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भविष्य की नींव मजबूत और पक्की बनाएं

त्योहारों का मौसम बीतते ही चुनौतियों का मौसम शुरू हो जाता है, परीक्षाओं की ठंडक महसूस होने लगती है. फरवरी से अप्रैल तक होने वाली परीक्षाओं की तैयारियां नवंबर में करना एक आवश्यकता है और दीवाली खत्म और मौज खत्म समझनी चाहिए.

जिन इलाकों में उत्तर भारत की तरह ठंड नहीं पड़ती वहां भी परीक्षाओं का असर तो बराबर ही रहता है और यह वह मौसम है जब हर किशोर को दुबक कर किताबों के लिहाफ में छिपना पड़ता है. यही दिन तय करते हैं कि अगला साल और इस के आगे के साल कितने कामयाब होंगे.

परीक्षाओं को भूत या आफत मानने की अब जरूरत नहीं रह गई है, क्योंकि अब यह एहसास पहले दिन से रहता है कि यह रेस तो पूरे साल चलने वाली है, कुछ महीनों की नहीं है. इस से घबराना कैसा?

परीक्षा तो हर व्यक्ति, चाहे वह किशोर हो या बड़ा, हर रोज देता है, हर समय देता है. नेताओं के सामने हर समय अगले चुनावों का डर रहता है. आजकल कभी एक राज्य में चुनाव होते हैं तो कभी दूसरे में, कभी लोकसभा के होते हैं तो कभी पंचायतों के. हर चुनाव परीक्षा की तरह है.

व्यापारियों की हर दिन एक परीक्षा होती है. शाम तक कमाई हुई या नहीं. किसान के लिए हर फसल एक परीक्षा होती है. आज बीज बोया तो कब उस की उपज होगी, कैसी होगी. इसलिए परीक्षा का मौसम तो सब को झेलना है और जब यह चुनौती है ही तो घबराना क्या, जम कर लगो और किला फतेह करो.

परीक्षा में शौर्टकट नहीं चलता, कम से कम जीवन की परीक्षा में तो नहीं चलता. जिस परीक्षा को किशोर देने वाले हैं उस में चलता है पर उस से कोई फायदा नहीं होता. नकली मुखौटा पहनने से कोई शेर नहीं बनता. जीवन की परीक्षाओं में 2+2 हमेशा 4 होते हैं, 2+0 कभी भी 4 नहीं होते. इसलिए इस परीक्षा के मौसम को प्रकृति की तरह गंभीरता से लो, नतीजा चाहे जो भी हो, आप की तैयारी में कमी न हो.

इस देश में लंबी लाइन लगी है उन की जो सोचते हैं कि बेईमानी से, पैसे दे कर, सिफारिश लगा कर, पेपर आउट कर के परीक्षा की गुत्थी सुलझाई जा सकती है, पर इस का कोई फायदा नहीं होता. हमेशा डर लगा रहता है कि कहीं पोल न खुल जाए और उस चक्कर में आगे की परीक्षाएं बोझ नहीं बहुत भारी बोझ बन जाती हैं. आज जो परीक्षा दे रहे हैं वह आज के स्तर की है. उसे बेईमानी से पास किया तो अगली और कठिन परीक्षा को पास करने का उपाय ही नहीं रहेगा. नो शौर्टकट. जुट जाओ.

पर परीक्षा का मतलब यह नहीं कि दूसरी जिंदगी पर ताला लग जाए. अच्छा व्यक्तित्व तभी बनता है जब विविधता हो. दोस्तों के साथ मिलनेजुलने हंसनेहंसाने में उतना ही रंग है जितना सर्दियों के सुबह के सूरज में होता है, राहत देने वाला. जीवन के हर पल को जीना जरूरी है, ढंग से जीना जरूरी है, हंस कर जीना जरूरी है. बस, थोड़ा सा बदलाव मौसम के अनुसार करना है. परीक्षाओं का मौसम है तो उसे सहज लें और लग जाएं भविष्य के मकान के लिए मजबूत और पक्की नींव बनाने के लिए.  

नोटबंदी, अफवाह और असलियत

आपको याद होगा कि सरकार के नोटबंदी यानी विमुद्रीकरण के एलान के अगले ही दिन अफवाह फैली कि नमक की देश में किल्लत हो गई है, नतीजा यह हुआ कि सोशल मीडिया के जरिए इस अफवाह को ऐसे पंख लगे कि देश के एक बड़े हिस्से में नमक के लिए लोग बदहवासी में दुकानों की ओर दौड़ पड़े और औने-पौने दाम देकर घरों में नमक बटोर लाए. आखिर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी कि देशभर के राज्यों में पर्याप्त नमक है और इसकी कहीं कोई कमी नहीं है.

इसी तरह अब एक नई अटकलबाजी सामने आई है कि सरकार बैंक लॉकरों को सील करके उनमें रखे आभूषणों को जब्त कर लेगी. आखिर एक बार फिर केंद्रीय वित्त मंत्रालय को यह शुक्रवार को इस स्पष्टीकरण के लिए सामने आना पड़ा कि यह कोरी अटकलबाजी है और सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाने जा रही है. मंत्रालय ने अधिकारिक रूप से ट्वीट कर कहा है, यह केवल कपोल कल्पना है कि सरकार का अगला कदम बैंक लॉकरों को सील करना और आभूषणों को जब्त करना है, जबकि ऐसी बातें निराधार हैं और सरकार का ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है.

इसके साथ ही दो हजार रुपए के जारी किए गए नए नोटों से स्याही निकलने की खबरों पर भी मंत्रालय ने वास्तविकता बताई है. मंत्रालय ने कहा है कि दो हजार के नए नोटों में सुरक्षा की दृष्टि से कई खूबियां शामिल की गई हैं और इनमें उभरा हुआ मुद्रण भी शामिल है. दरअसल, सही नोट की पहचान के लिए जब आप इसे कपड़े पर रगड़ेंगे तो एक टर्बो विद्युत प्रभाव उत्पन्न होता है और इसी कारण स्याही कपड़े में लग जाती है. सच्चाई तो यह है कि जाली नोट न तैयार किए जा सकें, इस सतर्कता के साथ दो हजार के नए नोट लाए गए हैं.

नोटबंदी के बाद बैंकों से पैसे की निकासी और लेनदेन अभी सामान्य नहीं हो पाया है और लोगों को किसी हद तक मुश्किल हो रही है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक, जबसे प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का एलान किया है, तबसे पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल सीमा से फर्जी नोटों की तस्करी बंद हो गई है. गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू के मुताबिक, सबसे ज्यादा तस्करी पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के जरिए ही होती थी, लेकिन 8 नवंबर के बाद से तस्करी की कोई खबर सामने नहीं आई है. जबकि आधिकारिक जानकारी के अनुसार औसतन 400 करोड़ रुपए के नकली नोट हमेशा देश की अर्थव्यवस्था में सर्कुलेट होते रहे हैं. नोटबंदी के बाद से यह भी काफी कम हो गया है.

केंद्र सरकार का मानना है कि हर साल हमारे दुश्मन देश कम से कम 70 करोड़ रुपए के नकली नोट भारत की अर्थव्यवस्था में सर्कुलेट करते हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2016 की पहली छमाही में ही जांच एजेंसियों ने 12.35 करोड़ के नकली नोट जब्त किए हैं. यह रकम 2015 में जहां 34.99 करोड़ की थी, वहीं 2014 में 36.11 करोड़ और 2013 में 42.90 करोड़ रुपए थी. असलियत यह है कि आतंक में पैसा किस तरह इस्तेमाल होता है, इस पर तैयार की गई गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब सात-आठ सौ करोड़ रुपए हर साल आतंकी गतिविधियों में पंप किया जाता है.

मुझे प्रमोशन करने में मजा आता है: विद्या बालन

फिल्म ‘परिणीता’, ‘लगे रहो मुन्ना भाई’,  ‘द डर्टी पिक्चर’, ‘कहानी’ आदि कई फिल्मों से अपने अभिनय का लोहा मनवा चुकीं अभिनेत्री विद्या बालन स्वभाव से हंसमुख, विनम्र और स्पष्ट भाषी हैं. ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ उनके करियर की टर्निंग पॉइंट थी. जिसके बाद से उन्हें पीछे मुड़कर देखना नहीं पड़ा. उन्होंने अपने उत्कृष्ट परफोर्मेंस के लिए कई अवार्ड जीते. साल 2014 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया. यही वजह है कि आज कोई भी निर्माता, निर्देशक उन्हें लेकर एक सफल फिल्म बनाने की कोशिश करता है. वह अपनी कामयाबी से खुश हैं और मानती हैं कि एक अच्छी स्टोरी ही एक सफल फिल्म दे सकती है. ‘कहानी’ फिल्म उनकी सफल फिल्म रही, इसके बाद ‘कहानी 2’ में भी वह फिर एकबार जबरदस्त भूमिका में आ रही हैं. फिल्म की प्रमोशन को लेकर वह बहुत खुश हैं. उनसे मिलकर बात करना रोचक था, पेश है कुछ अंश.

प्र. इस फिल्म को करने की खास वजह क्या है, कौन सी बात आपको इसमें अच्छी लगी?

ये एक अलग तरह की इमोशनल थ्रिलर फिल्म है. अलग दुनिया, अलग भूमिका, सब अलग है. फिल्म में दुर्गा रानी सिंह के साथ जो होता है वह एकदम अलग है. साढ़े चार साल बाद यह नयी कहानी आई है. इसकी कहानी रोमांचक और मनोरंजक है. इसमें मुझे एक अलग भूमिका करने को मिला जो अच्छी और चुनौतीपूर्ण है.

प्र. सीक्वल करना कितना मुश्किल होता है? कितना प्रेशर होता है?

हां, मुझे पता है कि लोग पुरानी कहानी से इसकी तुलना करेंगे. मैंने निर्देशक से इस बारें में बात भी की. उन्होंने कहा कि ये फ्रैंचाइजी है. इसमें हर कहानी अलग-अलग होगी. पहली बार फिल्म सुनते ही मैंने निर्देशक से पूछा कि क्या इस फिल्म में पुरानी फिल्म का कुछ भाग होगा? उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि ये एकदम अलग फिल्म है, इसकी तुलना उससे नहीं होगी.

प्र. इस फिल्म के लिए आपने कितना होम वर्क किया?

सुजोय और मैं हमेशा फिल्म को और उसके भूमिका को लेकर बात करते रहते हैं, उसमें ही आधी तैयारी हो जाती है, क्योंकि किरदार को समझने में समय लगता है. लेकिन लगातार बात करते रहने से वह आसान होता है. इसमें एक जगह जहां मेरा एक्सीडेंट होता है प्रोस्थेटिक का प्रयोग किया गया है. उसके लिए कई ट्रायल्स हुए. मेकअप पर बहुत ध्यान दिया गया, क्योंकि निर्देशक ‘नो मेकअप लुक’ चाहते थे. जो फिल्म के एक भाग पर अधिक था. दूसरे भाग में प्रोस्थेटिक का प्रयोग हुआ है. वे ड्राई स्किन चाहते थे, क्योंकि दृश्य पहाड़ों पर रहने वाले के थे. जो कलिम्पोंग में शूट हुआ. मेरे मेकअप आर्टिस्ट श्रेयस म्हात्रे ने काफी मेहनत की है. फिर भी सही नहीं हुआ. अंत में निर्देशक ने मोयास्चरायजर लगाने को मना किया. मैंने वही किया और लुक सही आया.

प्र. ये फिल्म एक मां और बेटी की कहानी है, आप इसे कैसे ‘एक्सप्लेन’ करना चाहेंगी?

मेरे हिसाब से एक मां अपनी बेटी के लिए कुछ भी कर सकती है. किसी का क़त्ल भी कर सकती है. कुछ ऐसी ही भाव इस फिल्म में है और शायद अधिकतर मां ऐसी ही होती है. दुर्गारानी सिंह भी ऐसी ही महिला है. एक रियल भूमिका निभाने में बहुत अच्छा लगा.

प्र. फिल्म का कौन सा भाग अभिनय करने में मुश्किल लगा?

किसी का कान चबाना था. मुझे बहुत बुरा लगा. मुझे डर भी लगा था कि ये सीन एक बार में हो जाये. बार-बार ‘रिटेक’ ना करना पड़े.

प्र. आपके हिसाब से फिल्म का प्रमोशन करना कितना जरुरी है?

फिल्म का प्रमोशन करना बहुत जरुरी है. ये आज के कलाकारों के लिए अच्छा मौका है कि वे अपने काम को लोगों तक मीडिया के माध्यम से पंहुचा पाते है. इसे मैं हमेशा नयी-नयी तरीके से करना चाहती हूं. ताकि दर्शकों की रूचि फिल्म के प्रति बढ़े. मुझे अलग-अलग तरीके से प्रमोशन करने में मज़ा आता है.

प्र. अब तक की जर्नी को कैसे देखती है? अपने आप में कितना बदलाव महसूस करती है?

जर्नी तो उतार-चढ़ाव के बीच रही कुछ फिल्में चली कुछ नहीं, पर मैंने कभी हार नहीं मानी, क्योंकि हर दिन एक नया दिन होता है और हर दिन आप कुछ नया कर सकते हैं. मेरे जीवन में बदलाव तो बहुत आया, पहले मैं अकेली थी अब शादी हो चुकी है. सब कुछ बदल चुका है समय के साथ-साथ मैं भी ग्रो हुई हूं.

प्र. आप हमेशा कुछ न कुछ सामाजिक कार्य करती हैं, इसकी रूचि कहां से पैदा हुई?

बचपन से ही हमें सिखाया जाता रहा है कि हमें वो सबकुछ मिला, जिसकी जरुरत है. लेकिन इसका कुछ भाग हमें उनको देना चाहिए जिनके पास यह सब नहीं है. मेरी बहन भी अपने बच्चों को शेयर सिखाती है. ये बचपन से ही बच्चों को सिखाना पड़ता है. इससे बच्चों में संवेदनशीलता बढ़ती है. साथ ही इससे आप को ख़ुशी मिलती है और एक इंसान अपने पास कितना रख सकता है. ये सारी चीजे मुझे किसी और के बारें में सोचने पर मजबूर करती है और मैं सामाजिक कार्य की ओर चल पड़ती हूं.

प्र. आगे क्या कर रही हैं?

मैं एक मलयालम बायोपिक लेखक कमलादास पर कर रही हूं. उसी की तैयारी चल राही है. वह एक कंट्रोवर्सियल महिला थी. जिस तरह से वह अपनी जिंदगी जीती थी वह लोगों को अभी भी रुचिकर लगता है. उनपर फिल्म बन रही है और मैं उनको समझना चाहती हूं. इसके अलावा किसी भी भाषा में अच्छी स्क्रिप्ट पर मैं काम करना चाहूंगी. अभी मराठी और बांग्ला दोनों से ऑफर आते हैं, पर कोई बात अभी तक बनी नहीं है.

मिनटों में चार्ज हो जाते हैं ये स्मार्टफोन

स्मार्टफोन हर दिन और स्मार्ट हो रहे हैं. हर दिन नई टेक्नोलॉजी के साथ नया स्मार्टफोन पेश किया जाता है, लेकिन स्मार्टफोन की बैटरी का अब भी वही हाल है. फीचर फोन की तरह स्मार्टफोन की बैटरी दिनों दिन नहीं चलती है. ऐसे में जो लोग ज्यादा ट्रैवल करते हैं उनके लिए दिक्कत हो सकती है.

आज हम बात करेंगे उन स्मार्टफोन्स की जो बेहद जल्दी चार्ज हो जाते हैं. इन्हें चार्ज करने में अन्य स्मार्टफोन के मुकाबले काफी कम समय लगता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि यह स्मार्टफोन आते हैं फास्ट चार्जिंग टेक्नोलॉजी के साथ.

तो चलिए देखते हैं इस लिस्ट में कौन से टॉप 5 स्मार्टफोन शामिल हैं.

श्याओमी नोट 3

5.5 इंच फुल एचडी आईपीएस डिस्प्ले

हेक्सा कोर स्नैपड्रैगन 650 64बिट प्रोसेसर

2जीबी रैम, 16जीबी स्टोरेज

एंड्रायड 5.1 लॉलीपॉप

16एमपी रियर कैमरा, 5एमपी फ्रंट कैमरा

4000mAh बैटरी, फास्ट चार्जिंग

मोटोरोला मोटो ई3 पॉवर

5 इंच एचडी आईपीएस डिस्प्ले

1GHz क्वाड कोर मीडियाटेक एमटी6735पी प्रोसेसर

2जीबी रैम, 16जीबी इंटरनल स्टोरेज

एंड्रायड 6.0 मार्शमेलो

3500mAh बैटरी, फास्ट चार्जिंग

लेईको ले 1एस

5.5 इंच डिस्प्ले

2.2GHz ऑक्टा कोर मीडियाटेक हेलिओ एक्स10 प्रोसेसर

3जीबी रैम 32इंटरनल मैमोरी

एंड्रायड 5.0 लॉलीपॉप

3000mAh बैटरी

श्याओमी रेडमी 3एस प्लस

5 इंच एचडी आईपीएस टचस्क्रीन डिस्प्ले

1.4GHz स्नैपड्रैगन 430 ऑक्टा कोर प्रोसेसर

2जीबी रैम, 32जीबी रोम हाइब्रिड ड्यूल सिम

4100 mAh बैटरी

यू यूफोरिया

5 इंच आईपीएस फुल लैमिनेटेड डिस्प्ले

1.2GHz क्वाड कोर 64 बिट क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 410 प्रोसेसर

2जीबी रैम 16जीबी इंटरनल मैमोरी

मैमोरी कार्ड स्लॉट

ड्यूल सिम

8 एमपी रियर कैमरा

5एमपी कैमरा

2230mAh बैटरी, फास्ट चार्जिंग

डुप्‍लेसिस पर लगा बॉल टैंपरिंग का आरोप

साउथ अफ्रीकी टीम के कप्तान फाफ डुप्‍लेसिस बॉल टैंपरिंग को लेकर सवालों के घेरे में हैं. टीवी की फुटेज देखने से पता चला है कि डुप्लेसिस होबार्ट टेस्ट मैच के दौरान अपने मुंह से मिंट या टॉफी निकालकर गेंद पर लगाते हुए नजर आ रहे हैं.

बॉल टैंपरिंग को लेकर सवालों में डुप्लेसिस

आईसीसी के मुताबिक डुप्‍लेसिस पर आर्टिकल 2.2.9 आचारसंहिता के उल्लंघन का आरोप लगा है. इस आरोप का मतलब है कि डुप्‍लेसिस गेंद की हालत बदलने के दोषी साबित किए जा सकते हैं. आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेविड रिचर्डसन ने डुप्‍लेसिस पर आरोप लगाकर उन पर सवाल खड़े किए हैं.

वहीं डुप्‍लेसिस ने खुद पर लगे आरोपों से इंकार किया है. इस मामले को अब आईसीसी के मैच रेफरी एंडी पाइक्रॉफ्ट के पास भेज दिया है. वहां सुनवाई के बाद ही डुप्लेसिस को दोषी करार किया जा सकता है या फिर आरोप से बरी किया जा सकता है.

डुप्लेसिस गेंद पर मिंट लगाते हुए दिखाई दिए

होबार्ट टेस्ट के दौरान टीवी फुटेज में डुप्‍लेसिस अपने मुंह से थूक के साथ मिंट निकालकर गेंद पर लगाते दिखाई दिए. अगर ये आरोप साबित हो जाता है तो उन पर 50 से 100 फीसदी मैच फीस का जुर्माना लग सकता है साथ ही और दो सस्पेंशन प्वाइंट और तीन या चार डिमेरिट प्वाइंट काटे जा सकते हैं.

कई बार आरोपों में घिरे रहे हैं डुप्लेसिस

ये पहला मौका नहीं है जब डुप्‍लेसिस पर बॉल टैंपरिंग जैसे आरोप लगे हैं. साल 2013 में इसी वजह से दुबई टेस्ट के दौरान पाकिस्तान को पांच पेनल्टी रन दिए गए थे साथ ही डुप्‍लेसिस को पचास फीसदी मैच फीस का जुर्माना भरना पड़ा था.

नोट बैन के कारण चीन से पिछड़ जाएगा भारत

मोदी सरकार का 500 और 1,000 के नोट अमान्य करने का फैसले भारत चीन से पीछड़ सकता है. भारत का यह दावा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से तरक्की करती अर्थव्यवस्था है भी झूठी साबित हो सकती है. अर्थशास्त्रियों का ऐसा मानना है कि सरकार के इस कदम से देश की जीडीपी ग्रोथ रेट कम हो सकती है.

अभी तक 2017 के वित्तीय वर्ष में घरेलू अर्थव्यवस्था 7.5% की दर से बढ़ोतरी कर रही थी. जुलाई में विश्वबैंक ने भी साल 2016-17 में भारतीय अर्थव्यवस्था के 7.6% की दर से बढ़ोतरी का अनुमान लगाया था. भारतीय अर्थव्यस्था ने 2015-16 में भी लगातार दूसरे साल चीन की अर्थव्यवस्था को पछाड़ते हुए 7.6 की दर से वृद्धि की थी. नोटबंदी के बाद इस वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी ग्रोथ के 3.5% की दर से वृद्धि करने का अनुमान लगाया जा रहा है. इसके मुकाबले चीन की अर्थव्यवस्था 6.7% की दर से वृद्धि कर रही है.

ब्रोकिंग हाउस एम्बिट कैपिटल ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था को 330 बेसिस पॉइंट के आधार पर भारतीय जीडीपी ग्रोथ का अनुमान लगाया है. नोटबंदी के कारण कुछ समय के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था में ठहराव आ जाएगा. हालांकि इससे टैक्स न देने वाले गैर संस्थागत बिजनस (जिनका जीडीपी में 40% योगदान है) संस्थागत बन सकते हैं. इसलिए हमने 2018 के वित्तीय वर्ष के लिए भी भारत की वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 5.8% कर दिया है.

कई ऐनालिस्ट ने सेंसेक्स के लक्ष्यों में भी गिरावट का अनुमान लगाया है. हालांकि 2017 में जीडीपी ग्रोथ रेट में कमी आएगी लेकिन संभव है कि 2018 में ऐसा नहीं होगा.

क्या आउटडेटेड हो चुके SMS को बचा पाएगा गूगल?

अपनी किशोरावस्था में पसंद किए जाने वाले एसएमएस के बारे में दुनिया भर के अलग अलग भाषा बोलने वाले करोड़ों लोग कहानियां कह सकते थे. दो पड़ोसी से लेकर अलग-अलग देश के लोगों के लिए बीच फोन कॉल के सस्ते विकल्प के रूप में यह संदेश भेजने के बहुत काम आया. अब एसएमएस 25 साल का हो चुका है. गूगल इसमें नयी जान फूंकने की कोशिश कर रहा है.

एसएमएस की लोकप्रियता बहुत कम हो गई है

एसएमएस की लोकप्रियता बहुत कम हो गई है. गूगल मैसेंजर, फेसबुक मैसेंजर और गूगल हैंगआउट ने भी एसएमएस को बहुत फीका कर दिया है. जो रही-सही कसर थी उसे फ्री मैसेजिंग ऐप ने पूरा कर दिया. इसके बाद करोड़ों लोगों ने एसएमएस का इस्तेमाल बंद ही कर दिया है. पिछले हफ्ते गूगल ने एलान किया था कि एसएमएस को बदलने के लिए वो अब नए कदम उठाएगा. वह रिच क्लाइंट मैसेजिंग शुरू कर रहा है.

ये फॉर्मेट एंड्राइड स्मार्टफोन पर काम करेगा. रिच क्लाइंट मेसेजिंग का फॉर्मेट सभी स्मार्टफोन के साथ और सभी ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ काम करेगा. इसलिए गूगल ये उम्मीद लगा बैठा है कि नए फीचर सबके काम आ सकेंगे और एसएमएस एक बार फिर से लोग पसंद करने लगेंगे. गूगल चाहता है कि एसएमएस पर अब ग्रुप चैट और टाइपिंग इंडिकेटर जैसे फीचर शामिल किए जाएं, कुछ वैसे ही जैसे मेसेजिंग ऐप में भी होता है.

गूगल के मैसेजिंग ऐप को डाउनलोड करना होगा

इस फॉर्मेट में अब तस्वीर और मल्टीमीडिया मैसेज भी भेजे जा सकेंगे. अगर ऐसा कुछ तैयार किया जा सकेगा तो एसएमएस पर ग्रुप बनाया जा सकेगा, कुछ व्हाट्सऐप ग्रुप की तरह. इन ग्रुप के आप नाम भी दे सकेंगे. इस फीचर को स्मार्टफोन पर लॉन्च करने के लिए गूगल के मैसेजिंग ऐप को डाउनलोड करना होगा. लेकिन इसे सबसे पहले एलजी और नेक्सस स्मार्टफोन पर शुरू किया जाएगा. अगर ये सफल रहा तो दूसरे स्मार्टफोन पर भी इसको लॉन्च किया जाएगा.

जैसे व्हाट्सऐप ब्लू टिक कर ये दिखाता है कि किसी ने मैसेज पढ़ लिया वैसे ही एक फीचर इसमें शामिल किया जा सकता है. इन सभी फीचर के लिए मैसेजिंग सर्विस को डेटा कनेक्टिविटी की जरूरत होती है लेकिन एसएमएस की नयी सर्विस उसके बिना काम कर सकेगी. इन सभी फीचर और एसएमएस में आने वाले बदलाव के बारे में गूगल ने पहले बताया था लेकिन अगले कुछ हफ़्तों में ये बदलाव दिखाई देने लगेंगे.

मैसेजिंग प्लेटफार्म एल्लो और हैंगआउट पर भी लोग मैसेज कर सकते हैं

लेकिन एसएमएस में फिर से जान फूंकना आसान नहीं होगा. रिच क्लाइंट मैसेजिंग का ये फॉर्मेट 2007 में शुरू किया गया था. लेकिन अब तक सिर्फ 49 मोबाइल फोन कंपनियों ने इसे अपनाया है. मतलब साफ है कि अगर आपकी मोबाइल सर्विस देने वाली कंपनी ने इसे नहीं अपनाया है तो गूगल की कोशिश सफल नहीं होगी.

गूगल के लिए एक और परेशानी खड़ी हो सकती है. उसके अपने मैसेजिंग प्लेटफार्म एल्लो और हैंगआउट पर भी लोग मैसेज कर सकते हैं. एसएमएस को बचाने के लिए वो उसे उन दोनों से ज़्यादा अहमियत नहीं दे सकता है. उसकी एक और परेशानी है. ये परेशानी तकनीक की दुनिया के स्वरुप से जुड़ी हुई परेशानी है. कई बार ऐसा हुआ है कि एक तकनीक का प्रोडक्ट लोगों की पसंद से हट गया है. उसके बाद उसका लोगों की पहली पसंद बनना बहुत मुश्किल है.

एसएमएस जैसे जैसे अपने 25वें साल में प्रवेश कर रहा है, लोगों के बीच उसका इस्तेमाल कम हो गया है. अब त्योहार और नए साल पर लोग एसएमएस नहीं व्हाट्सऐप करते हैं, दूसरे मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल करते हैं. जब मांग चरम पर थी तो एक एसएमएस के लिए डेढ़ रुपये तक देने पड़ते थे.

20-30 रुपये देकर 500-1000 मैसेज का पैक खरीद जा सकता है

एसएमएस जैसे जैसे अपने 25वें साल में प्रवेश कर रहा है, लोगों के बीच उसका इस्तेमाल कम हो गया है. अब त्योहार और नए साल पर लोग एसएमएस नहीं व्हाट्सऐप करते हैं, दूसरे मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल करते हैं.

अब हर महीने 20-30 रुपये देकर 500-1000 मैसेज का पैक खरीद जा सकता है. पोस्टपेड कनेक्शन के लिए तो प्लान के साथ एसएमएस फ्री भी दिया जाता है. लेकिन फिर भी उसे अपनाने वाले आजकल कम ही हैं. एसएमएस को भूला दिया जाएगा, ऐसा तो नहीं होगा लेकिन जिस रूप में आपने अब तक एसएमएस को देखा है वो उसे बदले हुए रूप में देखने को तैयार रहिए. लेकिन फिर भी सवाल है कि क्या ये लोगों का दिल फिर से जीत पाएगा?

धीरे-धीरे बंद हो जाएगी नोट बदलने की सुविधा

सरकार नोटबंदी के बाद पुराने नोटों को बदलकर नये नोट लेने की सुविधा को धीरे धीरे बंद कर सकती है. ऐसे नोट रखने वालों से अपनी राशि सीधे बैंक खातों में जमा करवाने को कहा जा सकता है. सरकार फिलहाल ऐसा सोच रही है.

बाजार में नकदी उपलब्धता का इच्छित स्तर हासिल होने के मद्देनजर सरकार इस बारे में विचार कर रही है. उन्होंने कहा कि नोट बदलने की सुविधा तो बाजार में नकदी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए दी गई थी.

एक अधिकारी ने जानकारी दी कि नोटबंदी के बाद बाजार में लगभग 60 प्रतिशत नकदी उपलब्धता बनाए रखना था जिसे हासिल कर लिया गया है. बाकी उपलब्धता सुनिश्चित होने के दौरान नोट बदलने की सुविधा को चरणबद्ध तरीके से बंद किया जा सकता है. सरकार इंतजार कर रही है कि पहले नए नोट चलन में आए. प्रणाली में नये नोट पर्याप्त संख्या में चलन में आने पर नोट बदलने की सुविधा समाप्त की जा सकती है.

फिल्हाल कोई व्यक्ति अधिकतम 2000 रुपये तक के नोट बदलवा सकता है. सरकार ने 8 नवंबर को नोटबंदी यानी 500 व 1000 रपये के मौजूदा नोटों को चलन से बाहर करने की घोषणा की थी. तब सरकार ने लोगों से कहा था वे 9 नवंबर से 30 दिसंबर तक अपने पुराने नोट या तो बैंकों में जमा करवा दें या उन्हें नये नोटों से बलवा लें.

पहले कोई व्यक्ति अधिकतम 4000 रपये प्रतिदिन नोट बलवा सकता था. बाद में इसे बढाकर 4500 रपये प्रति दिन किया गया लेकिन सरकार ने कल घटाकर 2000 रपये प्रति व्यकित कर दिया. इसके साथ ही 30 दिसंबर तक नोट केवल एक बार ही बदलवाए जा सकेंगे.

अधिकारियों का कहना है कि कुछ लोग अपने कालेधन को वैध बनाने के लिए इस सुविधा का दुरूपयोग कर रहे हैं. यही कारण है कि सरकार ने नोट बदलवाने वाले की अंगुली पर अमिट स्याही लगाने का फैसला इसी सप्ताह किया ताकि एक ही आदमी बार बार नोट बदलवाने के लिए नहीं आए.

बल्लेबाजी के बाद कप्तानी में भी रिकॉर्ड बना रहे कोहली

विशाखापट्टनम में इंग्लैंड के खिलाफ खेले जा रहे टेस्ट मैच में कोहली ने शानदार शतक लगाया. इस शतक के साथ ही कोहली बतौर कप्तान सबसे ज्यादा औसत से रन बनाने वाले बल्लेबाजों की फेहरिस्त में शामिल हो गए.

कोहली ने अभी तक कप्तान के रूप में खेले 19 टेस्ट मैचों में 59.03 की औसत से 1712 रन बना लिए हैं. इस दौरान उन्होंने सात शतक लगाए हैं.

इस सूची में कम-से-कम 1500 रन बनाने वाले बल्लेबाजों को शामिल किया गया है.

इस लिस्ट में चौथे नंबर पर श्रीलंका के पूर्व कप्तान महेला जयवर्धने हैं. महेला ने 38 टेस्ट मैचों में श्रीलंका की कप्तानी की. इस दौरान उन्होंने 59.11 की औसत से 3665 रन बनाए. जयवर्धने ने कप्तान के तौर पर 14 शतक लगाए. उनका उच्चतम स्कोर 374 रहा.

तीसरे पायदान पर श्रीलंका के ही पूर्व कप्तान कुमार संगकारा हैं. संगकारा ने 15 टेस्ट मैचों में 69.60 के प्रभावशाली औसत से 1601 रन बनाए. उनका उच्चतम स्कोर रहा 219. संगकारा ने इस दौरान सात शतक लगाए.

ऑस्ट्रेलियाई टीम इन दिनों बुरे दौर से गुजर रही है और कप्तान स्टीवन स्मिथ का बल्ला भी ज्यादा रन नहीं उगल पा रहा है. लेकिन स्मिथ फिर भी इस लिस्ट में शामिल हैं. स्मिथ ने 16 टेस्ट मैचों में 7 शतकों की मदद से 1672 रन बनाए हैं. उनका बल्लेबाजी औसत 69.66 रहा. स्मिथ का उच्चतम स्कोर 192 रहा.

क्रिकेट इतिहास के सबसे दिग्गज बल्लेबाज माने जाने वाले सर डॉन ब्रैडमैन ने 24 टेस्ट मैचों में 3147 रन बनाए. ब्रैडमैन ने बतौर कप्तान 14 शतक लगाए. उनका बल्लेबाजी औसत 101.51 रहा और 270 उनका उच्चतम स्कोर रहा.

तुम बिन 2: ऐसे फिल्में सफलता नहीं पातीं

जीवन, मौत व प्यार को लेकर दार्शनिक बातें सुनने के शौकीन लोगों को यह फिल्म भाएगी. आंखों को सुख प्रदान करने वाली खूबसूरत लोकेशन की तलाश करने वालों को भी यह फिल्म पसंद आएगी. पर जिन्हें महज प्रेम कहानी व रोमांस में रूचि है, उन्हें यह फिल्म सिर्फ बोर करती है.

फिल्मकार अनुभव सिन्हा की  2001 की सिक्वअल फिल्म ‘तुम बिन 2’ की कहानी के केंद्र में स्कॉटलैंड में रह रहे अमर (आशिम गुलाटी), तरन कौर (नेहा शर्मा) व शेखर (आदित्य शील) हैं. तरन अपने होने वाले पति अमर के साथ बर्फीली पहाड़ी पर स्कैटिंग का मजा लेने जाती है.

अमर रात में कुछ उंची पहाड़ियों पर स्कैटिंग के लिए जाता है और तरन से सुबह नौ बजे होटल में मिलने का वदा करता है, मगर वह तय समय पर नहीं पहुंचता है. क्योंकि अमर स्कैटिंग करते समय किसी से टकराकर उंची पहाड़ी से नीचे नदी में गिर चुका है.

दस दिन की मेहनत के बाद भी उसकी तलाश नही हो पाती है. अंततः अमर के पिता (कंवलजीत सिंह) भी मान लेते हैं कि अमर की मौत हो गयी. क्योंकि शेखर नामक युवक आकर खुद बताता है कि उसकी गलती नहीं है,पर अमर व शेखर क्रास करते समय टकरा गए थे.

शेखर कहता है कि चाहे व उसे पुलिस को सौंप दे या अपने बेटे जैसा मान लें. उस दिन से शेखर तो अमर के पिता के लिए बेटे जैसा हो जाता है. अमर के पिता ही शेखर को तरन व उसकी बहनों से भी मिलवाते हैं. शेखर, तरन कौर की हर तरह से मदद कर उससे जीवन व प्यार को लेकर दार्शनिक बातें करते हुए खुश रखने का प्रयास करता है. वह तरन को समझाता है कि एक इंसान के चले जाने से जिंदगी रुक नहीं जाती. वह बताता है कि उसकी प्रेमिका ने किसी अन्य से शादी कर ली, उसे दुःख नहीं हुआ.

शेखर कहता है, ‘‘हम अपनी जिंदगी से जो चाहते हैं और जो चुनते हैं, उसके बीच हमारी अपनी कुछ कमजोरी व कुछ ताकत होती है. पर तरन को बार बार अमर की याद सताती रहती है. शेखर, तरन को डर का मुकाबला करना सिखाता है. धीरे धीरे दोनों में प्यार हो जाता है.”

तभी पता चलता है कि अमर जिंदा है, वह आठ माह से लंदन के एक अस्पताल में कोमा में था. अब उसे होश आ गया है. डॉक्टर का फोन पाकर अमर के पिता, तरन का परिवार व शेखर लंदन से अमर को लेकर आते हैं. तरन खुश है, पर असमंजस में आ जाती है कि वह क्या करे. एक उसका अतीत का प्यार है, तो दूसरा उसका वर्तमान का प्यार है.

एक दिन तरन,अमर को लेकर गुरूद्वारा जाती है और वह अमर को सच बताती है कि जब वह कोमा में चला गया था, तो यहां पर सभी को लगा था कि उसकी मौत हो गयी. वह आठ माह तक उसकी याद में रोती रही. पर दोस्त बनकर आए शेखर ने उसे खुश रहना सिखाया. और अब सच यह है कि वह शेखर से प्यार करती है. तरन की बात सुनकर अमर एक निर्णय लेता है, तभी गुरूद्वारा में शेखर भी पहुंच जाता है.

अमर, तरन का हाथ शेखर के हाथ मे देते हुए कहता है कि वही तरन का वर्तमान है. वह तो उनका दोस्त ही रहेगा. पर तरन का अमर से फोन पर बात करना या अमर को लंदन डाक्टर के पास दिखाने ले जाना शेखर के मन में ईर्ष्या का भाव जगा देता है. वह एक हारे हुए प्रेमी व जलन की भावना से कुछ काम करता है. अंततः शेखर, तरन से दूर जाने का फैसला कर लेता है.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो आदित्य शील, नेहा शर्मा और आशिम गुलाटी यह तीनों कलाकार निराश करते हैं.

‘तुम बिन’ का सिक्वअल बनाते समय पटकथा लेखक के तौर पर अनुभव सिन्हा कुछ कन्फ्यूज हो गए हैं. पहली फिल्म में अमर मर गया था, पर दूसरी फिल्म में वह अमर को जिंदा दुबारा वापस ले आए हैं. वह एक तरफ शेखर को अमर की मौत के लिए प्रायश्चित करने वाला शख्स बता रहे हैं, जो कि तरन को खुशी देने का काम कर रहा है. तो दूसरी उसी शेखर के अंदर प्यार को लेकर ईर्ष्या से ग्रसित व एक शक्की दिमाग वाला इंसान भी बता देते हैं. एक तरफ वह वर्तमान पीढ़ी के बीच पनप रहे ‘कॉफी डे वाले प्यार’ की बात करते हैं, तो दूसरी तरफ शाश्वत व पहले प्यार की जीत की बात करते हैं. इसी चक्कर में फिल्म की गति न सिर्फ धीमी होती है, बल्कि फिल्म लंबी हो गयी. परिणामतः दर्शक सोचने लगता है कि फिल्म कब खत्म होगी.

इंटरवल से पहले पाकिस्तानी लड़के को लेकर गढ़े गए दृष्य बेमानी हैं और मूल कहानी पर जबरन थोपा हुआ है. इससे भी लेखक व निर्देशक का कन्फ्यूजन ही साबित होता है. 15 वर्ष में समाज, देश व लोग काफी कुछ बदल चुका है. प्यार को लेकर सोच भी बदली है. जिसके चलते भी दर्शक इस कहानी से इत्तफाक नही रखेगा. इंटरवल के बाद कहानी कुछ ज्यादा ही बोर करती है.

शेखर के किरदार में कई तरह के बदलाव गले नहीं उतरते. कुछ अच्छे गानों के बावजूद फिल्म में गाने इतने हैं कि वर्तमान समय की भोजपुरी फिल्में याद आ जाती हैं. फिल्म क्लायमैक्स कई फिल्मों व सीरियलों की नकल मात्र है. पर अनुभव सिन्हा के निर्देशन की तारीफ की जा सकती है, कुछ दृष्य अच्छे बने हैं.

पूरी फिल्म को बहुत ही खूबसूरत लोकेशन पर फिल्माया गया है. यह लोकेशन जरुर लोगों की आखों को सकून प्रदान करती हैं. फिल्म के कैमरामैन ईवान मुलीगान तारीफ के हकदार हैं.

टीसीरीज और बनारस मीडिया वक्र्स द्वारा निर्मित ढाई घंटे की अवधि वाली फिल्म ‘तुम बिन 2’ के लेखक अनुभव सिन्हा, संगीतकार अंकित तिवारी व निखिल विनयतथा कलाकार हैं, आशिम गुलाटी, नेहा शर्मा, आदित्य सील, मौनी रॉय, कंवलजीत सिंह व अन्य.

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