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रोजाना खाएं एक फूड और कई बीमारियां दूर

बदलते लाइफस्टाइल में लोग पौष्टिक और सेहतमंद फूड को छोड़कर फास्ट फूड को ज्यादा एहमियत दे रहे हैं. इसी वजह से लोग दिन-प्रतिदिन बीमारियों की चपेट में आते जा रहे हैं और तरह-तरह की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं. आज हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताएंगे, जिनके सेवन से आप हमेशा के लिए बहुत सारी परेशानियों और बीमारियों से बच सकते है.

1. एक सेब

आप रोजाना एक सेब खाकर कई बीमारियों से दूर रह सकते है. अगर आप बीमारियों से दूर रहेंगे तो जाहिर सी बात है कि डॉक्टर का सामना नहीं करना पड़ेगा.

2. एक तुलसी का पत्ता

आप रोजाना एक तुलसी का पत्ता खाकर कैंसर के खतरे से हमेशा के लिए बचे रह सकते है.

3. एक नींबू

रोजाना नींबू के सेवन से आप मोटापे की समस्या से कोसों दूर रह सकते है.

4. एक कप दूध

दूध शरीर में कैल्शियम की मात्रा को पूरा करता है. रोजाना एक कप दूध पीने से हड्डियां मजबूत रहती है.

5. तीन लीटर पानी

अगर आप रोजाना तीन लीटर पानी का सेवन करेंगे तो बीमारियों आपको छू भी नहीं सकती क्योंकि पानी शरीर के विकास के लिए जरूरी होता है.

मैडिकल शिक्षा में भ्रष्टाचार

मैडिकल शिक्षा में सुधार और उस में व्याप्त भयंकर भ्रष्टाचार को खत्म करने के नाम पर नरेंद्र मोदी सरकार मैडिकल काउंसिल औफ इंडिया की जगह मैडिकल कमीशन जैसी संस्था बनाने की तैयारी में है. इस बारे में प्राप्त 9 हजार सुझावों में से ज्यादातर चाहे निरर्थक से ही थे, सरकार अब इस बात पर उलझी है कि डाक्टरों द्वारा मतदान के जरिए बनी वर्तमान मैडिकल काउंसिल की जगह सरकारी सिफारिशों पर बने आयोग के सदस्यों के हाथों में चिकित्सा शिक्षा दे दी जाएगी.

यह इलाज ऐसा है जैसे डेंगू पीडि़त को अस्पताल के ही मच्छरों से भरे कमरे में बैठा दिया जाए और कहा जाए कि कमरे के मच्छर क्योंकि अस्पताल के अपने हैं, वे मरीज को ठीक कर देंगे.

अभी तक जो संकेत मिले हैं उन से नहीं लगता कि इस शिक्षा में कोई आमूलचूल बदलाव होगा और मैडिकल कालेज खोलने, पाठ्यक्रम निर्धारित करने, परीक्षाएं लेने, प्रवेश परीक्षा आयोजित करने में कोई विशेष परिवर्तन होगा. बस, इतना असर होगा कि पहले मैडिकल काउंसिल के सदस्य चुनावों में सिर खपाते थे, अब सरकारी नेताओं और अफसरों के जूते साफ करेंगे. कोई और परिवर्तन होगा इस के आसार नहीं हैं.

मैडिकल कालेजों में प्रवेश प्रक्रिया बहुत ही उलझी और विवादों से घिरी रही है. दशकों से डाक्टर बनने के इच्छुक युवाओं की संख्या मैडिकल कालेजों में उपलब्ध सीटों से कहीं ज्यादा है. मेधावी छात्र न केवल पूरेपूरे साल किताबों में सिर खपाए रहते हैं, बल्कि बीसियों तरह की कोचिंग कक्षाएं लेते हैं कि उन्हें मैडिकल कालेज में जगह मिल जाए. पहले कई दशक तक तो सरकार मैडिकल शिक्षा पर कुंडली मारे बैठी रही और चाहे फीस कम थी पर नए कालेज भी पर्याप्त संख्या में नहीं खोले. जब निजीकरण किया गया, सैकड़ों कालेज तो खुले पर उन में प्रवेश हेतु मोटा पैसा लिया जाने लगा और फीस कई गुना बढ़ गई, क्योंकि मैडिकल शिक्षा वास्तव में बहुत खर्चीली है. फिर भी छात्रों की संख्या कम नहीं हुई, क्योंकि देश में आज भी साधारण योग्य डाक्टरों की भारी कमी है, विशेषज्ञों की तो बात छोडि़ए.

यह नया मैडिकल आयोग मूल समस्या, कालेजों में सीटें बढ़वाने पर कुछ कर पाएगा इस में संदेह है. यह मानक तय करने के नाम पर उसी तरह से भ्रष्ट खान बना रहेगा जैसी मैडिकल काउंसिल पहले रही थी, क्योंकि लेबल बदलने से दवा नहीं बदलती. मैडिकल शिक्षा भारत को हर स्तर की चाहिए, घटिया भी, बढि़या भी पर यह काउंसिल या आयोग सब को एकजैसी शिक्षा देने का आदेश देगा जो संभव नहीं है, क्योंकि सभी छात्र और सभी शिक्षक एकजैसे नहीं हो सकते. वर्तमान मैडिकल काउंसिल में भयंकर भ्रष्टाचार है, अरबों रुपए का लेनदेन कालेजों को मान्यता देने में होता है, इंस्पैक्शन रिपोर्टें सही नहीं होतीं, पाठ्यक्रम बिखरा होता है, फीस पर नियंत्रण नहीं है. यही कारण है कि बीमार देश में हर तरह की बीमारी बुरी तरह बढ़ रही है और आमतौर पर मरीज या तो भटकते रहते हैं या फिर जेब खाली कराते रहते हैं. सरकारी दवा केवल मैडिकल शिक्षा और मैडिकल उद्योग को लोकतांत्रिक शिकंजे से निकाल कर अफसरिया शिकंजे में डाल देगी.

किपचोगे-देगेफा ने जीती दिल्ली हाफ मैराथन

दिल्ली हाफ मैराथन में केन्या और इथोपिया के धावकों का दबदबा रहा. मौजूदा ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता केन्या के इलियुद किपचोगे ने पुरुष और इथोपिया की वोर्कनेश देगेफा ने महिला वर्ग का खिताब अपने नाम किया.

किपचोगे ने 59 मिनट, 44 सेकेंड में 21.097 किमी की दूरी पूरी की. किपचोगे ने इथोपिया के यिगरेम देमेलाश और केन्या के अगस्तीन चोगे को पछाड़ा, लेकिन कोई रिकॉर्ड नहीं बना पाए. देमेलाश ने अपना निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 59 मिनट, 48 सेकेंड का समय लिया, जबकि चोगे ने 60 मिनट, एक सेकेंड में दौड़ पूरी की.

अगस्त में रियो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद यहां पहली प्रतिस्पर्धी दौड़ में हिस्सा ले रहे किपचोगे हालांकि 2014 में इथोपिया के गाये एडोला के बनाए 59 मिनट, छह सेकेंड के रिकॉर्ड को नहीं तोड़ पाए.

किपचोगे ने कहा, ‘मैं भारत आकर खुश हूं. परिस्थितियां अच्छी थी. मैं रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाया, लेकिन समय को लेकर कोई समस्या नहीं है.’

महिला वर्ग में देगेफा ने एक घंटे, सात मिनट, 42 सेकेंड के समय के साथ खिताब जीता. इथोपिया की ही अबादेल येसानेह (एक घंटा, सात मिनट, 52 सेकेंड) दूसरे, जबकि केन्या की लाह किप्रोप (एक घंटा, आठ मिनट, 11 सेकेंड) तीसरे स्थान पर रहीं.

पुरुष और महिला वर्ग के विजेताओं को 27-27 हजार डॉलर (लगभग 18 लाख, 36 हजार रुपये) मिले. केंद्रीय खेल मंत्री विजय गोयल और भारतीय एथलेटिक्स महासंघ के अध्यक्ष आदिल सुमारीवाला ने स्पर्धाओं को हरी झंडी दिखाई.

100 मीटर के पूर्व विश्व रिकार्ड धारक असाफा पावेल भी इस दौरान धावकों की हौसला अफजाई के लिए मौजूद थे.

लक्ष्मणन व मोनिका भारतीय विजेता

सेना के जी लक्ष्मणन 64 मिनट, 37 सेकेंड में दौड़ पूरी कर भारतीय वर्ग के विजेता बने. जबकि महिला वर्ग में नासिक की मोनिका अथारे एक घंटा, 15 मिनट, 34 सेकेंड में दौड़ पूरी कर पहले नंबर पर रहीं. भारतीय विजेताओं को तीन-तीन लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई.

भारतीय पुरुष वर्ग में मुहम्मद यूनुस (एक घंटा, चार मिनट, 38 सेकेंड) ने दूसरा स्थान हासिल किया. मान सिंह (एक घंटा, चार मिनट, 40 सेकेंड) तीसरे स्थान पर रहे. महिलाओं में संजीवनी यादव (एक घंटा, 15 मिनट, 35 सेकेंड) दूसरे स्थान पर रहीं. प्रबल दावेदार स्वाति गधावे (एक घंटा, 17 मिनट, 43 सेकेंड) तीसरे स्थान पर रहीं.

इन टेक्नोलॉजी का है आने वाला जमाना

अपने फोन के जरूरी डेटा को सेव रखने के लिए फोन में पासवर्ड लॉक लगाने वाला जमाना अब नहीं रहा. एक ग्लोबल रिपोर्ट के अनुसार पेमेंट्स के लिए 2017 तक भारत में बायोमेट्रिक स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या कम से कम 471 लाख होगी. यानी कि न केवल फोन का डेटा सुरक्षित रखने के लिए बल्कि ऑनलाइन पेमेंट्स के लिए ये टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की जा रही हैं. आगे जानिए ऐसी 5 बायोमेट्रिक टेक्नोलॉजी के बारे में जिनके आगे पासवर्ड याद रखने का जमाना पुराना हो गया है…

फिंगरप्रिंट

'ऐपल पे' ने टच आईडी के लिए इसकी शुरुआत कर फिंगरप्रिंट आईडी को फेमस कर दिया है. बायोमेट्रिक कंपनी ज्वाइप ने मास्टरकार्ड को विश्व के पहले फिंगरप्रिंट पेमेंट कार्ड से कलैबरेट किया है. इसका उपयोग कॉन्टैक्टलेस पेमेंट्स के लिए किया जाता है.

वॉइस

यह यूजर के वॉइस के टाइप, हार्मोनिक्स, पिच और रेंज पर बेस्ड लॉक होता है.

यूके बेस्ड HSBC कस्मटर्स अपने वॉइस प्रिंट से ऑनलाइन अकाउंट लॉगइन कर सकते हैं. ICICI बैंक भी जल्द ही ये सर्विस शुरू करने जा रहा है.

रेटिना

यह 1980 में डेवेलप हो गया था. यह तरीका आंख के पीछे की रक्त धमनियों के पैटर्न पर बेस्ड है. यह पैटर्न हर व्यक्ति का अलग-अलग होता है इसलिए यह एक सेफ लॉक है.

जापानी टेलिकॉम कंपनी डोकोमो और हैंडसेट बनाने वाली कंपनी फुजित्सु ने एक स्मार्टफोन लॉन्च किया है जिसमें आइरिश स्कैनिंग से मोबाइल पेमेंट करने का फीचर दिया गया है.

हार्टबीट

हार्टबीट या ECG स्कैनिंग ज्यादा जटिल है और अब तक बहुत ज्यादा पॉप्युलर भी नहीं हुई है.

टॉरंटो बेस्ड एक कंपनी ने मास्टरकार्ड और रॉयल बैंक ऑफ कनाडा से हार्टबीट लॉक को लिंक किया है. इसके जरिए यूजर अपने क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन बैंकिंग कर सकता है.

फेशिअल बायोमेट्रिक्स

फेशिअल रेकग्नाइज़ेशन टेक्नॉलजी पहचान के लिए चेहरे के यूनिक कैरक्टर्स को मैच करता है.

एक फिनिश कंपनी ने यह सिस्टम डिवेलप किया है जिससे फेशिअल बायोमेट्रिक्स के जरिए ऑनलाइन पेमेंट की जा सकती हैं. 

बढ़ने वाली है आपकी सैलेरी

अगले साल यानी 2017 में कर्मचारियों की सैलरी में होने वाले इजाफा को लेकर हुए एक सर्वे की रिपोर्ट आई है. इस रिपोर्ट के अनुसार 2017 कर्मचारियों की सैलरी में सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी का अनुमान है.

एक अंग्रेजी वेबसाइट में छपी रिपोर्ट के अनुसार, 2017 में भारत के कर्मचारियों की सैलरी में करीब 10 फीसदी का इजाफा होगा. 2016 में भी कर्मचारियों की सैलरी में करीब इतने फीसदी ही इजाफा हुआ था. एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की सलाहकार संस्था ने 2016 की तीसरी तिमाही के बजट के आंकड़े पेश किए हैं.

सस्था की रिपोर्ट में भारत में हो रहे विकास के कामों और उभरते बाजार को देखते हुए कहा गया है कि यहां 2017 में सबसे ज्यादा वेतन में बढ़ोत्तरी होगी. 2017 में इंडोनेशिया में नौ फीसदी, श्रीलंका में 8.9 फीसदी, चीन में सात फीसदी और फिलीपीन्स में 6.4 फीसदी की वेतन वृद्धि होगी. भारत के साथ दिए ऊपर बताए गए इन देशों का नाम उन पांच देशों में शामिल हैं जहां 2017 में सबसे ज्यादा वेतन वृद्धि होने का अनुमान है.

वहीं विकसित देशों खासकर यूरोप और अमेरिका में महज तीन फीसदी ही वेतन वृद्धि होने की आशंका जताई गई है. सर्वे में यह भी कहा गया है कि 2016 में भारत में 10.8 वेतन वृद्धि की योजना थी लेकिन बाद में 10 फीसदी की बढ़ोत्तरी की वेतन में की गई.

और ऐसा पहली बार नहीं किया गया 2015 में वेतन में जितने फीसदी बढ़ोत्तरी की योजना बनी थी उससे कम वेतन वृद्धि की गई थी. यह चलन अगर 2017 में भी रहा तो कर्मचारियों को वेतन में एक अंक की बढ़ोत्तरी की देखने को मिलेगी.

इस रिपोर्ट में विभिन्न तरह के उद्योगों के विभिन्न कामों पर लगे लोगों के वेतन वृद्धि के परिपेक्ष में वर्णन किया गया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनियां बड़ी ही चालाकी के साथ टॉप परफॉर्मर्स की सैलरी में ज्यादा बढ़ोत्तरी कर देती हैं. ये कंपनियां सामान्य कर्मचारी के वेतन की बढ़ोत्तरी कम भी कर देती हैं.

खास बात यह भी जिन उद्योग में 2017 में सबसे ज्यादा सैलरी बढ़ने की संभावना है वह फर्मास्युटिकल यानी दवा से जुड़े उद्योग. इस उद्योग के कर्मचारियों की सैलरी में 11 फीसदी बढो़त्तरी की संभावना जताई गई है.

नोकिया 2017 में उतारेगी नया स्मार्टफोन

मोबाइल की दुनिया में कभी अग्रणी कंपनी रह चुकी नोकिया साल 2017 में नए स्मार्टफोन के साथ बाजार में उतरेगी. नोकिया के कैपिटल मार्केट्स डे 2016 में इस बात का खुलासा हुआ है.

नोकिया के पास चूंकि अपनी कोई निर्माण सुविधा नहीं है, इसलिए स्मार्टफोन बनाने के लिए वह फिनलैंड की कंपनी एचएमडी ग्लोबल तथा ताइवान की कंपनी फॉक्सकॉन की मदद लेगी.

रिपोर्ट के मुताबिक, नोकिया के पूर्व अधिकारियों के नेतृत्व में एचएमडी नोकिया ब्रांड के फोन व एक्सेसरी के विपणन व बिक्री का काम करेगी, जबकि शोध व विकास तथा इसे बनाने का काम फॉक्सकॉन करेगी.

बताया जाता है कि नोकिया का पहला स्मार्टफोन डी1सी होगा, जो एंड्रॉयड 7 नोगट पर चलेगा, जिसमें स्नैपड्रैगन 430 प्रोसेसर, 3 जीबी रैम तथा 1080 पिक्सल का डिस्प्ले है.

औलराउंडर बनना है तो जिज्ञासु बनें

भारतीय शिक्षा पद्धति के जनक मैकाले की सदैव यह कह कर आलोचना की जाती है कि उन्होंने क्लर्क पैदा करने की शिक्षा पद्धति बनाई, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने कुछ और भी कहा था. मैकाले ने कहा था कि मुझ से सबकुछ ले लो, मगर सिर्फ दो चीजें मेरे पास रहने दो, जिज्ञासा और आमोदप्रमोद जब मनुष्य धरती पर आया तो वह आज के मनुष्य की तरह नहीं था. वह जंगली था, जानवरों में और उस में कोई खास फर्क नहीं था, लेकिन धीरेधीरे उस में सोचने की ताकत आई और इसी ताकत ने उसे जानवरों से अलग कर दिया. इस के कारण ही एक छोटा सा मनुष्य एक बड़े हाथी के सिर पर बैठ कर उस से जो चाहता है, करवा लेता है. यह तो मात्र एक उदाहरण है. ऐसी और भी कई बातें हैं.

कहने का मतलब यह है कि जिज्ञासा ने आदमी को कहां से कहां पहुंचा दिया. जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि आदमी और पशु में शायद यही भेद है कि आदमी में जिज्ञासा होती है जबकि पशु में जिज्ञासा नहीं होती. आदमी में अगर चीजों, घटनाओं और व्यवस्थाओं के बारे में जानने की जिज्ञासा नहीं होती तो वह कभी प्रगति नहीं कर पाता.

अत: जिस में जिज्ञासा हो वह आदमी हर किसी से हर पल कुछ न कुछ सीख सकता है. एक छोटा सा कागज का टुकड़ा जिसे हम सड़क पर पड़ा देखते हैं, वह शायद संसार की किसी पुस्तक का कोई पृष्ठ है. उस से भी आप को कोई नई बात मालूम हो सकती है. बशर्ते आप को पढ़ना आता हो.

लक्ष्य निर्धारित कीजिए

हर व्यक्ति सफलता का इच्छुक होता है. आसमान छूने की तमन्ना सभी में होती है, चाहे वह कैरियर का क्षेत्र हो या अध्ययन का. अत: अपने लक्ष्य पर विश्वास कर उस पर ध्यान केंद्रित करें. अपनी क्षमता को पहचानें व उसी के अनुरूप कार्य करें. लगातार ध्यान रखें कि आप कहां गलत साबित हो रहे हैं. आप ने सपना तो बहुत उम्दा देखा है, पर देखने भर से तो वह पूरा नहीं हो जाता. उस के लिए जरूरी है समर्पित होना तथा संकल्प लेना.

जो भी पढ़ें या जानें पूरी ईमानदारी से उस में डूबें

हर स्थिति में आप का साथ सिर्फ पुस्तकें ही दे सकती हैं. पुस्तकें सच्ची मित्र होती हैं. इंदिरा गांधी ने एक जगह लिखा था कि प्राय: बच्चे अपने मातापिता को आराध्य मानते हैं, लेकिन मेरे पिता हर चीज में रुचि रखते थे. उन्होंने मुझे सारी दुनिया के बारे में बहुत सी बातें बताईं. उन्होंने कंकरपत्थर, पेड़पौधों तथा कीड़ेमकौड़ों के जीवन तथा रातों के पहरेदार सितारों तक का दिलचस्प इतिहास मुझे बताया. अत: पढ़ने और जानने से आप नितनए अनुभव पाते हैं.

सीखने की कोई उम्र नहीं

आधुनिकीकरण के साथ कारोबार की जटिलताएं भी बढ़ती जा रही हैं. इसलिए जब भी मौका मिले नई जानकारी हासिल करें. अगर हौसला हो तो किसी भी उम्र में इंसान कुछ नया कर सकता है. कार्य का क्षेत्र चाहे जो हो, आप में अटूट लगन, श्रद्धा, गहरा आत्मविश्वास हो तो अवसर आप के द्वार पर दस्तक देते रहते हैं.

हार न मानें

अनुशासन और कड़ी मेहनत ही सफलता का असली मार्ग है. यदि आप में यह हुनर है तो चूकिए नहीं. एक जनून के तहत बस जुट जाइए और फिर देखिए आप की मेहनत का रंग कैसे निखरता है. किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए नीचे की पहली सीढ़ी चुनें. खड़े हो कर इमारत की ऊंचाई नापने मात्र से सब से ऊपर की मंजिल पर नहीं पहुंचा जा सकता. अत: छोटी शुरुआत, अच्छी शुरुआत.

दोस्ती का दायरा समझदारी का हो

रिश्तों और सामाजिक बंधनों से भी हम बहुत कुछ सीखते हैं, लेकिन इस के लिए जरूरी है शिष्टता. अंगरेजी में एक बड़ी मशहूर कहावत है, ‘फर्स्ट इंप्रैशन इज द लास्ट इंप्रैशन.’ पहली बार आप जिस से मिलें, यदि आप की मुलाकात अच्छी रही तो मिलने वाला आप के बारे में अच्छा ही सोचेगा. पहली मुलाकात में ही कड़वाहट आ जाए तो आप कितने भी प्रयत्न कर लें, एक टीस दिल में जरूर रहेगी. इसलिए अच्छे दोस्त बनाइए, अच्छी चर्चा कीजिए. इस से काफी कुछ सीखने को मिलता है. बातचीत से कई मुश्किल राहें भी आसान हो जाती हैं.

खुशियां बिखेरने वाले बनिए

आप का खुशमिजाज, जिंदादिल होना आप को तो उत्साह से भरपूर रखेगा ही, दूसरों को भी आप का साथ अच्छा लगेगा. लोग आप का गर्मजोशी से स्वागत करेंगे तथा आप के सहयोग के लिए हाजिर भी रहेंगे.

मानवता तथा समाज के लिए हम तभी उपयोगी हो सकते हैं, जब हम खुशियां बिखेरने वाले बनें. जब हमारा काम करने का या कुछ सीखने का मन ही न हो तो काम अच्छा कैसे हो सकता है? हलकेफुलके मूड में काम करने से हमें भारी व उबाऊ काम भी रुचिकर लगता है.

अपने पर भरोसा रखें

किसी भी नई बात को समझने में समय लगता है. धीरज रखें. धीरेधीरे आप का लक्ष्य आप के सामने होगा. सुनहरा भविष्य आप का इंतजार कर रहा होगा, बशर्ते आप विपरीत स्थिति में अपना आपा न खोएं. इतिहास भी इस बात का गवाह है कि बस, प्रवृत्ति जागरूक हो, दृढ़संकल्प हो तो औलराउंडर बनने से आप को कोई रोक नहीं सकता. तो अगली बार कोई भी रोचक व अच्छी चीज दिखने पर अपनी जिज्ञासा अवश्य शांत करें.                                

हार से परेशान आस्ट्रेलियाई टीम में बड़ा बदलाव

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चल रही तीन मैचों की टेस्ट सीरीज के शुरूआती दो मैच में हार का सामना करने के बाद आस्ट्रेलियाई टीम में बड़ा बदलाव किया गया है.

हार की मुश्किल का सामना कर रहे आस्ट्रेलियाई टीम में इंग्लैंड में जन्में सलामी बल्लेबाज मैट रेनशा को जगह देने के अलावा पांच और बदलाव किए हैं.

20 वर्षीय सलामी बल्लेबाज रेनशा और अन्य बल्लेबाजों को किया गया शामिल

चयनकर्ताओं ने 12 सदस्यीय टीम में क्वींसलैंड के 20 वर्षीय सलामी बल्लेबाज रेनशा के अलावा दो अन्य बल्लेबाजों पीटर हैंडसकांब और निक मेडिनसन को शामिल किया है, जिन्हें पदार्पण का मौका मिल सकता है.

चाड सेयर्स और जैकसन बर्ड की राष्ट्रीय टीम में हुई वापसी

तेज गेंदबाज चाड सेयर्स और जैकसन बर्ड की राष्ट्रीय टीम में वापसी हुई है, जबकि पीटर नेविल को बाहर करके विकेटकीपर का स्थान मैथ्यू वेड को दिया गया है.

नेविल, बर्न्स, एडम वोजेस, कैलम फर्ग्यूसन और जो मैनी हुए टीम से बाहर

नेविल के अलावा जो बर्न्स, एडम वोजेस, कैलम फर्ग्यूसन और जो मैनी को टीम से बाहर कर दिया गया है. अंतरिम मुख्य चयनकर्ता ट्रेवर होन्स ने कहा कि वोजेस, आलराउंडर मिशेल मार्श और स्पिनर स्टीव ओकीफी के नाम पर चोट के कारण विचार नहीं किया गया.

आस्ट्रेलियाई टीम पहले दो टेस्ट हारने के बाद सीरीज में 0-2 से पीछे चलने के साथ ही यह सीरीज गंवा चुकी है.

बदलाव के बाद टीम इस प्रकार है

स्टीव स्मिथ (कप्तान), जैकसन बर्ड, पीटर हैंडसकोंब, जोश हेजलवुड, उस्मान ख्वाजा, नाथन लियोन, निक मेडिनसन, मैट रेनशा, चाड सेयर्स, मिशेल स्टार्क, मैथ्यू वेड और डेविड वार्नर.

मन मार कर न जीएं: शिल्पा शेट्टी

तकरीबन 40 फिल्मों में ऐक्टिंग कर चुकीं शिल्पा शेट्टी एक मौडल, हीरोइन, कारोबारी और एक मां हैं. फिल्मों में ऐक्टिंग के साथसाथ उन्होंने बड़े कारोबारी राज कुंद्रा से शादी की और एक बच्चे की मां बनीं. बच्चे के जन्म के बाद वे अपनी फिटनैस को ले कर काफी जागरूक हैं और उन्होंने इस सब्जैक्ट पर किताब भी लिख डाली. शिल्पा शेट्टी की किताब ‘द ग्रेट इंडियन डाइट’ काफी चर्चा में रही है. पेश हैं, उन से हुई बातचीत के खास अंश:

‘हैल्दी हार्ट’ मुहिम के साथ जुड़ने की वजह क्या है?

आजकल हमारा जिंदगी जीने का तरीका बदल चुका है. ऐसे में छोटीछोटी कोशिशें आप के शरीर को सेहतमंद रख सकती हैं. ऐक्टिव रहना, सही डाइट लेना और खुश रहना, ये 3 चीजें हमारे दिल को 50 फीसदी हैल्दी बना सकती हैं. ऐसा देखा गया है कि आजकल की औरतें अपनी सेहत को ले कर जागरूक हैं, पर बिना किसी ऐक्सपर्ट की सलाह के खानपान छोड़ देती हैं और पतला होने की कोशिश करती हैं, जो गलत है. अपनी सेहत की देखभाल करना एक अच्छी आदत है, जिसे आप को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करना चाहिए.

ऐसी औरतों को आप क्या संदेश देना चाहती हैं?

मेरा उन से कहना है कि परिवार के साथसाथ अपनेआप को भी समय दें. इस से आप खुद को सेहमतंद रख सकती हैं और किसी बड़ी बीमारी को आने से रोक सकती हैं. यह कोई मुश्किल काम नहीं है. हफ्ते में 4 दिन, जिस में 20 मिनट का समय हर रोज कोई भी औरत अपने लिए निकाल सकती है. उस में मैडिटेशन, सीढि़यों से चढ़ना, सब्जियां लेते वक्त पैदल चल कर आनाजाना करने से ही आप का आधा वर्कआउट पूरा हो जाता है. इस के अलावा खुश रहने की कोशिश करें. किसी भी तरीके से आप अपनेआप को ऐक्टिव रखें.

आप की फिटनैस का राज क्या है?

मैं हमेशा बैलैंस डाइट लेती हूं. बिना बैलैंस फूड लिए मैं ऐसी शेप में कभी भी नहीं होती. इस के अलावा नियमित वर्कआउट, मैडिटेशन वगैरह सब करती हूं. मैं किसी भी समस्या को अपने ऊपर हावी नहीं होने देती.

आप को किस उम्र में या कब लगा था कि अपनी फिटनैस पर ध्यान देना है या लोगों को इस बारे में जानकारी देनी चाहिए?

मैं अपने काम को ले कर हमेशा सजग थी. सैलिब्रिटी होने के नाते मुझे पता है कि लोग मेरी बात को सुनते हैं. आज से तकरीबन 5 साल पहले जब मेरा बेटा हुआ, उस के बाद  लगा कि मुझे फिटनैस पर ध्यान देने की जरूरत है. दरअसल, आप अपने बच्चे को जो खिला रहे हो, सालों बाद उस का असर उस पर दिखता है. बहुत सारे मातापिता ऐसे हैं, जो बच्चों को खुद ही गलत आदतें डलवाते हैं, क्योंकि उन्हें फूड और उस की न्यूट्रीशन के बारे में पूरी तरह जानकारी नहीं है.  ऐसे में मुझे लगा कि यह मेरी ड्यूटी है कि मैं इस क्षेत्र में आऊं और अपनी बातें शेयर करूं, मातापिता से गुजारिश करूं कि वे अपने बच्चों को जंक फूड न खिलाएं. जब भी खिलाएं, तो पैकेट पर लिखी तारीख और उस की क्वालिटी जरूरी पढ़ें.

आप सबकुछ खाएं, पर अच्छी तरह पका कर और अच्छी तरह चबा कर खाएं. हमारी जिंदगी को अच्छी तरह जीने का अधिकार तभी मिलता है, जब हम सेहतमंद रहें.

आप की नजर में पतला दिखना और अच्छी फिटनैस में क्या फर्क है?

दोनों में बहुत फर्क है. कुछ लोगों को वजन से समस्या होती है, पर मैं फिट रहने के लिए कसरत करती हूं. कुछ लोग तरल चीजें लेते हैं, पूरी डाइट नहीं लेते. पता नहीं, वे ऐसा क्यों करते हैं. इस से बाद में समस्याएं आती हैं. अच्छा खाना न खा कर अगर आप मन को मार कर जी रहे हैं, तो आप का दिल कभी सेहतमंद नहीं रह सकता.

आप को लोगों में किस तरह की समस्याएं ज्यादा दिखाई देती हैं?

जंक फूड की समस्या आज ज्यादा है. साथ ही, लोग चबा कर खाना नहीं खाते, जो गलत है.

आप किस दिन अपनी मरजी का खाना खाती हैं?

मैं रविवार को शाकाहारी पकौड़े घर पर बना कर खाती हूं.         

बिना इजाजत डाउनलोड नहीं होगा फेसबुक फोटो

अक्सर सुनने को मिलता है कि फेसबुक या व्हाट्सएप से किसी छात्रा या लड़की की प्रोफाइल फोटो डाउनलोड कर उसे अन्य व्यक्ति ने अपने फेसबुक अकाउंट से पोस्ट किया या फिर उसका गलत इस्तेमाल किया. इस तरह की समस्या बचने के लिए यूजर को अपनी फेसबुक प्रोफाइल पिक्चर की सेटिंग में बदलाव करना होगा. वहीं न्यूज फीड में पसंदीदा आर्टीकल या पोस्ट को भविष्य के लिए सेव भी कर सकते हैं.

ऐसे छिपाएं पिक्चर

प्रोफाइल फोटो के साथ किसी भी पिक्चर को अन्य यूजरों से छिपाया जा सकता है. ऐसा करने के लिए उस फोटो पर क्लिक करें जिस फोटो को छिपाना चाहते हैं. इसके बाद ऊपर की तरफ तारीख के पास पृथ्वी का निशान दिखाई देगा, उस आकृति पर क्लिक करने के बाद चार विकल्प मिलेंगे. इनमें से ऑनली मी नाम के विकल्प का चयन करें, उस फोटो की प्राइवेसी को बढ़ा सकते हैं. फोटो या वीडियो को सभी से छिपाने के लिए Only ME का चुनाव कर सकते हैं. इसके अलावा इसमें दोस्तों और ग्रुप के भी विकल्प हैं.

सेव कर सकते हैं पोस्ट या आर्टिकल

फेसबुक पोस्ट को बाद में पढ़ना चाहते हैं या भविष्य के लिए उस पोस्ट को सेव करना चाहते हैं तो फेसबुक में ऐसी भी सुविधा भी है. जिस पोस्ट को सेव करना चाहते हैं उसमें ऊपर दाईं ओर ‘एरो’ ( नीचे की तरफ बना हुआ) के निशान पर क्लिक करें. इसमें पोस्ट को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने का विकल्प मिलेगा.

ऐसे खोलें सेव पोस्ट को

सेव पोस्ट या आर्टिकल को बाद में खोलकर पढ़ने के लिए अपनी प्रोफाइल के होम पेज पर पर जाएं. बाईं तरफ दिए गए विकल्प में सेव फाइलों का निशान भी मौजूद है. फेवरेट कैटेगरी में यह विकल्प सबसे नीचे होता है, उसपर क्लिक कर सेव फाइलों को दोबारा देख सकते हैं. पढ़ाई संबंधित पोस्ट या आर्टिकल को भी सेव किया जा सकता है.

चैट स्टेट्स भी कर सकते हैं ऑफलाइन

किसी अन्य यूजर के मैसेज से परेशान होकर उस यूजर को चैट बॉक्स में ब्लॉक करना चाहते हैं ताकि वह चैट का ऑनलाइन स्टेट्स न देख पाए, तो चैट बॉक्स की सेटिंग के विकल्प पर क्लिक करके एडवांस सेटिंग में जाएं. यहां ब्लॉक करने का विकल्प मिलेगा.

अनफॉलो करने से नहीं दिखेंगी पोस्ट

फेसबुक पर अगर किसी अन्य यूजर की पोस्ट की वजह से परेशानी होती है तो उसे ‘अन फॉलो’ कर सकते हैं. इसके बाद उस यूजर की पोस्ट या स्टेट्स न्यूजफीड में नहीं दिखाई देंगे और फेसबुक पर दोस्ती भी बनी रहेगी. ‘अनफॉलो’ करने के लिए यूजर की प्रोफाइल को खोलें और उसकी कवर फोटो पर फॉलो का विकल्प दिखेगा. उसे ‘अनफॉलो’ कर दें.

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