर्शन से पहले फरहान अख्तर से हमने सवाल किया था कि आठ वर्षों में संगीत के साथ सामाजिक व राजनीतिक स्थितियां काफी बदली हैं. क्या उसका इस फिल्म में कोई जिक्र है? तो फरहान अख्तर ने सफेद झूठ बोलते हुए कहा था-‘‘हमारी फिल्म संगीत व रिश्तों की बात करती है. हमारीफिल्म सामाजिक या राजनीतिक नहीं है. संगीत में जो बदलाव आया है, वह हमारी फिल्म में है. पहली फिल्म में जो आदित्य श्राफ व दूसरे किरदार थे, उनकी जिंदगी में भी अब आठ वर्ष गुजर चुके हैं. उनमें मैच्योरिटी व दुनिया की समझ आ गयी है. उनके गीत लेखन में ज्यादा गहराई आ गयी है. यह सब हमारी फिल्म में नजर आ रहा है. इसी के साथ हमारी फिल्म ‘रॉक ऑन 2’ रिश्तों और दोस्ती के बारे में है. अपने आपको संगीत के जरिए खोज निकालने की बात करती है.’’

यानी कि फरहान अख्तर लगातार अपनी फिल्म को गलत ढंग से प्रचारित करते रहे. अब वह ऐसा किस मार्केटिंग एजेंसी या अपने  पीआर की सलाह पर कर रहे थे या खुद को तथा श्रद्धा कपूर को बहुत बड़ा म्यूजीशियन साबित करने के लिए इस तरह फिल्म को प्रचारित कर रहे थे, यह तो वही जानें. फरहान अपनी टीम के साथ ‘‘रॉक ऑन 2’’ को प्रमोट करने के लिए म्यूजिकल कंसर्ट करते रहे या टीवी चैनलों पर धमाचौकड़ी करते रहे. उनके पास प्रिंट के पत्रकारों से मिलने का वक्त नहीं था.

उनकी पीआर टीम हर बार यही कहती रही कि फरहान की तरफ से प्रिंट इंटरव्यू के लिए समय नहीं मिल रहा हैं. वह टीवी तथा म्यूजिकल कंसर्ट में व्यस्त हैं. वह सोशल मीडिया पर भी अति व्यस्त रहे. जबकि यह साबित हो चुका है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाली करोड़ो की लाइक्स से बाक्स आफिस के आंकड़ों पर असर नहीं पडता है. टीवी पर धमा चौकड़ी मचाने से भी फिल्म के प्रति दर्शक में उत्सुकता नहीं पैदा होती है….पर जब लो आत्ममंथन करना ही नही चाहते, तो इन्हे यह सब कैसे समझ में आएगा..

किसी भी वाई-फाई का पासवर्ड करें क्रैक

आज के समय में इंटरनेट एक बड़ी जरुरत बन चुका है. लगभग हर काम इंटरनेट के जरिए किया जा सकता है. इंटरनेट का एक बड़ा माध्यम वाई-फाई भी है. अगर आपको कहीं फ्री वाई-फाई का एक्सेस मिले और आपके पास पासवर्ड न हो, तब आप क्या करते हैं? फ्री वाई-फाई का इस्तेमाल हर कोई करना चाहता है, लेकिन उसका पासवर्ड पता लगाना बेहद मुश्किल होता है. इस मुश्किल काम को आसान करने के लिए डेवलपर्स ने कई एप बनाई हैं, जिनके जरिए किसी भी वाई-फाई पासवर्ड का पता लगाया जा सकता है. ऐसी ही एक एप WPSPIN है.

ऐसे करें वाई-फाई पासवर्ड हैक

1. इसके लिए आपको सबसे पहले गूगल प्ले स्टोर से WPSPIN एप डाउनलोड कर इंस्टॉल करनी है.

2. इंस्टॉल होने के बाद एप को ओपन करें.

3. यह एप अपने आप ही WPS वायरलैस नेटवर्क को ढूंढ लेगी.

4. अब जिस भी वाई-फाई के पासवर्ड को आप हैक करना चाहते हैं उसपर क्लिक कर दें.

5. क्लिक करते ही आपके पास 8 नंबर का पिन आएगा उसे नोट करें.

6. इसके बाद अपना लैपटॉप ओपन करें. अब लैपटॉप में वाई-फाई ऑन कर 8 नंबर का पिन डालें, जो आपने नोट किया है.

7. इसके बाद आप वाई-फाई चला पाएंगे.

8. ये तरीका सिर्फ WPS वाले राउटर में ही काम कर सकता है.

क्या है WPS राउटर?

WPS का मतलब Wi-Fi Protected Setup है. ये एक ऐसा वायरलैस नेटवर्किंग स्टैंडर्ड है जो राउटर और वायरलैस डिवाईस को आसानी से कनेक्ट कर देता है. ये WPA पसर्नल या WPA2 पसर्नल सिक्योरिटी के वायरलैस नेटवर्क के लिए ही काम करता है. एक सामान्य सेटअप में यूजर तब तक वायरलैस डिवाईस से कनेक्ट नहीं कर सकता है जब तक उसे वायरलैस नेटवर्क का नाम और सिक्योरिटी पासवर्ड न पता हो.

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